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नरेंद्र मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, ₹1500 में तय होगा लंबा सफर

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली कल रात यानी कि गुरुवार 12 बजे से शुरू होने जा रही है. बातचीत के दौरान चीफ इंजीनियर यूपीडा राज चौधरी ने स्पष्ट किया कि इंटरचेंज और टोल प्लाजा पहले से निर्मित हैं. टोल दरें प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय की गई हैं और वाहन की एंट्री व एग्जिट पॉइंट के आधार पर फास्टैग से स्वतः कटौती होगी. टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर के लिए ₹1.28 प्रति किमी, कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन के लिए ₹2.50 प्रति किमी, लाइट कमर्शियल वाहन, मिनी बस आदि के लिए ₹4.05 प्रति किमी, बस और ट्रक के लिए ₹8.20 प्रति किमी तय किया गया है. वहीं मल्टीएक्सल, भारी मशीनरी और अर्थमूविंग वाहनों के लिए ₹12.60 प्रति किमी व ओवरसाइज वाहनों के लिए ₹16.10 प्रति किमी दर निर्धारित की गई है. प्रयागराज से मेरठ तक कार से यात्रा करने पर करीब ₹1500 टोल लगने का अनुमान है. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंसेसियनार चाहे तो शुरुआती दिनों में कुछ छूट भी दी जा सकती है, जैसा पहले अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में किया गया था. PM मोदी आज करेंगे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज यानी कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया जाएगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर है. यह परियोजना न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी मजबूती प्रदान करेगा. 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी, यात्रा समय में बड़ी कमी प्रधानमंत्री सुबह 11.15 पर हरदोई पहुंचेंगे और 12.55 पर यहां से वापस लौटेंगे. इस दौरान पीएम गंगा एक्सप्रेसवे का उदघाटन करने के साथ ही यूपीडा की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और साथ ही पौधरोपण करने के अलावा जनसभा समेत अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री जिस गंगा एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखाएंगे वह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है. इस हाई-स्पीड मार्ग के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. जहां पहले लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लगते थे, अब यह सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा. इसके साथ ही, माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी. पीपीपी मॉडल पर आधुनिक निर्माण गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसे फिलहाल 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है. 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह एक्सप्रेसवे तेज और सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा. उच्च गुणवत्ता के निर्माण, चौड़े राइट ऑफ वे और मजबूत सेफ्टी फीचर्स इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करते हैं. एयरस्ट्रिप, आईटीएमएस और सुरक्षा की अत्याधुनिक व्यवस्था इस एक्सप्रेसवे की एक खास विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई गई लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं. इसके अलावा, पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. वाहनों की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा. औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास का नया केंद्र गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं. इन क्लस्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे. सरकार द्वारा दी जा रही कैपिटल सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे.

ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट केस: IPL नियम और भारतीय कानून दोनों में फंस सकते हैं पराग

