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पंचकूला में अंबेडकर जयंती पर समता रन मैराथन, सीएम सैनी ने दी शुरुआत और समाज को दिया महत्वपूर्ण संदेश

पंचकूला बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हरियाणा के पंचकूला में मंगलवार को 'समता रन' मैराथन का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मैराथन को झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कई मंत्री और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उन्होंने हमें यह संदेश दिया और कहा कि 'शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो।' हमें इन शब्दों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा, जागरुकता और एकता के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मैराथन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देता हूं। आप इस मैराथन में पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ दौड़े। सीएम सैनी ने कहा, "समाज में समानता और न्याय के संदेश के फैलाने का एक संदेश हमें देना चाहिए। यह दौड़ सिर्फ आपके पैरों की गति नहीं, बल्कि आपके विचारों की शक्ति को भी प्रदर्शित करेगी।" मुख्यमंत्री सैनी ने आगे कहा, "मैं एक बार फिर बाबासाहेब को नमन करता हूं। सभी से आह्वान करता हूं कि उनके दिखाए हुए मार्ग पर हम निरंतर आगे बढ़ते रहें। हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो समता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हो। इसी विश्वास और संकल्प के साथ हम सभी मिलकर समता मैराथन को सफल बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव की एक नई शुरुआत करें। इससे पहले, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के जरिए भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "भारतीय संविधान निर्माता एवं सामाजिक समरसता के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। बाबासाहेब की ओर से स्थापित सामाजिक न्याय और समानता की सुदृढ़ नींव आज भी राष्ट्र को एकजुट, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमारा मार्गदर्शन कर रही है।"

IPL 2026 का स्टार अब टीम इंडिया में एंट्री को तैयार, तोड़ सकता है सचिन का रिकॉर्ड

नई दिल्ली 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) टीम इंडिया के लिए डेब्यू के बेहद करीब हैं. खबर है कि जून में होने वाले आयरलैंड दौरे के लिए उन्हें टी20 टीम में शामिल किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट  के मुताब‍िक सेलेक्टर्स ने सूर्यवंशी को शॉर्टलिस्ट किया है और वह टीम में शाम‍िल होने की दौड़ में बने हुए हैं. यह दौरा IPL 2026 के तुरंत बाद होगा, जहां भारत की संभावित सेकंड-स्ट्रिंग टीम को मौका दिया जाएगा. सेलेक्शन कमेटी युवा खिलाड़ियों को इंटरनेशनल एक्सपोजर देने के मूड में है. अगर सूर्यवंशी को मौका मिलता है, तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे युवा खिलाड़ी बन जाएंगे. अभी यह रिकॉर्ड सच‍िन तेंदुलकर के नाम है, जिन्होंने 16 साल 205 दिन की उम्र में डेब्यू किया था. वहीं ओवरऑल रिकॉर्ड शेफाली वर्मा के नाम है, जिन्होंने 15 साल 7 महीने में भारत के लिए खेला था. सूर्यवंशी इन दोनों को पीछे छोड़ सकते हैं. वैभव मौजूदा आईपीएल के 5 मैचों की 5 पार‍ियों मे 200 रन 40 के एवरेज और 263.15 के स्ट्राइक रेट से बना चुके हैं. हालांकि वह सोमवार को हुए मुकाबले में गोल्डन डक पर आउट हो गए थे. IPL में गदर काट चुके हैं वैभव सूर्यवंशी सूर्यवंशी ने IPL 2026 में अपनी बल्लेबाजी से सभी को चौंका दिया है. उन्होंने RCB के खिलाफ 26 गेंदों में 78 रन, CSK के खिलाफ 17 गेंदों में 52 रन, MI के खिलाफ 14 गेंदों में 39 रन बनाए. खास बात यह रही कि उन्होंने दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी की. जसप्रीत बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ना और जोश हेजलवुड के खिलाफ आक्रामक अंदाज उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है. सेलेक्टर्स जल्दबाजी में भी नहीं हैं, लेकिन इस टैलेंट को ज्यादा देर तक इंतजार नहीं कराना चाहते. आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ उन्हें मौका देने की रणनीति बन रही है. इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उन्हें टीम में शामिल किया जा सकता है. कई दिग्गज कर चुके हैं वैभव का सपोर्ट IPL चेयरमैन अरुण धूमल ने भी सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में इतना टैलेंट मिलना दुर्लभ है और वह टीम इंडिया में डेब्यू के हकदार हैं.वहीं पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी चयनकर्ताओं से अपील की है कि उन्हें तुरंत मौका दिया जाए. भारत और आयरलैंड के बीच दो टी20 मैच 26 और 28 जून को खेले जाएंगे. इसके बाद टीम इंडिया इंग्लैंड दौरे पर जाएगी, जहां सीनियर खिलाड़ियों की वापसी होगी.

