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आरटीई उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 22 जिलों में 687 स्कूलों की पहचान

 हिसार आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सीटें न दिखाने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय की टेढ़ी नजर है। इस कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने 22 जिलों के अंदर सर्वे कर 687 स्कूलों की पहचान की है, जोकि 3 साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर शिक्षा के नाम पर दुकानें चला रहे थे। सर्वे रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि 687 स्कूलों के पास न मान्यता से संबंधित दस्तावेज मिले और न ही विशेष समयाविधि तक दाखिले करने के अधिकार से कोई संबंधित दस्तावेज मिले। जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त स्कूलों से दाखिले की शक्ति छीनने का फैसला लिया है। साथ ही सभी उपायुक्त को भी पत्र जारी करने का फैसला लिया है, जोकि गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर आगामी कार्रवाई करेंगे। 413 निजी स्कूलों ने दिखाई 3 हजार सीटें प्रदेश में 1100 स्कूलों को सर्च किया था। जिनके पास मान्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। सरकार ने स्कूलों को दस्तावेज पूरे करने का समय दिया। जिस पर प्रदेश में 413 निजी स्कूलों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिया। साथ ही आरटीई के तहत 3 हजार सीटें भी दिखाई। जिसके बाद सरकार ने शेष 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए है। सरकार ने इस बार एक किलोमीटर का दायरा ही रखा है। जिसके दायरे में विद्यार्थी निजी स्कूल में उपरोक्त योजना के तहत आवेदन कर सकेगा। 6 जुलाई तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। किसी तरह की कोई शिकायत हो तो अभिभावक उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवा सकता है। समस्या की ये सुनवाई करेगी कमेटी     पहले अभिभावक खंड स्तर पर गठित कमेटी में अपनी शिकायत रख सकते हैं।     जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी पर अपील लगा सकते हैं     इसके बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो संयुक्त निदेशक प्रशासनिक शाखा के पास शिकायत रख सकते हैं पंचकूला के मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 687 निजी स्कूलों को जांचा है, जिनके पास मान्यता से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं मिले। समय देने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए है। जिसके बाद अब एमआइएस पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। साथ ही डीसी को भी स्पष्ट कहा जाएगा कि वे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई करें।  

घर की चाबियां कहां रखें? वास्तु शास्त्र के ये नियम दिलाएंगे शुभ फल

घर में मौजूद हर छोटी-बड़ी वस्तु का वास्तु शास्त्र में अपना महत्व बताया गया है. माना जाता है कि वस्तुओं को सही दिशा और सही स्थान पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इन्हीं वस्तुओं में चाबियां भी शामिल हैं. वास्तु शास्त्री बिमलेश कुमार बताते हैं कि आमतौर पर लोग चाबियों को सिर्फ ताला खोलने का साधन समझते हैं, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार ये सुरक्षा, जिम्मेदारी और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. इसलिए उनके अनुसार चाबियों को रखने से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. किस दिशा में रखें घर की चाबियां? वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की मुख्य चाबियां पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती है. कहा जाता है कि इस स्थान पर चाबियां रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और महत्वपूर्ण कार्यों में स्थिरता आती है. चाबियों को रखने के लिए लकड़ी के की-होल्डर या छोटे बॉक्स का उपयोग करना भी अच्छा माना जाता है. मुख्य द्वार के पास रखें व्यवस्थित की-होल्डर घर के प्रवेश द्वार के पास साफ और व्यवस्थित की-होल्डर लगाना लाभकारी माना जाता है. इससे चाबियां सुरक्षित रहती हैं और बार-बार खोजने की परेशानी भी नहीं होती. वास्तु के अनुसार व्यवस्थित वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जबकि बिखराव नकारात्मकता बढ़ा सकता है. रसोईघर में चाबियां रखने से बचें वास्तु मान्यताओं के मुताबिक रसोईघर में चाबियां रखना उचित नहीं माना जाता. रसोई अग्नि तत्व का स्थान है और चाबियां धातु की बनी होती हैं. इन दोनों तत्वों का असंतुलन घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसलिए चाबियों के लिए अलग स्थान निर्धारित करना बेहतर माना जाता है. पूजा स्थल से रखें दूर कई लोग सुविधा के लिए पूजा घर के आसपास चाबियां रख देते हैं, लेकिन वास्तु में इसे उचित नहीं माना गया है. पूजा स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, इसलिए वहां केवल पूजा से जुड़ी वस्तुएं ही रखना बेहतर माना जाता है. पुरानी और बेकार चाबियां हटाएं घर में पड़ी जंग लगी, टूटी हुई या किसी काम की न रहने वाली चाबियों को लंबे समय तक संभालकर रखने से बचना चाहिए. ऐसी वस्तुओं को समय-समय पर हटाने से घर में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है. वास्तु के अनुसार अनुपयोगी वस्तुएं रुकी हुई ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं. हालांकि वास्तु नियम आस्था और परंपराओं पर आधारित होते हैं, लेकिन घर को व्यवस्थित और साफ-सुथरा रखना हर दृष्टि से लाभदायक माना जाता है.