नई दिल्ली जिस मैच के लिए राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग की तारीफ होनी चाहिए थी, उस मैच के लिए उनकी जमकर आलोचना हो रही है। इतना ही नहीं, रियान पराग को कड़ी सजा बीसीसीआई और भारतीय कानून दे सकता है। मामला कुछ यूं है कि राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग आईपीएल 2026 के मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट के कश लगाते हुए कैमरे में कैद हुए थे। इस पर अब बवाल मचा हुआ है, लेकिन आप जान लीजिए कि रियान पराग को क्या सजा इस मामले में मिल सकती है। सबसे पहली बात तो यह है कि भले ही रियान पराग की वैपिंग की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, लेकिन बीसीसीआई किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले मैच के फुटेज की प्रमाणिकता जांचेगी और फिर रियान पराग के साथ-साथ राजस्थान रॉयल्स मैनेजमेंट से भी पूछताछ करेगी। मैच अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा जो खिलाड़ी इस फ्रेम में नजर आ रहे हैं। उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। अगर पाया गया कि रियान पराग ने वाकई में ई-सिगरेट का सेवन ड्रेसिंग रूम में किया है तो उन्हें कड़ी सजा मिलना स्वाभाविक है। क्या है रियान पराग का वैपिंग का मामला? दरअसल, आईपीएल 2026 के 40वें मैच में पंजाब किंग्स के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स की टीम जब रन चेज कर रही थी, तो 16वें ओवर के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ड्रेसिंग रूम के अंदर वैपिंग करते कैमरे में कैद हुए थे। शुरुआती तस्वीरों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि वे ई-सिगरेट से कश लगाते नजर आ रहे थे। अभी तक आईपीएल या राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी की ओर से कोई आधिकारिक बयान इस पर नहीं आया है। क्या हैं IPL के नियम और सजा? IPL मैचों के दौरान ड्रेसिंग में रूम नौ स्मोकिंग जोन के अंतर्गत आता है। बीसीसीआई ने तंबाकू से संबंधित सभी उत्पादों को प्रतिबंधित किया हुआ है। ऐसे में ई-सिगरेट यानी वैपिंग करना भी ड्रेसिंग रूम में बैन है। ऐसा करने पर बीसीसीआई खिलाड़ी या अन्य सपोर्ट स्टाफ को फटकार लगा सकती है। मैच फीस का फाइन ठोक सकती है या फिर खिलाड़ी को बैन भी कर सकती है। ये अपराध तय होने के बाद की बात है। अभी तक कोई आधिकारिक फैसला आईपीएल की ओर से नहीं आया है। क्या कानूनी कार्रवाई होगी? आपकी जानकारी के लिए बता दें, ई-सिगरेट 2019 से ही भारत में बैन हैं। The Prohibition of Electronic Cigarettes Act (PECA), 2019 एक्ट के अनुसार ई-सिगरेट बनाना, बेचना, रखना और यहां इसका उपयोग करना भी प्रतिबंधित है। इसके लिए भारतीय कानून में सजा का भी प्रावधान है। पहली बार इसका उल्लंघन करने पर एक साल तक की सजा या एक लाख तक का फाइन लग सकता है। दोनों सजा भी दी जा सकती हैं। बार-बार यह अपराध करने पर 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना मुकर्रर किया गया है। यहां तक कि ई-सिगरेट रखने पर भी सजा मिल सकती है। क्या पहले भी हुआ है IPL में ऐसा मामला? आईपीएल में पहली बार इस तरह की हरकत किसी खिलाड़ी ने की है। आईपीएल में स्मोकिंग को लेकर सख्त नियम हैं। ड्रेसिंग रूम और डगआउट में वैपिंग की अनुमति नहीं है। पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। इस पर बीसीसीआई ऐक्शन इस वजह से भी ले सकती है कि आगे ऐसी कोई हरकत खिलाड़ी न करे। हालांकि, इसी सीजन राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर को डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। उन पर फाइन लगाया गया था। क्यों उछल रहा है ये मामला? रियान पराग का वैपिंग करने का मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है, क्योंकि रियान पराग की व्यक्तिगत फॉर्म इस सीजन बहुत खराब रही है। 117 रन ही वे इस सीजन अब तक खेले गए 9 मैचों में बना पाए हैं। स्ट्राइक रेट भी उनका 125 से कम का है। क्लिप के वायरल होने पर अब आईपीएल और राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी पर भी दबाव होगा, क्योंकि फैंस के प्रति वही जवाबदेह हैं।

वेटरन एक्टर पेंटल का वीडियो वायरल, बोले– “मैं एक्टर नहीं, मेरे फॉलोअर्स नहीं हैं”

बॉलीवुड में कई एक्टर्स ऐसे रहे जिन्होंने अपने काम से लोगों के दिलों में जगह बनाई है. मशहूर एक्टर कंवरजीत पेंटल उर्फ पेंटल भी इंडस्ट्री में ऐसे एक्टर रहे, जिन्होंने कॉमेडी के जरिए 70 के दशक में काफी नाम कमाया. बड़ी-बड़ी फिल्मों में छोटे रोल्स करके उन्हें पहचान मिली. सालों बाद वो टीवी में भी आए और वहां भी छा गए. पेंटल इन दिनों अनुपमा शो में भी नजर आ रहे हैं. इसी बीच उनका एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वो खुद को एक नॉन-एक्टर कह रहे हैं. इसे एक्टर मनमीत सिंह ने शूट करके अपने इंस्टाग्राम पर डाला था. पेंटल का ये वीडियो देखकर कई लोगों को दुख पहुंचा है. क्यों खुद को नॉन-एक्टर मानते हैं पेंटल? वीडियो में पेंटल से मनमीत सिंह पूछते हैं कि क्या वो एक्टर हैं? तो पेंटल जवाब में कहते हैं- नहीं, मैं एक्टर नहीं हूं. जब मनमीत उनसे पूछते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा, जबकि वो तो कई फिल्मों में दिखाई दे चुके हैं? तब पेंटल ने कहा, 'इंस्टाग्राम पर मेरे फॉलोअर्स नहीं हैं. इसलिए मैं एक्टर नहीं हूं.' आगे मनमीत सिंह पेंटल से पूछते हैं कि जिसके इंस्टा पर फॉलोअर्स नहीं होते, तो क्या वो एक्टर नहीं है? तो वेटरन एक्टर का जवाब होता है, 'बिल्कुल नहीं.' उन्होंने आगे सभी से कहा कि एक्टिंग करने की कोई जरूरत नहीं है, आप बस अपने फॉलोअर्स बढ़ाएं. पेंटल और मनमीत सिंह का ये वीडियो दो साल पुराना है. कंवरजीत पेंटल के इस वीडियो को देख सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा साफ दिखा है. एक यूजर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को फटकार लगाई है, जो आजकल फॉलोअर्स के दम पर एक्टर्स को कास्ट करते हैं. वहीं, कई लोगों ने पेंटल की ईमानदारी को सराहा है. पेंटल ने बॉलीवुड की तमाम बड़ी फिल्में जैसे बावर्ची, सत्ते पे सत्ता, आज की ताजा खबर, रफू चक्कर, और सदमा में यादगार रोल्स किए हैं. इसके अलावा वो महाभारत सीरियल में सुदामा और शिखंडी के रोल में भी नजर आ चुके हैं. वो 50 सालों से बॉलीवुड इंडस्ट्री में हैं और करीब 350 से ज्यादा फिल्में और करीब 20 टीवी शोज में नजर आ चुके हैं.

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज टली, अब ग्लोबल लेवल पर तय होगी नई डेट

