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‘भारत एक शक्तिशाली देश है’ अमेरिकी रक्षा मंत्री ने की भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सराहना

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का लोहा मानते हुए उसे शक्तिशाली देश बताया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, भारत अपने भारी रक्षा उद्योग और सैन्य तंत्र का तेजी से विकास कर अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। सेना का आधुनिकीकरण कर उसे लंबी और सफल सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार कर रहा है। हेगसेथ ने यह बात रक्षा और कूटनीतिक मामलों के महत्वपूर्ण वार्षिक कार्यक्रम शांग्रीला डायलाग में कही है। इस वर्ष कार्यक्रम में विश्व के 44 प्रमुख देशों के नेता, सैन्य विशेषज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अन्य प्रमुख हस्तियां शिरकत कर रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, भारत शक्तिशाली देश है और वह अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। ऐसा कर वह हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन कायम कर रहा है। भारत रक्षा उत्पादन में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, हम भी उसके साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करने के लिए संकल्पित हैं। हेगसेथ ने क्या कहा? हेगसेथ ने बताया कि अमेरिका अपने रक्षा उत्पादन का फलक बढ़ा रहा है और उसे विश्व के कई देशों तक फैला रहा है। वहां पर वह उन देशों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा- उनके जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से मजबूत रक्षा संबंध हैं। कार्यक्रम में हेगसेथ ने कहा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व का सबसे ज्यादा महत्व और उथल-पुथल वाला इलाका है। इसलिए अमेरिका का क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान है। लेकिन क्षेत्रीय देश अपने रक्षा खर्च को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे देशों को अपना रक्षा खर्च बढ़ाकर समानुपातिक होना चाहिए। कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में चीन के साथ अमेरिका के संबंध बेहतर हुए हैं। लेकिन अपनी और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के साथ हम कोई समझौता नहीं करेंगे। हेगसेथ ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्ध और तनाव से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियां कम हुई हैं। लेकिन यह स्थिति अस्थायी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र अमेरिका की दीर्घ अवधि की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

‘हम इसका ख्याल रखेंगे’ अस्पताल CEO को ममता की कथित चेतावनी वायरल, भाजपा ने घेरा

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के मामले में राजनीति तेज होती जा रही है। अभिषेक को कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराए जाने के दौरान ममता बनर्जी का हॉस्पिटल सीईओ को धमकाते हुए एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रहा है। इस क्लिप के वायरल होते ही राजनीति तेज हो गई है। वायरल रिकॉर्डिंग में, ममता बनर्जी कथित तौर पर बेले व्यू अस्पताल के सीईओ प्रदीप टंडन पर जमकर बरस रही हैं,उन पर गलत काम करने का आरोप लगा रही हैं और उन्हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रही हैं। दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में अभिषेक पर हुए हमले के बाद उन्हें बेले व्यू हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ममता का आरोप है कि हॉस्पिटल ने अभिषेक की चोटों को कम करके दिखाया। इतना ही नहीं सरकार के निर्देश पर उन्होंने अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने से भी इनकार कर दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक वायरल ऑडियो क्लिप में ममता बनर्जी को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “माफ कीजिए मिस्टर टंडन, आपने गलत काम किया है।” ममता बनर्जी आगे कहती हैं, "याद रखिए कि हमने आपकी कितनी मदद की है। भगवान आपको माफ नहीं करेंगे। आप लोगों को गुमराह कर रहे हैं। आपको शर्म आनी चाहिए। हर कोई आपके अहंकार को याद रखेगा। आप अस्पताल चला रहे हैं और भाजपा सत्ता में है। कल, अगर केंद्र सरकार नहीं रही, तो हम इसका ख्याल रखेंगे।" गौरतलब है कि ममता बनर्जी का यह वीडियो ऐसे समय में लीक हुआ है, जब बंगाल के भाईपो (बंगाली में भतीजा) पर सोनारपुर में हमला हुआ था। चुनावी हिंसा में मारे गए तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार वालों से मिलने के लिए पहुंचे अभिषेक के सामने लोगों ने चोर-चोर के नारे लगाए। इसके बाद उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए। सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में ही अभिषेक के साथ मारपीट कर दी गई। इतना ही नहीं उनकी शर्ट को भी फाड़ डाला गया। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें अभिषेक के सुरक्षाकर्मी उन्हें हेलमेट पहनाकर सुरक्षित निकालते हुए दिख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अभिषेक बनर्जी ने हमले का आरोप भारतीय जनता पार्टी के ऊपर लगाया। उन्होंने कहा, "यह सब भाजपा की किया हआ है। यह इनका लोकतंत्र है। अभी सत्ता में आए 6 महीने नहीं हुए हैं। यह कानून व्यवस्था है। मेरी सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने घटनाक्रम से पहले ही अपने अधिकारियों को सूचित कर दिया था लेकिन इसके बाद भी कोई अतिरिक्त फोर्स नहीं भेजी गई।" इस घटना के बाद अभिषेक कार्यकर्ता के घर गए और फिर वहां से उन्हें कोलकाता के अपोलो हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से उन्हें बैले व्यू हॉस्पिटल शिफ्ट कर दिया गया। यहां पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सामने आईं और उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और एक पुलिस अधिकारी ने अस्पताल को फोन करके अभिषेक को जल्द से जल्द डिस्चार्ज करने के लिए दबाव डाला है। ममता ने कहा कि अभिषेक की चोटें गंभीर हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें भर्ती नहीं करने दिया गया। बता दें, इस मामले में बंगाल पुलिस ने अभी तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक घटना के दौरान के वीडियो और लोगों से पूछताछ के आधार पर 5 संदिग्ध लोगों को अभिषेक बनर्जी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है।