स्टूल में खून दिखे तो न करें नजरअंदाज, जानें रंग क्या बताता है और कब तुरंत डॉक्टर से मिलें

मल में खून आना (Rectal Bleeding) एक ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग बवासीर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर बार इसका कारण बवासीर नहीं होता। कई बार यह पाचन तंत्र की गंभीर समस्याओं जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), डाइवर्टिकुलर डिजीज, पेट या आंतों में अल्सर, पॉलीप्स और यहां तक कि कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक स्टूल में खून का रंग बीमारी के कारण का महत्वपूर्ण संकेत देता है। चमकीला लाल खून आमतौर पर गुदा या निचली आंत से संबंधित समस्याओं की ओर इशारा करता है, जबकि गहरा लाल, मैरून या काला टार जैसा मल ऊपरी पाचन तंत्र में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। व्यक्ति को यदि पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर आना, मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मल में खून आना क्या बीमारी है? क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक मल में खून आने की स्थिति को रेक्टल ब्लीडिंग के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब होता है कि गुदा (रेक्टम) या पाचन तंत्र के किसी हिस्से से खून का निकलना, जो कि मल के साथ दिखाई देता है। यह ब्लड अलग-अलग रंग जैसे कि चमकीला लाल, गहरा लाल, मैरून या काला रंग का दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खून का रंग यह बताने में मदद करता है कि ब्लीडिंग पाचन तंत्र के किस हिस्से से हो रही है। मल में खून कौन से रंग का दिखाई दे सकता है? मल में खून का रंग और बनावट डॉक्टरों को संभावित कारण पहचानने में मदद करते हैं। चमकीला लाल खून  हेल्थडायरेक्ट के अनुसार यदि टॉयलेट पेपर, कमोड या स्टूल की सतह पर चमकीला लाल खून दिखाई दे, तो यह आमतौर पर गुदा या निचले कोलन से होने वाली ब्लीडिंग का संकेत होता है। इसके सामान्य कारण में बवासीर (Hemorrhoids), एनल फिशर (गुदा में दरार), रेक्टल इंफेक्शन और निचले कोलन की सूजन को शामिल किया जाता है। मल में खून आने के कारण  एनसीबीआई के मुताबिक यदि स्टूल गहरे लाल या मैरून रंग का दिखाई दे तो यह बड़ी आंत या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। इसके संभावित कारण में डाइवर्टिकुलर डिजीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), कोलन पॉलीप्स और कोलोरेक्टल कैंसर को शामिल किया जाता है। काला और चिपचिपा मल (Black, Tarry Stool) क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक यदि मल कोलतार (Tar) की तरह काला और चिपचिपा दिखे तो यह ऊपरी पाचन तंत्र जैसे पेट या छोटी आंत में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। पेट का अल्सर, गैस्ट्राइटिस, इसोफेगल वैरीसीज, पेट या डुओडेनम में ब्लीडिंग इसके संभावित कारण हो सकते हैं। मल में खून आने के क्या कारण हो सकते हैं?     बवासीर – एनआईएच के अनुसार बवासीर Rectal Bleeding का सबसे आम कारण माना जाता है। इसमें गुदा या मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है। इससे व्यक्ति को मल त्याग करते समय दर्द, खुजली या चमकीला लाल खून दिखाई देता है।     गुदा में दरार होना (Anal Fissure) – एनसीबीआई के अनुसार कब्ज या कठोर मल के कारण गुदा की त्वचा में छोटी-छोटी दरार बन सकती है, जिससे खून निकल सकता है।     इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज – क्रोहन और कोलाइटिस के मुताबिक क्रोहन रोग (Crohn's Disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियां आंतों में सूजन पैदा करती हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति को मल में खून, पेट दर्द, दस्त और लगातार वजन कम होने की समस्या का सामना करना पड़ता है।     डाइवर्टिकुलर डिजीज (Diverticular Disease) – एनएचएस के मुताबिक बड़ी आंत की दीवार में छोटे पाउच बन जाने को डाइवर्टिकुला कहा जाता है। इनके फटने या सूजन होने पर ब्लीडिंग हो सकती है।     कोलन कैंसर (Colon Cancer) – अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार कुछ मामलों में मल में खून आना कोलन कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेष रूप से यदि इसके साथ वजन घटना, कमजोरी या मल त्याग की आदतों में बदलाव भी हो। मल में खून आने के कारण किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्लिवलैंड क्लीनिक के अनुसार आगे बताए संकेतों या लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इनके महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।     बार-बार मल में खून आना     काला या टार जैसा मल     लगातार पेट दर्द     अचानक वजन घटना     चक्कर आना या कमजोरी     एनीमिया के लक्षण     मल त्याग की आदतों में बदलाव मल में खून आना एक ऐसा लक्षण है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि इसके पीछे बवासीर जैसी सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन कई बार अन्य गंभीर कारण भी इसकी वजह बन सकते हैं। यदि स्टूल में बार-बार खून दिखाई दे, काला मल आए या वजन कम होने जैसे लक्षण हों, तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। हमने इस लेख की समीक्षा कैसे की हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

