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प्याज की बदबू से पाएं छुटकारा, सेब से लेकर नींबू तक ये तरीके आएंगे काम

 खाने में प्याज का इस्तेमाल स्वाद को दोगुना कर देता है. दूसरे मौसमों की अपेक्षा गर्मी के मौसम में प्याज की खपत अधिक होती है क्योंकि ये नेचुरल तरीके से शरीर को अंदर से ठंडा करने में मदद करती है. लेकिन प्याज खाने या काटने की सबसे बड़ी समस्या ये है कि उसमें काफी तेज बदबू आती है. दरअसल, प्याज काटने और खाने के बाद उसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड्स मुंह के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जिससे सांसों से लंबे समय तक स्मेल आती रहती है. हाथों से प्याज काटते वक्त यह स्मेल स्किन में समा जाती है जो साधारण साबुन से नहीं जाती. इसे दूर करने के लिए कुछ साइंटिफिक और घरेलू तरीके बेहद कारगर हैं.   सेब का कमाल हेल्थलाइन के मुताबिक, प्याज खाने के बाद अगर आप एक सेब खाते हैं तो यह काफी मददगार होता है. सेब में मौजूद नेचुरल एंजाइम्स प्याज के सल्फर कंपाउंड्स को ब्रेक करने का काम करते हैं. यदि आप प्याज खाने की थोड़ी देर बाद सेब जैसे फल का सेवन करते हैं तो सांसों की दुर्गंध को कम करने में मदद मिल सकती है. नींबू और साइट्रस फ्रूट्स केयर फ्री डेंटल के मुताबिक, हाथों की बदबू दूर करने के लिए नींबू का रस एक बेहतरीन ऑपशन है. नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड न केवल बैक्टीरिया को मारता है बल्कि प्याज की स्मेल को भी खत्म करता है. नींबू पानी से कुल्ला करना या हाथों पर इसे रगड़ना बदबू को तुरंत कम कर सकता है. ग्रीन टी का सेवन Vinmec Health की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स नाम के पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये कंपाउंड प्याज में मिलने वाले गंध पैदा करने वाले कंपाउंड्स को खत्म करने में मदद करते हैं. इसलिए खाने के बाद 1 कप गर्म ग्रीन टी पीने से मुंह की ताजगी बनी रहती है और बैक्टीरिया का असर कम होता है. स्टेनलेस स्टील और नमक क्या आप जानते हैं कि हाथों को स्टेनलेस स्टील पर रगड़ने से प्याज की गंध गायब हो जाती है. इसका कारण है कि स्टील के मॉलिक्यूल्स प्याज के सल्फर के साथ बाइंड होकर उसे स्किन से हटा देते हैं. साथ ही हाथों पर थोड़ा नमक रगड़कर धोने से भी स्मेल काफी हद तक कम हो जाती है. बेकिंग सोडा और विनेगर मुंह की स्मेल के लिए एप्पल साइडर विनेगर या बेकिंग सोडा का पानी से कुल्ला करना एक अच्छा उपाय है. यह मुंह के pH लेवल को बैलेंस करता है जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते. WebMD के मुताबिक, बेकिंग सोडा ओरल हाइजीन बनाए रखने और बदबू को कंट्रोल करने में काफी प्रभावी हो सकते हैं.

जिंदगी में बड़े बदलाव के संकेत: जब सब कुछ बिखरता लगे तो समझें कुछ अच्छा होने वाला है

