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भुचुंगडीह पंचायत में लाभुकों की भारी भीड़, 550 का आज होगा सत्यापन

रामगढ़  मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों का भौतिक सत्यापन करने के लिए शनिवार को चितरपुर प्रखंड के भुचुंगडीह पंचायत सचिवालय में विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह कार्य अगले दो दिन यानी 01 जून तक चलेगी। यह जानकारी पंचायत के सचिव बिनोद कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि सत्यापन कराने के लिए पंचायत भवन में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सुबह से ही महिलाएं कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आ रही है। वहीं अधिक भीड़ होने के कारण पंचायत भवन में काफी चहल-पहल देखने को मिल रही है। कई महिलाओं ने समय पर सत्यापन कार्य पूरा कराने की मांग की, ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके। सत्यापन कार्य करने में पंचायत सचिव के अलावे पंचायत सहायक व वीएलई जुटे हुए है। पंचायत के लगभग 550 लाभुकों का कल होगा सत्यापन भुचुंगडीह पंचायत में लगभग 6 हजार की संख्या है। इसमे कुल 765 लाभुकों का सेंसन मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना में हुआ है। जिसमे करीब 200 लाभुकों का सत्यापन पिछले दिनों हो चुकी है। बाकी शनिवार को लगभग 550 लाभुकों का सत्यापन होना है। बताया गया कि सत्यापन कराने के समय लाभुकों को अपने साथ पहचान व पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, पारिवारिक विवरण व पात्रता जांच के लिए राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, स्वघोषणा पत्र की मूल व छायाप्रति लाना जरूरी है।

हाईराइज बिल्डिंग्स के लिए इंटरनेट मॉनिटरिंग सिस्टम लागू, फायर अलर्ट सीधे DFS को मिलेगा

नई दिल्ली  आग की बढ़ती घटनाओं के बीच अब रेजिडेंशल और कर्मशल इमारतें का थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिट होगा। यह ऑडिट दिल्ली फायर डिपार्टमेंट के बजाए उनकी ओर से अधिकृत प्राइवेट फायर सेफ्टी ऑडिटर करेंगे। इसके साथ ही हाईराइज इमारतों में अब इंटरनेट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया जाएगा, जिसके बाद किसी मी फायर इक्विपमेंट में खराबी आई ते बिल्डिंग मालिक के साथ दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) को भी अलर्ट जाएगा। दिल्ली सरकार ने नियमों में किया बदलाव दिल्ली सरकार ने फायर NOC लेने के लिए थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर के लिए दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम-2025 में बदलाव कर लागू कर दिया है। फायर इक्विपमेंट की 24 घंटे निगरानी के लिए इंटरनेट आधारित मॉनीटरिंग को भी शामिल किया गया है। जिससे समय पर खराब इक्विपमेंट की जानकारी मिलेगी। नियमों में बदलाव को लेकर क्या बोले गृह मंत्री आशीष सूद सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार DFS (दिल्ली फायर सर्विसेज) से हटाकर अधिकृत फायर सेफ्टी ऑडिटर्स (FSAS) को सौंप दिया गया है। गृह मंत्री आशीष सूद के मुताबिक दिल्ली सरकार ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिय को डिसेंट्रलइज किया गया है, जिससे यह काम तेजी से हो सके। इमारतें में एक पेशेवर फायर ऑडिटिंग सिस्टम बने। जिससे आग जैसे घटनाओं से बच जा सके। एजेंसी को कार्रवाई करने का भी होगा अधिकार DFS अब सिर्फ इनफोर्समेंट पर काम करेगी। साथ ही प्राइवेट ऑडिटर्स की ओर से किए गए सर्टिफिकेशन की जांच भी करेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि DFS चहे तो प्राइवेट ऑडिटर्स की ओर से किए गए 5 फीसदी सर्टिफिकेशन की रैडम जांच कर सकती है। अगर उसमें कोई गढ़बढ़ी मिलती है, तो उसपर कार्रवाई का अधिकार भी होगा। जुमाने का भी प्रावधान है। ऑडिट के लिए बिल्डिंग मालिक फायर सेफ्टी सर्विसेज की वेबसाइट पर जाकर उनकी बुकिंग कर सकेंगे। तीन लेवल के होंगे फायर सेफ्टी ऑडिटर्स अलग-अलग इमारतें की कैटिगरी के हिसाब से थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को तीन कैटिगरी में बांटा गया है। लेवल 1 में ऑडिटर्स 15 मीटर से कम ऊंची बिल्डिंग्स (स्कूल, अस्पताल, गेस्ट हाउस, छोटे व्यावसायिक भवन) का फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन कर सकते है। इसके लिए उनके पास फायर सेफ्टी इंजिनियरिंग, अर्किटेक्चर डिग्री और डिप्लोमा होना चाहिए।  