RCB या GT? नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दूसरी ट्रॉफी के लिए दोनों टीमों की टक्कर

 नई दिल्ली आईपीएल 2026 का फाइनल मैच आज यानी 31 मई (रविवार) को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाना है। इस पूरे सीजन शानदार प्रदर्शन करने वाली दोनों टीमें खिताब जीतने से एक कदम दूर हैं। आरसीबी ने क्वालिफायर-1 में गुजरात टाइटंस को हराकर सीधे फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं, गुजरात टाइटंस ने राजस्थान रॉयल्स को हराकर फाइनल का टिकट कटाया। आरसीबी 5वीं बार आईपीएल फाइनल मैच खेलेगी, जबकि गुजरात की टीम आईपीएल में तीसरी बार फाइनल खेलने उतरेगी। RCB vs GT Final: गिल Vs पाटीदार, आईपीएल का खिताबी मैच दरअसल, डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) की नजरें लगातार दूसरे आईपीएल खिताब (IPL Trophy) को हासिल करने पर होगी। वहीं, गुजरात की टीम भी अपने दूसरी आईपीएल ट्रॉफी जीतना चाहेंगी। दोनों टीमों के कप्तान जबरदस्त फॉर्म में हैं। आरसीबी के रजत पाटीदार (Rajat Patidar) और गुजरात के शुभमन गिल (Shubman Gill), दोनों इंडिया की T20 टीम का दरवाजा खटखटा रहे हैं। दोनों का लीडरशिप स्टाइल अलग है, लेकिन दोनों ही अपनी टीम के लिए कमाल का परफॉर्म कर रहे हैं। रजत पाटीदार का शांत और सिंपल अंदाज RCB के लिए लकी साबित हुआ है। पिछले 2 सीजन से उनकी कप्तानी में टीम स्टेबल है। अब वो धोनी और रोहित शर्मा के क्लब में शामिल होने के करीब हैं। ये दोनों ही IPL ट्रॉफी डिफेंड करने वाले कप्तान हैं। पिछले साल भी आरसीबी ने आईपीएल 2025 का खिताब पंजाब किंग्स को हराकर जीता था। बता दें कि 32 साल के मध्य प्रदेश के बल्लेबाज पाटीदार ने कप्तानी के साथ-साथ बल्ले से भी तबाही मचाई है। उन्होंने 14 मैचों में 486 रन ठोके हैं। इस दौरान उनका एवरेज 44 का और स्ट्राइक रेट 196 का रहा, जिसमें 5 फिफ्टी भी शामिल हैं। पाटीदार को स्पिन का किंग माना जाता था, लेकिन इस सीजन तेज गेंदबाजों की भी उन्होंने जमकर धुनाई की है। दूसरी तरफ कप्तान शुभमन गिल भी इंडिया की T20 टीम में वापसी के लिए बेताब दिख रहे हैं। स्टाइलिश ओपनर जबरदस्त फॉर्म में हैं। 15 मैचों में वह 722 रन बना चुके हैं। इस दौरान उनका एवरेज 48.13 का रहा है और स्ट्राइक रेट 163.71 का। वहीं, दोनों कप्तान गिल और पाटीदार, फाइनल में धमाकेदार पारियां खेलकर पहुंचे हैं। पाटीदार ने क्वालिफायर-1 में GT के खिलाफ सिर्फ 33 गेंद पर 93 रन की तूफानी पारी खेली थी और  RCB 92 रन से मैच जीता था। वहीं गिल ने क्वालिफायर-2 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 53 गेंद पर 101 रन की शानदार सेंचुरी ठोकी और टाइटंस को फाइनल में पहुंचाया। IPL Final: घर में GT का पलड़ा भारी अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इस सीजन गुजरात की टीम ने कुल 7 मैच खेले है, जिसमें से 5 मैचों में उन्हें जीत हासिल हुई, जबकि दो मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस मैदान पर एक मैच गुजरात का आरसीबी के साथ भी हुआ था, जिसमें गुजरात को जीत मिली थी। ऐसे में घर में जीटी का पलड़ा भारी है और पाटीदार की आरसीबी टीम क्या इस ‘चक्रव्यूह’ को तोड़कर इतिहास रच पाएगी या नहीं, ये आज पता चल ही जाएगा। IPL 2026 Final RCB vs GT Playing 11 Predicted आरसीबी: वेंकटेश अय्यर, विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जैकब डफी, जोश हेजलवुड, रासिख सलाम डार। गुजरात टाइटंस: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), निशांत सिंद्धू, वाशिंगटन सुंदर, जेसन होल्डर, राहुल तेवतिया, राशिद खान, प्रसिद्ध कृष्णा, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज।

मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज, 3 जून को DK शिवकुमार की ताजपोशी और कैबिनेट फेरबदल संभव

बेंगलुरु  कर्नाटक में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार 3 जून यानी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ 10 अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून के बाद कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है। राज्यसभा चुनाव होने के बाद कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की संभावना है। कैबिनेट में भी बड़ा फेरबदल राज्य सरकार में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन के बीच पार्टी नेतृत्व शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार की कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरे हो कते हैं कर्नाटक विधान परिषद के चीफ विप सलीम अहमद ने शुक्रवार को कहा कि कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय एवं सामाजिक (जातीय) प्रतिनिधित्व और संभावित उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय सीएलपी बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान की ओर से लिया जाएगा। शाम तक हो सकती है औपचारिक घोषणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल होने वाल हैं। शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कम नहीं होगा सिद्धारमैया का दबदबा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों, पिछड़ा वर्ग समूहों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर श्री सिद्दारमैया की मजबूत पकड़ सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण के बाद भी राज्य कांग्रेस की दिशा तय करती रहेगी। कांग्रेस आलाकमान सिद्दारमैया के प्रभावशाली 'अहिंडा' सामाजिक गठबंधन (जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित शामिल हैं) को छेड़ने से बच रहा है। यह गठबंधन कर्नाटक में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य केंद्र रहा है। राज्यसभा का ऑफर क्यों नकारा? राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने का सिद्दारमैया का फैसला साफ संकेत देता है कि वे राज्य के राजनीतिक मामलों में अपना सीधा प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दो शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने का कठिन काम है – सरकार पर शिवकुमार का नियंत्रण और पार्टी के सामाजिक व संगठनात्मक आधार पर सिद्दारमैया का प्रभाव। इसके अलावा, कांग्रेस के रणनीतिकारों को डर है कि इस नेतृत्व परिवर्तन से पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का समर्थन कमजोर हो सकता है, क्योंकि ये वर्ग वर्षों से सिद्दारमैया के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं। सीएम बनने के बाद शुरू होगी असली चुनौती जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार की असली परीक्षा पद संभालने के बाद शुरू हो सकती है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा और साथ ही सिद्दारमैया के खेमे को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक समानांतर राजनीतिक व्यवस्था के रूप में विकसित होने से रोकना होगा।