पांच जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी

पटना  राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव कमजोर होने के कारण बीते माह की तरह जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार माह में ज्यादातर भागों के अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा।  प्रदेश का अधिकतम तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस के बीच एवं न्यूनतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। राज्य के अधिकतर भागाें में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ कहीं छिटपुट तो कहीं पर भारी वर्षा के कारण उमस वाली गर्मी लोगों को परेशान करेगी।  पांच जिलों में भारी बारिश की चेतावनी  उत्तर बिहार की तुलना में राजधानी सहित दक्षिण भागों में वर्षा में कमी देखने को मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को पटना सहित सभी भागों में बादलों की आवाजाही बने होने के साथ कुछ जगहों पर हल्की वर्षा के आसार है।  जबकि, प्रदेश के पांच जिलों के कटिहार, मधुबनी, पूर्णिया, सीतामढ़ी एवं पश्चिमी चंपारण के एक या दो स्थानों पर मेघ गर्जन, वज्रपात के साथ भारी वर्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई है।  तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना है। प्रदेश के शेष जिलों में 30-40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने के साथ कुछ स्थानों पर बिजली चमकने एवं मेघ गर्जन के साथ बूंदाबांदी के आसार है। बीते 24 घंटों के दौरान समस्तीपुर में 39 किमी प्रतिघंटा हवा की रफ्तार दर्ज की गई।  प्रदेश के अलग-अलग भागों में वर्षा दर्ज की गई। गोपालगंज के भोरे में 92.8 मिमी सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई। बुधवार को मधुबनी और मुंगेर को छोड़ कर पटना सहित शेष जिलों के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। राजधानी का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस एवं 39.0 डिग्री सेल्सियस के साथ भभुआ में प्रदेश का सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। प्रमुख शहरों में वर्षा की स्थिति पूर्वी चंपारण के चटिया में 86.2 मिमी, गोपालगंज में 79.2 मिमी, मुजफ्फरपुर के मुसहरी में 71.6 मिमी, समस्तीपुर के पूसा में 68.8 मिमी, किशनगंज के दिघलबैंक में 65.2 मिमी, समस्तीपुर के मोरवा में 59.2 मिमी दर्ज की गई। गोपालगंज के फुलवरिया में 48.8 मिमी, पूर्वी चंपारण के चेरिया में 30.6 मिमी, भभुआ के अधवारा में 28.4 मिमी, रोहतास में 27.0 मिमी, भभुआ में 24.6 मिमी दर्ज की गई। समस्तीपुर के कल्याणपुर में 22.8 मिमी, लखीसराय के चानन में 22.2 मिमी, सिवान में 20.4 मिमी, डेहरी में 20.0 मिमी, पश्चिम चंपारण के बैरिया में 19.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। प्रमुख शहरों का तापमान  (डिग्री सेल्सियस में) शहर     अधिकतम (°C)     न्यूनतम (°C) पटना      36.3                   28.6 गया        36.8                      26.2 भागलपुर   35.0                  27.4 मुजफ्फरपुर  33.0            27.6

नीरज चोपड़ा के बाद रोहित यादव का जलवा, विश्व सीजन में दूसरे सर्वश्रेष्ठ थ्रोअर बने

