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बुडापेस्ट में PSG का जलवा, आर्सेनल को शूटआउट में हराकर यूरोप पर फिर कब्जा

नई दिल्ली पेरिस सेंट जर्मेन (PSG) ने साबित कर दिया कि पिछले साल की चैम्पियंस लीग जीत कोई संयोग नहीं थी. 30 मई (शनिवार) को बुडापेस्ट के पुस्कास एरिना में खेले गए बेहद रोमांचक फाइनल में पीएसजी ने आर्सेनल को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर लगातार दूसरी बार UEFA चैम्पियंस लीग ट्रॉफी अपने नाम कर ली. निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक मुकाबला 1-1 से बराबरी पर था, लेकिन दबाव के सबसे बड़े पल में फ्रेंच क्लब ने फिर साबित कर दिया कि आखिर क्यों उन्हें इस समय दुनिया की सबसे खतरनाक टीम माना जा रहा है. जैसे ही आर्सेनल डिफेंडर गैब्रियल मैगाल्हेस का निर्णायक पेनल्टी शॉट बार के ऊपर चला गया, पूरा स्टेडियम पीएसजी की जीत के जश्न में डूब गया. कप्तान मार्क्विनहोस ने दूसरी बार चैम्पियंस लीग ट्रॉफी उठाई और आतिशबाजी के बीच पेरिस क्लब ने यूरोप पर अपना दबदबा फिर साबित कर दिया. आधुनिक दौर में लगातार दो बार चैम्पियंस लीग जीतने वाली पीएसजी सिर्फ दूसरी टीम बनी है. इससे पहले यह कारनामा सिर्फ रियल मैड्रिड ने किया था. इस जीत के साथ कोच लुइस एनरिक भी इतिहास के सबसे महान कोचों की सूची में और ऊपर पहुंच गए. उन्होंने तीसरी बार चैम्पियंस लीग जीती और पेप गार्डियोला, कार्लो एन्सेलोटी, बॉब पेस्ली और जिनेदिन जिदान जैसे दिग्गजों के क्लब में जगह बना ली. सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने वह काम कर दिखाया जो उनके करीबी दोस्त पेप गार्डियोला बार्सिलोना और मैनचेस्टर सिटी के साथ बैक-टू-बैक यूरोपियन खिताब जीतकर नहीं कर पाए थे. ये रहा गेमचेंजिंग मोमेंट फाइनल की शुरुआत हालांकि पीएसजी के लिए किसी झटके से कम नहीं थी. मैच के सिर्फ छठे मिनट में काई हावर्ट्ज ने शानदार गोल कर आर्सेनल को बढ़त दिला दी. इसके बाद आर्सेनल ने डिफेंसिव फुटबॉल का शानदार नमूना पेश किया. पीएसजी के पास बॉल पोजीशन ज्यादा थी, लेकिन रास्ते बहुत कम. पहले हाफ में फ्रेंच क्लब सिर्फ एक शॉट ही टारगेट पर मार सका. लेकिन बड़े खिलाड़ी बड़े मौकों पर ही सामने आते हैं. दूसरे हाफ में क्वारात्स्खेलिया को बॉक्स में गिराए जाने के बाद पीएसजी को पेनल्टी मिली और ओस्मान डेम्बेले ने बिना गलती किए गोल दाग दिया. इसके बाद मुकाबला पूरी तरह बदल गया. पीएसजी के पास बढ़त लेने के कई मौके आए. क्वारात्सखेलिया का शॉट पोस्ट से टकराया, जबकि ब्रेडली बार्कोला ने आखिरी मिनटों में आसान मौका गंवा दिया. दूसरी तरफ आर्सेनल लगातार दबाव झेलता रही. आंकड़ों के मुताबिक फाइनल में आर्सेनल का गेंद पर कब्जा सिर्फ 24.7% रहा, जो 2004 के बाद किसी भी चैम्पियंस लीग फाइनल में सबसे कम है. फिर आया पेनल्टी शूटआउट का तनाव. एबेरेची एजे पेनल्टी चूक गए, हालांकि गोलकीपर डेविड राया ने नूनो मेंडेस का शॉट रोककर आर्सेनल की उम्मीदें बढ़ाईं. लेकिन आखिर में लुकास बेराल्डो ने गोल किया और फिर गैब्रियल का मिस आर्सेनल फैन्स का दिल तोड़ गया. हार के बाद आर्सेनल कोच मिकेल आर्टेटा ने भी पीएसजी की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से पीएसजी इस समय दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम है. गेंद के साथ जो वे करते हैं, वह मैंने पहले कभी नहीं देखा.'

