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अवैध बालू कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी घायल, तस्कर फरार

रांची रांची में अवैध बालू कारोबार करने वाले माफियाओं का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पुलिस जब भी अवैध बालू लदे वाहनों को रोकने की कोशिश करती है, तस्कर पुलिस टीम पर ही हमला करने से नहीं हिचकते। कई मामलों में पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया गया, जबकि कुछ घटनाओं में जवान और अधिकारी घायल भी हुए हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने अवैध बालू कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जून 2025 में नामकुम थाना क्षेत्र में एक बड़ी घटना सामने आई थी। पुलिस टीम ने जांच के दौरान बालू लदे वाहन को रोकने का प्रयास किया था। आरोप है कि चालक ने वाहन नहीं रोका और सीधे पुलिस टीम पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। घटना में नामकुम थाना प्रभारी मनोज कुमार और उनके बॉडीगार्ड घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन इसके बावजूद अवैध बालू ढुलाई पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी। इसी तरह जून 2025 में ही केतारी बगान इलाके में एएसआई गुरूचरण पंडित ने बालू लदे टर्बो वाहन को रोकने का प्रयास किया था। आरोप है कि चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ाकर एएसआई को कुचलने की कोशिश की। किसी तरह पुलिसकर्मी ने खुद को बचाया, लेकिन तस्कर वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। घटना के बाद इलाके में पुलिस ने छापेमारी भी की, लेकिन चालक पकड़ में नहीं आया। धुर्वा और रातू में भी पुलिसकर्मियों को कुचलने का हुआ था प्रयास धुर्वा थाना क्षेत्र में भी गश्ती के दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध बालू लदे वाहन को रोकने की कोशिश की थी। वाहन चालक ने भागने के दौरान पुलिस की गाड़ी में टक्कर मार दी। इस घटना में पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गया था। वहीं रातू इलाके में भी पुलिसकर्मियों को कुचलने के प्रयास की घटना सामने आ चुकी है। बालू माफिया चालकों को देते हैं आदेश नहीं रुकनी चाहिए गाड़ी बालू माफिया चालकों को स्पष्ट आदेश देते हैं कि किसी हाल में गाड़ी नहीं रुकनी चाहिए। कोई भी गाड़ी रोके तो गाड़ी को चढ़ा दें। अवैध बालू कारोबार से जुड़े लोग रात के समय सक्रिय रहते हैं। नदी घाटों से बालू निकालकर विभिन्न इलाकों में सप्लाई की जाती है। कई तस्कर तेज रफ्तार और दबंगई के बल पर कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि पुलिस टीमों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।

बिहार में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा, डोनार औद्योगिक क्षेत्र में मखाना फैक्ट्री को मंजूरी

दरभंगा दरभंगा के डोनार औद्योगिक क्षेत्र में मखायो फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एक अत्याधुनिक मखाना प्रोसेसिंग और निर्माण यूनिट लगाई जाएगी। इस पूरी परियोजना पर 27.44 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे न केवल बिहार में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।  बियाडा की बैठक में मिली मंजूरी बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार की परियोजना समाशोधन समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। उद्योग विभाग के सचिव और बियाडा के प्रबंध निदेशक  कुंदन कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योग्य आवेदकों को जमीन और प्लग एंड प्ले शेड आवंटित करने का फैसला लिया गया। इसी दौरान मखायो फूड्स को दरभंगा में यूनिट लगाने की हरी झंडी मिली।  युवाओं को मिलेगा काम उद्योग विभाग के सचिव और बियाडा के प्रबंध निदेशक  कुंदन कुमार ने कहा कि यह नई मखाना यूनिट कुल 2.20 एकड़ जमीन पर तैयार की जाएगी। यहां मखाने की प्रोसेसिंग, बेहतरीन पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन का काम आधुनिक मशीनों से होगा। इसके लिए सरकार 27.44 करोड़ रुपए निवेश करेगी, जिससे लगभग 300 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं, ग्रामीणों और मखाना किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। इस यूनिट के शुरू होने से बिहार के मखाने को आधुनिक तकनीक मिलेगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और देश-विदेश के बाजारों तक इसकी पहुंच आसान हो जाएगी। साथ ही स्थानीय सप्लाई चेन भी मजबूत होगी। किसानों को अपनी फसल का मिलेगा बेहतर दाम इस संबंध में बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि सरकार पारंपरिक और कृषि आधारित उद्योगों को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2022 में मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलना राज्य के लिए गर्व की बात थी। इस नई यूनिट से किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। वहीं, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि बिहार सरकार निवेशकों को हर जरूरी सुविधा और अच्छा माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है ताकि ऐसी योजनाएं जल्दी जमीन पर उतर सकें।  

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्ती, राजस्थान सरकार ने 103 अधिकारियों पर गिराई गाज

जयपुर  राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ते हुए सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों के दौरान एक आईएएस अधिकारी सहित 103 अधिकारियों को निलंबित किया है। वहीं, भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन पर रोक लगा दी गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति राज्य सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह प्रशासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी नीति के तहत भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग जैसे मामलों में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट से दोषी साबित होते ही हुई बर्खास्तगी सरकार ने उन अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाए हैं, जिन्हें न्यायालयों ने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराया। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में भीलवाड़ा के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल, झुंझुनूं के तत्कालीन कृषि उप निदेशक राजेश कुमार नैनावत, भरतपुर के तत्कालीन सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल शामिल हैं। इसके अलावा चिकित्सा विभाग के डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा और डॉ. मनोहर लाल को भी सेवा से हटाया गया है। इसी तरह कोटा के तत्कालीन अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) हरिसिंह मीना को एसीबी कोर्ट से सजा मिलने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। पानी की जांच में फर्जी रिपोर्ट देने वाले अधिकारी पर भी गिरी गाज राज्य सरकार ने जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की अलवर स्थित प्रयोगशाला में कार्यरत वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आरोप है कि उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता जांच से संबंधित नमूनों में फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार ने इसे आम लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए यह कार्रवाई की। वहीं डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। 11 अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन बंद कर दी गई है। इनमें पूर्व आरएएस अधिकारी बनवारी लाल मीणा, देवेंद्र सिंह ढिल्लो, पूर्व आरपीएस अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन बीडीओ मनोहर लाल सिसोदिया और तत्कालीन एक्सईएन देशराज नूनिया प्रमुख हैं। इसके अलावा नृसिंह रेबारी, सुरेश माथुर और चार अन्य चिकित्सकों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाना आवश्यक है। 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने रिश्वतखोरी, ट्रैप और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी जांच और कार्रवाई को मंजूरी दी गई है। प्रशासन को स्पष्ट संदेश सरकार की इस व्यापक कार्रवाई को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से राज्य के सरकारी तंत्र को स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में अब सख्ती से निपटा जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

स्कॉर्पियो में मिले चार शवों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा, परिवार ही निकला हत्यारा

अजमेर  राजस्थान के अजमेर जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र में स्कॉर्पियो कार में चार लोगों के जले हुए शव मिलने का मामला एक बड़े पारिवारिक हत्याकांड के रूप में सामने आया है पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कुछ ही घंटों में मामले का खुलासा कर दिया। जांच में सामने आया कि इस वारदात को मृतक पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे ने अपनी मां और बहन के साथ मिलकर अंजाम दिया था। दूसरी शादी के बाद परिवार में बढ़ा तनाव पुलिस ने मृतक की पहली पत्नी सुनीता चौधरी, उनकी बेटी और नाबालिग बेटे को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, घटना की जड़ में लंबे समय से चला आ रहा पारिवारिक विवाद था। जांच में पता चला कि रामसिंह चौधरी ने वर्ष 2005 में सुनीता चौधरी से विवाह किया था, जिससे उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। बाद में वर्ष 2019 में उन्होंने सुरज्ञान नामक महिला से दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी शादी के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और घर में अक्सर विवाद होने लगे। बेटे ने बताई हत्या की वजह पुलिस पूछताछ में नाबालिग बेटे ने बताया कि उसका पिता शराब पीकर अक्सर उसकी मां, बहन और उसके साथ मारपीट करता था। आरोपी के अनुसार, उसकी मां को लगातार प्रताड़ित किया जाता था, जिससे उसके मन में पिता के प्रति गहरा गुस्सा पैदा हो गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पहले से हत्या की योजना बना रखी थी। उसने ऑनलाइन एक चाकू मंगवाया था। 27 मई को घर में फिर विवाद हुआ और उसी रात जब रामसिंह सो गए तो बेटे ने कथित रूप से उनका गला काट दिया। पुलिस ने क्या बताया? पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान दूसरी पत्नी सुरज्ञान ने आरोपी को देख लिया था। इसके बाद उसने सुरज्ञान पर भी हमला कर दिया। शोर सुनकर वहां पहुंचीं दादी पूसी देवी और रिश्ते की बहन महिमा पर भी हमला किया गया, जिससे चारों की मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने पूरे मामले को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, चारों शवों को स्कॉर्पियो में रखा गया और ट्रैक्टर से निकाले गए डीजल की मदद से वाहन में आग लगा दी गई। फोरेंसिक जांच में खुले कई राज इसके बाद आरोपियों ने घर लौटकर खून के निशान मिटाने के लिए फर्श और दीवारों को पानी और केमिकल से साफ करने का प्रयास किया। पुलिस को शुरुआत में बताया गया कि परिवार अस्पताल जा रहा था और शॉर्ट सर्किट के कारण कार में आग लग गई। हालांकि फोरेंसिक जांच में कई ऐसे सबूत मिले जिन्होंने इस कहानी को झूठा साबित कर दिया। कार की पिछली सीटें मुड़ी हुई मिलीं, एक शव वाहन से बाहर मिला, घर में खून के निशान पाए गए, ट्रैक्टर से डीजल निकाले जाने के प्रमाण मिले और घटनास्थल की स्थिति भी हादसे की कहानी से मेल नहीं खाती थी। पहले भी की थी हत्या की कोशिश पुलिस पूछताछ में नाबालिग आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी कई बार अपने पिता की हत्या की कोशिश कर चुका था। उसने कथित रूप से खाने में जहर मिलाने और पहाड़ी से धक्का देने की योजना भी बनाई थी, लेकिन सफल नहीं हो पाया। आखिरकार उसने ऑनलाइन मंगाए गए चाकू का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है।

विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 सपना टूटा, ट्रायल्स में युवा पहलवान मीनाक्षी से मिली हार