 क्या आपको भी आजकल अपनी जिंदगी में सब कुछ बदला-बदला सा लग रहा है? कभी-कभी हमें लगता है कि चीजें बिगड़ रही हैं, लेकिन असल में वो एक बेहतर भविष्य की तैयारी होती है. अगर आप भी कुछ ऐसे ही संकेतों से गुजर रहे हैं, तो समझिए कि आपकी जिंदगी में जल्द ही कुछ बहुत बड़ा और अच्छा होने वाला है. यहां आसान संकेत दिए गए हैं जिनसे आप समझ सकते हैं कि आपकी जिंदगी में कुछ बड़ा होने वाला है. 1. पुरानी चीजों में मन न लगना कभी-कभी अचानक ऐसा लगता है कि जिन दोस्तों या आदतों के साथ आप खुश थे, अब उनके साथ आपका तालमेल नहीं बैठ रहा. इसका मतलब यह नहीं कि आप बुरे हो गए हैं, बल्कि इसका मतलब है कि आप अंदर से आगे बढ़ चुके हैं और अब आप कुछ नए की तलाश में हैं. 2. सब कुछ बिगड़ता हुआ दिखना जब आपको लगे कि आपके काम, रिश्ते या पैसा- सब कुछ बिखर रहा है, तो घबराएं नहीं. कभी-कभी पुरानी चीजें इसलिए खत्म हो जाती हैं ताकि उनकी जगह पर आप कुछ नया और बेहतर बना सकें. 3. अचानक बहुत अकेलापन महसूस होना जब आपको भीड़ में भी शांति या अकेलापन महसूस हो, तो समझ लें कि आप खुद को जानने की कोशिश कर रहे हैं. यह अकेलापन आपको कमजोर नहीं, बल्कि अंदर से मजबूत बनाने के लिए है, ताकि आप अपनी आवाज सुन सकें. 4. पुरानी गलतियां याद आना अचानक बीते समय की गलतियां बार-बार याद आने लगें, तो परेशान न हों. आपका दिमाग पुरानी बातों को साफ कर रहा है ताकि आप भविष्य में वे गलतियां न करें. यह आपको तैयार करने का एक तरीका है. 5. बिना किसी कारण घबराहट होना कभी-कभी सब कुछ ठीक होने के बावजूद मन बेचैन रहता है. यह इस बात का संकेत है कि आपकी जिंदगी में बदलाव की हवाएं चल रही हैं. जैसे तूफान से पहले शांति भंग होती है, वैसे ही बड़े बदलाव से पहले मन का बेचैन होना आम बात है.

वास्तु टिप्स: घर में लगाएं 7 दौड़ते घोड़ों की पेंटिंग, बदल सकती है किस्मत

हर कोई चाहता है कि उसका घर सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि से महकता रहे. इसके लिए लोग घर की सजावट से लेकर वास्तु के नियमों का खास ख्याल रखते हैं.  वास्तु शास्त्र में कई ऐसी चीजों का जिक्र है, जिन्हें घर में रखने या लगाने से सोई हुई किस्मत भी जाग उठती है. इन्हीं में से एक है—दौड़ते हुए 7 घोड़ों की पेंटिंग. वास्तु में घोड़ों को गति, शक्ति, सफलता और वफादारी का प्रतीक माना गया है.  वहीं, अंक ज्योतिष में 7 की संख्या को बेहद शुभ और सार्वभौमिक (Universal) माना जाता है (जैसे इंद्रधनुष के 7 रंग, सप्तऋषि और शादी के 7 फेरे).  मान्यता है कि घर या कार्यस्थल पर सही दिशा में लगी सात घोड़ों की तस्वीर आपकी रुकी हुई तरक्की को रफ्तार देती है.  आइए जानते हैं इस पेंटिंग को लगाने के अचूक फायदे, सही दिशा और कुछ जरूरी नियम. 1. जीवन में आती है रफ्तार और सकारात्मकता वास्तु विज्ञान के अनुसार, दौड़ते हुए घोड़े जीवन में गतिशीलता और प्रगति लाते हैं.  अगर आपके बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं या करियर में ठहराव आ गया है, तो यह पेंटिंग घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ाती है. यह आपके भीतर छिपे आलस्य को दूर कर लक्ष्यों के करीब लाता है. 2. पेंटिंग चुनते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान बाजार से कोई भी तस्वीर उठाने से पहले वास्तु के इन बारीक नियमों को नोट कर लें: घोड़ों का भाव: घोड़ों के चेहरे शांत और सौम्य दिखने चाहिए. कभी भी गुस्से में या आक्रामक रूप से दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर न लाएं. रंग का चुनाव: वास्तु में सफेद रंग के घोड़ों की पेंटिंग को सबसे उत्तम माना गया है.  सफेद रंग शांति, शुद्धता और मानसिक स्पष्टता का प्रतीक है. बैकग्राउंड : पेंटिंग के बैकग्राउंड में उगता हुआ सूर्य, शांत समंदर या खुला मैदान होना शुभ माना जाता है. कभी भी धूल, आंधी, तूफान या उजड़े हुए पहाड़ों वाले बैकग्राउंड की तस्वीर न खरीदें. छवि: ध्यान रहे कि तस्वीर में सभी 7 घोड़े पूरी तरह साफ दिखाई दे रहे हों. किसी भी घोड़े की पैर या पूंछ कटी हुई नहीं होनी चाहिए. 3. किस दिशा में लगाने से चमकेगी किस्मत? तस्वीर का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दीवार पर टांगा जाए: दक्षिण दिशा (South Wall): यदि आप समाज में नाम, शोहरत, प्रसिद्धि और करियर में सफलता चाहते हैं, तो इस पेंटिंग को दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाएं. वास्तु में इसे सफलता की दिशा माना गया है. उत्तर दिशा (North Wall): अगर आप व्यापार में उन्नति, नई नौकरियों के अवसर और धन लाभ चाहते हैं, तो उत्तर दिशा की दीवार पर इसे लगाना अच्छा रहेगा. पूर्व दिशा (East Wall): जीवन में नई शुरुआत, मान-सम्मान और बच्चों की प्रगति के लिए इसे पूर्व दिशा की दीवार पर लगाया जा सकता है. दौड़ का रुख: सबसे जरूरी बात यह है कि घोड़ों के दौड़ने का रुख हमेशा घर के अंदर की तरफ होना चाहिए, बाहर की तरफ नहीं. अगर घोड़े बाहर की तरफ दौड़ते दिखेंगे, तो घर की लक्ष्मी और समृद्धि बाहर जा सकती है. 4. भूलकर भी इन जगहों पर न लगाएं तस्वीर इस पेंटिंग को कभी भी अपने शयनकक्ष (Bedroom) में न लगाएं. घोड़ों की तीव्र ऊर्जा से आपकी नींद प्रभावित हो सकती है और वैवाहिक जीवन में तनाव आ सकता है. घर के मुख्य द्वार (Main Gate) के ठीक सामने या खिड़की के पास इसे लगाने से बचें. पूजा घर (Temple), रसोई (Kitchen) और शौचालय (Bathroom) की दीवारों पर भी इस पेंटिंग को लगाना वर्जित माना गया है. फेंगशुई और चीनी वास्तु से कनेक्शन भारतीय वास्तु शास्त्र की तरह ही चीनी वास्तु विज्ञान यानी फेंगशुई (Feng Shui) में भी घोड़ों का बहुत बड़ा महत्व है. फेंगशुई के मुताबिक, घोड़े यांग (Yang) ऊर्जा यानी सक्रियता और अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं. चीनी मान्यता के अनुसार, 7 घोड़ों की तस्वीर को मुख्य रूप से लिविंग रूम या ऑफिस के रिसेप्शन पर लगाने से यांग ऊर्जा सक्रिय होती है, जिससे बिजनेस में आ रहे वित्तीय जोखिम (Financial Risks) कम होते हैं और टीम वर्क में मजबूती आती है.  

भिखारी ठाकुर के नाम पर संग्रहालय की तैयारी, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा

पटना बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी सरकार के स्तर पर चल रही है। साथ ही भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर के नाम से संग्रहालय भी बनाने की तैयारी है। सम्राट चौधरी सरकार के कला संस्कृति विभाग ने दोनों ही प्रस्तावों को जमीन पर उतारने का मन बना लिया है। कला विश्वविद्यालय की योजना जमीन पर उतरी तो बिहार इस उपलब्धि को पाने वाला देश का 17वां राज्य बन जाएगा। दिल्ली, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कला उन्नत प्रदेशों में पहले से ही इस तरह के कला विषयक विश्वविद्यालय हैं। गौरतलब है कि बिहार में चाक्षुष कला (फाइन आटर्स) की पढ़ाई तो पटना आर्ट कॉलेज में स्नातक स्तर तक की होती है, लेकिन प्रदर्श (मंचीय कला) आटर्स के शिक्षण के लिए कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है। शहनाई के जादूगर को समर्पित बिस्मिल्लाह खान महाविद्यालय भी अभी जमीन पर उतरना बाकी है। ऐसे में कला संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय खोलने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। जल्द ही विभाग प्रस्ताव बनाकर शीर्षस्तर पर इसकी मंजूरी लेने की पहल करेगा। कला संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने सोमवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय में सभी संबंधित विषयों और कलाओं के विशेषज्ञ और शिक्षक होंगे, ताकि यहां पर कलाकार रंगमंच, नृत्य और संगीत तथा इनकी उपविधाओं में विधिवत प्रशिक्षित होकर डिग्री पा सकें । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का होगा, जिससे विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी भी यहां आकर उच्च कोटि की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। बिहार में कला के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ऐसे में यहां विश्वविद्यालय स्थापित होने से यहां की प्रतिभाओं को उचित सम्मान और पहचान मिलेगी। चुनौतियां भी कम नहीं राष्ट्रीय कला विवि खोलने की राह में कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। खासतौर से सुयोग्य प्रशिक्षक और कला की समझ रखने वाले प्रशासक की तलाश आसान नहीं होगी। कला विश्वविद्यालय के फायदे कला संस्कृति मंत्री डॉक्टर प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित होने से कलाकारों का पलायन थमेगा। राज्य की कला प्रतिभा अपने यहां ही विकसित होगी। हमारी कलाओं का संरक्षण होगा। दूसरे राज्य से भी कला विद्यार्थी प्रदेश में शिक्षा ग्रहण करने आएंगे तो बिहार की ब्रांडिंग भी होगी। रंगमंच, नृत्य और संगीत में उच्चशिक्षा के लिए फिलहाल बिहार के कलाकार दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों पर आश्रित हैं। केवल संगीत और नृत्य में हर साल हजारों बच्चे यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों के बोर्ड से परीक्षा देते हैं और राज्य का अच्छा-खासा पैसा बाहर जाता है। रंगमंच में भी लम्बे समय से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर ड्रामा स्कूल खोलने की मांग उठती रही है। नए विश्वविद्यालय के खुलने से रंगमंच समेत तीनों विधाओं में कलाकारों का विस्थापन रुकेगा।

मासिक दुर्गाष्टमी 2026: 23 मई को बनेगा शुभ योग, जानें पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इस बार ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास में यह पर्व पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, भय और शत्रुओं का नाश होता है. साथ ही जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. मासिक दुर्गाष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त     अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 मई 2026, सुबह 05:04 बजे से     अष्टमी तिथि समाप्त: 24 मई 2026, सुबह 04:27 बजे तक उदयातिथि के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजन 23 मई 2026, शनिवार को ही किया जाएगा. शनिवार के दिन दुर्गाष्टमी पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है. मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा करने से शनि जनित दोषों से भी राहत मिलती है. मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा विधि  पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर मां दुर्गा के सामने व्रत का संकल्प लें. एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. मां दुर्गा को कुमकुम, अक्षत, लाल चंदन और लाल चुनरी अर्पित करें. मां को लाल रंग के फूल अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें अवश्य चढ़ाएं.  माता रानी को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ियां और बिंदी अर्पित करें. मां के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं. इसके बाद दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. फिर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. अंत में कपूर से मां दुर्गा की आरती करें और अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.  

पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण पर होगा ट्रिपल टेस्ट, आयोग गठन की तैयारी तेज

लखनऊ यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा। ऐसे में प्रशासक समिति के माध्यम से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को ही बागडोर सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। ग्राम प्रधान के साथ ही ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी प्रशासक समिति के माध्यम से बढ़ाया जाएगा। प्रधानों और अध्यक्षों कार्यकाल बढ़ाकर भाजपा सरकार की कोशिश उनकी हमदर्दी हासिल करने की है। माना जा रहा है कि अब पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। ऐसे में कार्यकाल बढ़ाए गए प्रधान और अध्यक्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा के काम आ सकते हैं। हालांकि प्रधानी की तैयारी में लगे लोगों को इस फैसले से झटका भी लगेगा। ऐसे में यह लोग नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। पहली बार ट्रिपल टेस्ट से ओबीसी आरक्षण होगा तय वहीं, पंचायत चुनावों में पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी का आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2023 में नगर निकाय चुनावों में पहली बार इसे लागू कर आयोग गठित किया गया था। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे से आरक्षण तय किया गया था। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल छह महीने का तय किया गया है। अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में होने की उम्मीद है। यह आयोग पिछड़नेपन की प्रकृति व प्रभावों की समकालीन, सतत व अनुभवजन्य जांच और अध्ययन, पिछड़ा वर्ग के आंकड़े न होने पर सर्वे और फिर आरक्षण तय करेगा। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव रैपिड सर्वे से हुआ था और वर्ष 2015 के ओबीसी आंकड़े भी रखे गए थे। क्योंकि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान की तर्ज पर यूपी में भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव चार चरणों में अप्रैल-मई में हुए थे। दूसरी ओर अब राज्य निर्वाचन आयोग भी अपना काम तेजी से करेगा। लगातार पांचवीं बार अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून की गई है। अब 10 जून को पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की उम्मीदें हैं। विस चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की संभावना कम विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होना आसान नहीं होगा। क्योंकि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल जून से अगर शुरू हुआ तो यह नवंबर तक रहेगा। वहीं आयोग ने रिपोर्ट देने में समय लगाया तो शासन इसका कार्यकाल बढ़ा सकता है। फिलहाल, सत्तापक्ष ही नहीं विपक्षी दल भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर शांत हैं। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें विधानसभा चुनाव के बाद हों। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उसका सरकार पालन करेगी।

27 जुलाई 2026 को शनि होंगे वक्री, वृषभ से वृश्चिक तक इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता माना जाता है. शनिग्रह का किसी भी राशि में मार्गी या वक्री (उल्टी चाल) होना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डालता है. साल 2026 में न्याय के देवता शनि एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहे हैं. 27 जुलाई 2026 को शनिदेव गुरु की राशि मीन में वक्री होने जा रहे हैं. सामान्यतः शनि की उल्टी चाल या वक्री अवस्था को कष्टकारी माना जाता है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब क्रूर या पापी ग्रह वक्री होते हैं, तो वे चेष्टा बल प्राप्त कर लेते हैं. ऐसे में कुछ विशेष राशियों के लिए शनि की यह वक्री अवस्था भारी नुकसान के बजाय अप्रत्याशित लाभ और बड़ी सफलता के रास्ते खोलने वाली साबित होगी. आइए जानते हैं कि 27 जुलाई से शनिदेव की उल्टी चाल किन 4 राशियों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी रहने वाली है. 1. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए शनिदेव का वक्री होना किसी वरदान से कम नहीं रहेगा. शनि आपकी राशि के लिए राजयोग कारक ग्रह माने जाते हैं. इस अवधि में आपके लिए आय के नए और मजबूत स्रोत बनेंगे. लंबे समय से अटका हुआ या डूबा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों को मनमुताबिक इंक्रीमेंट या प्रमोशन मिल सकता है. जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें बड़े पैकेज का ऑफर मिल सकता है. आपकी रुकी हुई योजनाएं दोबारा गति पकड़ेंगी और आपकी बड़ी महत्वाकांक्षाएं इस दौरान पूरी हो सकती हैं. 2. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के जातकों के लिए शनिदेव का मीन राशि में वक्री होना आपके दशम भाव यानी कर्म और बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा. यदि आप कोई नया स्टार्टअप या व्यापार शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय बहुत अनुकूल है. मार्केट में आपकी साख बढ़ेगी और प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे. इस दौरान आपको पैतृक संपत्ति से कोई बड़ा लाभ हो सकता है. जमीन, मकान या वाहन खरीदने के योग बेहद मजबूत हैं. कार्यस्थल पर आपकी पुरानी मेहनत का फल अब आपको बोनस या सम्मान के रूप में मिलने लगेगा. 3. तुला राशि (Libra) तुला राशि के स्वामी शुक्र देव हैं, जो शनिदेव के परम मित्र हैं. इसलिए शनि की उल्टी चाल आपके लिए कोर्ट-कचहरी और स्वास्थ्य के मामलों में राहत लेकर आएगी. ऑफिस या सामाजिक जीवन में आपके गुप्त शत्रु आपके सामने टिक नहीं पाएंगे. कोर्ट-कचहरी के किसी पुराने मामले में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. यदि आप पिछले काफी समय से किसी पुरानी या पुरानी बीमारी से परेशान थे, तो 27 जुलाई के बाद आपकी सेहत में तेजी से सुधार होने लगेगा. यदि आपके सिर पर कोई पुराना कर्ज या लोन था, तो इस अवधि में आप उसे चुकाने की स्थिति में आ जाएंगे, जिससे मानसिक तनाव दूर होगा. 4. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि की वक्री चाल पंचम और नवम भाव से जुड़े शुभ फलों को बढ़ाने वाली साबित होगी. प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) या उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इस दौरान अपनी मेहनत के बेहतरीन परिणाम मिलेंगे. एकाग्रता में वृद्धि होगी. जो लोग शिक्षा या नौकरी के सिलसिले में लंबे समय से विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके वीजा और यात्रा से जुड़ी रुकावटें दूर होंगी. आपका रुझान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की तरफ बढ़ेगा, जिससे आपको आंतरिक शांति और मानसिक संतुष्टि का अनुभव होगा. शनिदेव के अशुभ प्रभावों से बचने और शुभता बढ़ाने के उपाय शनि की वक्री अवधि के दौरान शुभ फलों को और अधिक मजबूत करने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इसके अलावा, गरीब व जरूरतमंद लोगों को काली उड़द की दाल, काले तिल या छतरी का दान करें. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करना भी इस समय आपके भाग्य को बल देगा.  

छिपकली गिरने के संकेत: शरीर के अलग-अलग अंगों पर मिलते हैं शुभ-अशुभ फल

 जब भी घर में छिपकली दिख जाए तो हर इंसान डरने लगता है. लेकिन, अगर वहीं छिपकली किसी शरीर के अंग पर गिर जाए तो मन में ओर ज्यादा खौंफ पैदा हो जाता है. लेकिन, कई लोग शरीर के अंग पर छिपकली गिरने को अच्छा मानते हैं. शरीर के अंग पर छिपकली गिरने से जुड़े तथ्य का जिक्र सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है. दरअसल, सामुद्रिक शास्त्र में अलग-अलग अंगों पर छिपकली गिरने के अलग-अलग फल बताए गए हैं. किसी अंग पर छिपकली का गिरना धन, सफलता और शुभ समाचार देता है. तो कहीं इसे सावधानी या बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है. तो आइए जानते हैं कि शरीर के किस छिपकली का गिरना शुभ और अशुभ कहलाता है. 1. सिर पर छिपकली गिरना इसे बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि व्यक्ति को धन, सम्मान या किसी बड़े अवसर की प्राप्ति हो सकती है. 2. माथे पर छिपकली गिरना यह संकेत देता है कि जल्द ही किसी रिश्तेदार या पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है. यह समाज में मान-सम्मान भी दिला सकता है. 3. नाक पर छिपकली गिरना इसे सेहत से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि कोई पुरानी बीमारी ठीक हो सकती है या राहत मिल सकती है. 4. कान पर छिपकली गिरना यह शुभ समाचार या लाभ मिलने का संकेत माना जाता है. कहीं से अच्छी खबर मिलने की संभावना जताई जाती है. 5. आंख पर छिपकली गिरना इसे मानसिक सेहत से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि व्यक्ति किसी बंधन या तनाव से मुक्त हो सकता है. 6. होंठ पर छिपकली गिरना ऊपर के होंठ पर छिपकली का गिरना आर्थिक नुकसान का संकेत माना जाता है. नीचे के होंठ पर छिपकली का गिरना धन लाभ या फायदा होने की संभावना बताई जाती है. 7. हाथ पर छिपकली गिरना दाहिने हाथ पर: सम्मान और सफलता मिलने का संकेत. बाएं हाथ पर: नुकसान या सावधानी बरतने का संकेत. 8. गला और कंधा गले पर गिरना: शत्रुओं से छुटकारा या बाधाओं का अंत. कंधे पर गिरना: किसी काम में सफलता मिलने का संकेत. 9. पेट और नाभि क्षेत्र इसे सुख, समृद्धि और संतान से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है. 10. पीठ पर छिपकली गिरना इसे आमतौर पर अशुभ माना जाता है और यह किसी परेशानी या रुकावट का संकेत हो सकता है. 11. पैर से जुड़े संकेत जांघ, घुटने या पिंडली पर गिरना यात्रा, वाहन सुख या स्थान परिवर्तन का संकेत माना जाता है. 

बिहार में शुरू हुआ सहयोग शिविर, पंचायत स्तर पर सुनी जाएंगी जनता की समस्याएं

पटना  सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सारण जिले के डुमरी बुजुर्ग में सहयोग शिविर का शुभारंभ किया। सरकार की प्राथम‍िकताएं ग‍िनाईं। अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी स्वत: निलंबित माने जाएंगे। दीप प्रज्वलित कर शिविर का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में सहयोग शिविर की शुरुआत की जा रही है। 31 वें दिन स्‍वत: सस्‍पेंड होंगे अधिकारी इसके माध्यम से आम लोग सीधे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे और उनकी मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होगी। उन्होंने बताया कि 11 मई को सरकार ने सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 जारी किया था। अब पंचायत स्तर पर हर महीने दूसरे और चौथे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाए जाएंगे। जहां अंचल, ब्लॉक, शिक्षा, थाना समेत विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन मिलने के 10 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस जारी किया जाएगा। 20 दिन पूरे होने पर दूसरा नोटिस और 25वें दिन तीसरा नोटिस भेजा जाएगा। इसके बावजूद 30 दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने पर 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वत: निलंबित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को समृद्ध बनाने का सपना देख रहे हैं। सहयोग शिविर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सोनपुर में होंगे विकास के कई कार्य मुख्यमंत्री ने सारण के विकास से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस क्षेत्र को गोद लेने की घोषणा की गई थी और अब यहां एयरपोर्ट तथा टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है। बाबा हरिहरनाथ के नाम पर टाउनशिप विकसित होगी। उन्होंने कहा कि पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर छपरा में गंगा-अंबिका पथ का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही नोएडा की तर्ज पर आधुनिक शहर बसाने की योजना पर भी काम चल रहा है। राज्य में 211 स्थानों पर डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। स्वास्थ्य व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुमंडल अस्पतालों के डॉक्टर सामान्य बीमारी में मरीजों को रेफर कर देते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनावश्यक रेफर करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 15 अगस्त तक जिला और अनुमंडल अस्पतालों में बेहतर इलाज की व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाएगी।  

कैंसर इलाज में उम्मीद की नई किरण, IIT प्रोफेसर बुशरा अतीक का अहम रिसर्च

कानपुर  आईआईटी के बायोलाजिकल साइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर बुशरा अतीक और उनकी शोध टीम को कैंसर अनुसंधान में बड़ी कामयाबी मिली है। प्रो. अतीक ने कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) को शरीर में तेजी से फैलाने वाले और इसके इलाज को बेअसर करने वाले एक खास प्रोटीन डीकेसी -1 की पहचान की है। चिकित्सा जगत में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही यह खोज प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'नेचर कम्युनिकेशंस' ने 18 मई को ही प्रकाशित की है। इस खोज से भविष्य में आंत के कैंसर का अधिक सटीक और प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा। प्रो. बुशरा अतीक के शोध के मुताबिक शरीर में डीकेसी-1 प्रोटीन का स्तर बढ़ने से कैंसर कोशिकाएं न सिर्फ बेहद आक्रामक हो जाती हैं, बल्कि उन पर दवाओं का असर भी खत्म होने लगता है। शोध के अनुसार यह प्रोटीन शरीर में स्फिंगोलिपिड नामक फैट के निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करता है। स्फिंगोलिपिड आमतौर पर कोशिकाओं की बनावट और उनकी प्राकृतिक मृत्यु (अपोप्टोसिस) को नियंत्रित करते हैं। जब डीकेसी-1 का स्तर बढ़ता है तो शरीर में ऐसे लिपिड ज्यादा बनने लगते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को सुरक्षा कवच देते हैं। यही वजह है कि कई गंभीर मरीजों में कीमोथेरेपी और अन्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। शोध अध्ययन में सामने आया है कि जिन मरीजों में इस प्रोटीन का स्तर ज्यादा था, उनमें कैंसर बेहद उन्नत (एडवांस्ड) स्टेज में पहुंच चुका था। इस आधार पर जब शोधकर्ताओं ने लैब के भीतर आरएनए इंटरफेरेंस तकनीक के जरिए जब डीकेसी-1 प्रोटीन के स्तर को कम किया तो इसके चौंकाने वाले और सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। ऐसा करने से कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई। कैंसर कोशिकाएं दवाओं और कीमोथेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील हो गईं, यानी उन पर दवाओं ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया। प्रो. बुशरा अतीक के अनुसार कैंसर सिर्फ जीन या कोशिकाओं की खराबी नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबालिज्म (उपापचय) से भी गहराई से जुड़ा है। अब शोधकर्ता डीकेसी-1 और स्फिंगोलिपिड मेटाबालिज्म को टारगेट करने वाली नई दवाएं विकसित कर सकेंगे, जो कैंसर के मरीजों के लिए एक नई जीवनदायिनी साबित हो सकती हैं।