फिल्म केजीएफ के बाद कन्नड़ सुपरस्टार यश की अगली फिल्म टॉक्सिक का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है. इसके टीजर-ट्रेलर ने मार्केट में पहले से ही धूम मचाई हुई है. ये यश का एक सबसे बड़ा और ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसकी स्टोरी क्या है इसपर सस्पेंस बरकरार है. अब यश इस बेसब्री को थोड़ा और बढ़ाना चाहते हैं. यश ने अपने इंस्टाग्राम पर नोट जारी किया है, जिसमें उन्होंने ऐलान किया कि उनकी अपकमिंग फिल्म टॉक्सिक 4 जून 2026 को रिलीज नहीं होने वाली है. वो इसकी रिलीज डेट अब ग्लोबल मार्केट के हिसाब से तय करेंगे. चूंकि यश को सिनेमाकॉन 2026 में टॉक्सिक को लेकर जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला, इसलिए उन्होंने ये फैसला उठाया है. क्यों पोस्टपोन हुई यश की टॉक्सिक? यश ने लिखा, 'कुछ फिल्में हम बनाते हैं, और कुछ फिल्में हमें याद दिलाती हैं कि हम सिनेमा से क्यों प्यार करने लगे थे. टॉक्सिक ऐसी ही एक फिल्म है. सिनेमाकॉन में अपनी फिल्म पेश करना और दुनिया भर से जो जबरदस्त प्यार और रिस्पॉन्स मिले, उसने हमें फिर से यकीन दिला दिया कि ये फिल्म पूरी दुनिया में अपने पूरे दमखम के साथ पहुंचनी चाहिए.' 'टॉक्सिक की शूटिंग पूरी हो चुकी है. हम अभी पूरी दुनिया में अच्छे डिस्ट्रीब्यूटर्स और पार्टनर्स के साथ काम कर रहे हैं. इसी वजह से हमने फैसला किया है कि फिल्म की रिलीज डेट को थोड़ा बदलेंगे. जैसा पहले बताया गया था, अब हम 4 जून को फिल्म रिलीज नहीं कर रहे हैं. हम इसे बाद में, एक बेहतर और पूरी दुनिया के साथ मैच करने वाली तारीख पर रिलीज करेंगे. टॉक्सिक जल्द ही दुनिया भर के थिएटर्स में आने वाली है.' ग्लोबल ऑडियंस के लिए यश का प्लान यश का आगे मानना है कि टॉक्सिक एक ऐसी फिल्म है, जो इंडियन सिनेमा को ग्लोबल स्टेज पर एक आवाज दिलाएगी. इसलिए वो अपनी फिल्म को रिलीज करने में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते. एक्टर ने लिखा, 'आजकल इंडियन सिनेमा अपनी आवाज़ ढूंढ रहा है और दुनिया के सामने अच्छे से खड़ा हो रहा है. ऐसे समय में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपना स्तर ऊंचा रखें. एक एक्टर-प्रोड्यूसर के तौर पर, मैं ये मौका देख रहा हूं कि मैं भी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के लिए अपना योगदान दूं. इसलिए हम थोड़ा समय लेकर ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि फिल्म दुनिया के हर कोने तक अपनी पूरी ताकत और असर के साथ पहुंचे.' 'हर कदम पर, हर बदलाव में आपका प्यार और सपोर्ट मेरे साथ रहा है. मैं इसे बहुत मन से धन्यवाद के साथ रखता हूं. कुछ कहानियां धैर्य मांगती हैं. कुछ सफर इसमें और भी ज्यादा मांगते हैं. हम आपको वादा करते हैं कि हम आपको ऐसी फिल्म देंगे जिसे आप पूरा मजा लेकर देखेंगे और उत्सव की तरह मनाएंगे. एक फिल्म जो भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल बनेगी.' यश की फिल्म टॉक्सिक को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है. इसमें कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, नयनतारा, तारा सुतारिया और रुकमिणी वसंत जैसी एक्ट्रेसेज शामिल है. अब टॉक्सिक की नई रिलीज डेट क्या होगी, इसपर सभी की निगाहें टिकी रहने वाली हैं.

रांची: स्नातक शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई 2 मई को

 रांची  स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से संबंधित मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई दो मई को होगी। दो मई को दोपहर एक बजे पुराने हाई कोर्ट भवन, डोरंडा में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बैठेगी और सुनवाई की जाएगी। फिलहाल इस सुनवाई में केवल अधिवक्ता ही उपस्थित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। प्रार्थी के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। बता दें कि इस मामले में 257 याचिकाओं पर हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सेवानिवृत्ति जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले अदालत ने पूर्व में राज्य स्तर पर बने मेरिट लिस्ट की अनियमितता के मामले में इसकी जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने उक्त कमेटी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। प्रार्थियों का दावा था कि राज्य स्तर पर बनी मेरिट लिस्ट में काफी त्रुटियां है। जिन्हें निर्धारित कट आफ से कम नंबर मिले हैं उनका चयन कर लिया गया है, जबकि उनसे ज्यादा नंबर पाने वालों का चयन नहीं हुआ है।

जापानी लाइफस्टाइल के 5 हेल्दी राज: लंबी उम्र और फिट बॉडी का आसान फॉर्मूला

हेल्दी और फिट रहने की बात आती है तो जापानी लाइफस्टाइल को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. जापान के लोग न सिर्फ लंबी उम्र जीते हैं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी एक्टिव और एनर्जेटिक बने रहते हैं. उनकी फिटनेस का राज सिर्फ डाइट या एक्सरसाइज नहीं, बल्कि उनकी रोजाना की आदतों और लाइफस्टाइल में छुपा होता है. अगर आप भी बिना ज्यादा मेहनत के हेल्दी रहना चाहते हैं तो जापानी लोगों की कुछ आसान आदतें अपनाकर अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. धीरे-धीरे चबाकर खाएं जापानी लोग खाना बहुत आराम से और धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं. इससे खाना अच्छे से पचता है और कम खाने में ही पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह आदत ओवरईटिंग से बचाती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद करती है. खाने में वैरायटी बढ़ाएं जापान में लोग एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय अलग-अलग चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं. इससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं और खाने में वैरायटी भी बनी रहती है, जबकि ओवरईटिंग नहीं होती. खुद को एक्टिव रखें जापानी लोग अपनी डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करते हैं. वे अक्सर पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और फिटनेस बनी रहती है. भूख का 80% ही खाएं जापान में 'हारा हाची बू' नाम की परंपरा है, जिसमें लोग अपनी भूख का सिर्फ 80% ही खाते हैं. यह आदत ज्यादा खाने से रोकती है और वजन को बैलेंस रखने में मदद करती है. ग्रीन टी ग्रीन टी जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. रेगुलर ग्रीन टी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहते हैं तो इन आसान आदतों को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं. छोटी-छोटी ये आदतें आपके लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.

निगरानी विभाग का शिकंजा: सिकंदरा में कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार

जमुई जमुई जिले में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उनके साथ स्वच्छता प्रहरी सोनू चौधरी को भी टीम ने दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। शिकायतों के बाद बिछाया गया जाल जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग को लंबे समय से दोनों के खिलाफ अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए विभाग ने गुप्त रूप से जाल बिछाया। छापेमारी में रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी योजना के तहत मंगलवार करीब 3 बजे टीम ने छापेमारी की। इसी दौरान दोनों आरोपी कथित रूप से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए। लेन-देन की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और मौके से नकद राशि भी बरामद की। पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई सिकंदरा थानाध्यक्ष विकास कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं, निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।  

साइबर ठगी पर बड़ा वार: बिहार पुलिस ने चिन्हित किए हजारों म्यूल अकाउंट्स

पटना बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए फिर से बड़ा अभियान छेड़ दिया है। ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत राज्यभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 5036 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इस कार्रवाई के दायरे में 22 बैंक शाखाओं के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। साइबर अपराध इकाई द्वारा कई संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर लिया गया है, जिनका उपयोग ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा था। लालच देकर बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट की जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड लोगों को पैसों की लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। बिहार पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए अभियान के तहत अब तक 72 करोड़ रुपये से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच के दौरान बैंकिंग सिस्टम में संभावित मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स? बोलचाल की भाषा में म्यूल का मतलब 'खच्चर' होता है, जिसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। कुछ इसी तरह का काम म्यूल अकाउंट्स का भी होता है। म्यूल अकाउंट्स दरअसल ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्राड में किया जाता है। यह अकाउंट्स या तो फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होते हैं या इन्हें कोई और यूज कर रहा होता है। इस तरह के अकाउंट्स का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। चूकिं म्यूल अकाउंट में दी गई जानकारी सही नहीं होती, इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।  

एलॉन मस्क vs सैम ऑल्टमैन: OpenAI को लेकर कोर्ट में हाई-प्रोफाइल जंग शुरू

दुनिया की सबसे बड़ी टेक लड़ाइयों में से एक अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और AI के धुरंधर सैम ऑल्टमैन आमने-सामने हैं. मामला सिर्फ दो बड़े नामों का नहीं है, बल्कि AI की दुनिया का डायरेक्शन तय करने वाली इस लड़ाई पर पूरी दुनिया की नजर है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल में एलॉन मस्क खुद गवाही देने कोर्ट पहुंचे. उन्होंने OpenAI पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मस्क का कहना है कि जिस मकसद से OpenAI की शुरुआत हुई थी, उसे पूरी तरह बदल दिया गया है. यहां तक की चैरिटी लूटने तक का आरोप लगा दिया. एलॉन मस्क ने ये भी बताया है कि उन्होंने ही कंपनी का नाम रखा था. इसके पीछे की कहानी बताई है. कहा है कि Open नाम इसलिए रखा गया था, क्योंकि इसे ओपन सोर्स रखने का मकसद था, गूगल की तरह इसे क्लोज सोर्स नहीं रखना था. कहां से शुरू हुई कहानी यह कहानी 2015 से शुरू होती है, जब एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर OpenAI की शुरुआत की थी. उस समय इसे एक नॉन-प्रॉफिट संस्था के तौर पर बनाया गया था. मकसद AI को सुरक्षित और इंसानों के हित में डेवेलेप करना था. मस्क ने इस प्रोजेक्ट को फंड भी किया और इसे एक मानवता के लिए AI पहल बताया गया. लेकिन समय के साथ चीजें बदलने लगीं. अब आरोप क्या हैं एलॉन मस्क का आरोप है कि OpenAI ने अपने असली मकसद से धोखा किया. उनका कहना है कि कंपनी अब एक प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी बन गई है, जबकि शुरुआत में इसे गैर-लाभकारी संस्था के रूप में बनाया गया था. मस्क ने कोर्ट में कहा कि उन्हें यह सोचकर इन्वेस्ट करने को कहा गया था कि OpenAI मानवता के लिए काम करेगा, लेकिन बाद में इसे एक बिजनेस में बदल दिया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि यह चैरिटी को लूटने जैसा है और कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह हटकर काम किया. कितना बड़ा है मामला यह सिर्फ एक सामान्य केस नहीं है. एलॉन मस्क इस केस में अरबों डॉलर का मुआवजा मांग रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रकम 130 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो इससे OpenAI के काम करना का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है. यहां तक कि कंपनी को फिर से नॉन-प्रॉफिट मॉडल में वापस लाने की मांग भी की गई है. इस पूरे केस को और बड़ा बनाता है इसमें दांव पर लगी रकम. मस्क ने OpenAI के खिलाफ करीब 100 अरब डॉलर से ज्यादा के नुकसान का दावा किया है. उनका कहना है कि उन्हें जिस मकसद के लिए निवेश करने को कहा गया था, वह पूरी तरह बदल दिया गया और इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो यह टेक इंडस्ट्री के इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक बन सकता है. OpenAI का जवाब क्या है दूसरी तरफ OpenAI और सैम ऑल्टमैन ने इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि मस्क का असली मकसद प्रतिस्पर्धा है. OpenAI का तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में टिके रहने के लिए फंडिंग और प्रॉफिट मॉडल जरूरी था. खासकर गूगल और दूसरी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा. कंपनी यह भी कह रही है कि मस्क खुद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI चला रहे हैं, इसलिए यह मामला कंपटीशन से भी जुड़ा हुआ है. कोर्ट में क्या हुआ अब तक ट्रायल के दौरान एलॉन मस्क ने खुद गवाही दी और ओपनAI के शुरुआती दिनों की कहानी बताई. उन्होंने कहा कि OpenAI एक ओपन और सुरक्षित AI बनाने के लिए शुरू किया गया था, उन्होंने गूगल के साथ AI रेस और उस समय के अंदरूनी फैसलों का भी जिक्र किया. वहीं, कोर्ट में यह भी सामने आया कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पर्सनल भी बन चुका है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह लड़ाई अब दो नेताओं के बीच की टकराव जैसी दिख रही है. AI की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा यह केस सिर्फ मस्क और ऑल्टमैन तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है. अगर मस्क जीतते हैं, तो AI कंपनियों पर ज्यादा नियम और ट्रांसपेरेंसी का दबाव बढ़ सकता है. वहीं अगर OpenAI जीतता है, तो यह साबित होगा कि AI को आगे बढ़ाने के लिए प्रॉफिट मॉडल जरूरी है. दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन कभी साथ काम करते थे. लेकिन आज वही दो लोग कोर्ट में आमने-सामने खड़े हैं. यह लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फ्यूचर कैसा होगा. क्या यह मानवता के लिए काम करेगा या कंपनियों के मुनाफे के लिए? इस पूरे मामले से एक बात साफ है. AI जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके आसपास विवाद भी बढ़ रहे हैं. एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन की यह लड़ाई आने वाले समय में यह तय कर सकती है कि AI का रास्ता कौन तय करेगा, टेक्नोलॉजी या बिजनेस.

2026 में आएगा 13वां महीना: अधिकमास से बदलेंगी त्योहारों की तारीखें

 हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना 'अधिक मास' कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है. कब पड़ेगा अधिकमास 2026? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी अधिकमास क्यों आता है? अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का. हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है. अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है? अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है. इस दौरान ना करें ये काम अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए. क्या खास है पुरुषोत्तम मास? अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.