नई दिल्ली भारतीय कुश्ती में 30 मई (शनिवार) को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स ट्रायल्स के सेमीफाइनल में दिग्गज महिला पहलवान विनेश फोगाट को हार का सामना करना पड़ा. विनेश को युवा रेसलर मीनाक्षी गोयत ने विमेंस 53 किलो भारवर्ग के मुकाबले में 6-4 से हरा दिया. इस हार के साथ विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में जगह बनाने का सपना टूट गया. हालांकि मुकाबले के बाद उनका रिएक्शन सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया. हार के तुरंत बाद विनेश फोगाट मैट से बाहर गईं, लेकिन कुछ ही पलों बाद वह दोबारा लौट आईं. उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'मैं वापस आऊंगी.' विनेश का ये रिएक्शन तेजी से वायरल हो रहा है. मुकाबले की बात करें तो मीनाक्षी ने शुरुआत से ही बेहद आक्रामक कुश्ती दिखाई., उन्होंने विनेश को संभलने का मौका नहीं दिया और लगातार अंक बटोरती रहीं. विनेश ने अनुभव के दम पर वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन युवा पहलवान ने दबाव बनाए रखा और आखिर में 6-4 से मुकाबला जीत लिया. यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि मीनाक्षी पिछले कुछ समय से शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने 2026 एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर पहले ही अपनी ताकत दिखा दी थी. किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए उस टूर्नामेंट के बाद अब एशियन गेम्स ट्रायल्स में विनेश फोगाट जैसी स्टार को हराकर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि भारतीय महिला कुश्ती में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है. WFI से विनेश की हुई थी खटपट डब्ल्यूएफआई लगातार विनेश फोगाट की एंट्री का विरोध कर रहा था. महासंघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने देने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन आखिर में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद विनेश के ट्रायल्स में उतरने का रास्ता साफ हुआ. तीन बार ओलंपिक खेल चुकी विनेश फोगाट पहले 57 किलोग्राम वर्ग में वापसी करने की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का फैसला किया था, लेकिन वहां भी डब्ल्यूएफआई ने उन्हें खेलने की अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा और फिर कानूनी लड़ाई शुरू हुई. आखिरकार विनेश को राहत मिली और वह एशियन गेम्स ट्रायल्स में उतर सकीं.

तेज तूफान से बहल क्षेत्र में बड़ा नुकसान, 50 से ज्यादा ट्रांसफार्मर गिरे

बहल  तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने वीरवार देर शाम आए बहल क्षेत्र में भारी तबाही मचाते हुए बिजली वितरण व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जहां एक ओर मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं ने बिजली विभाग के ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित रहा और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कई घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली वितरण निगम की बहल सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 340 बिजली के खंभे टूटकर या गिरकर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं, जबकि कृषि सिंचाई के लिए लगाए गए 50 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर भी धराशाई हो गए। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ा है। बहल सब डिवीजन के सहायक महाप्रबंधक ऋषभ कुमार ने बताया कि तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार विभाग को करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। ऋषभ कुमार ने कहा कि अधिकांश गांवों में घरेलू बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। वहीं, कृषि और सिंचाई से संबंधित बिजली लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभाग के फील्ड कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं और जल्द ही सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।

कोकर और जामचुआं सब स्टेशन से हजारों उपभोक्ताओं को राहत

रांची राजधानी रांची में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। शहरवासियों को जल्द ही दो नए बिजली सब स्टेशन की सौगात मिलने वाली है। कोकर और जामचुआं में बन रहे नए सब स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं और इनके चालू होने के बाद शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी। बिजली विभाग के अनुसार कोकर सब स्टेशन से 10 एमवीए क्षमता के साथ बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसका सीधा लाभ कोकर, लालपुर, बरियातू, खोरहाटोली, इंडस्ट्रियल एरिया, सुभाष चौक, भाभा नगर, तिरिल, पीस रोड और लालपुर चौक समेत आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को मिलेगा। विभाग का दावा है कि करीब 30 हजार से अधिक लोगों को बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज से मिलेगी राहत नए सब स्टेशन के चालू होने से लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और एक फेज में कम बिजली पहुंचने जैसी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड के कारण जिन इलाकों में बार-बार बिजली बाधित होती थी, वहां अब स्थिति बेहतर होगी। ग्रामीण इलाकों और उद्योगों को भी फायदा वहीं जामचुआं सब स्टेशन से भी 10 एमवीए बिजली आपूर्ति की जाएगी। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। इसके अलावा रामपुर और जामचुआं क्षेत्र के छोटे उद्योगों को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी ग्रिड से मिली अतिरिक्त ताकत इधर शहर की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए स्मार्ट सिटी परिसर में बने स्मार्ट ग्रिड को भी झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा चालू कर दिया गया है। इस स्मार्ट ग्रिड से शहर को 35 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगी है। विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान बढ़ते लोड को संभालने में यह ग्रिड काफी सहायक साबित हो रहा है और इससे राजधानी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत हुई है।

हथियार लहराने के मामले में जदयू विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक

 गोपालगंज मोकामा के बाहुबली जदयू विधायक छोटे सरकार अनंत सिंह को कोर्ट से फिर राहत मिली है। गोपालगंज के एमपी एमएलए कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक की सीमा पांच जून तक बढ़ा दिया है। मामले में आज(शनिवार, 30 मई को)अग्रिम जमानत के बिंदू पर सुनवाई हुई। अगली सुनवाई पांच जून को होगी। तबतक उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक की सीमा को बढ़ा दिया गया है। भोजपुरी गायक गुंजन सिंह को भी इसका फायदा मिला है। सरकारी वकील ने राहत देने का विरोध किया था। 2 मई को गोपालगंज जिले के सेमराव गांव में हथियार लहराने और अश्लील गानों के प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मीरगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। केस की छानबीन अब सीआईडी करेगी। शनिवार को गोपालगंज एमपीएमएलए कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। उनके वकील राजेश पांडे ने अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखने की अपील की। इस पर सरकारी वकील ने विरोध किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई है इसलिए कोई राहत नहीं मिलना चाहिए। इसपर राजेश पांडे ने कहा कि पिछली सुनवाई पर ही 30 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी। इसे आगे बढ़ाया जाए। कोर्ट ने पिछले फैसले को बरकरार रखा। मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह की मौजूदगी में हथियार लहराने के मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) करेगा। बिहार सरकार के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस चर्चित मामले को गोपालगंज पुलिस से हटाकर सीआईडी को ट्रांसफर कर दिया है। साथ ही अब इस केस में स्थानीय पुलिस की भूमिका समाप्त हो गई है। मीरगंज थाने के सेमराव गांव निवासी गुड्डू राय के घर बीते दो और तीन मई को आयोजित उपनयन संस्कार कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इसी दौरान विधायक अनंत सिंह की मौजूदगी में उनके समर्थकों पर सार्वजनिक रूप से हथियार लहराने का आरोप लगा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए मीरगंज थाने में चार मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के क्रम में पुलिस ने विधायक अनंत सिंह और उनके समर्थकों को नोटिस जारी कर 15 मई को हथियार के साथ मीरगंज थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि निर्धारित तिथि पर विधायक और उनके समर्थक थाने नहीं पहुंचे। मामले को लेकर कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामला राजनीतिक रूप से काफी चर्चित होने के कारण पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीर श्रेणी में रखते हुए सीआईडी को सौंपने का निर्णय लिया  

मुख्यमंत्री सैनी का एक्शन: निर्माण में कमी मिलने पर बड़ी कार्रवाई

 करनाल  जिला परिषद की 34 करोड़ रुपये की पांच मंजिला बिल्डिंग के निर्माण में कमी पाए जाने पर पंचायती राज विभाग के दो कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईएन) को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निलंबित कर दिया। इनमें पंचायती राज विभाग के तत्कालीन व वर्तमान में कैथल में तैनात परमिंद्र सिंह और करनाल में तैनात नारायण दत्त शर्मा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में जांच बैठाई है। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय से जांच टीम मौके पर पहुंची और बिल्डिंग का मुआयना किया। बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी पर भी कार्रवाई की तैयारी है। क्वालिटी कंट्रोल विंग की ओर से निर्माणाधीन भवन के कुछ पिलरों में तकनीकी कमी संबंधी तस्वीरें मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थीं। तस्वीरों में पिल्लरों टेढ़े दिखाई देने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने तुरंत संज्ञान लिया और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा और एक्सईएन परमिंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। निर्माण कार्य एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा की निगरानी में चल रहा था। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस पांच मंजिला इमारत का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, लेकिन निर्माण के बीच ही बिल्डिंग के ढांचे पर सवाल उठ गए और बड़ी कार्रवाई हो गई। चंडीगढ़ से करनाल पहुंची जांच टीम मामला सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चंडीगढ़ से करनाल पहुंचे और निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। विभाग के चीफ इंजीनियर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी पहलुओं और क्वालिटी कंट्रोल विंग की रिपोर्ट को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बारे में कार्यकारी अभियंताओं का दावा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उनका कहना है कि भवन पूरी तरह तय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है और क्वालिटी कंट्रोल विंग द्वारा खींची गई तस्वीरों का एंगिल सही नहीं था, जिसके कारण पिल्लर व बीम टेढ़े दिखाई दिए।

IMD ने गुजरात में गरज-चमक और तेज बारिश की चेतावनी जारी की

 अहमदाबाद IPL 2026 का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रव‍िवार (31 मई) को खेला जाना है, लेकिन उससे पहले मौसम ने क्रिकेट फैन्स और दोनों टीमों की चिंता बढ़ा दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अहमदाबाद समेत गुजरात के कई इलाकों में गरज, बिजली और बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के वैज्ञानिक रामाश्रय यादव के अनुसार 31 मई को अहमदाबाद में गरज के साथ सामान्य से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं 4 जून तक गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं, बिजली और बारिश की संभावना बनी हुई है. हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. इसके अलावा आज (30 मई) अरावली, महिसागर, पंचमहाल और दाहोद जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. दीव, दमन और दादरा एवं नगर हवेली में भी मौसम खराब रह सकता है. खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों को अगले पांच दिनों तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है. बारिश के चलते तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है. अगर फाइनल बारिश से रद्द हुआ तो क्या होगा? IPL के प्लेऑफ नियमों के अनुसार फाइनल मुकाबले के लिए रिजर्व डे रखा जाता है.मैच पूरा कराने के लिए मुख्य दिन और रिजर्व डे दोनों पर 120-120 मिनट का अतिरिक्त समय उपलब्ध रहता है. यदि बारिश के कारण पूरा मैच नहीं हो पाता तो पहले ओवरों में कटौती कर मुकाबला कराने की कोशिश की जाएगी. किसी भी स्थिति में दोनों टीमों को कम से कम 5-5 ओवर खेलने जरूरी होंगे. अगर मैच शुरू होने के बाद बारिश बाधा बनती है तो विजेता तय करने के लिए डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम लागू किया जाएगा.समय बेहद कम होने पर मौसम अनुमति देता है तो सुपर ओवर के जरिए भी नतीजा निकाला जा सकता है. रिजर्व डे भी धुल गया तो कौन बनेगा चैम्प‍ियन? IPL प्लेऑफ नियमों की धारा 16.11.2 के मुताबिक यदि मौसम की वजह से फाइनल और रिजर्व डे दोनों दिन मैच या सुपर ओवर कराना संभव नहीं हो पाता, तो लीग चरण की अंक तालिका में ऊंचे स्थान पर रहने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया जाएगा. वैसे आईपीएल फाइनल के लिए ऑफ‍िश‍ियल तौर पर कोई र‍िजर्व डे नहीं रखा गया है. ध्यान रहे 2023 में जब चेन्नई और गुजरात के बीच आईपीएल फाइनल हुआ था तो मैच अगले दिन गया था. पहले द‍िन (28 मई) को एक भी गेंद नहीं फेंकी गई थी, फ‍िर 29 मई को तब टॉस हुआ था और मैच का नतीजा निकला था. इस बार आईपीएल 2026 फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटन्स (GT) आमने-सामने हैं. वहीं दोनों दिन खेल नहीं हो पाता, तो लीग स्टेज में बेहतर रैंकिंग वाली टीम सीधे IPL 2026 की चैम्प‍ियन बन जाएगी. यानी RCB. ऐसे में मौसम पर सभी की नजरें टिकी होंगी, क्योंकि अहमदाबाद में बारिश सिर्फ मैच ही नहीं बल्कि पूरे सीजन के विजेता का फैसला भी प्रभावित कर सकती है.