बंगाल में हड़कंप: कल्याण बनर्जी घायल, चंडीतला थाने के सामने बवाल

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आई है. टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज (वस्तु) मारकर चोट पहुंचाई है. जबकि बीजेपी का कहना है कि वह घायल नहीं  हुए हैं, सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के संबंध और गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी-टीएमसी के बीच नारेबाजी बताया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी ने उन पर गेंद या पत्थर जैसी चीज से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लग गई. कल्याण बनर्जी सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया. ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण: बीजेपी वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट

एकादशी ही नहीं! अन्न न खाने के 5 बड़े नियम

 सनातन धर्म में व्रत, उपवास और नियमों का गहरा महत्व है. जब भी बिना अन्न खाए उपवास रखने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम एकादशी का आता है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल या भारी भोजन का त्याग करना अनिवार्य माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों और स्मृतियों में सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य ऐसे बेहद खास और संवेदनशील मौके बताए गए हैं, जब सामान्य व्यक्ति को अन्न ग्रहण करने से सख्त परहेज करना चाहिए? पौराणिक शास्त्रों के सूत्रों के अनुसार, इन विशेष अवसरों पर भोजन करने से पुण्य का नाश होता है और दोष लगता है. आइए जानते हैं एकादशी के अलावा वो कौन से 5 मौके हैं, जब रसोई में अन्न की जगह फलाहार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण (Eclipse) शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे भोजन दूषित हो जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे पका हुआ भोजन सही नहीं रहता है. कन्यादान: महादान के संकल्प से पहले का संयम हिंदू विवाह पद्धति में कन्यादान को संसार के सबसे बड़े और पवित्र पुण्यों में गिना गया है. माता-पिता अपनी लाडली को किसी अन्य कुल को सौंपते समय एक महान संकल्प लेते हैं. शास्त्रों का नियम है कि जिस दिन घर में यह महादान होना हो, उस दिन माता पिता को कन्यादान या फेरे पूरे होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस मांगलिक कार्य से पहले अन्न ग्रहण करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है. संकल्प की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है. हरिजन्मकाले: प्रभु के प्राकट्य और जन्मोत्सव का पावन दिन भगवान राम का जन्मोत्सव (रामनवमी), भगवान कृष्ण की जन्मतिथि (जन्माष्टमी), इसके साथ ही नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती और जानकी नवमी जैसे पावन अवसर 'हरिजन्मकाले' की श्रेणी में आते हैं. यह वो समय होता है जब साक्षात ईश्वर ने पृथ्वी पर अवतार लिया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन देवी-देवताओं के जन्मोत्सव के दिन दोपहर या मध्यरात्रि तक उपवास रखना चाहिए. इस दिन अन्न खाने के बजाय शुद्ध सात्विक फलाहार या दूध का सेवन करना अधिक शुभ माना जाता है. द्विजभोजने: संत और ब्राह्मण की थाली से पहले स्वयं का त्याग भारतीय संस्कृति में अतिथि और संतों को साक्षात नारायण का रूप माना गया है. धर्म शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि यदि आपके द्वार पर कोई साधु, संत, ब्राह्मण या अतिथि खाने के लिए आमंत्रित है, तो द्विजभोजने के नियम का पालन करें. इसका सीधा अर्थ है कि जब तक आए हुए अतिथि आदरपूर्वक भोजन न कर लें, तब तक घर के सदस्यों को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. उनके भोजन करने से पहले खुद पेट भर लेना मर्यादा के खिलाफ और दोषपूर्ण माना गया है. प्राणप्रयाणे: शोक और सूतक का समय मानव जीवन का सबसे अंतिम और कड़वा सच मृत्यु है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब परिवार में या किसी करीबी के यहां किसी के प्राण चले जाए तो वह समय बेहद शोक और संयम का होता है. किसी की मृत्यु होने पर या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक घर में चूल्हा जलाना या अन्न ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है. यह समय सूतक का होता है और मानसिक रूप से गहरे शोक का, इसलिए इस दौरान भोजन से दूरी बनाकर मृतक के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करनी चाहिए.  

फ्रिज में ये गलती मत करो! वरना रुकेगी बरकत

अमूमन हम सब फ्रिज को सही दिशा में रखने के वास्तु नियमों के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज के अंदर की व्यवस्था भी आपके घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित करती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, फ्रिज के भीतर अलग-अलग शेल्फ पर चीजों को सही ढंग से न रखने पर ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है. चूंकि फ्रिज में जल और अग्नि दोनों के तत्व होते हैं, इसलिए इसके अंदर की आंतरिक दिशाओं और शेल्फ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार फ्रिज के किस शेल्फ पर क्या रखना सबसे शुभ माना जाता है. 1.  सबसे ऊपरी हिस्से में क्या रखें फ्रिज का सबसे ऊपरी हिस्सा (फ्रीजर के ठीक नीचे वाला शेल्फ) सबसे ठंडा और ऊंचाई पर होता है. वास्तु में ऊंचाई को गरिमा और पवित्रता से जोड़ा जाता है. क्या रखें: यहां दूध, दही, पनीर, मक्खन और शुद्ध घी (यदि फ्रिज में रखते हों) जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स रखने चाहिए. दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है, इसे हमेशा ऊंचे और साफ शेल्फ पर ही स्थान दें. वास्तु नियम: इस शेल्फ पर कभी भी बचा हुआ बासी खाना या मांसाहारी चीजें न रखें. 2. बीच के शेल्फ फ्रिज का बीच का हिस्सा घर के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) की तरह संतुलन का प्रतीक होता है. क्या रखें: यहाँ आप रात का बचा हुआ पका हुआ भोजन (ढककर), गूंथा हुआ आटा, दालें या बची हुई मिठाइयां रख सकते हैं. वास्तु नियम: ध्यान रखें कि पका हुआ भोजन कभी भी खुला न छूटे. वास्तु के अनुसार, भोजन को खुला छोड़ने से उसमें नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है, जो सेहत पर असर डालती है. साथ ही, बासी भोजन को 24 घंटे से ज्यादा फ्रिज में न रखें, क्योंकि यह राहु के प्रभाव को बढ़ाता है. 3. सबसे निचला शेल्फ या बास्केट फ्रिज का सबसे निचला हिस्सा जमीन यानी पृथ्वी तत्व से जुड़ा माना जाता है. क्या रखें: प्रकृति से मिलने वाली चीजें जैसे ताजी हरी सब्जियां, जड़ वाली सब्जियां (गाजर, मूली) और फल हमेशा इसी हिस्से में रखने चाहिए.  पृथ्वी तत्व इन चीजों की प्राकृतिक सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखता है. वास्तु नियम: इस बास्केट में कभी भी सड़ रहे फल या गल चुकी सब्जियां जमा न होने दें. सूखी हुई धनिया पत्ती या सड़े हुए नींबू तुरंत फेंक दें, वरना यह घर में बुध और राहु का दोष पैदा करता है, जिससे बरकत रुकती है. 4. फ्रिज का दरवाजा (Refrigerator Door): फ्रिज के दरवाजे में वेंटिलेशन और तापमान में थोड़ा बदलाव होता रहता है, इसलिए यहाँ केवल वही चीजें रखें जो जल्दी खराब नहीं होतीं. क्या रखें: पानी की बोतलें, जूस, नींबू, अदरक, सॉस और अचार जैसी चीजें दरवाजे की शेल्फ में रखें. वास्तु नियम: पानी की बोतलों को हमेशा साफ रखें. अगर आप फ्रिज में सॉस या अचार की बोतलें रख रहे हैं, तो ध्यान दें कि उनकी एक्सपायरी डेट न निकल चुकी हो. बंद या खराब हो चुकी चीजें दरवाजे पर रखने से घर के मुख्य सदस्यों के कामों में रुकावटें आती हैं. फ्रिज के अंदर की एनर्जी को पॉजिटिव रखने के नियम कांच के बर्तनों का इस्तेमाल: प्लास्टिक के डिब्बों की जगह फ्रिज के अंदर खाना रखने के लिए कांच (Glass) या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें. वास्तु में कांच को राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को सोखने वाला माना गया है. 80-20 का नियम: फ्रिज को कभी भी ऊपर तक खचाखच न भरें. अंदर कम से कम 20% जगह हवा के सर्कुलेशन और ऊर्जा के प्रवाह के लिए खाली छोड़नी चाहिए. ठूंस-ठूंस कर भरा फ्रिज मानसिक तनाव और भारीपन का कारण बनता

आज आसमान में ‘ब्लू मून’ का जादू! चूक गए तो सालों इंतजार

 आज 31 मई 2026 की शाम आसमान में एक बहुत ही खास और दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखने वाला है, जिसे ब्लू मून कहा जा रहा है. यदि आप भी इस अनोखी घटना को देखने के लिए उत्साहित हैं, तो यहां इससे जुड़ी पूरी जानकारी जरूर जान लीजिए.. ब्लू मून क्या है? अक्सर लोगों को लगता है कि इस दिन चांद का रंग ब्लू दिखाई देगा, लेकिन यह केवल एक खगोलीय घटना है. जब एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है. चूंकि मई 2026 में 1 मई और 31 मई को दो पूर्णिमा पड़ी हैं, इसलिए आज की पूर्णिमा को ब्लू मून माना जा रहा है. इसे माइक्रो मून भी कहा जा रहा है क्योंकि यह अपनी कक्षा में पृथ्वी से दूर होने के कारण आकार में सामान्य से थोड़ा छोटा प्रतीत हो सकता है. आज का चांद लाल और विशाल क्यों दिखेगा? आज आपको चाँद का रंग नारंगी या हल्का लाल दिखाई दे सकता है, जिसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है: लाल रंग का रहस्य: जब चांद क्षितिज (horizon) के पास होता है, तो उसकी रोशनी को हम तक पहुंचने के लिए पृथ्वी के वायुमंडल की एक मोटी परत को पार करना पड़ता है. इस सफर में नीले रंग की छोटी तरंगें बिखर जाती हैं और केवल लाल व नारंगी रंग की लंबी तरंगें ही हमारी आंखों तक पहुंच पाती हैं. विशाल दिखने की वजह: चांद का बहुत बड़ा दिखना वास्तव में एक ऑप्टिकल इल्यूजन यानी आंखों का धोखा है. जब चांद पेड़ों, पहाड़ों या इमारतों जैसी वस्तुओं के पास होता है, तो हमारा दिमाग संदर्भ के कारण उसे बहुत बड़ा समझने लगता है. असल में, इसके आकार में कोई भौतिक बदलाव नहीं होता है. भारत में कब और कैसे देखें? भारत में आज शाम सूर्यास्त के बाद, लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच, इसे दक्षिण-पूर्वी आकाश में देखना सबसे अच्छा रहेगा. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए किसी महंगे टेलीस्कोप या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है. आप इसे अपनी खुली आँखों से घर की छत या किसी खुले स्थान से देख सकते हैं. आध्यात्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का दिन ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस दिन शांति और समृद्धि के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं: चंद्रमा को अर्घ्य देना और ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. मन की शांति के लिए ध्यान (मेडीटेशन) करना, दान करना और माता लक्ष्मी की पूजा कर उन्हें खीर का भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है.

