samacharsecretary.com

‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारत में पहले होगी रिलीज, 17 जून से शुरू होगी एडवांस बुकिंग

स्पाइडर मैन को पसंद करने वाले फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीटर पार्कर की अगली फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' भारत में अपनी तय तारीख से पहले रिलीज होने जा रही है। जानें यह फिल्म कब रिलीज होगी और कब शुरू होगी इसकी एडवांस बुकिंग? रिलीज की तारीख और एडवांस बुकिंग फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' अब भारत में 30 जुलाई, 2026 को रिलीज होगी, जबकि दुनिया भर में यह फिल्म 31 जुलाई को रिलीज हो रही है। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग के लिए टिकटों की बुकिंग 17 जून से शुरू हो जाएगी। यह फिल्म भारत में 6 भाषाओं में रिलीज होगी- अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम। क्या है फिल्म की कहानी? यह फिल्म 'स्पाइडर-मैन: नो वे होम' की कहानी के आगे से शुरू होगी। पिछली फिल्म के आखिर में पूरी दुनिया पीटर पार्कर को भूल गई थी। इस बार पीटर बिल्कुल अकेला है और बिना किसी पुराने सहारे के खुद अपनी जिंदगी की मुश्किलें संभाल रहा है। वह भावनात्मक रूप से परेशान है, फिर भी न्यूयॉर्क की रक्षा कर रहा है। फिल्म की स्टार कास्ट 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' में टॉम हॉलैंड (स्पाइडर-मैन), जेंडाया (एमजे) और जैकब बैटलन (नेड लीड्स) के किरदार में फिर साथ दिखेंगे। टॉम हॉलैंड लगभग 5 साल बाद अपनी सोलो स्पाइडर-मैन फिल्म में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में जॉन बर्न्थेल और 'स्ट्रेंजर थिंग्स' फेम की सैडी सिंक भी नजर आएंगी। इस फिल्म के निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन हैं, जिन्होंने 'शांग-ची' जैसी फिल्म बनाई है। एक नया रिकॉर्ड सोनी पिक्चर्स के मुताबिक, इस फिल्म के ट्रेलर को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिलाकर 1 अरब यानी 100 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाला यह दुनिया का पहला फिल्म ट्रेलर है।

‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ रिव्यू: मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग, लेकिन कहानी में रह गई कमी

1991 का आर्थिक संकट भारत के इतिहास के सबसे मुश्किल दौर में से एक था. इसी अहम अध्याय को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश करती है मनोज बाजपेयी स्टारर 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर'. डायरेक्टर चिन्मय डी. मांडलेकर की ये फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी दिखाती है, जिसने देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई. दमदार विषय और अच्छे कलाकारों के बावजूद क्या फिल्म दर्शकों को बांधकर रख पाती है? आइए जानते हैं हमारे इस रिव्यू में. फिल्म में ए. रामनन (मनोज बाजपेयी) को अचानक राष्ट्रीय बैंक का गवर्नर बनाया जाता है. वो भी तब जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. दिवालिया घोषित होने की कगार पर है. उनकी नियुक्ति पर सवाल उठते हैं क्योंकि उन्हें अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) का विशेषज्ञ नहीं माना जाता. लेकिन हालात ऐसे हैं कि देश को बचाने के लिए उन्हें बड़े और साहसी फैसले लेने पड़ते हैं. IMF से बातचीत, विदेशी कर्ज और देश के गोल्ड रिजर्व को गिरवी रखने जैसे फैसलों के जरिए कहानी आगे बढ़ती है. डायरेक्शन: इरादा बड़ा, असर थोड़ा कम डायरेक्टर चिन्मय डी. मांडलेकर ने एक बेहद महत्वपूर्ण विषय चुना है. इंस्पेक्टर जेंडे के बाद ये मनोज बाजपेयी और चिन्मय डी. मांडलेकर की साथ में दूसरी फिल्म है और दोनों की जोड़ी फिर से एक गंभीर विषय लेकर आई है. हालांकि, जहां कहानी में स्वाभाविक रूप से तनाव, राजनीतिक दबाव और सस्पेंस की भरपूर गुंजाइश थी, वहां फिल्म कई बार जरूरत से ज्यादा आसान और इंस्पायर करने वाली बन जाती है. देश आर्थिक संकट में है, लेकिन स्क्रीन पर वो बेचैनी और घबराहट पूरी ताकत से महसूस नहीं होती. फिल्म कई बार ऐसे आगे बढ़ती है जैसे कोई मुश्किल पहेली धीरे-धीरे सुलझ रही हो, जबकि असल में हालात कहीं ज्यादा गंभीर थे. स्क्रीनप्ले: दिलचस्प विषय, लेकिन कमजोर पकड़ फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका सब्जेक्ट है. आर्थिक संकट जैसी जटिल घटना को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की गई है, जिससे आम दर्शक भी कहानी से जुड़ सके. लेकिन स्क्रीनप्ले कई जगहों पर सतही महसूस होता है. कई अहम राजनीतिक और प्रशासनिक टकरावों को सिर्फ छूकर छोड़ दिया गया है. संकट से जूझ रही पूरी टीम की बजाय कहानी लगभग पूरी तरह गवर्नर और उनके डिप्टी के इर्द-गिर्द घूमती रहती है. यही वजह है कि फिल्म का दायरा बड़ा होने के बावजूद उसका प्रभाव सीमित रह जाता है. एक्टिंग: मनोज बाजपेयी फिर भी संभाल लेते हैं मोर्चा मनोज बाजपेयी अपने किरदार में पूरी ईमानदारी के साथ नजर आते हैं. दक्षिण भारतीय लहजे और बॉडी लैंग्वेज को पकड़ने की उनकी कोशिश दिखती है, हालांकि ये हर जगह एक जैसी नहीं लगती. फिर भी जब भी फिल्म कमजोर पड़ती है, बाजपेयी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से उसे संभालने की कोशिश करते हैं. डिप्टी गवर्नर के किरदार में नौशाद मोहम्मद कुंजू काफी प्रभाव छोड़ते हैं. उनके और बाजपेयी के बीच के दृश्य फिल्म के मजबूत हिस्सों में गिने जा सकते हैं. मधु शाह को ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं मिला है, लेकिन वो अपने सीमित किरदार में सहज हैं. वहीं पत्रकार के रोल में अदा शर्मा का किरदार कहानी में बहुत खास योगदान नहीं दे पाता और कई बार गैरजरूरी सा महसूस होता है. फिल्म के यादगार पल फिल्म में कुछ छोटे लेकिन प्रभावशाली सीन हैं जो लंबे समय तक याद रहते हैं. ट्रैफिक सिग्नल पर एक बच्ची से पेन खरीदने वाला सीन हो या फिर ऑफिस के चपरासी की कर्ज मांगने की आदत से जन्म लेने वाला एक बड़ा आइडिया, ये पल कहानी में 'ह्यूमन टच' जोड़ते हैं और फिल्म को भावनात्मक गहराई देते हैं. फाइनल वर्डिक्ट: देखने लायक लेकिन अधूरी उड़ान 'गवर्नर' एक महत्वपूर्ण और कम चर्चा वाले ऐतिहासिक अध्याय को सामने लाती है. फिल्म का प्लॉट दमदार है, कलाकारों की मेहनत भी नजर आती है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और कम महसूस होने वाला तनाव इसे एक बेहतरीन फिल्म बनने से रोक देता है. अगर आपको भारत के आर्थिक इतिहास, राजनीतिक ड्रामा और मनोज बाजपेयी की परफॉर्मेंस पसंद है तो ये फिल्म देखी जा सकती है. लेकिन जिस रोमांच, गहराई और प्रभाव की उम्मीद इसके विषय से की जाती है, वहां 'गवर्नर' थोड़ी पीछे रह जाती है.

“हाव-भाव देखकर गर्भ का अंदाजा नहीं लगा” दलील पर HC की कड़ी टिप्पणी, अपील खारिज

 चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों में लापरवाही को इस आधार पर नहीं छिपा सकती कि संबंधित महिला का हाव-भाव देखकर उसे गर्भवती होने का आभास नहीं हुआ था। अदालत ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में सेवा से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपीलकर्ता द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण उसकी सेवाओं में गंभीर कमी को उजागर करता है। ऐसे में उसकी संविदात्मक नियुक्ति समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय में कोई खामी नहीं पाई जा सकती। क्या है मामला? मामले के अनुसार, पंचकूला निवासी कौशल्या देवी अपने निर्धारित क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थी। उसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के घरों में जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनकी निगरानी करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ना था। इसी दौरान उसके कार्यक्षेत्र में रहने वाली एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महिला की गर्भावस्था के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ओर से कोई रिपोर्ट या सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इससे पहले एकल पीठ भी सेवा समाप्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर चुकी थी। एकल पीठ का मानना था कि कार्यकर्ता अपनी सेवा में कमी के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। मृतक परिवार ने नहीं दी जानकारी: अपीलकर्ता सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि मृतक के परिवार ने उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी थी। उसने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि घर के दौरे के दौरान उसने महिला को छत पर तेजी से जाते और गीला भारी कंबल उठाकर घरेलू काम करते देखा था। उसके अनुसार महिला के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि वह गर्भवती है। इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण पूरी तरह अविश्वसनीय और वास्तविकता से परे है। अदालत ने कहा कि यह जवाब स्वयं दर्शाता है कि अपीलकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं कर रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का दायित्व केवल परिवार से सूचना मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी करना है। खंडपीठ ने कहा कि जब सेवाओं में इतनी गंभीर कमी सामने आई और कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही संविदात्मक नियुक्ति समाप्त की गई, तो इस कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा।

दिल्ली में हर घर में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर अनिवार्य करने की सिफारिश

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आग की बढ़ती घटनाओं पर काबू पाने के लिए दिल्ली फायर डिपार्टमेंट ने हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर लगाना अनिवार्य करने की सिफारिश की है। विभाग का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो आग से हो रही मौतों पर 97 फीसदी तक काबू पाया जा सकता है। फायर डिपार्टमेंट ने आग से निपटने के लिए अगले 25 साल की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया है। विवेक विहार की घटना के बाद सीएम ने खुद संभाली थी कमान फायर विभाग के सूत्रों की मानें तो अगले एक-दो दिन में इसे होम डिपार्टमेंट के पास भेज दिया जाएगा। बता दें कि विवेक विहार की घटना के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने विभागों के साथ बैठक कर आग से निपटने के लिए फायर मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया था। फायर डिपार्टमेंट की माने तो अगर यह दावा लागू हुआ तो 97 फीसदी तक मौत का आंकड़ा घट जाएगा। दिल्ली के चीफ फायर ऑफिसर ए. के. मलिक के मुताबिक एक-दो दिन में इस मास्टर प्लान को होम डिपार्टमेट के पास भेज दिया जाएगा और मालवीय नगर जैसी घटनाओं में आग से होने वाली मौत को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे। उसी को लेकर हमने सरकार को कुछ सिफारिशें भेजी हैं, जिससे आग से हो रही मौतों में 97 फीसदी की कमी लाई जा सकती है। दिल्ली के हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर अनिवार्य करने पर जोर इसके लिए सबसे पहले हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर अनिवार्य करने के साथ-साथ विल्डिंग में सीढ़ियों के आस-पास बिजली के मीटर लगाने और बिल्डिंग के बेसमेंट या स्टिल्ट पार्किंग में एग्जिट गेट के पास EV चार्जिग पॉइंट पर रोक लगानी होगी। उन्होंने कहा कि ज्यादातर आग की घटनाएं बिजली मीटर के या EV चार्जिंग पॉइंट के साथ हो रही है। इससे आग लगने के बाद लोग बाहर नहीं निकल पाते है। उन्होंने कहा कि पहले से बने घरों में स्मोक डिटेक्टर लगाने के लिए सरकार को प्रोत्साहित करने के लिए भी योजना लानी चाहिए। स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर हो तो लोग आग फैलने से पहले खुद को बचा सकते हैं। इससे कैजुएलटी पर काबू पाया जा सकता है। दिल्ली में अभी आग से हर साल करीब 100 लोगों की मौत हो जाती है। इस साल ही जनवरी से जून में अब तक 66 से अधिक लोगों की आग के कारण मौत हो चुकी है।  

बिहार राजनीति में हलचल: सम्राट चौधरी की सीमांचल यात्रा से बढ़ा सियासी तापमान

 पूर्णिया  भाजपा की अगुवाई में बिहार में बनी पहली सरकार के मुखिया की यह पहली सीमांचल यात्रा है। पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इस इलाके का राजनीतिक समीकरण कुछ अलग है। बड़ी मुस्लिम आबादी फिर बांग्लादेश व नेपाल की सीमा से जुड़ाव से यहां का राजनीतिक गणित अलग है। ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यात्रा की प्रबल संभावना से राजनीतिक गलियारों की नजर भी सजग हो गई है। उनकी यात्रा 16 जून् को प्रस्तावित है। वे सहयोग शिविर के माध्यम आम लोगों को मिल रही राहत को देखने पहुंचेंगे। शिविर का उद्देश्य धरातल पर कितना सफल हो रहा है, इसका फीडबैक वे लेंगे। उनकी यह यात्रा धमदाहा प्रखंडके रंगपुरा दक्षिण पंचायत से शुरू होगी। धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से लगातार छह जीत दर्ज करने वाली बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह के चुनाव प्रचार के दौरान के भी उनका आगमन हुआ था। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में उनके विकास की सराहना भी की थी। इस यात्रा से एक बड़ा संदेश भी देना है। मुख्यमंत्री की डायरी में भी विकास ही प्राथमिकता है। सीमांचल विधानसभा चुनाव के पूर्व से ही केंद्र सरकार की प्राथमिकता में रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह यहां तीन दिवसीय प्रवास पर रहे थे। देश की सुरक्षा के लिए भी यह इलाका अहम है और केंद्र की मंशा को जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता भी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पूर्व ही इलाके में आयोजित सभा के दौरान अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का नाम बता चुके थे। यह राजग के राजनीतिक समीकरण को साधने की कला भी थी। निश्चित रूप से सीमांचल में पूर्व मुख्यमंत्री की छवि विकास पुरुष के रूप में थी। सामाजिक समीकरणों को साध राजग की लगातार बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीति की उसी ट्रैक में उनकी भी गाड़ी बढ़ सकती है, यह संभावना पहले से बनी हुई है। प्रशासनिक अमला अपनी तैयारी में है। सहयोग शिविर के मायने की झलक जमीन पर दिखे, यह प्रयास किया जा रहा है। आम लोग भी उत्साहित हैं। इस शिविर के माध्यम उनकी ऐसी समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिनके लिए वे सरकारी दफ्तर की दौड़ लगा रहे थे। कार्यकर्ता मुख्यमंत्री में देखते हैं पूर्व मुख्यमंत्री की छवि: आशीष कुमार बब्बू जदयू के प्रदेश महासचिव आशीष कुमार बब्बू ने कहा कि मुख्यमंत्री के धमदाहा आगमन की संभावना बनी है। यह एक सरकारी कार्यक्रम है। निश्चित रूप से उनके आने की सूचना से कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। कार्यक्रम सरकारी है और इसलिए उनका शेड्यूल तय होगा। इन स्थितियों के बीच राजग कार्यकर्ताओं में उनके आने की सूचना मात्र से काफी उत्साह है। कार्यकर्ता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि देखते हैं। मुख्यमंत्री का एक मात्र उद्देश्य बिना विभेद क्षेत्र के साथ-साथ जन-जन का कल्याण है। धमदाहा इलाके से उनका पुराना नाता रहा है। कई घरों में उनका पूर्व से आना-जाना रहा है। बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह से भी पारिवारिक रिश्ता रहा है। धमदाहा से उनकी यात्रा की शुरुआत से जदयू के साथ-साथ भाजपा, लोजपा आर, रालोसपा सहित हर घटक दल के कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है।

सफेद, ब्राउन या रेड राइस: सेहत के लिए कौन सा चावल सबसे बेहतर?

भारत के लगभग हर घर में चावल के बिना लंच या डिनर अधूरा रहता है और इसके लिए लोग चावल को किसी न किसी रूप में अपने खाने में शामिल करते हैं. लेकिन जब बात हेल्थ की आती है तो अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि सफेद, ब्राउन या रेड राइस में से कौन सा ऑप्शंस चुनें. कोई सफेद चावल को ब्लड शुगर बढ़ाने वाला मानता है तो कोई ब्राउन राइस को अच्छा मानते हैं. इसके साथ ही मार्केट में रेड राइस का भी ट्रेंड जोरों पर है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि सेहत के लिए कौन सा चावल अधिक फायदेमंद है. प्रोसेसिंग से बदल जाती है न्यूट्रिशन वैल्यू न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर सीमा गुलाटी के अनुसार, इन तीनों ही चावलों की अपनी खासियत और न्यूट्रिशन वैल्यू है. सफेद चावल रिफाइन और प्रोसेस किया जाता है जिससे इसकी बाहरी परत पूरी तरह निकल जाती है. इस वजह से चावल में सिर्फ स्टार्च वाला हिस्सा ही बचता है और इसके विपरीत ब्राउन राइस में केवल ऊपरी छिलका हटाया जाता है जिससे इसके न्यूट्रिएंट्स और फाइबर बरकरार रहते हैं. वहीं रेड राइस में भी उसकी बाहरी परत बनी रहती है जिसके कारण इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अच्छी होती है. शुगर स्पाइक और कैलोरी सफेद चावल में फाइबर कम होने के कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है इसलिए यह शरीर में ग्लूकोज लेवल को तुरंत बढ़ा देता है. यही वजह है कि राजमा-चावल या बिरयानी खाने के बाद अचानक सुस्ती आने लगती है. दूसरी ओर ब्राउन और रेड राइस स्लो बर्न फूड हैं जो धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करते हैं और शुगर को कंट्रोल में रखते हैं. वैसे 100 ग्राम पके हुए सफेद चावल में करीब 130 कैलोरी होती है जबकि ब्राउन और रेड राइस में लगभग 110 कैलोरी होती है. न्यूट्रिएंट्स के मामले में कौन सा चावल बेस्ट? सफेद, ब्राउन और रेड राइस तीनों ही वैरायटी मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन से भरपूर होते हैं. हेल्थशॉर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रेड राइस में मौजूद एंथोसायनिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट इसे खास लाल रंग देता है जो हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने और सूजन को कम करने में मदद करता है. WebMD का कहना है कि लाल चावल में मौजूद कंपाउंड बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में मदद करते हैं. हालांकि, सफेद चावल भी पूरी तरह खराब नहीं है और यह पचाने में सबसे आसान होता है. कौन सा चावल खाएं? अगर आपको डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या नहीं है और आप आसानी से पचने वाला खाना चाहते हैं तो लिमिट में सफेद चावल खा सकते हैं. लेकिन यदि आपका गोल ज्यादा फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स वाले चावल खाना हैा तो ब्राउन या रेड राइस बेहतर ऑप्शंस हैं. यदि घर में केवल सफेद चावल ही बनता है तो प्लेट को बैलेंस करने के लिए उसमें फाइबर से भरपूर सब्जियां और दाल की मात्रा बढ़ा दें.

13 जून को बनेगा दुर्लभ द्विद्वादश योग, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत और बढ़ेगी आय

 जब भी ज्योतिष में ग्रहों के राजा, राजकुमार या मन के कारक ग्रहों का खास संयोग बनता है, तो उसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है. ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से 13 जून को बनने वाला यह 'द्विद्वादश योग' बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दिन चंद्रमा सुबह मेष राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर जाएंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 जून की सुबह 9 बजकर 26 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे. इस दौरान बुध ग्रह अपनी स्वराशि मिथुन में विराजमान रहेंगे, जिससे चंद्रमा बुध से द्वादश (12वें) भाव में और बुध चंद्रमा से द्वितीय (दूसरे) भाव में होंगे. उच्च राशि के चंद्रमा और स्वराशि के बुध के बीच बनने वाला यह दुर्लभ संयोग कुछ राशियों की बंद किस्मत के ताले खोलने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं कि इस शुभ योग से किन राशियों के अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं और किसे करियर-व्यापार में बंपर लाभ मिलेगा. वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं. नौकरीपेशा लोगों का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो सकता है. आपको कार्यस्थल पर कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. आपकी वित्तीय स्थिति में जबरदस्त सुधार के संकेत हैं. समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ेगा. यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो इस दौरान स्थितियां आपके पूरी तरह अनुकूल रहेंगी. मिथुन राशि बुध देव आपकी ही राशि में स्वगृही होकर बैठे हैं, जिससे इस योग का सबसे बेहतरीन लाभ आपको मिलने वाला है. आपके लिए आय के नए स्रोत बनेंगे. इसके साथ ही पुराने माध्यमों से भी लगातार धन का प्रवाह बना रहेगा. नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति (प्रमोशन) और सैलरी में बढ़ोतरी की गुड न्यूज मिल सकती है. व्यापारिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. साथ ही, सेहत से जुड़ी पुरानी परेशानियां दूर होंगी और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए चंद्र-बुध का यह द्विद्वादश योग मानसिक शांति लेकर आ रहा है. पिछले कुछ समय से चल रहा मानसिक तनाव पूरी तरह से दूर होगा. भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलेगा. किस्मत का साथ मिलने से आपके जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे. आपकी कड़ी मेहनत का पूरा फल आपको मिलेगा. कार्यस्थल पर सीनियर्स आपके काम की तारीफ करेंगे और नई जिम्मेदारी भी सौंप सकते हैं. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए यह समय खुशियों से भरा और बेहद सकारात्मक रहने वाला है. आप इस दौरान काफी खुशमिजाज मूड में रहेंगे. परिवार और प्रियजनों का आपको हर मोड़ पर पूरा सहयोग मिलेगा. आपकी भौतिक सुख-सुविधाओं और सुख-साधनों में बढ़ोतरी होने के साफ संकेत हैं. लगातार बढ़ती इनकम से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, जिससे आपको मानसिक रूप से बड़ी राहत मिलेगी. मीन राशि मीन राशि के जातक भले ही इस समय शनि की साढ़ेसाती के दौर से गुजर रहे हों, लेकिन यह गोचर उनके लिए राहत की फुहार लेकर आएगा. यदि आप व्यापार या मीडिया क्षेत्र से जुड़े हैं, तो इस अवधि में आपको कोई बड़ी बिजनेस डील मिल सकती है या कोई बड़ी जिम्मेदारी हाथ आ सकती है. बिजनेस में पास्ट में हुए किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान की भरपाई इस दौरान होने की पूरी संभावना है.

मनरेगा भुगतान में तेजी: जामताड़ा समेत संताल के जिलों को करोड़ों की राशि आवंटित

जामताड़ा  झारखंड सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) आयुक्त कार्यालय ने राज्य के सभी जिलों को बड़ी राहत देते हुए सामग्री मद के भुगतान के लिए 172.65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि एसएनए-स्पर्श माडल के माध्यम से जारी की गई है। इससे विभिन्न लंबित भुगतानों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। जामताड़ा जिले के 10.50 करोड़ रुपये की राशि मिली है। संताल में सबसे अधिक राशि गोड्डा को जिले 15 करोड़ रुपये मिली है। आयुक्त कार्यालय के पत्र में कहा गया है कि सामग्री मद में केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में है। जिलों को निर्देश दिया है कि आवंटित राशि का उपयोग तय प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाए, ताकि लंबित देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित हो सके। बताया गया कि तकनीकी सहायकों, सहायक अभियंताओं, कनीय अभियंताओं व बीएफटी के जून 2026 तक के वेतन का भुगतान, मेट के लंबित मानदेय का भुगतान, दीदी बगिया योजना से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की बकाया राशि का भुगतान, विशेष हरित ग्राम योजना की लंबित देनदारियों का निपटारा और पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भुगतान कर उन्हें मनरेगासॉफ्ट में बंद करना है। एक जुलाई से नए कानून के लागू होने से पहले खर्च करें पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार एक जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबीरामजी एक्ट लागू किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में एसएनए-स्पर्श माडल के तहत आवंटित राशि के उपयोग में भविष्य में प्रशासनिक कठिनाइयां आ सकती हैं। इसी को देखते हुए जिलों को उपलब्ध राशि का समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित व्यय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े लाभुकों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही लंबित भुगतानों के निपटारे से ग्रामीण विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है। संताल परगना के छह जिलों को मिली राशि क्रम     जिला     आवंटित राशि 1     गोड्डा     15.00 2     जामताड़ा     10.50 3     पाकुड़     9.30 4     दुमका     8.80 5     देवघर     8.40 6     साहिबगंज     7.70

नगर निगम की बड़ी पहल: पटना के 6 अंचलों में सहयोग शिविर, 10 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा

पटना इस बात 16 जून को पटना के अलग-अलग अंचलों में ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि इन शिविरों के माध्यम से नागरिक न केवल पटना नगर निगम से संबंधित शिकायतें एवं सुझाव दर्ज करा सकेंगे, बल्कि अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए भी आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सरकार की जन-अनुकूल पहल ‘सहयोग’ का उद्देश्य नागरिकों को एक ही मंच पर विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण एवं उनके समयबद्ध निवारण की सुविधा उपलब्ध कराना है। पटना नगर निगम इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए नियमित रूप से ऑफलाइन सहयोग शिविरों का आयोजन महीने के पहले एवं तीसरे मंगलवार को कर रहा है, जिससे आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ें। आइये जानते हैं इस बार कहां-कहां लग रहे हैं शिविर     नूतन राजधानी अंचल: खाजपुरा सामुदायिक भवन, वार्ड संख्या-04     पाटलीपुत्र अंचल: आर.एस. दरबार कम्युनिटी हॉल, आशियाना नगर, फेज-2, वार्ड संख्या-02     कंकड़बाग अंचल: सामुदायिक भवन, दसरथा, वार्ड संख्या-30     बांकीपुर अंचल: सामुदायिक भवन, कदमकुआं, वार्ड संख्या-38     अजीमाबाद अंचल: गुलजारबाग स्टेडियम, वार्ड संख्या-53     पटना सिटी अंचल: टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, वार्ड संख्या-66 सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है सहयोग शिविरों में प्राप्त सभी आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहयोग पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। प्रत्येक आवेदन के पंजीकरण के साथ एक यूनिक रेफरेंस नंबर जारी किया जाता है, जिससे शिकायतकर्ता अपने आवेदन की प्रगति एवं निष्पादन की स्थिति की जानकारी कभी भी प्राप्त कर सकते हैं। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त आगामी सहयोग शिविरों में पहुंचकर रेफरेंस नंबर के आधार पर पूर्व में दर्ज शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। घर बैठे भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत नगर निगम की ओर से बताया कि सहयोग पोर्टल नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करता है। किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा सुझाव को पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित आवेदन के लिए एक रेफरेंस नंबर स्वतः जनरेट हो जाता है, जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता आवेदन की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शिकायत पंजीकृत होने के साथ ही संबंधित विभाग को उसकी सूचना स्वतः उपलब्ध हो जाती है, जिसके आधार पर विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाती है। इस व्यवस्था से शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध बन रही है। सहयोग पोर्टल से प्राप्त 98 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा पटना नगर निगम द्वारा सहयोग पोर्टल एवं सहयोग शिविरों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राप्त आवेदनों का अधिकतम 10 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गुरुवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सहयोग पोर्टल के माध्यम से कुल 463 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 452 आवेदनों का सफलतापूर्वक निपटान किया जा चुका है। इस प्रकार प्राप्त शिकायतों में से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान सुनिश्चित किया गया है। शेष लंबित मामलों पर भी संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है। Bihar : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का हो रहा आगाज, पर्यटन विभाग तैयारी में जुटी; जानिए क्या है इस बार अलग ? नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है नगर निगम मुख्यालय स्तर से प्राप्त सभी प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। शिकायतों के निष्पादन की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो तथा नागरिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान उपलब्ध कराया जा सके। पटना नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सहयोग शिविरों एवं सहयोग पोर्टल की सुविधाओं का अधिकाधिक उपयोग करें तथा अपनी समस्याओं एवं शिकायतों के समाधान के लिए इस जनहितकारी व्यवस्था का लाभ उठाएं। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से प्रशासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा तथा सुशासन के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।  

गैस सिलेंडर में गड़बड़ी का खुलासा, संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची तैयार

लखनऊ घरेलू सिलेंडरों की हर रीफिल पर चेक लगाने के बाद तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभी कनेक्शन धारकों का बीती अवधि का उपयोग का विवरण तैयार किया जा रहा है। जिन कनेक्शन धारकों ने नाम मात्र को रीफिल ली है, उनको संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है। वहीं अत्यधिक उपयोग वाले उपभोक्ता भी चिन्हित किए जा रहे हैं। इनका ऑडिट कराकर उपयोग की वास्तविक स्थिति जानी जाएगी। बीती अवधि में प्रबंधन के पास गैस कटिंग की शिकायतें पहुंची हैं। इसमें सस्ती घरेलू गैस से कॉमर्शियल की रीफिलिंग की शिकायत प्रमुख है। गैस कटिंग से तैयार किए गए इस सिलेंडर को कॉमर्शियल के उपयोगकर्ता को सरकारी रेट से कम पर उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इसको संज्ञान में लेकर तेल कंपनियों ने संबंधित कनेक्शन धारक का ब्योरा तलब कर उसके अधिकतम एवं न्यूनतम उपयोग का विवरण तैयार किया है। इस विवरण में इस बात का उल्लेख है कि एक रीफिल से दूसरी रीफिल के बीच कितना अंतर है। बीती अवधि में कितने अंतर से रीफिल ली गईं। इस समय यह अंतर कितना है। बिगड़ सकती है आपूर्ति वितरण से जुड़े लोगों ने बताया कि एक बड़ा वर्ग किसी भी तरह घरेलू गैस को हासिल करने की जुगत में लग गया है। किल्लत के समय में गैस की बुकिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालातों में वास्तविक जरूरतमंद घरों तक समय से गैस पहुंचाने की दिक्कत हो गई है। जो वितरक एक से दो दिन के अंदर अपने उपभोक्ताओं के यहां रीफिल पहुंचा देते थे, एक से अधिक का समय लेने लग गए हैं। वहीं तेल कंपनियां गैस की सीमित आपूर्ति दे रही हैं। जांच की वजह इस समय घरेलू उपयोग की एलपीजी खरीदार को 67.22 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। जबकि कॉमर्शियल उपयोगकर्ता को एक किलो गैस के लिए 166.71 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों मदों में अंतर 99.69 रुपये किलो के स्तर तक पहुंच गया है। इस अंतर के चलते बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल के 19 किलो के सिलेंडर में घरेलू गैस को भर कर बेचा जा रहा है। खरीदार को 300 रुपये की छूट देकर यह सिलेंडर 2800-2900 रुपये का दिया जा रहा है। आगरा संभाग, इंडेन वितरक संघ के अध्यक्ष, विपुल पुरोहित ने कहा कि कुछ ऐसे हलवाई चिन्हित किए गए हैं जिनका एलपीजी उपयोग सामान्य नहीं है। त्योहार के समय अधिक मांग की संभावना होने के बावजूद इनके द्वारा अपेक्षित रीफिल नहीं ली गई। कुछ रेस्टोरेंट भी चिन्हित किए गए हैं। इनका भी यही हाल है। पूरे एक महीने में नाममात्र की रीफिल ली गईं। जब कॉमर्शियल की किल्लत चल रही थी, उस समय इनकी तरफ से लगातार मांग थी। संदेह है कि इनके द्वारा अन्य स्रोतों से गैस हासिकल करने का प्रयास चल रहा है।