samacharsecretary.com

गंडक तटबंध टूटने के बाद मचा हड़कंप, 7 इंजीनियरों पर कार्रवाई; इन पर चला डंडा

पटना गंडक नदी में रिकॉर्ड पानी आने से तटबंध टूटने की घटनाओं और इस मामले में अभियंताओं की लापरवाही पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग ने सारण और गोपालगंज मे तैनात सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता पर अनुशासनिक कार्रवाई चलाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद अभियंताओं पर सरकार ने कार्रवाई की है। जिन सात अभियंताओं को निलंबित किया गया है, उनमें दो कार्यपालक अभियंता, तीन सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंता हैं। इन पर गंडक नदी में आई बाढ़ के दौरान आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप है। इस साल 28 सितंबर से एक अक्तूबर के बीच 13 जगहों पर गंडक का तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे बड़े इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, ⁠नेपाल और उत्तरप्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट में गंडक नदी का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया। गंडक नदी का जलस्तर बिहार के चार स्थलों- बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे गंडक का तटबंध कई स्थलों पर क्षतिग्रस्त हो गया। ⁠क्षतिग्रस्त तटबंधों का विभाग के वरीय पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञ टीम के द्वारा स्थल निरीक्षण कर उससे निपटने के लिए आकस्मिक कार्य योजना पर कार्य करने हेतु निदेशित किया गया। परंतु कुछ स्थानीय अभियंताओं द्वारा इसके क्रियान्वयन में शिथिलता एवं लापरवाही बरती गयी। यही नहीं, तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक परिस्थिति के अनुरूप तात्कालिक प्रतिक्रिया में विलंब किया गया तथा ब्रीच स्थल पर उपस्थित रह कर मटेरियल और मैनपावर के साथ कट-एंड को प्रोटेक्ट करने का प्रयास करने के बजाय स्थल से हट जाया गया। आकस्मिक कार्य योजना लागू करने में शिथिलता विभाग का कहना है कि आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता पायी गई तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में भी लापरवाही बरती गई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय का अभाव पाया गया। कुछ अभियंताओं की कार्यशैली के विरुद्ध भारी जनाक्रोश देखने को मिला। स्थल निरीक्षण एवं प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जल संसाधन विभाग के आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया। शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी : विभाग विभाग ने साफ कहा है कि आपदाजन्य आकस्मिक परिस्थिति में कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही अक्षम्य है और इसके विरुद्ध सख़्त कार्यवाई होगी। विभाग के अनुसार फिलहाल गंडक के तटबंधों पर अब दबाव नहीं है तथा सीपेज/पाइपिंग की समस्या भी अब नहीं है। तटबंध के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त मटेरियल स्टॉक कर कट-एंड को प्रोटेक्ट करने तथा टैगिंग का काम जारी है। ये निलंबित किये गये संतोष कुमार प्रभाकर, कार्यपालक अभियंता, छपरा मो. साजिद इकबाल, कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज सुनील कुमार, सहायक अभियंता, छपरा विनोद कुमार, सहायक अभियंता, छपरा मो. जावेद अंसारी, सहायक अभियंता, गोपालगंज चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता, छपरा विकास कुमार, कनीय अभियंता, गोपालगंज इन पर विभागीय कार्यवाही कुमार मनोज गुप्ता, मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर (आरोप : चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने एवं तदोपरांत की जाने वाली आकस्मिक प्रतिक्रिया में शिथिलता और लापरवाही)

किसानों को 50% तक सब्सिडी, तेल मिल और पैकेजिंग यूनिट लगाने के लिए 10 अक्टूबर तक करें आवेदन

