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PSL प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबर आजम का जवाब, आलोचना पर दी सफाई

नई दिल्ली  पाकिस्तान सुपर लीग के मुकाबलों से ज्यादा मजेदार तो मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है। कुछ ही दिन पहले ही एक रिपोर्टर के द्वारा विराट कोहली जैसा मैच फिनिश नहीं करने के सवाल पर भड़कने वाले बाबर आजम अब एक और पत्रकार पर आग बबूला हुए है पेशावर जाल्मी के कप्तान बाबर आजम के टी20 करियर के साथ सबसे बड़ी समस्या उनकी स्ट्राइक रेट रही है। इसको लेकर जब उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल किया गया कि क्या उन्होंने अपने खेल पर दोबारा काम किया है, जैसा कि टीम के कोच मिस्बाह-उल-हक ने हिंट दिया था। इस पर बाबर ने जो जवाब दिया, वो हैरान कर देने वाला रहा। बाबर आजम ने रिपोर्टर का मुंह किया बंद अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो बाबर आजम का स्ट्राइक रेट उनकी टीम के बाकी खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम है। पेशावर जाल्मी के लिए इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले कुसल मेंडिस ने 5 पारियों में 309 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 171.67 का है। वहीं, पाकिस्तान के ही साहिबजादा फरहान ने 249 रन 180.43 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जबकि बाबर आजम का स्ट्राइक रेट इस सीजन में अब तक महज 130.68 का रहा है। मुल्तान सुल्तांस को 24 रनों से हराने के बाद जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्राइक रेट पर सवाल उठा, तो बाबर ने कहा, "आपको अलग-अलग पोजीशन पर अलग तरह से खेलना होता है। स्कोरबोर्ड को ध्यान में रखते हुए यह देखना पड़ता है कि टीम की जरूरत क्या है। मुझे लगता है कि आपको पहले परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए। जैसे कराची की जिस विकेट पर 240 रन बने थे, अगले दिन वैसी स्थिति नहीं थी और हम मुश्किल से 180 रन ही बना सके। इसलिए, हालात बहुत मायने रखते हैं।" 31 साल के बाबर ने आगे कहा,     हर दिन आपको एक जैसी पिच नहीं मिलेगी, आप हर दिन एक जैसा नहीं खेल सकते, विपक्षी टीम आपके लिए प्लान बनाती है। मुंह उठाकर शॉट्स नहीं खेल सकते। हर दिन आपको एक अलग गेम प्लान के साथ आना पड़ता है। अगर आप पहले छह ओवर में बल्लेबाजी कर रहे हैं, तो मुझे पता है कि पावरप्ले का फायदा उठाना है. फिर साझेदारी बनानी है, मौके लेने हैं, गेंदबाजों को टारगेट करना है।    साझेदारी की अहमियत पर भी जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कई बार आप स्ट्राइक रेट संभाल लेते हैं और कई बार नहीं। यही साझेदारी की अहमियत है। एक बल्लेबाज दूसरे का दबाव कम कर सकता है।" अगर बात करें मैच की तो पेशावर जाल्मी बनाम मुल्तान सुल्तांस के बीच खेले गए पीएसएल के 22वें मैच में पेशावर जाल्मी की टीम को जीत मिली। ये उनकी मौजूदा टूर्नामेंट की पांचवीं जीत रही और वो पीएसएल की अंक तालिका में 11 अंक के साथ टॉप पर बनी हुई है, जबकि मुल्तान सुल्तान की टीम प्वाइंट्स टेबल में 8 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है।  

वर्ल्ड कप के स्टार बुमराह आईपीएल में क्यों हो रहे हैं फीके?