तंबाकू सेवन घटा, लेकिन बढ़ा अल्कोहल का चलन; बिहार के स्वास्थ्य सर्वे ने दिखाई नई तस्वीर

पटना शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ गई है। ये चौंकाने वाला खुलासा एक सर्वे में हुआ है। सर्वे में यह भी पता चला है कि बिहार में तंबाकू से भी ज्यादा पुरुष अल्कोहल ले रहे हैं। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में कमी हुई जबकि अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 15 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में तंबाकू सेवन में एक प्रतिशत की कमी आई है। पहले 5 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू सेवन करती थी जो कि अब कम होकर चार प्रतिशत हो गई है। वहीं, 48.9 प्रतिशत पुरुषों की जगह अब 45.8 प्रतिशत पुरुष तंबाकू सेवन कर रहे हैं। जबकि, अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या 15.4 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, महिलाओं में अल्कोहल सेवन का प्रतिशत पूर्ववत 0.4 प्रतिशत स्थिर है। सात फीसदी से अधिक ग्रामीण मधुमेह की चपेट में सर्वे में पता चला है कि महिला एवं पुरुषों को मिलाकर बिहार के ग्रामीण इलाकों में सात फीसदी से अधिक मधुमेह से पीड़ित हैं। बात मधुमेह की करें तो राज्य स्तर पर महिलाओं के मुकाबले पुरुष मधुमेह से अधिक पीड़ित हैं। हालांकि, पिछले स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुकाबले में मधुमेह की समस्या में कमी दर्ज की गई है। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव, स्तनपान सहित अन्य मानकों में सुधार दर्ज किया गया है। एनएफएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 साल एवं उससे अधिक उम्र की महिलाओं में 6.2 प्रतिशत और पुरुष 8 प्रतिशत पुरुषों में 140 से 160 मिलीग्राम तक मधुमेह की शिकायत पाई गई है। जबकि, शहरी क्षेत्रों में समान रूप से 7.3 प्रतिशत महिलाएं और इतने ही पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं। वहीं, राज्य स्तर पर जहां 7.9 प्रतिशत पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं तो वहीं 6.3 महिलाएं मधुमेह से पीड़ित हैं। राज्य स्तर पर पिछले सर्वेक्षण में पुरुषों में मधुमेह 8.3 प्रतिशत तो 6.4 प्रतिशत महिलाओं में मधुमेह पाया गया था। राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1 फीसदी एनएफएचएस की नई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 89.9% तो ग्रामीण क्षेत्रों में 80.2 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहा है। इनमें सरकारी अस्पतालों में 57.5% हो रहे हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी 84% प्रसव में मौजूद रहते हैं। वहीं, ऑपरेशन से प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। यह 9.7% से बढ़कर 13.2% हो गई है। ऑपरेशन से प्रसव निजी क्षेत्र में बढ़ने (39.6% से बढ़कर 49.3% ) का संकेत रिपोर्ट में है जबकि सरकारी अस्पतालों में कम (3.6% से कम होकर 2.7 %) हुआ है बच्चों के स्वास्थ्य में गुणात्मक परिवर्तन की दृष्टि से राज्य में स्तनपान में बढ़ोतरी हुई है। तीन साल तक के बच्चों में जन्म के पहले एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या 31.1% से बढ़कर 51.9% हो गई है। इसी प्रकार, राज्य में 98% लोगों के घरों में बिजली की उपलब्धता, 99.8% लोगों के घरों में पेयजल की उपलब्धता हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार बिहार के ग्रामीण इलाकों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार हैं। सूबे में चार से एक व्यक्ति दुबलेपन का शिकार है। रिपोर्ट बताती है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अंडर वेट हैं, वहीं शहरी क्षेत्र में 30 फीसदी महिलाएं और 29.9 फीसदी पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इसके अलावा बिहार में चार में से एक व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स मानक से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से ग्रामीण क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वेलनेस सेंटर पर मरीजों के जाने से उनका इलाज हो रहा है। बिहार में 12 हजार वेलेनस सेंटर चलते हैं। मुजफ्फरपुर में 619 वेलेनस सेंटर चल रहे हैं। वेलेनस सेंटर के संचालन की निगरानी स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था जपाइयो कर रही है।

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण: इन 4 राशियों पर टूटेगा असर!

 साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है. विज्ञान और ज्योतिष दोनों ही दृष्टिकोण से यह एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. जब ब्रह्मांड में चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है. इस स्थिति में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है, जिसे हम सूर्य ग्रहण कहते हैं. यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही घटित होती है. यह सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, आइसलैंड, ग्रीनलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में यह ग्रहण न दिखने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ब्रह्मांड में होने वाली इस बड़ी हलचल का असर सभी 12 राशियों पर जरूर पड़ेगा. किस राशि में लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से कर्क राशि में लगने जा रहा है. इस कारण चार विशेष राशियों मेष, कर्क, तुला और मकर के जातकों को इस अवधि में बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान मेष राशि (Aries) मेष राशि वाले जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक मोर्चे पर परेशानियां लेकर आ सकता है. घर में बेवजह की कलह या माताजी के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं काफी बढ़ सकती हैं. यदि आप संपत्ति या भूमि से जुड़े किसी विवाद में उलझे हैं, तो इस समय बहुत सावधानी से कदम बढ़ाएं. अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और किसी भी विकट परिस्थिति में धैर्य से काम लें. कर्क राशि (Cancer) चूंकि यह सूर्य ग्रहण इसी राशि में लगने जा रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों को सबसे अधिक संभलकर रहने की आवश्यकता है. इस दौरान आपको मानसिक तनाव, भ्रम और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है. सेहत के मामले में लापरवाही बिल्कुल न बरतें, अन्यथा गंभीर बीमारियाँ या दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहेगी. करियर और पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला बहुत सोच-समझकर और पूरे आत्मविश्वास के साथ लें. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में विशेष रूप से सतर्क रहना होगा. इस अवधि में नौकरी छूटने की प्रबल संभावना बन रही है या फिर ऑफिस में किसी बात को लेकर अपमान का सामना करना पड़ सकता है. पैसों के लेनदेन और किसी भी तरह के निवेश से अभी दूर रहें, अन्यथा भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि वाले जातकों के निजी और व्यावसायिक जीवन पर इस ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव और जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है. इसके साथ ही, यदि आप पार्टनरशिप (साझेदारी) में कोई व्यापार कर रहे हैं, तो इस दौरान बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. ऐसे में धैर्य और शांति बनाए रखना ही एकमात्र बचाव है. इन राशियों के लिए वरदान साबित होगा यह ग्रहण यह सूर्य ग्रहण हर राशि के लिए मुश्किलें खड़ी नहीं करेगा. ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण भाग्य के बंद दरवाजे खोलने वाला साबित हो सकता है. इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन सुनहरे अवसर, व्यापार में मनमुताबिक वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं.

बासमंडी उपकेंद्र ठप, नटखेड़ा में केबल में लगी आग; कई इलाकों में घंटों गुल रही बिजली

लखनऊ यूपी के लखनऊ में बासमंडी स्थित जीटीआई उपकेंद्र शनिवार शाम सात बजे ठप हो गया। इससे गणेशगंज, पान दरीबा और लालकुआं जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों की बत्ती गुल हो गई। शाम के वक्त बिजली न आने से करीब 40 हजार आबादी को पानी का संकट खड़ा हो गया। वहीं बाजारों में अंधेरा छा गया और कई व्यापारियों को समय से पहले अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। लगभग सवा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 8:15 बजे बिजली बहाल हो सकी। लखनऊ में लोग एक बार फिर बिजली-पानी के लिए परेशान हो गए। वहीं आलमबाग के नटखेड़ा रोड पर स्थिति और भी भयावह हो गई जब एक बिजली बॉक्स के केबल में अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख इलाके में हड़कंप मच गया। व्यापारियों की सजगता से चंदरनगर उपकेंद्र को सूचना देकर बिजली कटवाई गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस दौरान कुटिया वाली गली और गोविंद गली सहित पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा गया। शाम के वक्त बिजली न आने से घरों में पानी भी नहीं आया। वहीं कर्मचारियों ने फाल्ट को दुरुस्त कर रात 08 बजे बिजली चालू की। नटखेड़ा रोड युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में आये दिन बिजली संकट बना रहता है। इसके अलावा जानकीपुरम जोन के अहिबरनपुर, प्रियदर्शनी और आईटीआई उपकेंद्रों की अंडरग्राउंड केबल फाल्ट हो गया। वहीं विद्युत विभाग के मुताबिक नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से प्रियदर्शनी उपकेंद्र, इंदिरानगर ट्रांसमिशन से आईटीआई उपकेंद्र व नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से अहिबरनपुर उपकेंद्र केबल फाल्ट हो गया। कर्मचारियों ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला और लोड को दूसरे फीडरों पर शिफ्ट कर वैकल्पिक स्रोतों से बिजली चालू करने की कोशिश की। हालांकि, लोड अधिक होने के कारण कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या बनी रही। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शनिवार रात तक मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका। 1912 की शिकायतों का फर्जी निस्तारण न हो: एमडी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने शनिवार को कस्टमर केयर सेंटर 1912 का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा की। एमडी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों का समाधान तय समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। किसी भी हाल में फर्जी निस्तारण न किया जाए, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। फीडबैक लेने और समस्याओं के समाधान के बाद उपभोक्ताओं को धन्यवाद संदेश या ट्वीट करने पर विशेष जोर दिया।

‘हर घर एक रविवार, गंदगी पर प्रहार’ अभियान में उमड़ी जनभागीदारी, 50 हजार लोगों ने दिखाई रुचि

लखनऊ यूपी की रामनगर अयोध्या में नगर निगम अयोध्या की ओर से चलाए जा रहे हर घर एक रविवार, गंदगी पर प्रहार अभियान का रविवार को चलाया गया। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी रविवार की सुबह सात बजे लता चौक अयोध्या धाम के पास सफाई अभियान में भाग लेते हुए सड़क पर झाड़ू लगाई। नगर में जगह-जगह सफाई अभियान चलाया गया। इस मौके पर मेयर गिरीशपति त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अयोध्या पूरा महानगर आज स्वच्छता के लिए सड़कों पर उतर आया है। घर से बाहर अपने निकला है, गलियों को साफ कर रहा है, सार्वजनिक जगहों को साफ कर रहा है। 50 हजार से ज्यादा स्वीकृति पत्र मेरे पास ऑनलाइन आए हैं जो अयोध्या की सफाई में अपना योगदान करना चाहते हैं। 400 से ज्यादा स्थलों सामूहिक तौर पर लोग निकले हुए हैं। अयोध्या नगर का जन सामान्य से लेकर विशिष्ट वर्ग तक, चाहे डॉक्टर हों, इंजीनियर हों, वकील हों, अध्यापक हों या व्यवसायी हों सभी लोग आज अयोध्या की सड़कों पर हैं। सभी अयोध्या को स्वच्छ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी नगर की स्वच्छता के लिए एक साथ पूरे महानगर के लोग एक साथ सामूहिक संकल्प शक्ति के साथ एक साथ सामूहिक अभियान चलाएं ये दुनिया में अपने आप में अद्भुत अभियान है। मैं पूरे महानगर का, नगर निगम की टीम का, हमारे पार्षद गणों का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने अभियान में मदद की। आज पूरी दुनिया अयोध्या की स्वच्छता को देख रही है। स्वच्छ शहरों की लिस्ट में रैंकिंग पर मेयर ने कहा कि अभी हमारी 28वीं रैंकिंग है। उम्मीद है कि इस बार हम रैंकिग अच्छी करेंगे। इस अभियान से पहले अयोध्या नगर निगम के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने रायबरेली रोड स्थित गुरुनानक एकेडमी से नाका हनुमानगढ़ी होते हुए रामनगर तक पदयात्रा निकाली थी। उन्होंने आमजन से नगर निगम क्षेत्र में चलाए जाने वाले स्वच्छता के महाअभियान ‘एक रविवार, हर परिवार, करे गंदगी पर वार’ में सहभागिता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि सफाई के मामले में नगर को देश के टॉप- 10 महानगरों में लाने के लिए जन-जन की भागीदारी आवश्यक है। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कहा कि 31 मई को अपने घरों के आसपास महज आधा घंटा सफाई करने से नगर साफ-सुथरा तो होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 जारी है। जनता को जोड़ने के लिए, 15-दिवसीय एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसका समापन आज हो रहा है। लोगों से अपील है कि जहां भी हों वहां साफ-सुथरा रखें।