नई दिल्ली  पहले नीरज चोपड़ा, फिर सचिन यादव और अब रोहित यादव के रूप में भारत का एक और स्टार भाला फेंक एथलीट विश्व पटल पर छा गया है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के एक छोटे से गांव अदारिया डभिया के रोहित 87.05 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर अब दुनिया के इस सत्र के दूसरे सर्वश्रेष्ठ थ्रोअर बन गए हैं। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में चल रही 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के आखिरी दिन 25 वर्षीय रोहित ने स्वर्ण पदक के साथ यह उपलबधि भी हासिल की और इस सत्र में शीर्ष पर चल रहे श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज (92.62 मीटर) के बाद सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। इसी के साथ उन्होंने जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। हाल ही में दोहा डायमंड लीग में दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा के चौथे स्थान (85.69 मीटर) पर रहने और वहां श्रीलंका के पथिराज के छा जाने बाद भाला फेंक में इस साल कामनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भारत के पदक और खासकर स्वर्ण पदक की आस कुछ कम हो चली थी, लेकिन इस बीच रोहित यादव अब इस प्राचीन खेल में भारत की नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। अब इस प्रदर्शन के दम पर रोहित भी नीरज के साथ भाला फेंक में इस साल के इन दो बड़े खेलों में भारत के लिए पदक जीतने को दम लगाएंगे। रोहित यादव का पिछला सर्वश्रेष्ठ थ्रो 83.76 मीटर था। यह उन्होंने इंडियन एथलेटिक्स सीरीज के लुधियाना लेग में दर्ज किया गया था। हालांकि अब 87.05 मीटर का उनका थ्रो 2022 में मनु डीपी द्वारा बनाए गए प्रतियोगिता के 84.35 मीटर के रिकॉर्ड से भी कहीं बेहतर रहा। प्रतियोगिता में यशवीर सिंह (83.72 मीटर) और सचिन यादव (82.32 मीटर) क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन दोनों ने भी एशियन गेम्स के लिए 77.87 मीटर का क्वालिफिकेशन मार्क पार किया। कामनवेल्थ गेम्स में देखने को मिलेगी कड़ी टक्कर चोट के बाद वापसी करने वाले नीरज को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। वह दोहा के इस सत्र के अपने पहले प्रदर्शन के दम पर इस सत्र के बेस्ट थ्रोअर की सूची में सर्वश्रेष्ठ चार में बने हुए हैं। ऐसे में कौन जाने की अगले माह ग्लासगो में होने वाले कामनवेल्थ गेम्स और इसके बाद एशियन गेम्स में श्रीलंका के पथिराज के अलावा हमवतन नीरज और रोहित के बीच ही कड़ी टक्कर देखने को मिल जाए। इससे पहले नीरज को एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपने फ्लाप शो के दौरान अन्य एथलीटों सहित हमवतन सचिन यादव से भी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। रोहित यादव ने कहा, इस प्रदर्शन से कामनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। भविष्य में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए मुझे शुरुआती थ्रो में ही 85 या 86 मीटर की दूरी पार करने की आदत डालनी चाहिए। भाला फेंक में इस सत्र के पांच सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन     एथलीट, देश, थ्रो, स्थान     रुमेश पाथिराज, श्रीलंका, 92.62 मी., रोम डायमंड लीग     रोहित यादव, भारत, 87.05 मी., भुवनेश्वर राष्ट्रीय एथलेटिक्स     एंडर्सन पीटर्स, ग्रेनेडा, 86.50 मी., दोहा डायमंड लीग     नीरज चोपड़ा, भारत, 85.69 मी., दोहा डायमंड लीग     जैकब वाडलेज, चेक गणराज्य, 85.00 मी., दोहा डायमंड लीग  

