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बिजली से वंचित टोलों पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

लोहरदगा झारखंड के लोहरदगा जिले में अब बिजली से वंचित टोलों और गांवों तक भी बिजली सुविधा पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. जिले के उपायुक्त संदीप कुमार मीणा की अध्यक्षता में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न बिजली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना तथा संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन टोलों और गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए. उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों तक पहुंच पथ उपलब्ध है, वहां जुलाई माह तक हर हाल में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिजली की सुविधा मिल सके. सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अपनाए जाएंगे तकनीकी विकल्प बैठक के दौरान उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने कहा कि जिन दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या पहुंच पथ उपलब्ध नहीं है, वहां विशेष प्रकार के पोल और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुमति प्राप्त कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि तकनीकी चुनौतियों के कारण किसी भी गांव या टोले को बिजली सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. नए चिन्हित गांवों का होगा भौतिक सत्यापन उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि हाल में चिह्नित किए गए गांवों और टोलों का भौतिक सत्यापन किया जाए. सत्यापन के बाद वहां बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके. कोई भी परिवार बिजली से वंचित नहीं रहेगा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा कि जिले का कोई भी परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और अभियंता जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें. बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया.

आशीष तानी पूर्ति की हैट्रिक से भारत बना चैंपियन, जापान को फाइनल में करारी शिकस्त

जापान  भारत ने अंडर-18 हॉकी पुरुष एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल में भारत के सामने डिफेंडिंग चैंपियन जापान की चुनौती थी। इस टूर्नामेंट में जापान की टीम अभी तक अजेय थी। उसने पूल राउंड में भारत को भी हराया था। टीम इंडिया ने कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज हॉकी स्टेडियम में मेजबानों को कोई मौका नहीं दिया और 4-1 से जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही भारत टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे सफल देश बन गया है। टीम की यह तीसरी ट्रॉफी है। पाकिस्तान ने दो बार खिताब जीता है। भारत ने दूसरे मिनट में ही गोल दागा मलेशिया को सेमीफाइनल में 8-1 से हराने वाली जापानी टीम फाइनल में कमाल नहीं कर पाई। मैच के दूसरे ही मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। आशीष तानी पूर्ति ने इसपर गोल करके टीम को बढ़त दिला दी। दूसरे क्वार्टर के अंत में 28वें मिनट में आशीष ने भारत की तरफ से दूसरा गोल किया। 30वें मिनट में केतन कुशवाहा ने फील्ड गोल करके अंतर 3-0 कर दिया। आशीष तानी पूर्ति ने लगाई हैट्रिक तीसरे क्वार्टर के चौथे मिनट में आशीष ने भारत के लिए एक और गोल किया। इसके साथ ही उनका हैट्रिक पूरा हुआ और टीम की बढ़त 4-0 की हो गई। जापान की तरफ से नुमादा गाकू ने पेनल्टी कॉर्नर से 52वें मिनट में गोल किया। भारत ने इसके अलावा मेजबान टीम को कोई मौका नहीं दिया और मैच को 4-1 से अपने नाम करके खिताब जीत लिया। आशीष हाईएस्ट गोल स्कोरर रहे आशीष तानी पूर्ति ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 13 गोल दागे। भारत के केतन कुशवाहा और साउथ कोरिया के यूं जेह्योक 8-8 गोल के साथ दूसरे नंबर पर रहे। फाइनल मुकाबले में भारत को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले। तीनों पर ही आशीष ने गोल दागे। वहीं जापान को चार पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन टीम इंडिया ने उन्हें सिर्फ एक ही गोल दागने दिया।

IAS अशोक खेमका को राहत: हाई कोर्ट ने समानता के आधार पर दिया बड़ा निर्णय

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिये खेमका को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल किए जाने का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया है तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वर्ष 2010 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं मिला। केंद्र सरकार ने कहा था कि उन्होंने भारत सरकार में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है, इसलिए वे पात्र नहीं हैं। खेमका ने इस निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई आईएएस अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया है, जबकि उनके पास भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव नहीं था। उन्होंने 20 ऐसे अधिकारियों की सूची पेश की, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारी शामिल थे। इनमें से कई अधिकारियों को शून्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार ने याचिका में उठाए गए इन तथ्यों का कोई प्रभावी खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि नियमों में छूट देने की शक्ति मौजूद है और उसका उपयोग अन्य समान अधिकारियों के पक्ष में किया गया है, तो अशोक खेमका को वही लाभ नहीं देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। फिर भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में जिन आयोगों, प्राधिकरणों, ट्रिब्यूनलों या अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल होना वांछनीय या प्राथमिक योग्यता माना जाता है, वहां अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा और उन्हें एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों के लिए समान अधिकार प्रदान कर दिए।

SAIL-BHEL पर संकट: कमजोर प्रदर्शन के बाद महारत्न दर्जे पर सवाल

बोकारो  भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) का महारत्न दर्जा खतरे में पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी कर वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी। एक वर्ष बाद पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि निर्धारित वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। 5 हजार करोड़ रुपये का चाहिए वार्षिक लाभ सरकार के नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उसे चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी अपेक्षित वित्तीय प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण लोक उद्यम विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है। विभाग ने कंपनी प्रबंधन को लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। सेल को 2010 और भेल को 2013 में मिला था दर्जा गौरतलब है कि सेल को मई 2010 में तथा भेल को फरवरी 2013 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था। महारत्न का दर्जा मिलने से कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। ऐसे में यह दर्जा बनाए रखना दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रतिष्ठा और कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

लगातार तीन बार सही अनुमान के बाद फिर चर्चा में क्लेमेंट, नीदरलैंड्स को बताया विजेता

नई दिल्ली जर्मनी के गणितज्ञ योआखिम क्लेमेंट की पिछले तीन फीफा विश्व कप की भविष्यवाणी सच हुई है। 2014 में जर्मनी, 2018 में फ्रांस और 2022 में उन्होंने अर्जेंटीना को चैंपियन बनने का अनुमान लगाया था। उनके तीनों ही अनुमान सही हुए थे। फीफा विश्व कप 2026 के शुरू होने में एक हफ्ते से भी कम का समय बचा हुआ है। योआखिम क्लेमेंट के अनुमान के अनुसार इस बार नीदरलैंड्स की टीम खिताब जीतेगी। योआखिम क्लेमेंट का कहना है कि उन्होंने यह मॉडल यह दिखाने के लिए बनाया था कि विश्व कप विजेता का अनुमान लगाना लगभग असंभव है। 2014 में जब उनकी भविष्यवाणी सही निकली और जर्मनी चैंपियन बना, तो वे खुद भी हैरान रह गए थे। उन्होंने कहा, 'जब जर्मनी ब्राजील में विश्व चैंपियन बना तो मैं चौंक गया था, क्योंकि अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि कोई भी यूरोपीय टीम दक्षिण अमेरिका में विश्व कप नहीं जीत सकती।' कैसे काम करता है क्लेमेंट का मॉडल? योआखिम क्लेमेंट का मॉडल कई अहम बातों को ध्यान में रखता है। जैसे- किसी देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी, उस देश की आबादी, लोगों में फुटबॉल की लोकप्रियता, फीफा रैंकिंग में टीम की स्थिति। इसके साथ ही लक का भी एलिमेंट है। क्लेमेंट इस बात पर भी जोर देते हैं कि किस्मत का रोल फुटबॉल में बहुत बड़ा होता है। किसे हराकर चैंपियन बनेगा नीदरलैंड्स? अपने मॉडल के अनुसार क्लेमेंट का अनुमान है कि नीदरलैंड सेमीफाइनल में स्पेन को हराकर फाइनल में पहुंचेगा। दूसरा सेमीफाइनल इंग्लैंड और पुर्तगाल के बीच होगा। इसमें पुर्तगाल को जीत मिलेगी। फाइनल में नीदरलैंड्स की टीम पुर्तगाल के खिलाफ जीत हासिल करेगी। हालांकि उनकी पिछली भविष्यवाणियां सही रही हैं, लेकिन क्लेमेंट खुद लोगों को उनकी भविष्यवाणी पर दांव लगाने से मना करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल लॉटरी जैसा है। अगर कोई मेरी भविष्यवाणी के आधार पर सट्टा लगाता है, तो मैं उसकी मदद नहीं कर सकता।' उन्होंने इसे सिक्का उछालने जैसा बताते हुए कहा कि अगर कोई चार बार लगातार सही अनुमान लगा ले, तो इसका मतलब यह नहीं कि अगली बार भी वही होगा। फीफा विश्व कप में नीदरलैंड्स का सफर नीदरलैंड्स ने अभी तक फीफा विश्व कप का खिताब नहीं जीता है। टीम इस बार ग्रुप एफ में है। इस ग्रुप में जापान, स्वीडन और ट्यूनीशिया की भी टीम है। 1974 और 1978 के अलावा 2010 में टीम फाइनल तक पहुंची थी। 2014 में उसने तीसरे स्थान पर फिनिश किया था। 2018 में क्वालीफाई करने में फेल रहने के बाद 2022 में नीदरलैंड ने फीफा विश्व कप में क्वार्टरफाइनल तक का सफर तय किया था। इस बार टीम का पहला मुकाबला 14 जून को जापान से है।  

ब्राउन’ रिव्यू: करिश्मा कपूर की दमदार वापसी, लेकिन थ्रिलर में रह गई सस्पेंस की कमी

साइकोलॉजिकल थ्रिलर के दीवानों के लिए फैंस की फेवरेट लोलो (करिश्मा कपूर) लेकर आई हैं नई सीरीज 'ब्राउन'. 2016 में आई अभिक बरुआ की नॉवेल 'सिटी ऑफ डेथ' पर बेस्ड ये शो डायरेक्टर अभिनय देव ने बनाया है. पुलिस इंवेस्टिगेशन और ब्रूटल मर्डर मिस्ट्री को दिखाती इस 7 एपिसोड की सीरीज क्या आपको आखिर तक बांधे रखने का दम रखती है? कहानी कोलकाता के एक रसूखदार परिवार की बेटी के दर्दनाक मर्डर से शो शुरू होता है. सिर से धड़ अलग कर पीड़िता को मौत के घाट उतारा गया है. पूरे कोलकाता में सनसनी फैली है. हर तरफ दहशत का माहौल है. पुलिस पर मीडिया और पॉलिटिकल पार्टी की तरफ से आरोपी को पकड़ने का दबाव है. ऐसे में केस की कमान रीटा ब्राउन (करिश्मा), कोलकाता पुलिस फोर्स की डिटेक्टिव, को दी जाती है. रीटा के साथ इस केस पर अर्जुन सिन्हा (सूर्या शर्मा) काम करता है. अपनी पर्सनल लाइफ के ट्रॉमा की वजह से रीटा डिप्रेशन और एल्कोहल से स्ट्रगल कर रही है. वो अतीत की यादों में डूबी रहती है. केस पर काम करते हुए उसे भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है. कहानी में सस्पेंस तब आता है जब एक और लड़की की निर्मम हत्या होती है. रीटा ये मर्डर मिस्ट्री सुलझाते हुए दिल दहला देने वाले शॉक और दर्द से गुजरती है. क्या रीटा सभी चुनौतियों से लड़कर ये केस सुलझा पाती है? इसका जवाब आपको शो देखकर ही मिलेगा. एक्टिंग करिश्मा कपूर के टैलेंट पर हर किसी को भरोसा है. कोई भी रोल हो, वो हर किरदार में अपना बेस्ट ही देती हैं. रीटा ब्राउन के किरदार को उन्होंने बखूबी निभाया है. वो हर इमोशंस को स्क्रीन पर दिखाने में कामयाब रही हैं. इस रोल को करिश्मा ने पूरी तरह नॉन ग्लैमरस और नो मेकअप लुक के साथ प्ले किया है. सूर्या शर्मा ने इंस्पेक्टर अर्जुन सिन्हा के रोल में अच्छा काम किया है. वो करिश्मा को कॉम्पलिटमेंट करते नजर आए. सोनी राजदान ने करिश्मा की मां का रोल किया. वो जब भी स्क्रीन पर दिखीं अच्छी लगीं. जीशू सेनगुप्ता ने साइकेट्रिस्ट संदीप चक्रवर्ती के रोल में बैलेंस एक्ट किया. हालांकि उनका रोल थोड़ा और दमदार लिखा जा सकता था. मेकर्स ने उनके पोटेंशियल को यूज नहीं किया. हेलन ने करिश्मा की रिलेटिव बर्था का रोल किया. वो जब भी दिखीं सीन में फन वाइब ऐड करती नजर आईं. बाकी कलाकारों ने भी अपने पार्ट को अच्छे से प्ले किया. सिंगर शान कैमियो रोल में हैं. कहां रही कमी? सीरीज थोड़ी स्लो पेस में है. ब्राउन जैसे साइकोलॉजिकल और क्राइम थ्रिलर में मेकर्स की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब आखिर तक खूनी का पता ना चले. लेकिन ब्राउन में ये कोशिश फेल हुई है. क्लाइमैक्स से पहले ही निर्मम हत्याएं करने वाला वो खूनी कौन है, ये प्रेडिक्टिबल हो जाता है. ये इस शो का सबसे बड़ा ड्रॉबैक है. स्क्रीनप्ले धीमा है. शो के एपिसोड लंबे खींचे हुए लगते हैं. कहानी में ऐसे मोड़ कम हैं जो आपकी हवाइयां उड़ा दे. क्यों देखें सीरीज? क्राइम थ्रिलर के चाहने वालों के लिए ब्राउन वन टाइम वॉच है. सिनेमैटोग्राफी अच्छी है. कोलकाता की तंग गलियों, डार्कनेस, दुर्गा पूजा की वाइब को कैमरे पर खूबसूरती से दिखाया गया है. बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के पेस के साथ मैच करता है.करिश्मा के लिए ये शो देखा जा सकता है. एक्ट्रेस ने पूरा शो अपने कंधों पर चलाया है. उन्हें कॉप अवतार में देखा जा सकता है.

कक्षा 12 सेवाओं वाले CBSE पोर्टल को बनाया गया निशाना, जांच में जुटी IFSO इकाई

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने सीबीएसई के परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित (पोस्ट रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमलों को लेकर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पोर्टल को कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी सेवाओं के लिए दो जून को शुरू किया गया था। पुलिस के अनुसार, सीबीएसई की ओर से ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस’ (आईएफएसओ) इकाई में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और 43(एफ) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले बोर्ड ने एक बयान में कहा कि उसके ‘पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल’ को निशाना बनाकर किए गए ‘समन्वित और परिष्कृत साइबर हमलों की शृंखला’ के संबंध में दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। बोर्ड ने कहा कि पिछले तीन दिनों से परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित उसके पोर्टल पर लगातार साइबर हमले किए जा रहे थे। इन हमलों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध और नुकसान पहुंचाने वाले ‘इंटरनेट ट्रैफिक’ इस्तेमाल किया गया, जो देश के भीतर और विदेश में मौजूद कई अलग-अलग आईपी एड्रेस से आ रहा था। सीबीएसई ने कहा, ‘चूंकि यह पोर्टल देश भर के लाखों छात्रों को परिणाम के बाद की सेवाएं प्रदान करता है, इसलिए इसके कामकाज में किसी भी प्रकार की बाधा से बड़ी संख्या में हितधारकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने, जनता को काफी असुविधा होने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने और बोर्ड के खिलाफ छात्रों में असंतोष पैदा होने की आशंका है।’ बोर्ड ने आरोप लगाया कि हमलों का स्पष्ट उद्देश्य मंच को बाधित करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच को रोकना और राष्ट्रीय विरोधी तत्वों द्वारा अनधिकृत रूप से जानकारी निकालने का प्रयास करना था। सीबीएसई ने दावा किया कि सभी हमलों को सफलतापूर्वक ‍विफल कर दिया गया और उसके प्रणाली से किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या उस तक अनधिकृत पहुंच का पता नहीं चला। सीबीएसई ने कहा कि आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), सीईआरटी-इन और अन्य केंद्रीय सरकारी एजेंसियों की साइबर सुरक्षा टीम के सहयोग से निरंतर 24 घंटे निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया। कैसे सामने आया यह विवाद? यह घटनाक्रम कक्षा 12 के कुछ छात्रों की शिकायतों को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। कैबिनेट सचिवालय ने मंगलवार को सीबीएसई द्वारा ओएसएम प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।  

KCC योजना: किसानों की खेती को मजबूत बनाने वाला बड़ा वित्तीय साधन

लखनऊ खेती में खर्चों का सिलसिला फसल बेचने से पहले शुरू हो जाता है। किसान को बीज खरीदने होते हैं। खाद और सिंचाई का इंतजाम करना होता है। मजदूरी और मशीन का खर्च भी कई बार तुरंत आ जाता है। ऐसे समय में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को समय पर कर्ज़ लेने में मदद करता है। इससे उन्हें महंगे कर्ज़ पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और गांव की कमाई और खेती से जुड़ी गतिविधियां मजबूत होती हैं। किसानों तक पहुंच रही कर्ज़ की सुविधा वर्ष 2017 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में खेती के लिए 13,42,978.3 करोड़ का कर्ज़ दिया गया। इसके साथ ही नवंबर 2025 तक 492.46 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। यह दिखाता है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों तक खेती के लिए कर्ज़ की सुविधा पहुंची है। किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए कर्ज़लेने में मदद करता है। यह सुविधा बुवाई, फसल की देखभाल और कटाई की तैयारी के समय बहुत काम आती है। कई बार किसान को फसल बेचने से पहले ही पैसों की जरूरत पड़ती है। किसान क्रेडिट कार्ड इसी जरूरत को पूरा करता है। गांवों के लिए क्यों जरूरी है किसान क्रेडिट कार्ड गांव में खेती रुकती है तो कई छोटे काम भी रुक जाते हैं। किसान बीज खरीदता है तो दुकान चलती है। मजदूरी देता है तो गांव में आमदनी बढ़ती है। मशीन किराए पर लेता है तो स्थानीय कामकाज को भी सहारा मिलता है। किसान क्रेडिट कार्ड अचानक आने वाली खेती की जरूरतों में भी मदद करता है। किसान को फसल बिकने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वह जरूरी खर्च के लिए कर्ज़ का उपयोग कर सकता है। इससे खेती का काम बिना रुकावट आगे बढ़ता है। किसान क्रेडिट कार्ड की मुख्य जानकारी ये आंकड़े बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल ऋण उत्तर प्रदेश की गांव की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं। छोटे और सीमांत किसानों को मदद किसान क्रेडिट कार्ड छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। ऐसे किसानों के पास अक्सर बचत कम होती है। खेती का खर्च फसल से होने वाली कमाई से पहले आ जाता है। किसान को बीज, सिंचाई, डीजल, खाद या मजदूरी के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ सकती है। कर्ज़ की सुविधा मिलने से किसान बिना समय गंवाए खेती का काम जारी रख पाते हैं। प्रदेश में किसानों के लिए दूसरे कदम भी उठाए गए हैं। वर्ष 2017 के बाद 86 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को पुराने कर्ज़ का बोझ कम करने में मदद मिली। पीएम-किसान के तहत 3.12 करोड़ किसानों को 22 किस्तों में 99,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। इन कदमों से किसानों को सीधी आर्थिकमदद मिली और खेती की जरूरतों में सहारा मिला। फसल नुकसान पर मदद खेती में कर्ज़ सुविधा तब और उपयोगी होती है जब फसल नुकसान के समय भी किसानों को सहायता मिले। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2017-18 से 2025-26 के बीच 353.14 लाख बीमा वाले किसानों को 5,660.33 करोड़ रुपये की मदद राशि मिली। इससे फसल खराब होने पर किसानों पर आर्थिक दबाव कम होता है। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसानऔर फसल बीमा मिलकर किसानों को मजबूत सहारा देते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड खेती से पहले और खेती के दौरान पैसों की सुविधा देता है। पीएम-किसान सीधी आर्थिक मदद देता है। फसल बीमा नुकसान के समय सहारा देता है। सहकारी बैंकों से बढ़ी कर्ज़ की सुविधा गांवों में ककर्ज़ सुविधा को सहकारी बैंकों से भी मजबूती मिलती है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक का कर्ज़ वितरण 9,190 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,061 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का शुद्ध लाभ 32.82 करोड़ रुपये से बढ़कर 100.24 करोड़ रुपये हो गया। जिला सहकारी बैंकोंका कुल कारोबार भी 28,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 41,234 करोड़ रुपये हो गया। सहकारी बैंक गांवों और किसानों से सीधे जुड़े होते हैं। जब ये बैंक मजबूत होते हैं, तो किसानों और गांव के छोटे कारोबारों को कर्ज़ लेना आसान होता है। इससे खेती, छोटे व्यापार और स्थानीय कामकाज को मदद मिलती है। बीज और खेती की जरूरतों में मदद खेती के लिए कर्ज के साथ अच्छे बीज और जरूरी सामग्री भी समय पर मिलनी चाहिए। वर्ष 2017-18 से 2025 तक किसानों को 546.85 लाख क्विंटल अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बांटे गए। इससे किसानों को बेहतर बीज की सुविधा मिली। जब किसानों को कर्ज और खेती की सामग्री दोनों समय पर मिलते हैं, तो खेती की तैयारी बेहतर होती है। किसान बुवाई और फसल की देखभाल की योजना सही तरीके से बना पाते हैं। पाठकों के लिए नोट: यह लेख एचटी ब्रांड स्टूडियो द्वारा ब्रांड की ओर से तैयार किया गया है और इसमें हिंदुस्तान की कोई भी संपादकीय या पत्रकारिता भागीदारी नहीं है।

भारतीय बेटियों का शानदार प्रदर्शन, हॉकी एशिया कप में तीसरा स्थान हासिल

नई दिल्ली जापान के काकामिगाहारा में खेली जा रही महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 हॉकी प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है। शनिवार को खेले गए तीसरे स्थान के मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को 3-0 से करारी शिकस्त दी। सेमीफाइनल में चीन के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में मिली करीबी हार की निराशा को पीछे छोड़ते हुए भारतीय बेटियों ने मैदान पर जबरदस्त वापसी की और पूरे मैच में कोरियाई टीम पर अपना दबदबा बनाए रखा। टीम इंडिया का शानदार खेल इस अहम मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मैच शुरू होने के दूसरे ही मिनट में संदीप कुमारी ने बेहतरीन मैदानी गोल दागकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी। इस शुरुआती सफलता से भारतीय खिलाड़ियों का हौसला काफी बढ़ गया और उन्होंने कोरियाई रक्षापंक्ति पर दबाव बनाए रखा। मैच के 16वें मिनट में कप्तान स्वीटी कुजूर ने एक और शानदार फील्ड गोल करते हुए भारत की बढ़त को दोगुना (2-0) कर दिया और टीम को एक मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। 33 मिनट में दागा गोल दो गोल की सुरक्षित बढ़त के बाद भी भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने हमले करना बंद नहीं किया। हाफ टाइम के बाद, मैच के 33वें मिनट में टूर्नामेंट की सबसे सफल स्कोरर नुशीन नाज ने अपनी क्लास दिखाते हुए मैच का तीसरा गोल दागा। यह इस प्रतियोगिता में नुशीन का 12वां गोल था जिसने टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर चार्ट में उनकी स्थिति को और मजबूत कर दिया। भारत के मजबूत डिफेंस के आगे दक्षिण कोरियाई टीम मैच में एक भी गोल करने में नाकाम रही और भारत ने 3-0 से मैच जीतकर पोडियम फिनिश सुनिश्चित की। खेल में पहला गोल दागने और शानदार खेल दिखाने के लिए संदीप कुमारी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। ब्रॉन्ज मेडल भी जीता इस पूरे टूर्नामेंट में भारतीय महिला अंडर-18 टीम का प्रदर्शन बेहद कमाल का रहा। टीम ने अपनी अटैकिंग हॉकी का लोहा मनवाते हुए प्रतियोगिता में कुल 36 गोल दागे। इस कांस्य पदक के साथ भारत ने अपने अभियान का एक सुखद अंत किया है जो भविष्य के लिए भारतीय महिला हॉकी की मजबूत नींव को दर्शाता है। गौरतलब है कि टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला शनिवार को ही मेजबान जापान और चीन के बीच खेला जाएगा। पुरुष टीम जीत सकती है गोल्ड महिला टीम की इस सफलता के बीच अब सबकी नजरें भारतीय पुरुष अंडर-18 हॉकी टीम पर टिकी हैं। पुरुष टीम शनिवार को ही भारतीय समयानुसार दोपहर 03:30 बजे पुरुष अंडर-18 एशिया कप 2026 के महामुकाबले में मेजबान जापान से भिड़ेगी जहां उसकी नजरें गोल्ड मेडल जीतने पर होंगी।