बॉबी देओल का खुलासा: करियर के उतार-चढ़ाव और ‘आश्रम’ से वापसी की कहानी

बॉलीवुड के हैंडसम हंक बॉबी देओल अपने करियर के पीक पर हैं. आश्रम जैसी सीरीज और एनिमल फिल्म में उन्होंने कमाल की एक्टिंग की. एनिमल के बाद उनके करियर में बड़ा जंप देखने को मिला. हर ओर बॉबी की एक्टिंग की चर्चा होने लगी. अब बॉबी अपनी अपकमिंग फिल्म बंदर को लेकर सुर्खियों में हैं. फिल्म रिलीज से पहले बॉबी ने एक इंटरव्यू में अपने करियर ग्राफ और निजी जिंदगी को लेकर खुलकर बात की. करियर पर बोले बॉबी एक इंटरव्यू में बॉबी से उनके करियर को लेकर कई सवाल किए गए. उनसे पूछा गया कि आपने बाबा निराला का रोल किया. उससे बहुत पॉपुलैरिटी मिली. बॉबी ने कहा कि कुछ कैरेक्टर ऐसे होते हैं, जब आप थिएटर से बाहर निकलते हैं, तो वो आपके साथ रह जाते हैं. फिर बॉबी से कहा गया कि आपने ट्विंकल खन्ना, रानी मुखर्जी और मनीषा कोइराला जैसी एक्ट्रेसेस को खूब परेशान किया है. ट्विंकल खन्ना से आप बहुत लड़ते थे. इस इस पर उन्होंने कहा कि मुझे बचपन से पेट की दिक्कत रहती है. मैं बचपन से पेट के गुण गाता रहता था कि आज ये हुआ. आज वो हुआ. आज नहीं, आज शायद होगा, तो वो इस पर चिढ़ जाती थी. आप रानी मुखर्जी को डेढ़ फुटिया कहते थे. बॉबी कहते हैं कि हम एक गाना कर रहे थे और हम पानी में एक रॉफ्ट के ऊपर थे. वो मान नहीं रही थी. मैं नहीं मान रहा था, तो हम लड़ पड़े. फिर उनसे पूछा गया कि आपने मनीषा कोइराला के साथ इंटीमेट सीन करने से इनकार कर दिया था. आपने कहा था कि इनके मुंह से बदबू आती है. बॉबी ने इस सवाल पर हांमी भरी. बॉबी ने सलमान खान संग कनेक्शन पर भी बात की. उन्होंने कहा कि वो इतना प्यार इंसान है. वो सिर्फ देना चाहता है. उनका दिल बहुत बड़ा है. वो हमेशा सबको खुश रखना चाहता है. इसलिए पापा बोलते थे कि ये मेरे जैसा है. दोनों की क्वालिटी एक जैसी थी. मैं हमेशा कहता हूं कि जब मुझे रेस 3 के लिए फोन आया. उस वक्त मैं सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग खेल रहा था. उस वक्त मैंने दाढ़ी उगाई हुई थी एक प्रोजेक्ट के लिए. सलमान मुझसे मिले. वो बोले के ये दाढ़ी क्या उगाई हुई है. शेव करो, इतने खूबसूरत हो तुम. मैंने कहा कि नहीं मामू. मैं एक फिल्म कर रहा हूं, तो उसके लिए उगाई है. उन्होंने देख जब मेरा करियर नहीं चल रहा था, तो मैं संजय दत्त की पीठ पर चढ़ गया, फिर तेरे भाई की पीठ पर चढ़ गया. मैंने कहा कि मुझे अपनी पीठ चढ़ने दो. बॉबी कहते हैं कि उनको ये बात याद रही. फिर कुछ साल बाद फोन आया कि बॉबी शर्ट उतारेगा. मैंने कहा कि मैं कुछ भी करूंगा. फिर रेस 3 से मुझे बहुत फायदा मिला. सलमान खान सुपरस्टार हैं. उनकी फिल्म देखने सब जाते हैं. मुझे उनकी फिल्म में जाने का मौका मिला, जो लोग बॉबी को नहीं पहचानते थे. वो उनकी फिल्म से पहचान लगे. इस चीज ने मेरी बहुत मदद की. बॉबी की फिल्म बंदर की बात करें, तो ये 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है.