6 जुलाई को खानूगांव में होगी बाढ़ प्रबंधन की मॉकड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियों का होगा परीक्षण

6 जुलाई को खानूगांव में होगी बाढ़ प्रबंधन की मॉकड्रिल मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा; जलभराव रोकने, संवेदनशील जलस्रोतों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टर मिश्रा के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक सम्पन्न भोपाल  कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देशन में गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।   बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे ने आगामी मानसून को दृष्टिगत रखते हुए संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्ण सतर्कता के साथ कार्य करने तथा आपदा प्रबंधन संबंधी निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   बैठक में बताया गया कि 6 जुलाई को खानूगांव में बाढ़ प्रबंधन की मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। अपर कलेक्टर पांडे ने मॉक ड्रिल के सफल एवं प्रभावी संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास आपदा की वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जलभराव रोकने के लिए ड्रेनेज सिस्टम की विशेष सफाई के निर्देश   अपर कलेक्टर पांडे ने नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित जलभराव की स्थिति से बचाव के लिए ड्रेनेज सिस्टम तथा प्रमुख नालों की युद्धस्तर पर सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, नाव, लाइफ जैकेट तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही नगर निगम एवं एसडीआरएफ की बचाव टीमों को संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त संसाधनों सहित तैनात रखने तथा सभी नियंत्रण कक्षों को 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए। जलस्रोतों पर सुरक्षा जाली और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं     वर्षाकाल में पर्यटकों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपर कलेक्टर ने केरवा डैम,कलियासोत, अमरगढ़, महादेव पानी सहित जिले के अन्य संवेदनशील जलस्रोतों एवं पिकनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।   उन्होंने गहरी खाइयों एवं जलस्रोतों के समीप सुरक्षा जाली लगाने, चेतावनी सूचक बोर्ड स्थापित करने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वर्षाकाल में जलस्रोतों पर विशेष सावधानी बरतें तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।  हर एसडीएम अपने क्षेत्र में गठित करेंगे आपदा प्रबंधन टीम        बैठक में सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में समर्पित आपदा प्रबंधन टीमों का गठन करें तथा विभागों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाई जाए, ताकि न्यूनतम रिस्पॉन्स टाइम के साथ राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया जा सके। जर्जर भवनों, बंद खदानों और कोचिंग संस्थानों पर विशेष निगरानी जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपर कलेक्टर पांडे ने नगरीय निकायों को जिले के जर्जर एवं खतरनाक भवनों की सूची तैयार कर आवश्यकतानुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बंद पड़ी खदानों के चारों ओर सुरक्षित फेंसिंग कराने तथा दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने को कहा।        बैठक में कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अपर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी कोचिंग संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा फायर सेफ्टी मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।              बैठक में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निगम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