 गोपालगंज कृषि उपज को खेत से बाजार तक तैयार उत्पाद के रूप में पहुंचाने की दिशा में जिले के किसानों के लिए नई पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में कच्ची घानी (कोल्ड प्रेस) तेल निष्कर्षण मिल की तीन और पैकेजिंग मशीन की तीन इकाइयां स्थापित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इच्छुक किसान 10 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत तिलहन फसलों की उपज का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कर तेल तैयार करने और उसकी पैकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसानों को कच्ची उपज बेचने के बजाय प्रसंस्कृत उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। सामान्य वर्ग को 40, एससी-एसटी को 50 प्रतिशत अनुदान कच्ची घानी तेल निष्कर्षण मिल लगाने पर सामान्य श्रेणी के लाभुक को अधिकतम दो लाख रुपये या लागत का 40 प्रतिशत, जो भी कम हो, अनुदान मिलेगा। वहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभुकों को अधिकतम 2.50 लाख रुपये या लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार पैकेजिंग मशीन के लिए सामान्य श्रेणी के लाभुक को अधिकतम 1.20 लाख रुपये या लागत का 40 प्रतिशत तथा एससी-एसटी वर्ग के लाभुक को अधिकतम 1.50 लाख रुपये या लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। लॉटरी से होगा लाभुकों का चयन निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर लाभुकों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। 14 अक्टूबर को लॉटरी होगी। इसके बाद चयनित आवेदकों का सत्यापन 15 से 23 अक्टूबर तक किया जाएगा। किसी कारण से चयनित किसान को योजना का लाभ नहीं मिलने पर प्रतीक्षा सूची में शामिल अगले आवेदक का चयन किया जाएगा। ऐसे करें आवेदन किसान बिहार कृषि एप-डीबीटी पोर्टल के माध्यम से योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कृषि विभाग का मानना है कि तेल निष्कर्षण और पैकेजिंग की सुविधा मिलने से स्थानीय कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन होगा तथा किसानों के लिए कृषि आधारित अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे। योजना एक नजर में     कच्ची घानी तेल मिल – तीन इकाइयां     पैकेजिंग मशीन – तीन इकाइयां     आवेदन की अंतिम तिथि – 10 अक्टूबर     ऑनलाइन लाटरी – 14 अक्टूबर     सत्यापन – 15 से 23 अक्टूबर     आवेदन – बिहार कृषि एप-डीबीटी पोर्टल     सामान्य वर्ग – 40 प्रतिशत तक अनुदान     एससी/एसटी – 50 प्रतिशत तक अनुदान क्या कहते हैं अधिकारी?     जिले में तीन तेल मिल व तीन पैकेजिंग यूनिट लगाने की योजना है। यूनिट लगाने पर किसानों को अनुदान दिया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल खुल गया है। – ललन कुमार सुमन, जिला कृषि पदाधिकारी  

योगी सरकार का बड़ा फैसला: अब 6000 वर्गमीटर तक जमीन का Land Use बदलना आसान, शुल्क में भी भारी राहत

लखनऊ यूपी में लैंड यूज बदलवाना अब आसान और सस्ता हो गया है। अगर आप 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू-उपयोग परिवर्तन कराना चाहते हैं तो आपको लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना होगा। योगी सरकार ने 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल सीमा तक के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों के बोर्ड को दे दिया है। शासन ने एक और बड़ी राहत यह दी है कि अब भू-उपयोग परिवर्तन का शुल्क भी काफी कम कर दिया है। ये दरें पांच प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गईं हैं। हालांकि इस बड़ी राहत के साथ यह भी शर्त रखी है कि किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही परिवर्तन बोर्ड कर सकता है। अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए सारी फाइलों को शासन को ही भेजना पड़ता था। केडीए बोर्ड बस इसकी संस्तुति करता था। जब तक भू-उपयोग परिवर्तन होता था या इसके आवेदनों की फाइलों को निरस्त कर दिया जाता था तब तक विकास कार्यों से संबंधित सामग्रियों की दरें भी काफी बढ़ चुकी होती थीं। शासन ने 6000 वर्ग मीटर तक की जमीनों के आवेदकों को प्राधिकरण बोर्ड स्तर से ही हरी झंडी देने का अधिकार दे दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद का आदेश कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भी पहुंच गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है। परिवर्तन शुल्क की किस्तों में भी राहत अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की किश्तों में भी राहत दी गई है। पहले इस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से साधारण ब्याज के साथ एक वर्ष में दिया जा सकता था मगर अब चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर प्लस वन प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष को आवेदन करने पर यह अवधि एक वर्ष और बढ़ सकती है। ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं में बदलाव नहीं शासन ने यह भी शर्त रख दी है कि ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जाएगा। मसलन जो जमीन एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क आदि के लिए मास्टर प्लान में निर्धारित की गई है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित किया जाना है उसमें भी मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो। लैड यूज बदलने के लिए इस तरह से देना होगा चार्ज केडीए के सचिव अभय कुमार पांडेय के अनुसार शासन का आदेश आ चुका है। नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों और संशोधित किए नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। केडीए बोर्ड को 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू उपयोग बदलने का अधिकार मिल गया है। इसके अनुपालन की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है।

गिरिडीह सीट पर भाजपा की नजर, निर्भय शाहाबादी से सुरेश साव तक कई नाम चर्चा में

रांची गिरिडीह विधानसभा में दुर्गापूजा समाप्त होते ही उपचुनाव का माहौल बन जाएगा। पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन से गिरिडीह विधानसभा की सीट खाली हुई है। नवंबर में यहां चुनाव घोषित होने की संभावना है। दो बार से यहां हार का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए गिरिडीह सीट पर उपचुनाव के लिए एक योग्य प्रत्याशी की तलाश प्रारंभ हो गई है। प्रदेश के नेता गिरिडीह के कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रहे हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर सक्रियता, जाातीय समीकरण और जीत की संभावना वाले नाम पर चर्चा हो रही है। इस विधानसभा में गिरिडीह सदर और पीरटांड़ दो प्रखंड हैं। गिरिडीह सदर के शहरी क्षेत्र में भाजपा का अच्छा आधार है लेकिन पीरटांड़ में पार्टी पिछड़ जाती है। प्रदेश नेतृत्व प्रत्याशी का नाम तय करते हुए पीरटांड़ क्षेत्र में उस नेता के प्रभाव का आकलन भी कर रहा है। निर्भय शाहाबादी और सुरेश साव का ओबीसी समाज में आधार गिरिडीह में पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे निर्भय शाहाबादी करीब 3500 वोटों से सुदिव्य कुमार से परिजित हुए थे।शाहाबादी वैश्य समुदाय से आते हैं और दूसरे ओबीसी समुदाय का भी उन्हें समर्थन मिलता रहा है। इसके अलावा शहरी मध्यवर्ग भाजपा का पारंपरिक वोटबैंक रहा है। लेकिन निर्भय शाहाबादी की उम्र ज्यादा होने की वजह से उनके टिकट पर संशय हो सकता है। सुरेश साव भाजपा के युवा नेता हैं। वैश्य समाज से ही आने वाले युवा नेता सुरेश साव पूर्व में धनबाद लोकसभा के प्रभारी रहे हैं और पार्टी को जीत दिला चुके हैं। शहरी मतदाताओं से उनका भी नियमित संपर्क है। पीरटांड़ के संताल बहुल क्षेत्र में सुरेश साव पिछले दस सालों से लगातार सक्रिय हैं। सुरेश साव ने पिछले दिनों बड़ी संख्या में संताल समाज के लोगों को भाजपा की सदस्यता भी दिलाई है। रवींद्र राय और चुन्नू कांत सामान्य जाति के बड़े नाम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय भाजपा के बड़े नेता हैं। गिरिडीह जिले के ही निवासी रवींद्र राय पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र राजधनवार से पूर्व में विधायक भी रहे हैं। भूमिहार समाज से आने वाले रवींद्र राय झारखंड भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं। गिरिडीह विधानसभा में ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं की अच्छी संख्या भी है। इसके अलावा चुन्नु कांत भी भाजपा प्रत्याशी की रेस में कार्यकर्ताओं की पसंद बताए जा रहे हैं। चुन्नु कांत कायस्थ समाज से आते हैं जिसकी गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में अच्छी संख्या है। स्थानीय होने की वजह से चुन्नु कांत का आम मतदाताओं से लगातार मिलना जुलना भी है।

सड़क हादसे में महिला की मौत के बाद बवाल, भीड़ ने ट्रक चालक को पकड़ा और केबिन फूंका

