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लखनऊ में बिजली उपभोक्ता परिषद की मांग, स्मार्ट मीटर विवाद को एजेंडे में शामिल करने की अपील

 लखनऊ  प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी राज्य सलाहकार समिति की 18 मई को बैठक बुलाई गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में गठित समिति की पहली बैठक में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की है। विद्युत अधिनियम-2003 के तहत गठित राज्य सलाहकार समिति में राज्य सरकार के ऊर्जा, खाद्य, कृषि, आईआईडीसी व एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ ही पावर कॉरपोरेशन, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व मध्यांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक सहित उपभोक्ता व अन्य संगठनों के प्रतिनिधि आदि रहते हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने समिति के सदस्य होने के नाते आयोग के अध्यक्ष को विस्तृत प्रस्ताव भेज कहा है कि वर्तमान में स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को भी आयोग के मुख्यालय में होने वाली बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए। वर्मा का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इस संबंध में विद्युत अधिनियम का उल्लंघन कर मनमानी कर रहा है। लगभग 75 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना उनकी सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में कर दिए गए हैं। इनमें जिन 67 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं उनमें लगभग 43 लाख एक किलोवाट जबकि 24 लाख दो किलोवाट के कनेक्शन हैं। रिचार्ज के बाद स्वतः कनेक्शन न जुड़ने सहित अन्य तकनीकी दिक्कतों के चलते प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर व्यापक जन आक्रोश एवं विरोध की स्थिति बनी हुई है। वर्मा ने उपभोक्ताओं से आंदोलन शांतिपूर्ण करने की अपील करते हुए कहा कि समिति में चर्चा से उनके हित में ठोस निर्णय निकल सकता है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जब उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर पहले से ही लगभग 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है तब किसी भी तरह से बिजली की दरों में बढ़ोतरी का भी कोई आचित्य नहीं है।

पटना से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अहम बैठकों का दौर जारी

पटना  बिहार की राजनीति में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले दूसरी बार दिल्ली दौरे पर हैं। रविवार को उनकी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और कई केंद्रीय मंत्रियों से अहम मुलाकातें तय हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण बैठक अमित शाह के साथ मानी जा रही है। 6 मई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले यह दौरा निर्णायक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री के साथ बैठक में मंत्रिमंडल के अंतिम स्वरूप पर मुहर लग सकती है। दिनभर बैठकों का मैराथन दिल्ली में मुख्यमंत्री का पूरा दिन बैठकों से भरा रहेगा। सुबह 10:15 बजे वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इसके बाद 11 बजे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले।र 11:30 बजे जीतन राम मांझी से मुलाकात निर्धारित है। दोपहर 1 बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, शाम 6 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 6:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनकी बैठक होगी। मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या संकेत? राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार में भाजपा कोटे से 16 मंत्री बनाए जाने की तैयारी है। इनमें 13 पुराने चेहरे बरकरार रह सकते हैं, जबकि 3 नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। इन नए नामों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। जदयू खेमे में बड़े बदलाव के संकेत कम हैं, लेकिन वहां से भी 2–3 नए चेहरों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए के अन्य घटक दलों में भी लगभग नाम तय माने जा रहे हैं। नीतीश से मुलाकात के बाद दिल्ली रवाना दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल के फॉर्मूले पर चर्चा हुई। यह वीडियो भी देखें सादगी से शपथ, विस्तार होगा भव्य सूत्रों के अनुसार, हालिया शपथ ग्रहण समारोह सादगी से संपन्न हुआ था, लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार को भव्य रूप देने की तैयारी है। संभावना है कि इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा कोटे से वे तीन नए चेहरे कौन होंगे, जो बिहार की सियासत में नई भूमिका में नजर आएंगे।

दिल्ली के विवेक विहार में AC ब्लास्ट से बड़ा हादसा! 9 लोगों की मौत, जानें कैसे होता है AC में आग लगने का खतरा

दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक घर में आग लग गई. आग लगने की वजह एयर कंडीशनर (AC) ब्लास्ट को बताया गया है, जिसकी वजह से घर में मौजूद 9 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग बुरी तरह से झुलस गए. फायर कर्मी ने बताया है कि सुबह करीब 3:47 बजे सूचना मिली थी. इसके बाद मौके पर 14 फायर टेंडर पहुंचीं और आग बुझाने का काम किया. शुरुआत जांच में बताया गया है कि आग लगने की वजह AC में ब्लास्ट बताया है. आजकल गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग घरों में AC का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि AC ब्लास्ट होने के मुख्य कारण क्या है और उनसे बचाव कैसे किया जा सकता है. AC में ब्लास्ट या आग लगने के 5 बड़े कारण AC में इलेक्ट्रिक शॉट सर्किट गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग AC का यूज करते हैं. ऐसे में AC अगर कई घंटे चल रही है और इलेक्ट्रिक तार लूज है या खराब क्वालिटी का है, तो उसमें शॉट सर्किट हो सकता है, जिसकी वजह से आग लगती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC सर्विसिंग कराने के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन से तार भी चेक करा लें. ओवरलोड या फ्लक्चुएशन AC में आग लगने का दूसरा सबसे बड़ा और अहम कारण इलेक्ट्रिक वॉल्टेज का फ्लक्चुएट होना है. इसकी वजह से AC के पार्ट्स खराब या जल जाते हैं. AC में लगने वाली आग मिनटों में पूरे घर में फैल जाती है.  वॉल्टेज फ्लेक्चुएशन से AC को बचाने के लिए स्टेबलाइजर का यूज जरूर करें. AC में धूल और गंदगी होना AC के अंदर एक बड़ा मैकेनिज्म होता है, जिसको ठंडा करने के लिए पंखा भी लगा होता है. कई AC काफी गंदे होते हैं और उनपर ढेर सारी धूल मिट्टी जमा होती है. ऐसे AC में आग लग जाती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC को रेगुलर क्लीन कराएं. सस्ते पार्ट्स का इस्तेमाल AC में आग लगने की एक अन्य वजह खराब क्वालिटी के पार्ट्स भी होते हैं. अगर AC रिपेयरिंग के दौरान घटिया क्वालिटी के पार्ट्स का यूज होते हैं, तो उसकी वजह से भी आग लग सकती है. ये बहुत जानलेवा हो सकती है. खराब इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस लोकल मेकेनिक के द्वारा अगर खराब तरीके से इंस्टॉलेशन होती है, उसकी वजह से भी AC में आग लग सकती है. इसलिए जरूरी है कि कंपनी के मैकेनिक से काम करना चाहिए, जिनको खासतौर से ब्रांड ट्रेनिंग देता है. 

चुकंदर का जूस हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं! इन लोगों के लिए बन सकता है खतरनाक

आजकल लोग अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखने लगे हैं और इसी वजह से जिम जाने वाले और हेल्थ कॉन्शियस लोग सब्जियों का जूस अधिक पीने लगे हैं. इसी कड़ी में सुबह-सुबह हेल्दी ड्रिंक के नाम पर चुकंदर का जूस पीना आजकल ट्रेंड बन चुका है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई इसके फायदे गिनाता है. लेकिन हर चीज के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी होते हैं. उसी तरह चुकंदर का जूस जिसे हेल्दी मानकर लोग पी रहे हैं, वो कुछ लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. चुकंदर का जूस पोषक तत्वों से भरपूर जरूर है, लेकिन यह हर शरीर पर एक जैसा असर नहीं करता. कई बार इसको ज्यादा पीना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए इस जूस को पीने से पहले यह जान लीजिए कि क्या यह आपके लिए सही है या नहीं. डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों से परेशान लोग जिन लोगों को अक्सर डाइजेशन की समस्या रहती है,उनको इस जूस से परहेज करना चाहिए. कुछ लोगों को चुकंदर का जूस पीने के बाद पेट फूलना, ऐंठन, गैस या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, चुकंदर में मौजूद प्राकृतिक नाइट्रेट्स और फाइबर कुछ लोगों के डाइजेस्टिव सिस्टम पर तेज असर डाल सकते हैं, खासकर जब इसे खाली पेट पिया जाए. पेशाब का लाल होना अगर चुकंदर का जूस पीने के बाद आपका पेशाब या मल लाल दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे बीटुरिया कहा जाता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (HMS)के हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह चुकंदर के प्राकृतिक पिगमेंट के कारण होता है और आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है. किडनी स्टोन वालों के लिए खतरा चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है. इस वजह से किडनी स्टोन वाले मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए. अमेरिका की नेशनल किडनी फाउंडेशन (NKF) के अनुसार, ज्यादा ऑक्सलेट शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें इसका सीमित सेवन करना चाहिए. लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए सावधानी चुकंदर का जूस ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है. लेकिन अगर आपका बीपी पहले से कम है या आप उसकी दवाई ले रहे हैं. तो यह ज्यादा लो का कारण बन सकता है, जिससे चक्कर और कमजोरी महसूस हो सकती है. किन लोगों को चुकंदर के जूस से बचना चाहिए?     किडनी स्टोन या किडनी रोग वाले लोग     लो ब्लड प्रेशर के मरीज     डायबिटीज वाले लोग     कमजोर पाचन तंत्र वाले लोग     प्रेग्नेंट महिलाएं चुकंदर का जूस पीने का सही तरीका क्या है? चुकंदर का जूस पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे जितना ज्यादा, उतना बेहतर समझ कर पीना गलती हो सकती है. एक लिमिट में ही किसी भी चीज का सेवन सही होता है और शुरुआत में इसे पीने के बाद अपने शरीर में होने वाले रिएक्शन का भी ध्यान रखें. अगर कुछ भी बदलाव नजर आए तो पहले तुरंत जूस पीना बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें.

फ्लाइट्स में कटौती की तैयारी, एयर इंडिया घटाएगी सुविधाएं – यात्रियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली मौजूदा संकट के बीच एयर इंडिया की तरफ से ग्राहकों को बड़ी राहत दी जा सकती है। एयर इंडिया छोटी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में भोजन की व्यवस्था वैकल्पिक बनाने का विचार करने जा रहा है। ऐसे में अगर कोई पैसेंजर खाना का विकल्प नहीं चुनता है तब की स्थिति में टिकट का किराया 250 रुपये तक कम हो सकता है। दी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए अन्य कई फैसले ले सकती है। कंपनी में इसको लेकर काफी मंथन चल रहा है। एक सुविधा देने पर विचार कर रही है कंपनी रिपोर्ट के अनुसार खाना का चयन ना करने पर पैसेंजर्स को सस्ता एयर इंडिया का टिकट मिल जाएगा। कंपनी इसके अलावा बिजनेस क्लास के पैसेंजर्स के लिए लाउंज एक्सेस अनबंडलिंग करने की तैयारी भी कर रही है। मौजूदा समय में लाउंज ऑपरेटर्स मेट्रो सिटी में 1100 रुपये से 1400 रुपये तक और नॉन मेट्रो शहर में 600 रुपये से 700 रुपये तक वसूल रहे हैं। औसतन 1000 रुपये एक लाउंज एक्सेस पर खर्च होता है। बहुत से बिजनेस क्लाइस की फ्लाइट्स काफी तेजी के ऑपरेट होती हैं। ऐसे में कई बार पैसेंजर एयरपोर्ट पर लाउंज एक्सेस नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यह सुविधा अगर हटती है तो टिकट का किराया कम हो जाएगा। मामले की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार, “एयर इंडिया पहले दिन से ही भोजन को टिकट में जोड़ती आ रही है। लेकिन अब एविएशन टरबाइन फ्यूल का रेट बढ़ने और रुपये की कीमत घटने की वजह से हवाई जहाज का रेट बढ़ गया है। भारत एक प्राइस सेसंटिव देश है। ऐसे में कीमतें अधिक होने की स्थिति में पैसेंजर्स ट्रेन या रोड का विकल्प चुन सकते हैं। जिसकी वजह से कंपनी इस भोजन की व्यवस्था पर विचार कर रही है।” जुलाई से एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट्स में होगी कटौती पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया जुलाई के महीने से इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती करेगा। कंपनी बढ़ते तेल के खर्च और हवाई पाबंदियों की वजह से यह फैसला लेने के लिए मजबूर है। मौजूदा समय में एयर इंडिया घाटे में चल रही है। वित्त वर्ष 2026 में एयर इंडिया को 22000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। शुक्रवार को कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव और एमडी Campbell Wilson ने कहा, “हमने ने अप्रैल और मई के महीने में कुछ फ्लाइट्स की कटौती की है। इसके पीछे की वजह बढ़ता तेल का खर्च और एयरस्पेस की पाबंदियां हैं। जिसके कारण हमारी इंटरनेशनल फ्लाइट्स मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं।”

दिल्ली में भीषण गर्मी का असर, गर्भवती महिलाओं में बढ़ीं प्रेगनेंसी से जुड़ी जटिलताएं

 गर्मी के तेवर अपने चरम पर हैं और देश के कई राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में सूरज की तपिश अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है. यहां का पारा पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार भी पहुंच चुका है जिसके चलते आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के हॉस्पिटल में गर्मी के कारण प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याओं वाली महिलाओं की संख्या काफी बढ़ गई है. डॉक्टर्स का कहना है कि बढ़ता तापमान न केवल मां की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ को भी रोक रहा है. गर्मी से समय से पहले डिलीवरी का जोखिम मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर की डायरेक्टर डॉ. रेनू मलिक का कहना है गर्मी की वजह से प्री-टर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) के मामले बढ़ रहे हैं. शरीर का तापमान बढ़ने से स्ट्रेस पैदा होता है जो डिलीवरी की प्रक्रिया को वक्त से पहले शुरू कर सकता है. वहीं डॉक्टरों के मुताबिक, जब तापमान 45 डिग्री के आसपास होता है तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन समय से पहले एक्टिव हो सकते हैं. बच्चे के वजन और ग्रोथ पर बुरा असर गर्मी सिर्फ मां के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी घातक है. रिपोर्ट बताती है कि हीट स्ट्रेस के कारण प्लेसेंटा तक पोषण सही तरह से नहीं पहुंच पाता. इसका सीधा परिणाम 'लो बर्थ वेट' यानी जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना है. इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहने वाली महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर) का खतरा भी बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोपहर 11 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें.

शनैश्चरी अमावस्या 2026: शनि-सूर्य और चंद्रमा के विशेष योग से वृषभ, मिथुन, सिंह और कुंभ राशि को लाभ

साल 2026 की शनि जयंती ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होने वाली है. इस बार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है, जिससे शनैश्चरी अमावस्या का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है.  ग्रहों के राजा सूर्य और न्याय के देवता शनि की स्थिति के साथ-साथ इस दिन चंद्रमा का राशि परिवर्तन भी कई राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. शनि जयंती 2026: दुर्लभ राजयोगों का मिलन इस साल शनि जयंती पर कई शक्तिशाली राजयोग एक साथ बन रहे हैं, जो दशकों में एक बार देखने को मिलते हैं. शश राजयोग: शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में विराजमान रहकर शश महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं. यह योग करियर में स्थिरता और बड़ी सफलता दिलाने वाला माना जाता है。 गजकेसरी योग: गुरु और चंद्रमा की युति से इस दिन गजकेसरी योग बनेगा, जो मान-सम्मान और सुख-समृद्धि में वृद्धि करेगा. बुधादित्य और अमला योग: सूर्य-बुध की युति से बनने वाले ये योग व्यापार और बौद्धिक कार्यों में लाभ देगा. इन राशियों को मिलेगा जबरदस्त लाभ 1. वृषभ राशि (Taurus) शनि जयंती का यह संयोग आपके लिए धन लाभ के नए अवसर लेकर आएगा.  कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का फल मिलेगा, प्रमोशन के प्रबल योग बन रहे हैं. 2. मिथुन राशि (Gemini) भाग्य का भरपूर साथ मिलने से आपके रुके हुए काम गति पकड़ेंगे. यात्राओं से लाभ होगा, परिवार में धार्मिक उत्सव का माहौल रहेगा. 3. सिंह राशि (Leo) शनि देव की कृपा से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. साझेदारी वाले कामों में बड़ा मुनाफा हो सकता है, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त होगी. 4. कुंभ राशि (Aquarius) चूंकि शनि आपकी ही राशि में विराजमान हैं, इसलिए यह समय आपके व्यक्तित्व को निखारने वाला होगा. समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी , नई संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे. साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के उपाय यदि आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, तो इस शनैश्चरी अमावस्या पर ये उपाय जरूर करें. तेल का दान: सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर उसे दान करें . पीपल की पूजा: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे तेल का चौमुखी दीपक जलाएं. हनुमान चालीसा: शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें. काली वस्तुओं का दान: काले तिल, उड़द और काले कपड़ों का दान करना अत्यंत शुभ रहेगा.

बिक्रमगंज की बिस्को इंडस्ट्रीज का अंत, 30 एकड़ का औद्योगिक परिसर खंडहर में तब्दील हुआ

 रोहतास  कभी बिक्रमगंज की पहचान और औद्योगिक शान रहा बिस्को इंडस्ट्रीज अब इतिहास बन चुका है। वर्षों से उपेक्षा और बदहाली झेल रहे इस प्रतिष्ठान को आखिरकार कबाड़ में बेच दिया गया। इसके साथ ही इसके दोबारा चालू होने की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई। करीब 30 एकड़ में फैला यह औद्योगिक परिसर कभी सैकड़ों लोगों को रोजगार देता था और इलाके की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता था। आज यहां सिर्फ जर्जर इमारतें, बंद गोदाम और वीरानी नजर आती है। कभी वीआईपी ठहरते थे, अब खंडहर एक समय ऐसा था जब बिस्कोमान परिसर का निरीक्षण भवन वीआईपी मूवमेंट का केंद्र हुआ करता था। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से लेकर कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी यहां ठहर चुके हैं। 9 अप्रैल 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने बिक्रमगंज अनुमंडल का उद्घाटन भी यहीं से किया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि परिसर में जब्त ट्रक, पत्थर-गिट्टी और कबाड़ जमा है। कभी यहां जब्त शराब और मांस के विनष्टीकरण जैसी कार्रवाई भी की जाती थी, जिसे बाद में अधिकारियों की आपत्ति के बाद बंद करना पड़ा। आय के स्रोत बंद, हालत बदतर बिस्को इंडस्ट्रीज की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। पहले यहां चावल मिल, गोदाम किराया, ब्रान बिक्री और बिस्कोमान भवन से अच्छी आमदनी होती थी। लेकिन चावल मिल बंद होने से ब्रान उत्पादन ठप हो गया। भवन जर्जर होने के कारण यहां अब कोई ठहरता नहीं है। पहले जहां एफसीआई और एसएफसी समेत कई एजेंसियां गोदाम किराए पर लेती थीं। वहीं अब सिर्फ एक गोदाम एसएफसी को किराए पर है। वर्तमान में यहां सीमित स्तर पर केवल रासायनिक खाद की बिक्री हो रही है और महज 3–4 कर्मचारी बचे हैं। सरकारी उपेक्षा से बुझा उद्योग करीब आठ दशक पहले स्थापित यह राइस मिल अपने समय में अत्याधुनिक मानी जाती थी। बताया जाता है कि 1940 के दशक में जापानी तकनीक से इसकी शुरुआत हुई थी। हालांकि बिजली की कमी के कारण यह पूरी तरह स्वचालित रूप से संचालित नहीं हो सका और धीरे-धीरे बंद हो गया। 80 के दशक में सहकारिता नेता स्व. तपेश्वर सिंह के प्रयास से बिस्कोमान ने इसे अधिग्रहित किया। यहां कैटल फीड और साल्वेंट प्लांट जैसी परियोजनाओं की शुरुआत भी हुई, लेकिन उनके निधन के बाद योजनाएं अधूरी रह गईं और उद्योग लगातार गिरावट की ओर बढ़ता गया। हजारों रोजगार की उम्मीद टूटी अगर समय रहते इस उद्योग को पुनर्जीवित किया जाता, तो आज यहां करीब एक हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता था। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री का बंद होना नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक संभावनाओं का खत्म होना है। आज बिस्को इंडस्ट्रीज का कबाड़ में बिकना न सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का अंत है, बल्कि बिक्रमगंज के स्वर्णिम औद्योगिक अतीत के अंतिम अध्याय का भी समापन है।  

रेलवे विकास योजना: भागलपुर में एफओबी, ड्रेनेज और रूट रिले सिस्टम से बदलेगा स्टेशन

भागलपुर  भागलपुर रेलवे स्टेशन में बड़े पैमाने पर यार्ड आधुनिकीकरण की शुरुआत हो गई है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 के विस्तार के साथ ही फुटओवर ब्रिज (एफओबी) की सीढ़ियों को चौड़ा किया जा रहा है। एफओबी की एक सीढ़ी को तोड़कर उसके स्थान पर चौड़ी सीढ़ी का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इस काम की शुरुआत अप्रैल में करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफार्म के विस्तार और यार्ड आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए कुल 20 करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर की जा चुकी है। मालदा एडीआरएम ने किया निरीक्षण शनिवार को मालदा एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य अधिकारियों की टीम के साथ भागलपुर पहुंचे और निर्माणस्थल का निरीक्षण किया। यह उनके पद संभालने के बाद पहली बार निरीक्षण था। एडीआरएम ने कहा कि यार्ड का आधुनिकीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा। प्लेटफार्म संख्या 2 और 3 का विस्तार कर 23 कोच तक लंबाई बढ़ाई जाएगी। स्टेशन का आधुनिकीकरण ट्रेनों की संचालन क्षमता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें दो चरणों में होगा काम यार्ड और प्लेटफार्म के विस्तार का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा।     पहले चरण में: लोहिया पुल की ओर वाले एफओबी की सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी।     दूसरे चरण में: नाथनगर छोर वाली सीढ़ियों का काम शुरू होगा। इसके साथ ही प्लेटफार्मों को चौड़ा करने का काम भी धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा। एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने और प्लेटफार्म विस्तार से यात्रियों की आने-जाने में सुविधा होगी प्लेटफार्म विस्तार से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी वर्तमान में भागलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2, 3, 5 और 6 की लंबाई कम है, जिससे बड़ी ट्रेनों को प्लेटफार्म 1 और 4 पर ही ठहराया जाता है। प्लेटफार्म दो-तीन के विस्तार और एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने के बाद दो नंबर प्लेटफार्म की रेल लाइन को मेन ट्रैक में बदला जाएगा, जिससे ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी। वर्तमान में ट्रेनें 30 किमी प्रति घंटे की गति से ही प्लेटफार्म पार कर पाती हैं। प्लेटफार्म का विस्तार करने के लिए स्वीच और प्लेटफार्म बदलने होंगे, जिससे स्टेशन में अधिक जगह मिलेगी और ट्रेनों की संचालन क्षमता बढ़ेगी। रूट रिले सिस्टम से ट्रेन संचालन होगा आसान भविष्य में भागलपुर स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत सेंट्रलाइज पैनल से ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद, स्टेशन के पूर्वी और पश्चिमी पैनल की अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन मास्टर एक ही पैनल से ट्रेन संचालन और शंटिंग का निर्णय ले सकेंगे। पुराने सिस्टम की जगह सिंगलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होगी। सेंट्रलाइज पैनल के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कुछ रेलवे क्वार्टर तोड़े जाएंगे। यह व्यवस्था भागलपुर-दुमका रेललाइन के दोहरीकरण से भी जोड़ी जाएगी। यार्ड परिसर में ड्रेनेज और नई लाइनों का विकास यार्ड में ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे बरसात में जल जमाव की समस्या खत्म होगी। इसके अलावा बड़हरवा से भागलपुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यार्ड के भीतर तीन नए लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा और दुर्घटना रोकने की दृष्टि से यह कार्य अहम माना जा रहा है। इस विकास योजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और राशि मंजूर भी हो चुकी है। माड्यूल होल्डिंग और पार्सल बुकिंग कार्यालय का स्थानांतरण मालदा एडीआरएम ने सर्कुलेटिंग एरिया में माड्यूल होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इसके लिए रिजर्वेशन टिकट बुकिंग केंद्र के सामने स्थान चिन्हित किया गया है। होल्डिंग एरिया के निर्माण के लिए रेलवे कर्मियों के क्वार्टर तोड़े जाएंगे, और पार्सल बुकिंग कार्यालय को होल्डिंग एरिया के बगल में शिफ्ट किया जाएगा। बुक किए गए पार्सलों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए लिंक रोड का निर्माण किया जाएगा। होल्डिंग एरिया से प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुटओवर ब्रिज का निर्माण होगा। एडीआरएम ने कहा कि नक्शा मंजूर होने के बाद ही काम शुरू किया जाएगा। योजना के अनुसार, इस साल छठ पर्व से पहले कार्य शुरू हो पाएगा

चलती फ्लाइट में इमरजेंसी गेट खुला, यात्री कूदा बाहर

 चेन्नई रविवार तड़के चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त भारी दहशत फैल गई, जब एक यात्री ने चलती फ्लाइट का आपातकालीन दरवाजा अचानक खोल दिया और बाहर छलांग लगा दी। शारजाह से चेन्नई पहुंची एअर अरेबिया की इस फ्लाइट में 231 यात्री सवार थे। इस दुस्साहसिक और खतरनाक हरकत के कारण विमान में बैठे बाकी यात्रियों की जान हलक में आ गई। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल टल गया। यह खौफनाक घटना तब घटी जब विमान लैंडिंग के बाद मुख्य रनवे से हटकर टैक्सीवे (रनवे और टर्मिनल को जोड़ने वाला रास्ता) पर धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। तभी अचानक 34 साल के एक पुरुष यात्री ने इमरजेंसी गेट खोला और चलती फ्लाइट से नीचे कूद गया। इस अचानक हुई घटना से विमान में अफरातफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर विमान को रोका और ग्राउंड सुरक्षा टीम को फौरन अलर्ट कर दिया। यात्री ने चलती फ्लाइट से छलांग क्यों लगाई?     शुरुआती जांच में पता चला है कि यात्रा के दौरान इस यात्री की तबीयत काफी खराब हो गई थी।     हवाई अड्डे के अधिकारियों के मुताबिक, यात्री ने फ्लाइट के अंदर घबराहट और उल्टी आने की शिकायत की थी।     बताया जा रहा है कि इमरजेंसी गेट से कूदने से ठीक पहले उसने विमान के अंदर दो बार उल्टी भी की थी।     माना जा रहा है कि इसी भारी बेचैनी और खराब तबीयत के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत क्या कार्रवाई की? पायलट की सूचना मिलते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान तुरंत उस जगह पहुंच गए जहां विमान रुका था। हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ बम निरोधक दस्ता भी तुरंत विमान के पास पहुंच गया था। सुरक्षाकर्मियों ने बिना देरी किए उस यात्री को पकड़ लिया और उसे फौरन अपनी हिरासत में ले लिया। पायलट ने इस पूरी घटना को लेकर एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसके बाद यात्री को आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है। एयरपोर्ट के कामकाज पर क्या असर पड़ा? इस हाई वोल्टेज ड्रामा के कारण चेन्नई एयरपोर्ट का सामान्य कामकाज कुछ समय के लिए बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह 03:23 बजे से 04:23 बजे तक मुख्य रनवे को पूरी तरह से बंद रखा। इस एक घंटे के दौरान आने वाली अन्य सभी उड़ानों (फ्लाइट्स) को एयरपोर्ट के दूसरे (सेकेंडरी) रनवे की तरफ मोड़ दिया गया। चेन्नई एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि इस घटना में विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और बाकी सभी यात्री सुरक्षित हैं। गिरफ्तार किया गया यात्री कौन? भले ही अभी तक यात्री की पूरी पहचान आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि वह तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले का रहने वाला है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब विमानन सुरक्षा नियमों (एविएशन सेफ्टी प्रोटोकॉल) के उल्लंघन के इस बेहद गंभीर मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारी उस यात्री से लगातार पूछताछ कर रहे हैं और घटना की असली वजह जानने की कोशिश में जुटे हैं। इसके साथ ही, डॉक्टरों की एक टीम उस यात्री की मानसिक स्थिति (मेंटल कंडीशन) की भी जांच कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि उसने ऐसा खतरनाक कदम क्यों उठाया।