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हरियाणा बीजेपी ने निकाय चुनाव को लेकर बनाया ‘मिशन मोड’ प्लान

पंचकूला  हरियाणा बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में आज कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने की। बैठक में आगामी निकाय चुनावों की रणनीति, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। निकाय चुनाव के लिए 'मिशन मोड' में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने स्पष्ट किया कि पार्टी निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के लिए निकाय चुनाव वाले क्षेत्रों के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी 16 से 18 अप्रैल तक संबंधित निगम, परिषद और पालिकाओं का दौरा करेगी। इस बीच कमेटी स्थानीय विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए 20 अप्रैल को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है। संगठनात्मक चर्चा और विपक्षी घेराबंदी बैठक के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि बैठक में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम', पीएम के 'मन की बात' कार्यक्रम और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजनों पर भी मंथन हुआ। पार्टी अंबेडकर जयंती को बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े उत्साह के साथ मना रही है। बैंक फ्रॉड मामला: पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड पर बड़ौली ने कहा कि सरकार को पूरा पैसा ब्याज समेत वापस मिल चुका है और विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। कैप्टन अभिमन्यु का विपक्ष पर तीखा हमला कैप्टन अभिमन्यु ने मंडियों में फसल खरीद की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले हुड्डा सरकार में किसानों को दो-दो रुपये के चेक मिलते थे और खाद के लिए थानों से पर्चियां कटवानी पड़ती थीं। आज किसानों के खातों में 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे पैसा (DBT) पहुंच रहा है, जो पहले के समय में सपना था। कैप्टन ने कहा कि कहा कि विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है।  

ई-रिक्शा व ऑटो में जेवर चोरी करने वाला महिला गैंग पकड़ा गया

लखनऊ ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा यात्रियों को उलझाकर जेवर चोरी व टप्पेबाजी करने वाले महिला गैंग का खुलासा करते हुए कृष्णानगर पुलिस ने तीन महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई सोने की चेन, एक अंगूठी और पायल बरामद की गई है। डीसीपी दक्षिणी अमित आनंद ने बताया कि कृष्णानगर इलाके में नवंबर 2025 से बीते मार्च माह के बीच टप्पेबाजी की तीन घटनाएं घटी थीं। इस मामले में कृष्णानगर पुलिस की एक टीम को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे 600 से 700 सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और वारदात को अंजाम देने वाले गैंग का पता लगाते हुए मंगलवार को डूडा कॉलोनी आशाराम बापू मार्ग मानसनगर से दुबग्गा सीतापुर बाईपास झुग्गी झोपड़ी निवासी शेषकला, उसके पति दयालाल, पूजा और गौरी देवी को गिरफ्तार किया। शेषकला, दयालाल और पूजा मूल रूप से नागपुर के रहने वाले हैं, जबकि आरोपी गौरी देवी बिहार के आरा की निवासी है। महिला दरोगा ने सादे कपड़े में एक हफ्ते तक रेकी की एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि इस गैंग का पकड़ने में कृष्णानगर थाने पर तैनात महिला दरोगा सिद्धि मिश्रा की सबसे अहम भूमिका रही। फुटेज मिलने के बाद उन्होंने सादे कपड़े में कई दिनों में घूम-घूम कर गैंग के बारे में पता किया। इसके बाद उन्होंने गैंग के निवास स्थान की पूरी रेकी कर जानकारी जुटाई और फिर पुलिस ने इस गैंग पकड़ा। एसीपी ने बताया कि शेषकला इस गैंग की लीडर है और पहले से उनके खिलाफ बख्शी का ताला, मड़ियांव, हरदोई, नाका में चोरी के कई मामले दर्ज हैं। उल्टी करने के बहाने या पिन चुभोकर वारदात को देते थे अंजाम एसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा में सफर करने वाले ऐसे वृद्धों को शिकार बनाते थे जो जेवर पहने होते थे। आरोपी महिलाएं उसी वाहन में सवार तो जाते थे, जिसमें पीड़ित बैठते थे। सफर के दौरान आरोपी महिलाएं उल्टी करने या पीड़ित को सेफ्टी पिन चुभोकर उनको उलझा कर जेवर चोरी कर लेते थे। आरोपी नागपुर से ट्रेन से लखनऊ व अन्य शहरों में जाकर इलाज के नाम पर या फेरी लगाने के बहाने से भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देते थे। बार-बार पता बदले देते थे आरोपी पूछताछ में पुलिस को इस बात का पता चला है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपी न सिर्फ अपना ठिकाना बदलते थे, बल्कि आधार कार्ड पर भी पता बदलवा लेते थे। ऐसे में इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।  

‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ का ऐलान, 25 दिसंबर को रिलीज होगी फिल्म

‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट की घोषणा लॉस एंजेलिस में नहीं, बल्कि लास वेगास में हुए सोनी के सिनेामकॉन इवेंट के दौरान की गई, जहां फिल्म की पहली झलक और ट्रेलर भी दिखाया गया। इस खास मौके पर केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक खुद मौजूद थे। जानिए क्या होगा ‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट का ऑफिशियल टाइटल। क्या होगा मूवी का नाम? केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक स्टारर इस फिल्म का नाम ‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ होगा। फिल्म 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें कैरन गिलन भी अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन जेक कसडन ने किया है, जबकि इसे मैट टोलमैक, ड्वेन जॉनसन, डेनी गार्सिया, हीराम गार्सिया और जेक कसडन ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म की कहानी जेफ पिंकनर और स्कॉट रोसेनबर्ग ने लिखी है, जो पहले भी इस सीरीज के पार्ट्स लिख चुके हैं।

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.

PSL प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबर आजम का जवाब, आलोचना पर दी सफाई

नई दिल्ली  पाकिस्तान सुपर लीग के मुकाबलों से ज्यादा मजेदार तो मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है। कुछ ही दिन पहले ही एक रिपोर्टर के द्वारा विराट कोहली जैसा मैच फिनिश नहीं करने के सवाल पर भड़कने वाले बाबर आजम अब एक और पत्रकार पर आग बबूला हुए है पेशावर जाल्मी के कप्तान बाबर आजम के टी20 करियर के साथ सबसे बड़ी समस्या उनकी स्ट्राइक रेट रही है। इसको लेकर जब उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल किया गया कि क्या उन्होंने अपने खेल पर दोबारा काम किया है, जैसा कि टीम के कोच मिस्बाह-उल-हक ने हिंट दिया था। इस पर बाबर ने जो जवाब दिया, वो हैरान कर देने वाला रहा। बाबर आजम ने रिपोर्टर का मुंह किया बंद अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो बाबर आजम का स्ट्राइक रेट उनकी टीम के बाकी खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम है। पेशावर जाल्मी के लिए इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले कुसल मेंडिस ने 5 पारियों में 309 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 171.67 का है। वहीं, पाकिस्तान के ही साहिबजादा फरहान ने 249 रन 180.43 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जबकि बाबर आजम का स्ट्राइक रेट इस सीजन में अब तक महज 130.68 का रहा है। मुल्तान सुल्तांस को 24 रनों से हराने के बाद जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्राइक रेट पर सवाल उठा, तो बाबर ने कहा, "आपको अलग-अलग पोजीशन पर अलग तरह से खेलना होता है। स्कोरबोर्ड को ध्यान में रखते हुए यह देखना पड़ता है कि टीम की जरूरत क्या है। मुझे लगता है कि आपको पहले परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए। जैसे कराची की जिस विकेट पर 240 रन बने थे, अगले दिन वैसी स्थिति नहीं थी और हम मुश्किल से 180 रन ही बना सके। इसलिए, हालात बहुत मायने रखते हैं।" 31 साल के बाबर ने आगे कहा,     हर दिन आपको एक जैसी पिच नहीं मिलेगी, आप हर दिन एक जैसा नहीं खेल सकते, विपक्षी टीम आपके लिए प्लान बनाती है। मुंह उठाकर शॉट्स नहीं खेल सकते। हर दिन आपको एक अलग गेम प्लान के साथ आना पड़ता है। अगर आप पहले छह ओवर में बल्लेबाजी कर रहे हैं, तो मुझे पता है कि पावरप्ले का फायदा उठाना है. फिर साझेदारी बनानी है, मौके लेने हैं, गेंदबाजों को टारगेट करना है।    साझेदारी की अहमियत पर भी जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कई बार आप स्ट्राइक रेट संभाल लेते हैं और कई बार नहीं। यही साझेदारी की अहमियत है। एक बल्लेबाज दूसरे का दबाव कम कर सकता है।" अगर बात करें मैच की तो पेशावर जाल्मी बनाम मुल्तान सुल्तांस के बीच खेले गए पीएसएल के 22वें मैच में पेशावर जाल्मी की टीम को जीत मिली। ये उनकी मौजूदा टूर्नामेंट की पांचवीं जीत रही और वो पीएसएल की अंक तालिका में 11 अंक के साथ टॉप पर बनी हुई है, जबकि मुल्तान सुल्तान की टीम प्वाइंट्स टेबल में 8 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है।  

वर्ल्ड कप के स्टार बुमराह आईपीएल में क्यों हो रहे हैं फीके?

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप-2026 में 14 विकेट लेकर पूरे टूर्नामेंट के सबसे घातक तेज गेंदबाज साबित हुए जसप्रीत बुमराह के लिए आईपीएल 2026 की शुरुआत बिल्कुल उलटी कहानी लेकर आई है. वही बुमराह, जिनकी यॉर्कर को दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज भी मुश्किल से पढ़ पाते थे, इस सीजन में विकेट लेने के लिए जूझते नजर आ रहे हैं. उनकी गेंदों से पहले जैसी धार और निर्णायक असर गायब दिख रहा है, जिससे क्रिकेट फैन्स भी हैरान हैं. चार मैच… 15 ओवर… और नतीजा बेहद चौंकाने वाला- एक भी विकेट नहीं. 123 रन खर्च, 8.20 का इकोनॉमी रेट और सबसे बड़ी चिंता, वो ‘विकेट टच’ जो बुमराह की पहचान था, पूरी तरह गायब. क्रिकेट के गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या बुमराह को किसी की नजर लग गई है या फिर बल्लेबाजों ने उनका कोड तोड़ दिया है? सिर्फ कुछ महीने पहले तक तस्वीर बिल्कुल अलग थी. टी20 वर्ल्ड कप में बुमराह ने अपनी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को बांधकर रख दिया था. 8 मैच, 14 विकेट, 6.21 की इकोनॉमी और 12.42 का एवरेज…ये आंकड़े बताते हैं कि वह अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ व्हाइट बॉल फॉर्म में थे. डेथ ओवर्स में उनका नियंत्रण, यॉर्कर की सटीकता और धीमी गेंदों का मिश्रण उन्हें लगभग अजेय बना रहा था. लेकिन आईपीएल में आते ही वही गेंदबाज अचानक सामान्य दिखने लगे. चार मैचों में विकेट का कॉलम खाली होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है कि कुछ गड़बड़ जरूर है. यॉर्कर क्यों हो गई कमजोर? बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी यॉर्कर रही है. वह गेंद जो बल्लेबाज के पैरों के पास आकर स्टंप्स को निशाना बनाती है. लेकिन इस सीजन में वही गेंद बार-बार फुल टॉस या आधी पिच पर गिरती दिखी है. बुमराह के इस बुरे हाल के तीन कारण हो सकते हैं – 1. थकान का असर लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और लीग क्रिकेट के बीच शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिली हो सकती है. जसप्रीत बुमराह जैसे अनोखे एक्शन वाले गेंदबाज पर यह असर और भी ज्यादा होता है. उनके एक्शन में डिलीवरी के समय शरीर पर असामान्य दबाव पड़ता है, ऐसे में थोड़ी भी थकान सटीकता पर सीधा असर डालती है. 2. वर्कलोड मैनेजमेंट की गड़बड़ी वर्कलोड मैनेजमेंट सिर्फ मैचों की संख्या तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें ओवरों की तीव्रता, डेथ ओवर का दबाव और लगातार हाई-इंटेंसिटी स्पेल भी शामिल होते हैं. बुमराह को अक्सर टीम के सबसे मुश्किल ओवर (पावरप्ले और डेथ) दिए जाते हैं. इसका मतलब है कि हर मैच में उनका शरीर और दिमाग दोनों चरम दबाव में रहते हैं. अगर इस वर्कलोड को सही तरीके से बैलेंस नहीं किया गया, तो परफॉर्मेंस में गिरावट आना तय है. 3. बल्लेबाजों की तैयारी और माइक्रो-एडजस्टमेंट की कमी आज का टी20 बल्लेबाज पहले से ज्यादा डेटा-आधारित हो गया है. यॉर्कर के खिलाफ खास बैटिंग प्लान तैयार किए जाते हैं और बुमराह की गेंदों को अब पहले से बेहतर पढ़ा जा रहा है. दूसरी ओर, बुमराह की गेंदबाजी बेहद माइक्रो-एडजस्टमेंट पर टिकी होती है. हल्की सी भी लय बिगड़ने पर उनका पूरा पैटर्न प्रभावित हो जाता है. आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं – टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल 2026 के बीच का फर्क चौंकाने वाला है. – वर्ल्ड कप: 8 मैच, 14 विकेट, इकोनॉमी 6.21 – आईपीएल: 4 मैच, 0 विकेट, 15 ओवर, 123 रन, इकोनॉमी 8.20 ये सिर्फ फॉर्म का गिरना नहीं है, बल्कि प्रभावशीलता (impact) का गिरना है. बुमराह जैसे गेंदबाज के लिए विकेट नहीं लेना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ाता है. मुंबई इंडियंस के लिए बड़ा सिरदर्द आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में डेथ ओवर्स में बुमराह का रोल निर्णायक होता है. लेकिन इस बार वही विभाग टीम के लिए चिंता बन गया है. विपक्षी टीमें अब बुमराह के ओवर में खुलकर रन बना रही हैं, जो पहले लगभग असंभव था. कप्तान के लिए यह स्थिति रणनीति बदलने जैसी है…क्योंकि जब आपका सबसे भरोसेमंद हथियार ही धार खो दे, तो प्लान B हमेशा कमजोर पड़ जाता है. क्या यह सिर्फ ‘अस्थायी स्लिप’ है? क्रिकेट इतिहास बताता है कि बड़े गेंदबाजों के करियर में ऐसे फेज आते हैं, लेकिन बुमराह का मामला थोड़ा अलग है. क्योंकि वह सिर्फ तेज गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि स्किल और माइंड गेम के मास्टर हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी वापसी क्षमता रही है. चोट से लौटना हो या फॉर्म से, बुमराह ने हमेशा खुद को फिर से साबित किया है. बल्लेबाजों ने सीखा या बुमराह ने खोया? यह बहस अब तेज हो चुकी है. एक वर्ग मानता है कि टी20 क्रिकेट अब इतना एडवांस हो चुका है कि किसी भी गेंदबाज की कमजोरी लंबे समय तक छुपी नहीं रहती. दूसरी तरफ, कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि यह सिर्फ फॉर्म का मामला है और जैसे ही बुमराह एक विकेट निकालेंगे, उनका आत्मविश्वास फिर से लौट आएगा. असली सवाल अब यह है क्या बुमराह की यह गिरावट एक छोटे से फेज का हिस्सा है? या फिर टी20 क्रिकेट का नया युग तेज गेंदबाजों के खिलाफ एक नया ‘सिस्टम’ बना रहा है? फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन एक बात तय है, जब बुमराह अपनी लय में होते हैं, तो दुनिया का कोई भी बल्लेबाज सुरक्षित महसूस नहीं करता.

बेंगलुरु में भिड़ेंगे RCB और LSG, इतिहास में RCB का पलड़ा भारी

बेंगलुरु इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 23वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से 15 अप्रैल को चिन्नास्वामी स्टेडियम में होगा। RCB ने इस सीजन में अब तक 3 मैच जीते हैं और 1 में शिकस्त झेली है, जबकि LSG ने 2 मुकाबले जीते हैं और 2 में ही हार का सामना किया है। आइए मैच से जुड़ी बातों पर एक नजर डालते हैं। RCB का पलड़ा है भारी LSG के खिलाफ RCB का पलड़ा भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच IPL के इतिहास में अब तक 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें से 4 मैच में RCB को जीत मिली है और 2 मैच LSG ने अपने नाम किए हैं। इस संस्करण दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला खेला जाएगा। IPL 2025 में दोनों टीम सिर्फ 1 मैच में भिड़ी थी। उस मैच को RCB ने 6 विकेट से जीता था। ऐसी हो सकती है RCB की प्लेइंग इलेवन RCB ने अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस (MI) को 18 रन से हराया था। उस मैच में RCB ने अपने बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन के चलते 240 रन का बड़ा स्कोर बनाया था। बल्लेबाजी में RCB का शीर्षक्रम अपने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेगा। संभावित एकादश: फिलिप सॉल्ट, विराट कोहली, देवदत्त पडीक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), टिम डेविड, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), रोमेरियो शेफर्ड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जैकब डफी, और सुयश शर्मा। इस संयोजन के साथ उतर सकती है LSG LSG को अपने पिछले मैच में गुजरात टाइटंस (GT) के खिलाफ हार मिली थी। उस मैच में LSG के बल्लेबाजों ने निराश किया था और पूरी टीम पहले खेलते हुए 164 रन ही बना सकी थी। RCB के विरुद्ध LSG अपने बल्लेबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। संभावित एकादश: मिचेल मार्श, एडेन मार्करम, ऋषभ पंत (कप्तान/विकेटकीपर), आयुष बडोनी, निकोलस पूरन, अब्दुल समद, मुकुल चौधरी, मोहम्मद शमी, आवेश खान, दिग्वेश सिंह राठी, और प्रिंस यादव। ये हो सकते हैं दोनों टीमों के इम्पैक्ट प्लेयर RCB: रसिख सलाम डार, वेंकटेश अय्यर, जैकब बेथेल, जोश हेजलवुड, और अभिनंदन सिंह। LSG: मणिमारन सिद्धार्थ, शाहबाज अहमद, मयंक यादव, एनरिक नोर्खिया और जोश इंगलिस। कैसा है चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच का मिजाज? एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यह मैदान अपनी छोटी बाउंड्री के कारण हाई स्कोरिंग मैदान के रूप में जाना जाता है। हालांकि, यहां स्पिन गेंदबाजों मिडिल ओवर्स के दौरान प्रभावशाली होते हैं। हाउस्टेट के मुताबिक, चिन्नास्वामी स्टेडियम पर IPL मैचों के दौरान पहली पारी का औसत स्कोर 167 रन का है। बेंगलुरु में सर्वोच्च टीम स्कोर का रिकॉर्ड SRH (287/3 बनाम RCB, 2024) के नाम पर दर्ज है। कैसा रहेगा मौसम का हाल? एक्यूवेदर के मुताबिक, 15 अप्रैल को बेंगलुरु में अच्छी गर्मी होगी। दिन का अधिकतम तापमान 36 डिग्री तक जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री तक रहने की उम्मीद है। मैच की शुरुआत शाम 7:30 बजे होगी। बारिश की कोई संभावना नहीं है। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर होंगी नजरें कोहली ने LSG के खिलाफ अब तक 6 पारियों में 32.16 की औसत और 133.1 की स्ट्राइक रेट से 193 रन बनाए हैं। जैकब डफी ने 3 पारियों में 23.00 की औसत के साथ 6 विकेट लिए हैं। LSG के कप्तान पंत को RCB के खिलाफ बल्लेबाजी करना पसंद है। इस टीम के खिलाफ उन्होंने 13 पारियों में 53.9 की औसत और 158.06 की स्ट्राइक रेट के साथ 539 रन बनाए हैं।  

350cc इंजन के साथ अपडेट हुई Bajaj Dominar 400, अब और सस्ती

 घरेलू दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto Ltd. ने अपनी टूरिंग मोटरसाइकिल Bajaj Dominar 400 को 2026 इयर अपडेट दिया है और इसे एक छोटे इंजन के साथ बाजार में लॉन्च किया है. इसके साथ ही इस मोटरसाइकिल की कीमत में भी कटौती की गई है, जो खरीदारों के लिए पहले से ज्यादा सुलभ हो गई है. पुराने मॉडल के मुकाबले नए मॉडल की कीमत में 37,000 रुपये की कटौती की गई है. इस कदम का उद्देश्य उन राइडर्स के लिए एंट्री बैरियर को कम करना है जो लंबी दूरी तय करने वाली एक दमदार मशीन की तलाश में हैं. नई Bajaj Dominar 400 की कीमत अब 2,03,214 रुपये (एक्स-शोरूम) हो गई है. 2026 Bajaj Dominar 400 के इंजन में बदलाव इस अपडेट के तहत, Bajaj Dominar 400 में अब 350cc, सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड कूल्ड इंजन लगाया गया है. इस बदलाव के बावजूद, कंपनी का कहना है कि यह मोटरसाइकिल अपनी मुख्य परफॉर्मेंस, फीचर्स और टूरिंग क्षमताओं को बरकरार रखती है. इन क्षमताओं ने पिछले कई सालों से Dominar ब्रांड को एक खास पहचान दी है. इस री-पोजीशनिंग से कंपनी को GST के फायदे ग्राहकों तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है, जिससे इसकी शुरुआती कीमत कम हो जाती है और इसे खरीदने का कुल मूल्य भी बेहतर हो जाता है. यह मोटरसाइकिल अब 350cc, लिक्विड-कूल्ड इंजन के साथ आती है, जो पहले के 373cc यूनिट से कम है. मोटरसाइकिल का यह 350cc इंजन 40 Ps की पावर प्रदान करता है, और इसका टॉर्क आउटपुट 33 Nm का रहता है. इस नए इंजन के साथ, पावर और टॉर्क दोनों में कुछ कमी आ सकती है. और इसका गियरबॉक्स पहले की तरह ही 6-स्पीड यूनिट होगा, जिसमें स्लिप और असिस्ट क्लच लगा होगा. इसके डिजाइन की बात करें, तो विजुअल तौर पर इस मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि इंजन पर लगी 373cc की बैजिंग को भी हटाया गया है. इसके अलावा, Bajaj Dominar 400 को अभी भी Aurora Green और Charcoal Black कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. Bajaj Dominar को एक बहुमुखी टूरिंग मोटरसाइकिल के तौर पर पेश किया जाता है, जिसे रोज़ाना के सफ़र और लंबी हाईवे राइडिंग, दोनों के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मुख्य ज़ोर पावर, कम्फर्ट और सहनशक्ति के बीच संतुलन बनाए रखने पर है, और यह अपने स्थापित टूरिंग DNA के प्रति पूरी तरह से वफ़ादार रहती है. यह रणनीतिक बदलाव Bajaj Auto की उस व्यापक सोच के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य टूरिंग और स्पोर्ट्स मोटरसाइकिलिंग को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना है. Bajaj Dominar के मूल एक्सपीरिएंस से समझौता किए बिना लागत कम करके, कंपनी उन राइडर्स के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करना चाहती है, जो लंबी दूरी की मोटरसाइकिल यात्राओं का एक्सपीरिएंस लेना चाहते हैं. इस डेवलपमेंट पर टिप्पणी करते हुए, Bajaj Auto Ltd के मोटरसाइकिल बिज़नेस यूनिट के प्रेसिडेंट, सारंग कनाडे ने कहा कि Bajaj Dominar ने हमेशा ब्रांड के टूरिंग DNA को दर्शाया है, जिसमें परफॉर्मेंस और लंबी दूरी तय करने की क्षमता का मेल है. उन्होंने आगे कहा कि 350cc इंजन की शुरुआत, और साथ ही बदली हुई कीमतों के साथ, यह सुनिश्चित होता है कि राइडिंग का वही अनुभव अब काफ़ी कम ओनरशिप कॉस्ट पर मिलेगा.

अल नीनो का असर, मानसून कमजोर पड़ने की आशंका

जयपुर अगर आप भीषण गर्मी के बाद झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का यह ताजा अपडेट आपको थोड़ा निराश कर सकता है. विभाग के पहले पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है, यानी सीधा-सीधा 8 प्रतिशत का घाटा. क्यों रूठेंगे बादल? 'अल नीनो' है बड़ी वजह जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मंगलवार को NDTV राजस्थान से बातचीत में बताया कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'अल नीनो' को माना जा रहा है. दरअसल, प्रशांत महासागर का पानी जब गर्म होने लगता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है. इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है, जिससे न सिर्फ मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग सकता है. राजस्थान समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर आंकड़ों की मानें तो उत्तर भारत के राज्यों- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका है. मध्य भारत में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है. पिछले 10 साल में यह दूसरी बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है. जेब और खेती पर पड़ेगा बुरा असर देश की 75 प्रतिशत बारिश मानसून पर टिकी है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है. जब पैदावार कम होगी, तो बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है. इसके अलावा, कम बारिश का मतलब है पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग. राजस्थान में 44 डिग्री का 'टॉर्चर' शुरू मानसून तो बाद में आएगा, लेकिन गर्मी ने अभी से पसीने छुड़ा दिए हैं. पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग का कहना है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने की भी चेतावनी दी गई है. आमतौर पर देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकती है. यह गिरावट भले बहुत बड़ी न लगे लेकिन इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है.