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TMC में अंदरूनी संकट गहराया, बैठक में सिर्फ 20 विधायक पहुंचे, 60 रहे नदारद

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सबकुछ ठीक नहीं है। कई विधायक और सांसद नाराज बताए जा रहे हैं। इसको बल रविवार को तब और मिला, जब अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद ममता के घर होने वाली बैठक में 80 में से 60 विधायक पहुंचे ही नहीं। इससे हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, ममता के घर पर रविवार को अहम बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विधायकों को बुलाया गया था, लेकिन बैठक से 60 विधायक गायब रहे, जिससे उसे रद्द करना पड़ गया। हालांकि, बाद में पार्टी की ओर से सफाई पेश की गई कि अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हुए हमले के मामले में तमाम विधायक व्यस्त थे और यही वजह रही कि वे ममता की बैठक में नहीं पहुंचे। एनडीटीवी ने टीएमसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह बैठक पार्टी के विधायक दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने ममता बनर्जी के घर पर बुलाई थी। काफी देर तक विधायकों का इंतजार किया गया, लेकिन जब वे नहीं पहुंचे तो आखिरकार बैठक ही रद्द करनी पड़ी। गैर-हाजिर रहे विधायकों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। इसकी वजह से भी सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या टीएमसी में बड़ी फूट पड़ने वाली है। पिछले महीने हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। खुद भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी चुनाव हार गईं। भाजपा ने कुल 208 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को महज 80 सीटों से संतोष करना पड़ा। इस हार के बाद से ही दबी जुबान में ममता बनर्जी का और टीएमसी की पूर्व सरकार का खुलकर विरोध होने लगा। खुद टीएमसी के कई सांसद और विधायक अपनी ही पार्टी की पूर्व सरकार के खिलाफ आ गए और उसके कई फैसलों का विरोध किया। छह मई को ममता बनर्जी ने हार को लेकर एक बैठक बुलाई, जिसमें लगभग 10 विधायक पहुंचे ही नहीं। सिर्फ 20 विधायक पहुंचे, गायब हुए 60 नेता हुए ‘नॉट रीचेबल’ टीएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण बैठक विधायी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर बुलाई गई थी. बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनावों में मिली हार और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद की स्थिति की समीक्षा करना था. लेकिन जब बैठक शुरू होने का समय आया, तो वहां केवल 20 विधायक ही मौजूद थे. सूत्रों ने बताया कि जो 60 विधायक बैठक से अनुपस्थित रहे, जब पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो वे सभी पूरी तरह से ‘इनकम्युनिकेटो’ (संपर्क से बाहर) पाए गए।  इस महा-फियास्को पर पर्दा डालने के लिए टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने एक कमजोर स्पष्टीकरण देते हुए दावा किया कि जो विधायक बैठक में शामिल नहीं हो सके, वे दरअसल अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के बाद विभिन्न इलाकों में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करने में व्यस्त थे. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का गायब होना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित दूरी है।  फिर्हाद हकीम और मदन मित्रा दीदी के साथ, लेकिन जमीन खिसकी कालीघाट में मचे इस आंतरिक हाहाकार के बीच टीएमसी नेतृत्व के लिए एकमात्र क्षणिक राहत की बात यह रही कि पार्टी के कुछ पुराने और दिग्गज क्षत्रप जैसे फिर्हाद हकीम, नयना बंदोपाध्याय, मदन मित्रा, आशिमा पात्रा और कुणाल घोष बैठक में मौजूद रहे. इन कद्दावर नेताओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वे संकट की इस सबसे काली घड़ी में ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं।  लेकिन यह एकजुटता भी पार्टी के बिखराव को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो रही है. यह आंतरिक विद्रोह ठीक उस समय सामने आया है जब महज 24 घंटे के भीतर सोनारपुर में पार्टी के सेकेंड-इन-कमांड अभिषेक बनर्जी को भीड़ द्वारा पीटा गया और हुगली के चंडीतला में वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के सिर पर हमला किया गया. इन दोनों सिलसिलेवार हमलों को इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि वर्ष 2011 में वामपंथियों को उखाड़कर लगातार तीन बार बंगाल पर राज करने वाली टीएमसी की राजनीतिक जमीन और शासन पर से उसकी लोहे जैसी मजबूत पकड़ अब पूरी तरह ढीली हो चुकी है।  भवानीपुर में सुवेंदु से हार और काकोली घोष का इस्तीफा कभी खुद को अजेय समझने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार भाजपा के हाथों बेहद बुरी तरह चुनाव हार चुकी है, जो कुछ साल पहले तक राज्य में अपनी जमीन तलाश रही थी. इस शर्मनाक हार ने पार्टी के भीतर गंभीर अंतर्कलह और गुटबाजी को जन्म दे दिया है, जहां अब वरिष्ठ नेता खुलेआम ममता बनर्जी की चुनावी रणनीतियों पर सवाल उठा रहे हैं. सबसे बड़ा आघात तब लगा जब खुद ममता बनर्जी अपने सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के पोस्टर बॉय और वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से चुनाव हार गईं।  कैसे भड़की अंसतोष? असंतोष की इसी आग में घी डालते हुए पार्टी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तदार ने हाल ही में टीएमसी के कार्यकारी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को एक बेहद गुस्से से भरी चिट्ठी भेजकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपनी चिट्ठी में उन्होंने ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए पार्टी को ‘पुराने ढर्रे’ और जमीनी तौर-तरीकों पर वापस लौटने की नसीहत दी है।  कई अन्य टीएमसी नेताओं ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि पार्टी अपने मूल आधार यानी ‘मां, माटी, मानुष’ से पूरी तरह भटक चुकी है और ममता बनर्जी सहित शीर्ष नेतृत्व अब आम कार्यकर्ताओं के लिए पूरी तरह ‘इनएक्सेसिबल’ हो चुका है. हालांकि, पार्टी ने सार्वजनिक रूप से आलोचना करने वाले असंतुष्टों पर नकेल कसने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, लेकिन 60 विधायकों की यह खुली बगावत यह साफ बयां कर रही है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और बंगाल की राजनीति में ममता राज का अंत बेहद करीब है।  हालांकि, पार्टी ने तब भी सफाई दी कि चिंता की कोई बात नहीं है और उन विधायकों ने पहले ही जानकारी दे दी थी। उन्हें उनके अपने क्षेत्रों में फैली अशांति के कारण वहीं रहने को कहा गया था। टीएमसी … Read more

अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रगति कार्यों की ली समीक्षा

अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की विकसित भारत अधिनियम की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने के दिए निर्देश प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ की तेज गति पर जताया हर्ष रायपुर अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है कि आम नागरिकों को विकसित भारत अधिनियम के बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी हो। नियमों के लागू होने से पहले यदि लोग इसके प्रति जागरूक होंगे, तो वे योजनाओं का अधिक से अधिक और सही लाभ उठा सकेंगे। अपर मुख्य सचिव ने आगामी 01 जुलाई से लागू होने वाले विकसित भारत अधिनियम 2025 की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस नए अधिनियम के प्रावधानों और नियमों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं।          अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने आज अटल नगर नवा रायपुर स्थित विकास आयुक्त भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) सहित अन्य ग्रामीण विकास कार्यों की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।       प्रधानमंत्री आवास निर्माण की सराहना की        बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत छत्तीसगढ़ में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक आवास पूर्णता और तीव्र निर्माण गति पर  हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभागीय टीम की सराहना की और निर्देशित किया कि विकास की इस गति को निरंतर बनाए रखा जाए, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही पक्के मकान से वंचित न रहे। उन्होंने विभागीय योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और समय-सीमा में लक्ष्यों को पूरा करने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।          इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव धर्मेश साहू, मनरेगा आयुक्त एवं संचालक (प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण) तारण प्रकाश सिन्हा, अपर विकास आयुक्त वी.पी. तिर्की सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित थे।

पंजाब की राजनीति में हलचल तेज, बिक्रम मजीठिया पर केस के बाद घर पहुंची पुलिस

अमृतसर  थाना मजीठा से अकाली कार्यकर्ता को छुड़ाकर ले जाने के आरोप में वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर केस दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद सोमवार को पंजाब पुलिस की टीम मजीठिया के अमृतसर स्थित आवास पर पहुंची। पुलिस की ओर से  विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई, जिसके लिए कई टीमों का गठन किया गया था। इन्हीं में से एक टीम मजीठिया के घर भी पहुंची। पुलिस टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अकाली कार्यकर्ता मौके पर एकत्रित हो गए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। हालांकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई जारी रखी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। गौरतलब है कि मजीठा में उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक पार्टी कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को हिरासत में लेने के बाद थाने में नहीं रखा, बल्कि उसे थाना प्रभारी के सरकारी आवास पर कमरे में बंद कर रखा गया है। सूचना मिलने पर बिक्रम सिंह मजीठिया अपने समर्थकों के साथ थाना मजीठा पहुंचे थे। वहां पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई। अकाली नेताओं का आरोप था कि संबंधित कार्यकर्ता को थाने में पेश नहीं किया गया। इसके बाद मजीठिया और उनके समर्थक उस सरकारी आवास पर पहुंचे जहां कार्यकर्ता को रखा गया था। वहां भी पुलिस और अकाली कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में कार्यकर्ता के वहां से बाहर आने के बाद उसे समर्थक अपने साथ ले गए। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करने और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को छुड़ाकर ले जाने सहित विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज किया। मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया को भी नामजद किया गया है। इसी प्रकरण के सिलसिले में सोमवार को पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर दबिश दी और मजीठिया के आवास पर भी टीम पहुंची। दूसरी ओर, अकाली दल ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए इसका विरोध किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।  

MP STF की लगातार दूसरे दिन रेड, 50 लाख की नशीली कफ सिरप बरामद, मचा हड़कंप

भोपाल राजधानी भोपाल में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 लाख रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप की खेप बरामद की है। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में नशीली दवाओं का संगठित नेटवर्क गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है। एसटीएफ अब इस पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुट गई है। जानकारी के अनुसार 30 और 31 मई की दरमियानी रात एसटीएफ की टीम ने एयरपोर्ट रोड स्थित मुबारकपुर क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली कफ सिरप बरामद की गई। जब्त माल में ऑफ-कफ और ऑनरेक्स ब्रांड की बड़ी खेप शामिल है, जिनका दुरुपयोग युवाओं और नशे के आदी लोगों द्वारा किए जाने की आशंका जताई जा रही है।   आरोपितों को पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसमें उन्होंने बताया कि मुबारकपुर में भी एक मकान में कफ सिरप रखा हुआ है। एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि आरोपित दिल्ली से आनरेक्स और आफ-कफ सिरप मंगाते थे। इनसे एक्सपायरी और बैच नंबर हटाने के लिए रैपर बदल देते थे। यह सिरप ग्रामीण अंचलों में खपाया जाता था। नियमानुसार, डाक्टर के पर्चे के बिना इसे नहीं खरीदा-बेचा जा सकता है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया था एक सप्ताह पहले ही दिल्ली से कफ सिरप मंगाया था। लगभग एक वर्ष से यह धंधा चल रहा था, पर पुलिस को भनक नहीं लगी। संरक्षण देने वालों की तलाश में जुटी एसटीएफ  एसटीएफ को लंबे समय से मुबारकपुर क्षेत्र में नशीली दवाओं के अवैध भंडारण और वितरण की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। एसटीएफ अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि यह खेप कहां से लाई गई, किसके संरक्षण में रखी गई और इसे किन-किन क्षेत्रों में भेजा जाना था। इसके साथ ही इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।  गौरतलब है कि इससे पहले एसटीएफ ने गांधीनगर क्षेत्र की डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में छापेमारी कर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप बरामद की थी। उस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान मामले में भी गिरफ्तार आरोपियों को एसटीएफ ने न्यायालय से पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।  

ड्रोन विवाद के बाद बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए ताबड़तोड़ हमले