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर में सोमवार सुबह सड़क हादसे में स्कूटी सवार महिला की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और आसपास के लोगों ने ट्रक चालक को पकड़ लिया और ट्रक के केबिन में आग लगा दी। इसके बाद लोगों ने सड़क प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही सवीना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवाया और ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। सवीना थाना पुलिस के मुताबिक उदयपुर शहर में तीतरड़ी गुप्तेश्वर रोड पर सुबह करीब 8 बजे हादसा हुआ। तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार महिला को कुचल दिया। हादसे में निर्मला साहू (48) पत्नी कन्हैयालाल साहू निवासी तीतरड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रक तीतरड़ी गांव की तरफ आ रहा था और स्कूटी सवार महिला अपने घर की ओर लौट रही थी। जिस जगह हादसा हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर महिला का घर था। ऐसे में हादसे की खबर मिलते ही परिवार के लोग और आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंच गए। भीड़ ने ट्रक में लगाई आग महिला की मौत से गुस्साए लोगों ने ट्रक चालक को मौके पर पकड़ लिया। साथ ही लोगों ने ट्रक के केबिन में आग लगा दी। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। लोगों ने पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी का आरोप भी लगाया। पुलिस के अनुसार जिस परिवार ने ट्रक चालक को संरक्षण देने की कोशिश की, उसके खिलाफ भी लोगों ने आक्रोश जताया और हमला करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और चालक को भीड़ से छुड़ाकर सुरक्षित थाने पहुंचाया। पुलिस ने शांत करवाया मामला हादसे के बाद मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने मृतका के परिजनों और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने ट्रक चालक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए। पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर पुलिस थाने लाई, जहां पर उससे पूछताछ की जा रही है।

अलीगढ़ में बस स्टेशनों के नाम बदलने की तैयारी, शासन को भेजे गए 8 प्रस्ताव

अलीगढ़ यूपी के अलीगढ़ के आठ प्रमुख बस स्टेशनों को अब नई पहचान मिलने जा रही है। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिले के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शहीदों और महापुरुषों के नाम पर बस स्टेशनों के नामकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। चार साल बाद एक बार फिर बस स्टेशनों के नाम बदलने की कवायद तेज हुई है। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) रोडवेज की ओर से आठ बस स्टेशनों के नए नामों की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नाम से होगी। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय इतिहास के उन नायकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जिनका योगदान महत्वपूर्ण होने के बावजूद समय के साथ लोगों की स्मृतियों से दूर होता गया। बस स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों के नामकरण के माध्यम से इनके संघर्ष और योगदान को आम लोगों के बीच पहुंचाने की योजना है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को इन महापुरुषों और शहीदों के नामों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। प्रस्ताव के मुताबिक इगलास बस स्टेशन का नाम राजा अमानी जी बस स्टेशन रखा जाएगा। इसी तरह अकराबाद बस स्टेशन का नाम अमर शहीद ठाकुर मंगल सिंह-महताब सिंह बस स्टेशन करने की संस्तुति की गई है। मसूदाबाद बस स्टेशन का नाम नारायण पंडित जी बस स्टेशन प्रस्तावित है। शहर के महत्वपूर्ण सैटेलाइट बस स्टेशन, सूतमील चौराहा का नाम मोहनलाल गौतम बस स्टेशन रखने का प्रस्ताव है। वहीं गभाना बस स्टेशन का नाम छोटे लाल गौतम बस स्टेशन किया जाना प्रस्तावित है। शहर के गांधीपार्क बस स्टेशन को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बस स्टेशन के नाम से पहचान देने की संस्तुति भेजी गई है। इसी क्रम में खैर बस स्टेशन का नाम ठाकुर टोडर सिंह बस स्टेशन और अतरौली बस स्टेशन का नाम बनारसी दास बस स्टेशन किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इन नामों के जरिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को सार्वजनिक पहचान देने का प्रयास किया गया है। चार साल बाद फिर बदलेगी पहचान बस स्टेशनों के नाम बदलने की प्रक्रिया जिले में करीब चार साल बाद फिर सामने आई है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाने के बाद अब निगाहें स्वीकृति पर टिकी हैं। शासन की मंजूरी मिलने के बाद रोडवेज स्तर पर नए नामों को रिकॉर्ड, साइन बोर्ड और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं में दर्ज किया जाएगा। यात्रियों के साथ नई पीढ़ी को भी मिलेगा संदेश बस स्टेशनों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में इन स्थानों का नाम महापुरुष व शहीदों के नाम पर रखने से उनके योगदान की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। खासतौर पर स्थानीय इतिहास से जुड़े व्यक्तित्वों को सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से पहचान मिलने से नई पीढ़ी में उनके बारे में जानने की रुचि बढ़ सकती है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अलीगढ़ के आठ बस स्टेशनों की पहचान उनके नए नामों के साथ इतिहास व वर्तमान को जोड़ने वाली नजर आएगी।

‘सरकार आपके द्वार’ शिविर में मिली नए घर की चाबी, चेहरे पर छलकी वर्षों के इंतजार की खुशी

मिट्टी की दीवारों से पक्के आशियाने तक: राजा राम के वर्षों पुराने सपने को प्रधानमंत्री आवास योजना ने दिया आकार ‘सरकार आपके द्वार’ शिविर में मिली नए घर की चाबी, चेहरे पर छलकी वर्षों के इंतजार की खुशी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर गरीब को पक्का आवास’ के संकल्प को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मिल रही जमीनी मजबूती रायपुर,  कभी मिट्टी की दीवारों वाला घर ही राजा राम पोर्ते और उनके परिवार की मजबूरी था। बारिश के दिनों में घर की चिंता, ठंड में मुश्किलें और मौसम की मार के बीच परिवार की सुरक्षा की फिक्र हमेशा बनी रहती थी। मन में एक सपना जरूर था कि कभी उनका भी अपना पक्का घर होगा, जिसकी मजबूत छत के नीचे परिवार सुरक्षित और सुकून से रह सकेगा। लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण यह सपना वर्षों तक सपना ही बना रहा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत बस्ती के निवासी राजा राम पोर्ते के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में शामिल हुआ। वर्षों से मन में संजोए पक्के आशियाने के सपने को पूरा करने का रास्ता खुला तो राजा राम और उनके परिवार की उम्मीदों को जैसे नए पंख मिल गए। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने बिना समय गंवाए पूरी लगन और मेहनत के साथ अपने आवास का निर्माण शुरू किया। कुछ ही महीनों में उनका पक्का मकान बनकर तैयार हो गया। जो कभी सपना था, आज वही परिवार की खुशियों का ठिकाना आज राजा राम का पक्का घर केवल ईंट, सीमेंट और छत से बना एक ढांचा नहीं है, बल्कि उनके परिवार के लिए वर्षों के संघर्ष के बाद मिली सुरक्षा, सम्मान और सुकून की नई पहचान है। मिट्टी के पुराने घर में बारिश, ठंड और बदलते मौसम के दौरान परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पक्का आवास बनने के बाद इन चिंताओं से काफी हद तक मुक्ति मिली है। अब परिवार एक सुरक्षित और बेहतर वातावरण में जीवन बिता रहा है। राजा राम के लिए अपने पक्के घर की सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब परिवार को मौसम बदलने के साथ घर की मजबूती की चिंता नहीं करनी पड़ती। जिस छत का सपना उन्होंने वर्षों तक देखा था, आज उसी छत के नीचे परिवार के साथ उनका नया जीवन शुरू हो चुका है। हाथों में आई चाबी तो आंखों के सामने साकार हुआ वर्षों पुराना सपना इस खुशी को और यादगार बनाया सेवा सेतु अभियान के तहत आयोजित ‘सरकार आपके द्वार’ शिविर ने। ग्राम बस्ती में आयोजित शिविर के दौरान राजा राम पोर्ते को उनके नए आवास की चाबी सौंपी गई। हाथों में नए घर की चाबी आते ही वर्षों से मन में संजोया सपना जैसे एक पल में आंखों के सामने साकार हो गया। वह चाबी केवल