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आधार सेवाओं का विस्तार, 22 नए जिलों में यूआईडीएआई केंद्रों का संचालन शुरू

लखनऊ  प्रदेश के 22 और जिलों में आधार सेवा केंद्रों का संचालन शुरू हो गया है। अब इनकी संख्या कुल 32 हो गई है। ये सेवा केंद्र सीधे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से संचालित किए जाते हैं। यहां की क्षमता अधिक होती है, जिससे एक दिन में अधिक से अधिक लोगों को आधार सेवा संबंधी सेवा उपलब्ध कराई जाती है। पहले 12 जिलों में ही इस तरह के आधार सेवा केंद्र संचालित हो रहे थे। इसमें लखनऊ, आगरा, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, कानपुर, गोंडा, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और गाजियाबाद शामिल थे। अब इसमें 22 और जिले जुड़ गए हैं। इसमें अलीगढ़, अयोध्या, हापुड़, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, उन्नाव, हाथरस, सीतापुर, बलरामपुर, मथुरा, इटावा, मैनपुरी, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, अमेठी, बस्ती और चंदौली है। सुविधा के शुरू होने से इन जिलों व आसपास जिलों के रहने वालों को आधार सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल रही हैं। कम समय में काम हो रहा है और एक दिन में अधिक लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कुल 32 जिलों में ये सुविधा शुरू हो चुकी है। 39 जिलों में इस तरह के सेवा केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए दफ्तर के लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। मैनपॉवर व मशीनें आदि उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक दो महीने में इन जिलों में भी आधार सेवा केंद्र शुरू कर दिए जाएंगे। इसलिए इन केंद्रों पर है सहूलियत जिन जिलों में यूआईडीएआई द्वारा संचालित केंद्र नहीं हैं वहा बैंकों व पोस्ट ऑफिसर में आधार संबंधी कार्य होते हैं। वहां की क्षमता कम है लिहाजा कम आवेदन ही स्वीकार किए जाते हैं। यूआईडीएआई से सीधे संचालित केंद्रों पर सभी सुविधाएं हैं। इसलिए इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलता है।  

पेपर लीक पर जवाबदेही तय हो: सोनम वांगचुक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में सरकार पर निशाना

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को तब और बल मिला जब शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंच पर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से विरोध-प्रदर्शन पसंद नहीं है, लेकिन जब न्याय की मांगों को अनसुना किया जाता है तो लोगों को आवाज उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता है और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सोनम वांगचुक ने कहा कि बार-बार परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। ऐसे में जवाबदेही तो तय करनी पड़ेगी। राजनीति में आएंगे सोनम वांगचुक? वांगचुक ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि नेताओं मंत्रियों और नौकरशाहों के बच्चों को सरकारी स्कूलों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग व्यवस्था चला रहे हैं, उन्हें उसी व्यवस्था का अनुभव भी करना चाहिए। मंच के सामने मौजूद छात्रों ने कई बार उन्हें शिक्षा मंत्री बनने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने किसी भी राजनीतिक भूमिका में आने की संभावना को खारिज कर दिया। अभीजीत दीपके ने क्या कहा? इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की मांगों पर ध्यान देने के बजाय सोशल मीडिया गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। दीपके ने कहा कि पिछले एक महीने से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने मंच से कहा कि समाज के कुछ वर्ग दबाव में समझौता कर सकते हैं, लेकिन देश के छात्र और युवा अभी भी अपने अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दोपहर करीब तीन बजे गर्मी से दीपके की बिगड़ गई। हालांकि, अंत में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। 'अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे' दीपके ने कहा कि आज का प्रदर्शन समाप्त हो रहा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हम अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे। अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते है तो यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। हम पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे और स्टूडेंट्स की आवाज को हर राज्य और हर शहर तक पहुंचाएंगे। विभिन्न छात्र और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन देखने को मिला। जेएनयू के वर्तमान और पूर्व छात्र नेताओं ने भाग लिया। सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी जंतर-मंतर पहुंचे। 'परिवार को धमकियां, छोड़ना पड़ा घर' प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक मेसेज साझा किया। उन्होंने लिखा कि वह अपने माता-पिता से मिलने घर लौट रहे हैं, जिनसे उनकी मुलाकात एक साल से अधिक समय से नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 दिन के दौरान उनके परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ा और उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। दीपके ने कहा कि अब वह अपने माता-पिता को वापस घर ले जाएंगे। अपने मेसेज में उन्होंने समर्थकों का आभार जताते हुए लिखा कि आज का प्रदर्शन सिर्फ एक ट्रेलर था।  

पेपर लीक का झांसा देकर छात्रों से ठगी, लखनऊ से आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूलने वाले एक फर्जी रैकेट का खुलासा हुआ है. यूपी STF ने लखनऊ से ओम कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह टेलीग्राम पर 'पेपर लीक' जैसे चैनल बनाकर परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका देने का झांसा देता था. इसके बदले हर परीक्षार्थी से करीब 2 हजार रुपये लिए जाते थे. सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं. इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोग उन्हें आसान रास्ता दिखाने का लालच देते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया है, जहां टेलीग्राम के जरिए कथित ‘पेपर लीक’ का खेल चलाया जा रहा था. यूपी STF के मुताबिक, आरोपी ओम कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. वह मूल रूप से बिहार के पटना जिले का रहने वाला बताया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर फर्जी दावा करता था कि उसके पास परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद है. न्यूज एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने टेलीग्राम पर कई चैनल बना रखे थे. इनमें 'पेपर लीक' जैसे नाम इस्तेमाल किए जाते थे ताकि छात्रों को भरोसा हो जाए. UP CNET परीक्षा को लेकर भी कुछ ऐसे चैनल चलाए जा रहे थे. दावा किया जाता था कि परीक्षा से एक दिन पहले असली प्रश्नपत्र और उसके जवाब दिए जाएंगे. इस काम के लिए आरोपी छात्रों से 2 हजार रुपये लेता था. टेलीग्राम चैनल पर QR कोड भेजे जाते थे, जिन पर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे. STF का कहना है कि कम रकम होने की वजह से कई छात्र जल्दी भरोसा कर लेते थे और शिकायत भी कम करते थे. जांच में सामने आया कि परीक्षा वाले दिन चैनल बंद कर दिए जाते थे. इसके बाद दूसरी परीक्षा के नाम पर नया चैनल बना लिया जाता था. पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह साल 2022 से अपने कुछ साथियों के साथ ऐसा कर रहा था. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद STF ने जांच शुरू की थी. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की ओर से शिकायत भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही ऐसे दूसरे गैंगों की भी तलाश की जा रही है, जो सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह फैलाकर छात्रों से पैसे ऐंठते हैं.  

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को मिलेगा बढ़ावा, खेल ढांचे के विस्तार पर जोर

पटना बिहार में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं। सम्राट चौधरी सरकार ने साफ किया है कि बिहार में अब ओलंपिक जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेलों को बिहार में ओलंपिक स्तर की सुविधाएं दी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियमों का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा करने और इनके संचालन एवं रख-रखाव की व्यवस्था पीपीपी मॉडल के माध्यम से करने का निर्देश दिया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और तमाम उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। विश्वस्तरीय खेल अवसंरचनाओं का निर्माण चरणबद्ध ढंग से कराया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले युवा एवं प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। बेहतर खेल प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के साथ-साथ उन्हें ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने खेल विश्वविद्यालय, राजगीर में ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने का कहा, जिनमें नवाचार, देशस्तर पर उपयोगी एवं रोजगार की अधिक संभावनाएं हों। जिला स्तरीय खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा इनके संचालन एवं रख-रखाव के लिए पीपीपी मॉडल की संभावनाओं का आकलन किया जाए। इसके पहले खेल सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने खेल अवसंरचना का विकास, विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, प्रोत्साहन एवं सम्मान तथा खेल विकास की भावी कार्य योजना की जानकारी दी। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह व संजय कुमार सिंह, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविन्द्रण शंकरण, खेल निदेशक आरिफ अहसन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सवों एवं खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने समक्षा बैठक के दौरान कहा कि पंचायत खेल क्लबों से पुराने खिलाड़ियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को विकसित किया जाए। साथ ही जिला एवं प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार करने का भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया। पटना के डुमरी खेल परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनेगा मुख्यमंत्री ने पटना के डुमरी खेल परिसर में सभी खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण तथा राजगीर में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर तक पूर्ण करने का निर्देश दिया। कहा कि राज्य की कुल 8053 ग्राम पंचायतों में से 5266 में खेल मैदान का निर्माण हो चुका है। शेष का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण होगा। उन्होंने ग्राम पंचायतों में वीबी जी रामजी के माध्यम से खेल मैदानों के निर्माण का निर्देश दिया।

जीआरपी समीक्षा में सीएम योगी ने महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर दिया जोर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार रात राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने खासकर भर्ती परीक्षाओं व बड़े आयोजनों के दौरान यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखे जाने का कड़ा निर्देश दिया। प्रदेश में आठ, नौ व 10 जून को सिपाही भर्ती की बड़ी परीक्षा होनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम तथा परिणामोन्मुख बनाया जाए। यूपी देश का सबसे बड़ा रेल यातायात वाला राज्य है, जहां प्रतिदिन लाखों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, महिला सम्मान, अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए तथा जीरो टालरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाए। रेलवे परिसरों, प्लेटफार्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 1867 में स्थापित जीआरपी उत्तर प्रदेश वर्तमान में छह अनुभागों, 65 थानों तथा 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है। प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, लगभग 1550 रेलवे स्टेशनों तथा 30 लाख से अधिक रेल यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व जीआरपी निभा रही है। उन्होंने हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2027 को लेकर अभी से तैयारियां शुरू किए जाने और विस्तृत कार्ययोजना बनाए जाने का भी निर्देश दिया। रेलवे ट्रैक की हो नियमित निगरानी मुख्यमंत्री ने रेलवे ट्रैक और ट्रेन सुरक्षा की समीक्षा के दौरान रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय और बेहतर करने का निर्देश दिया। बताया गया कि रेलवे ट्रैक सुरक्षा के लिए संयुक्त गश्त, ड्रोन एवं सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन, निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, मुखबिर तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा कबाड़ बाजारों एवं संवेदनशील स्थलों की निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह रुके मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि जनजागरूकता, सुरक्षा चौपाल, अभिभावकों और युवाओं की काउंसिलिंग, रेल मित्र नेटवर्क, त्वरित अभियोजन तथा प्रभावी निगरानी के परिणामस्वरूप विभिन्न रेल मंडलों में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे स्टेशन के प्रवेश व निकास नियंत्रण, कतार प्रबंधन, सार्वजनिक घोषणाओं, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी तथा रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से भीड़ नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए। महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। रेलवे नेटवर्क में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन अभियानों को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों ने बताया कि आपरेशन मुस्कान के तहत एक जनवरी से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को बरामद किया गया। विभिन्न अभियानों के माध्यम से अब तक 2325 व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता प्राप्त हुई है। बैठक में यह भी बताया गया कि हरदोई जीआरपी थाना उत्तर भारत का पहला आईएसओ 9001 प्रमाणित जीआरपी थाना बन चुका है।

पंजाब भाजपा में बदलाव की बयार, नए चेहरे के साथ बदला 2027 चुनाव का पूरा गेमप्लान

चंडीगढ़  पंजाब भाजपा में प्रदेशाध्यक्ष बदलने का फैसला केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा। सुनील जाखड़ की जगह केवल सिंह ढिल्लों को कमान सौंपने को पार्टी की चुनावी दिशा में बदलाव और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पुनर्संतुलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक रूप से यह फैसला ऐसे समय आया है जब पंजाब की राजनीति अपने सबसे दिलचस्प दौर में प्रवेश कर रही है।सत्ता में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार अब शासन के मूल्यांकन के दौर में है। कांग्रेस नेतृत्व और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) अपने पुराने प्रभाव को फिर से खड़ा करने की लड़ाई लड़ रहा है। इसी बीच भाजपा ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने साफ कर दिया कि वह अब पंजाब में केवल उपस्थिति नहीं, हिस्सेदारी बढ़ाने की राजनीति करना चाहती है। प्रदेशाध्यक्ष बदलने के इस फैसले को समझने के लिए केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि पंजाब की बदलती राजनीति को पढ़ना होगा। प्रदेशाध्यक्ष बदलकर भाजपा ने केवल अपने कार्यकर्ताओं को संदेश नहीं दिया है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए भी संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने अब अपना पारंपरिक सामाजिक आधार बचाए रखने की चुनौती होगी। आप को सत्ता विरोधी माहौल को संभालना होगा। वहीं अकाली दल के लिए यह संकेत है कि भाजपा अब पुराने गठबंधन वाले ढांचे में लौटने के बजाय स्वतंत्र विस्तार की राह पर भी आगे बढ़ रही है। फिलहाल इतना साफ दिखाई देता है कि पंजाब भाजपा ने प्रदेशाध्यक्ष बदलकर केवल नया चेहरा नहीं चुना। उसने 2027 की लड़ाई के लिए अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। अब असली सवाल यह नहीं कि ढिल्लों अध्यक्ष के तौर पर कितने सफल होंगे। सवाल यह भी है कि क्या भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक पहचान की नई परिभाषा को गढ़ पाएगी। केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेशाध्यक्ष बनाना पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती से निपटने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन टूटने के बाद भाजपा को पहली बार यह समझ आया कि पंजाब में स्वतंत्र राजनीतिक ताकत बनने के लिए उसे अपने सामाजिक आधार का विस्तार करना होगा। –-राजनीतिक खालीपन को पढ़ रही भाजपा पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक अकाली दल सिख नेतृत्व और ग्रामीण सामाजिक आधार का सबसे बड़ा केंद्र रहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है और भाजपा शायद इसी बदलते परिदृश्य को अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी चाहती है कि सिख समाज का एक हिस्सा उसे भी राजनीतिक विकल्प के रूप में देखना शुरू करे। इसी वजह से ढिल्लों का चयन केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक राजनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। –भाजपा के लिए अस्तित्व नहीं, विस्तार की परीक्षा आने वाला विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए केवल सीटों का मुकाबला नहीं होगा। यह चुनाव तय करेगा कि पार्टी पंजाब में गठबंधन आधारित राजनीति से आगे निकलकर स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति बन पाती है या नहीं। भाजपा के सामने चुनौती कई स्तरों पर है। उसे अपना शहरी आधार बनाए रखना होगा। सिख मतदाताओं में भरोसा बनाना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन खड़ा करना होगा और राज्य के वास्तविक मुद्दों को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना होगा।

बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े युवा, सुकमा में आत्मसमर्पण के बाद बदल रही जिंदगी की तस्वीर

जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य :  सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी जिन हाथों में कभी हथियार थे, अब वे बनाएंगे गरीबों के आशियाने सोड़ी हूंगी और पदम रैनू जैसे युवाओं के जीवन में लौटी उम्मीद, हुनर ने दिया सम्मान से जीने का नया आधार सुकमा में पुनर्वास की अनूठी पहल बनी राष्ट्रीय मिसाल, 280 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता रायपुर, बस्तर की पहचान लंबे समय तक संघर्ष, भय और नक्सल हिंसा के साये से जुड़ी रही है। सुकमा जैसे जिले के घने जंगलों में ऐसी कई पीढ़ियां बड़ी हुईं, जिन्होंने विकास से ज्यादा बंदूक की आवाज सुनी, स्कूल से ज्यादा भय देखा और सपनों से ज्यादा संघर्षों का सामना किया। लेकिन आज उसी सुकमा से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आ रही है, जो केवल बदलाव की नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास की कहानी है। यह कहानी उन युवाओं की है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे अपने हाथों में निर्माण के औजार लेकर समाज के विकास में भागीदार बनने की तैयारी कर रहे हैं। यह कहानी उन बेटियों की है, जिन्होंने जंगलों की अनिश्चित जिंदगी छोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है। यह कहानी उस प्रशासनिक संवेदनशीलता की है, जिसने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को केवल मुख्यधारा में लौटने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का नया आधार भी दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयासों से 25 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। यह प्रशिक्षण केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं, बल्कि जिंदगी को नए सिरे से गढ़ने का अवसर बन गया है। जंगलों की खामोशी से निर्माण स्थलों की रौनक तक इन युवाओं का अतीत संघर्षों से भरा रहा है। जंगलों में बिताए वर्षों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीना सिखाया, लेकिन भविष्य के सपने देखने का अवसर नहीं दिया। आज जब वे प्रशिक्षण केंद्र में ईंट जोड़ना, दीवार खड़ी करना और मकान बनाना सीख रहे हैं, तब वे केवल भवन निर्माण नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी टूटी हुई उम्मीदों को भी फिर से जोड़ रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, माप-जोख, चिनाई, प्लास्टर और भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। आने वाले समय में यही युवा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ अब किसी गरीब परिवार के सपनों का घर खड़ा करेंगे। सोड़ी हूंगी : अब जिंदगी में डर नहीं, सपनों की जगह है कोंटा क्षेत्र के अरलमपल्ली गांव की रहने वाली सोड़ी हूंगी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिनके जीवन ने यह साबित किया है कि अवसर मिले तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, बदलाव संभव है। हूंगी बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब जीवन में हर दिन अनिश्चितता थी। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा, सम्मान और सीखने का अवसर दिया। आज वे राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रही हैं और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। उनकी आंखों में आत्मविश्वास झलकता है जब वे कहती हैं, अब हम किसी पर बोझ नहीं रहेंगे। अपने हाथों की मेहनत से कमाएंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। हूंगी जैसी कई महिलाओं के लिए यह प्रशिक्षण केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्र पहचान का माध्यम बन गया है। ’पदम रैनू: ‘सरकार ने हमें भटकने से बचाया’ जगरगुंडा के मंडीमरका गांव के निवासी ’पदम रैनू’ की कहानी भी उतनी ही भावुक और प्रेरणादायक है। जंगलों में बीते वर्षों को याद करते हुए वे कहते हैं कि वहां जीवन केवल संघर्ष और अनिश्चितता का पर्याय था। न रहने का ठिकाना, न भविष्य की कोई गारंटी। हर दिन नई चिंता होती थी। लेकिन आज हमें रहने की सुविधा मिली है, सीखने का अवसर मिला है और सबसे बड़ी बात यह कि सम्मान मिला है। सरकार ने हमें भटकने से बचाया और जीने का नया रास्ता दिखाया। पदम की यह बात केवल उनकी व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं की आवाज है, जिनके जीवन में पुनर्वास योजनाओं ने नया विश्वास पैदा किया है। एक पहल जिसने बदल दी दो तस्वीरें जिला प्रशासन की यह पहल केवल आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास तक सीमित नहीं है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के विकास पर भी दिखाई दे रहा है। सुकमा के अनेक दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय से कुशल राजमिस्त्रियों की कमी महसूस की जाती रही है। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होती थी। अब प्रशिक्षित युवा न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता बना रहे हैं, बल्कि जिले के विकास कार्यों को भी नई गति देने वाले हैं। इस प्रकार एक ही पहल ने दो बड़े लक्ष्य साध लिए हैं, एक ओर युवाओं को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिला, दूसरी ओर विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन प्राप्त हुआ। 280 से अधिक युवाओं की जिंदगी में आया बदलाव कलेक्टर अमित कुमार बताते हैं कि आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि व्यक्ति को समाज का जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने की यात्रा है। इसी सोच के साथ अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुनर्वासित युवाओं को ऐसा कौशल मिले, जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। यही कारण है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बदलते बस्तर की नई पहचान आज सुकमा की यह कहानी केवल सरकारी योजना की सफलता नहीं है। यह उस विश्वास की जीत है, जो कहता है कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए। यह उस संवेदनशील शासन व्यवस्था की कहानी है, जिसने भटके हुए युवाओं में भी संभावनाएं देखीं। यह उस बदलते बस्तर की कहानी है, जहां अब विकास की चर्चा होती है, रोजगार की बात होती है और सपनों को सच करने की कोशिश होती है। कभी जिन पगडंडियों पर भय … Read more

गोल्ड वैल्यू में बड़ी गिरावट से बढ़ी चर्चा, RBI ने साफ किया- रिजर्व का सोना सुरक्षित है

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक के गोल्‍ड रिजर्व वैल्‍यू में गिरावट आई है. यह वैल्‍यू 2 अरब डॉलर से ज्‍यादा कम हो चुका है. RBI के नए वीकली रिपोर्ट में 29 मई, 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान उसके सोने के भंडार की वैल्‍यू में 2.19 अरब डॉलर की गिरावट आई है।  इस गिरावट से बाजार में यह अटकलें लगने लगीं कि RBI ने अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्‍सा बेच दिया होगा, लेकिन गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक का गोल्‍ड रिजर्व बरकरार है, बल्कि इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई है।  RBI के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई तक गोल्‍ड रिजर्व की वैल्‍यू 112.60 अरब डॉलर थी. इसी सप्ताह के दौरान, फॉरेन करेंसी असेट (भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक) में 3.12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई और यह बढ़कर 546.15 अरब डॉलर हो गया. गोल्‍ड रिजर्व की रिपोर्ट किए गए वैल्‍यू में गिरावट के बावजूद, विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में बढ़ोतरी ने देश की पूरी रिजर्व स्थिति को मजबूत करने में मदद की।  सोने के भंडार में गिरावट?  RBI ने स्पष्ट किया कि सोने के भंडार में गिरावट खासतौर पर वैल्‍यू में बदलाव के कारण हुई है, न कि कीमती धातु की बिक्री के कारण. सोने के भंडार अमेरिकी डॉलर में दर्ज किए जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्राइस के आधार पर हर सप्ताह इनका वैल्‍यूवेशन किया जाता है. इसी कारण, वैश्विक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा के परिवर्तन भंडार के रिपोर्ट किए गए प्राइस को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं, चाहे केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोने की मात्रा अनचेंज रहे।  शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है जिनमें यह सुझाव दिया गया है कि आरबीआई ने सोना बेचा है. उन्‍होंने  कहा कि नहीं, RBI ने सोना नहीं बेचा है. हमारे सोने के भंडार में मामूली बढ़ोतरी हुई है।  RBI ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्टों का खंडन किया यह स्पष्टीकरण ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के एक विश्लेषण के बाद आया है जिसमें सुझाव दिया गया था कि भंडार के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 22 मई को समाप्त होने वाले दो सप्ताह की अवधि के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर वैल्‍यू के सोने की बिक्री हुई, जबकि इसी अवधि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि हुई. इस विश्लेषण के कारण यह अटकलें लगाई गईं कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक ने रुपये को सहारा देने या अपनी विदेशी मुद्रा स्थिति को मजबूत करने के लिए सोने के भंडार का उपयोग किया होगा।  हालांकि, आरबीआई ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके पास मौजूद सोने का फिजिकल रिजर्व 880.52 टन पर अनचेंज है. केंद्रीय बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि सोने के भंडार के प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव को वास्तविक भंडार में होने वाले बदलाव से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें लाभ और नुकसान भंडार प्रबंधन की एक नियमित प्रक्रिया है।  पीआईबी ने भी खबरों का किया खंडन  सरकार की सूचना जांच एजेंसी, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने भी सोने की बिक्री से जुड़ी खबरों को 'फर्जी' बताया. आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए, पीआईबी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है. सितंबर 2025 के अंत में कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92% थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70% हो गई और 22 मई 2026 तक और बढ़कर 16.85% हो गई। 

विद्यार्थियों के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड रहेंगे डिजिटल रूप से सुरक्षित, प्रदेश में अपार आईडी (APAAR-ID) निर्माण के लिए विशेष अभियान शुरू

भोपाल  प्रदेश के सभी विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित और एक ही जगह पर उपलब्ध हो, इस उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में अपार आईडी निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी की अपार आईडी बनाने का कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रदेश की समस्त स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को मेगा अपार दिवस का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश में 1 करोड 39 लाख से अधिक स्‍कूली विद्यार्थियों की बनेगी अपार आईडी स्‍कूल शिक्षा के आंकडों के अनुसार प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 39 लाख 38 हजार स्कूली विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जाएगी। अब तक 93 लाख 97 हज़ार विद्यार्थियों की अपार आईडी का निर्माण हो चुका है। शेष 44 लाख 47 हज़ार विद्यार्थियों की अपार आईडी का निर्माण आगामी 30 जून तक पूरा जाएगा। प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक लगभग 1 करोड़ 39 लाख 38 हजार विद्यार्थी नामांकिंत हैं। इनमें शासकीय स्‍कूलों के 70 लाख 09 हज़ार 516 विद्यार्थी तथा अशासकीय स्‍कूलों के 69 लाख 28 हज़ार 218 विद्यार्थी शामिल हैं। प्रत्‍येक शनिवार स्‍कूलों में  मेगा अपार दिवस का आयोजन प्रदेश की सभी स्कूलों में "मेगा अपार दिवस" का 30 जून तक आयोजन किया जाएगा। यह प्रत्येक शनिवार को होगा। इसी कडी में आज 6 जून को स्कूलों में पहले अपार दिवस का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों ने अपना अपार पंजीयन कराया। अपार आईडी के लाभ अपार आईडी किसी भी विद्यार्थी के लिए जीवन भर की डिजीटल शैक्षणिक पहचान होती है। इसमें विद्यार्थी के सभी शैक्षणिक रिकॉर्डस एक जगह सुरक्षित रहते हैं। यह एक डिजीटल और पेपरलेस रिकार्ड सिस्‍टम है। अपार आईडी, छात्रवृति, प्रवेश एवं सरकारी योजनाओं में सहायक होने के साथ ही कहीं भी कभी भी उपयोगी होगी है। विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्मित करवाने के लिए आयुक्‍त लोक शिक्षण और संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र ने मई माह में संयुक्‍त हस्‍ताक्षर से सभी जिला कलेक्‍टर्स को पत्र प्रेषित किया था। जिसके अनुक्रम में इन शिविरों में अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यालय में आमंत्रित कर नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण कराई जा रही है। स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिले एवं विकासखंड-वार “अपार" आईडी विहीन विद्यार्थियों” की विद्यालयवार सूची तैयार कर मैदानी अधिकारियों को उपलब्‍ध कराई गई है। जिन विद्यार्थियों के पास आधार नहीं है, उनके लिए स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला आधार नामांकन केंद्र/ बैंक/ डाकघर के माध्यम से आधार नामांकन का कार्य भी प्राथमिकता से करवाया जा रहा है। जिससे आधार के अभाव में इस अपार आईडी के निर्माण में कोई बाधा ना आए। विद्यार्थियों के आधार नामांकन में अथवा UDISE+ पोर्टल पर नाम की भिन्नता, आधार सीडिंग त्रुटि अथवा पालक/ अभिभावक की सहमति संग्रहण में विलंब जैसी बाधाओं को पहचान कर तत्काल दूर करने के निर्देश भी स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं। जिला, विकासखंड एवं विद्यालय स्तर पर  विशेष व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी निर्माण की प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाने के लिए जिला, विकासखंड एवं विद्यालय स्तर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। विद्यार्थी निर्धारित मेगा दिवस इन स्थलों पर पहुंचकर अपनी आईडी बनवा सकते हैं। अपार आईडी निर्माण के लिए स्कूल के प्रधानाध्‍यापक होंगे उत्‍तरदायी विद्यार्थियों को अपार आईडी पंजीयन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए भारत सरकार द्वारा अपार पोर्टल पर विद्यार्थी के पंजीयन के अधिकार संबंधित शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रधानाध्यापकों को प्रदान किए गए हैं। विद्यार्थी अपनी शाला के प्राचार्य से संपर्क कर अपनी अपार आईडी तैयार करवा सकते हैं। स्‍कूल शिक्षा विभाग के द्वारा यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि  शालावार शत प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार करवाने के लिए स्कूल के प्राचार्य ही उत्‍तरदायी होंगे। क्‍या है अपार आईडी अपार आईडी 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या है। यह छात्र के शैक्षणिक जीवन का डिजिटल पहचान पत्र है। विद्यार्थी के जीवन भर के शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखती है। मार्कशीट, डिग्री, वैज, पुरस्कार, प्रमाणपत्र एवं उपलखियों का डिजिटल संग्रह करती है। भारत सरकार के निर्देशानुसार देश भर के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की APAAR-ID (Automated Permanent Academic Account Registry- APAAR) का शत-प्रतिशत निर्माण 30 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। इस के लिये मध्‍यप्रदेश में स्‍कूल शिक्षा विभाग के द्वारा तेजी से कार्य करते हुए स्‍कूलों में अपार दिवस का आयोजन किया जा रहा है।  

भारत-पाक सीमा पर सख्ती तेज, दीपावली से पहले अवैध ढांचे गिराने की तैयारी

जैसलमेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद करने के लिए बीएसएफ और आईबी एक्शन मोड में हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने एक संयुक्त रणनीति के तहत भारत-पाक बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सर्वे अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्लीन’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हुए सभी प्रकार के अवैध निर्माणों की पहचान करना, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना और इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई संदिग्ध फंडिंग का पर्दाफाश करना है। अमित शाह की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद एक्शन शुरू जैसलमेर की जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बीकानेर दौरे के दौरान एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके तुरंत बाद इस बड़े ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध कब्जे या निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर जमीनों और इमारतों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इस अत्यंत गोपनीय और संयुक्त विशेष सर्वे को शुरू हुए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है। दीपावली से पहले अवैध निर्माणों होंगे ध्वस्त! अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्चाधिकारियों द्वारा इस विशेष सर्वे को अक्टूबर महीने तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त योजना है कि सर्वे और जांच की फाइनल रिपोर्ट तैयार होते ही, आगामी दीपावली त्योहार से पहले-पहले सभी चिन्हित अवैध अतिक्रमणों और अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के लिए पुलिस, राजस्व और स्थानीय प्रशासन सहित सभी संबंधित महकमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा सुरक्षा जांच तथा वित्तीय फंडिंग की स्क्रूटनी होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से उन बड़े और भारी निवेश वाले व्यावसायिक या निजी निर्माणों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक खड़े किए गए हैं। आलीशान निर्माणों की होगी अलग से जांच प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि सीमावर्ती क्षेत्र के भीतर कोई भी ऐसा निर्माण पाया जाता है जिसमें मोटी रकम खर्च की गई है, तो उसकी वित्तीय जांच अलग से की जाएगी। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) जैसी देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। ये एजेंसियां गहराई से यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आलीशान या बड़े निर्माणों के पीछे वास्तविक चेहरे कौन से हैं और इस पैसे का असली स्रोत क्या है। सीमा के इतने नजदीक इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और भारी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, इसलिए एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।