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संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

बार-बार चाबी खोना सिर्फ आदत नहीं, जानिए वास्तु और मान्यताओं का संकेत

घर की चाबियां छोटी सी चीज़ हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी भी. फिर भी कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दिन चाबी ढूंढनी पड़ती है कभी टेबल पर, कभी बैग में, तो कभी घर के किसी कोने में. अगर आपके साथ भी ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ लापरवाही मानकर नजरअंदाज न करें. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह आपकी आदतों के साथ-साथ घर की ऊर्जा और जीवन की स्थिति से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं में क्या माना जाता है? धार्मिक दृष्टि से बार-बार चाबी खोना सामान्य बात नहीं माना जाता. इसे जीवन में चल रही अव्यवस्था या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. चाबियां सुरक्षा और नियंत्रण का प्रतीक होती हैं, इसलिए उनका बार-बार खोना इस बात की ओर इशारा कर सकता है कि व्यक्ति अपने कामों या फैसलों पर पूरी पकड़ नहीं बना पा रहा है.  कुछ मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा या ग्रहों के असंतुलन से भी जोड़कर देखा जाता है, खासकर तब जब घर में चीज़ें लगातार खोने लगें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, चाबियों के लिए एक तय और सही स्थान होना बेहद जरूरी है.     चाबियां उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है.     घर के मुख्य दरवाजे के पास दीवार पर की-होल्डर लगाना अच्छा रहता है.     चाबियां हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से दिखे और पहुंच में हो.     ध्यान रखें कि चाबियाँ जमीन के बहुत पास या गंदी जगह पर न हों.  इन गलतियों से बचें     चाबियां किचन, गैस स्टोव या बाथरूम के पास न रखें     बेड या तकिए के नीचे चाबी रखना अशुभ माना जाता है     चाबियों को अलग-अलग जगहों पर बिखरा कर न रखें     पुरानी, टूटी या बेकार चाबियाँ घर में जमा न करें सिर्फ धार्मिक या वास्तु कारण ही नहीं, बल्कि बार-बार चाबी खोना आपकी दिनचर्या, तनाव और फोकस की कमी का भी संकेत हो सकता है.

मायरा की मासूम डिमांड ने बदला माहौल, अभिरा ने मां के सच पर कही बड़ी बात

 ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के 27 अप्रैल के एपिसोड में अभिरा और अरमान, मायरा को अपने साथ बाहर लेकर आते हैं। मायरा, अभिरा को गले लगाती है और आई लव यू कहती है। अभिरा को यकीन नहीं होता है। अभिरा को लगता है कि ये कोई सपना है। ऐसे में मायरा, अभिरा को 100 टाइम्स आई लव यू कहती है और ये यकीन दिलाती है कि ये रियल है, सपना नहीं। (ये भी पढ़ें: Anupama 27 April: दिग्विजय को प्रेम ने लगाया गले, श्रुति को देख गौतम को ये आदेश देती हैं मोटी बा) कोयल की मम्मी से वादा करते हैं अरमान और अभिरा इस बीच कोयल आती है। मायरा, कोयल से मिलती है और उसे थैंक्यू बोलती है। अभिरा भी कोयल की मम्मा का शुक्रियाअदा करती है। अभिरा वादा करती है कि वो उनके लिए जॉब ढूंढेगी। वहीं अरमान कहता है कि वो कोयल की पढ़ाई के लिए फंड्स इकट्ठा करेगा। इसके बाद मायरा सबसे मिलती है। अभिरा सोचती है, ‘आज मायरा खुश है इसलिए आज कुछ नहीं बोलूंगी, लेकिन कल मां का सच बाहर लाकर रहूंगी।’ फूफा-सा मांगते हैं माफी सबसे मिलने के बाद मायरा को याद आता है कि मुक्ति ने कसम खाई थी कि जब तक वो नहीं आएगी तब तक वो कोल्ड्रिंग नहीं पिएगी। ऐसे में मायरा, माधव से पैसे लेती है और मुक्ति के पास जाती है। वहीं फूफा-सा, अभिरा से माफी मांगते हैं। फूफा-सा कहते हैं, ‘अभिरा तुम इतने साल तक कोर्ट-कचहरी से दूर थी इसलिए मुझे लगा कि तुम ये केस नहीं लड़ पाओगी। मुझे माफ कर देना।’ मुक्ति और मायरा का मिलन मायरा को देख मुक्ति खुश हो जाती है। दोनों मिलकर कोल्ड्रिंग पीते हैं। मुक्ति इमोशनल हाे जाती है। मुक्ति, मायरा से पूछती है, ‘क्या हम मां को शेयर कर सकते हैं?’ फिर मुक्ति कहती है, ‘नहीं! तुमने तो बहुत पहले ही मना कर दिया था। कोई बात नहीं।’ मायरा पहले मुक्ति को मारती है और फिर खुद को। मायरा कहती है, ‘मैंने तुम्हे इसलिए मारा क्योंकि तुम बकवास कर रही हो और खुद को इसलिए मारा क्योंकि मैंने भी पहले बकवास ही बोला था।’ इसके बाद मायरा, मुक्ति का अपने परिवार में स्वागत करती है। मायरा की डिमांड मायरा, अभिरा और अरमान से कहती है कि उसे मां और पापा के बीच किसी एक को नहीं चुनना है। उसे मां, पापा और मुक्ति तीनों चाहिए। ये सुनकर अभिरा और अरमान इमाेशनल हो जाते हैं। वहीं विद्या को गुस्सा आने लगता है।

जेसीबी से खुदाई के दौरान निकली मूर्ति, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर

चाईबासा  पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर और आनंदपुर के सीमावर्ती इलाके में स्थित कोयल नदी में पानी के लिए जेसीबी से चार फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था. अचानक दोपहर डेढ़ बजे एक तेज आवाज के साथ खुदाई कर रही मशीन का पंजा किसी बेहद कठोर वस्तु से टकराकर ठिठक गया. ड्राइवर ने कोशिश की, लेकिन मशीन आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. पहले लगा कि कोई बड़ा पत्थर या चट्टान है, लेकिन जैसे ही वहां से बालू हटाई गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. अंधेरी गहराइयों से भगवान राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रकट हुई. ग्रामीण इसे अद्भुत घटना मान रहे हैं. कोयल नदी के गर्भ से भगवान राधा-कृष्ण की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा बालू के करीब चार फीट नीचे दबी थी. खुदाई में यह सुंदर मूर्ति जैसे ही बाहर निकली, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई. देखते ही देखते नदी का तट एक अस्थायी मंदिर के रूप में तब्दील हो गया है. लोग इसे एक मूर्ति की खोज नहीं, बल् एक साक्षात सनातन चमत्कार मान रहे हैं जिसने पल भर में नदी के सूखे तट को भक्ति के सरोवर में बदल दिया है. जेसीबी की खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. ग्रामीणों की प्यास बुझाने और पास के गांव तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था. रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे, खुदाई के दौरान मशीन अचानक किसी ठोस चीज से टकराकर रुक गई. जब सावधानी से उस जगह की दोबारा खुदाई की गई तो बालू के नीचे से राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा निकली. मूर्ति के निकलते ही वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगे. झारखंड चमत्कार: खुदाई के दौरान कोयल नदी से निकली भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर. श्रद्धालुओं ने बनाया अस्थायी दरबार मूर्ति मिलने की सूचना मिलते ही मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंड के गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग कोयल नदी के तट पर पहुंचने लगे. लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने तुरंत उस स्थान पर भगवा झंडा गाड़ दिया. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भगवान को बचाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी और पेड़ों की टहनियों से एक अस्थायी छत (शेड) भी बना दी है. अब यहां सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और कीर्तन का दौर चल रहा है. मंदिर स्थापना की तैयारी में ग्रामीण नदी के बीचों-बीच मिली इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. कई ग्रामीणों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है. गांव की प्रबंध समिति और बुजुर्ग अब इस प्रतिमा को विधि-विधान के साथ किसी सुरक्षित स्थान या नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल, वनशक्ति देवी मंदिर के पास स्थित यह नदी क्षेत्र एक तीर्थ स्थल बन गया है.  

बदले पैटर्न ने बढ़ाई मुश्किल, अभ्यर्थियों ने बताया पेपर रहा कठिन

अंबाला  हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को हुई। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बातचीत में अधिकांश परीक्षार्थियों ने स्वीकार किया कि इस बार का पेपर न सिर्फ कठिन था बल्कि सवालों का पैटर्न पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। वहीं एलाइड सर्विस के प्रश्नपत्र से विद्यार्थी खुश नजर आए। इस परीक्षा के लिए दोनों पालियों में 8712 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। यह आया कठिन अभ्यर्थियों के मुताबिक, सामान्य अध्ययन के पेपर में सीधे सवाल पूछने के बजाय कथन और निष्कर्ष और जोड़े मिलाओ वाले सवालों की भरमार थी। भूगोल में महासागरीय धाराओं और खनिज क्षेत्रों कुद्रेमुख, बालाघाट पर आधारित सवालों ने अभ्यर्थियों को परेशानी में डाला। रसायन विज्ञान में मेथनॉल की विषाक्तता और कोलाइड्स से जुड़े तकनीकी सवालों का स्तर काफी ऊंचा रहा। वहीं राज्य की संस्कृति से जुड़े सवालों में लूर नृत्य और झाड़ू फिरी जैसी रचनाओं के मिलान ने भी परीक्षार्थियों को उलझाए रखा। पेपर काफी विस्तृत था। खासकर कथन-1 और कथन-2 वाले सवालों में बहुत समय बर्बाद हुआ। अगर कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है, तो तुक्का लगाना नामुमकिन था।  अमित कुमार, अभ्यर्थी उकलाना एचपीएससी अब पूरी तरह यूपीएससी के पैटर्न को फॉलो कर रहा है। इकोनॉमिक्स में बेरोजगारी और जीडीपी से जुड़े सवाल बेसिक लग रहे थे लेकिन उनके विकल्प बहुत उलझाने वाले थे।  स्नेहा, अभ्यर्थी पिंजौर नेगेटिव मार्किंग का डर परीक्षा में 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग और पांचवें विकल्प (ई) की अनिवार्यता ने भी छात्रों पर मानसिक दबाव बनाए रखा। कई छात्रों ने बताया कि समय कम होने के कारण वे भूगोल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कुछ सवाल हल नहीं कर पाए। वहीं कोचिंग विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि पेपर का स्तर काफी कठिन श्रेणी में था। ऐसे में इस बार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ पिछली बार के मुकाबले कम रहने का अनुमान है। कुल 100 सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के उत्तर के लिए 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। इस बार की परीक्षा में हरियाणा की संस्कृति और वैश्विक पर्यावरण समझौतों पर अधिक ध्यान दिया गया। प्रशासन ने की थी हाई-टेक व्यवस्था जिले के 31 केंद्रों पर रविवार को एचसीएस की प्रारंभिक परीक्षा तकनीक के चक्रव्यूह में संपन्न हुई। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार हाई-टेक व्यवस्था अपनाई। केंद्रों के गेट पर अभ्यर्थियों का पहले फेस स्कैन किया गया, फिर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मिलने के बाद ही एंट्री दी गई। केंद्रों के पास धारा 163 लागू रही और फोटोस्टेट की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल और कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा पर नजर रखी गई। एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा रही आसान जिले में रविवार को आयोजित एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा उम्मीद से कहीं ज्यादा सरल रही। प्रश्नपत्र का स्तर आसान होने के कारण अधिकतर अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले ही अपनी ओएमआर शीट जमा कर दी। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही युवा अपने साथियों के साथ उत्तरों का मिलान करने और अंकों का गणित जोड़ने में व्यस्त हो गए। अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र काफी संतुलित था। विशेषकर इतिहास और डाक विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी। बंगाल का विभाजन और सुभाष चंद्र बोस के नारे जैसे सीधे सवालों ने स्कोरिंग को आसान बना दिया। वहीं, डाक नियमों से जुड़े तकनीकी सवाल भी विभागीय तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सरल रहे।  

घर में मकड़ी के जाले सिर्फ गंदगी नहीं, वास्तु में माने जाते हैं अशुभ संकेत

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. इस मौसम में घरों के कोनों या छिपी हुई जगहों पर मकड़ी के जाले तेजी से नजर आने लगते हैं. गर्म और सूखे मौसम में मकड़ियां ज्यादा दिखने लगती हैं, जिससे घर के कोनों, दीवारों और छत पर जाले बनना आम हो जाता है. अक्सर लोग इन्हें मामूली गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, मकड़ी के ये जाले नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी माने जाते हैं. यही बात हम अक्सर अपने बड़े-बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के अलग-अलग स्थानों पर लगे मकड़ी के जाले जीवन पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में. बेडरूम में मकड़ी का जाला वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके बेडरूम में मकड़ी का जाला है, तो इसे तुरंत साफ कर देना चाहिए. बेडरूम में जाले होने से दांपत्य जीवन में भी तनाव बढ़ सकता है. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली कम होती है और रिश्तों में खटास आ सकती है. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना भी बढ़ जाती है. घर के कोनों में मकड़ी का जाला अक्सर घर के ऊंचे कोनों में मकड़ी के जाले लग जाते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे आसानी से साफ नहीं हो पाते हैं. लेकिन वास्तु के अनुसार, घर के कोनों में जाले होना आर्थिक परेशानियों का संकेत माना जाता है. यह धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, इसलिए समय-समय पर इन्हें साफ करना जरूरी है. मंदिर में मकड़ी का जाला घर के मंदिर को साफ-सुथरा रखना बहुत जरूरी होता है. कई बार सफाई की अनदेखी के कारण मंदिर में भी मकड़ी के जाले लग जाते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मंदिर में जाला लगना दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है. इसलिए रोजाना पूजा से पहले मंदिर की साफ-सफाई करना बेहद जरूरी है. किचन में मकड़ी का जाला किचन घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां अन्नपूर्णा विजारती हैं और भोजन तैयार किया जाता है. अगर यहां मकड़ी का जाला लगा हुआ है, तो यह सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. वैज्ञानिक रूप से भी यह सही नहीं है, क्योंकि जाले और गंदगी से बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे घर के लोग बीमार पड़ सकते हैं. इसलिए किचन की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. क्या करें उपाय? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके घर में मकड़ी के जाले लगते हैं, तो रोजाना उनकी सफाई करें और उन्हें तुरंत कूड़े में फेंक दें. रोज या हफ्ते में 2-3 बार झाड़ू-पोंछा करें. छत, कोनों और फर्नीचर के पीछे भी सफाई करें. पुराने जाले तुरंत हटा दें. मकड़ी के जाले हटाने के लिए आप चाहें तो घर में रोजाना धूप और दीपक जला सकते हैं, इस एक उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा और कीट-पतंगे दूर रहते हैं.

गर्मियों में अंडा खाना सुरक्षित या नहीं? एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सच

 भारत के कई हिस्सा में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और सुबह 7 बजे से ही गर्माहट समझ आने लगी है. ऐसे में गर्मी के मौसम में अक्सर लोग खान-पान को लेकर सचेत रहते हैं ताकि उनका डाइजेशन और सेहत सही रहे. लेकिन जो लोग रोजाना अंडे खाते हैं, उन लोगों को भी चिंता होने लगती है कि रोजाना अंडा खाएं या नहीं? अंडा जिसे सुपरफूड माना जाता है, उसे लेकर एक बड़ा भ्रम यह है कि इसकी तासीर गर्म होती है और गर्मियों में इसे खाने से पेट खराब या शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? हार्वर्ड हेल्थ और इंटरनेशनल रिसर्च डेटा के अनुसार, अंडा गर्मियों में भी उतना ही सुरक्षित है जितना सर्दियों में, बस शर्त यह है कि उसे खाने का तरीका सही होना चाहिए. तो आइए जान लीजिए कि इस तपती गर्मी में आपको अंडे का सेवन कैसे करना चाहिए. गर्मियों में अंडे और शरीर की गर्मी का सच हॉवर्ड न्यूट्रिशन सोर्स के अनुसार, अंडा विटामिन D और कोलीन का बेहतरीन सोर्स है. अगर आप इसे सही हाइड्रेशन यानी पर्याप्त पानी के साथ लेते हैं, तो यह शरीर में गर्मी पैदा नहीं करता. अक्सर माना जाता है कि अंडे खाने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंडे में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है. इस प्रोसेस को थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड कहा जाता है. क्या है अंडा खाने का सबसे सही समय? ऑस्ट्रेलिया एग्स की रिपोर्ट बताती है कि सुबह अंडा खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख नहीं लगती. दरअसल, गर्मी के मौसम में मेटाबॉलिज्म दोपहर और रात के समय थोड़ा धीमा हो जाता है इसलिए इस समय भारी भोजन को पचाना मुश्किल होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अंडों का सेवन सुबह के नाश्ते में करना सबसे बेहतर रहेगा. सुबह शरीर का मेटाबॉलिज्म सबसे अधिक होता है जिससे अंडे का प्रोटीन आसानी से पच जाता है. दोपहर की कड़ी धूप या रात को सोने से ठीक पहले अंडा खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. गर्मियों में इन 2 बातों का रखें ख्याल गर्मियों में सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला (Salmonella) बैक्टीरिया का होता है. अधिक तापमान में अंडे जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अंडों को फ्रिज में 4°C से कम तापमान पर स्टोर करें. इसके अलावा गर्मियों में भारी तेल-मसाले वाले ऑमलेट या एग करी के बजाय उबले हुए अंडे या कम तेल वाली पोच्ड एग को प्राथमिकता दें. अंडे को इसे खीरे, पुदीने या ताजी सब्जियों के सलाद के साथ खाएं ताकि शरीर का हाइड्रेशन लेवल बना रहे. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, किसी स्वस्थ व्यक्ति गर्मियों में भी रोज 1 से 2 अंडे सुरक्षित रूप से खा सकता है.

कलियुग के अंत की भविष्यवाणी, कल्कि अवतार से होगा अधर्म का नाश

 हिंदू धर्म के अनुसार, जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान विष्णु अलग-अलग अवतार लेकर संतुलन स्थापित करते हैं.  उनका अंतिम और दसवां अवतार कल्कि अवतार माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, जब कलयुग में पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा, नदियां सूखने लगेंगी और इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में प्रकट होंगे. विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में बताया गया है कि यह अवतार कलयुग और सतयुग के संधिकाल में होगा, जिसका उद्देश्य धर्म की पुनः स्थापना करना होगा. कहां होगा कल्कि अवतार का जन्म? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कल्कि अवतार का जन्म शंभल नामक स्थान पर होगा. उनके पिता का नाम विष्णुयशा बताया गया है, जो एक तपस्वी ब्राह्मण होंगे. कैसा होगा कल्कि अवतार का स्वरूप? पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान कल्कि एक सफेद घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे, जिसका नाम देवदत्त बताया गया है. उनके हाथ में एक चमकदार तलवार होगी और उनकी गति बिजली से भी अधिक तेज मानी जाती है.  उनका रूप अत्यंत दिव्य और प्रभावशाली होगा. कौन देंगे उन्हें शिक्षा? मान्यता है कि भगवान परशुराम उनके गुरु होंगे. वे कल्कि को युद्ध कला और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देंगे, जिससे वे अधर्म का नाश कर सकें. किससे होगा कल्कि अवतार का युद्ध? कल्कि अवतार का मुख्य उद्देश्य अधर्म, पाप और अन्याय का अंत करना होगा.  वे उन दुष्ट शासकों और लोगों का विनाश करेंगे, जो समाज में बुराई फैलाते हैं. यह युद्ध सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच एक बड़ा संघर्ष माना जाता है. कौन होगा सबसे बड़ा शत्रु? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्कि अवतार का सबसे बड़ा शत्रु 'कलि' होगा, जो कलियुग की नकारात्मक शक्तियों का प्रतीक है. इसी शक्ति का अंत करके कल्कि धर्म की पुनः स्थापना करेंगे. कौन देगा इस युद्ध में साथ? मान्यता है कि इस धर्मयुद्ध में हनुमान, अश्वत्थामा और कृपाचार्य जैसे चिरंजीवी भी उनका साथ देंगे. कैसे होगा कलियुग का अंत? जब अधर्म पूरी तरह फैल जाएगा, तब कल्कि अवतार प्रकट होकर उसका अंत करेंगे.  उनके अवतरण के साथ ही धरती पर फिर से शुद्धता आएगी और सतयुग की शुरुआत मानी जाएगी. यह घटना अच्छाई और बुराई के बीच अंतिम विजय का प्रतीक होगी.

पंजाब सरकार का ऐतिहासिक कदम, 201 गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई करने की मिली अनुमति

 कलानौर  पंजाब सरकार ने सेमग्रस्त घोषित किए राज्य के 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। इनमें गुरदासपुर जिले के तीन गांव शामिल हैं, जिनके करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। पंजाब सरकार ने यह छूट दो साल के लिए दी है। गौर हो कि पंजाब में किसान दस मई से पहले धान की पनीरी की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में घटते भू-जल स्तर को रोकना है। निकटवर्ती निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि ब्लाक डेरा बाबा नानक से संबंधित सरपंचों की मांग पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब भर में सेमग्रस्त घोषित किए 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। अब इन खेतों के किसान साल भर में कभी भी धान की बिजाई कर सकते हैं। इस फैसले से डेरा बाबा नानक ब्लाक के सेमग्रस्त गांवों के सरपंचों व किसानों में खुशी की लहर है। इस संबंध में गांव निज्जरपुर के सरपंच रणदीप सिंह, प्रकाश सिंह, कुलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जगजीत सिंह आदि ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी दरिया के पानी से आई बाढ़ में उनकी धान की फसल तबाह हो गई थी। इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से उन्होंने गेहूं की बिजाई की, लेकिन गेहूं वाले खेतों में सेम आ जाने के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई थी। सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव अठवाल, कोटली सूरत मल्ली, अर्लीभन्न के रकबे में सेम पड़ जाने और गेहूं की फसल नष्ट होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान लगाने की मांग की थी। इस मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने कृषि विभाग और विभिन्न टीमों को सेमग्रस्त खेतों की जांच के लिए भेजा था। टीमों ने जांच के बाद पाया कि इन खेतों में डेढ़ से दो फुट मिट्टी खोदने के बाद सेम का पानी आ जाता है। पंजाब सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए जिला गुरदासपुर के गांव भुल्लर, अठवाल, कोटली सूरत मल्ली के अलावा पूरे पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फरीदकोट के 19, फाजिल्का के 81, बठिंडा के दो और मानसा के एक गांव शामिल हैं। सरकार ने इन गांवों के क्षेत्र को धारा 3(3)(सी) के तहत 'पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009' के दायरे से अगले दो सालों की अवधि के लिए छूट दे दी है। इस छूट के बाद अब ये किसान निर्धारित तिथि से पहले अग्रिम धान की बिजाई कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आर्थिक को काफी राहत मिलेगी। सरपंच रणदीप सिंह ने सेमग्रस्त जमीनों के मालिक किसानों से अपील की कि वे धान की बिजाई के लिए नर्सरियों की तैयारी करें ताकि सेमग्रस्त खेतों में धान की बिजाई की जा सके। सरपंच रणजीत सिंह और प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में बाढ़ के पानी से जहां उनकी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहीं देर से खेतों में किसानों द्वारा बिजाई की गई गेहूं की फसल भी खेतों में सेम की मार पड़ जाने के कारण नष्ट हो गई है। उन्होंने बताया कि कई किसानों के खेतों में से डेढ़ से तीन क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार ही निकली है, जो सामान्य से काफी कम है। किसानों ने कहा कि पंजाब सरकार को सेमग्रस्त जमीनों पर खराब हुई गेहूं की फसल का भी किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए ताकि समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सहायता हो सके। जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डा. ठाकुर रणधीर सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा जिला गुरदासपुर के तीन गांवों आदि सहित कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया गया है। इसके तहत इन सेमग्रस्त गांवों के किसानों को अग्रिम धान बिजाई की छूट मिली है, जबकि दूसरी जमीनों में धान की पनीरी की बिजाई और धान की रोपाई पंजाब सरकार के खेतीबाड़ी विभाग के आदेशों पर होगी।

24वीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश अकादमी के खिलाड़ियों ने किया शानदार प्रदर्शन

24वीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश अकादमी के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन रंजना यादव ने रेस वॉक में तोड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड, जीता स्वर्ण पदक तुमकुर (कर्नाटक) में खिलाड़ियों ने बढ़ाया प्रदेश का मान, 2 स्वर्ण, 2 रजत व 1 कांस्य पदक जीते भोपाल मध्यप्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने कर्नाटक के तुमकुर में 24 से 26 अप्रैल 2026 तक आयोजित 24वीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को गौरवान्वित किया। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण, 2 रजत एवं 1 कांस्य पदक अर्जित किये। खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई मध्यप्रदेश के सहकारिता,खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की कठिन मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन तथा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही आधुनिक खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय मंच पर लगातार नया इतिहास रच रहे हैं। राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर रंजना यादव ने रचा इतिहास प्रतियोगिता में अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी रंजना यादव ने जूनियर महिला 5000 मीटर रेस वॉक स्पर्धा में 23:21.12 सेकंड का शानदार समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया तथा नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पूर्व यह रिकॉर्ड राजस्थान की खिलाड़ी मनीषा के नाम 23:43.58 सेकंड था। रंजना की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने मध्यप्रदेश का गौरव राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ाया है। दमदार प्रदर्शन से जीते पदक अकादमी की खिलाड़ी राधा यादव ने जूनियर महिला 1500 मीटर दौड़ स्पर्धा में 4:32.64 मिनट का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता के पहले दिन (शुक्रवार को) आशीष कुमार यादव ने जूनियर पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में 4.70 मीटर की ऊँचाई पार करते हुए रजत पदक अर्जित किया। तीसरे दिन (रविवार) प्रातः सत्र में संदीप यादव ने जूनियर पुरुष 3000 मीटर दौड़ स्पर्धा में 8:26.88 मिनट का शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक प्राप्त किया। वहीं दीपिका शर्मा ने जूनियर महिला 3000 मीटर दौड़ स्पर्धा में 9:45.57 मिनट का समय निकालते हुए कांस्य पदक जीता। उनका मुकाबला स्वर्ण एवं रजत पदक विजेताओं से बेहद करीबी रहा। प्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभा का सशक्त प्रदर्शन इन उपलब्धियों ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। खिलाड़ियों की यह सफलता प्रदेश में विकसित हो रही खेल संस्कृति, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था तथा खेल अधोसंरचना की गुणवत्ता को दर्शाती है। अकादमी का प्रशिक्षण बना सफलता की कुंजी मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन, खेल विज्ञान सहयोग तथा अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से खिलाड़ियों को तराशा जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार देखने को मिल रहे हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। एथलेटिक्स में मिल रही यह सफलता न केवल खेलों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी खेल राज्यों में स्थापित कर रही है।