अल नीनो के असर की आशंका के बीच सरायकेला में खेती की तैयारी तेज

सरायकेला सरायकेला खरसावां जिला में रोहिणी नक्षत्र के साथ ही खेती काम शुरू हो गया है. रोहिणी के दिन किसानों ने पूजा अर्चना करते हुए खेतों की जुताई शरू कर दिया है और धान की बुआई भी शुरू कर दिया है. जिला के अधिकांश किसान छींटा विधि से ही खरीफ धान की खेती करते हैं. माना जाता है कि इस समय खेती करने से धान के पौधे रोग मुक्त रहते हैं साथ ही फसल भी अच्छी होती है. जिला में एक लाख हेक्टेयर में धान खेती करने का है लक्ष्य जिला में इस बार एक लाख हेक्टयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है इसके अलावे मूंग, उड़द, मूंगफली सहित तिलहन अन्य खरीफ खेती के लिए लक्ष्य रखा गया है. विगत वर्ष खरीफ खेती का 92 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हुई थी. कृषि विभाग ने बीज के लिए भेजा है प्रस्ताव जिला के किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भेजा है. बीज विनिमय वितरण और उत्पादन योजना के तहत अलग-अलग प्रकार के 700 क्विंटल धान बीज उपलब्ध कराने को कहा गया है जबकि बिरसा फसल विस्तार योजना के तहत उड़द, मूंगफली, मडुवा, अरहर, कुल्थी बीज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भेजा गया है. धान के इन बीजों का कृषि विभाग ने किया है डिमांड एमटीयु1010 प्रभेद: 150 क्विंटल एमटीयु 7029: 300 क्विंटल आईआर64:100 क्विंटल आईआर 64 ड़ीआरटी: 50 क्विंटल डीआरआरएच टु :100 क्विंटल बाजार में सजने लगी पारंपरिक हल खेती काम शुरू होते ही कृषि उपकरणों की बिक्री शुरू हो गई है. खासकर बैलों से चलाया जाना वाला हल बाजार में 450 से 500 रुपये में बिक रही है. सरायकेला के साप्ताहिक बाजार में पारंपरिक हल को बिक्री लाया गया था. हालांकि अब हल बैल के जगह ट्रैक्टर सहित अन्य कृषि उपकरणों ने ले लिया है बावजूद भी जिला के कई किसान हल से ही अपने खेतों की जुताई करते हैं. इस बार हो सकता है अलनिनो का असर मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष अलनिनो का असर होने की संभावना व्यक्त किए जाने पर कृषि विभाग द्वारा तैयारी शुरू कर दिया गया है. विभाग द्वारा धान के साथ साथ मडुवा, मोटा अनाज सहित दलहन और तिलहन की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी रौशन नीलकमल ने बताया कि अलनिनो का अंदेशा पर विभाग द्वारा प्लान निदेशालय स्तर से तैयार किया गया है जिससे किसी भी परिस्थिति का सामना किया जा सके.

