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मानसून के बाद पटना में तेज होंगे विकास कार्य, BUDCO ने तैयार किया नया प्लान

पटना मानसून के कारण थमे विकास कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। वर्षा खत्म होते ही सड़कों, नालों, पार्कों और घाटों से जुड़ी अधूरी योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) की ओर से सैदपुर, राजीव नगर और आनंदपुरी नाला समेत कई बड़ी योजनाओं पर इसी माह के अंतिम सप्ताह से काम शुरू कराया जाएगा। त्योहारों को देखते हुए बुडको ने काम शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत 300 से अधिक ऐसी योजनाएं हैं, जिनका काम वर्षा के कारण रोक दिया गया था। इनमें सड़क निर्माण, पुरानी सड़कों की मरम्मत, पार्क व घाटों का विकास और नालों के पक्कीकरण का काम शामिल है। आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा बुडको बुडको पटना को आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा है। इनमें अजीमाबाद, बांकीपुर, कंकड़बाग, नूतन राजधानी, पटना पश्चिम, पाटलिपुत्र, पटना पूर्वी और पटना सिटी डिविजन शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 500 योजनाओं में से 177 योजनाओं का काम वर्षा के दौरान रोक दिया गया था। इसी तरह 2024-25 में स्वीकृत 393 योजनाओं में से 127 रुकी योजनाओं पर भी दोबारा काम शुरू होगा। दो तरफ से बनेगा सैदपुर नाला सैदपुर नाले का निर्माण तेजी से पूरा करने के लिए गायघाट और रामपुर, दोनों ओर से एक साथ काम शुरू कराया जाएगा। निर्माण में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। नाले के पानी का बहाव भी अस्थायी रूप से डायवर्ट किया गया है, ताकि निर्माण के दौरान जलजमाव की समस्या न हो। राजीव नगर में हटे खंभे, अब ढलाई राजीव नगर बड़े नाले का काम भी इसी माह के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा। मानसून शुरू होने पर जुलाई में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं हो, इसलिए काम रोक दिया गया था। अब राजापुर पुल की ओर से निर्माण शुरू कराया जाएगा। रविवार को नाले के किनारे लगे सभी बिजली के खंभे हटा दिए गए। नाले में जमा गाद की सफाई भी तेजी से कराई जा रही है। आनंदपुरी नाले का काम भी दोबारा शुरू किया जाएगा। कहीं नाला बना, सड़क का इंतजार अधूरे विकास कार्यों के कारण कई इलाकों के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। वार्ड सात के इंद्रपुरी रोड नंबर-10 में बाक्स नाला बन चुका है, लेकिन खोदी गई सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। लोगों को नाले के ऊपर से पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं, वार्ड 45 के गीता प्रसाद रोड में 1.57 करोड़ रुपये की लागत से योगीपुर चौक से गांधी नगर तक नाला और सड़क बननी है। नाले का काम लगभग पूरा है, लेकिन सड़क नहीं बनने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। अब इन अधूरे कामों को भी पूरा कराया जाएगा।

वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा बदलाव, अब ₹1,500 की किस्त; जानें कौन उठा सकता है लाभ

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन योजना में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर 1500 प्रतिमाह कर दी है। प्रदेश सरकार ने न केवल वृद्धजनों की मासिक पेंशन राशि में शानदार इजाफा किया है, बल्कि इस योजना को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाने के लिए अनुपूरक बजट में 1500 करोड़ रुपये के बड़े फंड की मंजूरी भी दे दी है। सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब उत्तर प्रदेश के पात्र बुजुर्गों (Old Age Scheme) को हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की पेंशन को बढ़ाकर सीधे 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी अब हमारे बुजुर्गों को सालाना पूरे 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पेंशन भेजने का तरीका भी हुआ आसान इसके साथ ही, पेंशन बांटने के तरीके को भी पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और आसान बना दिया गया है। पहले जहां तीन महीने में एक साथ 3000 रुपये दिए जाते थे, वहीं अब बढ़े हुए पैसों को 1500-1500 रुपये की दो किस्तों में जारी किया जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि पेंशन का सारा पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, ताकि बिना किसी बिचौलिए या झंझट के बुजुर्गों को उनका हक सीधे उनके हाथ में मिल सके। किसे मिलेगा पेंशन का लाभ, पात्रता और शर्तें पेंशन का नियमित लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य है। जैसे कि लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। डीबीटी (DBT) से भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का NPCI पोर्टल पर मैप होना जरूरी है। इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि e-KYC सत्यापन। यदि किसी वृद्धजन की पेंशन रुकती है, तो उन्हें तुरंत अपना e-KYC अपडेट कराना होगा। यदि पेंशन खाते में न आए तो क्या करें? अगर किसी पात्र बुजुर्ग के खाते में बढ़ी हुई पेंशन की किस्त नहीं पहुंची है, तो सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार:     सबसे पहले अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या बैंक शाखा में जाकर e-KYC और NPCI मैपिंग का स्टेटस चेक कराएं।     अपने संबंधित जनपद के समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से संपर्क कर आवेदन विवरण और आधार विवरण का मिलान कराएं।     योजना के आधिकारिक यूपी सामाजिक पेंशन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग करें।  

₹2,500 की लक्ष्मी योजना से महिलाओं को कितनी राहत? जानें दिल्ली सरकार की योजना

 नई दिल्ली लोधी रोड पर कैंप में रहने वाली 52 साल की उमा खुश हैं कि ' दिल्ली लक्ष्मी योजना' की वजह से उनकी बचत में हर महीने कुछ पैसे जुड़ेंगे। उनकी बेटी ने अभी कॉलेज जाना शुरू किया है, और उमा को उसकी शादी के लिए पैसे जुटाने की चिंता थी। 29 साल की प्रीति के लिए, हर महीने मिलने वाले 2,500 रुपये का मतलब सिर्फ एक है- अपनी 10 साल की बेटी की पढ़ाई में रुचि को बढ़ावा देना। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के नाथूपुरा में रहने वाली प्रीति के परिवार के भविष्य का सपना उनकी बेटी की पढ़ाई पर टिका है। उन्होंने गर्व से TOI को बताया कि वह टीचर बनना चाहती हैं। और प्रीति क्या चाहती हैं? अपने तीन साल के शरारती बेटे को संभालते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के बाद, मेरी अपनी इच्छाएं खत्म हो गईं। क्या कह रहीं दिल्ली की महिलाएं? कोटला मुबारकपुर के पास रहने वाली सुमित्रा (35) के मन में भी लंबे समय से यही बात थी। उनकी जिंदगी अपने 15 और 13 साल के बेटों की परवरिश और पति की मदद करने के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन मिलने वाले स्टाइपेंड (भत्ते) की उम्मीद ने जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी एक पुरानी इच्छा को फिर से उनके दिल में जगा दिया। सुमित्रा सिलाई सीखना चाहती थीं। लेकिन छह महीने के कोर्स की फीस 4,000-5,000 रुपये है। पति की 20,000 रुपये महीने की सैलरी में सुमित्रा का घर बहुत सीमित बजट में चलता है। 5,000 रुपये किराए में, लगभग 10,000 रुपये खाने-पीने और राशन में, और बाकी पैसे बेटों की पढ़ाई और घर के दूसरे खर्चों में चले जाते हैं। 2500 रुपये की मदद से कितना असर हालांकि, अब, सुमित्रा घर तक सीमित भूमिकाओं से आगे की सोच रही हैं। वह सिलाई सीखना चाहती हैं, अपना कुछ शुरू करना चाहती हैं और घर में ज्यादा योगदान देना चाहती हैं। उनके पति, जो चपरासी का काम करते हैं, ने कहा कि अगर वह अपने पैसे खुद कमाएंगी तो मुझे बहुत खुशी होगी। 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान, बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता देगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि इस कदम का मकसद ऐसी महिलाओं को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा देना और उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है। कुछ राहत, लेकिन आय की शर्तें 'पहले इंडिया फाउंडेशन' के चेयरमैन और नीति आयोग के पूर्व वाइस-चेयरमैन, अर्थशास्त्री राजीव कुमार के अनुसार, हालांकि यह योजना महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बचत का अवसर देती है, लेकिन आय की पात्रता की शर्त कई लोगों को इससे बाहर कर सकती है। राजीव कुमार ने कहा कि कोई भी अतिरिक्त आय कुछ राहत तो देती ही है। लेकिन सालाना 2.5 लाख रुपये से कम पारिवारिक आय का मानदंड थोड़ा कड़ा है। इसका मतलब है कि प्रति परिवार मासिक आय 21,000 रुपये से कम या प्रतिदिन 700 रुपये से कम होनी चाहिए। क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब चार लोगों के परिवार के लिए प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन 200 रुपये से कम है। राजीव कुमार ने बताया कि मार्च में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के लिए दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 5.3 लाख रुपये रहने का अनुमान था। हम इससे ज्यादा आय सीमा (कट-ऑफ) चुन सकते थे। अंजली ने बताया कैसे चलता है घर खर्च करोल बाग के शिदीपुरा की रहने वाली अंजली (38) अपने घर के पास एक गोदाम में पेन और अन्य सामान पैक करके महीने के 7,000 रुपये कमाती हैं। उनके पति की न तो कोई पक्की नौकरी है और न ही कोई निश्चित वेतन। हालांकि, आय के अनिश्चित स्रोतों के बावजूद, वह घर संभालने में माहिर हैं और यह जोड़ा मिलकर अगले महीने की योजना बनाता है। उन्होंने कहा कि बहुत सारी परेशानियां हैं, लेकिन हम उनका सामना करते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। 'लक्ष्मी योजना जरूर मिलेगी कुछ राहत' अंजली ने कहा कि उनके घर में एक ऐसा खर्च है जिसमें कोई कटौती नहीं की जा सकती, और वह है उनके 15 साल के बेटे की स्कूल और ट्यूशन फीस- जो महीने में 2,000 से 3,000 रुपये है। उनके 70 से ज्यादा उम्र के सास-ससुर, जिनके घर में पूरा परिवार रहता है, उनका साथ देते हैं और उन्हें राहत भी मिलती है। महंगाई का असर इस इनकम ग्रुप वाले परिवारों के लिए, जिन्हें जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद नहीं होती, 'लक्ष्मी योजना' जैसी वेलफेयर स्कीम कितनी मददगार होती है? डीयू के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में इकोनॉमिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर शिरीन अख्तर ने कहा कि दिल्ली में औसत प्रति व्यक्ति आय इतनी ज्यादा है, फिर भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है। यह भारी असमानता को दिखाता है। यह बंटवारे से जुड़ा मुद्दा है। 2500 रुपये का ट्रांसफर बेहद अहम शिरीन अख्तर ने आगे कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर गौर करें। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे भारत में चीनी की औसत खुदरा कीमत जुलाई में लगभग 48 रुपये प्रति किलो थी, जो 26 अगस्त तक 65 रुपये से ज्यादा हो गई। जो परिवार बमुश्किल अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, उनके लिए कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी का मतलब है कि उन्हें अपनी खपत में असल बदलाव करने पड़ सकते हैं। ऐसे में, 2,500 रुपये का ट्रांसफर अहम हो जाता है। हालांकि, अख्तर ने कहा कि सबसे गरीब परिवारों के मामले में, 'खर्च का एक बहुत बड़ा हिस्सा जरूरी चीजों पर ही होता है।' महिलाओं की जिंदगी बदलेगी ये योजना! शिरीन अख्तर ने कहा कि यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि परिवार क्या खरीदना बंद कर देता है? यदि यह फल, दूध, दालें हैं, तो आज की मुद्रास्फीति कल की पोषण संबंधी कमी बन जाती है। यदि यह दवाएं हैं, तो यह स्वास्थ्य की कमी बन जाती है। यदि यह ट्यूशन, किताबें या स्कूली शिक्षा है, तो यह मानव-पूंजी की कमी बन जाती है। यदि परिवार केवल आवश्यक उपभोग को बनाए रखने के लिए उधार लेता है, तो आज की … Read more

4.47 लाख नाम डिलीट होने के बाद अब घर-घर पहुंचेगा BLO अमला, इंदौर में फिर जुड़ेगा वोटर लिस्ट में नाम

 इंदौर  मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर घर-घर दस्तक शुरू हो चुकी है। करीब सात माह पहले जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान बीएलओ ने दो बार मतदाताओं से संपर्क किया था, फॉर्म भरवाए थे और दस्तावेजों की जांच की थी, वहीं काम अब फिर से किया जाएगा। एसआइआर के बाद हटे मतदाताओं की जानकारी लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फिर से उनके पते पर दस्तक देंगे। यदि वह पते पर मिलते हैं और पात्र पाए जाते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। SIR के दौरान घटे मतदाता, अब नाम जुड़वाने का मिला फिर मौका एसआइआर से पहले जिले में 28 लाख 67 हजार 294 मतदाता थे। एसआइआर के बाद 23 दिसंबर 2025 की प्रारंभिक सूची में संख्या घटकर 24 लाख 20 हजार 171 रह गई। यानी एक ही प्रक्रिया में 4.47 लाख नाम बाहर हो गए थे। एसआईआर के दौरान ही 66,825 नाम जोड़े गए। वहीं 21 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित हुई, जिसमें 24 लाख 86 हजार 996 मतदाता थे। अब सात माह बाद फिर से बीएलओं विलोपित मतदाताओं की जांच कर नाम जोड़ने का कार्य करेंगे। सोमवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने इस अभियान की समीक्षा की। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पवार ने सभी ईआरओ को पात्र मतदाताओं को चिन्हित कर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि 18-19 वर्ष के मतदाताओं के नाम भी इस दौरान प्राथमिकता से नाम सूची में शामिल किए जाएं। एक माह तक यह अभियान चलेगा। 10 माह में 5वीं बार दस्तक: 2003 की जानकारी देने का बंधन खत्म बीते वर्ष अक्टूबर से अब तक मतदाताओं से बीएलओ द्वारा चार बार संपर्क किया जा चुका है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच एसआइआर प्रक्रिया के दौरान दो बार बीएलओ मतदाता के घर पहुंचे थे। वहीं फार्म प्राप्त नहीं होने पर जनवरी में एक बार फिर से छूटे मतदाताओं की जांच की गई थी। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत की मतदाता सूची तैयार करने के लिए भी घर-घर संपर्क किया गया। अब फिर पांचवी बार बीएलओं अपने बूथ में विलोपित मतदाता की जांच करेंगे। एसआइआर के दौरान 2003 की सूची में नाम या परिवार के किसी सदस्य का नाम मांगा गया था, लेकिन अब इसकी बाध्यता नहीं है। फार्म-6 के साथ भरा जाने वाला डिकलेरेशन फार्म हटा दिया गया है। एसआइआर के दौरान पुरानी सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाने वाले मतदाताओं के लिए अब पात्रता के आधार पर नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है। यह भी पढ़ें- खाद की ई-टोकन प्रणाली बनी मुसीबत… 10 मिनट में खत्म हो रहे टोकन, डीएपी-यूरिया के लिए तरस रहे किसान नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे…     जन्म तारीख का प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र, तारीख लिखी मार्कशीट, पासपोर्ट और पैन कार्ड।     पते का प्रमाण: पहचान पत्र, बिजली बिल, बैंक पासबुक, सरकारी कर्मचारी होने पर कार्ड, जमीन के दस्तावेज।     किरायेदार के लिए: जन्म प्रमाण पत्र के साथ, पते के प्रमाण में किरायानामा दस्तावेज और मकान मालिक का बिजली बिल।     पता बदलने पर: मतदाता को वर्तमान ईपीक नंबर के साथ फार्म-8 भरना होगा और नए पते का प्रमाण देना होगा।     युवा मतदाता: फार्म-6 भरना होगा, जिसमें माता-पिता के नाम के साथ जन्म और पते का प्रमाण देना होगा।  

कोल लेवी केस में ₹104 करोड़ का कनेक्शन, राजीव भवन तक पहुंची रकम; कई नेता-अफसर जांच के घेरे में

रायपुर  ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था। किसे कितनी मिली अवैध रकम रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप। देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण। चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए। जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य। शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए। व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है। चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका 1. राम गोपाल अग्रवाल राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है। 2. देवेन्द्र सिंह यादव भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है। 3. विनोद तिवारी विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है। 4. रामप्रताप सिंह जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। 5. चंद्रदेव प्रसाद राय तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है। 6. जयप्रकाश मौर्य तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है। 7. पियूष कुमार साहू पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। 8. जोगेन्दर सिंह जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका … Read more

फॉर्म में थे वैभव फिर भी बैठे रहे बाहर, गौतम गंभीर ने संजू-अभिषेक का नाम लेकर बताई वजह

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की कोई कमी नहीं है लेकिन सही समय पर सही मौका मिलना ही किसी खिलाड़ी का भविष्य तय करता है। 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखकर इतिहास रचने वाले वैभव सूर्यवंशी इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर खुलकर बात की और यह साफ किया कि शानदार फॉर्म में होने के बावजूद इस युवा खिलाड़ी को अपनी बारी के लिए इंतजार क्यों करना पड़ा। वैभव ने मचाया धमाल वैभव ने इस साल की शुरुआत में सबसे कम उम्र में डेब्यू का रिकॉर्ड बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर के सालों पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और बाद में जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक जड़कर इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में फिफ्टी बनाने वाले बल्लेबाज भी बने। हालांकि, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज और फिर एशिया कप के शुरुआती मैचों में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली जिसको लेकर काफी सवाल उठ रहे थे। गौतम गंभीर ने दी सफाई गंभीर ने बाहर बैठने की इस वजह को साफ करते हुए स्पष्ट किया कि सिर्फ अच्छी फॉर्म में होना ही टीम में जगह मिलने की गारंटी नहीं होता। टीम मैनेजमेंट और लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अनुभवी खिलाड़ियों को सुरक्षा देना पहली प्राथमिकता होती है। गंभीर ने कहा, 'यह मेरे लिए भी एक नया अनुभव था। हां, वह बहुत अच्छी फॉर्म में थे लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि कई बार ऐसे खिलाड़ियों की वजह से आपको अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है जिन्होंने लंबे समय से टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। और एक बात साफ है सोशल मीडिया या बाहर का शोर यह तय नहीं करता कि प्लेइंग इलेवन क्या होगी।' संजू या अभिषेक को बाहर करना मुश्किल कोच ने टीम में सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका और ड्रेसिंग रूम के माहौल को बनाए रखने पर जोर दिया। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए गंभीर ने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने पिछले डेढ़-दो साल में प्रभाव डाला है उन्हें तीन-चार नाकामियों के आधार पर बाहर नहीं बैठाया जा सकता। गंभीर ने कहा, 'अगर वैभव आज खेलते हैं तो यह मेरे और उस खिलाड़ी के बीच एक कठिन बातचीत होगी जिसे हम बाहर बैठाएंगे चाहे वह अभिषेक हों या संजू। इसलिए हम उस कॉम्बिनेशन को अचानक नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसने पिछले डेढ़ या दो साल में इतना प्रभाव डाला है। हम ड्रेसिंग रूम में वह सुरक्षा का माहौल बनाना चाहते हैं।' एशियन गेम्स में खेली शानदार पारी मौका मिलने पर वैभव ने खुद को फिर साबित किया। एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ वापसी करते हुए उन्होंने 21 गेंदों में 38 रनों की अहम पारी खेली। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भी 9 गेंदों पर 15 रन बनाकर टीम की जीत में अपना योगदान दिया जिसकी बदौलत भारत ने 19 रनों से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

किताबों से आगे की पढ़ाई! बेकार सामान से बच्चों को पढ़ाते हैं पवन कुमार, मिला राज्य शिक्षक पुरस्कार

यमुनानगर  यहां घंटी बजते ही किताबें जरूर खुलती हैं, लेकिन पढ़ाई किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहती। थर्माकोल का पेड़ बच्चों को जोड़-घटा सिखाता है। उसकी हरी पत्तियां और लाल सेब गणित के सवाल बन जाते हैं। कागज पर लिखा शब्द हटाते ही उसका विपरीतार्थक सामने आ जाता है। यानी यहां चीजें बोलती हैं और बच्चे उन्हें देखकर, छूकर और करके सीखते हैं। राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास के जेबीटी पवन कुमार ने इसी अनोखी शिक्षण शैली को अपनी पहचान बनाया है। बेकार वस्तुओं से बनाते हैं शिक्षण सामग्री करीब 26 साल की सेवा में इसी प्रयास और विद्यार्थियों की उपलब्धियों के लिए उन्हें इस साल राज्य शिक्षक पुरस्कार भी मिला है। पवन कुमार थर्माकोल, कागज और घरों में बेकार पड़ी वस्तुओं से कम लागत वाली शिक्षण सामग्री तैयार करते हैं। थर्माकोल के पेड़ पर कागज की पत्तियां और फल लगाकर बच्चों से उनकी संख्या गिनवाते हैं। फिर इन्हीं के जरिए जोड़-घटा के सवाल करवाते हैं। विपरीतार्थक शब्दों के लिए भी ऐसी सामग्री बनाई है, जिसमें एक शब्द हटाते ही दूसरा शब्द सामने दिखाई देता है। यही सामग्री अभिभावकों को भी दी जा रही है, ताकि बच्चे अभ्यास कर सकें। विद्यालय में हैं 61 बच्चे विद्यालय में 61 बच्चे हैं। विद्यार्थी स्कूल, खंड और जिला स्तर पर सांस्कृतिक, खो-खो, प्रश्नोत्तरी और चित्र देखकर विवरण लिखने जैसी प्रतियोगिताओं में अव्वल रह चुके हैं। शिक्षक के संग समाजसेवक भी हैं पवन पढ़ाई संग समाजसेवा का पाठ व्यासपुर में जन्मे पवन कुमार करीब दस वर्षों से मिल्क खास में कार्यरत हैं। वर्ष 2015 में फेरूवाला स्कूल से रक्तदान शिविर की शुरुआत की। अब तक 16 शिविरों में योगदान दे चुके हैं और स्वयं 15 बार रक्तदान कर चुके हैं। स्काउट एवं गाइड गतिविधियों के जरिए बच्चों में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित कर रहे हैं। पवन कुमार की शिक्षण शैली और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें इस वर्ष राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कक्षा में गणित मात्र सवाल नहीं, पेड़ पर लगे सेबों में दिखाई देता है और भाषा केवल किताब में नहीं, कागज के प्रयोग से समझ आती है।

यूपी के इन गांवों के नाम हैं बेहद अनोखे, ‘कोरोना’ और ‘पनौती’ सुनकर चौंक जाएंगे

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जिनके नाम इतने अटपटे हैं कि लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते। इन गांवों में रहने वाले लोग अपने गांव के नामों को लेकर इतने परेशान हैं कि नाम बदलने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। आज हम आपको इन्हीं अजब-गजब गांवों के बारे में बताने वाले हैं, जिनके नाम सुनकर आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। कोरोना सीतापुर जिले की मिश्रित तहसील में स्थित इस गांव का नाम महामारी कोरोना से काफी पहले से रखा गया है। लेकिन ये गांव कोरोना संक्रमण के दौरान ही चर्चा में आया था। इस नाम की वजह से ग्रामीणों को कई बार अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता है। पनौती पनौती का अर्थ अक्सर हम बूरी किस्मत वाले को कहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा भी एक गांव है जिसका नाम ही पनौती है। चित्रकूट जिले में स्थित इस गांव के लोग अपने गांव के नाम से ही परेशान हैं। यहां के ग्रामीण अपने गांव का नाम बदलने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। रण्डौली उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिला की जयसिंहपुर तहसील के अंतर्गत आने वाला रण्डौली गांव अपने नाम बदलने की वजह से काफी चर्चा में रहा है। इस गांव का नाम अजीब होने के कारण यहां के निवासियों को दूसरों को अपने गांव का नाम बताने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। हालांकि लंबे प्रयास के बाद इस गांव का नाम वर्ष 2017 में बदलकर अन्नपूर्णा नगर कर दिया गया है। मुंहकुचवां यूपी के मीरजापुर जिले में मुहकुचवां गांव का नाम अजीबोगरीब है। जब भी लोग इस गांव के नाम को सुनते हैं तो अपनी हंसी नहीं रोक पाते। मुहकुचवां गांव की कुल आबादी करीब दो हजार है। ये गांव मीरजापुर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। लोलपुर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की तरबगंज तहसील में स्थित लोलपुर गांव का नाम Lol (लाफ ऑफ लाउड) से मिलता-जुलता है, जो सुनने में काफी अनोखा लगता है। अपने इस अनोखे नाम की वजह से ये गांव भी काफी चर्चा में रहा है। गंज्हेड़ी सुल्तानपुर जिले में स्थित इस गांव का नाम भी काफी अजीब और हास्यास्पद माना जाता है। यहां के लोग अपने गांव के नाम को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी लोग अक्सर इस गांव के नाम का मजाक बनाते हैं। भैंसा मथुरा जिले में 'भैंसा' नाम का गांव है। जानवर से जुड़े नाम वाले इस गांव के बारे में पहली बार सुनने वाले लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं। बालमपुर सुल्तानपुर जिले के भदैयां ब्लॉक में स्थित बालामपुर गांव अपने नाम को लेकर काफी प्रसिद्ध है। यहां कि महिलाएं अपने गांव का नाम बताने में अक्सर शर्मा जाती हैं।

विभिन्न राज्यों के सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ एवं नीति निर्माता भूमि अधिग्रहण में तेजी, परियोजना क्रियान्वयन, सुरक्षित डिजाइन और गुणवत्ता पर करे रहे मंथन

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव गुजरात के नर्मदा में आज से शुरू हुए सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शामिल हुए। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा “गतिशक्ति से प्रगति” थीम पर इसका आयोजन किया गया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर का शुभारंभ किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री  हर्ष मल्होत्रा भी इस दौरान मौजूद थे। देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ एवं नीति निर्माता इस राष्ट्रीय चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री  साव के साथ लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, अपर सचिव  एस.एन. वास्तव और राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  ज्ञानेश्वर कश्यप भी चिंतन शिविर में हिस्सा ले रहे हैं। चिंतन शिविर में भाग ले रहे विभिन्न राज्यों के मंत्रियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं नीति निर्माताओं ने आज तीन सत्रों में भविष्य में बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की डिजाइन, गुणवत्ता, रोड सेफ्टी और परियोजना प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में रायपुर से जगदलपुर, बिलासपुर से रायगढ़, कटघोरा से अंबिकापुर और रायपुर से सारंगढ़ तक फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्गों की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।  चिंतन शिविर में निर्धारित किए जाने वाले फ्रेमवर्क्स से इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के पहले दिन आज विभिन्न सत्रों में “पीएम गतिशक्ति—समन्वित और प्रभावी परियोजना क्रियान्वयन के लिए एकीकृत अधोसंरचना नियोजन”, “भूमि अधिग्रहण में तेजी और भूमि राशि का प्रभावी उपयोग” तथा “सुदृढ़ परियोजना क्रियान्वयन और रेटिंग के लिए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट फ्रेमवर्क” पर गहन विचार-विमर्श किया गया। चिंतन शिविर के दूसरे दिन 6 अक्टूबर को “सुरक्षित राजमार्गों का डिजाइन—मानकों से क्रियान्वयन तक” और “गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना मॉनिटरिंग” पर मंथन किया जाएगा।

गंडक तटबंध टूटने के बाद मचा हड़कंप, 7 इंजीनियरों पर कार्रवाई; इन पर चला डंडा

पटना गंडक नदी में रिकॉर्ड पानी आने से तटबंध टूटने की घटनाओं और इस मामले में अभियंताओं की लापरवाही पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग ने सारण और गोपालगंज मे तैनात सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता पर अनुशासनिक कार्रवाई चलाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद अभियंताओं पर सरकार ने कार्रवाई की है। जिन सात अभियंताओं को निलंबित किया गया है, उनमें दो कार्यपालक अभियंता, तीन सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंता हैं। इन पर गंडक नदी में आई बाढ़ के दौरान आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप है। इस साल 28 सितंबर से एक अक्तूबर के बीच 13 जगहों पर गंडक का तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे बड़े इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, ⁠नेपाल और उत्तरप्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट में गंडक नदी का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया। गंडक नदी का जलस्तर बिहार के चार स्थलों- बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे गंडक का तटबंध कई स्थलों पर क्षतिग्रस्त हो गया। ⁠क्षतिग्रस्त तटबंधों का विभाग के वरीय पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञ टीम के द्वारा स्थल निरीक्षण कर उससे निपटने के लिए आकस्मिक कार्य योजना पर कार्य करने हेतु निदेशित किया गया। परंतु कुछ स्थानीय अभियंताओं द्वारा इसके क्रियान्वयन में शिथिलता एवं लापरवाही बरती गयी। यही नहीं, तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक परिस्थिति के अनुरूप तात्कालिक प्रतिक्रिया में विलंब किया गया तथा ब्रीच स्थल पर उपस्थित रह कर मटेरियल और मैनपावर के साथ कट-एंड को प्रोटेक्ट करने का प्रयास करने के बजाय स्थल से हट जाया गया। आकस्मिक कार्य योजना लागू करने में शिथिलता विभाग का कहना है कि आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता पायी गई तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में भी लापरवाही बरती गई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय का अभाव पाया गया। कुछ अभियंताओं की कार्यशैली के विरुद्ध भारी जनाक्रोश देखने को मिला। स्थल निरीक्षण एवं प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जल संसाधन विभाग के आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया। शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी : विभाग विभाग ने साफ कहा है कि आपदाजन्य आकस्मिक परिस्थिति में कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही अक्षम्य है और इसके विरुद्ध सख़्त कार्यवाई होगी। विभाग के अनुसार फिलहाल गंडक के तटबंधों पर अब दबाव नहीं है तथा सीपेज/पाइपिंग की समस्या भी अब नहीं है। तटबंध के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त मटेरियल स्टॉक कर कट-एंड को प्रोटेक्ट करने तथा टैगिंग का काम जारी है। ये निलंबित किये गये संतोष कुमार प्रभाकर, कार्यपालक अभियंता, छपरा मो. साजिद इकबाल, कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज सुनील कुमार, सहायक अभियंता, छपरा विनोद कुमार, सहायक अभियंता, छपरा मो. जावेद अंसारी, सहायक अभियंता, गोपालगंज चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता, छपरा विकास कुमार, कनीय अभियंता, गोपालगंज इन पर विभागीय कार्यवाही कुमार मनोज गुप्ता, मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर (आरोप : चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने एवं तदोपरांत की जाने वाली आकस्मिक प्रतिक्रिया में शिथिलता और लापरवाही)