सिद्धारमैया युग का अंत, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

 नई दिल्ली  सालों की राजनीतिक जोड़-तोड़ और सिद्दरमैया के साथ जबरदस्त सत्ता की खींचतान के बाद डीके शिवकुमार आखिरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का अपना बरसों पुराना सपना पूरा करने जा रहे हैं। वह 3 जून को दोपहर 3.30 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। पार्टी सदस्यों ने बताया कि यह तारीख शिवकुमार के निजी ज्योतिषी बेलूर द्वारकानाथ से सलाह-मशविरा करने के बाद तय की गई। शाम 4 बजे का निकला शुभ मुहूर्त ज्योतिष में गहरा विश्वास रखने वाले शिवकुमार को सलाह दी गई थी कि वह उस दिन शाम करीब 4.05 बजे शुरू होने वाले शुभ मुहूर्त में शपथ लें। इस समय को इसलिए भी चुना गया है ताकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस मौके पर मौजूद रह सकें। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई तो बातचीत के आखिरी दौर में प्रियंका ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके की राजनीतिक अहमियत के बावजूद कांग्रेस ने कोई भव्य समारोह न करने का फैसला किया है। सादा समारोह रखने का क्यों लिया गया फैसला? राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चंद्रशेखर ने कहा, “हमने शुरू में इस कार्यक्रम को विधान सौध की भव्य सीढ़ियों पर आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 15,000 से 20,000 लोग शामिल होते लेकिन महंगाई और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए हमने ऐसा न करने का फैसला किया।” उन्होंने आगे कहा, “शिवकुमार ने भी इस बात पर जोर दिया कि यह एक सादा कार्यक्रम होना चाहिए, जो जनसेवा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता हो। चूंकि ये काम-काज वाला दिन है, इसलिए हम जनता को होने वाली किसी भी असुविधा से भी बचना चाहते थे।” डीके शिवकुमार को चुना गया विधायक दल का नेता शनिवार को विधान सौध में हुई एक बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। अब सबका ध्यान कैबिनेट गठन पर है। सीएलपी नेता के तौर पर शिवकुमार का चुनाव 17 सालों में नेतृत्व में आया पहला बदलाव है। इस पूरी अवधि में यह पद सिद्दरमैया के पास था। सीएलपी की बैठक में सिद्दरमैया ने खुद शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी। बाद में कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बैठक के तुरंत बाद शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया। कैबिनेट गठन पर सभी का ध्यान अब सभी का ध्यान कैबिनेट गठन पर है। अगर मंगलवार से पहले बातचीत पूरी हो जाती है तो शिवकुमार के साथ कई मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। चंद्रशेखर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कार्यक्रम स्थल पर न जाएं और उन्हें भरोसा दिलाया कि शिवकुमार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता से मिलने के लिए जिलों का दौरा करेंगे। सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग गुटों को साथ लेते हुए जाति, समुदाय और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 'अहिंदा' सामाजिक गठबंधन फॉर्मूले के तहत कई उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना पर फिर से विचार किया जा रहा है, क्योंकि इस पद के लिए दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है। नई कैबिनेट में अहम मंत्रालयों को लेकर भी चर्चा चल रही है, जिसमें सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।