Motorola Edge 70 Pro+ भारत में 4 जून को होगा लॉन्च, दमदार फीचर्स लीक

अगर आप Motorola के नए स्मार्टफोन का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. कंपनी जल्द ही भारत में Motorola Edge 70 Pro+ लॉन्च करने जा रही है. लॉन्च से पहले ही इसके कई बड़े फीचर्स सामने आ चुके हैं. हाल ही में यह फोन एक बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर देखा गया, जहां इसके प्रोसेसर समेत कई जरूरी डिटेल्स सामने आईं. आइए जानते हैं इस फोन में हमें क्या खास देखने को मिलने वाला है. फोन में मिलेगा MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर Motorola Edge 70 Pro+ को लेकर कंपनी लगातार नई जानकारियां सामने ला रही है. अब इसके कुछ दमदार फीचर्स भी कन्फर्म हो गए हैं. यह स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर के साथ आएगा, जो 4nm टेक्नोलॉजी पर बना है. कंपनी का दावा है कि फोन ने AnTuTu बेंचमार्क पर 24 लाख से ज्यादा का स्कोर हासिल किया है. इसके साथ ही फोन में 16GB तक LPDDR5x RAM का सपोर्ट भी मिलेगा. 4,600 sq mm का बड़ा वेपर कूलिंग चैंबर हीटिंग को कंट्रोल में रखने के लिए Motorola Edge 70 Pro+ में 4,600 sq mm एरिया वाला बड़ा वेपर कूलिंग चैंबर दिया जाएगा, जो लंबे समय तक यूज के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद करेगा. इसमें 6,500mAh की बड़ी बैटरी मिलेगी, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 2 दिन से ज्यादा का बैकअप दे सकती है. चार्जिंग के लिए इसमें 90W फास्ट वायर्ड चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलेगा. कैसे होगा डिस्प्ले? फोन में 6.8 इंच का 1.5K Extreme AMOLED डिस्प्ले दिया जाएगा, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस के साथ आएगा. स्क्रीन की सेफ्टी के लिए Corning Gorilla Glass 7i का प्रोटेक्शन भी मिलेगा. Motorola का दावा है कि Edge 70 Pro+ को IP68 और IP69 रेटिंग मिली है. साथ ही MIL-810H सर्टिफिकेशन इसे रोजमर्रा के कठिन इस्तेमाल के लिए और भी भरोसेमंद बनाता है. सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह स्मार्टफोन Android 16 बेस्ड Hello UI पर चलेगा. कंपनी इसके लिए 3 साल तक Android अपडेट्स और 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा कर रही है. कैमरा फोन के पीछे ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा, जिसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा Sony LYT-710 सेंसर के साथ आएगा. खास बात यह है कि इसमें 3.5-डिग्री ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) मिलेगा. इससे फोटो और वीडियो ज्यादा शार्प और स्टेबल नजर आएंगे. इसके अलावा, फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा भी होगा. कंपनी का दावा है कि यह कैमरा 50x तक डिजिटल जूम सपोर्ट करेगा. कब होगा लॉन्च? Motorola Edge 70 Pro+ को भारत में 4 जून को लॉन्च किया जाएगा. लॉन्च के बाद यह स्मार्टफोन Flipkart के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. डिजाइन की बात करें तो फोन को तीन शानदार कलर ऑप्शन (Pantone Chicory Coffee, Pantone Stormy Sea और Pantone Zinfandel) में पेश किया जाएगा. इसमें स्कल्प्टेड वुड, ट्विल-इंस्पायर्ड और सैटिन-लक्स जैसी यूनिक फिनिश देखने को मिलेंगे.  

क्या सच में तेल लगाने से बढ़ते हैं बाल? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट की राय

भारत में बालों में तेल लगाने की परंपरा सालों पुरानी है. अक्सर कहा जाता है कि नियमित तेल मालिश से बाल तेजी से लंबे और घने होते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? डर्मेटोलॉजिस्ट्स और इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक, बालों में तेल लगाने से सीधे तौर पर नए बाल उगने या उनकी ग्रोथ स्पीड बढ़ने का पक्का वैज्ञानिक सबूत अभी तक नहीं मिला है. हालांकि कुछ तेल स्कैल्प को हेल्दी रखने, बालों को टूटने से बचाने और ड्रायनेस कम करने में जरूर मदद कर सकते हैं. यानी तेल बालों को मजबूत दिखा सकता है लेकिन इसे जादुई हेयर ग्रोथ इलाज मानना सही नहीं होगा. तेल बालों को कैसे फायदा पहुंचाता है? हेयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऑयलिंग का सबसे बड़ा फायदा मॉइश्चर और प्रोटेक्शन है. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, हेयर ऑयलिंग स्कैल्प को हाइड्रेट रखने और बालों को टूटने से बचाने में मदद कर सकती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑलिव ऑयल और दूसरे नेचुरल ऑयल बालों को मुलायम और कम फ्रिजी बना सकते हैं, लेकिन इससे बाल तेजी से बढ़ेंगे, इसका मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण अभी नहीं है. डर्मेटोलॉजिस्ट क्या कहते हैं? कई डर्मेटोलॉजिस्ट मानते हैं कि तेल बालों की क्वालिटी बेहतर कर सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ का मुख्य रोल जेनेटिक्स, हार्मोन, डाइट और हेल्थ का होता है. अमेरिकन ब्यूटी मैग्जीन Allure के मुताबिक, कैस्टर ऑयल को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हुआ कि इससे बाल तेजी से बढ़ते हैं. कैस्टर ऑयल बालों को शाइनी बना सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ बढ़ाने के दावों के पीछे मजबूत रिसर्च नहीं है. कौन-से तेल थोड़ी मदद कर सकते हैं? कुछ रिसर्च में रोजमेरी ऑयल को लेकर पॉजिटिव रिजल्ट जरूर मिले हैं. रोजमेरी ऑयल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर कर सकता है और कुछ मामलों में हेयर फॉल कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि किसी भी तेल को “मैजिक हेयर ग्रोथ सॉल्यूशन” नहीं माना जाना चाहिए. सही डाइट, प्रोटीन, आयरन, नींद और स्ट्रेस कंट्रोल भी उतने ही जरूरी हैं. ज्यादा तेल लगाना भी नुकसानदायक डॉक्टर्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा तेल लगाने से स्कैल्प में गंदगी, डैंड्रफ और फंगल इन्फेक्शन की समस्या बढ़ सकती है. कई बार भारी तेल पोर्स ब्लॉक कर देते हैं, जिससे स्कैल्प पर पिंपल्स या खुजली हो सकती है. इसलिए हफ्ते में 1-2 बार हल्की मालिश और सही तरीके से शैंपू करना बेहतर माना जाता है.

RBI ला रहा ‘किल स्विच’, एक क्लिक में बंद होंगे बैंक ट्रांजैक्शन

डिजिटल पेमेंट्स ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. खासकर पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पुलिस कॉल, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं ने लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक ऐसे सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी भी संदिग्ध स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकता है. इसे ‘किल स्विच’ नाम दिया गया है. अगर यह सुविधा लागू होती है तो यूजर्स को अपने खाते की सुरक्षा पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है. क्या है आरबीआई का ‘किल स्विच’ सिस्टम? ‘किल स्विच’ एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होगा, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेगा. यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह साइबर ठगी का शिकार बन सकता है या उसके खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का खतरा है, तो वह बैंकिंग ऐप के जरिए एक बटन दबाकर सभी वित्तीय गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा. इसका उद्देश्य फ्रॉड के दौरान होने वाले नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोकना है, ताकि अपराधियों को पैसा ट्रांसफर करने का मौका न मिले. डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट नाम का साइबर अपराध तेजी से सामने आया है. इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं. फर्जी दस्तावेज, नकली गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है. ऐसे मामलों में कई लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा चुके हैं. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और आरबीआई नये सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं. सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए आयेगा ऑन-ऑफ फीचर आरबीआई सिर्फ किल स्विच तक सीमित नहीं रहना चाहता. केंद्रीय बैंक सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट माध्यमों के लिए स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा लाने की संभावना भी तलाश रहा है. इस व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम निकासी और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं को कभी भी बंद या चालू कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई का उपयोग नहीं करता है, तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ सेकंड में दोबारा सक्रिय कर सकता है. ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा नियंत्रण और सुरक्षा वर्तमान में कई बैंक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए ऑन-ऑफ सुविधा देते हैं, जिससे ग्राहक अपने कार्ड को सुरक्षित रख पाते हैं. आरबीआई अब इसी मॉडल को पूरे डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम तक विस्तार देने पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आयेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा. साथ ही यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे. डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य और नयी सुरक्षा रणनीति भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है. यूपीआई ट्रांजैक्शन लगातार नये रिकॉर्ड बना रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा को मजबूत बनाना समय की जरूरत बन गया है. किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग कंट्रोल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती हैं. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या डिजिटल फ्रॉड की आशंका होने पर यूजर तुरंत अपने खाते को सुरक्षित मोड में डाल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बच सकता है.

योगी सरकार की पारदर्शी तबादला नीति, स्क्रीन पर चुनकर मिली तैनाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तबादला नीति में पारदर्शिता को लेकर विशेष ध्यान दे रही है. सरकार का पूरा प्रयास है कि विभागों में तबादले के दौरान किसी भी तरह का भ्रष्टाचार न हो और कार्मिकों को मेरिट के आधार पर तैनाती मिले. इसके तहत शुक्रवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की. जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में आज ट्रांसफर के इच्छुक सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को मनचाही तैनाती उनके सामने पारदर्शी तरीके से दी गई. इस पूरी प्रक्रिया में 170 अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया गया. प्रक्रिया के दौरान विभाग के राज्य मंत्री दिनेश खटीक, रामकेश निषाद और अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव भी मौजूद रहे. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 170 कर्मचारियों और अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया. इसमें जल निगम ग्रामीण विभाग के 131, लघु सिंचाई विभाग के 28 और भूगर्भ जल विभाग के 11 अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया. इसमें 2 मुख्य अभियंता, 15 अधीक्षण अभियंता, 35 अधिशासी अभियंता, 40 सहायक अभियंता और 78 जूनियर इंजीनियर के तबादले किए गए. पहली बार कार्मिकों से पूछकर दी गई तैनाती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जल निगम ग्रामीण विभाग के हॉल में 8 स्क्रीनों की व्यवस्था की गई थी. इन 8 स्क्रीनों पर संबंधित पदों के लिए रिक्त जिलों की सूची प्रदर्शित की गई. सबसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारियों से क्रमवार उनके तबादले की प्राथमिकता पूछी गई और उनके मनचाहे जिले को लॉक कर दिया गया. कम्प्यूटर का बटन दबते ही कुछ सेकेंड में ही कार्मिकों का ट्रांसफर लेटर उनके मोबाइल में पहुंच गया. इस प्रक्रिया में पूरे प्रदेश के ट्रांसफर के इच्छुक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे. इस दौरान जो कार्मिक किसी कारणवश नहीं आ पाए थे, उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिससे वो अपनी बात मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकें. वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को बनाया मानक जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कार्मिकों के वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को मानक बनाया गया था. जो उनके केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडेक्स) के आधार पर तय होता है. इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है. इस पूरी प्रक्रिया से सभी कार्मिकों में खुशी की लहर है. इस दौरान अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम हो रहा है. इसी के तहत पारदर्शी तरीके से ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरा किया गया.  

महाभारत काल में लंबी उम्र का रहस्य, भीष्म-द्रोणाचार्य कैसे रहते थे इतने दीर्घायु?

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारतीयों का शरीर धीरे धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है. जिसके कारण भारतीयों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कुल 60 से 70 साल रह गई है. लेकिन, क्या आपको पता है कि महाभारत काल में लोग आज के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में कई लोग 80-90 साल से भी ज्यादा जिए थे. कुछ मान्यताओं के मुताबिक यह भी बताया गया है कि उस समय दिन और साल की गणना आज के समय से अलग थी, जिससे उस युग का रहस्य और भी बढ़ जाता है. महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, भगवान कृष्ण भी 100 साल से ज्यादा जिए थे. उनकी लंबी उम्र का कारण आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, योग और सात्विक आहार था. वहीं, आज के समय में भी पूरी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो 100 साल से ज्यादा जीते हैं. उनकी लाइफस्टाइल भी इन्हीं चीजों पर निर्भर करती है. इसी काल में कई महान योद्धा हुए, जिनमें खासतौर पर द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह अपनी लंबी उम्र के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. कहते हैं कि भीष्म पितामह को तो इच्छामृत्यु का वरदान मिला हुआ था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने करीब 20 दिन तक प्राण नहीं त्यागे थे और फिर अपनी इच्छा से देह त्याग दिया था. लंबी उम्र जीने के पीछे के सीक्रेट गुरु द्रोणाचार्य गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य की लंबी उम्र का श्रेय उनके योग, व्यायाम, युद्ध-कला और सादगी भरे जीवन को जाता है. द्रोणाचार्य युद्ध-कला के महान आचार्य थे और कौरव-पांडव के गुरु भी थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अच्छा आहार लेते थे. इसी वजह से उनका शरीर मजबूत रहता था. भीष्म पितामह वहीं भीष्म पितामह, जिनकी उम्र अलग-अलग ग्रंथों में 110 से 120 साल के बीच बताई गई है. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक ऋषि की तरह सख्त अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीया था. भीष्म पितामह का सादा जीवन भी उनकी सेहत बनाए रखने में बड़ा कारण माना जाता है. उस समय खानपान में प्राकृतिक और शुद्ध चीजों को ज्यादा महत्व दिया जाता था. जो लंबी उम्र के लिए फायदेमंद मानी जाती थीं. इसके अलावा, इनका आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इनकी फिटनेस का राज था. कहा जाता है कि दोनों ही योद्धाओं ने कठिन अभ्यास और बढ़िया अनुशासन के कारण इतनी लंबी उम्र पाई थी. वे अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से निभाते थे. दोनों एक हर दिन के तय दिनचर्या का पालन करते थे, जिससे उनका शरीर फिट और मन साफ रहता था. क्या खाते थे भीष्म पितामह? महाभारत ग्रंथ के अनुसार, भीष्म पितामह सात्विक आहार लेते थे. उनके खाने में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और दूध-घी जैसी चीजें शामिल थीं. कहा जाता है कि भीष्म बहुत नियंत्रित तरीके से भोजन करते थे और कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं खाते थे. यह आदत उन्हें स्वास्थ्य रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करती थी. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार पता चलता है कि भीष्म पितामह नॉन वेज नहीं खाते थे. ये थीं दिनचर्या माना जाता है कि महाभारत काल में लोग साफ-सुथरे माहौल, अच्छे लाइफस्टाइल और शारीरिक अनुशासन की वजह से लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में लोग 100 साल की उम्र में भी उतने ही फिट रहते थे, जितने आज के समय में 70 साल के लोग होते हैं. इसी तरह एक और महान ऋषि थे वेदव्यास, जिन्हें महाभारत का रचयिता माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उनकी उम्र करीब 130 साल तक बताई जाती है. वेदव्यास का जन्म सत्यवती और ऋषि पराशर से हुआ था, और उनके जन्म से जुड़ी एक अनोखी और प्रसिद्ध कहानी भी सुनने को मिलती है. पांडवों की क्या थी उम्र? वैसे तो पांडवों की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. लेकिन, पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर की 90 से 100 साल तक जिए थे. वहीं, भीम इनसे 1 से 2 साल छोटे थे, अर्जुन 3 से 4 साल छोटे थे और नकुल-सहदेव अर्जुन से 10 से 15 छोटे थे. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की उम्र करीब 70 से 75 साल की थी. युद्ध के बाद, पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल तक शासन किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्वर्ग की यात्रा शुरू की थी. धृतराष्ट्र की क्या उम्र थी? महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, धृतराष्ट्र का जन्म नियोग प्रथा से हुआ था, जिसमें ऋषि वेदव्यास ने राजा विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद उन्हें जन्म दिया. वे पांडु और विदुर के बड़े भाई थे. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र करीब 90-100 साल के बीच थी. इससे इस बात अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय दुर्योधन और उसके भाई-बहन करीब 50-60 साल के थे. युद्ध के बाद धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ लगभग 15 साल तक हस्तिनापुर में रहे. इसके बाद वे जंगल में चले गए (वनवास ले लिया), जहां 2-3 साल बाद जंगल में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई बताई जाती है. महाभारत काल में एक साल कितने समय का होता था? जानकारी के मुताबिक, महाभारत काल में साल की गणना चंद्र और सूर्य दोनों के आधार पर होती थी, यानी समय को चांद और सूरज दोनों के हिसाब से माना जाता था. चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता था, जिसमें 12 महीने होते थे. उस वक्त का हर महीना लगभग 29-30 दिन का माना जाता है. इस साल को सौर वर्ष के साथ संतुलित रखने के लिए बीच-बीच में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता था, जिसे अधिक मास कहा जाता है.

किचन में इन 3 चीजों को चूल्हे के पास न रखें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष

 शास्त्रों में रसोई को घर का सबसे खास हिस्सा माना गया है, क्योंकि यहीं से पूरे परिवार को अच्छी सेहत और ऊर्जा मिलती है. किचन में जो गैस चूल्हा होता है, उसे अग्नि देव का रूप माना जाता है.  चूल्हे का सीधा संबंध हमारी तरक्की और घर की तिजोरी से होता है. अक्सर हम अनजाने में चूल्हे के पास गलत चीजें रख देते हैं या गलत दिशा में मुंह करके खाना बनाते हैं, जिससे घर में वास्तु दोष लग जाता है.  आइए जानते हैं इससे जुड़े जरूरी नियम . इन 3 चीजों को चूल्हे के पास से तुरंत हटाएं 1. पानी का सिंक, मटका या बोतलें (आग और पानी की दुश्मनी)- गैस चूल्हे के बिल्कुल पास या उसके ठीक सामने कभी भी पानी की चीजें नहीं होनी चाहिए. जैसे बर्तन धोने का सिंक, पानी का मटका, वॉटर फिल्टर या पीने के पानी की बोतलें. क्या है नुकसान: गैस चूल्हा आग है वहीं सिंक पानी का जरिया है. आग और पानी एक-दूसरे के विरोधी तत्व हैं.  जब ये दोनों बिल्कुल पास होते हैं, तो घर में अशांति बढ़ती है. परिवार के लोगों में बिना बात के झगड़े होने लगते हैं, इससे कमाया हुआ पैसा बीमारियों में खर्च हो जाता है. उपाय: अगर किचन छोटा है, तो चूल्हे और सिंक के बीच में एक छोटा सा लकड़ी का बोर्ड या पार्टिशन रख दें. 2. डस्टबिन, झाड़ू या गंदे कपड़े – कई लोग आसानी के लिए गैस चूल्हे के ठीक नीचे या बगल में छोटा डस्टबिन (कूड़ेदान) रख देते हैं, या फिर सफाई के बाद झाड़ू- गंदा पोछा वहीं छोड़ देते हैं. क्या है नुकसान: चूल्हा वह जगह है जहाँ मां लक्ष्मी का वास होता है. वहीं डस्टबिन-झाड़ू गंदगी व नकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं.  चूल्हे के पास कचरा रखने से मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं , जिससे घर में बरकत (पैसों की बचत) खत्म हो जाती है. उपाय: डस्टबिन को हमेशा चूल्हे से दूर ढककर रखें. झाड़ू को भी ऐसी जगह छिपाकर रखें जहां किसी की सीधी नजर न पड़े. दिशाओं का रखें खास ध्यान (Kitchen Direction Rules)वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व होता है. गलत दिशा में बना किचन या गलत दिशा में रखा चूल्हा घर के मुखिया की तरक्की रोक सकता है. 3- मिक्सर ग्राइंडर – वास्तु के अनुसार मिक्सर ग्राइंडर को गैस चूल्हे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए.गैस चूल्हे और मिक्सर के बीच कम से कम 2 से 3 फीट की दूरी होनी चाहिए. पास रखने से घर में मानसिक तनाव बढ़ता है. मिक्सर, माइक्रोवेव या ओवन जैसे बिजली के सामानों को रसोई के दक्षिण (South) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखना सबसे शुभ होता है. किचन की सही दिशा: घर में रसोई हमेशा आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व (South-East) दिशा में होनी चाहिए. यह दिशा अग्नि देव की मानी जाती है.  अगर यहां संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है. भोजन बनाने वाले का मुंह: खाना बनाते समय खाना पकाने वाले का मुंह हमेशा पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए.  पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाने से सेहत अच्छी रहती है . इस दिशा में न रखें चूल्हा: गैस चूल्हे को कभी भी उत्तर (North) दिशा में नहीं रखना चाहिए.  उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की होती है.  इस दिशा में आग जलाने से पैसों की भारी तंगी का सामना करना पड़ सकता है. बरकत के लिए 3 आसान नियम:रात में जूठे बर्तन न छोड़ें: सोने से पहले सिंक के सारे बर्तन धो लें और चूल्हे को साफ करके सोएं.  साफ किचन में ही रात के समय मां लक्ष्मी आती हैं. तवे को छिपाकर रखें: खाना बनाने के बाद तवे या कढ़ाई को चूल्हे के ऊपर मत छोड़ें.  उसे धोकर अलमारी के अंदर रखें.  तवे को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए. पहली रोटी गाय की: सुबह जब भी पहली बार चूल्हा जलाएं, तो पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें.  इससे पितृ दोष दूर होते हैं और घर में खुशहाली आती है.