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इमरान खान को मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत, क्या जल्द होंगे जेल से रिहा?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए अच्छी खबर है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। 2023 में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से जुड़े कई मामलों में उन्हें राहत मिली है। अदालत के रिकॉर्ड और उनके वकील ने यह जानकारी साझा की। मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने लाहौर हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें खान की 8 मामलों में जमानत याचिका खारिज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की रिहाई की शर्त सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की रिहाई का आदेश दिया, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि इमरान खान अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के एक मामले में पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, वे इन सभी मामलों को झूठा और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताते हैं। किस मामले में मिली जमानत? मई 2023 में इमरान खान को एक भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिनमें रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय भी शामिल था। इस हिंसा के बाद इमरान खान और उनकी पार्टी ( पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ) के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को भी हाल ही में ऐसे ही मामलों में दोषी ठहराया गया है। क्या जेल से बाहर आ पाएंगे इमरान खान? सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद इमरान खान की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें अन्य मामलों में अभी जेल में रहना होगा। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में इसे 'इमरान खान की जीत' करार दिया।  

कांग्रेस के कई युवा नेता प्रतिभाशाली, पीएम मोदी ने एनडीए नेताओं पर भी किया कमेंट

नई दिल्ली  पीएम मोदी ने चाय मीटिंग में एनडीए नेताओं के सामने कांग्रेस के कई युवा नेताओं की तारीफ की और कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस में कई युवा नेता काफी टैलेंटेड हैं, लेकिन ‘परिवार की असुरक्षा’ की वजह से उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस तरह के युवा नेताओं की मौजूदगी राहुल गांधी गांधी को असुरक्षित और घबराहट महसूस करवा रही होगी। इस बैठक में विपक्ष का कोई भी सांसद शामिल नहीं हुआ और सिर्फ एनडीए के ही सदस्य मौजूद थे। पीएम मोदी ने आज खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र को भी अच्छा बताया और कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण बिल पास हुए। खासतौर पर उन्होंने ऑनलाइन गेम्स बिल के पास होने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसके पास होने से दूरगामी असर पड़ेगा और यह सीधे जनता को प्रभावित करेगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पीएम मोदी ने प्रमुख बिलों पर चर्चा से दूर रहने के लिए विपक्ष की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सिर्फ व्यवधान पैदा करने में ही लगा रहा। बता दें कि 20 अगस्त को संसद में प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पास हो गया, जिसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों और उनके प्रमोटर्स के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि मॉनसून सत्र में 14 विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित किए गए। बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले गुरुवार को अपने वक्तव्य में कहा कि इस सत्र में 14 सरकारी विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित हुए। गत 28 और 29 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर के साथ हुआ। 18 अगस्त को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर विशेष चर्चा आरंभ की गई। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कार्यसूची में 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, किंतु लगातार नियोजित व्यवधान के कारण केवल 55 प्रश्न ही मौखिक उत्तर हेतु लिए जा सके। उन्होंने कहा, ''हम सभी ने सत्र के प्रारंभ में तय किया था कि हम इस सत्र में 120 घंटे चर्चा और संवाद करेंगे। कार्य मंत्रणा समिति में भी इस पर सहमति थी लेकिन लगातार गतिरोध और नियोजित व्यवधान के कारण हम मुश्किल से 37 घंटे ही इस सत्र में काम कर पाए।''  

देश की प्रगति पर रोक, शिवपाल यादव ने भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया

इटावा समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि केन्द्र की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार देश का न सिर्फ बंटाधार करने में लगी है, बल्कि देश को विकास के मामले में काफी पीछे धकेल दिया गया है। शिवपाल ने कहा कि प्रजातंत्र का गला घोटने वाले बिलों का सपा हर हाल में विरोध करेगी, ऐसे बिल लाने वालों का विरोध ही किया जायेगा।  'शिक्षा स्वास्थ्य सिंचाई का बहुत बुरा हाल है' शिवपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है जो वादे सरकार ने किए थे वह आज तक पूरे नहीं हुए हैं। शिक्षा स्वास्थ्य सिंचाई का बहुत बुरा हाल है। महंगाई चरम पर पहुंच गई है। रिश्वत वसूली और भ्रष्टाचार इन दिनों चरम पर है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार में रिश्वत महंगाई और भ्रष्टाचार बहुत बढा है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इन्होंने किसानों की आज दोगुनी करने का वादा किया था और एमएसपी भी लेकर आए थे। बेरोजगारों को दो करोड़ नौकरी देने के लिए कहा था वह भी नहीं दे पाये। इस देश को इन लोगों ने बहुत पीछे कर दिया है और इस देश को केवल दो गुजराती व दो पैसे वाले लोग चला रहे हैं।        'गोला बारूद रखना और फेंकने का काम सपा का नहीं' शिवपाल यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार में केवल पूंजीपतियों के काम हो रहे हैं। गरीब, छात्र, बेरोजगार नौजवान इन लोगों के काम नहीं हो रहे है। ओमप्रकाश राजभर द्वारा सपा पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि सपा के लोग गोरा बारूद रखने व सिखाने का काम करती है , इस पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि क्या कभी समाजवादी पार्टी के नेताओं के पास गोला बारूद पकड़ा गया या कभी किसी ने फेंकते हुए देखा है। गोला बारूद रखना और फेंकने का काम समाजवादी पार्टी नहीं करती।    

NIA की बड़ी कार्रवाई, रामलिंगम हत्याकांड में PFI से संबंध रखने वाला आरोपी गिरफ्तार

तमिलनाडु राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2019 में हुए रामलिंगम हत्या कांड मामले में तमिलनाडु में नौ जगहों पर छापेमारी की है। डिंडीगुल और तेनकासी जिलों की इन जगहों पर एनआईए की छापेमारी का मकसद फरार अपराधियों का पता लगाना था। इसी सिलसिले में एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आतंकी संगठन के एक सदस्य को भी गिरफ्तार किया है। बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में सबसे पहले एसडीपीआई पदाधिकारी शेख अब्दुल्ला के बेगमपुर स्थित आवास, एक और सदस्य यूसुफ के ओड्डंचत्रम स्थित घर और अमर के बटलागुंडु के ठिकाने पर छापे मारे गए इसी तरह तेनकासी में भी छापेमारी की गई। एजेंसी ने कोडईकनाल स्थित अंबुर बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह को 2021 में फरार अपराधियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। डिंडीगुल और तेनकासी में हुई छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह ने तीन आरोपियों को पनाह दी थी। इनमें से दो आरोपी अब्दुल मजीद और शाहुल हमीद को एजेंसी ने जनवरी 2025 में ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक अन्य अपराधी मोहम्मद अली जिन्ना अभी भी फरार है। एजेंसी ने जिन्ना और दो अन्य फरार पीओ बुरहानुद्दीन और नफील हसन के बारे में जानकारी देने पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। ये सभी तंजावुर जिले के हैं और पूर्व में पीएफआई के पदाधिकारी थे। आपको बता दें कुंभकोणम निवासी पीएमके के पूर्व पदाधिकारी रामलिंगम (48) की हत्या 2019 में तंजावुर इलाके में कर दी गई थी। कथित तौर रामलिंगम ने मुस्लिम संगठनों के धार्मिक प्रचार का विरोध किया था। इसी के चलते एक गिरोह ने इनकी हत्या कर दी थी। अगस्त 2019 में एनआईए ने यह मामला तमिलनाडु पुलिस से अपने पास ले लिया। एजेंसी ने 2019 में चेन्नई की पूनमल्ली स्थित अपनी विशेष अदालत में कुल 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनमें से कुल 6 फरार बताए गए थे। इस मामले में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

पुजारा की वापसी का मौका, रणजी ट्रॉफी में दिखाई देंगे दमदार खेल

नई दिल्ली राहुल द्रविड़ के बाद भारत की टेस्ट टीम की दीवार रहे चेतेश्वर पुजारा अभी के लिए भारतीय टीम से बाहर हैं, लेकिन उनकी निगाहें एक बार फिर से टेस्ट कमबैक करने पर हैं। यही कारण है कि चेतेश्वर पुजारा ने खुद को रणजी ट्रॉफी के आने वाले सीजन के लिए खुद को उपलब्ध कराया है। वे आखिरी जोर टेस्ट कमबैक के लिए लगाने वाले हैं। वहीं, उनके साथ लंबे समय तक खेलने वाले अजिंक्य रहाणे मुंबई के लिए आगामी रणजी सीजन में खेलने के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन सीजन से ठीक पहले उन्होंने मुंबई की टीम की कप्तानी छोड़ दी है। सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन यानी एससीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुजारा की उपलब्धता की पुष्टि की। सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के एक अधिकारी ने क्रिकबज को बताया, “उन्होंने आगामी रणजी सीजन में खेलने के लिए अपनी तत्परता का संकेत दिया है। यह निश्चित रूप से हमारे लिए अच्छी खबर है, क्योंकि उनका अनुभव टीम के लिए बहुत फायदेमंद होगा।” भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेल चुके दिग्गज चेतेश्वर पुजारा 37 साल के हो चुके हैं। अभी भारतीय टेस्ट टीम के आसपास नहीं है, लेकिन उनकी चाहत यही होगी कि वे एक बार फिर से टेस्ट कमबैक कर पाएं। हालांकि, वे घरेलू क्रिकेट में केवल बहु-दिवसीय मैचों में ही खेलते हैं। पुजारा ने पिछले सीजन में सात मैचों में 40.2 की औसत से 402 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था, जिसमें सौराष्ट्र की टीम को क्वार्टर फाइनल में गुजरात से हार मिली थी। वह जून 2023 में द ओवल में हुए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के बाद से भारतीय टेस्ट टीम से बाहर हैं, जो राष्ट्रीय टीम के लिए उनका आखिरी मैच था। हाल ही में, वेस्ट जोन के चयनकर्ताओं ने पुजारा को दलीप ट्रॉफी से बाहर रखा था, क्योंकि उनका कहना था कि वे युवाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने वेस्ट जोन के सिलेक्टर्स ने क्रिकबज के एक प्रश्न का उत्तर नहीं दिया, लेकिन एससीए के एक अधिकारी ने कहा कि सौराष्ट्र को उनके अनुभव से लाभ मिलने की उम्मीद है। रणजी ट्रॉफी 15 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जिसमें सौराष्ट्र का पहला मैच कर्नाटक से होगा।  

मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 5 दिनों में पंजाब में भारी हालात की संभावना

चंडीगढ़ पंजाब में अगले 5 दिनों के मौसम को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की गई है। वहीं, पहले से ही बाढ़ की मार झेल रहे राज्य के कई गांवों के लिए पंजाब सरकार ने भी बड़ा ऐलान किया है और सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मौसम विभाग के मुताबिक, 22 तारीख़ को राज्य में भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और एस.ए.एस. नगर में इस दिन भारी बारिश के साथ-साथ गरज और बिजली गिरने का अलर्ट जारी हुआ है। इसके साथ ही 23, 24, 25 और 26 तारीख़ के लिए भी राज्य में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है क्योंकि पहले से ही सतलुज और ब्यास नदियों के पानी ने कई जिलों में कहर मचाया हुआ है और दर्जनों गांव पानी में डूबे हुए हैं। पंजाब सरकार अलर्ट पर मुख्यमंत्री पंजाब भगवंत सिंह मान की ओर से नदियों में बढ़ते पानी के स्तर के कारण प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। पंजाब सरकार ने लोगों की फसलों और अन्य नुकसान की पूरी भरपाई का ऐलान किया है। फसलों के मुआवज़े के लिए सुल्तानपुर और भुलथ तहसील में विशेष गिरदावरी करने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल पंजाब सरकार पूरी तरह अलर्ट है और डैमों व नदियों की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।

रेखा गुप्ता हमले का आरोपी बोला – बंदरों के लिए अयोध्या में किया था अनशन

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बुधवार को उनके सिविल लाइंस स्थित आवास में जनसुनवाई के दौरान एक सनसनीखेज हमला हुआ। हमलावर की पहचान गुजरात के राजकोट निवासी 41 वर्षीय राजेश भाई खिमजी भाई सकरिया के रूप में हुई। राजेश फरियादी बनकर सीएम हाउस पहुंचा और उसने न केवल मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने की कोशिश की, बल्कि उनके बाल खींचकर उन्हें धक्का भी दिया। पुलिस पूछताछ में पता चला कि यह शख्स पहले अयोध्या में बंदरों की सुरक्षा के लिए अनशन कर चुका है। हमलावर का अजीबोगरीब इतिहास आरोपी राजेश ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। राजेश की मां और पड़ोसी ने बताया कि वह जानवरों से प्रेम करता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राजेश ने साल अयोध्या में बंदरों के लिए अनशन किया था। पिछले साल अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद वहां प्रशासन ने मंदिर परिसर से बंदरों को हटाने का अभियान शुरू किया था। यह सुनकर राजेश राजकोट से अयोध्या पहुंच गया। इसके अलावा आरोपी राजकोट में भी जानवरों के हितों के लिए प्रदर्शन कर चुका है। उसके पड़ोसी ने बताया कि वह गाय को रोटी खिलाता है और आवारा कुत्तों की देखभाल करता है। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आवारा कुत्तों को पकड़ने के आदेश से वह खासा नाराज था और इसलिए उसने सीएम पर हमला करने की योजना बनाई। जनसुनवाई में अचानक हंगामा हर बुधवार की तरह, सुबह करीब 8:15 बजे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने सिविल लाइंस कार्यालय में जनता की समस्याएं सुन रही थीं। लोग अपनी शिकायतों के साथ कतार में थे। तभी राजेश अपनी बारी आने पर आगे बढ़ा। उसने पहले कुछ कागजात हवा में लहराए, चिल्लाया और फिर अचानक मुख्यमंत्री पर हमला कर दिया। उसने रेखा गुप्ता को थप्पड़ मारा, उनके बाल खींचे और उन्हें धक्का देकर गिराने की कोशिश की। सुनियोजित साजिश या पशु प्रेम की सनक? मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस हमले को हत्या की सुनियोजित साजिश करार दिया है। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि राजेश ने हमले से पहले कम से कम 24 घंटे तक रेखा गुप्ता के शालीमार बाग स्थित निजी आवास और सिविल लाइंस कार्यालय की रेकी की थी।  

महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, राज ठाकरे और फडणवीस की मीटिंग पर अजित पवार का बयान चर्चा में

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच गुरुवार हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में संवाद बनाए रखना एक परंपरा रही है। इससे एक दिन पहले ही मनसे और शिवसेना (UBT) को BEST चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वर्धा में पत्रकारों से बातचीत में पवार ने कहा, 'कई नेता एक-दूसरे से और मुख्यमंत्री से मिलते हैं, चाहे वे नेता सत्ता में हों या नहीं। एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखना राज्य की परंपरा है। इस मुलाकात को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है।' इससे पहले राज ठाकरे ने फडणवीस से दक्षिण मुंबई में स्थित उनके आधिकारिक बंगले 'वर्षा' में मुलाकात की थी, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई थीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल 21 में से एक भी पद नहीं जीत पाया। फडणवीस ने दोनों पार्टियों पर ‘‘ठाकरे ब्रांड’’ के नाम पर क्रेडिट सोसायटी चुनाव का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। राज ठाकरे क्या बोले मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे ने कहा, 'महाराष्ट्र के शहरों में पुनर्विकास हो रहा है। जनसंख्या बढ़ रही है…, यातायात बढ़ रहा है… और यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। मुंबई में ट्रैफिक बड़ी समस्या है। लोगों को ट्रैफिक के नियम नहीं पता। वो कहीं भी गाड़ियां पार्क कर देते हैं और चले जाते हैं।' उन्होंने कहा, 'आज मैंने मुख्यमंत्री के साथ-साथ मुंबई पुलिस से चर्चा की।'  