स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग पार करना पड़ेगा भारी, अमृतसर में AI कैमरे रखेंगे नजर

अमृतसर अमृतसर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सावधान रहने का समय आ गया है। अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने आज से ऑनलाइन चालान प्रणाली को लागू कर दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों और प्रमुख चौकों पर लगे लगभग 1300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी। आज से उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से ऑनलाइन चालान जारी किया जाएगा। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अमनदीप कौर ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले परीक्षण आधार पर शुरू किया गया था औ अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक सिग्नलों पर निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे ही अपने वाहन रोकें। यातायात पुलिस के अनुसार यदि कोई वाहन चालक स्टॉप लाइन पार करता है या जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करता है तो उसका ऑनलाइन चालान स्वतः दर्ज हो जाएगा। 1300 हाईटैक कैमरे रखेंगे नजर शहर में स्थापित तकरीबन 1300 कैमरे आधुनिक कैमरे दूर से ही वाहन नंबर पढ़ने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे पूरी चालान प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संचालित की जा सकेगी। यातायात पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही चौकों पर लगने वाले जाम और अव्यवस्था को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जानें किन 7 चौको पर शुरू हुआ ई-चालान अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में यह प्रणाली शहर के कुछ प्रमुख चौकों पर लागू की जाएगी। इनमें नोवेल्टी चौक, क्रिस्टल चौक, न्यू रियाल्टो चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, भंडारी पुल और क्वींस रोड क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने के कारण नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और स्टॉप लाइन तथा जेब्रा क्रॉसिंग का सम्मान करें, ताकि अनावश्यक चालान से बचा जा सके।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! अपने बूथ पर ही पिछड़े TMC नेता, EC रिपोर्ट ने खोली पोल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मजबूत किलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि टीएमसी के प्रमुख 36 नेताओं में से केवल 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाए हैं। टीएमसी 22 दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज कर सके। भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का दबदबा भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। यह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं। ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन बूथ संख्या 207 पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट बचाने के लिए नाकाफी रहा। ममता केवल 54 बूथों पर 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ ऐसे थे जहां उन्हें 80% से अधिक वोट मिले। 3 मंत्रियों को नहीं मिला 15% बूथों पर भी समर्थन टीएमसी के चार प्रमुख चेहरे और मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन टीएमसी मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज की। अपने ही घर में घिरे नेता आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता अपने घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिली। कुल मिलाकर, अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट जीत पाए। भाजपा की रणनीति रही सफल आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक जीत दर्ज की। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे सीट जीतने में कामयाब रहे। भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हरा दिया, जबकि सिकदार केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे। जीत का बड़ा अंतर जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हारे, उनमें से 16 सीटों पर आधे से अधिक पोलिंग बूथों में भाजपा उम्मीदवार और टीएमसी उम्मीदवार के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का फासला था। दूसरी तरफ, टीएमसी के जो 14 प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) शामिल हैं। ये दोनों नेता अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर भाजपा से 10% से अधिक वोटों से पिछड़ने के बावजूद अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए सबसे एकतरफा और बड़ी जीत गोलपोखर में मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर में सबीना यास्मिन की सीटों पर दर्ज की गई।

सावधान! नए LPG नियम लागू होते ही कैंसिल हो सकता है आपका सिलेंडर कनेक्शन

 नई दिल्‍ली एशिया संकट को देखते हुए कस्‍टमर्स को कोई दिक्‍कत नहीं आए, इसलिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं. इसी में से एक बदलाव 1 जून से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आपका सिलेंडर कनेक्‍शन कैंसिल हो सकता है।  दरअसल, देश में PNG का कनेक्‍शन बढ़ रहा है और सरकार द्वारा निर्देश देने के बावजूद LPG सिलेंडर का उपयोग कम नहीं हो रहा है. पीएनजी कनेक्‍शन मार्च तक 6.5 लाख नए कनेक्शन लगे हैं, लेकिन वास्‍तवकि आपूर्ति 18 फीसदी कम थी।  इससे पता चलता है कि कई परिवारों ने वास्‍तव में स्विच किए बिना ही कनेक्‍शन ले लिया है, जबकि सरकार ने कहा है कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा. हालांकि, इसके बावजूद ही लोग पीएनजी का कनेक्‍शन ले रहे हैं, लेकिन एलपीजी को सरेंडर नहीं कर रहे हैं।  पिछले एक दशक में एलपीजी यूजर्स की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.5 करोड़ हो गई है, जबकि पीएनजी यूजर्स की संख्या केवल 1.64 करोड़ ही बनी हुई है. इस स्थिति में सरकार जल्‍द से जल्‍द बदलाव चाहती है और जून शुरू होने से पहले ही कड़े नियम लागू होने जा रहे हैं।  एक फैमिली, एक कनेक्‍शन नियम संशोधित नियम के तहत जिन परिवारों के पास पहले से ही PNG कनेक्‍शन हैं, उन्‍हें अपने एलपीजी कनेक्‍शन सरेंडर करने पड़ सकते हैं. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू सिलेंडरों के दुरुप्रयोग, जमाखोरी और कलाबाजारी को रोकने के लिए पीएनजी और एलपीजी दोनों का एक साथ उपयोग करने वाले घरों की पहचान करना शुरू कर दिया है।  एक ही एड्रेस पर दोनों कनेक्‍शन रखना संशोधित एलपीजी नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जा रहा है, जिन लोगों के इलाके में पीएनजी का इंफ्रा है, उन्‍हें तय समय के भीतर पीएनजी पर स्विच न करने पर एलपीजी आपूर्ति बंद या खुद रद्द होने का सामना करना पड़ सकता है।    LPG कनेक्‍शन ट्रांसफर पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्‍शन बंद करने के लिए कहा है, जिस कारण सरकार ने इन कस्‍टमर्स को अपना एलपीजी कनेक्‍शन बहाल करने की अनुमति दी है. इससे यूजर्स को बाद में उन सेक्‍टर्स में जाने पर भी एलपीजी कनेक्‍शन फिर एक्टिव करने की सुविधा मिलती है, जहां पीएनजी कनेक्‍शन उपलब्‍ध नहीं है।  जून से ही नहीं भरा जाएगा एलपीजी सिलेंडर इस महीने से, पीएनजी पाइपलाइनों वाले क्षेत्रों में स्थित घरों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक करने या रिफिल करने से रोका जा रहा है. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और ओएमसी ने अब अपने डिजिटल डेटाबेस को पूरी तरह से यूनिफाइड कर दिया है. वहीं पीएनजी कनेक्‍शन विस्‍तार के लिए 30 जून तक समय बढ़ा दिया गया है।  गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए डेडलाइन  आपूर्ति की कमी और दुरुपयोग को कंट्रोल करने के लिए शहरी यूजर्स के लिए एलपीजी रिफिल की लॉक-इन पीरियड 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण यूजर्स के लिए 45 दिनों तक कर दी गई है।  कनेक्शन, सब्सिडी नियम परिवारों को हर साल केवल 12 रियायती घरेलू सिलेंडर ही मिलते रहेंगे. अतिरिक्त सिलेंडरों का शुल्क मार्केट वैल्‍यू के अनुसार लिया जाएगा. नया एलपीजी कनेक्शन लेने पर अब संशोधित जमा राशि और सेटअप शुल्क लागू होंगे, जिनमें रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क शामिल हैं। 

रिशुश्री कनेक्शन पर गिरी गाज, अभिलाषा शर्मा और योगेश सागर सस्पेंड

पटना पटना के टेंडर फिक्सिंग खिलाड़ी रिशुश्री पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई के बाद सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। बिहार कैडर के कई आईएएस अधिकारियों के रिशुश्री से सांठगांठ और अनुचित लाभ लेने के आरोपों की चर्चा के बीच आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर को सस्पेंड कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की और बताया कि कागजी प्रक्रिया की जा रही है। योगेश कुमार 2017 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में समाज कल्याण विभाग में निदेशक हैं। 2014 बैच की अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा जीविका परियोजना की निदेशक की जिम्मेदारी निभा रही थी। 27 मई को एसवीयू ने ठेकेदार रिशुश्री के पटना स्थित आवास पर छापेमारी में अकूत संपत्ति की बरामदगी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था। टेंडर माफिया के घर से दो करोड़ के सोना, चांदी, हीरा, लाखों कैश और प्रॉपर्टी के 61 डीड बरामद किए गए थे। सारण जिले का निवासी रिशुश्री पटना में रहकर सरकारी विभागों के टेंडर कमीशन लेकर मैनेज करता था। इसमें आईएएस लॉबी उसका मदद करती थी जिसके लिए रिशु उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाता था। इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ रिशु से सांठगांठ के आरोप में ईडी भी पहले से कार्रवाई कर रही है। उस केस को स्पेशल विजिलेंस यूनिट को ट्रांसफर कर दिया गया है। आरोप है कि रिशु की कंपनी ने इनके परिवार के लोगों को विदेश यात्रा करवाई और उनके कई बड़े खर्चे उठाए। चर्चा है कि रिशुश्री से मिलीभगत कर सरकारी राशि का घपला करने और मनी लाउंड्रिंग के मामले में अभी कई बड़े चेहरे सामने आ सकते हैं। ठेकेदार रिशु की काफी पैठ है। वह पटना में बैठकर पूरे राज्य में सरकारी टेंडर से खेलता था । अपने चहेतों को 8 से 9 परसेंट कमीशन लेकर बड़े बड़े टेंडर दिलवाता था। एसयूवी रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ करने वाली है।

बिजली बिल में बड़ा झटका: यूपी में 10% अतिरिक्त चार्ज लागू, जानें पूरा असर

 लखनऊ ईरान-इजराइल के युद्ध को लेकर पेट्रोल और डीजल के दामों की बढ़ोत्तरी के बाद अब महंगाई का असर बिजली पर भी पड़ गया है। यूपी में बिजली महंगी हो गई है। इससे उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड बिजली बिल में 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा चार्ज लगाने का फैसला किया है। ये चार्ज जून में आने वाले बिजली बिल में जुड़कर आएगा। इससे यूपी के तीन करोड़ से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं की जेब ढीली होगी। यानी अब बिजली उपभोक्ताओं को 10 फीसदी अतिरिक्त पैसा देना होगा। अगर आपका 100 रुपये का बिल आएगा तो उस पर 10 रुपये ज्यादा देने होंगे। सूत्रों के अनुसार जुलाई महीने में भी इसी प्रकार का 10 प्रतिशत अधिभार वसूला जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरक्ति आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। प्रदेश में लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं और इस निर्णय का सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक तथा अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष तथा राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि फरवरी 2026 में भी 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी, बिजली संकट, महंगाई तथा पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच बिजली दरों में यह अतिरिक्त वृद्धि आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी साबित होगी। 1610 करोड़ रुपये का डाला गया अतिरिक्त बोझ वर्मा ने दावा किया कि विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) के टैरिफ आदेश में स्वीकृत वास्तविक वद्यिुत क्रय लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि मार्च 2026 में बिजली खरीद की कीमत लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट दर्शाकर उपभोक्ताओं पर करीब 1,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। उन्होंने मांग की कि मार्च 2026 में महंगी बिजली किन निजी विद्युत उत्पादक कंपनियों से खरीदी गई और किन परिस्थितियों में खरीदी गई, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि मार्च माह के फ्यूल सरचार्ज में पूर्व अवधि के लगभग 1,400 करोड़ रुपये के दावों को भी शामिल किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार बढ़ा है। बिजली वृद्धि को रोकने की मांग उपभोक्ता परिषद ने यह भी दावा किया कि प्रदेश की बिजली कंपनियों के पास पहले से ही 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का उपभोक्ता अधिशेष (कंज्यूमर सरप्लस) उपलब्ध है। ऐसे में अतिरिक्त अधिभार लगाने से पहले मामले को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए था। परिषद ने इस मुद्दे को तत्काल यूपीईआरसी के समक्ष उठाने तथा फ्यूल सरचार्ज संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करने का निर्णय लिया है। साथ ही मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से फरवरी एवं मार्च 2026 के फ्यूल सरचार्ज के आधार पर की गई 10 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल रोकने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। मुकदमों में जनता का पैसा नहीं इस्तेमाल कर सकेगा पावर कॉरपोरेशन अब पावर कॉरपोरेशन जनता के पैसों से जनता के खिलाफ मुकदमा नहीं लड़ सकेगा। पावर कॉरपोरेशन अब तक इसे भी खर्च में दिखाकर इसके एवज में बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखता था। कॉरपोरेशन को अब मुकदमों का खर्च अपने लाभ में से करना होगा। टैरिफ आदेश में नियामक आयोग इसकी व्यवस्था देगा। हालत तो यह है कि पावर कारपोरेशन और एनपीसीएल ने कुल मिलाकर 46 करोड़ रुपये मुकदमों पर खर्च कर दिए औरखातों में इसका बोझ जनता पर डालने के मकसद से घाटे के मद में जोड़ दिया। राज्य में बीते छह साल से बिजली की दरें नहीं बढ़ी हैं। नोएडा पावर कंपनी का लाइसेंस सरेंडर करने के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। इसमें पावर कॉरपोरेशन और एनपीसीएल दोनों वादी हैं। बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के बकाया रकम को भी चुनौती दी गई है। तमाम ऐसे मामले भी हैं, जिनमें उपभोक्ताओं के पक्ष में आदेश आने के बाद पावर कॉरपोरेशन या बिजली कंपनियां उनके खिलाफ भी मुकदमे लड़ रही हैं। पिछले साल पावर कॉरपोरेशन ने मुकदमों पर खर्च किए थे 21 करोड़ बीते साल सिर्फ मुकदमों पर पावर कॉरपोरेशन ने 21 करोड़ जबकि एनपीसीएल ने 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह रकम उपभोक्ताओं से लिए जा रहे बिजली बिलों से एकत्रित पैसों से खर्च की जा रही है। इस बार जब बिजली की नई दरों पर चर्चा हो रही थी तब मुकदमों में खर्च की रकम को घाटा दिखाने पर आपत्ति दर्ज की गई। इसमें कहा गया कि पावर कॉरपोरेशन और अन्य बिजली कंपनियां जनता के खिलाफ ही मुकदमे लड़ रही हैं और इसमें आए खर्च को घाटे में दिखा कर बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखना गलत है। सूत्र बताते हैं कि नियामक आयोग इस संबंध में टैरिफ आदेश में व्यवस्था देगा। मुकदमों में खर्च की रकम के एवज में बिजली दरें बढ़ाने की मांग नहीं स्वीकार की जाएगी। मुकदमा लड़ना पावर कॉरपोरेशन का फैसला है, इसका खर्च वह स्वयं के स्रोतों से वहन करे।

कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली में बड़ा फेरबदल, रेखा गुप्ता ने समिति का किया पुनर्गठन

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बार आगामी कांवड़ यात्रा को यादगार, सुगम, भक्तिभाव से परिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए एक हाई लेवल 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति एवं कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इनके अलावा दिल्ली के 5 अन्य विधायकों अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस मौके पर रेखा गुप्ता ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है। उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है। कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ व्यवस्थाएं अब सिर्फ कागजी प्रशासनिक कामकाज नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था दिल्ली में सेवा, श्रद्धा और सम्मान का एक अनूठा प्रतीक बन चुकी है। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले हर एक शिवभक्त कांवड़िए को अतिथि के रूप में देवतुल्य सम्मान और श्रेष्ठ सुविधाएं मिलें। क्या होगा समिति का काम सीएम ने बताया कि अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी डीएम, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य व संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समिति का मुख्य फोकस रूट मैनेजमेंट, वॉटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सुरक्षा चाक-चौबंद रखने पर होगा, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा निर्विघ्न और अभूतपूर्व रूप से संपन्न हो सके। पिछले साल कांवड़ शिविरों को क्या हुए फायदे रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सेवा के लिए पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की थीं। वर्ष 2024 में जहां राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार द्वारा दी गई आसान मंजूरियों के चलते रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 रजिस्टर्ड कांवड़ शिविर लगाए गए। इन शिविरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सीधे बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही एडवांस के रूप में जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, समितियों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक रजिस्टर्ड शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थायी मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी दी गई थी।