एक मकान का दरवाजा खोलने वाली चाबी नहीं थी, बल्कि राजा राम और उनके परिवार के लिए बेहतर भविष्य, सुरक्षा और सम्मान के नए जीवन का द्वार खोलने वाली चाबी बन गई। राजा राम कहते हैं कि कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के बीच इतनी बड़ी राशि जुटा पाना संभव नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने उनके इस अधूरे सपने को पूरा करने का अवसर दिया। गरीब परिवारों के पक्के आवास के सपने को मिल रहा आधार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार भी पात्र परिवारों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता दे रही है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से राजा राम पोर्ते जैसे जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्का घर केवल एक आकांक्षा नहीं रह गया है, बल्कि वास्तविकता में बदल रहा है। शासन की योजना जब जरूरतमंद परिवार तक पहुंचती है तो उसका असर केवल मकान के निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह परिवार को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भरोसा भी देती है। ‘सरकार आपके द्वार’ से योजनाओं को मिल रही अंतिम छोर तक पहुंच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सेवा सेतु अभियान के तहत ‘सरकार आपके द्वार’ शिविर इसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं और जरूरतों से रूबरू होने के साथ पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कर रहा है। ग्राम बस्ती में राजा राम को नए आवास की चाबी सौंपा जाना इसी प्रयास की एक सुखद तस्वीर है। यह उस भरोसे को मजबूत करता है कि शासन की योजनाएं जब अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे उसके जीवन में वास्तविक बदलाव का माध्यम बनती हैं। मिट्टी के घर की चिंता पीछे छूटी, अब भविष्य की नई उम्मीद नए घर में प्रवेश के साथ राजा राम और उनके परिवार के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। मिट्टी की कमजोर दीवारों और मौसम की चिंताओं से जुड़ी पुरानी यादें अब पीछे छूट रही हैं। उनकी जगह पक्की दीवारों की सुरक्षा, अपने घर का सुकून और बेहतर भविष्य का विश्वास ले रहा है। अपने परिवार के साथ पक्के घर में खुशहाल जीवन की शुरुआत करने वाले राजा राम पोर्ते ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। एक पक्का घर किसी गरीब परिवार के लिए केवल चार दीवारें और एक छत नहीं होता। वह उसकी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का ठिकाना, परिवार की सुरक्षा का भरोसा और सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार होता है। कभी मिट्टी की दीवारों के बीच देखा गया राजा राम का सपना आज पक्के आशियाने में बदल चुका है और इस आशियाने की नई छत के नीचे अब उनका परिवार भविष्य के नए सपने देख रहा है।  