तेहरान  ईरान के अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराने के बाद यूएस ने ईरान में रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटर पर बड़ा हमला किया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार, ईरान के अर्द्धसैन्य बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने एक बयान में बताया कि अमेरिकी बलों ने एक द्वीप पर दूरसंचार टावर को निशाना बनाया। इससे पहले कुवैत ने बताया था कि ईरान की ओर से हमला किया गया है। अमेरिका ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए उसने गुरुक और ईरान के केश्म आइलैंड पर बमबारी की है। होर्मुज वाले द्वीप पर भी हमला बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक रूप से युद्धविराम है। हालांकि कई बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका और ईरान दोनों की तरफ से युद्धविराम का उल्लंघन किया गया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका होर्मुज के सिरिक आइलैंड पर हमला करन के लिए कुवैत के एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था। इसीलिए इस एयरबेस को टारगेट किया गया है। ईरान ने फिर खोल दिए मिसाइल अड्डे एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपेयरिंग का काम पूरा होने के बाद ईरान ने एक बार फिर अपने मिसाइल अड्डे खोल दिए हैं। सुरंगों में बनाए गए इन अड्डों को सुरक्षित बनाने के लिए एंट्री को सील कर दिया गया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सैटलाइट इमेजरी से पता चला है कि जिन 69 ठिकानों पर अमेरिका ने हमला किया था उनमें से करीब 50 को फिर से खोला जा चुका है और मेंटिनेंस का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने बुलडोजर और ट्रक का इस्तेमाल करके सारा मलबा साफ कर दिया है और सड़कों को भी दुरुस्त कर दिया गया है। इसके बाद अब ईरान एक बार फिर लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक करने की स्थिति में है। बताया गया कि लगभग सात हफ्ते पहले हुए सीजफायर के बाद ही ईरान ने अपने मिसाइल ठिकानों को रिकवर करने का मिशन शुरू कर दिया था। कहां अटकी है समझौते की बात सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संशोधित मसौदा कई बार मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की अगुवाई में मध्यस्थता की जा रही है। हालांकि अमेरिकी संशोधनों को "महत्वपूर्ण" बताया गया है, लेकिन उनके विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और ईरान ने भी अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फारस की खाड़ी में तनाव के बावजूद ईरान ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में 28 वाणिज्यिक जहाज, जिनमें तेल टैंकर और मालवाहक पोत शामिल हैं, उसकी अनुमति से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। वहीं दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र के कुछ प्लेटफॉर्मों पर उत्पादन आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान दबाव में है। खबरों के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत में मजदूरों और पेंशनभोगियों ने वेतन, पेंशन और बढ़ती महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से मजबूत हो रही सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्य : सीएम विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सामाजिक समरसता, सादगी और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त कर रही : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बेमेतरा में सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नवदंपतियों को दिया आशीर्वाद विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह में शामिल होकर प्रस्तुत की प्रेरणादायी मिसाल, बैलगाड़ी में निकली बारात बनी आकर्षण का केंद्र रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बेमेतरा में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।  मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज में समानता, सामाजिक समरसता, सादगी और सकारात्मक मूल्यों को सशक्त करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन सामाजिक एकता और सहभागिता की भावना को मजबूत करते हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह योजना सम्मानजनक और गरिमापूर्ण विवाह का अवसर प्रदान कर रही है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कृतियों और सामाजिक मूल्यों का मिलन होता है। इस अवसर पर बेमेतरा विधायक दीपेश साहू भी वैवाहिक बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री साय ने विधायक साहू के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सामूहिक विवाह जैसे आयोजन का हिस्सा बनना और सादगीपूर्ण तरीके से विवाह करना समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बैलगाड़ी में बारात निकालकर विधायक दीपेश साहू ने हमारी समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक समरसता को सम्मान देने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह संदेश देता है कि आधुनिक जीवनशैली और सार्वजनिक दायित्वों के बीच भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री साय ने नवदंपतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन विश्वास, प्रेम, सम्मान और पारस्परिक सहयोग की मजबूत नींव पर आगे बढ़ता है। उन्होंने प्रभु राम से सभी नवदंपतियों के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय दाम्पत्य जीवन की प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी जोड़े समाज और परिवार के लिए प्रेरणादायी जीवन का उदाहरण बनें।

बाल यौन शोषण पर सख्त रुख: सहमति का तर्क खारिज, दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश

 नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि व्यावसायिक यौन शोषण के लिए किसी नाबालिग की तस्करी की जाती है, तो दोषियों पर कठोर 'पोक्सो एक्ट' के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने एनजीओ 'प्रज्वला' की याचिका पर यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बाल यौन शोषण का हर मामला कानूनन गैर-सहमति वाला ही माना जाएगा। सहमति का तर्क पूरी तरह खारिज कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मानव तस्करी के मामलों में पीड़ित बच्ची की 'सहमति' का कोई अर्थ नहीं रह जाता, चाहे अपराधी ने डराने, धमकाने या बहलाने-फुसलाने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया हो या नहीं। कोर्ट का पूरा ध्यान अपराधियों की करतूतों और उनकी नीयत पर होना चाहिए। यदि पीड़ित को यह पता भी हो कि उसे वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है, तब भी वह पीड़ित ही रहेगी, क्योंकि काम के हालातों को लेकर उसे धोखे में रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाता है और यह अधिकार सरकार के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी लागू होता है पुनर्वास ही असल सशक्तिकरण सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों को किसी एक कानून के चश्मे से न देखें, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के साथ पोक्सो एक्ट का भी समग्रता से इस्तेमाल करें। पोक्सो लागू होने से पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करने और मेडिकल जांच की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील व सुरक्षित हो जाती है। कोर्ट ने पीड़ितों को सिर्फ 'बचाव का पात्र' मानने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके पुनर्वास पर जोर दिया, क्योंकि बिना पुनर्वास के वे दोबारा उसी दलदल में गिरने को मजबूर हो जाते हैं।

बिहार में शराबबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नया नेटवर्क उजागर

मुजफ्फरपुर बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद धंधेबाजों का नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। अब तस्करों का दायरा सिर्फ दूसरे राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे सीधे विदेशों से भी शराब की खेप मंगवाने से नहीं डर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई विदेशी शराब की एक बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की नींद उड़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नया ट्रेंड एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भूटान से बंगाल सीमा पार कर मुजफ्फरपुर पहुंची खेप उत्पाद विभाग ने मुजफ्फरपुर में छापेमारी कर भूटान निर्मित शराब के 115 कार्टन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज भूटान से चोरी-छिपे सीमा पार कर पहले पश्चिम बंगाल में दाखिल हुए थे। इसके बाद किशनगंज, फारबिसगंज, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा फोरलेन के रास्ते होते हुए इस बड़ी खेप को मुजफ्फरपुर लाकर स्टॉक किया गया था। जांच टीम अब उस गाड़ी और उसके मालिक की पहचान करने में जुटी है, जिसके जरिए इतनी लंबी दूरी तय कर शराब यहाँ पहुँचाई गई। तीन बड़े धंधेबाज फरार, छापेमारी इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पीछे स्थानीय नेटवर्क का हाथ सामने आया है। मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले तीन कुख्यात धंधेबाजों—लखपत पासवान, सुशील झा और निखिल कुमार के नाम उजागर हुए हैं। शनिवार को जांच टीम ने इन फरार आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, हालांकि फिलहाल तीनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। 150 की बोतल को 1200 में बेचने का खेल पकड़े गए नेटवर्क से शराब तस्करी का एक बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि भूटान जैसे टैक्स-फ्री देश से महज 150 रुपये मूल्य की 750 एमएल शराब मंगवाई जाती थी। इसके बाद धंधेबाज इसमें पानी, रंग और जानलेवा स्पिरिट मिलाकर इसकी मात्रा को सवा से डेढ़ लीटर (यानी एक से दो बोतल) तक बढ़ा देते थे। इस मिलावटी शराब को असली दिखाने के लिए बोतलों पर रॉयल चैलेंज (Royal Challenge), रॉयल स्टैग (Royal Stag) और मैकडॉवेल नंबर वन (McDowells No. 1) जैसे नामी ब्रांड्स के नकली रैपर और स्टिकर चिपका दिए जाते थे। इसके बाद इस मिलावटी और जानलेवा शराब को बाजारों में 1200 रुपये प्रति बोतल तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। टैक्स-फ्री राज्य और देश निशाने पर उत्पाद विभाग के अनुसार, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट बिहार में सक्रिय है। हाल के दिनों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के तस्करों की गिरफ्तारियों से पता चला है कि अब शराब की बोतलों से बारकोड को खरोंचकर भेजा जा रहा है, ताकि जांच में उस दुकान का पता न चल सके जहाँ से शराब खरीदी गई। इसके अलावा, मुनाफे को अधिकतम करने के लिए धंधेबाज अब चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, दमन और दीव जैसे टैक्स-फ्री राज्यों को निशाना बना रहे हैं, जहां शराब बेहद सस्ती मिलती है। भूटान से शराब की खेप पकड़े जाने का बिहार में यह पहला मामला है, जो इसी रणनीति का हिस्सा है। अंधापन और मौत दे रही यह शराब शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाजों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही स्पिरिट मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विशेषज्ञ सह इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेज साइंस, प्रो. अरविंद कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि शराब में मिलाई जाने वाली स्पिरिट काफी घातक होती है। जब इसे मात्रा बढ़ाने के लिए डायलूट किया जाता है, तो यह 'मिथाइल अल्कोहल' का रूप ले लेती है। इसके सेवन से व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। यदि स्पिरिट की मात्रा थोड़ी भी अधिक हो जाए, तो व्यक्ति की मौके पर ही जान जाने का पूरा खतरा रहता है। भूटान से लाई गई शराब को डायलूट कर एक से दो बोतल बनाने का धंधा किया जा रहा था। तीन धंधेबाजों का नाम सामने आया है। जिनके विरुद्ध अभियोग दर्ज कर गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। दीपक कुमार सिंह, उत्पाद इंस्पेक्टर

सूर्या चौहान केस: हत्या के बाद पुलिस कार्रवाई में मुख्य आरोपी ढेर

गाजियाबाद  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सूर्य चौहान की हत्या मामले ने जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में मुख्य आरोपी असद का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का बकरीद से पहले का एक बयान खासी चर्चा में है। बकरीद के मौके पर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए थे। खुले में नमाज पढ़ने और सार्वजनिक स्थल पर पशुओं की कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था। सीएम योगी ने इससे पहले महिलाओं की सुरक्षा के मामले पर यमराज वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बेटियों के साथ छेड़खानी और व्यापारियों के खिलाफ अपराध करने वालों को यह सोचना चाहिए कि अगले चौराहे पर यमराज इंतजार कर रहे होंगे। असद ने सीएम योगी की बात नहीं मानी। लगातार बढ़ी थी मांग सूर्या चौहान की हत्या के बाद से लगातार मामले में एक्शन की मांग हो रही थी। सूर्या की मां और भाई लगातार इस मामले में मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर की मांग कर रहे थे। इस बीच गाजियाबाद पुलिस ने कांड के मुख्य आरोपी असद को ढेर कर दिया। 17 वर्षीय छात्र सूर्य प्रताप चौहान उर्फ सूर्या के हत्यारों पर लगातार एक्शन जारी है। गाजियाबाद पुलिस की ओर से असद पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 28 मई को 17 वर्षीय किशोर पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसकी मौत हो गई थी। सूर्या की मौत के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के कड़े निर्देश के बाद भी हत्याकांड को अंजाम दिए जाने को लेकर चर्चा गरमाई। मामले में खोड़ा पुलिस पर भी सवाल खड़े हुए। हालांकि, मामले में सरकार की ओर से अपराधियों के खिलाफ सख्त एक्शन के निर्देश पहले ही जारी किए गए थे। ऐसे में पुलिस लगातार एक्शन में दिखी। सीएम ने लगातार दिया हैं संदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुंडे और माफियाओं को पिछले दिनों लगातार एक संदेश दिया है, अगर अपराध करोगे तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना होगा। सीएम योगी ने लखनऊ से लेकर मऊ तक के कार्यक्रमों के दौरान साफ तौर पर कहा कि प्रदेश में आज कोई बेटी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता है। प्रदेश में आज कोई व्यापारी से जबरन गुंडा टैक्स नहीं ले सकता है। प्रदेश में बेटियां नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। अगर कोई गुंडा बेटियों को छेड़ने का प्रयास करता है, तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने के लिए बैठे रहते हैं। यही बात उन्होंने अपराध करने वालों को भी कही थी। हालांकि, बकरीद के दिन सुनियोजित साजिश रचते हुए जिस प्रकार से असद ने अपने साथियों के साथ मिलकर सूर्या को मार डाला। यह एक प्रकार से सीएम योगी आदित्यनाथ की लगातार अपील को नजरअंदाज किए जाने के तौर पर देखा गया। अब इस मामले में योगी सरकार का सख्त एक्शन सामने आया है। असद के एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में आरोपी के एनकाउंटर के बाद पीड़ित परिवार संतोष जता रहा है। ब्रजेश पाठक का आया बयान सूर्या चौहान की हत्या मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सूर्या के हत्यारों को गिरफ्तार किया था। जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी मारा गया। डिप्टी सीएम ने कहा कि इस हत्याकांड और अपराध में शामिल हत्यारों एवं अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। रीना भाटी ने भी बोला हमला सूर्या केस में खोड़ा नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी ने कहा कि परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी। योगी सरकार ने कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखा। यह एनकाउंटर एक कट्टरपंथी सोच वाले व्यक्ति के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर कोई भी ऐसी विचारधारा पर चलेगा, तो उसका भी यही हश्र होगा।  

2033 से शामिल होंगी नई सबमरीन, हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की समुद्री ताकत

नई दिल्ली  भारत ने पनडुब्बी क्षमता में अपने पड़ोसी देशों को मात देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना ने जर्मनी के साथ एक डील को लेकर अच्छी खबर दी है। भारतीय नौसेना के मुताबिक भारत और जर्मर्नी के बीच 6 नए कन्वेंशनल सबमरीन के निर्माण के लिए अब कुछ ही महीनों में कॉन्ट्रैक्ट की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान टेक्नोलॉजी का भी ट्रांसफर किया जाएगा। इस डील के फाइनल होने से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। पूर्व नौसेना प्रमुख के मुताबिक भारत के मजगांव डॉक और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के बीच अनुबंध को पूरा होने में बस कुछ और महीने ही लगेंगे। पहली पनडुब्बी के 2033 में शामिल होने की उम्मीद है, जिसके बाद 2038 तक हर साल एक पनडुब्बी शामिल की जाएगी। इस मामले पर अब पूर्व नौसेना प्रमुख रहे एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बयान दिया है। उन्होंने इस डील की पूरी कहानी बताई है। सबसे पहले इस पनडुब्बी की खासियत इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी AIP तकनीक है, जिसके कारण इन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार पानी की सतह पर नहीं आना पड़ेगा। ये पनडुब्बी 2 से 3 सप्ताह तक लगातार पानी के भीतर छिपी रह सकती हैं। इन्हें आधुनिक टॉरपीडो और भारी मारक क्षमता वाली मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस-एनजी) से लैस किया जाएगा। ये खामोश और अत्याधुनिक पनडुब्बियां हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की समुद्री चुनौतियों का मुकाबला करने में भारतीय नौसेना को एक बड़ी रणनीतिक बढ़त देंगी। होर्मुज जैसे संकट के लिए तैयार रहना जरूरी: नौसेना प्रमुख पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू देते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संरक्षा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। नौसेना की तात्कालिक प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापक अरब सागर में उपस्थिति, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा प्रदान करके सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना रही है। इन समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने की हमारी दीर्घकालिक योजना किसी एक निश्चित समाधान पर निर्भर रहने के बजाय समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, परिचालन क्षमता और साझेदारी को मजबूत करना है। हम महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्गों पर निरंतर उपस्थिति बनाए रखते हैं, जैसे कि 2008 से समुद्री डाकुओं से बचाव के लिए अदन की खाड़ी में एक जहाज की निरंतर तैनाती। हमारे सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) ने परिचालन प्रतिक्रियाओं के समन्वय के लिए सहयोगी देशों के साथ संबंध स्थापित किए हैं। नौसेना प्रमुख बोले- हमारा लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा करना पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना के प्रयास किसी विशिष्ट राष्ट्र को लक्षित नहीं करते, न ही हम अपने उद्देश्यों को केवल क्षेत्र पर "वर्चस्व" स्थापित करने तक सीमित रखते हैं। हमारा सर्वोपरि लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक स्थिर, स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देना है। हम कई रणनीतिक कदमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं – पहला, हम अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं और 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर हैं। दूसरा, हमने मिशन-आधारित तैनाती और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के माध्यम से निरंतर परिचालन पहुंच बनाए रखी है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और हिंद महासागर क्षेत्र में अपने जहाजों और विमानों की लगभग निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित की है; और अंत में, भारत ने महासागर की परिकल्पना के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को काफी मजबूत किया है।