PM-CM अयोग्यता बिल: दो बाधाओं पर NDA की जीत, अब तीसरी चुनौती करेगी मुश्किल

नई दिल्ली लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री की गंभीर अपराध में गिरफ्तारी और 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखे जाने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक तथा दो अन्य विधेयकों को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। ऐसी चर्चा है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले JPC इस बिल पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप देगी। उसके बाद इस बिल को पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पारित कराने की प्रक्रिया में तीन बड़ी अचड़नें हैं। नियमानुसार इसे संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत के साथ पारित कराया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में दो स्तरों पर बहुमत चाहिए। पहला, कुल सदस्यों का बहुमत और दूसरा, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। तीसरी अड़चन आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं से भी इस बिल को पारित कराना होगा। संसद में दोनों सदनों में NDA की ताकत क्या? अब बात संसद में एनडीए के संख्या बल की और इस संशोधन विधेयक को पारित कराने में आने वाली अड़चन की। चूंकि, संसद में दो स्तर पर बहुमत चाहिए जिसमें पहला सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक मत जरूरी है, तो इस अड़चन को सरकार आसानी से पार कर लेगी क्योंकि लोकसभा में 542 सदस्य हैं। ऐसे में 50 फीसदी मत यानी बिल के पक्ष में 272 सांसदों का वोट चाहिए, जबकि मौजूदा समय में उसके पास लोकसभा में 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में अभी कुल सदस्यों की संख्या 239 है। साधारण बहुमत के लिए 120 सांसदों के मत की जरूरत होगी, जो आसानी से पूरी हो जाएगी क्योंकि राज्यसभा में NDA के अभी 132 सांसद हैं। दो तिहाई बहुमत में बड़ी अड़चन अब बात दो तिहाई बहुमत की, जो दूसरी और सबसे अहम अड़चन है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 160 है। चूंकि लोकसभा में NDA के सांसदों की संख्या सिर्फ 293 है और राज्यसभा में सिर्फ 132 है तो इस मामले में दोनों ही सदनों में यह बिल अटक सकता है। यानी लोकसभा में कुल 69 सांसद और राज्यसभा में कुल 28 सांसदों के समर्थन की दरकार सरकार को होगी। बिना विपक्षी समर्थन के ⅔ बहुमत मिलना मुश्किल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के पास संसद के दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं है। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन इस बिल का काला कानून बताकर इसका जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार दोनों ही सदनों में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, जगनमोहन रेड्डी की YRCPC और निर्दलियों का भी समर्थन हासिल कर लेती है, तब भी दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाएगी। ऐसे में इस बिल का संसद से पारित होना नामुमकिन लगता है। विधानसभाओं से भी पारित होना चाहिए बिल इस बिल को पारित कराने की तीसरी बड़ी जरूरत आधे से अधिक राज्य विधानसभाओं से पारित कराना है। चूंकि भारत राज्यों का संघ है, इसलिए ऐसे संविधान संशोधन बिल का 50 परसेंट राज्यों की असेंबली से पास होना जरूरी है। इस मामले में एनडीए को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आधे से ज्यादा राज्यों में एनडीए की सरकार है। ऐसे में और क्या संभावना? एक संभावना यह भी बन रही है कि अगर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होता है और उसके सुझावों को सरकार मान लेती है, जिसमें यह कहा जा सकता है कि न्यायिक हिरासत की बजाय सजा होने पर ही इस्तीफे को अनिवार्य बनाया जाए, तब संभावना बन सकती है कि विपक्षी दल उसका समर्थन करें। अन्यथा इस संशोधन बिल के पारित होने की संभावना कम ही है। बता दें कि अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी संसद या विधानसभा सदस्य की सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है और उसे पद से इस्तीफा देना पड़ता है।  

