samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या में इजाफा, परिसीमन से पहली सीट का नाम सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश के आगामी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि धार जिले से अलग होकर औ‌द्योगिक नगरी पीथमपुर (Pithampur) को स्वतंत्र विधानसभा सीट का दर्जा मिल सकता है। बढ़‌ती आबादी और मतदाताओं की संया को देखते हुए यह फैसला लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान में धार जिले में सात और इंदौर जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। दोनों जिलों की कुल आबादी और मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार में बनेंगी दो नई विधानसभा सीटें राजनीतिक गलियारों में 2028 के विधानसभा चुनाव (mp assembly elections 2028) से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण पर निगाह टिकी हुई है। इससे जहां नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे, वहीं दावेदारों के साथ-साथ विधायकों की संख्या में भी इजाफा होगा। औसतन एक विधानसभा में ढाई से लेकर तीन लाख मतदाता ही रहेंगे और मौजूदा विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अभी धार सहित देश-प्रदेश में विधानसभा-लोकसभा सीटों के क्षेत्रफल और आबादी यानी मतदाताओं में भारी विसंगति है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार में दो नई सीटें बन सकती हैं। इससे जहां मौजूदा विधायकों का गणित बिगड़ेगा, वहीं नए चेहरों को भी मौका मिलेगा। मुस्लिम वोट नहीं होंगे निर्णायक सूत्रों का कहना है कि धार जिले का परिसीमन विशेषज्ञता के साथ किया जाएगा कि किसी भी सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में नहीं रह सके। कांग्रेस-भाजपा के लिए चुनौती पीथमपुर को नई विधानसभा बनने पर दोनों दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कांग्रेस को संगठन खड़ा करने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा को औ‌द्योगिक मजदूरों और ग्रामीण वोट बैंक के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। अनुमान है कि नई सीट में ढाई से तीन लाख मतदाता होंगे, जिनमें मजदूर, कर्मचारी और ग्रामीण समाज की भूमिका निर्णायक रहेगी। 2026 के बाद होगा परिसीमन संविधान संशोधन के तहत 2026 तक लोकसभा और विधानसभा सीटें बढ़ाने पर रोक है। लेकिन जनगणना 2026 के बाद नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा। तब मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटें बढ़कर 280 तक हो सकती हैं, वहीं लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 35 से 40 तक पहुंचने का अनुमान है। पीथमपुर विधानसभा में आएंगे ये क्षेत्र इस समय पीथमपुर धार विधानसभा का हिस्सा है, लेकिन औ‌द्योगिक इकाइयों, मजदूर बस्तियों और ग्रामीण अंचल की वजह से यहां मतदाताओं की संया लगातार बढ़ रही है। प्रस्तावित परिसीमन के बाद प्रीति नगर, अकोलिया, बरदरी, खेड़ा, सागौर कुटी और इंडोरामा सहित आसपास के क्षेत्र नई पीथमपुर विधानसभा में शामिल किए जा सकते हैं। धार का क्षेत्रफल और मतदाता घटेंगे, जबकि पीथमपुर की अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनेगी।

धर्म परिवर्तन विवाद: इंदौर में बहू पर पति को मुस्लिम बनाने का आरोप, परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत

इंदौर  इंदौर जिला न्यायालय ने एक बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मंगलवार को मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विवाह के बाद महिला ने हिंदू पति और ससुराल पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। शादी के कुछ दिनों बाद ही बढ़ने लगे विवाद मरीमाता क्षेत्र की एक युवती का विवाह अप्रैल 2022 में एरोड्रम इलाके के युवक से हुआ था। ससुराल पक्ष के अनुसार, महिला विवाह के बाद केवल 15–20 दिन ही घर पर रही। इस दौरान वह अपने मुस्लिम मित्रों के प्रभाव में आकर मुस्लिम धर्म की इबादत करने लगी। परिवार का आरोप है कि बहू दरगाह जाकर ताबीज, भभूत और फल लाकर जबरदस्ती पति को खिलाने लगी। जब धर्म परिवर्तन के लिए पति ने मना किया तो महिला ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की धमकी दी। पति और सास पर दबाव, 10 लाख की मांग ससुराल वालों ने बताया कि एक दिन बहू ने अपनी अलमारी से सभी जेवर निकाल लिए और कहा कि वह "अल्लाह के सजदे" में जा रही है। उसने पति से भी साथ चलने का दबाव बनाया। 17 मार्च 2024 को महिला अपने मायके वालों और दोस्तों के साथ घर आई और 10 लाख रुपए की मांग की। इसी दौरान उसने पति को धर्म बदलने का दबाव बनाकर धमकाया। ससुराल पक्ष ने पुलिस को बुलाया, लेकिन महिला और उसके साथी मौके से चले गए। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं परिवार ने वर्ष 2024 में ही पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। एरोड्रम थाने में मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी बहू लगातार ससुराल पर दबाव बनाती रही। अदालत ने लिया संज्ञान, बहू को नोटिस थक हारकर परिवार ने एडवोकेट डॉ. रुपाली राठौर और कृष्ण कुमार कुन्हारे के माध्यम से जिला न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। अदालत को दी गई जानकारी में पीड़ित पति और सास ने बहू की धमकियों और जबरदस्ती का पूरा ब्यौरा दिया। महिला एवं बाल विकास अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में भी बहू द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि हुई। इसके आधार पर अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कर बहू को नोटिस जारी किया है। 

CM सुक्खू ने विधायक पत्नी के विधानसभा क्षेत्र को दी राहत और विकास की सौगातें

शिमला  हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर भी विधायक हैं. ऐसे में सीएम सुक्खू की अपनी पत्नी कमलेश ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र पर खास मेहरबानी रहती है. ताजा मामले में अब देहरा में आरटीओ दफ्तर खोलने की नोटिफिकेशन जारी की गई है. दरअसल. इस रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के तहत, ज्वाली, ज्वालामुखी, इंदौरा और फतेहपुर को शामिल किया गया है. पत्नी के विधानसभा क्षेत्र के लिए नई दफ्तर खोलने की घोषणा करना नई बात नहीं है. सीएम सुक्खू ने इससे पहले भी कई ऐलान देहरा के लिए किए है. जानकारी के अनुसार, सुक्खू सरकार में सबसे पहले यहां पर एसपी दफ्तर खोला था और देहरा को 14वां पुलिस जिला बनाया गया. पांच नवंबर 2024 में यह दफ्तर शुरू हुआ था. वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर कार्यालय भी खोला गया है. इसके, अलावा, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर दफ्तर, जल शक्ति विभाग का सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) दफ्तर भी देहरा को सीएम सुक्खू की पत्नी के विधायक बनने के बाद दिया गया. जून में देहरा आए थे सीएम हाल ही में जून महीने में सीएम सुक्खू ने देहरा का दौरा किया था और हरिपुर तहसील के बनखंडी में दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान में 47.62 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल प्रशासन, डायगनोस्टिक ब्लॉक, केन्द्रीकृत रसोईघर व क्वारंटीन केंद्र और 16.25 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ पेयजल योजना की आधारशिला रखी. गौरतलब है कि देहरा में अकेले टूरिज्म सेक्टर पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान सरकार का है. देहरा पर मेहरबानी क्यों गौरतलब है कि देहरा में 2024 में उपचुनाव हुए थे तो इसमें सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर की जीत हुई थी. वहीं, देहरा सीएम सुक्खू का ससुराल भी है. पत्नी के मायके देहरा के लिए सीएम सुक्खू अक्सर घोषणाएं करते रहते हैं. पत्नी के बहाने सीएम को घेरती रहती है भाजपा बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा और साथ ही कहा कि सरकार नई जॉब ट्रेनी पॉलिसी को रद्द करे. भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने तंज कसते हुए कहा महिलाओं को पेंशन का वादा पूरा न करने पर माफी सीएम को माफी मांगनी चाहिए. सत्ती ने कहा कि आपने भाभी जी को तो पेंशन लगा दी, क्या सभी महिलाओं को पेंशन देंगे. इस पर सीएम ने कहा कि पेंशन नहीं अभी सैलरी लगी है और वो भी भाजपा की वजह से लगी है.

मध्यप्रदेश में बारिश का कहर, 23 जिलों में अलर्ट; भोपाल में झमाझम, नर्मदापुरम में तवा डैम के गेट खुले

भोपाल  मध्यप्रदेश के जबलपुर, रतलाम समेत 23 जिलों में बुधवार को भारी बारिश का अलर्ट है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में हल्की बारिश होने के आसार हैं। भोपाल में सुबह से रुक-रुककर पानी गिर रहा है। नर्मदापुरम में तवा डैम के 13 में से 5 गेट 5-5 फीट तक खोले गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून टर्फ, डिप्रेशन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की एक्टिविटी होने से मध्यप्रदेश में अगले चार दिन ऐसा ही मौसम रहेगा। कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होगी। आज नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। तवा डैम ओवरफ्लो, 5 गेट से छोड़ा जा रहा पानी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण तवा डैम का जलस्तर 1164.10 फीट तक पहुंच गया है। डैम के बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने आज बुधवार 20 को सुबह 6:30 बजे से 13 में से 5 गेट को 5-5 फीट तक खोल दिया है। तवा परियोजना संभाग इटारसी के कार्यपालन यंत्री के अनुसार, इन गेटों से लगभग 43,010 क्यूसेक पानी तवा नदी में छोड़ा जा रहा है। यह इस सीजन में दूसरी बार है जब डैम के गेट खोलने पड़े हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया है। तवा बांध के जल संग्रहण क्षेत्र में निरंतर वर्षा जारी है। प्रशासन ने तवा और नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें नदी के किनारे न जाने की चेतावनी भी दी गई है।तवा डैम के एसडीओ एन के सूर्यवंशी ने स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। नर्मदापुरम जिले में बारिश का स्ट्रांग सिस्टम सक्रिय हो गया है। मंगलवार शाम को अच्छी बारिश हुई और बुधवार सुबह से भी लगातार बारिश जारी है। पचमढ़ी और सारणी क्षेत्र में बारिश के कारण तवा डैम का जलस्तर बढ़ रहा है। बुधवार सुबह 6 बजे जलस्तर 1164.10 फीट पहुंचा  मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार और गुरुवार को जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस साल 18 जून को मानसून ने जिले में दस्तक दी थी। जिले का कुल कोटे का 55 प्रतिशत यानी 29 इंच बारिश जुलाई में ही हो चुकी थी। अगस्त माह में अब तक कम बारिश हुई थी। अब तक जिले में औसतन 39 इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग ने बाकी अगस्त में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है, जिससे औसतन बारिश का आंकड़ा बढ़ सकता है। 20 दिन बाद खोले तवा डैम के 5 गेट तवा बांध के जल संग्रहण क्षेत्र में निरंतर बारिश और जल आवक को देखते हुए बुधवार सुबह 6:30 बजे डैम के 5 गेट 5 फीट तक खोले गए। 31 जुलाई को गेट बंद कर दिए गए थे। 20 दिन बाद गेट दोबारा खोले गए हैं। प्रशासन ने लोगों को दी सलाह प्रशासन ने तवा डैम और नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी है। जिले में 38.40 इंच औसत बारिश जिले में 18 जून को मानसून ने दस्तक थी। जून से 19 अगस्त तक जिले में 38.40 इंच औसत बारिश हो चुकी है। जुलाई माह में ही औसतन 29 इंच से ज्यादा बारिश हुई। अगस्त में उम्मीद के मुताबिक अबतक कम बारिश हुई है। मंगलवार को करीब 1 घंटे तक तेज बारिश हुई। शहर में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। जिससे शहर के जय स्तंभ चौक, गांधी प्रतिमा तिराहे के सामने सड़क पर पानी भरा गया।    

ईस्टर्न बॉर्डर पर जनरल लेवल वार्ता, भारत-चीन ने 10 मुद्दों पर पाया समझौता

नई दिल्ली चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत दौरा काफी चर्चा में रहा. वह 18 और 19 अगस्त को भारत में थे. उन्होंने यहां भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तर की 24वें दौर की वार्ता में हिस्सा लिया. इस दौरान सीमा पर तनाव कम करने, शांति बढ़ाने और विवाद को सुलझाने पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई और 10 बिंदुओं पर सहमति बनी. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की. इस दौरान वांग यी ने कजान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद हुई प्रगति की तारीफ की और कहा कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से सीमा क्षेत्र स्थिर रहे हैं.  दोनों पक्षों ने कजान में दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन में हुई प्रगति का मूल्यांकन किया और भी उल्लेख किया कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है. – दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर प्रतिबद्धता जताई. साथ ही चीन-भारत संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक मुद्दों को मैत्रीपूर्ण परामर्श के जरिए हल करने की जरूरत पर जोर दिया.  – भारत और चीन के बीचहुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं दौर की वार्ता में तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों (Traditional Boundary Trade Markets) को फिर से खोलने पर सहमति बनी है. – दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा स्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए और 2005 में दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुरूप सीमा विवाद को हल करने के लिए एक न्यायसंगत, तार्किक और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य फ्रेमवर्क तलाशा जाए. – दोनों पक्षों ने चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के कार्य तंत्र (WMCC) के ढांचे के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने का फैसला किया है, जो उन क्षेत्रों में सीमांकन (Demarcation) की संभावनाओं को तलाशेगा, जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं. – दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि WMCC के तहत एक कार्यसमूह बनाया जाएगा, जो सीमा पर प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण को बढ़ावा देगा, ताकि शांति बनी रहे. – पश्चिमी सीमा पर पहले से चल रही सामान्य स्तर की वार्ता के अलावा, पूर्वी और मध्य सीमा क्षेत्रों में भी ऐसी वार्ता शुरू होगी.प श्चिमी क्षेत्र में जल्द ही नए दौर की वार्ता होगी.  – दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा प्रबंधन और नियंत्रण तंत्र का उपयोग करने पर सहमति जताई.  – दोनों पक्षों ने सीमा-पार नदियों पर सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया और सीमा-पार नदियों के लिए विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र का उपयोग करके बाढ़ की जानकारी साझा करने के समझौता ज्ञापन को नवीनीकरण करने पर संचार बनाए रखने पर सहमति जताई. चीनी पक्ष ने मानवीय सिद्धांतों के आधार पर संबंधित नदियों की आपातकालीन जल संबंधी जानकारी भारतीय पक्ष के साथ साझा करने पर सहमति दी. – दोनों पक्षों ने तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर से खोलने पर सहमति जताई. – दोनों पक्षों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की वार्ता आयोजित करने पर सहमति जताई.

प्रशासन की मुहिम से पर्यावरण बचा, गणेश प्रतिमाओं में 50% कमी

खंडवा पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से इस साल जिला प्रशासन ने प्लॉस्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं को प्रतिबंधित करते हुए मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया है। प्रशासन की इस पहल से करीब 50 प्रतिशत पीओपी की प्रतिमाएं इस साल कम हो गई है। स्व सहायता समूह के माध्यम से मिट्टी की प्रतिमाएं भी प्रशासन ने तैयार कराई है। वहीं, कुछ मूर्तिकार परिवारों ने भी मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता की पहल पर नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर में करीब 38 हजार पीओपी की प्रतिमाओं का निर्माण रुकवाया गया है। हालांकि जो मूर्तिकार पहले से प्रतिमा बना चुके थे, उन्हें इस साल बिक्री के लिए छूट देने पर विचार चल रहा है। वहीं, ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व सहायता समूहों के माध्यम से प्रशासन ने करीब 20 हजार मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार कराई है। ये प्रतिमाएं मिट्टी, गाय के गोबर से बनी और प्राकृतिक रंगों से सजाई गई है। इसमें गांधवा, छौगांवदेवी, जावर की महिला स्व सहायता समूह ने करीब 11 हजार मिट्टी की प्रमिताएं तैयार कर ली है। इन प्रतिमाओं की बिक्री कलेक्ट्रेट परिसर आउटलेट सहित नगर निगम चौराहा पर स्टॉल लगाकर की जाएगी। साथ ही शासकीय राशन दुकानों पर भी इसे बिक्री के लिए रखा जाएगा। होम डिलेवरी की भी दे रहे सुविधा कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ग्रामीण आजीविका मिशन के आउटलेट से जिलेभर में ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से होम डिलेवरी की सुविधा भी दी जा रही है। आजीविका मिशन के जिला समन्वयक आनंद शर्मा ने बताया कि इसके लिए मोबाइल नंबर जारी किए गए है। इन नंबर पर कॉल कर वॉटसएप पर प्रतिमाओं की तस्वीर बुलाकर देख सकते है। पसंद आने पर उसे ऑर्डर करने के बाद जिलेभर में कहीं भी उसकी डिलेवरी ले सकते है। प्रतिमा को अनब्रेकेबल पैकिंग में पैक कर दिया जाएगा, जिससे टूट-फूट की दिक्कत नहीं होगी। आस्था, पर्यावरण सुरक्षा के साथ रोजगार मिट्टी की प्रतिमाओं के निर्माण से जहां आस्था को बल मिल रहा है, वहीं पर्यावरण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। जिला प्रशासन की अपील है कि सभी लोग मिट्टी की प्रतिमाओं को खरीदकर स्थापना करें।- ऋषव गुप्ता, कलेक्टर  

रायपुर: छीरपानी जलाशय योजना से बैगा बाहुल्य गांवों में पेयजल संकट होगा खत्म

रायपुर : बैगा बाहुल्य ग्रामों के पेयजल संकट को दूर करेगी छीरपानी जलाशय आधारित योजना रायपुर: छीरपानी जलाशय योजना से बैगा बाहुल्य गांवों में पेयजल संकट होगा खत्म मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल तेज, कलेक्टर ने विभागों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश रायपुर, प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा को मूर्त रूप देने और विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्रामों में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या को सुलझाने के लिए कबीरधाम जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने छीरपानी मध्यम जलाशय पर आधारित नई जल प्रदाय योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना से दलदली ग्राम सहित 20 से 30 गांवों और बैगा बसाहटों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर वर्मा ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) को निर्देशित किया कि वे तत्काल स्थल निरीक्षण करें और विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यह देखा जाए कि कौन-कौन से गांव योजना से जुड़ेंगे और उनकी पेयजल आपूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी। बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छीरपानी मध्यम जलाशय में हर साल पर्याप्त जल भराव होता है और इसकी जल आवक भी पर्याप्त है, सिंचाई कार्य के बाद भी पेयजल के लिए आपूति की जा सकती है। यही कारण है कि यहां से दीर्घकालीन पेयजल आपूर्ति संभव है। कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग को भी तकनीकी परीक्षण और व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। दलदली प्रवास से शुरू हुई पहल, मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीन से चार माह पहले सुशासन तिहार के अंतर्गत कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के अंतिम ग्राम दलदली का दौरा किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें प्रमुखता से पेयजल संकट की समस्या से अवगत कराया। मुख्यमंत्री साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थानीय कनाई नाला से जल प्रदाय योजना की घोषणा की थी। हालाँकि, जिला प्रशासन और विभागीय टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि कनाई नाला में केवल बरसात के मौसम में ही पानी रहता है। ग्रीष्मकाल में जल प्रवाह लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे नियमित और टिकाऊ पेयजल आपूर्ति संभव नहीं है। यही कारण रहा कि कलेक्टर वर्मा ने मुख्यमंत्री की घोषणा को व्यवहारिक रूप देने और स्थायी समाधान के लिए छीरपानी जलाशय पर आधारित नई योजना बनाने का निर्णय लिया। 65 ग्रामों के लिए 118.06 करोड़ की योजना प्रस्तावित बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि उपमुख्यंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासो से राज्य शासन को कुसुमघटा, बैजलपुर और राजा नवागांव सहित बोड़ला विकासखंड के 65 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति के लिए 118.06 करोड़ रुपए की जल प्रदाय योजना प्रस्तावित की गई है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव वर्तमान में स्वीकृति की अंतिम चरणों में है। इस योजना के लागू होने पर पूरे क्षेत्र के दर्जनों गांवों को राहत मिलेगी। कलेक्टर ने अन्य विकास योजनाओं की भी समीक्षा बैठक में कलेक्टर वर्मा ने पेयजल योजनाओं के साथ-साथ जिले की अन्य प्रमुख योजनाओं की भी समीक्षा की। इनमें प्रमुख रूप से महतारी सदन योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और नगर पंचायतों के अधोसंरचना मद से स्वीकृत निर्माण कार्य शामिल थे। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर प्रारंभ और अप्रारंभ कार्यों की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरे करें। इसके साथ ही कलेक्टर ने राज्य शासन के निर्देश पर 15 अगस्त 2025 से 31 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाले रजत जयंती वर्ष कार्यक्रमों की रूपरेखा का गहन मूल्यांकन किया और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अजय त्रिपाठी, अपर कलेक्टर नरेन्द्र पैकरा, डिप्टी कलेक्टर सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे।

96 घंटे में तैयार होगा स्ट्रांग सिस्टम, IMD ने 14 जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी

भोपाल मध्य प्रदेश में नए सिस्टम एक्टिव होने से एक बार फिर बारिश का दौर जारी है। राजधानी भोपाल में रुक-रुककर तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, उज्जैन, दमोह, सिवनी, मंडला ,खरगोन, पचमढ़ी ,बैतूल, गुना, ग्वालियर समेत कई जिलों में भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 14 जिलों में अतिभारी से भारी बारिश का अनुमान जताया है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पांढुर्णा जिलों में अतिभारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, डिंडौरी, नरसिंहपुर जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया गया है। कैसा रहेगा मौसम का हाल मौसम विभाग के मुताबिक, वर्तमान में मध्य प्रदेश में कोई भी सिस्टम एक्टिव नहीं है। प्रदेश से सटे दूसरे राज्यों में कई सिस्टम एक्टिव हैं। जिसके कारण हल्की से भारी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। IMD ने अनुमान जताया है कि 23 से 25 अगस्त तक अतिभारी बारिश होने की संभावना है। यानी देखा जाए तो 96 घंटे यानी तीन बाद स्ट्रांग सिस्टम की एक्टिविटी प्रदेश में देखने को मिल सकती है। अगस्त महीने के आखिरी में पूरा प्रदेश भीगने की संभावना है। इंदौर, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में कम बारिश हुई है। आने वाले 21 अगस्त से स्ट्रांग सिस्टम बनेगा। जिसके बाद 23 अगस्त से 25 अगस्त तक पूरा प्रदेश भारी बारिश की चपेट में होगा। सोमवार को 22 जिलों में हुई थी बारिश सोमवार को भोपाल, उज्जैन, दमोह, बड़वानी, धार, बैतूल, गुना, नर्मदापुरम, शाजापुर, रतलाम, खरगोन, रायसेन, सतना, उमरिया, देवास, सीहोर, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, राजगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश हुई। 

नई कानून पहल: 30 दिन से अधिक जेल में रहने वाले नेता खो सकते हैं अपनी कुर्सी

नई दिल्ली केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश करेगी, जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके. दरअसल, मौजूदा वक्त में ऐसा किसी भी कानून में प्रावधान नहीं है कि गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत की स्थिति में नेताओं को उनके पद से हटाया जा सके. इन्हीं खामियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने तीन विधेयक तैयार किए हैं जो गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं पर नकेल कसेंगे. केंद्र सरकार बुधवार को जो विधेयक पेश करेगी, उनमें संघ राज्य क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल है. बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव भी पेश करेंगे. क्या है केंद्र शासित संशोधन विधेयक? केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 (1963 का 20 ) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इस कानून की धारा 45 में संशोधन कर ऐसी स्थिति के लिए कानूनी प्रावधान करना जरूरी है. ये विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है. संविधान का 130वां संशोधन संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन कर प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री और राज्यों व दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का प्रावधान करने की ज़रूरत है. वहीं, नए प्रावधानों के तहत यदि कोई मंत्री, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यों को मंत्री शामिल हैं को पांच साल या उससे अधिक की अवधि की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है तो उसे पद से हटाया जा सकता है. J&K पुनर्गठन अधिनियम में जोड़ा जाएगा खंड जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इसकी धारा 54 में संशोधन कर नया खंड (4A) जोड़ा जाएगा. 31वें दिन स्वत: हो जाएगा पदमुक्त इस खंड के अनुसार, यदि कोई मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है तो उसे 31 वें दिन मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल द्वारा हटा दिया जाएगा. इसी क्रम में अगर मुख्यमंत्री द्वारा इस पर संज्ञान नहीं लिया जाता है तो अगले दिन वह मंत्री स्वत: पद से हट जाएगा. इसी तरह का तंत्र केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए भी प्रस्तावित है, जहां हिरासत में लिए गए मंत्री या प्रधानमंत्री को लगातार 30 दिनों की हिरासत के 31वें दिन हटा दिया जाएगा. प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास पर जोर विधेयक के उद्देश्य और कारणों के विवरण में संवैधानिक नैतिकता की रक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास को बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि निर्वाचित नेता लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं, लेकिन वर्तमान में संविधान में किसी ऐसे प्रधानमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है जो गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में हो. विवरण में ये भी कहा गया है कि ये अपेक्षा की जाती है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह से परे हो.गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे, गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मंत्री संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों को बाधित या अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे जनता द्वारा उनमें रखा गया संवैधानिक विश्वास कमजोर हो सकता है.

ट्रेन इमरजेंसी कोटे में गिरावट, वंदे भारत और शताब्दी के मुकाबले इन 3 ट्रेनों में ज्यादा

ग्वालियर हाई स्पीड वंदे भारत, शताब्दी, राजधानी जैसी ट्रेनें ग्वालियर से निकलती हैं लेकिन इन ट्रेनों से ज्यादा इमरजेंसी कोटे की डिमांड बरौनी मेल, बुंदेलखंड एक्सप्रेस और रतलाम इंटरसिटी में रहती है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब इसमें सीट पाने के लिए आवेदन नहीं किया जाता हो। हालात यह है कि ग्वालियर से चलने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग होने के बाद इमरजेंसी कोटे का सहारा लेना पड़ रहा है। झांसी मण्डल से गुजरने वाली 143 ट्रेन में इमरजेंसी कोटा प्रदान किया गया है। इस कोटे की बर्थ सांसद, विधायक, रेल अधिकारियों व अन्य वीआईपी को उपलब्ध कराई जाती है। अधिकांश ट्रेनों में स्लीपर और एसी का अलग- अलग इमरजेंसी कोटा फिक्स है। उसी के आधार पर रेलवे यह कोटा देती है। ग्वालियर से चलने वाली बरौनी, बुंदेलखंड और रतलाम इंटरसिटी में अधिक भीड़ होने की वजह से इमरजेंसी कोटे की डिमांड भी ज्यादा आती है। हालात यह हो जाते हैं कि कभी- कभी सीट से ज्यादा कोटे आ जाते हैं। वहीं वंदे भारत, शताब्दी आदि ट्रेनों में यात्रियों के कोटे इतने नहीं आते हैं।- अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम झांसी ग्वालियर से बरौनी जाने वाली बरौनी मेल, रतलाम जाने वाली रतलाम इंटरसिटी और बनारस के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस एक मात्र सीधी ट्रेनें हैं। इसमें से बरौनी मेल बिहार से होकर हावड़ा तक पहुंचती है। इसमें सबसे ज्यादा भीड़ छठ पूजा के दौरान होती है लेकिन दीपावली से काफी पहले ही यह ट्रेन फुल हो जाती है। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में स्पेशल ट्रेन को भी चलाया जाता है। उसके बावजूद भी यात्रियों को जगह नहीं मिल पाती है। वंदे भारत, शताब्दी में आसानी से मिलती है सीट ग्वालियर से निकलने वाली वंदे भारत, शताब्दी और अन्य ट्रेनों में यात्री को आसानी से टिकट मिल जाता है। इन ट्रेनों में अगर वेटिंग भी होती है तो अक्सर वह वेटिंग भी कंफर्म हो जाती है। लेकिन ग्वालियर से चलते वाली ट्रेनों में काफी बुरा हाल है।