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप-2026 में 14 विकेट लेकर पूरे टूर्नामेंट के सबसे घातक तेज गेंदबाज साबित हुए जसप्रीत बुमराह के लिए आईपीएल 2026 की शुरुआत बिल्कुल उलटी कहानी लेकर आई है. वही बुमराह, जिनकी यॉर्कर को दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज भी मुश्किल से पढ़ पाते थे, इस सीजन में विकेट लेने के लिए जूझते नजर आ रहे हैं. उनकी गेंदों से पहले जैसी धार और निर्णायक असर गायब दिख रहा है, जिससे क्रिकेट फैन्स भी हैरान हैं. चार मैच… 15 ओवर… और नतीजा बेहद चौंकाने वाला- एक भी विकेट नहीं. 123 रन खर्च, 8.20 का इकोनॉमी रेट और सबसे बड़ी चिंता, वो ‘विकेट टच’ जो बुमराह की पहचान था, पूरी तरह गायब. क्रिकेट के गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या बुमराह को किसी की नजर लग गई है या फिर बल्लेबाजों ने उनका कोड तोड़ दिया है? सिर्फ कुछ महीने पहले तक तस्वीर बिल्कुल अलग थी. टी20 वर्ल्ड कप में बुमराह ने अपनी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को बांधकर रख दिया था. 8 मैच, 14 विकेट, 6.21 की इकोनॉमी और 12.42 का एवरेज…ये आंकड़े बताते हैं कि वह अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ व्हाइट बॉल फॉर्म में थे. डेथ ओवर्स में उनका नियंत्रण, यॉर्कर की सटीकता और धीमी गेंदों का मिश्रण उन्हें लगभग अजेय बना रहा था. लेकिन आईपीएल में आते ही वही गेंदबाज अचानक सामान्य दिखने लगे. चार मैचों में विकेट का कॉलम खाली होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है कि कुछ गड़बड़ जरूर है. यॉर्कर क्यों हो गई कमजोर? बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी यॉर्कर रही है. वह गेंद जो बल्लेबाज के पैरों के पास आकर स्टंप्स को निशाना बनाती है. लेकिन इस सीजन में वही गेंद बार-बार फुल टॉस या आधी पिच पर गिरती दिखी है. बुमराह के इस बुरे हाल के तीन कारण हो सकते हैं – 1. थकान का असर लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और लीग क्रिकेट के बीच शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिली हो सकती है. जसप्रीत बुमराह जैसे अनोखे एक्शन वाले गेंदबाज पर यह असर और भी ज्यादा होता है. उनके एक्शन में डिलीवरी के समय शरीर पर असामान्य दबाव पड़ता है, ऐसे में थोड़ी भी थकान सटीकता पर सीधा असर डालती है. 2. वर्कलोड मैनेजमेंट की गड़बड़ी वर्कलोड मैनेजमेंट सिर्फ मैचों की संख्या तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें ओवरों की तीव्रता, डेथ ओवर का दबाव और लगातार हाई-इंटेंसिटी स्पेल भी शामिल होते हैं. बुमराह को अक्सर टीम के सबसे मुश्किल ओवर (पावरप्ले और डेथ) दिए जाते हैं. इसका मतलब है कि हर मैच में उनका शरीर और दिमाग दोनों चरम दबाव में रहते हैं. अगर इस वर्कलोड को सही तरीके से बैलेंस नहीं किया गया, तो परफॉर्मेंस में गिरावट आना तय है. 3. बल्लेबाजों की तैयारी और माइक्रो-एडजस्टमेंट की कमी आज का टी20 बल्लेबाज पहले से ज्यादा डेटा-आधारित हो गया है. यॉर्कर के खिलाफ खास बैटिंग प्लान तैयार किए जाते हैं और बुमराह की गेंदों को अब पहले से बेहतर पढ़ा जा रहा है. दूसरी ओर, बुमराह की गेंदबाजी बेहद माइक्रो-एडजस्टमेंट पर टिकी होती है. हल्की सी भी लय बिगड़ने पर उनका पूरा पैटर्न प्रभावित हो जाता है. आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं – टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल 2026 के बीच का फर्क चौंकाने वाला है. – वर्ल्ड कप: 8 मैच, 14 विकेट, इकोनॉमी 6.21 – आईपीएल: 4 मैच, 0 विकेट, 15 ओवर, 123 रन, इकोनॉमी 8.20 ये सिर्फ फॉर्म का गिरना नहीं है, बल्कि प्रभावशीलता (impact) का गिरना है. बुमराह जैसे गेंदबाज के लिए विकेट नहीं लेना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ाता है. मुंबई इंडियंस के लिए बड़ा सिरदर्द आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में डेथ ओवर्स में बुमराह का रोल निर्णायक होता है. लेकिन इस बार वही विभाग टीम के लिए चिंता बन गया है. विपक्षी टीमें अब बुमराह के ओवर में खुलकर रन बना रही हैं, जो पहले लगभग असंभव था. कप्तान के लिए यह स्थिति रणनीति बदलने जैसी है…क्योंकि जब आपका सबसे भरोसेमंद हथियार ही धार खो दे, तो प्लान B हमेशा कमजोर पड़ जाता है. क्या यह सिर्फ ‘अस्थायी स्लिप’ है? क्रिकेट इतिहास बताता है कि बड़े गेंदबाजों के करियर में ऐसे फेज आते हैं, लेकिन बुमराह का मामला थोड़ा अलग है. क्योंकि वह सिर्फ तेज गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि स्किल और माइंड गेम के मास्टर हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी वापसी क्षमता रही है. चोट से लौटना हो या फॉर्म से, बुमराह ने हमेशा खुद को फिर से साबित किया है. बल्लेबाजों ने सीखा या बुमराह ने खोया? यह बहस अब तेज हो चुकी है. एक वर्ग मानता है कि टी20 क्रिकेट अब इतना एडवांस हो चुका है कि किसी भी गेंदबाज की कमजोरी लंबे समय तक छुपी नहीं रहती. दूसरी तरफ, कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि यह सिर्फ फॉर्म का मामला है और जैसे ही बुमराह एक विकेट निकालेंगे, उनका आत्मविश्वास फिर से लौट आएगा. असली सवाल अब यह है क्या बुमराह की यह गिरावट एक छोटे से फेज का हिस्सा है? या फिर टी20 क्रिकेट का नया युग तेज गेंदबाजों के खिलाफ एक नया ‘सिस्टम’ बना रहा है? फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन एक बात तय है, जब बुमराह अपनी लय में होते हैं, तो दुनिया का कोई भी बल्लेबाज सुरक्षित महसूस नहीं करता.

बेंगलुरु में भिड़ेंगे RCB और LSG, इतिहास में RCB का पलड़ा भारी

बेंगलुरु इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 23वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से 15 अप्रैल को चिन्नास्वामी स्टेडियम में होगा। RCB ने इस सीजन में अब तक 3 मैच जीते हैं और 1 में शिकस्त झेली है, जबकि LSG ने 2 मुकाबले जीते हैं और 2 में ही हार का सामना किया है। आइए मैच से जुड़ी बातों पर एक नजर डालते हैं। RCB का पलड़ा है भारी LSG के खिलाफ RCB का पलड़ा भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच IPL के इतिहास में अब तक 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें से 4 मैच में RCB को जीत मिली है और 2 मैच LSG ने अपने नाम किए हैं। इस संस्करण दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला खेला जाएगा। IPL 2025 में दोनों टीम सिर्फ 1 मैच में भिड़ी थी। उस मैच को RCB ने 6 विकेट से जीता था। ऐसी हो सकती है RCB की प्लेइंग इलेवन RCB ने अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस (MI) को 18 रन से हराया था। उस मैच में RCB ने अपने बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन के चलते 240 रन का बड़ा स्कोर बनाया था। बल्लेबाजी में RCB का शीर्षक्रम अपने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेगा। संभावित एकादश: फिलिप सॉल्ट, विराट कोहली, देवदत्त पडीक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), टिम डेविड, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), रोमेरियो शेफर्ड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जैकब डफी, और सुयश शर्मा। इस संयोजन के साथ उतर सकती है LSG LSG को अपने पिछले मैच में गुजरात टाइटंस (GT) के खिलाफ हार मिली थी। उस मैच में LSG के बल्लेबाजों ने निराश किया था और पूरी टीम पहले खेलते हुए 164 रन ही बना सकी थी। RCB के विरुद्ध LSG अपने बल्लेबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। संभावित एकादश: मिचेल मार्श, एडेन मार्करम, ऋषभ पंत (कप्तान/विकेटकीपर), आयुष बडोनी, निकोलस पूरन, अब्दुल समद, मुकुल चौधरी, मोहम्मद शमी, आवेश खान, दिग्वेश सिंह राठी, और प्रिंस यादव। ये हो सकते हैं दोनों टीमों के इम्पैक्ट प्लेयर RCB: रसिख सलाम डार, वेंकटेश अय्यर, जैकब बेथेल, जोश हेजलवुड, और अभिनंदन सिंह। LSG: मणिमारन सिद्धार्थ, शाहबाज अहमद, मयंक यादव, एनरिक नोर्खिया और जोश इंगलिस। कैसा है चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच का मिजाज? एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यह मैदान अपनी छोटी बाउंड्री के कारण हाई स्कोरिंग मैदान के रूप में जाना जाता है। हालांकि, यहां स्पिन गेंदबाजों मिडिल ओवर्स के दौरान प्रभावशाली होते हैं। हाउस्टेट के मुताबिक, चिन्नास्वामी स्टेडियम पर IPL मैचों के दौरान पहली पारी का औसत स्कोर 167 रन का है। बेंगलुरु में सर्वोच्च टीम स्कोर का रिकॉर्ड SRH (287/3 बनाम RCB, 2024) के नाम पर दर्ज है। कैसा रहेगा मौसम का हाल? एक्यूवेदर के मुताबिक, 15 अप्रैल को बेंगलुरु में अच्छी गर्मी होगी। दिन का अधिकतम तापमान 36 डिग्री तक जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री तक रहने की उम्मीद है। मैच की शुरुआत शाम 7:30 बजे होगी। बारिश की कोई संभावना नहीं है। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर होंगी नजरें कोहली ने LSG के खिलाफ अब तक 6 पारियों में 32.16 की औसत और 133.1 की स्ट्राइक रेट से 193 रन बनाए हैं। जैकब डफी ने 3 पारियों में 23.00 की औसत के साथ 6 विकेट लिए हैं। LSG के कप्तान पंत को RCB के खिलाफ बल्लेबाजी करना पसंद है। इस टीम के खिलाफ उन्होंने 13 पारियों में 53.9 की औसत और 158.06 की स्ट्राइक रेट के साथ 539 रन बनाए हैं।  