ट्रेन टिकट बुकिंग में नहीं होगी देरी, IRCTC का Master List और पेमेंट वाला ये तरीका आएगा काम

पटना IRCTC Booking Tips: कंफर्म ट्रेन टिकट की बुकिंग कई बार रफ्तार का खेल बन जाती है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में सीटें तेजी से भरती हैं। ऐसे में यात्रियों के पास तेज इंटरनेट होने के बावजूद टिकट वेटिंग में चली जाती है। इसकी एक बड़ी वजह बुकिंग के दौरान जानकारी भरने और पेमेंट में लगने वाला अतिरिक्त समय भी है। अगर आप अक्सर IRCTC से टिकट बुक करते हैं तो बुकिंग शुरू होने से पहले थोड़ी तैयारी आपके काम को काफी आसान बना सकती है। IRCTC Ticket Booking यात्रियों की जानकारी पहले से सेव रखने और पेमेंट का विकल्प तैयार रखने से बुकिंग प्रक्रिया तेज हो सकती है। आइए जानते हैं वे दो काम, जिन्हें पहले कर लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। पहला काम: पहले से तैयार रखें पैसेंजर की डिटेल IRCTC पर टिकट बुक करते समय यात्रियों की जानकारी भरने में काफी समय लग सकता है। नाम, उम्र, जेंडर, पहचान संबंधी जानकारी और बर्थ प्रेफरेंस जैसी डिटेल दर्ज करते-करते कई बार बुकिंग की रफ्तार धीमी हो जाती है। इसी दौरान उपलब्ध सीटें तेजी से कम हो सकती हैं। इस परेशानी से बचने के लिए यात्री पहले से Master List तैयार रख सकते हैं। IRCTC अकाउंट के प्रोफाइल सेक्शन में उपलब्ध इस सुविधा के जरिए उन यात्रियों की जानकारी सेव की जा सकती है, जिनके लिए आप अक्सर टिकट बुक करते हैं। Master List से बचेगा बुकिंग का समय IRCTC Ticket Booking एक बार यात्रियों की जानकारी सेव हो जाने के बाद टिकट बुक करते समय हर डिटेल दोबारा टाइप करने की जरूरत कम हो जाती है। संबंधित यात्री को सूची से चुनकर बुकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इससे खासकर एक से अधिक यात्रियों की टिकट बुक करते समय सुविधा मिलती है। कंफर्म टिकट की बुकिंग में समय काफी अहम होता है। इसलिए बुकिंग खुलने से पहले Master List तैयार रखना एक छोटी लेकिन काम की तैयारी हो सकती है। इससे टिकट बुकिंग के दौरान अनावश्यक टाइपिंग में समय नहीं जाता। दूसरा काम: पेमेंट के लिए पहले से रहें तैयार टिकट बुकिंग का आखिरी और सबसे अहम चरण पेमेंट होता है। कई बार यात्री ट्रेन और सीट चुनने के बाद पेमेंट स्टेज पर पहुंचते हैं, लेकिन बैंकिंग प्रक्रिया, ओटीपी या पेमेंट विकल्प चुनने में अतिरिक्त समय लग जाता है। इस दौरान बुकिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका पसंदीदा और भरोसेमंद पेमेंट विकल्प आसानी से उपलब्ध हो। IRCTC पर उपलब्ध सेव किए गए पेमेंट विकल्प का इस्तेमाल करने से हर बार भुगतान संबंधी जानकारी दोबारा दर्ज करने की जरूरत कम हो सकती है। बुकिंग से पहले ये तैयारी रखें पूरी कंफर्म टिकट के लिए सिर्फ तेज इंटरनेट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बुकिंग शुरू होने से पहले यात्री की जानकारी, यात्रा की तारीख, ट्रेन, क्लास और बर्थ संबंधी पसंद तय रखें। साथ ही लॉगिन पहले से कर लेना भी बुकिंग प्रक्रिया को आसान बना सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि टिकट बुकिंग के समय बार-बार जानकारी खोजने या टाइप करने में समय न गंवाएं। Master List और तैयार पेमेंट विकल्प इसी तैयारी का हिस्सा हैं, जिससे बुकिंग प्रक्रिया ज्यादा तेज और व्यवस्थित हो सकती है। त्योहारों में और बढ़ जाती है तैयारी की जरूरत त्योहारों, छुट्टियों और गर्मी की छुट्टियों के दौरान ट्रेनों में टिकट की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा रहती है। ऐसे समय में उपलब्ध सीटें तेजी से भर सकती हैं। इसलिए बुकिंग शुरू होने से पहले पूरी तैयारी रखना और प्रक्रिया को समझ लेना यात्रियों के लिए खास तौर पर उपयोगी है। हालांकि कोई भी तरीका कंफर्म टिकट की गारंटी नहीं देता। सीट की उपलब्धता ट्रेन, तारीख, कोटा और मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। लेकिन पहले से जानकारी तैयार रखने और पेमेंट प्रक्रिया को आसान बनाने से बुकिंग के दौरान होने वाली देरी को जरूर कम किया जा सकता है।

धीमी ओवर गति पड़ी भारी, भारत पर 20 और वेस्टइंडीज पर 10 फीसदी मैच फीस का जुर्माना

नई दिल्ली भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले में पांच विकेट से हार झेलनी पड़ी थी. 3 सितंबर (शनिवार) को मुल्लांपुर में आयोजित इस मुकाबले में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के सामने 352 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे मेहमान टीम ने कप्तान शाई होप के नाबाद 162 रनों की बदौलत 10 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. भारतीय टीम शुरुआती दो मुकाबले जीत सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी थी. हालांकि आखिरी मैच में हार के चलते भारतीय टीम वेस्टइंडीज का सूपड़ा साफ नहीं कर सकी. अब वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने दोनों टीमों पर तगड़ा एक्शन लिया है. भारत और वेस्टइंडीज दोनों टीमों पर धीमी ओवर गति को लेकर कार्रवाई हुई है. आईसीसी ने भारतीय टीम पर मैच फीस का 20 प्रतिशत, जबकि वेस्टइंडीज की टीम पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया है. भारत निर्धारित समय में चार ओवर पीछे रह गया, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर कम कर पाई. समय से जुड़ी रियायतों को शामिल करने के बाद दोनों टीमों को न्यूनतम ओवर रेट के नियम का दोषी पाया गया. आईसीसी इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरी के प्रकाश भट्ट ने दोनों टीमों पर यह जुर्माना लगाया. भारत ने चार ओवर कम फेंके आईसीसी की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के मुताबिक निर्धारित समय में कम फेंके गए प्रत्येक ओवर के लिए खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है. इसी नियम के तहत भारत पर चार ओवर कम होने के कारण 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज पर दो ओवर कम होने के चलते 10 प्रतिशत जुर्माना लगा. भारत और वेस्टइंडीज के कप्तानों ने धीमी ओवर गति के आरोपों को स्वीकार कर लिया और आईसीसी की ओर से प्रस्तावित सजा पर भी सहमति जताई. साथ ही दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया, इसलिए मामले में औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी. इस मामले में मैदानी अंपायर जयरामन मदनगोपाल और सैम नोगाज्स्की के साथ थर्ड अंपायर शरफुद्दौला इब्ने शाहिद और फोर्थ अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाए थे. इस तरह सीरीज के आखिरी वनडे के बाद दोनों टीमों को मैदान पर प्रदर्शन के अलावा धीमी ओवर गति की कीमत भी चुकानी पड़ी.

PDS में सरसों तेल के पैकिंग नियम बदले, 21 अक्टूबर से लाभार्थियों को मिलेगा तेल

चंडीगढ़ हरियाणा में गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरसों का तेल उपलब्ध कराने के पैकिंग प्रारूप में बदलाव किया गया है। अब इन परिवारों को पहले से निर्धारित पैक के स्थान पर 500 एमएल और एक लीटर के पैक में सरसों का तेल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों के लिए यह तेल वितरित किया जाना है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय की ओर से हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड (एचएआइसी) के प्रबंध निदेशक को जारी पत्र में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सरसों तेल की आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया तय की गई है। सप्लाई के 15 दिनों के भीतर एचएआइसी को भुगतान 174 रुपये प्रति लीटर की दर से किया जाएगा। इसके बाद रूटीन चक्र में भुगतान 15 दिन के बाद 180 रुपये प्रति लीटर की दर से होगा। 15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक होगी विभाग के अनुसार अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों को सरसों तेल वितरित किया जाना है। अगस्त में 30 लाख लीटर, जबकि सितंबर और अक्टूबर में 37-37 लाख लीटर सरसों तेल की आवश्यकता बताई गई है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 10 से 15 अक्टूबर तक अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सभी जिलों में करीब 104 लाख लीटर सरसों तेल कानफेड के सभी फोकल प्वाइंट्स पर उपलब्ध करा दिया जाए। इसके बाद परिवहन ठेकेदार 15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक करेंगे और 21 अक्टूबर 2026 से लाभार्थियों को इसका वितरण शुरू कराया जा सकेगा। विभाग ने आगे की व्यवस्था भी स्पष्ट की है। प्रत्येक महीने अगले माह के लिए सरसों तेल की मांग पिछले माह की 20 से 25 तारीख तक जिलों के कानफेड फोकल प्वाइंट पर भेजी जाएगी। परिवहन ठेकेदार 25 से 30 तारीख तक इसकी डिलीवरी डिपुओं तक कराएंगे और अगले महीने की एक तारीख से लाभार्थियों को वितरण शुरू कराया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सप्लाई के समय कोई भी बोतल खुली नहीं होनी चाहिए। इतनी बोतलों की होगी जरूरत माह -सरसों तेल की मात्रा -बोतलों की मात्रा अगस्त -30 लाख लीटर -करीब 8 लाख 500 एमएल व 26 लाख एक लीटर बोतल सितंबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल अक्टूबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल