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‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ फिनाले में भावुक हुए अक्षय कुमार, ट्रिब्यूट वीडियो देख छलके आंसू

अक्षय कुमार के रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' को शुरुआत से ही दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. अब 27 अप्रैल को शो का ग्रैंड फिनाले होने वाला है. फिनाले एपिसोड को धमाकेदार बनाने के लिए फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन फर्नांडीस ने शिरकत की. लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अक्षय कुमार कैमरे पर ही इमोशनल हो गए. नम हुईं अक्षय की आंखें शो का एक नया प्रोमो वीडियो सामने आया है. फिनाले एपिसोड में मेकर्स ने अक्षय के लिए एक खास 'ट्रिब्यूट वीडियो' तैयार किया, जिसे देखकर खिलाड़ी कुमार अपने आंसू नहीं रोक पाए. नेशनल टीवी पर उनकी आंखें नम हो गईं. ट्रिब्यूट वीडियो में अक्षय की शो में शानदार जर्नी दिखाई गई. वीडियो में शो के दौरान अक्षय के हंसते-खेलते और मस्ती-मजाक के पलों को भी दिखाया गया. साथ में खिलाड़ी कुमार के लिए एक दिल को छू लेने वाला मैसेज भी शेयर किया गया. वीडियो में अक्षय के लिए कहा गया- कल से ये मंच नहीं होगा. लेकिन आपकी मुस्कुराहट याद रहेगी. आपकी शरारतें, नादानियां और शैतानियां याद रहेंगी. आप याद रहेंगे. शायद ही पहले कभी किसी ने अक्षय कुमार को कैमरों पर रोते हुए देखा होगा. अक्षय को इमोशनल देखकर उनके फैंस की आंखें भी भर आई हैं. अक्षय ने मामा को किया इंट्रोड्यूस ट्रिब्यूट वीडियो देखकर अक्षय काफी इमोशनल हो गए. उनकी आंखें नम हो गईं. इमोशनल होते हुए अक्षय ने अपने मामा से भी मिलवाया. मामा को इंट्रोड्यूस करते हुए खिलाड़ी कुमार ने कहा- मेरे मामा जी भी यहां आए हैं, उन्होंने एक भी शो मिस नहीं किया है. वो मुझे बताते हैं- बेटा, जैसे ही रात के 9 बजते हैं, मैं शो देखने बैठ जाता हूं. इस शो को इतना प्यार देने के लिए शुक्रिया इंडिया. फिनाले एपिसोड होगा धमाकेदार फिनाले एपिसोड में फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन संग अक्षय कुमार खूब मस्ती मजाक भी करते दिखेंगे. चारों सितारों ने मिलकर स्टेज पर धमाका करते दिखेंगे. अक्षय और फराह और एक दूसरे को टीज करते हुए भी नजर आएंगे. प्रोमो वीडियो में दोनों का बॉन्ड और खट्टी-मीठी नोकझोंक फैंस को काफी एंटरटेनिंग लग रही है. आप भी मिस मत करिएगा 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' का फिनाले एपिसोड.

फर्जी लिंक से हो रही ठगी, टाटा पावर ने ग्राहकों को किया सतर्क

जमशेदपुर देश भर में बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘वॉट्सऐप स्कैम’ को लेकर टाटा पावर ने अपने ग्राहकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. कंपनी ने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि यह आपकी जमा-पूंजी और निजी डेटा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि ​हाल के दिनों में देखा गया है कि जालसाज ग्राहकों को वॉट्सऐप पर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. इन संदेशों में बिजली कटने का डर दिखाकर या केवाईसी अपडेट करने के बहाने संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं. जैसे ही कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है. उसका फोन हैक होने या बैंक खाते से पैसे चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है. ​ टाटा पावर की ग्राहकों को  सलाह ​कंपनी ने स्पष्ट किया है कि टाटा पावर कभी भी वॉट्सऐप, एसएमएस, कॉल या ईमेल के जरिए आपसे ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड नहीं मांगता है. किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. ये लिंक आपके फोन और व्यक्तिगत डेटा से समझौता कर सकते हैं. ऐसे किसी भी संदेश के जवाब में अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें. ​केवल आधिकारिक ऐप का उपयोग करें. ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. किसी अन्य सोर्स से भेजे गये ऐप डाउनलोड लिंक पर क्लिक न करें. सुरक्षा के लिए ग्राहक इन बातों का कड़ाई से पालन करें. ​ संदिग्ध गतिविधि होने पर क्या करें? ​टाटा पावर ने अपील की है कि यदि आपको कोई संदिग्ध मैसेज प्राप्त होता है या आपके साथ कोई अनधिकृत लेनदेन होता है. तो तुरंत ​हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. ​साइबर पोर्टल नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें. सिर्फ टाटा पावर के आधिकारिक संचार माध्यमों से ही संपर्क करें. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें. आपकी जागरूकता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सोलिया गांव से आरोपी दबोचा गया

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अवैध हथियार के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार युवक के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच गहराई से कर रही है. सूचना के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल की रात लगभग 8 बजे पुलिस अधीक्षक रामगढ़ को सूचना मिली थी कि पतरातू थाना क्षेत्र के ग्राम सोलिया निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है. सूचना के सत्यापन के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पतरातू राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया. छापामारी के दौरान पुलिस ने तालाताड़ पंचायत के सोलिया गांव से अनीश अंसारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. हथियार बरामदगी और मामला दर्ज पूछताछ के दौरान उसके बताए गए स्थान पर उसके घर से तुर्की मेड जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि उक्त पिस्टल उसे राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य द्वारा फायरिंग की घटना के बाद रखने के लिए दिया गया था. इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आरोपी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कई धाराओं में मामला दर्ज है.छापामारी दल में पतरातू अंचल पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता, भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली, पुलिस अवर निरीक्षक अफजल अंसारी के साथ अन्य पुलिस बल के जवान शामिल थे.

क्या ऋषभ पंत पर कप्तानी का दबाव पड़ा भारी? खराब प्रदर्शन से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली  हार हर टीम को मिलती है, लेकिन जब हार आदत बन जाए और उसके पीछे अपनी ही गलतियां हों, तब चिंता गहरी हो जाती है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) इस वक्त उसी दौर से गुजर रही है जहां मुकाबला विपक्ष से कम और खुद की उलझनों से ज्यादा है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) अब सिर्फ मैच नहीं हार रही है, बल्कि उन्हें खुद ही बिगाड़ रही है. ऋषभ पंत की कप्तानी वाली LSG अब तक बेहद निराशाजनक रही है. यह टीम हर बार डगआउट पर कैमरा जाने पर असमंजस में दिखती है. योजनाएं हर गेंद पर बदलती हैं, खिलाड़ियों के रोल हर मैच में बदलते हैं और जैसे ही दबाव आता है, फैसले बिखर जाते हैं. IPL 2026 की पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे बैठी LSG ने अपने 8 में से 6 मैच गंवा दिए हैं और लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है. जाहिर तौर पर कप्तान को ही आलोचना झेलनी पड़ती है और यहां भी वही हो रहा है.  पूर्व IPL कोच वसीम जाफर ने खुले तौर पर कप्तानी में बदलाव की बात कही है. उनका मानना है कि दक्षिण अफ्रीका के एडेन मार्करम को कप्तान बनाया जाना चाहिए ताकि पंत कप्तानी के दबाव से मुक्त होकर अपने खेल पर ध्यान दे सकें. जाफर ने कहा बदलो कप्तान जाफर ने कहा कि कप्तानी पंत पर बोझ बनती जा रही है. IPL 2025 में भी हमने यही देखा था, जब उन्होंने पहले 12 पारियों में सिर्फ 151 रन बनाए थे. इस साल भी उन्होंने सिर्फ एक मैच में बल्ले से टीम को जिताया है, बाकी प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है, खासकर 27 करोड़ रुपये की कीमत वाले खिलाड़ी के लिए. मुझे लगता है कि ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी को सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर खेलना चाहिए जब आप उसे आजादी देते हैं, तो वह मैच अपने दम पर जिता सकता है. कप्तानी का बोझ उस पर नहीं डालना चाहिए. मार्करम बेहतर विकल्प मार्करम बेहतर कप्तान हैं शांत, मजबूत और टीम से सर्वश्रेष्ठ निकालने वाले हालांकि, यह सिर्फ मेरी राय है,” अगर आप इस सीजन में पंत की कप्तानी का एक उदाहरण देखना चाहते हैं, तो KKR के खिलाफ आखिरी 5 ओवर देख लीजिए. पहल गेंदबाजी का फैसला आखिरी ओवर में रिंकू सिंह जैसे सेट बल्लेबाज के सामने दिग्वेश राठी को गेंद देना. यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया चार छक्के और मैच पलट गया 93/7 से मैच 156 के सफल चेज़ तक पहुंच गया.आज के दौर में, जब टीमें तेजी से रन बनाकर दबाव हटाती हैं, LSG ने खुद को पीछे धकेल दिया.  यह तभी होता है जब टीम अपनी योजना को लेकर स्पष्ट नहीं होती और यही इस सीजन की सबसे बड़ी समस्या रही है. 27 करोड़ का दबाव ये कहने में कोई गुरेज नहीं कि कप्तानी करते समय उनका प्रदर्शन गिर जाता है स्ट्राइक रेट और औसत दोनों कम हो जाते हैं, और उनकी स्वाभाविक आक्रामकता भी प्रभावित होती है. हालांकि, LSG में पंत का सिर्फ खिलाड़ी बनकर खेलना आसान नहीं है. वह इस टीम का चेहरा हैं 27 करोड़ रुपये में खरीदे गए. IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी। इतनी बड़ी कीमत के साथ जिम्मेदारी भी आती है. उनसे उम्मीद की जाती है कि वह नेतृत्व करें, मुश्किल समय में टीम को संभालें और ऐसा लगता है कि पंत खुद भी कप्तानी करना चाहते हैं यही वजह है कि यह फैसला आसान नहीं है क्योंकि इस वक्त LSG के पास एक ऐसा कप्तान है जो नेतृत्व करना चाहता है, लेकिन एक ऐसी टीम भी है जिसे सही दिशा में नेतृत्व मिलता नहीं दिख रहा.

AI से सपनों पर कंट्रोल का दावा! स्टार्टअप ने लॉन्च किए अनोखे वियरेबल डिवाइस

AI की मदद से लेटर, कोटिंग और कैलकुलेशन आदि तक कराई जा सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की मदद से अपने सपनों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. ये दावा एक स्टार्टअप प्रोफेटिक AI ने किया है. स्टार्टअप ने अपने वियरेबल डिवाइस लॉन्च किए हैं, जिनको लेकर दावा किया है कि आप क्या सपने में देखना चाहते हैं, इस डिवाइस की मदद से कंट्रोल किया जा सकती है. इनकी शुरुआती कीमत $449 (लगभग 42,300 रुपये) है. स्टार्टअप ने दो नए वियरेबल डिवाइस को पेश किया है, जिनके नाम डुअल और फेस है. ये आम लोगों के सपने देखने के तरीके को बदलने का काम करते हैं. वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है इन वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है, जिनसे एक तार जुड़ा होता है. कंपनी के पोर्टल पर लिस्ट डिवाइस देखने में एक जैसे लगते हैं. ये डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम को ट्रिगर कर सकते हैं, जो एक ऐसी स्थिति होती है, जब आप जानते हैं कि आपप सपना देख रहे हैं और उसको कंट्रोल किया जा सकता है. यह कैसे काम करता है? X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर प्रोफेटिक AI ने बताया कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करते हैं. ये डिवाइस सिर के जरिए सुरक्षित अल्ट्रासोनिक ऊर्जा को प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स तक भेजते हैं और फ्रंटोपैरिएटल नेटवर्क को एक्टिव कर देते हैं. ये सिस्टम आमतौर पर सपने देखते समय डिएक्टिव रहते हैं, जिससे ल्यूसिड अवेयरनेस की कमी होती है. स्टार्टअप का दावा है कि इस नेटवर्क को एक्टिव करके ये डिवाइस उस गतिविधि को संतुलित करने में मदद करते हैं. Prophetic Pulse में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) सेंसर भी लगे हैं, जिनका उपयोग मेंटल एक्टिविटी को समझने में किया जाता है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क का स्टार्टअप Neuralink भी अपने ब्रेन इम्प्लांट चिप्स में EEG सेंसर का उपयोग करती है. ये टेक्नोलॉजी ट्रांस्क्रानियल फोक्स्ड अल्ट्रा साउंड पर और AI आधारित है. डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम जनरेट कर सकते हैं और सपनों की याददाश्त, स्पष्टता और कंट्रोल को बेहतर बना सकते हैं. इसकी कीमत कितनी होगी? ऑफिशियल पोर्टल पर Prophetic Dual की कीमत 449 अमेरिकी डॉलर (लगभग 43,200 रुपये) है. इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू होगी. Prophetic Phase की कीमत 1,299 डॉलर  (करीब 1,22,000 रुपये) होगी और इसकी डिलीवरी 2027 के मध्य से शुरू होगी.

दिनदहाड़े अपहरण और फिरौती, बारां की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

बारां बारां में ग्लास व्यापारी के अपहरण के मामले में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने प्रशासन को फटकार लगाई है. उन्होंने पुलिस एसपी से बात कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में चिंता जाहिर करते हुए पुलिस प्रशासन को चेताया. प्रकरण शहर के ग्लास व्यापारी सतीश गौड़ के अपहरण से जुड़ा है. व्यापारी को अगवा कर फिरौती की डिमांड की गई थी. इस मामले ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, व्यापारियों में भी गुस्सा देखने को मिल रहा है. व्यापारी को बंधक बनाकर खेत में रखा जानकारी के अनुसार, व्यापारी सतीश गौड़ को दिनदहाड़े कार में अगवा कर खेत में बंधक बनाकर रखा गया. बदमाशों ने बंदूक की नोक पर मारपीट की और उनका वीडियो बनाकर पहले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. बाद में आरोपियों ने 6 लाख रुपये नकद और 8 लाख रुपये के चेक लेकर व्यापारी को छोड़ दिया. मामले के सामने आने के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश है. सांसद दुष्यंत सिंह ने भी लिया संज्ञान घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह ने संज्ञान लिया है. दोनों नेताओं ने एसपी अभिषेक अंदासु से बात कर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राजे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी. पुलिस ने भी मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

बागेश्वर धाम की सभा में महाभारत कलाकारों के बयान, हिंदू राष्ट्र पर जोर

  प्रयागराज के बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री की आयोजित कथा और सभा इन दिनों चर्चाओं में बनी हुई है. हाल ही में वो छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए बयान से सुर्खियों में आए थे, लेकिन अब उनकी सभा में बीआर चोपड़ा की महाभारत की कास्ट पहुंची. शो में युधिष्ठिर, दुर्योंधन, और श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले एक्टर्स ने मंच से हिंदू धर्म की रक्षा और देश के हिंदू राष्ट्र बनाने पर जोर दिया. उनके फायर बोल ने सभी के कान खड़े कर दिए हैं. आइये जानते हैं इन्होंने क्या कुछ कहा. पुनीत ने दी लव-जिहाद से बचने की सलाह बागेश्वर धाम की सभा में पहुंचे 'दुर्योधन' का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि- ऐसी सभाओं को देखकर लगता है कि हमारा हिंदू जागृत है और हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा. मैं अपनी माताओं-बहनों और भाईयों से ये जरूर कहना चाहूंगा कि अपने बच्चों को धर्म के प्रति अवगत जरूर कराएं. आसपास के लोगों से सतर्क रहें. जिस तरह से ये जबरदस्ती के धर्म परिवर्तन हो रहे हैं, हमारी बहू-बेटियों को बहलाया जा रहा है, उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है. उनसे बचकर रहे, और किसी भी कीमत पर ये नहीं होना चाहिए. इसी के साथ पुनीत ने आगे कहा कि- मैं समझता हूं कि शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्र विद्या भी आवश्यक होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सभी के व्यायाम पर भी जोर दिया. गजेंद्र की दहाड़- राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं बाबा बागेश्वर की इस कथा का हिस्सा युधिष्ठिर यानी गजेंद्र चौहान भी बने. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि- महाभारत देखी सबने लेकिन किया हमने. हमने उन पापियों का सत्यानाश किया जो धर्म के खिलाफ थे. अपनी बात को आगे समझाते हुए गजेंद्र ने कहा कि- धर्म के विरोध में काम करने वालों का सत्यानाश होना ही चाहिए. इस देश को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो महाभारत के इस एक लाइन को याद कर लीजिए- कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार-परंपरा, कोई भी प्रतिज्ञा राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती. जहां राष्ट्र की बात आती है सबकुछ समर्पण है. नितीश बोले- हिंदू धर्म सर्वोपरि इसी के साथ श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नितीश भारद्वाज ने भी हिंदू राष्ट्र बनाने की बात पर जोर देते हुए कहा कि- जब से आया हूं सबने कहा महाभारत बहुत देखी. मित्रों, महाभारत आज भी चल ही रही है. लेकिन अलग तरह की चल रही है. धर्म की रक्षा की आवश्यकता फिर से पड़ गई है. ये कलियुग है. जब द्वापर में धर्म की रक्षा की जरूरत पड़ी, तो कलियुग में तो पड़नी ही है. नितीश ने आगे भगवद् गीता का श्लोक याद दिलाते हुए कहा कि- इस समय जब धर्म रक्षा और विजय की आस लेकर तुम्हारे सामने खड़ा है, ऐसे समय में निराशा के भाव को अपने मन में आने नहीं देना है. आज परिस्थितियां वैसी ही हैं. भारत और विदेशों में भी. तरह-तरह की शक्तियां काम कर रही हैं. हिंदू धर्म पर आक्रमण हो रहा है. जो आदि-अनादि काल से चला आ रहा है वो केवल एक धर्म है- हिंदू धर्म. इस संस्कृति का रहना बहुत आवश्यक है. अगर हमारा व्यवहार सनातन वैदिक हिंदू नहीं होता तो ये दूसरे धर्म यहां आकर नहीं पनपते. न ही आज इनकी हिंदू धर्म के ऊपर टीका-टिप्पणी करने की हिम्मत होती. नितीश ने आगे भगवद् गीता का एक उपदेश कहते हुए समझाया कि हिंदू धर्म बांटने का काम नहीं करता है. इसलिए हमारे बीच सिर्फ प्रेम होना चाहिए. जो हमसे प्रेम करेगा हम उन्हीं से करेंगे, वरना हमें छत्रपति शिवाजी महाराज भी बनना आता है. क्योंकि धर्म की रक्षा हमारा कर्तव्य है.    

राजभवन से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी, गोपाल मीणा बने नए सचिव

पटना बिहार सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा के चार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राजभवन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्यपाल के सचिवालय में हुआ है, जहाँ प्रधान सचिव के पद पर नई तैनाती की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में चोंग्यू की विदाई बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्यू को राजभवन से स्थानांतरित कर दिया गया है। अब उनको अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया है। गोपाल मीणा इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे। आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा, राजभवन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में भी  रहेंगे।  मो. सोहैल बने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मो. सोहैल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है। गोपाल मीणा की तरह मो. सोहैल भी जांच आयुक्त के अपने अतिरिक्त प्रभार को पूर्ववत संभालते रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर में नीतीश, कैबिनेट विस्तार पर डिप्टी सीएम ने क्या कहा? लखीसराय को मिले नए डीएम सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव करते हुए 2013 बैच के आईएएस अधिकारी शैलेन्द्र कुमार को लखीसराय का नया समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी बनाया गया है। वह अब तक कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।  

सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन,मेडिकल जरूरत या बड़ा बिज़नेस?

आज के दौर में मातृत्व का अनुभव कुदरती प्रक्रिया से हटकर व्यापारिक मोड़ ले चुका है। चिकित्सा जगत में अब प्रसूता को एक सामान्य महिला के बजाय मरीज की तरह देखा जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो भोपाल जैसे बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा सर्जरी के जरिए दुनिया में आ रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ का डर दिखाकर प्रसव जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया को एक गंभीर बीमारी की तरह पेश किया जा रहा है, जिससे सामान्य डिलीवरी का चलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों मे भर्ती होते ही शुरू होता खेल निजी अस्पतालों में जैसे ही कोई गर्भवती महिला दाखिल होती है, वहां के माहौल में एक मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का संचार शुरू कर दिया जाता है। वार्ड से लेकर लेबर रूम तक ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि घबराए हुए परिजन सुरक्षा के नाम पर सिजेरियन के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक में प्रदेश के भीतर सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले जन्मों की संख्या दोगुनी हो गई है, जो सीधे तौर पर व्यापारिक मानसिकता की ओर इशारा करती है। WHO के चौकाने वाले आंकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का अनुपात 45 प्रतिशत के पार जा चुका है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत के आसपास है। ये भिन्नताएं सवाल खड़ा करती हैं कि क्या अस्पताल बदलने मात्र से चिकित्सा की आवश्यकताएं भी बदल जाती हैं? यह विरोधाभास साफ करता है कि प्रसव का तरीका अब मां की सेहत से ज्यादा अस्पताल के मुनाफे और डॉक्टर की सुविधा पर निर्भर करने लगा है। परिवार में ऐसे बनाते है डर प्रसव के इस पूरे ‘बाजार’ को समझना हो तो उन परिवारों की कहानी देखनी होगी, जिनसे सामान्य स्थिति होने के बावजूद सिजेरियन की सहमति ली गई। अक्सर डॉक्टर तर्क देते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी में बहुत समय लगेगा और ऑपरेशन करना ज्यादा सुरक्षित और त्वरित विकल्प है। बच्चे की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की भावनाएं इतनी प्रबल होती हैं कि वे भारी-भरकम बिल के सामने सवाल पूछना भूल जाते हैं। एक सिजेरियन प्रसव का औसत खर्च 85 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र करोड़ों के कारोबार में तब्दील हो गया है। सिजेरियन डिलीवरी में पैसों का खेल भारत में सिजेरियन (C-Section) प्रसव की दर अब 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 10-15 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक है। साल 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हुए कुल प्रसवों में से लगभग 54 लाख बच्चे ऑपरेशन के जरिए हुए। यदि एक ऑपरेशन का खर्च एक लाख रुपये माना जाए, तो यह 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का एक संगठित ‘सी-सेक्शन बाजार’ बन चुका है। अकेले राजधानी भोपाल में ही इस माध्यम से करोड़ों का राजस्व पैदा हो रहा है। महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं; डॉक्टर के अपने तर्क दूसरी ओर, विशेषज्ञ और डॉक्टर अपनी दलील देते हुए कहते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और देर से होने वाली शादियां इसकी बड़ी वजह हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं हैं और चिकित्सा संबंधी जोखिमों से बचने के लिए सिजेरियन का चुनाव किया जा रहा है। शहरी जीवन में बढ़ता तनाव, भय और शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाहत जैसे सामाजिक कारण भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं। परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही परामर्श बेहद जरूरी- एक्स्पर्ट्स विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के प्रति महिलाओं के मन में बैठे डर को दूर करने की आवश्यकता है। गर्भावस्था के दौरान सही सलाह, भावनात्मक सहयोग और धैर्य की कमी के कारण महिलाएं ऑपरेशन का रास्ता चुनती हैं। यदि परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी और मानसिक मजबूती दी जाए, तो इस बढ़ते हुए ‘सर्जरी कल्चर’ पर अंकुश लगाया जा सकता है।