गृह विभाग का बड़ा फेरबदल: 125 डिप्टी एसपी का ट्रांसफर, सीएम सुरक्षा टीम में भी बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने गुरुवार को दिन में 125 डिप्टी एसपी को नई तैनाती दी हैं। इनमें से अधिकांश वे हैं, जिनको हाल ही में निरीक्षक से पुलिस उपाधीक्षक के पद पर प्रोन्नत किया गया था। सरकार की ओर से जारी आदेश में सभी को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इन ट्रांसफर में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात अफसरों को भी बदला गया है। मुरादाबाद के कमलेश कांत को नोएडा और अशोक सिंह को जीआरपी गोरखपुर ट्रांसफर किया गया है। इंस्पेक्टर से डिप्टी एसपी पद पर प्रमोशन के बाद मुरादाबाद के कमलेश कांत को नोएडा कमिश्नरेट और सहारनपुर से शिव ठाकुर को मेरठ भेजा गया है। नोएडा प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक और हाई-प्रोफाइल कमिश्नरेट माना जाता है। यहां कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। मंजरी राव को प्रमोशन के बाद बलिया में ही पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया है। शिल्पा वर्मा को कन्नौज भेजा गया है। इसके अलावा, अशोक कुमार सिंह को डिप्टी एसपी संत कबीरनबगर से डिप्टी एसपी रेलवे गोरखपुर के पद पर तैनाती मिली है। इमरान खान को ललितपुर से प्रयागराज पीएसी में सहायक सेनानायक नियुक्त किया गया है। लखनऊ पीएसी से धर्मेंद्र सिंह यादव को मुरादाबाद पुलिस अकादमी भेजा गया है। मुख्यमंत्री सुरक्षा में लखनऊ कमिश्नरेट से सुधाकर द्विवेदी और भानु प्रताप सिंह को तैनात कर दिया गया है। इनको भी प्रमोशन मिला था। मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात रहे जितेंद्र कुमार-2 को आगरा कमिश्नरेट में सहायक पुलिस आयुक्त बनाया गया है। पहले उनका तबादला शाहजहांपुर किया गया था, लेकिन संशोधित आदेश में उन्हें आगरा भेजा गया। वीवीआईपी सुरक्षा का अनुभव रखने वाले जितेंद्र कुमार अब पर्यटन नगरी आगरा में कानून-व्यवस्था संभालेंगे। मुजफ्फरनगर में डिप्टी एसपी विनय कुमार द्विवेदी को वाराणसी कमिश्नरेट का एससीपी बनाया गया है। धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से हमेशा व्यस्त रहने वाले वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। मुजफ्फरनगर से विश्वजीत सिंह को जीआरपी मुरादाबाद में डिप्टी एसपी के पद पर तैनाती मिली है। बाराबंकी से राम किशन को अब गाजियाबाद कमिश्नरेट में एसीपी बनाया गया है। दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्र में आने वाले गाजियाबाद में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। अयोध्या से संदीप कुमार राय का तबादला प्रयागराज कमिश्नरेट में एसीपी के पद पर किया गया है। प्रयागराज में बड़े धार्मिक आयोजनों, कानून-व्यवस्था और छात्र गतिविधियों को देखते हुए उनकी नई तैनाती को अहम माना जा रहा है। अयोध्या के बाद संदीप कुमार राय दूसरी धार्मिक नगरी प्रयागराज पहुंचे हैं।

डॉक्टर्स डे पर इनर व्हील क्लब मुरैना ने चिकित्सकों का किया सम्मान, नई कार्यकारिणी का भी हुआ परिचय

