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योग दिवस पर 45 मिनट का अभ्यास, शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

जमशेदपुर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर इस वर्ष झारखंड के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में योग का व्यापक अभियान चलाया जाएगा. राज्य सरकार ने 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को योगमय झारखंड 2026-27 के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. रविवार होने के बावजूद राज्य के सभी स्कूल सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और स्टूडेंट्स, टीचर्स और कर्मियों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. 12 से 15 जून तक शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” निर्धारित की गई है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने एसओपी जारी की है. योजना के तहत 12 से 15 जून तक जिला, प्रखंड और संकुल (क्लस्टर) स्तर पर शिक्षकों का विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम होगा. वहीं स्कूलों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय योग ओलंपियाड के अंतर्गत पोस्टर, स्लोगन, कविता और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी. चयनित एंट्रीज को प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन के बाद एनसीइआरटी के राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. 16 से 20 जून तक रोजाना योग अभ्यास 16 से 20 जून तक सभी स्कूलों में प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे से 8:00 बजे तक 45 मिनट का सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा. इसमें स्टूडेंट्स के साथ सभी टीचर और अन्य कर्मियों की भागीदारी अनिवार्य होगी. इसके अलावा 17 जून को सभी स्कूलों में सात सदस्यीय योग क्लब का पुनर्गठन भी किया जाएगा, जो पूरे साल योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करेगा. क्लास शुरू होने से पहले होगा दो मिनट का मेडिटेशन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने निर्देश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि अब स्कूलों में हर दिन पहली क्लास शुरू होने से पहले क्लास टीचर दो मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) कराएंगे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स में एकाग्रता, मानसिक संतुलन और सीखने की क्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा. साथ ही स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को 21 जून को सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के कॉम्पोजिट स्कूल ग्रांट मद से उठाया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि योग दिवस कार्यक्रम के सफल आयोजन और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल की होगी.

नो ट्रिपिंग जोन बनाने की तैयारी, 1500 करोड़ की योजना पर काम तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने लखनऊ नो ट्रिपिंग जोन बनाने की ठान ली है। इसमें केंद्र सरकार की मदद से आधुनिकीकरण का काम होगा। इससे लखनऊ की बिजली व्यवस्था को वर्ष 2032 के हिसाब से आधुनिक किया जाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इसकी तैयारी में जुट गया है। राजधानी की बिजली व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ष 2032 के हिसाब से तैयार करने की तैयारी है। इस पूरे काम को वर्ष 2028 मध्य तक करना होगा। वर्ष 2032 में राजधानी के उपभोक्ताओं को कितनी बिजली चाहिए होगी, कितने उपभोक्ता होंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत करना होगा। उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च करके वर्ष 2028 मध्य तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। टीम देखेगी कि कैसे पांच वर्ष में बिजली की डिमांड लखनऊ में बढ़ी है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाएगी। वर्ष 2032 में कितने बिजली उपकेंद्र व ट्रांसमिशन उपकेंद्र चाहिए होंगे। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) राजधानी में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक होंगे, मध्यांचल के निदेशक तकनीकी और लेसा के एक मुख्य अभियंता को रखा गया है। यह समिति दीपावली तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शक्ति भवन को सौंप देगी। इसके बाद मध्यांचल लखनऊ में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेगा। यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर वर्ष बढ़ रही है डिमांड और उपभोक्ता लखनऊ में हर वर्ष दो से ढाई सौ मेगावाट एम्पियर बिजली की डिमांड बढ़ रही है। हर वर्ष दो सौ मेगावाट की खपत और एक लाख उपभोक्ता बढ़ रहे है। इसको देखते हुए नए ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र के साथ ही नए बिजली उपकेंद्र भी नए विकसित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। वहीं पुराने लखनऊ व घनी आबादी वाले क्षेत्र में पावर ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे। इसके लिए जमीन भी तलाशी जाएगी, जिससे छोटे बिजली उपकेंद्र भी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बनाए जा सके। बिजली उपकेंद्र को डबल व त्रिपल सोर्स से लैस करने पर फोकस होगा। वीआइपी क्षेत्रों में एलटी केबल भी ओवरहेड न जाए, उन्हें ट्रंच लाइन में ले जाया जाए, इस पर भी विचार होगा।  

महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बन रहा मेगा ब्रिज, उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी होगी आसान

