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मनु भाकर का बड़ा बयान: वैभव सूर्यवंशी बन सकते हैं भारत के अगले सुपरस्टार

नई दिल्ली भारत की दोहरी ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर नए सत्र से पहले आत्मविश्वास से लबरेज हैं और पेरिस खेलों में मिली सफलता के बाद एक बार फिर अपनी प्रतिस्पर्धी भावना को जगाने के लिए दृढ़ हैं। हालांकि सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनसे 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल किया गया, जिनको लेकर मनु ने बड़ा बयान दिया है। मनु भाकर ने वैभव सूर्यवंंशी को लेकर क्या कहा? क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी के सबसे होनहार युवा खिलाड़ियों में से एक के तौर पर सामने आने और उन्हें जल्द से जल्द राष्ट्रीय टीम में शामिल करने की बढ़ती मांगों के बीच मनु ने कहा कि अगर खिलाड़ी तैयार है और उसे सही मार्गदर्शन मिल रहा है तो इस प्रक्रिया को तेज करने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। मनु ने कहा, ‘अगर मार्गदर्शन सही हो और माहौल तरक्की में मददगार हो तो उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, प्रतिभा की कोई समय-सीमा नहीं होती। इसे छह साल की उम्र में भी पहचाना जा सकता है और 60 साल की उम्र में भी। सही मार्गदर्शन मिलने पर मुझे पूरा यकीन है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं।’ एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप का बेसब्री से इंतजार कर रहीं मनु भाकर इस साल 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफिकेशन चक्र शुरू होने के साथ ही मनु की नजरें एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप पर टिकी हैं। उन्हें विश्वास है कि ये लक्ष्य उनकी उस प्रतिस्पर्धी बढ़त को वापस दिलाएंगे जिसकी बदौलत उन्होंने 2024 ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीते थे। 24 वर्षीय पिस्टल निशानेबाज मनु ने कहा, ‘इस साल के आखिर में एशियाई खेल (जापान में) और विश्व चैंपियनशिप होने वाली है इसलिए हम निश्चित रूप से इन दो बड़ी प्रतियोगिताओं का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।’ झज्जर की इस निशानेबाज ने कहा, ‘मैंने और मेरे कोच ने मिलकर अपनी तैयारियों को लेकर कुछ समय पहले ही चर्चा की थी। हमने योजना बनाई कि आगे कौन-कौन सी प्रतियोगिताएं होने वाली हैं और उनके लिए हमारी तैयारी कैसी होनी चाहिए। मुझे लगता है कि हमने सब कुछ ठीक से तय कर लिया है और उम्मीद है कि हम बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’’ मनु अब अगले महीने आईएसएसएफ विश्व कप म्यूनिख में हिस्सा लेंगी।

काशी में महिला शक्ति का प्रदर्शन,नरेंद्र मोदी करेंगे जनसभा को संबोधित, मंच पर होंगी 44 महिलाएं

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर आएंगे। इस दौरान बरेका मैदान में आयोजित जनसभा में महिला शक्ति की झलक दिखेगी जहां मंच पर 44 महिलाएं मौजूद रहेंगी और करीब 25 हजार महिलाओं के जुटने की उम्मीद की गई है। काशी में ये महिलाओं का अब तक का सबसे बड़ा जुटान होगा। इस सम्मेलन की कमान महिलाएं संभालेंगी। यहां तक कि सुरक्षा व्यवस्था में भी महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगी। मंच पर आनंदीबेन पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य सहित 23 पार्षद और 19 ग्राम प्रधान समेत कुल 44 महिलाएं मौजूद रहेंगी। इनके अलावा वहां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष समेत चार पुरुष होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ जनसभा को संबोधित करेंगे। फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का भाषण होगा और अंत में प्रधानमंत्री काशी से देशभर की महिलाओं को संबोधित करेंगे। बंगाल चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले ये पीएम की बड़ी सभा होगी। साथ ही उप्र में विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव के पहले इस जुटान को अहम माना जा रहा है। जनसभा के बाद पार्टी स्तर की एक अहम बैठक भी हो सकती है, जिसमें संगठन और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति पर प्रधानमंत्री जरूरी फैसले कर सकते हैं। ये बंगाल के बाद उप्र में राजनीतिक शिफ्ट को लेकर भी अहम दौरा हो सकता है। प्रधानमंत्री के स्वागत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें जीआई टैग वाली गुलाबी मीनाकारी से बना शिव मंदिर भेंट करेंगे। अगले दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान उन्हें डमरू भी भेंट किया जाएगा। इसके अलावा देर शाम प्रधानमंत्री शहर की प्रमुख परियोजनाओं का भी निरीक्षण कर सकते हैं। वह रोपवे प्रोजेक्ट और नमो घाट का दौरा कर सकते हैं, जिसके लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। बरेका से काशी विश्वनाथ तक होगा रोड शो, पांच जगह पर भाजपा करेगी स्वागत भाजपा ने पीएम के स्वागत की खास तैयारियां की हैं। पीएम मोदी बरेका से काशी विश्वनाथ मंदिर तक सड़क मार्ग से जाएंगे। यहां पर 5 स्थानों गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया जाएगा। भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में प्रमुख चौराहों और यात्रा मार्ग को झंडे, बैनर व पोस्टरों से सजाया गया है। हजारों होर्डिंग्स और कटआउट भी लगाए गए हैं। काशी क्षेत्र के मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने बताया कि बरेका के प्रत्येक सेक्टर में कूलर, पेयजल व बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। बरेका में आयोजित जन आक्रोश महिला सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचेंगी। स्थानीय महिलाएं पैदल और दूर-दराज की महिलाएं वाहनों के काफिले के साथ जुलूस की शक्ल में कार्यक्रम स्थल तक आएंगी।