350cc इंजन के साथ अपडेट हुई Bajaj Dominar 400, अब और सस्ती

 घरेलू दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto Ltd. ने अपनी टूरिंग मोटरसाइकिल Bajaj Dominar 400 को 2026 इयर अपडेट दिया है और इसे एक छोटे इंजन के साथ बाजार में लॉन्च किया है. इसके साथ ही इस मोटरसाइकिल की कीमत में भी कटौती की गई है, जो खरीदारों के लिए पहले से ज्यादा सुलभ हो गई है. पुराने मॉडल के मुकाबले नए मॉडल की कीमत में 37,000 रुपये की कटौती की गई है. इस कदम का उद्देश्य उन राइडर्स के लिए एंट्री बैरियर को कम करना है जो लंबी दूरी तय करने वाली एक दमदार मशीन की तलाश में हैं. नई Bajaj Dominar 400 की कीमत अब 2,03,214 रुपये (एक्स-शोरूम) हो गई है. 2026 Bajaj Dominar 400 के इंजन में बदलाव इस अपडेट के तहत, Bajaj Dominar 400 में अब 350cc, सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड कूल्ड इंजन लगाया गया है. इस बदलाव के बावजूद, कंपनी का कहना है कि यह मोटरसाइकिल अपनी मुख्य परफॉर्मेंस, फीचर्स और टूरिंग क्षमताओं को बरकरार रखती है. इन क्षमताओं ने पिछले कई सालों से Dominar ब्रांड को एक खास पहचान दी है. इस री-पोजीशनिंग से कंपनी को GST के फायदे ग्राहकों तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है, जिससे इसकी शुरुआती कीमत कम हो जाती है और इसे खरीदने का कुल मूल्य भी बेहतर हो जाता है. यह मोटरसाइकिल अब 350cc, लिक्विड-कूल्ड इंजन के साथ आती है, जो पहले के 373cc यूनिट से कम है. मोटरसाइकिल का यह 350cc इंजन 40 Ps की पावर प्रदान करता है, और इसका टॉर्क आउटपुट 33 Nm का रहता है. इस नए इंजन के साथ, पावर और टॉर्क दोनों में कुछ कमी आ सकती है. और इसका गियरबॉक्स पहले की तरह ही 6-स्पीड यूनिट होगा, जिसमें स्लिप और असिस्ट क्लच लगा होगा. इसके डिजाइन की बात करें, तो विजुअल तौर पर इस मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि इंजन पर लगी 373cc की बैजिंग को भी हटाया गया है. इसके अलावा, Bajaj Dominar 400 को अभी भी Aurora Green और Charcoal Black कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. Bajaj Dominar को एक बहुमुखी टूरिंग मोटरसाइकिल के तौर पर पेश किया जाता है, जिसे रोज़ाना के सफ़र और लंबी हाईवे राइडिंग, दोनों के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मुख्य ज़ोर पावर, कम्फर्ट और सहनशक्ति के बीच संतुलन बनाए रखने पर है, और यह अपने स्थापित टूरिंग DNA के प्रति पूरी तरह से वफ़ादार रहती है. यह रणनीतिक बदलाव Bajaj Auto की उस व्यापक सोच के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य टूरिंग और स्पोर्ट्स मोटरसाइकिलिंग को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना है. Bajaj Dominar के मूल एक्सपीरिएंस से समझौता किए बिना लागत कम करके, कंपनी उन राइडर्स के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करना चाहती है, जो लंबी दूरी की मोटरसाइकिल यात्राओं का एक्सपीरिएंस लेना चाहते हैं. इस डेवलपमेंट पर टिप्पणी करते हुए, Bajaj Auto Ltd के मोटरसाइकिल बिज़नेस यूनिट के प्रेसिडेंट, सारंग कनाडे ने कहा कि Bajaj Dominar ने हमेशा ब्रांड के टूरिंग DNA को दर्शाया है, जिसमें परफॉर्मेंस और लंबी दूरी तय करने की क्षमता का मेल है. उन्होंने आगे कहा कि 350cc इंजन की शुरुआत, और साथ ही बदली हुई कीमतों के साथ, यह सुनिश्चित होता है कि राइडिंग का वही अनुभव अब काफ़ी कम ओनरशिप कॉस्ट पर मिलेगा.

अल नीनो का असर, मानसून कमजोर पड़ने की आशंका

जयपुर अगर आप भीषण गर्मी के बाद झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का यह ताजा अपडेट आपको थोड़ा निराश कर सकता है. विभाग के पहले पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है, यानी सीधा-सीधा 8 प्रतिशत का घाटा. क्यों रूठेंगे बादल? 'अल नीनो' है बड़ी वजह जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मंगलवार को NDTV राजस्थान से बातचीत में बताया कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'अल नीनो' को माना जा रहा है. दरअसल, प्रशांत महासागर का पानी जब गर्म होने लगता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है. इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है, जिससे न सिर्फ मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग सकता है. राजस्थान समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर आंकड़ों की मानें तो उत्तर भारत के राज्यों- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका है. मध्य भारत में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है. पिछले 10 साल में यह दूसरी बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है. जेब और खेती पर पड़ेगा बुरा असर देश की 75 प्रतिशत बारिश मानसून पर टिकी है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है. जब पैदावार कम होगी, तो बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है. इसके अलावा, कम बारिश का मतलब है पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग. राजस्थान में 44 डिग्री का 'टॉर्चर' शुरू मानसून तो बाद में आएगा, लेकिन गर्मी ने अभी से पसीने छुड़ा दिए हैं. पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग का कहना है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने की भी चेतावनी दी गई है. आमतौर पर देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकती है. यह गिरावट भले बहुत बड़ी न लगे लेकिन इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है.

प्रदूषण रोकथाम,गाजियाबाद फैक्टरियों में धुएं पर नई सीमा लागू

 गाज़ियाबाद गाजियाबाद जिले की 385 फैक्टरियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं पर इस साल लगाम लगेगी। फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 50 तक लाना होगा। इसके लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई है। जिले के लोनी, ट्रोनिका सिटी और साहिबाबाद समेत एक दर्जन से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। सर्दियों में तापमान गिरने के साथ यही धुआं स्मॉग में बदलकर स्थिति को और गंभीर बना देता है। इस साल बिगड़े हालातों को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने निर्णय लिया था कि अब प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों के धुएं में पीएम की मात्रा को 80 से 50 करना है। सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे जिले में रेड और येलो जोन वाली ऐसी 385 फैक्टरी हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता है। इन फैक्टरियों को धुएं में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक सूक्ष्म कण छोड़ने की अनुमति थी, जिसे अब घटाकर 50 कर दिया गया है। यानी धुएं में मौजूद महीन कणों को करीब 35 से 40 फीसदी तक कम करना होगा। यही कण सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का कारण बनते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। इकाइयों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी सभी फैक्टरियों में ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली लगाने के पहले से निर्देश हैं। ऐसा न करने वाली 55 इकाईयों को बीते दिनों सील भी किया गया था। इसी प्रणाली से नए मानकों का उल्लंघन भी सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पता चल जाएगा। 30 सितंबर तक नए मानकों का पालन न हुआ तो एक अक्तूबर से सतत निगरानी प्रणाली के ही जरिए उल्लंघन करने वाली फैक्टरियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। मैदान में 16 टीमें उतारी गईं सीएक्यूएम ने जिले में नए मानकों को लागू कराने के लिए 16 टीमें उतारी हैं। ये टीमें चिह्नित फैक्टरियों में जाएंगी और चिमनी का निरीक्षण कर उद्यमियों को बताएंगी कि धुएं में पीएम की मात्रा कैसे घटाई जाए। हर फैक्टरी का उत्पादन अलग होता है और उसी के अनुसार धुएं की प्रकृति भी बदलती है। ऐसे में एक ही समाधान सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। टीमें फैक्टरी के काम का आकलन कर उसी हिसाब से सुधार के सुझाव दे रही हैं। अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी, ''सीएक्यूएम के निर्देश पर फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं कि धुएं में पीएम की मात्रा 50 तक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दें। पालन न करने वाली इकाइयों को एक अक्टूबर से बंद कराया जाएगा।''

