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बोकारो में कंकाल मामले पर HC का बड़ा सवाल, पुलिस की लापरवाही पर जताई नाराजगी

 बोकारो झारखंड के बोकारो में एक युवती के लापता होने और उसके बाद जंगल से एक महिला का कंकाल मिलने के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), बोकारो SP, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के निदेशक और विशेष जांच टीम (SIT) को समन जारी करते हुए 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह समन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लापता लड़की की मां रेखा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। उनकी 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में बोकारो के पिंड्राजोरा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर लापता लड़की की मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बिना जांच के पुलिस ने किया बड़ा दावा इसी बीच हाल ही में बोकारो पुलिस ने जंगल से एक स्त्री का कंकाल बरामद किया और दावा किया कि यह लापता लड़की का हो सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता रेखा देवी के वकील ने अदालत को बताया कि बोकारो पुलिस द्वारा बरामद किया गया महिला का कंकाल लापता पीड़िता का नहीं है। 'कंकाल मिलने के बाद भी DNA मिलान नहीं कराया' इसके बाद न्यायाधीशों ने सरकार से पूछा कि क्या उस कंकाल का रेखा देवी और उनके पति के साथ DNA के साथ मिलान किया गया है। तब ना में जवाब मिलने पर अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कंकाल के कई दिन पहले ही बरामद हो जाने के बावजूद, कोई DNA टेस्ट नहीं किया गया और न ही कोई सैंपल लिया गया। HC ने कहा- पूरी प्रक्रिया में की जा रही देरी अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिनेश महतो नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बोकारो के एक जंगल से एक महिला का कंकाल बरामद किया गया है। तो जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सैंपल पहले ही ले लिया गया होता, तो नतीजा कुछ ही घंटों में पता चल जाता, लेकिन बिना किसी वजह के पूरी प्रक्रिया में देरी की जा रही है। 18 पुलिस कांस्टेबलों को किया गया निलंबित इसी बीच, बोकारो SP ने इस केस में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सहित 18 पुलिस कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है। रेखा देवी की 18 साल की बेटी 31 जुलाई, 2025 को लापता हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। लेकिन बेटी का खोजने के लिए पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर, रेखा देवी ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।  

योगी बोले- यूपी में ‘नो कर्फ्यू नो दंगा’, बंगाल में BJP सरकार का किया दावा

लखनऊ पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। सीएम योगी आदित्यानाथ एनडीए के लिए ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। गुरूवार को बाराबनी में योगी ने चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उनके निशाने पर टीएमसी और ममता बनर्जी रहीं। योगी ने समाजवादी पार्टी का नाम लेकर तृणमूल कांग्रेस(TMC) पर हमला बोला। उन्होने कहा कि जिस तरह ममता दीदी को राम और दुर्गा के नाम से चिढ़ होती है। वैसी है यूपी में भी थी। लेकिन न सपा के विरोध से और न ही कांग्रेस विरोध से राममंदिर का आंदोलन रुका। योगी ने एक कार सेवक का जिक्र करते हुए कहा कि उसने मुझे बताया कि 1990 में टीएमएस की ही समर्थित पार्टी सपा ने उन पर गोलियां चलवाईं थी। सपा सरकार में गोलियां चली थीं। दंगा नहीं होगा ये सिर्फ बीजेपी गारंटी दे सकती है- योगी योगी ने कहा कि लेकिन जब डबल इंजन की सरकार आई तो अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर खड़ा हो गया। मोदी है तो मुमकिन है। ये गारंटी सिर्फ बीजेपी दे सकती है कि दंगा नहीं होगा, कर्फ्यू नहीं लगेगा, गौमाता को कटने नहीं देंगे, और हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे। बंगाल में बुलडोजर का जिक्र करते हुए कहा कि बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफियाओं का भी इलाज करता है। बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों की पसलियों को मसल डालता है। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा- योगी उन्होने कहा कि यूपी में अब दंगा नहीं होता। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा। अब कोई सड़क पर नमाज नहीं पढ़ सकता है। जितने माफिया थे, सब जहन्नुम की यात्रा पर चले गए। अब कोई माफिया नहीं है। कोई गुंडा नहीं है। अब वहां पर हर नागरिक सुरक्षित है। गुंडे-माफिया का इलाज सिर्फ भाजपा ही कर सकती है। कल्चरल कैपिटल को क्राइम कैपिटल बना दिया- योगी टीएमसी पर निशाना साधते हुए योगी ने कहा कि एक समय बंगाल कल्चरल कैपिटल था, लेकिन आज क्राइम कैपिटल बन गया है। टीएमसी ने बंगाल को भ्रष्टाचार और अराजकता का केंद्र बना दिया। यहां के संसाधनों पर माफिया हावी हो रहे हैं। टीएमसी के गुंडे क्या कह रहे हैं, कोई माफिया क्या कह रहा है, उससे डरने की जरूरत नहीं है। आने दीजिए बंगाल में डबल इंजन की सरकार। ये लोग आपको सड़कों पर झाडू लगाते दिखाई देंगे। देखिए यूपी में कितना परिवर्तन हो गया है। कोई सड़क पर नमाज नहीं पढ़ सकता है। सभी पर्व- त्यौहार शांति से बनाए जाते हैं। उज्जवल भविष्य की गारंटी सिर्फ भाजपा है। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने एनडीए प्रत्याशी को लिए वोट देने की अपील की।

गोड्डा में 1363 एकड़ भूमि अधिग्रहण को चुनौती, हाईकोर्ट ने मामले पर लिया संज्ञान

रांची  झारखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अडानी पावर लिमिटेड के गोड्डा स्थित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। याचिका गोड्डा जिले के करीब 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना में उत्पादित पूरी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है। ऐसे में अधिग्रहण को सार्वजनिक उद्देश्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रार्थियों का तर्क है कि जब परियोजना का लाभ देश के आम नागरिकों को नहीं मिलना है तो कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं माना जा सकता। संताल परगना टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) प्रक्रिया में भी लगभग 4,000 प्रभावित लोगों जिनमें किरायेदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं को शामिल नहीं किया गया।

राजस्थान,लापरवाही पर शिक्षकों को चार्जशीट, कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड

 चित्तौड़गढ़ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुरा निम्बाहेड़ा के पूरे स्टाफ को जांच के दायरे में लिया. शिकायतें मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय ने विशेष जांच दल बनाया था. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. दो शिक्षकों को थमाए गए गंभीर आरोप पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार नीलम मीणा और शैलेन्द्र कुमार को राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत गंभीर आरोप पत्र जारी किए गए हैं. इन पर लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रधानाध्यापक समेत चार को नोटिस लापरवाही के मामले में प्रधानाध्यापक वीरमदेव मीना सहित चार अन्य शिक्षकों सीमा जाट रमेश चन्द्र मीणा और विश्व ज्योति को सीसीए नियम 17 के तहत नोटिस दिए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. पोक्सो मामले में कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड दूसरे मामले में विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सामरिया खुर्द बेंगू में तैनात कंप्यूटर अनुदेशक राजेश कुमावत को निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है. न्यायिक हिरासत में आरोपी, जांच शुरू पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है. इसी को देखते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंशन लागू किया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बड़ी सादड़ी रखा गया है और उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.

किशनगंज में पुलिस अफसरों की जोड़ी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप

किशनगंज बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल इतना मजबूत था कि अवैध वसूली से लेकर उसके बंटवारे तक एक संगठित तंत्र के तहत काम किया जाता था। ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां बेनामी हो सकती हैं और इन्हें छिपाने के लिए तीसरे पक्ष के नाम का इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न गैर कानूनी धंधों को संरक्षण भी दिया जाता था। ईओयू के अनुसार दोनों घूसखोर पुलिस अधिकारी के बीच बीते तीन महीने में 2000 बार मोबाइल कॉल पर बातचीत हुई है।आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। बेनामी संपत्तियों का सत्यापन कर रही ईओयू ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीम के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गयी जमीन के भुगतान स्त्रोत आदि को लेकर जांच चल रही है। थानेदार से ईओयू कार्यालय में बुला कर पूछताछ होगी आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपित किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर लगे आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) उनसे पूछताछ करेगी। उनको नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पटना स्थित ईओयू कार्यालय बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के मुताबिक आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने की नोटिस दी जा सकती है। पूछताछ के दौरान उनको अपने पक्ष में बयान व दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। थानाध्यक्ष पर अपने सेवाकाल में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। अभिषेक निलंबित एसडीपीओ का राजदार किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की छानबीन के दौरान ही अभिषेक रंजन ईओयू के निशाने पर आये। छानबीन में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के राजदार हैं। उनका स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध हैं। उनके व्यापार को प्रश्रय देने के एवज में उनको नियमित रूप से कमीशन की राशि मिलती थी। यह राशि जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में निवेश की जाती थी।

बड़े लोगों को निशाना बनाकर फर्जी सोना बेचने वाला गिरोह पकड़ा गया

गुरुग्राम गुरुग्राम पुलिस ने सस्ते दाम पर सोने के सिक्के बेचने का झांसा देकर देशभर में ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह वही गिरोह है जिसने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान और अभिनेता आदित्य पंचोली जैसे नामचीन लोगों को भी अपना शिकार बनाया था. पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से करोड़ों रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया है. यह गिरोह पढ़े‑लिखे और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को बड़े ही शातिराना तरीके से जाल में फंसाता था. गुरुग्राम पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, सस्ते सोने के सिक्के बेचने के नाम पर ठगी करने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गुजरात और गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 2 करोड़ 30 लाख 5 हजार 700 रुपये नकद और 678 ग्राम सोना बरामद किया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने नकली सोने के सिक्कों के जरिए करीब 2.49 करोड़ रुपये नकद और 50 तोला सोने की ठगी को अंजाम दिया था. ऐसे जीतते थे भरोसा, फिर करते थे वारदात पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देते थे. सबसे पहले वे पीड़ित को कुछ असली सोने और चांदी के सिक्के दिखाते थे, जिससे उसका भरोसा जीत लिया जाता था. जब पीड़ित को यह यकीन हो जाता कि सिक्के असली हैं, तो आरोपी उसे अधिक मात्रा में सस्ते दाम पर सोना बेचने का झांसा देते थे. इसी लालच में आकर लोग बड़ी रकम दे देते थे और बदले में उन्हें पीतल के नकली सिक्के थमा दिए जाते थे. हाईवे पर करते थे रेकी, बड़ी गाड़ियों को बनाते थे निशाना आरोपी पहले बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे पर रेकी करते थे. जहां से बड़ी और लग्जरी गाड़ियां गुजरती थीं, वहां ये गिरोह सक्रिय रहता था. जैसे ही उन्हें कोई बड़ी गाड़ी नजर आती, वे उसे किसी बहाने से रोक लेते और फिर अपने ठगी के जाल में फंसा लेते थे. पुलिस के मुताबिक, गिरोह खासतौर पर अमीर, पढ़े‑लिखे और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाता था. मजदूर बनकर सुनाते थे ‘खुदाई में सोना मिलने' की कहानी पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य खुद को गरीब मजदूर के रूप में पेश करते थे. वे यह कहानी गढ़ते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें सोना मिला है और वे उसे सस्ते में बेचना चाहते हैं. इस कहानी से लोगों में लालच पैदा कर वे ठगी को अंजाम देते और फिर मौके से फरार हो जाते थे. 25 साल से ठगी कर रहा था सरगना प्रभुभाई इस गिरोह का सरगना प्रभुभाई बताया जा रहा है, जो पिछले 25 वर्षों से इस तरह की ठगी की वारदातों में शामिल रहा है. उसके खिलाफ देश के कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हैं. इतना ही नहीं, ठगी के पैसों से उसने एक होटल खरीदा और “लव यू” नाम की एक गुजराती फिल्म का निर्माण भी किया. गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क देश के अलग‑अलग राज्यों में फैला हुआ था. इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी. गुरुग्राम पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है, ताकि इस तरह की ठगी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.

सुवर्णरेखा नदी किनारे बम मिलने से हड़कंप, सेना से मदद मांगी गई

 सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम जिले में बहरागोड़ा में सुवर्णरेख नदी किनारे एक बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह बम वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान का हो सकता है। बम की खबर मिलते ही लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत दूरी बना ली। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसी साल मार्च में भारतीय सेना के जवानों ने बहरागोड़ा में दो एक्टिव बमों को निष्क्रिय किया था। इन दो बम को लेकर भी आशंका थी कि यह वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान के हो सकते हैं। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड की टीम ने छानबीन में पाया था कि दोनों बम एक्टिव थे और वजन में काफी भारी थे। 50-100 मीटर की दूरी पर ही फिर मिला एसपी (ग्रामीण) ऋषभ गर्ग ने कहा ने कहा ‘बम को पानीपाड़ा गांव के निवासियों ने बुधवार की रात को बम को देखा था। यह हम सुवर्णरेख नदी किनारे पर पड़ा था। बम उस जगह से लगभग 50-100 मीटर की दूरी पर है जहां पहले दो बम मिले थे। हम निरीक्षण करने और जरूरी कार्रवाई शुरू करने के लिए भारतीय सेना के साथ बातचीत कर रहे हैं।’ इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि बम जैसी दिखने वाली धातु से बनी ठोस वस्तु का आकार और वजन मार्च में बरामद किए गए दो बमों के के जैसा ही है। एहितयात के तौर पर इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 25 मार्च को किया था डिफ्यूज पानीपड़ा-नागसुड़ाई में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले विशाल सिलेंडरनुमा मिसाइल बम को भारतीय सेना ने आस-पास के इलाके को खाली करवाकर डिफ्यूज कर दिया था। बम का वजन करीब 200 किलोग्राम था। ये बम मजदूर को रेत की खुदाई के दौरान मिला था। 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज इसके बाद, जब मौके की जांच की गई तो पास के ही एक ग्रामीण के घर में भी उसी आकार का दूसरा बम बरामद हुआ। दोनों बमों को डिफ्यूज कम करने के लिए इन विस्फोटकों को घटना स्थल के पास ही खोदे गए 25-30 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया और चारों तरफ से रेत की बोरियों से ढक दिया गया ताकि किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके। दोनों बमों को एक के बाद एक 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज कर दिया गया था। साथ ही एहतियात के तौर पर लोगों को अगले 24 घंटों तक उस स्थान के आसपास न जाने की सलाह दी गई थी।  

मंगल पांडेय की खाली सीट पर फिर होगा MLC उपचुनाव

 पटना बिहार विधान परिषद की एक और सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। विधानसभा कोटे की एक सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधायक निर्वाचित होने के कारण खाली हुई थी। यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। मंगल पांडेय का कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। अब इस पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में जो जीतकर इस सीट से जो एमएलसी बनेंगे, वह 4 साल तक इस पद पर रहेंगे भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। आयोग के अनुसार विधान परिषद की इस सीट पर उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को अधिसूचना जारी की जाएगी। उसी दिन नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। इसके बाद 2 अप्रैल को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 4 मई तक नामांकन वापसी हो सकेगी। इसके बाद 12 मई को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी और रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। नडीए के खाते में जाएगी यह सीट? इस उपचुनाव में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में एनडीए का संख्याबल भारी है। विधानसभा कोटे की एक ही सीट पर मतदान होने इसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, तो माना जा रहा है कि इस बार भी इसी पार्टी से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा अपने सहयोगी दलों में से भी किसी को प्रत्याशी बनवा सकती है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारी पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस उपचुनाव में विपक्ष की ओर से प्रत्याशी उतारा जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर भी 12 मई को ही वोटिंग बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की भोजपुर-बक्सर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान भी 12 मई को ही होने वाला है। इस उपचुनाव की घोषमा चुनाव आयोग के द्वारा पिछले दिनों की गई थी। जदयू के एमएलसी रहे राधाचरण साह के विधायक निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में एनडीए की ओर से राधाचरण के बेटे कन्हैया प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। वह जदयू के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोनू राय को टिकट दिया है, जो पूर्व एमएलसी लालदास राय के बेटे हैं।

अक्षय कुमार की वॉर फिल्म ‘गोरखा’ बंद, फैंस की उम्मीदों को झटका

अक्षय कुमार के फैंस के लिए एक उदास कर देने वाली खबर सामने आई है. लंबे समय से जिस वॉर ड्रामा 'गोरखा' का इंतजार किया जा रहा था, उसे लेकर अब खुद खिलाड़ी कुमार ने स्थिति साफ कर दी है. अब यह साफ हो गया है कि यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा चुका है. अपनी अगली फिल्म 'भूत बंगला' की तैयारियों के बीच अक्षय ने उन तमाम अटकलों पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है. साल 2021 में जब इस फिल्म का ऐलान हुआ था, तब अक्षय के लुक और फिल्म की कहानी ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी थीं. अक्षय कुमार का खुलासा हाल ही में एक लाइव चैट सेशन के दौरान जब फैंस अक्षय कुमार से उनकी आने वाली फिल्मों के बारे में सवाल पूछ रहे थे, तभी एक फैन ने 'गोरखा' को लेकर अपडेट मांगा. अक्षय ने बिना किसी घुमाव के सीधा और साफ जवाब देते हुए कहा, 'नहीं, 'गोरखा' फिल्म नहीं बन रही है.' इस एक लाइन के जवाब ने उन लाखों फैंस की उम्मीदों को तोड़ दिया, जो अक्षय को पर्दे पर एक महान युद्ध नायक की भूमिका में देखना चाहते थे. इस प्रोजेक्ट को लेकर अनिश्चितता काफी समय से बनी हुई थी. फिल्ममेकर आनंद एल. राय ने 2023 में ही कुछ इशारे दिए थे. हालांकि उस वक्त उन्होंने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था कि अक्षय ने फिल्म छोड़ दी है, लेकिन उन्होंने यह जरूर माना था कि कुछ तकनीकी और तथ्यात्मक दिक्कतें आ रही हैं. उनका कहना था कि कहानी से जुड़े कुछ तथ्यों पर स्पष्टीकरण की जरूरत है, जिसकी वजह से काम को फिलहाल रोक दिया गया है. अब लगता है कि वे दिक्कतें हल नहीं हो पाईं और फिल्म को बंद करने का फैसला लेना पड़ा. क्या थी गोरखा की कहानी? 'गोरखा' की घोषणा अक्टूबर 2021 में बड़े धूमधाम से की गई थी. यह फिल्म भारतीय सेना की 5वीं गोरखा राइफल्स के जांबाज अधिकारी मेजर जनरल इयान कार्डोज़ो के जीवन पर आधारित थी. फिल्म का डायरेक्शन नेशनल अवॉर्ड विजेता संजय पूरन सिंह चौहान करने वाले थे. इसमें 1962, 1965 और खास तौर पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की बहादुरी की गाथा दिखाई जानी थी. मेजर जनरल इयान कार्डोजो को उनकी निडरता के लिए जाना जाता है, और अक्षय कुमार इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित थे. भूत बंगला को लेकर चर्चा में फिल्म की घोषणा के वक्त जो पहला पोस्टर जारी किया गया था, उसमें अक्षय का अवतार बेहद दमदार नजर आ रहा था.  लोगों का मानना था कि अक्षय एक बार फिर 'केसरी' जैसा जादू बिखेरने को तैयार हैं. फिलहाल अक्षय कुमार अपना पूरा ध्यान अपनी आने वाली हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' पर लगा रहे हैं. हालांकि 'गोरखा' प्रोजेक्ट के बंद भी खिलाड़ी कुमार के पास अभी भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स कतार में हैं.

सम्राट चौधरी सरकार में शराबबंदी नीति पर सवाल, राजस्व नुकसान का मुद्दा उठा

 पटना बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे। बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है। माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं। बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।