कोहली ने IPL में पूरे किए 9 हजार रन, रोहित शर्मा नंबर-2 से हैं दूर

नई दिल्ली दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में विराट कोहली ने इतिहास रच दिया है. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 11 रन बनाते ही किंग कोहली ने आईपीएल में 9 हजार रन पूरे कर लिए हैं. वह आईपीएल में 9000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं. विराट की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं. आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड पहले ही विराट कोहली के नाम है।  विराट ने 9000 रन पूरे करने के लिए काफी आराम से खेला. उन्होंने छठे ओवर की लास्ट गेंद पर इस जादुई आंकड़े को छुआ. 11 रन बनाने के लिए किंग कोहली ने 12 गेंदों का सामना किया और एक चौके के साथ बाकी के रन दौड़कर बनाए. हालांकि, 9 हजार रन पूरे होते ही किंग कोहली टूट पड़े और दो छक्के लगाए. उन्होंने सिक्स लगाकर आरसीबी को जीत दिलाई।  आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज  विराट कोहली- 9012 रन  रोहित शर्मा- 7183 रन शिखर धवन- 6769 रन डेविड वॉर्नर- 6565 रन  केएल राहुल- 5580 रन 81 गेंद पहले जीती बेंगलुरु  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 81 गेंद पहले जीत दर्ज की. गेंदें शेष रहने के लिहाज से आईपीएल की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है. आरसीबी ने दिल्ली कैपिटल्स को 9 विकेट से हराया. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 81 गेंद शेष रहते मैच जीत लिया. जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार की घातक गेंदबाजी के सामने दिल्ली कैपिटल्स की टीम 75 रनों पर ढेर हो गई थी. जवाब में आरसीबी ने 6.3 ओवर में मैच जीत लिया. विराट कोहली ने आईपीएल में 9 हजार रन भी पूरे कर लिए. विराट 15 गेंद में 23 और देवदत्त पडिक्कल 13 गेंद में 34 रनों पर नाबाद लौटे. वहीं जैकेब बेथेल ने 11 गेंद में 20 रन बनाए. इससे पहले गेंदबाजी में हेजलवुड ने चार और भुवी ने तीन विकेट चटकाए।  दिल्ली ने बनाया पावरप्ले का सबसे कम स्कोर  पहले बैटिंग करने वाली दिल्ली ने पारवप्ले में सबसे कम रनों का टोटल बनाने का रिकॉर्ड कायम किया. टीम शुरुआती 6 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 13 रन ही बोर्ड पर लगा सकी थी. इससे पहले पावरप्ले में सबसे छोटा टोटल 14 रनों का रहा था।  1. 6 ओवर में सिर्फ 13 रन बना सकी दिल्ली दिल्ली ने पावरप्ले में 6 विकेट खोकर मात्र 13 रन बनाए। यह IPL इतिहास में पावरप्ले का सबसे कम स्कोर है। दूसरे नंबर पर राजस्थान रॉयल्स हैं, जिसने 2009 में RCB के खिलाफ 2 विकेट खोकर 14 रन बनाए थे। 2. दिल्ली ने सिर्फ 7 रन पर 5 विकेट गंवा दिए इस मैच में दिल्ली ने सिर्फ 7 रन बनाने में 5 विकेट गंवा दिए थे। इसके बावजूद यह IPL में सबसे कम रन में 5 विकेट गंवाने का रिकॉर्ड नहीं है। कोच्चि टस्तकर्स केरल की टीम 2011 में डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ सिर्फ 6 रन पर 5 विकेट गंवा बैठी थी। अब कोच्चि टस्कर्स और डेक्कन चार्जर्स दोनों टीमों लीग से बाहर हो चुकी हैं। 3. भुवनेश्वर ने 29वीं बार पहले ओवर में विकेट लिया भुवनेश्वर कुमार ने DC के खिलाफ पहले ओवर में ही डेब्यूटेंट साहिल पारख को क्लीन बोल्ड कर दिया। ये 29वीं बार है, जब उन्होंने IPL में पहले ओवर में ही विकेट लिया हो। वे इस मामले में दूसरे नंबर पर हैं। टॉप पर ट्रेट बोल्ट हैं, जिन्होंने 32 बार यह कारनामा किया है। 4. भुवनेश्वर ने IPL 2023 के बाद पावरप्ले में सबसे ज्यादा विकेट लिए दिल्ली के खिलाफ भुवनेश्वर ने पावरप्ले में 3 विकेट लिए। उन्होंने IPL 2023 के बाद पावरप्ले में अब तक 32 विकेट लिए हैं। वे इस मामले में ट्रेट बोल्ट के साथ नंबर एक पर हैं। बोल्ट ने भी 32 विकेट लिए हैं। मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी ने पावरप्ले में 28-28 विकेट लिए हैं। 5. भुवनेश्वर ने IPL में 25 बार 3+ विकेट लिए भुवनेश्वर ने दिल्ली के खिलाफ 3 ओवर में 5 रन देकर 3 विकेट लिए। IPL में उन्होंने 20वीं बार 3 या उससे ज्यादा विकेट लिए। इस लिस्ट में जसप्रीत बुमराह नंबर एक पर हैं, जिन्होंने 25 बार यह स्पेल डाला है। लसिथ मलिंगा ने 19 बार 3+ विकेट लिए हैं और तीसरे नंबर पर हैं। 6. दिल्ली तीसरी बार IPL में 75 या इससे कम रन पर ऑलआउट दिल्ली कैपिटल्स 16.3 ओवर में 75 रन पर ऑलआउट हो गई। यह IPL में तीसरी बार है, जब दिल्ली की टीम 75 या उससे कम स्कोर पर ऑलआउट हुई। RCB इस मामले में नंबर-1 पर हैं, जो 4 बार 75 या इससे नीचे ऑल आउट हुई है।  