गैस संकट से राहत की उम्मीद, एचईसी कॉलोनी में पहुंचे गेल अधिकारी

रांची झारखंड की राजधानी रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) परिसर में जारी एलपीजी संकट के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एचइसी कॉलोनी के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन की तैयारी शुरू होने से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है. खबर के असर से सक्रिय हुए अधिकारी एचईसी में गैस संकट को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. “महज एक माह का बचा है गैस” शीर्षक खबर सामने आने के बाद हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाने लगे. इसके बाद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के अधिकारी एचइसी परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव गेल के अधिकारियों ने एचईसी आवासीय परिसर में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इस योजना के तहत पूरे कॉलोनी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने की बात कही गई है. अधिकारियों ने एचइसी प्रबंधन से इसके लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी की मांग की है, ताकि परियोजना पर काम शुरू किया जा सके. 11 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ एचईसी आवासीय परिसर में 11 हजार से अधिक क्वार्टर हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं. वर्तमान में एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पीएनजी योजना लागू होती है, तो इन सभी परिवारों को नियमित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें आसान हो जाएंगी. औद्योगिक इकाई को भी मिलेगा फायदा यह योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एचइसी की औद्योगिक इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण है. फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) यूनिट में फर्नेस संचालन के लिए एलपीजी का उपयोग किया जाता है. यहां फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं. पीएनजी कनेक्शन मिलने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू और स्थिर हो सकेगी. प्रबंधन की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया एचईसी प्रबंधन ने बताया है कि गेल के प्रस्ताव पर जल्द ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जैसे ही अनुमति मिलती है, पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जा सकता है. प्रशासन का मानना है कि यह योजना न केवल घरेलू गैस संकट को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी स्थिरता प्रदान करेगी. लोगों में राहत की उम्मीद लगातार गैस संकट से जूझ रहे एचईसी के लोगों के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि पीएनजी सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगाई से छुटकारा मिल जाएगा. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी. भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी कनेक्शन की यह पहल एचईसी के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो सकती है. इससे न केवल वर्तमान गैस संकट समाप्त होगा, बल्कि भविष्य में भी ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी. यह कदम एचइसी के विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 में बड़ा ट्विस्ट, नोयना का सच आया सामने

क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में बड़ा धमाका होने वाला है. नोयना की साजिश का पर्दाफाश होने को है. मिहिर को पाने की चाहत में जिस तरह से उनसे शांति निकेतन की 'शांति' भंग की और तुलसी का घर उजाड़ा है, आने वाले एपिसोड में नोयना के गलत इरादों पर पानी फिरने वाला है. क्योंकि तुलसी को सच पता चल चुका है. वो जान गई है कि नोयना को कैंसर नहीं है. वो मिहिर संग शादी के लिए झूठ बोल रही है. टूटेगी मिहिर-नोयना की शादी? शो का नया प्रोमो सामने आया है जिसमें तुलसी, नोयना और मिहिर की शादी तोड़ते हुए दिखती है. इतना ही नहीं वो नोयना को धक्का मारकर शांति निकेतन से बाहर करती है. ओरिजनल तुलसी को पर्दे पर गर्दा उड़ाते देख फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं है. वहीं नोयना का भंडाफोड़ होते देख फैंस ने राहत की सांस ली है. कई दिनों से शो में मिहिर और तुलसी की जिंदगी में नोयना नाम का ग्रहण लगा हुआ था. अब नोयना की खोल खुलने के बाद तुलसी-मिहिर फिर से एक होंगे. आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि तुलसी की डॉक्टर से मुलाकात होगी. तब जाकर उसके सामने नोयना का सच सामने आएगा. तुलसी ने वीरानी हाउस जाकर नोयना की घटिया चाल का पर्दाफाश किया. मंडप पर तुलसी और मिहिर दूल्हा-दुल्हन के गेटअप में बैठे हुए हैं. दोनों की वरमाला हो गई है. फेरे होने से पहले तुलसी लौटती है और शादी को रोकने का ऐलान करती है. तुलसी को देखकर नोयना के होश उड़ जाते हैं. वो नोयना की चुनरी लेकर उसे जला देती है. ये देखकर नोयना भड़कती है. तुलसी ने नोयना से पूछा– तुम्हें कौन सी बीमारी है. गुस्से में नोयना ने बताया कि उसे ब्लड कैंसर है. तब तुलसी ने कहा कि तुम्हें कोई कैंसर नहीं बल्कि अल्सर है. मिहिर नोयना की एक बात नहीं सुनता. तुलसी गुस्से में नोयना को शांति निकेतन से बाहर निकालती है. उसे खींचकर गेट के बाहर करती है. शो का प्रोमो देखकर फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ गई है. मिहिर और नोयना की शादी के ट्रैक ने शो की टीआरपी को और बुलंद किया है. इसने रुपाली गांगुली के शो अनुपमा की बादशाहत को खत्म कर नंबर 1 शो का ताज अपने नाम किया है. फैंस को क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 के ट्विस्ट एंड टर्न्स पसंद आ रहे हैं.

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं। दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए 1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। 2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। 3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। 4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं। दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं 1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।

Realme Narzo 100 Lite 5G लॉन्च, 7000mAh बैटरी और दमदार फीचर्स के साथ

 रियलमी ने भारतीय बाजार में एक नया बजट पावरफुल फोन लॉन्च कर दिया है जो Realme Narzo 100 Lite 5G है। यह कंपनी की नई Narzo 100 लाइनअप का पहला मॉडल है। नए Realme Narzo 100 Lite 5G में 7,000mAh की बैटरी है। कंपनी का दावा है कि एक बार चार्ज करने पर यह हैंडसेट 10 घंटे तक वीडियो प्लेबैक या 70 घंटे तक म्यूजिक प्लेबैक देगा। Realme Narzo के इस नए फोन में ऑक्टा कोर MediaTek Dimensity 6000 सीरीज का चिपसेट लगा है। इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप भी जिसमें कई AI फीचर्स दिए गए हैं। जानिए इस फोन की कीमत, फर्स्ट सेल डेट, कलर वैरिएंट और फीचर्स: भारत में Realme Narzo 100 Lite 5G की कीमत और उपलब्धता भारत में Realme Narzo 100 Lite 5G के बेसिक 4GB रैम + 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 13,499 रुपये है। वहीं, 4GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 14,499 रुपये है। सबसे महंगा वेरिएंट 6GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ 16,499 रुपये में उपलब्ध है। लॉन्च के मौके पर कंपनी 1,500 रुपये तक का बैंक ऑफर भी दे रही है। बैंक छूट के साथ आप फोन को 12,499 रुपए में खरीद पाएंगे। Narzo सीरीज का यह नया फोन भारत में 21 अप्रैल से Amazon और Realme इंडिया के ऑनलाइन स्टोर पर फर्स्ट सेल के लिए उपलब्ध होगा। Realme Narzo 100 Lite 5G फ्रॉस्ट सिल्वर और थंडर ब्लैक रंगों में उपलब्ध है। Realme Narzo 100 Lite 5G बड़ी खासियतें बैटरी: फोन में 7000mAh की बड़ी बैटरी है। कंपनी के अनुसार यह बैटरी लंबे समय तक कॉलिंग, वीडियो और गेमिंग के लिए है। फोन में AI पावर सेविंग और सुपर पावर सेविंग मोड भी दिए गए हैं, जिससे बैटरी और ज्यादा समय तक चलती है। यहां तक कि 1% बैटरी में भी यह फोन करीब 40 मिनट तक कॉलिंग सपोर्ट कर सकता है। प्रोसेसर: परफॉर्मेंस के लिए इस फोन में MediaTek Dimensity 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 6nm टेक्नोलॉजी पर आधारित है। फोन में 14GB तक डायनामिक RAM और 128GB तक स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है। इसके साथ 15W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है। डिस्प्ले: realme Narzo 100 Lite 5G में 144Hz रिफ्रेश रेट वाला Eye Comfort डिस्प्ले दिया गया है, जो इस सेगमेंट में काफी खास माना जा रहा है। इसकी ब्राइटनेस 900 निट्स तक जाती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। इसके अलावा Smart Touch और DC Dimming जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। कैमरा: कैमरा की बात करें तो इसमें 13MP का AI रियर कैमरा दिया गया है। वहीं फ्रंट में 5MP का कैमरा मिलता है। फोन AI Eraser, AI Clear Face से लैस है। मजबूती: इसमें Military-Grade शॉक रेसिस्टेंस और IP64 रेटिंग दी गई है, जिससे यह धूल और पानी के छींटों से सुरक्षित रहता है।