इनर व्हील क्लब मुरैना ने डॉक्टर्स डे पर चिकित्सकों का किया सम्मान, नई कार्यकारिणी का भी हुआ परिचय मुरैना  इनर व्हील क्लब मुरैना द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सकों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर क्लब की वर्ष 2026-27 की नई कार्यकारिणी का भी परिचय कराया गया। नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष श्रीमती प्रतीक्षा बांदिल, सचिव श्रीमती मीनाक्षी माहेश्वरी, कोषाध्यक्ष श्रीमती भावना मित्तल, आईएसओ डॉ. सुधा माहेश्वरी, सीसी श्रीमती रंजिता शिवहरे तथा संपादक श्रीमती आस्था मंगल को दायित्व सौंपा गया। कार्यक्रम में क्लब की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती करुणा जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉक्टर्स डे के अवसर पर जिन चिकित्सकों का सम्मान किया गया उनमें डॉ. हेमा सिंघल, डॉ. मीरा प्रेमी, डॉ. सुधा माहेश्वरी, डॉ. ऋतु राठी, डॉ. अनुभव माहेश्वरी, डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. दीप्ति जैन, डॉ. मेघा गोयल तथा डॉ. दीक्षा गुप्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में क्लब की सदस्य श्रीमती पूजा मोदी, श्रीमती माधुरी मित्तल, श्रीमती मधु गुप्ता, श्रीमती राधिका माहेश्वरी, श्रीमती साक्षी गोयल, श्रीमती शिल्पी जैन, श्रीमती अंजलि जैन, श्रीमती शिल्पा बंसल, श्रीमती निशा शर्मा, श्रीमती पूजा मंगल एवं  श्रीमती भावना मंगल  सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सक मानव सेवा का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं। अपने ज्ञान, समर्पण और सेवा भावना से वे समाज को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्लब ने सभी सम्मानित चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल एवं स्वस्थ भविष्य की कामना की।

पटनावासियों को बड़ी सौगात, मलाही पकड़ी से भूतनाथ तक मेट्रो सेवा शुरू; सीएम ने किया लोकार्पण

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटनावासियों को बड़ी सौगात दे दी है। मुख्यमंत्री ने पटना में मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का उद्घाटन कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना मेट्रो रेल का मलाही पकड़ी स्टेशन से भूतनाथ रोड स्टेशन तक विस्तारीकरण का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री खुद मेट्रो पर सवार होकर भूतनाथ तक गए। मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव भी मौजूद थे। उक्त दोनों स्टेशन के बीच की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। कई महीनों से इस मेट्रो स्टेशन के चालू होने की प्रतीक्षा यहां के लोग कर रहे थे। उद्घाटन के बाद अब आम यात्री इस स्टेशन से मेट्रो ट्रेन पकड़कर अपना सफर कर सकते हैं। सीएम सम्राट चौधरी के उद्घाटन करने के बाद मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन से बैरिया आईएसबीटी तक कुल 6.2 किमी की दूरी को तय करने में 16 मिनट लगेंगे। सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे के बीच प्रत्येक 35 मिनट के अंतराल पर मलाही पकड़ी से आईएसबीटी के लिए मेट्रो सेवा उपलब्ध रहेगी। पटना मेट्रो ने जारी किया है हेल्पलाइन नंबर इस मार्ग पर एक ही मेट्रो का परिचालन किया जा रहा है। मलाही पकड़ी से आईएसबीटी तक 30 रुपये किराया लगेगा, जो इस समय अधिकतम भाड़ा है। मलाही पकड़ी के शुरु होने के बाद इस मार्ग पर भूतनाथ, जीरो माइल और बैरिया आईएसबीटी समेत कुल चार मेट्रो स्टेशन कार्यरत हो जाएंगे। भूतनाथ और जीरो माइल के मध्य खेमनीचक मेट्रो स्टेशन अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है। इस मेट्रो स्टेशन के चालू होने के बाद अब पटना के कंकड़बाग और राजेंद्रनगर इलाके में रहने वाले लोगों को बड़ी सुविधा होगी। सहायता के लिए स्टेशन नियंत्रण कक्ष के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। इसके तहत 9217080421 और पटना मेट्रो हेल्पलाइन नं. 155370 पर संपर्क किया जा सकता है। उद्घाटन के कारण आज शाम चार बजे तक मेट्रो सेवा स्थगित रहेगी बता दें कि मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन एवं विस्तार पर गुरुवार को मेट्रो सेवाएं स्थगित रहेंगी। इसके बाद नियमित मेट्रो सेवाओं का संचालन मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन से शुरू होगा।यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा की योजना इसी अनुसार बनाएं तथा सहयोग प्रदान करें।मेट्रो स्टेशन पर सीएम के उद्घाटन के लिए पहुंचने को लेकर सुरक्षा की भी जबरदस्त तैयारियां की गई थीं। उद्घाटन से पहले मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन को सजाया गया था। इसकी शुरुआत के साथ ही मेट्रो रेल अब भूतनाथ से बढ़कर कंकड़बाग और राजेन्द्रनगर जैसे महत्वपूर्ण इलाके तक पहुंच बनाएगी।

सीएम रेखा गुप्ता ने शुरू किया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, रिज वन पुनरुद्धार को मिलेगा बल

नई दिल्ली  सीएम रेखा गुप्ता ने बुधवार को ग्रीन ड्राइव पोर्टल (greendrive.delhivanmahotsav.in) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल आगामी 'रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम' ' एक पेड़ मां के नाम ' अभियान को जन आंदोलन के रूप में शुरू करने की पहल है। सीएम ने सभी लोगों से अपील की कि वह इस महाअभियान में हिस्सा लें। इस कार्यक्रम में दिल्ली ग्रीन वॉरियर्स भी शामिल हुए। सीएम ने कहा कि राजधानी को हरा भरा और साफ बनाने का यह अभियान सरकार के साथ-साथ जनभागीदारी से ही सफल होगा। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त माध्यम है। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए सीधे इस अभियान से जुड़ सकता है। सीएम ने कहा कि यह दिल्ली के हर नागरिक का अभियान है। लोग एक पेड़ मां के नाम जरूर लगाएं। इससे वे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और हरित पर्यावरण का उपहार दे सकते हैं। पोर्टल पर मिलने वाली सुविधाएं     पौधारोपण स्लॉट बुकिंग- लोग अपनी सुविधा के मुताबिक इस पोर्टल पर स्थान और समय का चयन कर पौधारोपण का ऑनलाइन स्लॉट बुक करवा सकते हैं।     वृक्ष रथ सुविधा- यदि किसी व्यक्ति, स्कूल, कार्यालय, आरडब्ल्यूए या आवासीय सोसायटी के पास पौधारोपण के लिए पर्याप्त स्थान है, तो दिल्ली सरकार निशुल्क पौधे सीधे उनके परिसर तक पहुंचाएगी।     नर्सरी लोकेटर- इस फीचर की मदद से नागरिक अपने पास की सरकारी नर्सरी की लोकेशन जानकर वहां से सीधे निशुल्क पौधे ले सकता है।     एनवायरमेंट सेवियर- इसके जरिए लोग दिल्ली सरकार के पर्यावरण अभियानों से सीधे जुड़कर एक जिम्मेदार 'ग्रीन वॉरियर' के रूप में अपना स्थायी योगदान दे सकेंगे। क्या है विशेष     जुलाई में गृह मंत्री अमित शाह रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।     70 लाख पौधे पूरी दिल्ली में लगाए जाएंगे।     300 नई इलेक्ट्रिक बसों और नए अंतरराज्यीय मार्गों की बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी।     रिज में देसी और दीर्घायु प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा।