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मुल्तानी मिट्टी फेस पैक: टमाटर और गुलाब जल से पाएं नैचुरल पिंक ग्लो

हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन सुंदर हो जिसके लिए वो महंगे से महंगे फेशियल भी कराती हैं लेकिन केमिकल युक्त फेशियल अक्सर आपकी स्किन को कुछ समय के लिए तो अच्छा ग्लो देते हैं लेकिन लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में मुल्तानी मिट्टी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. अगर आप इसमें सही चीजें मिलाकर लगाएं तो यह न केवल चेहरे की गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल हटाती है बल्कि आपको वो पिंकिश ग्लो भी देती है जिसके लिए आप पार्लर जाती हैं. मुल्तानी मिट्टी में छिपे खनिज तत्व स्किन को टाइट करते हैं और इन दो खास चीजों का मिश्रण चेहरे पर गुलाबी निखार लाने का काम करता है. मुल्तानी मिट्टी में क्या मिलाएं चेहरे पर गुलाबी निखार पाने के लिए आपको मुल्तानी मिट्टी में ये दो चीजें मिलानी हैं. इनमें पहला है गुलाब जल जो स्किन के pH लेवल को बैलेंस करता है और चेहरे पर गुलाबी चमक देता है. इसके अलावा दूसरा है टमाटर का रस. टमाटर के रस में मौजूद लाइकोपीन त्वचा को नैचुरल ग्लो देता है और टैनिंग हटाता है. फेस पैक बनाने की विधि मुल्तानी मिट्टी: 2 बड़े चम्मच टमाटर का रस: 1 बड़ा चम्मच (ताजा) गुलाब जल: जरूरत के अनुसार (पेस्ट बनाने के लिए) शहद: आधा चम्मच (अगर स्किन ड्राई है तो शहर मिलाना चाहिए) बनाने और लगाने का तरीका एक कांच की कटोरी में मुल्तानी मिट्टी का पाउडर लें. इसमें ताजा टमाटर का रस और गुलाब जल डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें. चेहरे को साफ पानी से धोकर सुखा लें. अब इस पैक की एक पतली परत गर्दन और चेहरे पर लगाएं. इसे 15 मिनट तक या सूखने तक लगा रहने दें. चेहरे पर थोड़ा पानी छिड़कें और हल्के हाथों से मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें. हफ्ते में 2 बार इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर फर्क दिखने लगेगा.

2200 करोड़ की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर विरोध, कार्रवाई रुकी

जयपुर जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा. महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी. भू-माफियाओं ने किया घोटाला! बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

सियासी समीकरणों में बदलाव, बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में असंतोष

पटना  कहते हैं कि राजनीति में नेता भले ही अपने वोट बैंक के भरोसे रहें, लेकिन उनकी एक गलती बना-बनाया वोट बैंक न सिर्फ बिगाड़ सकती है बल्कि भड़का भी सकती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह की चर्चा चल रही है, उसको देख कर बीजेपी के मामले में भी ऐसा ही लग रहा है। एक तरफ विजय कुमार सिन्हा का त्याग-तपस्या-बलिदान वाला बयान और दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह की चुप्पी। उधर नीतीश ने इसी बहाने अपनी तरफ से मरहम लगा दिया। समझिए कैसे। बिहार में बीजेपी से कोर वोटर हुए नाराज बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में भूमिहार ब्राह्मणों का बड़ा हाथ माना जाता रहा है। 2005 में जब ये वोटर लालू प्रसाद यादव के चलते कांग्रेस से बिदके थे, तो उन्होंने अपना सारा समर्थन बीजेपी की झोली में डाल दिया। पटना का बिक्रम विधानसभा क्षेत्र हो या फिर बेगूसराय में 2015 को छोड़ बाकी विधानसभा चुनाव। भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण बिरादरी बहुल क्षेत्रों में लोगों ने बीजेपी को हाथों-हाथ लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को फिर से इसी समाज का समर्थन मिला और उसने वापसी भी की। लेकिन अब यही समाज बीजेपी से फिर से नाराज है। और तो और बीजेपी के कुछ चुनिंदा 'राय' यानी यादव वोटर भी नाराज दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिख रही नाराजगी सोशल मीडिया साइट्स पर आप जाएंगे तो आपको कई ऐसे पोस्ट मिलेंगे, जिसमें खुल कर बिहार बीजेपी को कोसा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि बीजेपी को जब सरकार बनाने का मौका मिला तो अपने उन कोर वोटरों को ही भूल गई, जिसने उन्हें सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाया। अपनी पार्टी के किसी नेता को छोड़ बाहर से आए चेहरे पर भरोसा किया गया। ऐसे में कोर वोटरों को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से ज्यादा ऐतराज अपनी अनदेखी का है। वहीं जिस तरह से सियासी हवा में श्रेयसी सिंह का नाम तैरा, उसके बाद राजपूत वोटरों के एक तबके में भी नाराजगी दिख रही है। इन सबका असर भी देखने को मिला। बिहार में पहली बार बीजेपी सत्ता की ड्राइविंग सीट पर है, लेकिन इसकी खुशी बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं में ही नहीं दिख रही है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि एक बार पटना बीजेपी ऑफिस घूम आइए, आपको सहज अंदाजा मिल जाएगा।     2005 में बीजेपी को नीतीश के जरिए सत्ता में लाने में सवर्ण वोटरों की बड़ी भूमिका     सवर्ण वोटरों ने बीजेपी को एकजुट होकर एकमुश्त वोट दिया था और देते रहे     लेकिन अब नए समीकरण गढ़ने पर बीजेपी को यही वोटर सुना रहे     नाराजगी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने से नहीं बल्कि अपनी अनदेखी होने से नीतीश ने इसी मौके का उठाया फायदा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की गद्दी तो छोड़ दी लेकिन जाते-जाते उन्होंने जातीय समीकरणों की ऐसी गोटी फिट की, जो भले ही सरकार को बनाए रखने में नींव का काम करे। लेकिन बीजेपी के लिए मुसीबत ही बनेगी। नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनवाकर बीजेपी के कोर वोटरों के दिल पर मरहम लगा दिया। बात ये रही कि कुर्मी जाति से किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली, तो जदयू में निशांत के नाम और राजनीति में आने के बाद संतुष्टि है, नाराजगी नहीं। अब क्या करेगी बीजेपी? ये फैसला कोई नहीं कर सकता कि बीजेपी क्या करेगी? ये पूरी तरह से उसका अंदरुनी मसला है, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद जिस तरह से विजय कुमार सिन्हा ने त्याग-तपस्या-बलिदान और कमांडर वाली बात की, उससे उन्होंने काफी हद तक बीजेपी में भूमिहार वोटरों की सहानुभूति अपनी ओर खींच ली। ऐसे में अब बिहार बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो अपने कोर वोटरों को मनाए कैसे, क्योंकि ये वोटर ऐसी जमात है जो नाराज होने पर शिफ्ट होने में देर नहीं करते। अब बीजेपी इन्हें फिर से कैसे पाले में लाती है, जाहिर है इसके लिए उसके थिंक टैंक में मंथन जरूर हो रहा होगा।

शुक्र गोचर 2026: वृषभ राशि में प्रवेश से इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

 अप्रैल 2026 में शुक्र ग्रह का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. 19 अप्रैल को शुक्र अपनी ही राशि वृषभ में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसे उसका स्वराशि गोचर कहा जाता है.ऐसी स्थिति में इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली हो जाता है, जिससे कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. शुक्र को धन, प्रेम, सौंदर्य और विलासिता का कारक ग्रह माना जाता है. जब यह अपनी ही राशि में आता है, तो जीवन में सुख-सुविधाओं, आकर्षण और आर्थिक मजबूती का स्तर बढ़ सकता है. इस बार का गोचर भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है, जहां कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की और समृद्धि लेकर आ सकता है. वृषभ– सबसे ज्यादा लाभ वृषभ राशि के लोगों को मिलने की संभावना है. इस दौरान आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. व्यक्तित्व में निखार आएगा.  आय के नए स्रोत बन सकते हैं. आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. साथ ही, जीवन में सुख-सुविधाओं का विस्तार भी संभव है, जिससे जीवनशैली में सुधार देखने को मिलेगा. कन्या- कन्या राशि के लिए भी यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है. करियर और व्यापार में नए अवसर सामने आ सकते हैं.  लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं. भाग्य का साथ मिलने से सफलता के रास्ते आसान हो जाएंगे.  परिवार में सकारात्मक माहौल बना रहेगा . रिश्तों में मजबूती आएगी. कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय प्रगति का संकेत दे रहा है.  नौकरी में उन्नति, वेतन वृद्धि या नए अवसर मिल सकते हैं.  निवेश के लिहाज से भी समय अनुकूल रह सकता है, जिससे भविष्य में लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी. परिवार के साथ संबंध बेहतर होंगे .जीवन में स्थिरता आएगी. इसके अलावा, कुछ अन्य राशियों को भी इस गोचर से आंशिक लाभ मिल सकता है, खासकर आर्थिक मामलों और सामाजिक प्रतिष्ठा में. हालांकि हर राशि पर प्रभाव अलग-अलग होगा, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी रहेगा.

गन्ना खेती होगी आधुनिक, किसानों को मशीनें किराये पर मिलेंगी

पटना  बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना की खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक वाले जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (गन्ना सेवा केंद्र) स्थापित करने का निर्णय है लिया है । इसका मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण को बढ़ावा देना, गन्ने की खेती में लागत को कम करना और उत्पादन को बढ़ाना है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती विस्तार करने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई है, ताकि किसान गन्ना की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें। किसानों को फायदा गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ना सेवा केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि गन्ना की खेती करने के लिए किसान इस सेंटर से आधुनिक मशीनों को किराये पर ले सकेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों को महंगी मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके जरूरत के समय इस सेंटर पर मशीनें उपलब्ध रहेंगी। बताया जाता है कि राज्य में ज्यादातर छोटे और सीमांत गन्ना किसान हैं, जिन्हें खेती के दौरान लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है। गन्ना किसानों की समस्या जिसमें खेती की लागत बहुत अधिक होना और उत्पादन कम होना, अत्याधुनिक मशीनों का आभाव एवं मजदूरों के भरोसे ज्यादातर काम कराना शामिल है। गन्ना की खेती करने में भूमि की तैयारी से लेकर उसके बुवाई और कटाई जैसे काम हाथ से होने के कारण प्रति एकड़ लागत बहुत बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां उपलब्ध मशीनें गन्ना खेती के पूरे चक्र के लिए रहेंगी, जिससे की किसानों को मिट्टी की तैयारी करने से लेकर बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई सहायता और कटाई में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को प्रति एकड़ लागत कम होगी, समय पर खेती के काम होंगे और गन्ना का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगे। गन्ना सेवा केंद्र ये सीएचसी आगे चलकर 'गन्ना सेवा केंद्र' के रूप में भी काम करेंगे। यह किसानों के लिए एक वन-स्टॉप समाधान होगा। यहां किसानों को खेती से जुड़ी सलाह, नई किस्मों की जानकारी, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी, मिल और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।  

रणबीर, आलिया और विक्की कौशल स्टारर ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट का ऐलान

संजय लीला भंसाली एक ऐसे डायरेक्टर हैं जिनकी फिल्मों का इंतजार ऑडियंस हमेशा करती हैं. अब जब से उन्होंने अपनी फिल्म 'लव एंड वॉर' की घोषणा की है, तब से ही इसे लेकर एक्साइटमेंट हैं. अब इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा अपडेट सामने आया है, जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार था. दरअसल भंसाली ने आखिरकार अपनी इस फिल्म की रिलीज डेट पर मुहर लगा दी है, जिससे साफ हो गया है कि रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. बता दें कि भव्य स्तर पर बनी लव एंड वॉर, संजय लीला भंसाली की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. अपनी भव्य कहानी और इमोशनल गहराई के साथ, यह फिल्म भारत की सबसे बड़ी लव सागा और इंडियन सिनेमा की सबसे शानदार रोमांटिक फिल्मों में से एक मानी जा रही है. रिलीज डेट से उठा पर्दा संजय लीला भंसाली ने 'लव एंड वॉर' को 21 जनवरी 2027 को रिलीज करने का फैसला किया है. फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज होगी. मेकर्स ने ऑफिशियल अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तारीख पर मुहर लगाई है. इसी के साथ अब फैंस के बीच हलचल शुरू हो गई है. क्या होगी फिल्म की कहानी? भंसाली ने एक इंटरव्यू के दौरान इस फिल्म की कहानी और इसके मिजाज को लेकर कुछ खास बातें शेयर कीं थी. उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक 'लव ट्रायंगल' पर आधारित होगी. लंबे समय बाद भंसाली किसी प्रेम कहानी पर फोकस कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म उनकी पिछली रिलीज 'हीरामंडी' या 'पद्मावत' जैसी ऐतिहासिक भव्यता से थोड़ी अलग होगी. स्टारकास्ट इस फिल्म की ताकत वहीं रणबीर कपूर, विक्की कौशल और आलिया भट्ट की कास्टिंग इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष माना जा रहा है. भंसाली इन तीनों को काफी पसंद करते हैं. बताया जा रहा है कि इस फिल्म का बजट करीब 200 करोड़ रुपये है. युद्ध के बैकग्राउंड पर सेट फिल्म की कहानी में ग्रैंड विजुअल्स, इमोशनल डेप्थ और हाई-स्टेक्स ड्रामा का मिक्स होने की उम्मीद है.

गर्मी में मसल्स क्रैम्प क्यों होते हैं? जानिए कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय

मसल्स की अचानक और खुद होने वाली संकुचन-अकड़न को क्रैम्प कहते हैं। इसका एहसास हल्के से लेकर ज्यादा गंभीर तक हो सकता है। महिलाओं में एब्डोमिनल क्रैम्प के ज्यादा मामले देखे जाते हैं, जो कि मेंस्ट्रुएशन से जुड़े होते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया कहा जाता है। लेकिन मेंस्ट्रुअल साइकिल के अलावा भी गर्मी में क्रैम्प के पीछे कई कारण हो सकते हैं। डिहाइड्रेशन गर्मी में होने वाले क्रैम्प का सबसे आम कारण डिहाइड्रेशन है। ज्यादा तापमान की वजह से ज्यादा पसीना आता है और शरीर से फ्लूइड तेजी से कम होने लगता है। डिहाइड्रेट होने पर मसल्स में ऐंठन और अकड़न आने का खतरा रहता है। पसीने में पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। ये सारे मिनरल्स मसल्स के फंक्शन में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं और इनका असंतुलन क्रैम्प का सीधा कारण बन सकता है। ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी गर्मी में फिजिकल एक्टिविटी बढ़ने से भी क्रैम्प हो सकते हैं। जो लोग गर्मी के दौरान आउटडोर एक्सरसाइज, ट्रैवल या रिक्रिएशनल एक्टिविटीज ज्यादा करते हैं, उनकी मसल्स में स्ट्रेन आने से थकान हो सकती है। इसके साथ हाइड्रेशन का ध्यान ना रखने से क्रैम्प की संभावना बढ़ जाती है। महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान हॉर्मोन के अंदर आने वाले उतार-चढ़ाव से क्रैम्प इंटेंस हो जाते हैं और डिहाइड्रेशन की वजह से इसकी गंभीरता बढ़ जाती है। क्रैम्प से बचने के लिए क्या करें? क्रैम्प को घर पर आसानी से मैनेज किया जा सकता है। सबसे पहले आपको बॉडी को हाइड्रेट रखना चाहिए। दिनभर के दौरान पर्याप्त पानी पीने के साथ शरीर में फ्लूइड बैलेंस रहता है और नारियल पानी या ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) पीकर इलेक्ट्रोलाइट्स को पूरा कर सकते हैं। बैलेंस्ड डाइट लेना भी जरूरी है, इसके लिए पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम से भरपूर केला, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। तुरंत राहत पाने के लिए क्या करें? क्रैम्प वाली जगह पर गर्म सिकाई करने से मसल्स और दर्द में तुरंत आराम मिलता है, इसके लिए आप हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल का इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर पेट के क्रैम्प में यह उपाय असरदार साबित होता है। मसल्स क्रैम्प को दूर करने के लिए हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज या योगा जैसी हल्की फिजिकल एक्टिविटी से फायदा मिलता है। यह तरीका ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर मांसपेशियों की अकड़न दूर करता है। कैफीन का ज्यादा सेवन ना करें, क्योंकि यह डिहाइड्रेशन कर सकता है। ओवर द काउंटर वाली दर्द निवारक दवाओं का बहुत कम सेवन करना चाहिए और अगर यह समस्या लगातार परेशान कर रही है तो खुद इलाज ना करें। ये लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं? अधिकतर क्रैम्प अस्थाई होते हैं और खतरनाक साबित नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षण दिखने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर घरेलू उपाय आजमाने के बाद भी दर्द लगातार बना हुआ है या गंभीर हो रहा है तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। महिलाओं को अगर क्रैम्प के साथ हेवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग, अनियमित मेंस्ट्रुअल साइकिल हो रही है या दर्द गंभीर हो रहा है तो प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए। इसके अलावा, क्रैम्प के साथ सूजन, लालिमा, चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी जैसी दिक्कतें होने के पीछे कोई छिपी हुई सीरियस प्रोब्लम हो सकती है, जैसे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, इंफेक्शन या एंडोमेट्रियोसिस जैसी गायनेकोलॉजिकल कंडीशन। गर्मी में क्रैम्प होना आम है और इससे बचना भी आसान है। हाइड्रेशन का ध्यान रखने, बैलेंस्ड डाइट लेने और आसान उपाय आजमाने से इसका खतरा कम किया जा सकता है। अपने शरीर की सुनें और दिक्कत बढ़ने पर इग्नोर करने की जगह डॉक्टर की मदद लें।

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ और 60 साल पुरानी महमूद की कल्ट फिल्म का कनेक्शन

लंबे इंतजार के बाद अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की जोड़ी अपनी नई हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' के साथ आज यानी 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट है और माना जा रहा है कि यह बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए झंडे गाड़ सकती है. लेकिन इस नई फिल्म के शोर के बीच एक दिलचस्प सच यह भी है कि 'भूत बंगला' नाम बॉलीवुड के लिए नया नहीं है. करीब छह दशक पहले, जब हॉरर और कॉमेडी का मेल भारतीय सिनेमा में शुरुआती दौर में था, तब दिग्गज कॉमेडियन महमूद ने इसी नाम से एक कल्ट क्लासिक फिल्म बनाई थी, जिसने उस दौर के दर्शकों को खूब डराया और हंसाया था. महमूद की 'भूत बंगला' साल 1965 में आई फिल्म 'भूत बंगला' का सारा दारोमदार दिग्गज एक्टर महमूद के कंधों पर था. उन्होंने न सिर्फ इसमें लीड रोल निभाया, बल्कि इस फिल्म की कहानी भी लिखी और इसे प्रोड्यूस भी किया. उस दौर में यह फिल्म अपनी अनोखी कहानी की वजह से काफी चर्चा में रही थी. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में महान म्यूजिक डायरेक्टर आरडी बर्मन (पंचम दा) ने भी एक्टिंग की थी. बहुत कम लोग जानते हैं कि यह आरडी बर्मन की बतौर एक्टर डेब्यू फिल्म थी. हालांकि उन्हें एक्टिंग का कोई खास शौक नहीं था, लेकिन महमूद के साथ गहरी दोस्ती होने के कारण वह इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए मान गए थे. एक्टिंग के साथ संगीत का जादू 1965 की इस फिल्म में आरडी बर्मन ने सिर्फ एक्टिंग ही नहीं की, बल्कि फिल्म का यादगार संगीत भी उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया था. इस फिल्म में तनुजा और नासिर हुसैन जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. हालांकि उस जमाने के सटीक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन आंकड़े मिलना मुश्किल है, लेकिन फिल्म के गाने और सस्पेंस से भरी कहानी दर्शकों को बेहद पसंद आई थी. आज भी इस फिल्म को एक 'ब्लॉकबस्टर' का दर्जा दिया जाता है और इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि IMDb पर इसे 6.4 की रेटिंग मिली हुई है. फ्री में उठा सकते हैं लुत्फ अगर आप अक्षय कुमार की फिल्म देखने जाने से पहले यह देखना चाहते हैं कि 60 साल पहले की 'भूत बंगला' कैसी थी, तो आपके लिए अच्छी खबर है. यह क्लासिक फिल्म यूट्यूब पर बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है. 'Sadabahar HD Songs' नाम के चैनल पर इसे पूरी क्वालिटी के साथ देखा जा सकता है. अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी से बड़ी उम्मीदें अब 16 साल के लंबे अंतराल के बाद अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की सुपरहिट जोड़ी वापस लौटी है. फिल्म 'भूत बंगला' में उनके साथ राजपाल यादव, परेश रावल, असरानी, तबू और वामिका गब्बी जैसे दिग्गज सितारों की फौज है. फैंस को उम्मीद है कि यह फिल्म 'भूल भुलैया' जैसा जादू फिर से बिखेरेगी. अब देखना यह होगा कि क्या अक्षय कुमार की यह नई फिल्म 1965 वाली 'भूत बंगला' की तरह ही यादगार बन पाएगी या नहीं.

स्पाइसजेट की नई नाइट फ्लाइट से यात्रियों को बड़ी सुविधा

  जयपुर गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) से माया नगरी मुंबई (Mumbai) के बीच सफर करने वाले हवाई यात्रियों के लिए आज का दिन नई सहूलियतें लेकर आया है. गुरुवार रात से दोनों शहरों के बीच एक नई फ्लाइट सेवा (New Flight Service Jaipur) का आगाज हो गया है, जिसने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jaipur International Airport) की कनेक्टिविटी को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है. इस नई सेवा के शुरू होने के साथ ही अब जयपुर और मुंबई के बीच रोजाना संचालित होने वाली उड़ानों की कुल संख्या 11 पहुंच गई है. यानी अब यात्रियों के पास अपनी सुविधा के अनुसार फ्लाइट चुनने के लिए पहले से कहीं अधिक विकल्प मौजूद हैं. स्पाइसजेट की फ्लाइट का नया शेड्यूल इस नई सेवा की कमान स्पाइस जेट एयरलाइंस (SpiceJet) ने संभाली है. कंपनी ने अपनी फ्लाइट संख्या SG-169 और SG-170 को इस रूट पर तैनात किया है, जिसका संचालन गुरुवार रात से प्रभावी हो गया है. शेड्यूल के अनुसार, यह विमान मुंबई से उड़ान भरकर रात 10:35 बजे जयपुर पहुंच गया है. इसके तुरंत बाद, यही विमान जयपुर से अपनी वापसी यात्रा शुरू करता है. इस नई सर्विस के आने से जयपुर एयरपोर्ट पर रात के समय यात्रियों की चहल-पहल और बढ़ने की उम्मीद है. लेट नाइट यात्रियों के लिए वरदान फ्लाइट के समय को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. जयपुर एयरपोर्ट से यह फ्लाइट रात 11:25 बजे मुंबई के लिए रवाना होती है. यह लेट नाइट स्लॉट विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने दिन भर के काम या बिजनेस मीटिंग्स निपटाकर रात में सफर करना चाहते हैं. जानकारों का मानना है कि उड़ानों की संख्या 11 तक पहुंचने से न केवल कनेक्टिविटी सुधरी है, बल्कि इससे आने वाले दिनों में किराए में भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को होगा.

डाइनिंग टेबल वास्तु टिप्स: इन गलतियों से बचें, वरना हो सकता है नुकसान

अक्सर हम घर की साफ-सफाई और सजावट पर ध्यान तो देते हैं, लेकिन कुछ छोटी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो धीरे-धीरे नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं. खासकर डाइनिंग टेबल जहां पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करता है. वास्तु शास्त्र मानता है कि यहां रखी चीजें सीधे घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं. इसीलिए जरूरी है कि डाइनिंग टेबल को हमेशा साफ, सुसंगठित और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखा जाए. आइए जानते हैं किन चीजों को यहां रखने से बचना चाहिए. दवाइयों को रखें दूर डाइनिंग टेबल पर दवाइयां रखना अशुभ माना जाता है. यह संकेत देता है कि घर में बीमारियों का प्रभाव बढ़ सकता है. कोशिश करें कि दवाइयों को हमेशा किसी अलग और निर्धारित स्थान पर ही रखें, ताकि भोजन के स्थान की ऊर्जा शुद्ध बनी रहे. नुकीली वस्तुओं से बनती है नकारात्मकता चाकू, कैंची या अन्य धारदार चीजों को खाने के बाद टेबल पर छोड़ देना ठीक नहीं माना जाता. वास्तु के अनुसार, ये वस्तुएं तनाव और विवाद को बढ़ावा दे सकती हैं.  इन्हें उपयोग के तुरंत बाद हटा देना बेहतर होता है. जूठे बर्तन और गंदगी से बचें खाना खाने के बाद टेबल पर जूठे बर्तन या बचा हुआ खाना छोड़ना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. यह आदत धीरे-धीरे घर की आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है. इसलिए हमेशा टेबल को तुरंत साफ करना चाहिए. बेकार सामान न रखें डाइनिंग टेबल को स्टोर की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है. अखबार, बिल, बैग या अन्य अनावश्यक चीजें यहां रखने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है.  टेबल जितनी साफ और खाली होगी, उतना ही सकारात्मक माहौल बना रहेगा. टूटी-फूटी या खराब चीजें हटाएं यदि टेबल पर टूटी प्लेट, क्रैक वाले बर्तन या खराब सजावटी सामान रखा हो, तो यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है.  ऐसी चीजें घर में रुकावट और आर्थिक नुकसान का संकेत मानी जाती हैं. क्या करें? डाइनिंग टेबल पर ताजे फूल, फल या साफ-सुथरा टेबल कवर रखना शुभ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के बीच सामंजस्य बना रहता है.