 पटना उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बन रहे नये फोर लेन पुल का निर्माण करीब 73 प्रतिशत पूरा हो चुका है. पटना, सारण और वैशाली जिलों को आपस में जोड़ने वाली इस 14.500 किमी लंबी परियोजना की अनुमानित लागत 2574.20 करोड़ से अब 2926.42 हो चुकी है. इस पुल से होकर 2027 तक आवागमन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. 2021 में ही शुरू हुआ था काम इस पुल का निर्माण एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड कर रही है. काम की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अथॉरिटी इंजीनियर मैसर्स दोहवा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है. इस परियोजना का एग्रीमेंट अमाउंट 1794.37 करोड़ रुपये था. जमीन पर काम की शुरुआत (अपॉइंटेड डेट) 25 मार्च 2021 को हुई थी. एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा इस नये पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा हो चुका है. इसके साथ ही आरई पैनल कास्टिंग का 92 प्रतिशत काम हो चुका है. सड़क को मजबूती देने वाले जीएसबी का 61 प्रतिशत, डब्ल्यूएमएम का 50 प्रतिशत और डीबीएम का 48 प्रतिशत काम भी जमीनी स्तर पर पूरा हो गया है. पुल के बनने से होगा यह फायदा इस पुल के बनने से गाड़ियों के लिए पटना से हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीवान का सफर बेहद आसान हो जायेगा. साथ ही उत्तर बिहार के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में बेहतर इलाज के लिए पटना आने और जाने में सहूलियत होगी. हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों और उत्तर बिहार के किसानों की ताजी सब्जियां, फल बिना समय गंवाए पटना की मंडियों तक पहुंच सकेंगे. इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा. क्या कहते हैं अधिकारी? पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल का कहना है कि एक्स्ट्रा डोज्ड तकनीक से बन रहे इस मुख्य पुल में कुल 33 वेल फाउंडेशन बनने हैं, जिनमें से 31 का काम पूरा हो चुका है. टोटल 33 पीलर में से 16 पियर टेबल का काम पूरी तरह तैयार है और चार पर काम चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि तीन पियर टेबल का काम जल्द शुरू होगा. साथ ही पुल के लिए कुल 1868 कंक्रीट सेगमेंट्स की जरूरत है, जिसमें से 1381 की ढलाई हो चुकी है. 953 सेगमेंट्स को पीलर पर सफलतापूर्वक फिट भी कर दिया गया है. इस तरह से जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो सकेंगे.

3D तकनीक से जीवंत होंगे 16 संस्कार, यूपी का नया सांस्कृतिक म्यूजियम तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां जन्म से मोक्ष तक आध्यात्म का हाइटेक संगम होगा। इसके साथ ही जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। इस हाइटेक म्यूजियम में 3डी तकनीक से जन्म से मृत्यु तक के 16 संस्कार दिखेंगे। बीकेटी के चंद्रिकादेवी मंदिर के पास उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी जारी कर दी गई है। इस परियोजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा इस हाईटेक संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है। आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। गैलरी वन में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे। प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक ढेरों सुविधाएं परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे। पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए। यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा।

आम महोत्सव बना सफलता की मिसाल, किसानों और महिला एफपीओ को मिला बेहतर बाजार

रांची पूर्वी सिंहभूम अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 से बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत आम बागवानी एवं मिश्रित आम बागवानी का कार्य विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के आलोक में किया जा रहा है। राज्य में लगभग 6000 एकड़ में बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से लाभुकों को न सिर्फ मजदूरी बल्कि स्थायी आजीविका के स्रोत भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयान कर रहा है। 96 हजार किलो से अधिक आम उत्पादन ने रचा नया कीर्तिमान वर्ष 2026-27 में कुल 96,175 किलो आम फलों का उत्पादन विभिन्न प्रखंडों में बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों द्वारा किया गया। इसके विक्रय हेतु जिला स्तर पर आम महोत्सव मेले का आयोजन किया गया, जो अपने आप में बेहद सफल रहा। एफपीओ और महिला किसानों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण विभिन्न प्रखंडों से आए बिरसा हरित ग्राम योजना के किसान, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों) जैसे बोड़ाम, तेजस्वी महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहरागोड़ा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कन्हाईसर चाकुलिया महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा धालभूमगढ़ नारी शक्ति आजीविका प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की दीदियों एवं किसानों द्वारा उत्साहपूर्वक मेले में भाग लिया गया। आम महोत्सव में किसानों को मिली अच्छी आय किसानों और एफपीओ से कुल 1,249 किलो आम की खरीद कर आम महोत्सव में स्टॉल लगाया गया। यह न सिर्फ दीदियों के लिए उत्साह का कारण बना, बल्कि जमशेदपुरवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। बिरसा हरित ग्राम योजना के आम किसानों की मुस्कान बने। जिला स्तरीय आम महोत्सव में कुल 64,150 रुपये की आय हुई। साथ ही किसानों ने स्थानीय बाजार में भी आमों का विक्रय कर अच्छी आमदनी अर्जित की। 1400 किसान एफपीओ से जुड़े, बाजार तक मिली सीधी पहुंच बाजार विपणन समिति, पूर्वी सिंहभूम के सहयोग तथा जेएसएलपीएस के माध्यम से बिरसा हरित ग्राम योजना के 1400 किसानों को एफपीओ से टैग किया गया, जो उनके उत्पादों को स्थानीय और बाहरी विक्रेताओं तक पहुंचा रहे हैं। जेएसएलपीएस के तीन एफपीओ में कुल 4,103 महिला किसान शेयरधारक हैं, जबकि धालभूमगढ़ नारी शक्ति प्रोड्यूसर कंपनी में 2,085 शेयरधारक जुड़ी हुई हैं। इनके माध्यम से ट्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। APEDA और KISAN SAY से जुड़कर बढ़े निर्यात के अवसर इस वर्ष मनरेगा आधारित बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों के साथ समन्वय स्थापित कर Renown Agency के साथ टाई-अप किया गया है। इसके तहत A Category के आमों को APEDA और KISAN SAY जैसे संस्थानों के साथ ऑनबोर्ड किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सके। पूर्वी सिंहभूम से लंदन तक पहुंचा बिरसा हरित ग्राम योजना का आम बोड़ाम और बहरागोड़ा से 1.5 टन बिरसा हरित ग्राम योजना के आम को जिला प्रशासन के सहयोग से एफपीओ के माध्यम से लंदन भेजे जाने के लिए फ्लैग ऑफ किया गया। यह योजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है बिरसा हरित ग्राम योजना बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो ग्रामीणों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।  

काली फिल्म, हूटर और अवैध मॉडिफिकेशन पर पुलिस का बड़ा एक्शन

 जयपुर पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस द्वारा प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष यातायात प्रवर्तन अभियान ने अब और अधिक गति पकड़ ली है। अभियान के दौरान यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों, अवैध रूप से वाहनों में मॉडिफिकेशन कराने वालों तथा हूटर-बत्ती और काली फिल्म लगाकर रौब गांठने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभियान के दसवें दिन को पूरे प्रदेश में विशेष नाकेबंदी एवं प्रवर्तन अभियान के दौरान कुल 9,703 वाहनों के विरुद्ध चालान, जब्ती एवं अन्य विधिक कार्रवाई की गई।   इस तरह हुई कार्रवाई डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में चल रहे इस अभियान के संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) डॉ. बी. एल. मीणा ने बताया कि अभियान के दसवें दिन हुई कार्रवाई में सर्वाधिक 3,638 वाहनों के शीशों पर नियम विरुद्ध लगाई गई काली फिल्म (ब्लैक फिल्म) के मामलों में कार्रवाई की गई। इसके अलावा 2,450 वाहनों पर नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह पाए गए, जबकि 1,373 वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन अंकित होने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही की गई। अभियान के दौरान वाहन की संरचना (बॉडी/चेसिस) में अवैध परिवर्तन करने वाले 945 वाहनों को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की गई। इसी प्रकार 800 वाहनों पर अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर लगे पाए गए, जबकि 497 वाहनों में प्रेशर हॉर्न एवं एयर हॉर्न का उपयोग करने पर चालान एवं अन्य विधिक कार्यवाही अमल में लाई गई। अभियान के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में वाहन चालक अब भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए वाहनों के शीशों पर काली फिल्म लगा रहे हैं। ऐसे 3,638 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इसके अलावा 2,450 वाहनों पर नियम विरुद्ध नंबर प्लेट अथवा पंजीयन चिन्ह पाए जाने पर चालान एवं अन्य कानूनी कार्रवाई की गई। अवैध हूटर-बत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई पुलिस ने आमजन में भय एवं प्रभाव पैदा करने के उद्देश्य से वाहनों पर लगाई गई अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट और हूटर के खिलाफ भी अभियान चलाया, जिसके तहत 800 वाहनों पर कार्रवाई की गई। वहीं ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 497 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न भी जब्त किए गए। रौब दिखाने वालों को नहीं मिलेगी छूट डॉ. मीणा ने कहा कि वाहन पर जाति, पद, संगठन अथवा अन्य अनाधिकृत शब्द लिखना, अवैध हूटर-बत्ती लगाना, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट उपयोग करना तथा काली फिल्म लगाकर वाहन चलाना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस का यह विशेष अभियान आगामी दिनों में और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यालय पंचकूला में, एनएसजी जैसी ट्रेनिंग वाले कमांडो होंगे शामिल

 चंडीगढ़  हरियाणा में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहली बार पुलिस में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) बनाने की मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर गृह सचिव सुधीर राजपाल ने एटीएस के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी, जिसका मुख्यालय पंचकूला में होगा। आतंकवादियों और आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए गठित एटीएस में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की तर्ज पर विशेष प्रशिक्षित कमांडो शामिल किए जाएंगे, जिनकी कमान पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के हाथ में होगी। आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस की बजाय एटीएस करेगा, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण, मजबूत खुफिया तंत्र और अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से यह दस्ता आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करेगा। जल्द ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मानकों के अनुरूप एक सशक्त एवं पेशेवर एटीएस तैयार किया जाएगा, जो प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और भयमुक्त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। एटीएस का कार्य आतंकी घटनाओं पर प्रतिक्रिया, आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमा चलाना, खुफिया जानकारी जुटाना, प्रोसेस करना और शेयर करना, इंटर एजेंसी आपरेशनल कोर्डिनेशन, आतंकवाद से संबंधित डेटाबेस को बनाए रखना, संबंधित डेटा का रिसर्च और एनालिसिस और स्किल अपग्रेडेशन के लिए ट्रेनिंग देना होगा। एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा। एटीएस सीआइडी के कमांड एवं नियंत्रण में कार्य करेगा। इसकी संरचना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय बनाई गई है। इसमें एनएसजी की तर्ज पर एक अत्यंत प्रशिक्षित विशेष कमांडो बल शामिल होगा, जो त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील अभियानों को अंजाम देगा। खुफिया एवं संचालन शाखा आतंकवादी संगठनों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी के लिए उत्तरदायी होगी। आतंकवाद और उससे संबंधित अपराधों की विशेष जांच के लिए एक समर्पित एटीएस पुलिस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसमें कानूनी, वित्तीय जांच तथा फारेंसिक इकाइयां कार्य करेंगी। पंचकूला और गुरुग्राम में होंगे थाने पूरे हरियाणा को कवर करने के लिए एटीएस के दो थाने बनाए जाएंगे। पंचकूला एटीएस के अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। गुरुग्राम एटीएस सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले को संभालेगा। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए अभियान तकनीकी सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु साइबर एवं टेक्निकल इंटेलिजेंस यूनिट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, डार्क वेब और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की निगरानी करेगी, जबकि डेटा एनालिसिस एवं इंटरसेप्शन यूनिट आधुनिक विश्लेषण प्रणालियों के माध्यम से सूचनाओं का संग्रह और मूल्यांकन करेगी। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए डि-रेडिकलाइजेशन यूनिट समाज में जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रम चलाएगी। साथ ही प्रशिक्षण एवं अनुसंधान विंग समय-समय पर कौशल उन्नयन, रिफ्रेशर कोर्स तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के विकास का कार्य करेगा। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं की जा सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एटीएस के गठन से हरियाणा की कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।  

कम जमीन और कम पानी में बढ़ा मुनाफा, थ्री-लेयर मॉडल बना आकर्षण

 कोडरमा  डोमचांच प्रखंड के प्रगतिशील किसान सुमन लाल मेहता ने खेती में अनूठा उदाहरण पेश करते हुए थ्री-लेयर (मल्टीलेयर) खेती की शुरुआत की है। पथरीली मिट्टी, कम पानी वाले इस क्षेत्र में उन्होंने अपनी दो एकड़ से अधिक खेती योग्य भूमि में से करीब एक चौथाई हिस्से में इस पद्धति को अपनाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। थ्री-लेयर खेती के तहत जमीन के नीचे हल्दी, अदरक और गाजर जैसी फसलें लगाई गई हैं। वहीं, जमीन की ऊपरी सतह पर धनिया, साग समेत अन्य पत्तेदार सब्जियां उगाई जा रही हैं इसके अलावा खेत में बनाए गए बांस और घास-फूस के मचान पर करेला, कुंद्री, लौकी, नेनुआ और जंगली खक्सा जैसी लत्तरदार सब्जियों की खेती की जा रही है। इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक ही भूखंड पर एक साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न फसलों का उत्पादन संभव हो रहा है। सामान्यतः इन फसलों के लिए अलग-अलग भूमि और खेती की अलग पद्धति अपनानी पड़ती है, लेकिन मल्टीलेयर खेती में एक ही मौसम, एक ही जमीन और एक ही सिंचाई व्यवस्था से विविध फसलों की पैदावार ली जा रही है। खेतों में टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग होने से पानी की भी पर्याप्त बचत हो रही है। भीषण गर्मी में पौधों को मिल रहा प्राकृतिक संरक्षण इस खेती की खासियत यह है कि खेत में बनाए गए मचान नीचे उगाई गई फसलों के लिए प्राकृतिक तापमान नियंत्रक का काम करते हैं। मचान की छाया के कारण मिट्टी की नमी बनी रहती है और तेज धूप का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और झुलसने का खतरा भी कम हो जाता है। शांति देवी बताती हैं कि यह प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलने की उम्मीद है। मिट्टी के अंदर और सतह पर लगी फसलों तक सूर्य की सीधी किरणें नहीं पहुंचतीं, जिससे पौधों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बना रहता है। मध्य प्रदेश में सीखी तकनीक, डोमचांच में प्रयोग प्रगतिशील किसान सुमन मेहता ने बताया कि मल्टीलेयर खेती की शुरुआत मध्य प्रदेश में हुई थी और अब देश के कई राज्यों में किसान इसे अपना रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से उन्हें मध्य प्रदेश जाकर इस तकनीक को नजदीक से सीखने का अवसर मिला था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने खेत को तैयार किया, मचान बनाए और तीन अलग-अलग स्तरों पर फसलें लगाकर इस प्रयोग की शुरुआत की। आज उनके खेत में जमीन के अंदर, जमीन की सतह पर और मचान के ऊपर एक साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन हो रहा है, जो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।  

पूर्णिया से शुरू हुआ विस्तार, जल्द पटना तक पहुंचेगा मानसून

पटना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने बिहार में दस्तक दे दी है। पूर्णिया के रास्ते गुरुवार को मॉनसून ने बिहार में प्रवेश लिया। मौसम विभाग के अनुसार कोसी और सीमांचल क्षेत्र के 7 जिलों में मॉनसून का प्रसार हो चुका है। इसके आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल हैं। अगले एक-दो दिन तक इसका प्रसार थोड़ा धीमा हो सकता है, लेकिन इस सप्ताह के अंत तक यह बिहार के अधिकतर जिलों को कवर कर लेगा। पटना समेत अन्य जिलों के लोगों को मॉनसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में दस्तक देने के बाद मॉनसून कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसकी उत्तरी सीमा मधुबनी से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। इस साल मॉनसून ने समय से पहले ही एंट्री ली है। मॉनसून के बिहार में प्रवेश की सामान्य तारीख 13 से 15 जून होती है। हालांकि, इस साल 11 जून को ही मॉनसून बिहार पहुंच गया। पहले दिन 7 जिलों में हुआ मॉनसून का प्रसार पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बिहार में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन हो चुका है। इसका प्रसार किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और मधुबनी जिलों में हो चुका है। पटना में कब पहुंचेगा मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आगामी 2-3 दिनों में मॉनसून के बिहार के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इस सप्ताह के अंत तक मॉनसून के राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के जिलों तक पहुंचने की पूरी संभावना नजर आ रही है। पूर्णिया में भारी बारिश से जलजमाव 24 घंटे में कहां-कितनी बारिश हुई? मॉनसून के आने से पहले ही उत्तर बिहार में भारी बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटे के भीतर मिथिला, सीमांचल, कोसी, चंपारण क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। किशनगंज जिले के तैयबपुर में सर्वाधिक 148 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही में 106 मिमी, खगड़िया के बलतारा में 70 मिमी, समस्तीपुर के हसनपुर में 67.6 मिमी, मधुबनी के लौकही में 61.2 मिमी, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में 58 मिमी पानी गिरा। 12 जून को 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने बिहार के 10 जिलों में शुक्रवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी हल्के से मध्यम दर्जे की बरसात होने की संभावना है।

टर्मिनल से रनवे तक बदला सिस्टम: DIAL ने IGI एयरपोर्ट पर लगाए नए ड्रेनेज और पंप

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े और व्यस्ततम एयरपोर्ट आइजीआइ की संचालन एजेंसी डायल इस बार मानसून से जुड़ी तैयारियों में कोई किंतु-परंतु या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती। पिछले कुछ वर्षाें में मानसून के दौरान टर्मिनल के भीतर पानी टपकने, रनवे पर जलभराव और टर्मिनल-1 के फोरकोर्ट पर हुए हादसों ने न केवल यात्रियों को परेशान किया था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरपोर्ट की साख को भी बट्टा लगाया था। इन पुरानी फजीहतों से कड़ा सबक लेते हुए इस बार दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने एक एडवांस प्री-मानसून प्लान तैयार किया है। हालांकि, असली चुनौती इन दावों को जमीन पर उतारने की होगी। विगत वर्षों का कड़वा अनुभव इस बार एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारियों में जो सख्ती और जल्दबाजी दिख रही है, उसके पीछे बीते वर्षों का कड़वा अनुभव है। पूर्व में हुई कुछ गंभीर घटनाओं ने एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। दो वर्ष पूर्व मानसून की शुरुआत में टर्मिनल-1 पर हुआ हादसा सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा, जिसने स्ट्रक्चरल मेंटेनेंस की कमियों को उजागर किया था। वहीं, कुछ वर्ष पूर्व भारी वर्षा के दौरान रनवे और एयरसाइड एरिया में पानी भरने से उड़ानों के रूट डाइवर्ट करने पड़े थे, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके अलावा, पिछले वर्ष टी-1 के भीतर लाउंज एरिया में पानी टपकने की तस्वीरों ने इंटरनेट मीडिया पर खूब किरकिरी कराई थी। यही वजह है कि इस बार डायल प्रशासन केवल रूटीन सफाई तक सीमित न रहकर बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव करने को मजबूर हुआ है। इस बार डायल ने कागजी दावों से इतर जमीन पर कई तकनीकी बदलाव किए हैं। टर्मिनल-1 फोरकोर्ट: यहां पहले होने वाले जलभराव और कमजोर ड्रेनेज से निपटने के लिए अत्याधुनिक साइफोनिक ड्रेनेज सिस्टम (वैक्यूम आधारित सक्शन तकनीक) और ओवरफ्लो डाउनटेक पाइप (इमरजेंसी बैकअप पाइप) लगाए गए हैं, जो पानी को छत पर जमा नहीं होने देंगे। टर्मिनल-2 की छत: स्काईलाइट और छतों से पानी का रिसाव रोकने के लिए पूरी छत की व्यापक स्तर पर वाटरप्रूफिंग की गई है और सभी जोड़ों की बारीक मरम्मत पूरी हो चुकी है। रनवे व एयरसाइड: विमानों के पहियों तक पानी भरने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए हाई-कैपेसिटी डीवाटरिंग पंप स्थापित किए गए हैं और नालियों की सघन गाद सफाई (डीसिल्टिंग) का काम पूरा कर लिया गया है। बैकअप और समन्वय पर विशेष जोर इस बार डायल सिर्फ नए ड्रेनेज सिस्टम के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि उसने बैकअप प्लान भी तैयार किया है। आपात स्थितियों के लिए एक समर्पित क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) बनाई गई है, जो किसी भी लीकेज या जलभराव की स्थिति में तुरंत एक्शन के लिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर 24 घंटे तैनात रहेगी। इसके साथ ही बाहरी पानी को रोकने के लिए भी व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। अक्सर एयरपोर्ट के आसपास बसे इलाकों का वर्षा जल बैकफ्लो मारकर एयरपोर्ट परिसर में घुस जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डायल ने दिल्ली सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इस बाहरी पानी को एयरपोर्ट में आने से पहले ही डाइवर्ट करने का प्लान बनाया है।