टॉप पर कब्जा मजबूत करने उतरेगी पंजाब किंग्स, वापसी की तलाश में राजस्थान रॉयल्स

चंडीगढ़  पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आज आईपीएल 2026 का 40वां मुकाबला खेला जाना है। मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में मैच की शुरुआत शाम साढ़े 7 बजे से होगी। इस मुकाबले को जीतकर पीबीकेएस प्वाइंट्स टेबल में शीर्ष स्थान पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहेगी। पंजाब किंग्स इस सीजन की सबसे बेहतरीन टीम है। उन्होंने लक्ष्य का पीछा करने की अपनी काबिलियत और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर अपने शुरुआती 7 मैचों में से 6 में जीत हासिल की है, जबकि एक मैच बारिश के चलते बेनतीजा रहा था। इसके विपरीत राजस्थान रॉयल्स को अपनी लय बनाए रखने में काफी संघर्ष करना पड़ा है, लगातार खराब प्रदर्शन के कारण वे प्वाइंट्स टेबल में नीचे खिसक गए हैं। शुरुआथ 4 मैचों में 4 जीत हासिल करने के बाद टीम को अगले 4 मैचों में सिर्फ एक जीत मिली है। वैभव सूर्यवंशी के 36 गेंदों में शतक के बाद भी टीम पिछले मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद से हार गई। राजस्थान रॉयल्स के अभियान को मिडल ओवर्स में अपनी लय बनाए रखने में नाकाम रहने के कारण काफी नुकसान हुआ है। वे अक्सर अपनी मजबूत शुरुआत को मैच जिताने वाले स्कोर में बदलने में असफल रहे हैं। पंजाब किंग्स की बैटिंग का जवाब नहीं पंजाब किंग्स के बल्लेबाजों ने सामूहिक रूप से शानदार प्रदर्शन किया है, खासकर बैटिंग ऑर्डर के ऊपरी क्रम में, जहां उनके ओपनर्स ने पावरप्ले के दौरान बार-बार आक्रामक शुरुआत करते हुए विपक्षी टीम के गेंदबाजों पर शुरू से ही दबाव बना दिया है। दिल्ली के खिलाफ पिछले मुकाबले में टीम ने 265 रनों का लक्ष्य हासिल करके मैच जीता था। पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल इतिहास में अब तक कुल 30 मैच खेले गए हैं, जिसमें आरआर का पलड़ा भारी रहा है। रॉयल्स ने अब तक 17 मुकाबले अपने नाम किए हैं, जबकि किंग्स 13 मैच जीत चुकी है। इस प्रकार हैं दोनों टीमें पंजाब किंग्स: श्रेयस अय्यर (कप्तान), प्रियांश आर्य, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), नेहल वढेरा, शशांक सिंह, मार्कस स्टोइनिस, कूपर कोनोली, विजयकुमार वैशाक, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल, मार्को जानसेन, अजमतुल्लाह उमरजई, हरप्रीत बराड़, सूर्यांश शेडगे, विष्णु विनोद, जेवियर बार्टलेट, यश ठाकुर, मिशेल ओवेन, हरनूर सिंह, मुशीर खान, पायला अविनाश, लॉकी फर्ग्यूसन, बेन ड्वारशुइस, प्रवीण दुबे और विशाल निषाद। राजस्थान रॉयल्स: यशस्वी जयसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), शिम्रोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, जोफ्रा आर्चर, तुषार देशपांडे, नंद्रे बर्गर, ब्रिजेश शर्मा, रवि बिश्नोई, लुआन-ड्रे प्रिटोरियस, रवि सिंह, संदीप शर्मा, शुभम दुबे, एडम मिल्ने, दासुन शनाका, कुलदीप सेन, सुशांत मिश्रा, युद्धवीर सिंह चरक, क्वेना मफाका, विग्नेश पुथुर, यश राज पुंजा, अमन राव पेराला।  

आरसीबी की धमाकेदार जीत, दिल्ली को 9 विकेट से हराकर भुवी-हेजलवुड ने बरपाया कहर

नई दिल्ली नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में धूल भरी आंधी आने से पहले ही, जोश हेज़लवुड और भुवनेश्वर कुमार ने नई गेंद से कहर बरपाते हुए दिल्ली कैपिटल्स को धूल चटा दी। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ने चार विकेट लिए, वहीं भुवनेश्वर कुमार, जो उम्र के साथ और भी निखरते जा रहे हैं, ने साबित कर दिया कि वे आज भी क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ नई गेंद गेंदबाजों में से एक क्यों हैं। उनके तीन विकेटों के शानदार प्रदर्शन ने दिल्ली कैपिटल्स के बल्लेबाजी क्रम को संभलने से पहले ही ध्वस्त कर दिया। विज्ञापन दो दिन पहले ही 264 रनों का विशाल स्कोर बनाने के बावजूद (और फिर भी हार जाने के बावजूद), दिल्ली कैपिटल्स मात्र 75 रनों पर सिमट गई, जो शनिवार को अकेले केएल राहुल द्वारा बनाए गए स्कोर का आधा था। यह आईपीएल इतिहास का 12वां सबसे कम स्कोर और दिल्ली फ्रेंचाइजी के लिए तीसरा सबसे कम स्कोर था। आरसीबी को 77 रनों के लक्ष्य का पीछा करने के लिए महज 6.3 ओवरों की जरूरत थी। विराट कोहली ने दो गगनचुंबी छक्कों से दिल्ली के प्रशंसकों का भरपूर मनोरंजन किया, जिनमें से एक छक्के ने आरसीबी को अब तक की सबसे शानदार जीत में से एक दिलाते हुए जीत की दहलीज तक पहुंचाया। जैकब बेथेल ने 10 गेंदों में 20 रन बनाकर तूफानी पारी की शुरुआत की, जबकि दिल्ली के नए गेंदबाज काइल जैमीसन और दुशमंथा चमीरा आरसीबी के गेंदबाजों जैसी आक्रामक बल्लेबाजी करने में नाकाम रहे। मध्यावधि विराम के दौरान पिच थोड़ी नरम पड़ गई थी, ऐसे में लक्ष्य का पीछा करना एक औपचारिकता मात्र था; पिच के और अधिक करतब दिखाने से पहले ही मैच खत्म हो गया। कोटला में सत्ता संघर्ष के कारण दंगा हुआ 13 रन पर 6 विकेट गिरने के साथ, जो टूर्नामेंट के इतिहास में पावरप्ले का सबसे कम स्कोर था, कैपिटल्स पर आरसीबी के आईपीएल के सबसे कम स्कोर के कुख्यात रिकॉर्ड को तोड़ने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था। इम्पैक्ट प्लेयर अभिषेक पोरेल की जुझारू 30 रनों की पारी (33 गेंदों में) की बदौलत ही यह आपदा बाल-बाल टल पाई। फिर भी, 16.3 ओवर में 75 रन पर ऑल आउट होना निराशाजनक था। पूरी पारी के दौरान, जब दिल्ली के बल्लेबाज लगातार पवेलियन लौटते-पहुंचते रहे, तो खचाखच भरे कोटला स्टेडियम में मौजूद दर्शक अपने स्थानीय हीरो 'कोहली, कोहली' का नाम लेकर सुकून पा रहे थे। यह मैदान पर चल रहे खेल के विनाशकारी माहौल से खुद को अलग रखने का एक तरीका था। 48 घंटों में पिच में इतना बड़ा बदलाव कैसे आ सकता है? यह कोई रहस्य नहीं था। पिच में थोड़ी सी गर्माहट तो थी ही, लेकिन मुख्य कारण पिच का सूखा होना था, जिससे अनुशासित बल्लेबाजों को काफी मदद मिल रही थी। हेज़लवुड और भुवनेश्वर की शानदार बल्लेबाजी दिल्ली की टीम के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई, जो 264 रनों की अपनी बड़ी जीत के बाद कुछ सुस्ती से जूझ रही थी। वे एक और रनों की बौछार की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन उन्हें एक तूफान का सामना करना पड़ा। हालांकि गेंदबाजी शानदार थी, लेकिन कैपिटल्स का शॉट चयन खराब था; कई बल्लेबाज शनिवार को जो हुआ था, उसकी भरपाई के लिए "जोरदार बल्लेबाजी" करने की मानसिकता में फंसे हुए प्रतीत हुए – पंजाब किंग्स ने मात्र 18.5 ओवरों में 265 रनों का पीछा किया था। पिच में बदलाव कैसे हुआ? सलामी जोड़ी द्वारा हासिल की गई जबरदस्त स्विंग के सामने दिल्ली के बल्लेबाज पूरी तरह से हैरान रह गए। यहां तक ​​कि भुवनेश्वर, जिन्होंने अब 14 विकेट लेकर पर्पल कैप हासिल कर ली है, ने भी परिस्थितियों को देखकर आश्चर्यचकित होने की बात स्वीकार की। "मैं वाकई हैरान था, खासकर पिछले मैच में विकेट की स्थिति को देखते हुए, जिसमें दोनों पारियों में 250 से अधिक रन बने थे। गेंद का इस तरह स्विंग होना अप्रत्याशित था, और हम जानते थे कि हमें स्टंप्स पर आक्रमण करके और विकेट लेकर इसका पूरा फायदा उठाना होगा," भुवनेश्वर ने मध्यांतर के दौरान कहा। भुवी-हेज़लवुड मास्टरक्लास शाम की पहली ही गेंद ने मैच का मिजाज तय कर दिया। अपने आईपीएल करियर की पहली गेंद का सामना करते हुए, महाराष्ट्र के 18 वर्षीय युवा खिलाड़ी साहिल पारिख, जो पथुम निस्संका की जगह बल्लेबाजी करने आए थे, एक सनसनीखेज इनस्विंगिंग यॉर्कर पर बोल्ड हो गए। यह ऐसी गेंद थी जो किसी अनुभवी गेंदबाज को भी आउट कर सकती थी, एक नवोदित खिलाड़ी के लिए तो यह और भी मुश्किल था, खासकर तब जब वह किसी माहिर गेंदबाज का सामना कर रहा हो। विज्ञापन उस गेंद की आक्रामकता ने दिल्ली के ड्रेसिंग रूम में कंपकंपी पैदा कर दी। अगले ओवर में हेज़लवुड को सफलता की उम्मीद जगी। उन्होंने शानदार फॉर्म में चल रहे केएल राहुल को आउट करने के लिए एक तेज़ बाउंसर फेंकी। अतिरिक्त उछाल के कारण राहुल घबरा गए और पुल शॉट खेलने की कोशिश में बल्ले का ऊपरी किनारा लग गया। सीज़न की शुरुआत में शानदार प्रदर्शन के बाद से फॉर्म की तलाश में जूझ रहे समीर रिज़वी अपनी पहली ही गेंद पर लपकने की कोशिश में लपक बैठे। हेज़लवुड ने अपनी लगातार तेज़ फुल लेंथ क्रॉस सीमर गेंद से राहुल का किनारा लिया और गेंद विकेटकीपर के दस्तानों में जा गिरी। हेज़लवुड हैट्रिक के करीब थे, लेकिन ट्रिस्टन स्टब्स ने शुरुआती झटके को झेलते हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज को रिकॉर्ड बनाने से रोक दिया। हालांकि, स्टब्स की राहत ज्यादा देर तक नहीं टिकी। भुवनेश्वर ने गेंद की स्विंग का फायदा उठाते हुए दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज को एक शानदार आउटस्विंगर से परेशान किया। स्टब्स ने अपने हाथों को शरीर से काफी दूर रखकर खेला और इसका खामियाजा भुगतना पड़ा, क्योंकि गेंद बल्ले का किनारा लेकर सीधे विकेटकीपर के हाथों में चली गई। कप्तान अक्षर पटेल छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और स्थानीय समर्थक उनसे उम्मीद लगाए बैठे थे कि वे उनकी पारी को बचा लेंगे। भुवनेश्वर की गेंदबाज़ी के सामने अक्षर पटेल पूरी तरह से बेबस नज़र आ रहे थे, जो गेंद को दोनों तरफ उछाल रहे थे। एक गेंद को जल्दबाजी में छोड़ने के बाद, अक्षर पटेल एक इनस्विंगर गेंद पर आउट हो गए जो विकेट को छूकर निकल गई, हालांकि चमत्कारिक रूप से … Read more

राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस का दिग्गज नेता को मौका देने पर बढ़ी चर्चा

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। आंकड़ों के हिसाब से यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जा रही थी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि अब इस सीट पर किसी बड़े और भरोसेमंद चेहरे को उतारने की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में तेजी से उभरा है। पार्टी हाईकमान को यह समझ आ रहा है कि अगर कमलनाथ मैदान में उतरते हैं, तो किसी भी विधायक के लिए क्रॉस वोटिंग करना आसान नहीं होगा। उनकी पकड़ संगठन और विधायकों दोनों पर मजबूत मानी जाती है, जिससे तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में सुरक्षित जा सकती है। हालांकि, राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को बताया जा रहा है। वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्वीकार्यता है। वहीं, दिग्विजय सिंह पीसी शर्मा के नाम पर जोर दे रहे हैं, जबकि सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल और बाला बच्चन जैसे नाम भी चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए 58 वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास तकनीकी रूप से 66 विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की वोटिंग को लेकर संशय और कुछ संभावित समीकरणों ने यह संख्या प्रभावी रूप से कम कर दी है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। हरियाणा में हुई क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं भी कांग्रेस नेतृत्व के लिए चेतावनी बनी हुई हैं। इसी वजह से दिल्ली दरबार इस बार पूरी सावधानी से फैसला लेना चाहता है। यदि भाजपा आदिवासी कार्ड खेलती है, तो बाला बच्चन जैसे नाम भी अचानक मजबूत हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकती है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के अलग-अलग समीकरणों के बीच कमलनाथ ही एक ऐसे नेता माने जा रहे हैं, जिन पर सभी पक्ष सहमति बना सकते हैं। अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है। फैसला चाहे मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में जाए या कमलनाथ के नाम पर मुहर लगे, इतना तय है कि राज्यसभा की यह तीसरी सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

क्रिसिल की रिपोर्ट: भारत में कमर्शियल व्हीकल मार्केट 2027 में 12.4 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री के लिए तैयार

मुंबई  क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री फिस्कल साल 2027 में रिकॉर्ड 12.4 लाख यूनिट्स की बिक्री तक पहुंचने वाली है, जो वित्त वर्ष 2019 के पिछले पीक को पार कर जाएगी, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में 13 परसेंट की मज़बूत वापसी के बाद ग्रोथ 5-6 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।  वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री की घरेलू रिकवरी कई वजहों से हुई, जिसमें सितंबर 2025 में GST रेट को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी शामिल है, जिससे परचेज़ इकोनॉमिक्स में सुधार हुआ और डेफर्ड डिमांड अनलॉक हुई. इंटरेस्ट रेट में कमी, बेहतर फ्रेट यूटिलाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग एक्टिविटी में बढ़ोतरी ने भी वॉल्यूम को सपोर्ट किया।  वित्त वर्ष 2027 में घरेलू डिमांड सपोर्टिव रहने की उम्मीद है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एक्टिविटी, लगातार रिप्लेसमेंट डिमांड और बेहतर अफोर्डेबिलिटी का सपोर्ट मिलेगा. हालांकि, क्रिसिल ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की वजह से एक्सपोर्ट में जल्द ही रुकावट आ सकती है, जिससे डिमांड खत्म होने के बजाय डिस्पैच में देरी होने की संभावना है।  मार्केट ज़्यादातर घरेलू है, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत वॉल्यूम भारत से आता है और बाकी एक्सपोर्ट से आता है. यह इंडस्ट्री मोटे तौर पर हल्के कमर्शियल व्हीकल (LCVs) में बंटी हुई है, जो वॉल्यूम का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं, और मीडियम और भारी कमर्शियल व्हीकल (MHCVs) हैं, जिनमें बसें हर एक में एक सब-सेगमेंट के तौर पर हैं।  ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग की वजह से LCV की ग्रोथ 5-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस सेगमेंट में, 2 टन से ज़्यादा ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली गाड़ियां अब LCV सेल्स का 73 प्रतिशथ हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2020 में 60 प्रतिशत था, क्योंकि फ्लीट ऑपरेटर ज़्यादा यूनिट जोड़ने के बजाय पेलोड एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे रहे हैं।  MHCV वॉल्यूम में 4-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिसे माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से मदद मिलेगी. बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से ज़्यादा टन वाले व्हीकल की तरफ़ झुकाव, वॉल्यूम ग्रोथ को कम कर सकता है, भले ही अंदरूनी डिमांड स्थिर रहे।  दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – लुधियाना से सोननगर तक पूर्वी DFC और दादरी से JNPT तक पश्चिमी DFC, जो अप्रैल 2026 में पूरी तरह चालू हो जाएंगे – के पूरा होने से लंबी दूरी के माल के लिए रेल से कॉम्पिटिशन भी शुरू होगा, जिससे रिप्लेसमेंट डिमांड पर असर पड़ सकता है।  बस सेगमेंट की बात करें तो इसमें वित्त वर्ष 2027 में 3-4 प्रतिशत की ग्रोथ होने की उम्मीद है, जिसे रिप्लेसमेंट डिमांड और सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक बस खरीदने से सपोर्ट मिलेगा. हालांकि यह अभी भी एक छोटा सब-सेगमेंट है, लेकिन यहां इलेक्ट्रिफिकेशन दूसरी CV कैटेगरी के मुकाबले तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, हालांकि इसकी पहुंच अभी भी कम सिंगल डिजिट में है।  एक्सपोर्ट की बात करें तो, क्रिसिल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ तेज़ी से घटकर 2-4 प्रतिशत हो जाएगी, जो वित्त वर्ष 2026 में 17 प्रतिशत थी. वेस्ट एशिया, जो एक्सपोर्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, शिपिंग में रुकावटों की वजह से मुख्य रुकावट है. फिर भी, टॉप MHCV बनाने वाले देशों में से एक के तौर पर भारत की बढ़ती स्थिति एक मज़बूत बेस देती है, और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को फ़ाइनल करने से मीडियम टर्म में एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।  सोच-समझकर कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ, वॉल्यूम ग्रोथ से थोड़ी ज़्यादा रहने की संभावना है. लेकिन जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण स्टील, एल्युमीनियम और फ्यूल की बढ़ती इनपुट कॉस्ट से ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2026 के 12 प्रतिशत से 40-50 बेसिस पॉइंट कम होकर 11.5-11.6 प्रतिशत हो सकता है. अगर एग्रेसिव प्राइस पास-थ्रू से डिमांड पर असर पड़ता है, तो कॉस्ट में ज़्यादा बढ़ोतरी से मार्जिन और खराब हो सकता है।  इंडस्ट्री को बढ़ते कम्प्लायंस कॉस्ट का भी सामना करना पड़ रहा है. नए मॉडल्स के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम मैंडेट अप्रैल 2026 से और सभी प्रोडक्शन के लिए अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, इसके बाद अप्रैल 2027 से कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-III नॉर्म्स और उसके तुरंत बाद प्रपोज़्ड भारत स्टेज VII लागू होंगे।  R&D, टूलिंग और सर्टिफिकेशन में इन्वेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 तक गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे जल्द ही रिप्लेसमेंट डिमांड बढ़ सकती है. वॉल्यूम और मार्जिन प्रेशर में कमी के बावजूद, क्रिसिल ने कहा कि इंडस्ट्री का क्रेडिट प्रोफ़ाइल स्टेबल बना हुआ है, जिसे मज़बूत कैश फ़्लो और हेल्दी बैलेंस शीट का सपोर्ट मिला है।  इस फ़ाइनेंशियल ईयर में सालाना कैपिटल खर्च 5,500 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के हिसाब से मॉडर्नाइज़ेशन और रेगुलेटरी कम्प्लायंस पर फ़ोकस करेगा. कैपेक्स-टू-EBITDA रेश्यो 0.3x से नीचे रहने की उम्मीद है. क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई, ब्याज दरें और लॉजिस्टिक्स लागत पर असर डालने वाले जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर नज़र रखने लायक मुख्य बातें बनी हुई हैं, क्योंकि इनसे डिमांड और मार्जिन के नज़रिए में बड़ा बदलाव आ सकता है। 

निगम की नई पहल: नैनो एरेटर तकनीक से तालाबों में पानी की गुणवत्ता में सुधार, 10 दिन में असर दिखा

उज्जैन  शहर के तालाबों की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए नगर निगम ने नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। इसकी शुरुआत क्षीरसागर तालाब से की गई है, जहां 10 दिनों से यह तकनीक काम कर रही है। अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और शुरुआती निरीक्षण में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने हाल ही में स्थल निरीक्षण किया, जिसमें पानी पहले की तुलना में साफ नजर आया। शहर में शिप्रा नदी के साथ-साथ सप्त सागर का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व है, लेकिन जल प्रवाह नहीं होने से तालाबों का पानी अक्सर दूषित हो जाता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु होती है। गर्मी में बदबू के कारण आसपास रहना भी मुश्किल हो जाता है। क्षीरसागर में बड़ी संख्या में मछलियां हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए निगम ने यह तकनीक शुरू की है। सफल होने पर इसे शहर के अन्य तालाबों में भी लागू किया जा सकेगा। यह कार्य पर्यावरणविद एसपीएस रंधावा और उनकी टीम की देखरेख में किया जा रहा है। कैसे काम करती है तकनीक नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक के तहत तालाब में ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जो पानी के भीतर बेहद छोटे-छोटे हवा के बुलबुले छोड़ते हैं। ये नैनो बुलबुले पानी में घुलकर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे गंदगी फैलाने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और पानी धीरे-धीरे साफ व पारदर्शी बनने लगता है। फाउंटेन से अलग क्यों है तालाबों में पहले से लगे फव्वारे मुख्य रूप से सतह पर ही असर करते हैं और सजावटी होते हैं। नैनो एरेटर तकनीक पानी की गहराई तक पहुंचकर वास्तविक सफाई करती है और लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखती है। इसके मुख्य फायदे पानी की गुणवत्ता में सुधार बदबू और गंदगी में कमी मछलियों और जलीय जीवों को बेहतर वातावरण मिलने से उनकी मौत नहीं होगी। किनारे पर जमने वाली काई (ग्रीन लेयर) पर नियंत्रण।

मेहनत रंग लाई पर मुनाफा गायब: फरीदाबाद में गेंदा किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम

फरीदाबाद  हरियाणा में फरीदाबाद के खेतों में इन दिनों गेंदे के पीले-नारंगी फूल दूर-दूर तक चमक रहे हैं. खेतों को देखकर कोई भी यही कहेगा कि इस बार किसान की मेहनत रंग लाई है. लेकिन इन खूबसूरत फूलों के पीछे एक किसान की चिंता छिपी है. जिस फसल से हर साल घर चलता था बच्चों की पढ़ाई होती थी और परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं. वही फसल इस बार किसानों के लिए परेशानी बन गई है. खेतों में फूलों की भरमार है लेकिन मंडियों में इनके दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. किसान दिन-रात मेहनत कर रहा है लेकिन बाजार में उसकी मेहनत की कीमत नहीं मिल रही. फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में गेंदे की खेती करने वाले किसान लक्ष्मण सिंह सैनी ने  अपनी परेशानी साझा की. लक्ष्मण ने बताया मैं पीछे से बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं और पिछले 30 सालों से गेंदे की खेती कर रह रहा हूं. इस बार मैंने एक एकड़ जमीन में कोलकाता की खास वैरायटी का गेंदा लगाया. बेहतर उत्पादन और अच्छे मुनाफे की उम्मीद में मैंने कोलकाता से पौधे मंगवाए. एक पौधा 70 पैसे का पड़ा और एक एकड़ में करीब 25 हजार पौधे लगाए गए. डबल लाइन में रोपाई की गई ताकि उत्पादन ज्यादा हो सके. लक्ष्मण ने बताया गेंदे की खेती आसान नहीं है. पौधे लगाने से पहले खेत की छह बार जुताई करनी पड़ी. इसके बाद डोलियां तैयार की गईं. पौध रोपाई के लिए 7 से 8 मजदूर लगाए गए जिनकी मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन रही. दिसंबर में पौधे लगाए गए थे और अब खेत फूलों से भर चुके हैं. फसल को रोज पानी देना पड़ता है. हर चौथे दिन सिंचाई करनी होती है. इतनी मेहनत और खर्च के बाद मुझे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी. लेकिन जब फूल मंडी पहुंचे तो दाम सुनकर मेरे होश उड़ गए. फरीदाबाद से लेकर दिल्ली तक गेंदे का भाव केवल 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. लक्ष्मण ने बताया इतने कम दाम में तो ढुलाई का खर्च भी नहीं निकलता. बाजार में यही फूलों की मालाएं 20 से 30 रुपये में बिकती हैं लेकिन खेत में पसीना बहाने वाले किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता. इस बार गेंदे की बुवाई ज्यादा होने के कारण बाजार में आवक बढ़ गई है. मांग तो सालभर रहती है लेकिन आपूर्ति अधिक होने से दाम गिर गए हैं. कई बार यही गेंदा 200 रुपये किलो तक बिक चुका है लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं. उत्तर प्रदेश में तो कई किसानों ने फूल खेतों में ही छोड़ दिए हैं क्योंकि मंडी तक ले जाने का किराया भी नहीं निकल रहा. लक्ष्मण ने बताया मेरे मामा ने भी उत्तर प्रदेश में गेंदा लगाया था. वहां हालात और भी खराब हैं. लेकिन मैंने अपनी फसल खेत में नहीं छोड़ी. मैं रोज फूल तोड़कर मंडी ले जा रहा हूं. कुछ न कुछ तो मिल ही जाएगा. आखिर परिवार इसी खेती पर निर्भर है. सात लोगों का परिवार है और सभी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है. लक्ष्मण ने बताया इस मुश्किल समय में एक और हादसे ने मेरी परेशानी बढ़ा दी. मैं सुबह चार बजे ओल्ड फरीदाबाद मंडी फूल लेकर जा रहा था तभी रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया. पूरे शरीर में चोट आई. इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी. आज भी मैं अपनी फसल मंडी पहुंचा रहा हूं. लक्ष्मण ने बताया जब उत्पादन ज्यादा होता है तो मैं दिल्ली की गाजीपुर मंडी भी लेकर जाता हूं. खेती ही मेरा जीवन है और इसी से मेरा परिवार चलता है. 30 साल के खेती के अनुभव में मैने ऐसा नुकसान पहली बार देखा है. खेतों में फूल जरूर खिले हैं लेकिन किसान के चेहरे पर मुस्कान गायब है. यही आज के किसान की सबसे बड़ी विडंबना है.

ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए मुजफ्फरपुर के 76 गांवों में जमीन खरीद-बिक्री बंद

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. राज्य सरकार ने टाउनशिप के मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर 30 जून 2027 तक रोक लगा दी है. इस फैसले का असर जिले के 76 राजस्व गांवों पर पड़ेगा, जहां अब निर्धारित अवधि तक जमीन का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा. पहले तैयार होगा मास्टर प्लान यह कदम बिहार सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य के 11 प्रमुख शहरों में आधुनिक सुविधाओं से लैस नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किए जाने हैं. सरकार का मानना है कि बिना योजना के जमीन की खरीद-बिक्री से भविष्य में विकास कार्यों में बाधा आ सकती है, इसलिए पहले मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. ये गांव होंगे प्रभावित मुजफ्फरपुर में जिन इलाकों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें मुख्य रूप से कांटी, कुढ़नी, मरवन और मुसहरी प्रखंड के कई गांव शामिल हैं. कांटी क्षेत्र के रोशनपुर, बंगरा, मधोपुर मछिया, पानापुर करियात, रसूलपुर करियात, काबिलपुर और शंभूपुर भोज जैसे गांव इस सूची में हैं. वहीं कुढ़नी प्रखंड के मोथौर, गौरेया, खड़ौना डीह, तारसन किशुनी, मधौल, लदौरा, सुमेरा और डुबाही सहित कई अन्य गांव भी प्रभावित होंगे. मरवन प्रखंड के बड़ी संख्या में गांव जैसे भटौना, मंसूरपुर, खलीलपुर, रायपुरा, गोपालपुर, मधुबन और कोदरिया निजामुद्दीन को भी इस रोक के दायरे में रखा गया है. इसके अलावा मुसहरी प्रखंड के परमानंदपुर, धरमपुर, चौसीवान, पताही और खबड़ा क्षेत्र के कुछ गांव भी शामिल हैं. कोई खुश, कोई दुखी इस निर्णय के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोगों और स्थानीय निवासियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. जहां कुछ लोग इसे भविष्य के सुनियोजित विकास के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं कई जमीन मालिक और बिचौलिये इससे परेशान हैं, क्योंकि इससे फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह ठप हो गई है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनने से मुजफ्फरपुर का शहरी विस्तार बेहतर तरीके से होगा, ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. मास्टर प्लान तैयार होने के बाद ही आगे की जमीन अधिग्रहण और विकास प्रक्रिया शुरू की जाएगी.