उज्जैन महाकाल मंदिर में शिव का मुखौटा गिरा, ज्योतिषाचार्य बोले- अप्राकृतिक घटना

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दो दिन पहले 18 अगस्त सोमवार को एक अनोखी घटना घटित हुई । यहां रोजाना की तरह रात्रि 8:00 बजे शिवलिंग पर श्रृंगार किया जा रहा था। शिवलिंग पर भांग से भगवान शिव का मुखौटा बनाया गया । इस दौरान बड़ी मात्रा में भांग लगाई गई। इसके तत्काल बाद आरती शुरू ही होने ही वाली थी कि भांग का श्रृंगार टूटकर नीचे गिर गया। यहां शिव के मुखौटे से नाक, होंठ और एक आंख टूट कर नीचे गिर गई। कुछ ही क्षण में मंदिर के गर्भगृह में मौजूद पंडे पुजारी ने तत्काल फिर से मुखौटा बनाया और आरती की। यह पूरी घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी में कैद हुई जो कि वायरल हो गई। खड़े हो रहे हैं सवाल इस घटना के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और मंदिर के पंडे पुजारियों पर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को लेकर ज्योतिष आचार्य और धर्म के ज्ञाता भी अपना अलग-अलग मत दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश नियमों की बात करें तो वर्ष 2020 में महाकाल शिवलिंग क्षरण रोकने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर समिति को निर्देश दिए थे कि शिवलिंग पर तय मात्रा में पंचामृत चढ़ाया जाए। इसके अलावा भांग और अन्य सामग्रियों के लिए भी निर्देशित किया था । बावजूद इसके वर्तमान समय में निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। शिवलिंग पर तय मात्रा से अधिक भांग लगाई जा रही है। यही कारण है कि मुखौटा टूटकर गिर गया। अप्राकृतिक घटना के संकेत इस घटना को लेकर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अमर त्रिवेदी का कहना है कि यह एक अप्राकृतिक घटना का संकेत है। इस घटना के पीछे दो अलग-अलग मत है। देवता जिस भी सामग्री को पसंद करते हैं, उसे वह स्वीकार करते हैं और यदि किसी सामग्री में त्रुटि या श्रद्धा ना हो या अच्छी मानसिकता से ना बनाई गई हो या उसमें धर्म का प्रभाव ना हो तो वे सामग्री को त्याग देते हैं। ये हैं वैज्ञानिक कारण ज्योतिषाचार्य के अनुसार वैज्ञानिकता की बात करें तो पत्थरों की अपनी आद्रता होती है। पत्थरों में आंतरिक आद्रता और आंतरिक उष्णता रहती है। जब बाहरी आद्रता व उष्णता वाली भांग पत्थर पर लगाई जाती है तो कभी-कभी उसके गिरने की संभावना बनती है। यहां एक प्रकार से ऋतु परिवर्तन के संकेत भी हैं। भविष्य में बाढ़ और जल की स्थिति दिखेगी। आप्राकृतिक घटना के भी संकेत हैं। शिवलिंग के श्रृंगार का जिक्र नहीं धर्म के ज्ञाता, महर्षि पाणिनि वेद विद्या संस्थान के पूर्व कुलपति और पूर्व संभागायुक्त डॉ मोहन गुप्त ने इस घटना को लेकर कहा कि हिंदू धर्म में शिवलिंग पर भांग के श्रृंगार का किसी भी शास्त्र में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। शुरू से इस बात का विरोध हुआ है। महाकाल के शिवलिंग पर भांग का श्रृंगार नहीं किया जाना चाहिए। शिव पुराण और लिंग पुराण में भी कहीं उल्लेख नहीं है। ऐसी कोई भी परंपरा नहीं रही है। भांग के श्रृंगार से शिवलिंग का क्षरण होता है । कई घंटे तक भांग का शिवलिंग पर लगे रहना क्षरण पैदा करता है। पंडित-पुजारी नहीं मान रहे बात शास्त्र का आधार पंडित पुजारी नहीं मान रहे हैं । अब श्रृंगार अपने आप गिर गया है। यह संकेत है कि खुद महाकाल इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। भांग का श्रंगार उचित नहीं है इसे बंद किया जाना चाहिए। अब प्रशासन और पंडित पुजारी को सोचना चाहिए। यह उचित नहीं है।