चेन्नई का पलड़ा भारी या KKR करेगा वापसी? जानिए मैच प्रीव्यू

चेपॉक आईपीएल 2026 के 22वें मुकाबले में मंगलवार यानी आज एमए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की भिड़ंत कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के साथ होगी। सीएसके ने पिछले मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स को हराते हुए जीत का खाता खोला है। चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ शानदार रहा था। टूर्नामेंट में अब तक पहली बार सीएसके की सलामी जोड़ी अच्छी लय में दिखाई दी थी। संजू सैमसन और कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने पहले विकेट के लिए 62 रन जोड़े थे। संजू बेहतरीन लय में दिखाई दिए थे और उन्होंने अपने आईपीएल करियर का चौथा शतक लगाया था। विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 56 गेंदों में 115 रनों की दमदार पारी खेली थी। आयुष म्हात्रे ने 36 गेंदों में 59 रन बनाए थे। गेंदबाजी में जेमी ओवरटन चमके गेंदबाजी में जेमी ओवरटन ने शानदार स्पेल डालते हुए 4 ओवर में 18 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे, जबकि अंशुल कंबोज ने 3 विकेट निकाले थे। दूसरी ओर, केकेआर अंक तालिका में सबसे नीचे है। अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में केकेआर को इस सीजन की अपनी पहली जीत की अभी भी तलाश है। 4 मुकाबलों में से टीम को 3 मैच में हार का सामना करना पड़ा है, तो एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। अंजिक्य रहाणे ने पिछले मुकाबले में 24 गेंदों में 41 रन बनाए थे, जबकि अंगकृष रघुवंशी ने 33 गेंदों में 45 रन बनाए थे। वहीं, कैमरून ग्रीन और रोवमैन पॉवेल भी बेहतरीन लय में दिखाई दिए थे। केकेआर का बॉलिंग अटैक चिंता का विषय केकेआर के लिए इस सीजन टीम का गेंदबाजी अटैक चिंता का विषय रहा है। वैभव अरोड़ा, कार्तिक त्यागी, नवदीप सैनी अब तक इस सीजन छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। सुनील नरेन जरूर पिछले मैच में किफायती रहे थे और उन्होंने 4 ओवर में महज 13 रन देकर एक विकेट निकाला था। वरुण चक्रवर्ती इस मुकाबले के लिए फिट हो पाएंगे या नहीं, यह भी देखना दिलचस्प होगा। कैसा खेलेगी चेपॉकी की पिच? एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच इस सीजन बल्लेबाजी के मुफीद नजर आई है। गेंद बल्ले पर काफी अच्छे से आ रही है और खूब चौके-छक्के भी लग रहे हैं। अच्छी लाइन एंड लेंथ के साथ गेंदबाजी करने वाले तेज गेंदबाजों को भी इस ग्राउंड से मदद मिली है। कैसा है चेन्नई और केकेआर का हेड टू हेड रिकॉर्ड आईपीएल के इतिहास में केकेआर और सीएसके के बीच अब तक कुल 32 मुकाबले खेले गए हैं। इसमें से 20 मैच सीएसके ने जीते हैं, जबकि केकेआर ने 11 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। एक मैच बेनतीजा रहा है। एक्यूवेदर की रिपोर्ट के अनुसार, केकेआर बनाम सीएसके मुकाबले में बारिश होने की आशंका न के बराबर है। मौसम पूरी तरह से साफ रहने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा – डीएमएफ से कोरबा में होगा तेजी से विकास

रायपुर : डीएमएफ से होगा कोरबा जिला का अतिरिक्त विकास : मंत्री लखनलाल देवांगन डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्राथमिकता से होंगे कार्य रायपुर   छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में आज कलेक्ट्रेट कोरबा सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति, पूर्ण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति तथा आगामी वर्ष की कार्ययोजना को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा के विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित शासी परिषद के सदस्यगण अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, पदेन सचिव जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए। डीएमएफ से होगा कोरबा जिला का अतिरिक्त विकास : मंत्री लखनलाल देवांगन बैठक के दौरान डीएमएफ मद से संचालित कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने उद्बोधन में मंत्री देवांगन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अन्य योजनाओं के साथ-साथ डीएमएफ मद से भी कोरबा जिले में अतिरिक्त विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज अनुमोदित कार्यों में स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने डीएमएफ के माध्यम से पीवीटीजी समुदाय के लिए प्राथमिकता से विकास कार्य संचालित किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। मंत्री देवांगन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करें, निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करें।  मंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समन्वयपूर्वक कार्य कर जिले के सर्वांगीण विकास में योगदान देने की अपील की। सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान मिलेगी। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण प्रदूषण नियंत्रण, राखड़ बांधों से उत्पन्न समस्याओं के समाधान तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने, बारिश से पहले स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा जर्जर स्कूल भवनों को सुधारने की आवश्यकता बताई। विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल ने कहा कि डीएमएफ राशि से जिले में महत्वपूर्ण विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने आकांक्षी जिला होने के कारण कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन तथा कृषि क्षेत्र में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम ने डीएमएफ के तहत बनाए गए निर्माण पोर्टल को जनहित में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने जिले में निर्माण कार्यों के मूल्यांकन के लिए इंजीनियरों की भर्ती को उपयोगी कदम बताया। महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार से आमजन को हो रहे लाभों का उल्लेख किया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक के विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम बैठक है। शासन द्वारा डीएमएफ नियमों में संशोधन कर उन्हें इस वित्तीय वर्ष से लागू किया गया है। उन्होंने बैठक के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य खनन के दुष्प्रभावों को कम करना और प्रभावित लोगों की आजीविका एवं जीवन स्तर में सुधार लाना है। उन्होंने डीएमएफ के कार्यों को पारदर्शिता के साथ करने, निर्माण पोर्टल के माध्यम से डीएमएफ सहित अन्य विकास कार्यों की जानकारी मिलने के संबंध में बताया। डीएमएफ नियमों के तहत 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जाएगा तथा 30 प्रतिशत राशि अन्य आधारभूत संरचनाओं पर व्यय की जाएगी। जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित गांवों का चिन्हांकन किया जा चुका है, जिसके अनुसार 5 विकासखंडों के 564 गांव प्रत्यक्ष प्रभावित श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र और 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा। इससे डीएमएफ की बड़ी राशि कोरबा जिले के प्रभावित क्षेत्रों में व्यय होगी। उन्होंने बताया कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के सहयोग से खनन प्रभावित परिवारों का विस्तृत बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके आधार पर एक वर्ष की पर्सपेक्टिव योजना तैयार होगी। आंकड़ों के अनुसार एसईसीएल की विभिन्न खदानों से प्रभावित 20,069 परिवारों और 4,102 विस्थापित परिवारों के कल्याण हेतु योजनाएँ बनाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 519.11 करोड़ रुपये की प्राप्ति के विरुद्ध 1498 कार्यों के लिए 529.24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। कलेक्टर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र, जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर शासन को विस्तृत जानकारी भेज दी गई है तथा स्वीकृत होने के बाद कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने गौण खनिज राजस्व के उपयोग, प्रभावित व्यक्तियों एवं परिवारों के चिन्हांकन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण एवं नगरीय विकास और अधोसंरचना को दी गई प्राथमिकता के संबंध में भी जानकारी दी। डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को मिली मंजूरी बैठक में डीएमएफ अंतर्गत विशेष निधियों के अनुमोदन के साथ-साथ खनन प्रभावित प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष क्षेत्रों के निर्धारण, प्रभावित परिवारों एवं विस्थापित परिवारों की सूची के अनुमोदन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिए गए। इसके अलावा एंडोमेंट फंड के गठन तथा पंचवर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव, शासी परिषद ने डीएमएफ अंतर्गत परियोजना प्रबंधन इकाई  के चयन, प्रशासनिक व्यय के अनुमोदन तथा वर्ष 2025-26 में किए गए कार्यों की स्वीकृति, खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यक्तियों के चिन्हांकन एवं संबंधित विभागीय कार्यों के अनुमोदन, वार्षिक प्रतिवेदन (वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2023-24 तथा 2025-26) के अनुमोदन का प्रस्ताव भी पारित … Read more

25 लाख पौधों से शहर को बनाएंगे हरा-भरा, सिंहस्थ की तैयारी में 2 साल में पूरा होगा लक्ष्य

उज्जैन  शहर में नगर निगम को इस साल 10 लाख और अगले वर्ष 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। इस तरह दो वर्षों में सिंहस्थ से पहले 25 लाख पौधारोपण कर शहर की हरियाली बढ़ाने की तैयारी है। इस अभियान के लिए नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग संयुक्त रूप से बजट उपलब्ध कराएंगे। निगम के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ काटने के एवज में मिले 2 करोड़ रुपए है। इसके अलावा शासन स्तर से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा। पौधारोपण के लिए शहर में खाली और अनुपयोगी जमीनों देख रहे हैं। नगर निगम द्वारा विभिन्न स्थानों का सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। जून से मानसून के साथ ही पौधारोपण अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस बार निगम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी देखरेख और संरक्षण पर भी विशेष फोकस रहेगा। पौधारोपण का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जाएगा, जिसे पौधे लगाने के बाद दो वर्षों तक उनकी सुरक्षा, सिंचाई और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी विवि परिसर, तरणताल सहित 10 जगह चयनित की नगर निगम अपर आयुक्त संदीप शिवा के अनुसार प्रारंभिक चरण में विक्रम विश्वविद्यालय परिसर, तरणताल क्षेत्र, एमआर-5 रोड, चकोर पार्क सहित करीब 10 प्रमुख स्थलों का चयन किया है। इसके अलावा शहर के लगभग 400 उद्यानों में उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग भी किया जाएगा। हर जोन में करीब 20 स्थानों को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सड़क किनारे, चौराहे और निगम की अन्य खाली जमीनें शामिल होंगी।

एमपी में 14 जिलों और 42 मोहल्लों के अटपटे नाम बदलने की मांग, भोपाल भी शामिल

भोपाल   जब नाम बदलने का दौर चल ही रहा है तो लगे हाथ इनके नाम भी बदल दीजिए ना हुजूर। शुरुआत हुजूर शब्द से ही करते हैं। मध्यप्रदेश में दो तहसीलों के नाम हुजूर है। पहली हुजूर तहसील भोपाल जिले में है, तो दूसरी रीवा जिले में। एक जैसा नाम होने के कारण कई बार बड़ी गफलत की स्थिति बन जाती है। तहसील हुजूर बनी हुई है अजूबा राजधानी भोपाल की तहसील हुजूर में तो अजूबा यह कि इस नाम का कोई नगर, बस्ती या मोहल्ला तक नहीं है, फिर भी आधा भोपाल हुजूर तहसील में आता है। सिर्फ तहसील ही नहीं, भोपाल में तो एक विधानसभा सीट का नाम भी हुजूर है। कुछ साल पहले ही बनी इस सीट की भौगोलिक परिस्थिति भी विचित्र है। इसका एक सिरा सीहोर जिले के नजदीक है, तो दूसरा रायसेन जिले के सर्पाकार क्षेत्र वाली इस सीट के तहत अधिकांश हिस्सा ग्रामीण मतदाताओं का आता है। हुजूर सीट का नामकरण संभवत: तहसील हुजूर के कारण ही किया गया है, लेकिन इसमें दूसरी तहसीलों का भी कुछ क्षेत्र समाहित है। तो हुजूर, यह शब्द वैसे भी सामंतवादी सम्मान और गुलामी की मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसे बदला जा सकता है। क्या जातिसूचक नाम भी बदले जाएंगे? प्रदेश कांग्रेस के नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जातिसूचक नामों वाले मोहल्लों का नाम बदलने की मांग की थी। कुछ नाम हैं, लोहारपुरा, सुनारपुरा, ढीमरखेड़ा, गुजरपुरा, तेलीपुरा, चमारपुरा, चमारटोला, ब्राह्मणपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, भाटखेड़ी, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा, पवारखेड़ा, कोठा, खिड़किया, जाटखेड़ी, बंजारा, बंजारी आदि। ये अटपटे नाम बंदरकोल, बाबा की बरोली, बैसनपुर, बाराती, बौना, चंडी, चिल्लाखुर्द, दाढ़, घोड़ाबंद, चोरघटा (रीवा), चटाईपुरा (भोपाल), झुंड (शिवपुरी), ठीकरी (बड़वानी), फुटेरा (दमोह), भड़भडिय़ा (नीमच), लंगोटी, लालबर्रा (बालाघाट), चोली (खरगोन), चोरपुरा (मुरैना), बिहार (झाबुआ), बालमपुर (भोपाल), कुडिय़ा (सतना)। नाम बदलने की प्रक्रिया किसी भी मोहल्ले, गांव या शहर का नाम बदलने की सरकारी प्रक्रिया निर्धारित है। सबसे पहले स्थानीय निकाय से प्रस्ताव पारित कराकर जिला प्रशासन को भेजा जाता है। जिला प्रशासन से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन होता है। अब तक बदले गए नाम पुराना नाम – नया नाम होशंगाबाद – नर्मदापुरम नसरूल्लागंज – भैरुंदा फंदा – हरिहरनगर गंजबासौदा -वासुदेवनगर मुलताई – मूलतापी कांटाफोड़ – कांतापुर गजनीखेड़ी – चामुंडा महानगरी मौला – मोहनपुरा मौलाना – विक्रम नगर जहांगीरपुर – जगदीशपुर मिर्जापुर – मीरापुर सलामतपुरा – श्रीरामपुरा रेहमानपुरा – हनुमानपुरा इनके नाम में बदलाव की मांग पुराना नाम – नया नाम भोपाल – भोजपाल कटनी – कनकपुर जैसीनगर – जयशिव नगर औबेदुल्लागंज – हिरानिया विदिशा – वैदवती बेगमगंज – सियावास गौहरगंज – कलियाखेड़ी शमशाबाद – सूर्यनगर नूरगंज – रूपनगर सीहोर – सिद्धपुर उज्जैन – अवंतिका नगरी दतिया – दिलीपनगर महेश्वर – महिष्मती जबलपुर – जबालिपुरम

योगी सरकार में मंत्री पद पर सवर्ण और पश्चिम यूपी पर होगा फोकस, एक नेता की नियुक्ति तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने की तैयारी है। लखनऊ से दिल्ली तक यह वीकेंड काफी गहमागहमी वाला रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक ही लखनऊ पहुंचे और एक के बाद एक कई नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात हुई। यही नहीं पंकज चौधरी ने दिल्ली में भी मुलाकातें की हैं। माना जा रहा है कि विनोद तावड़े ने सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। इनसे राज्य के कामकाज पर बात की गई और मंत्री बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। यही नहीं विनोद तावड़े की मुलाकात पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही से भी हुई। इसके अलावा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह जैसे नेता भी उनसे मिले। ये सारी बैठकें फीडबैक के लिए हुईं और मंथन हुआ कि कौन से नेता मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा किन लोगों को निगमों, सहकारी संस्थाओं आदि में पद देकर नवाजा जा सकता है। इस बीच चर्चा है कि पश्चिम यूपी से आने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना तय है। वह प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं और जाट नेता हैं। बिरादरी का पश्चिम यूपी में अच्छा असर है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि उन्हें कोई अहम विभाग देकर समाज में एक संदेश दिया जाए। 6 मंत्रियों के लिए एंट्री की संभावना, कौन हैं रेस में उत्तर प्रदेश सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं। इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं और 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा 19 राज्यमंत्री हैं। अब भी 6 मंत्री और बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विधानसभा की कुल क्षमता के 15 फीसदी के बराबर का मंत्री परिषद हो सकता है। यूपी में आखिरी कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अब होने वाले कैबिनेट विस्तार में कुछ लोगों को सरकार से संगठन में भेजा सकता है। इसके अलावा सालों से संगठन में मेहनत कर रहे कुछ लोग मंत्री पद पा सकते हैं। यही नहीं आयोग और निगमों में भी पद दिए जा सकते हैं। दिल्ली से लखनऊ तक मंथन, किन्हें मिलेगा जिम्मा और कौन बाहर कहा जा रहा है कि राज्य में कुछ नियुक्तियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच मतभेद की स्थिति है। ऐसे में इस बार नियुक्तियां ऐसी करने पर विचार हो रहा है कि कहीं भी नाराजगी का स्कोप ना रहे। इसके अलावा मंत्री परिषद के गठन में पश्चिम यूपी पर फोकस करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष में से सभी मध्य अथवा पूर्वी यूपी के हैं। ऐसे में पश्चिम यूपी के किसी नेता को अहमियत मिल सकती है। वहीं सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो ओबीसी और दलित के अलावा सवर्ण समाज पर भी फोकस रह सकता है। यूजीसी रूल्स वाले विवाद के बाद सवर्णों में नाराजगी के चर्चे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार इन्हें 2027 से पहले निश्चित तौर पर साधना चाहेगी।

‘साज’ और मंगेशकर बहनों की कहानी: सच या महज संयोग?

1998 में सई परांजपे ने एक संगीतमय फिल्म 'साज' बनाई। यह कहानी दो बहनों मानसी और बंसी की है। उनके माता-पिता की मौत के बाद दोनों मुंबई आ जाती हैं। कई मुश्किलों के बाद मानसी और बंसी संगीत की दुनिया में बहुत मशहूर गायिकाएं बन जाती हैं। लेकिन साथ ही वे एक-दूसरे की बड़ी प्रतिद्वंद्वी भी बन जाती हैं। क्या फिल्म 'साज' की कहानी लता मंगेशकर और आशा भोसले की जिंदगी से प्रेरित थी? क्या 'साज' की कहानी लता और आशा की असली कहानी से है प्रेरित लता और आशा भी 1942 में अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अचानक मौत के बाद मुंबई आई थीं। पिता एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और रंगमंच कलाकार थे। उनके जाने के बाद परिवार के पास पैसों का कोई सहारा नहीं बचा। उस समय आशा सिर्फ नौ साल की थीं। बड़ी बहन लता और छोटी आशा ने परिवार चलाने के लिए गाना शुरू कर दिया। 'साज' से मिलती है दोनों बहनों की असली कहानी? जैसे फिल्म 'साज' में मानसी और बंसी को मजबूरी में गाना पड़ा, वैसे ही मंगेशकर बहनों को भी अपनी असल जिंदगी में राोजाना खर्चों के लिए गाना पड़ा। लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे बड़ी गायिकाएं बना दिया। साठ के दशक की शुरुआत तक लता और आशा ही रेडियो और फिल्मों में सबसे ज्यादा सुनाई देती थीं। कल्पना की कहानी है फिल्म 'साज' अरुणा ईरानी ने फिल्म 'साज' में मानसी का रोल निभाया है। वे बहुत सफल गायिका बन जाती हैं। शबाना आजमी बंसी का रोल करती हैं। बंसी भी गाना चाहती है, लेकिन मानसी कहती है कि उसे शादी करनी चाहिए और जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए। फिर क्या बंसी की शादी हो जाती है। फिर एक संगीतकार इंद्रनील उसकी आवाज को पहचानता है और उसे मौका देता है। बंसी सफल हो जाती है। लेकिन मानसी को यह पसंद नहीं आता। खासकर तब जब एक युवा संगीतकार हिमन देसाई बंसी से प्यार करने लगता है। सई परांजपे का इनकार फिल्म निर्माता सई परांजपे ने कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि फिल्म 'साज' लता और आशा के ऊपर आधारित है। फिल्म रिलीज होने के बाद से यह बहस काफी समय तक चर्चा में रही थी। 'साज' दो भावनाओं को दिखाती है, जिसमें दो बहनों के बीच गहरा प्यार और देखभाल। लता मंगेशकर ने क्या कहा? नसरीन मुन्नी कबीर की किताब में लता जी ने कहा, 'यह गलत है कि प्रतिद्वंद्विता ने हमारे रिश्ते को खराब कर दिया। हम बहनें हैं और पड़ोस में रहती हैं। हम बात करती हैं, साथ खाना खाती हैं। खुशी-गम में एक-दूसरे के साथ हैं।' उन्होंने आशा की तारीफ करते हुए कहा, 'जितने तरह के गाने आशा गा सकती हैं, कोई और गायक उनकी बराबरी नहीं कर सकता।'      कब आशा भोसले का मिली पहचान आशा की बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें लता की छाया से बाहर निकाला। साठ के दशक में ओ.पी. नैयर के साथ उनके गाने जैसे 'आओ हुजूर तुमको' और 'कजरा मोहब्बत वाला' ने उन्हें अलग पहचान दी। फिर साठ के बीच में राहुल देव बर्मन (पंचम) आए। उनके संगीत में पश्चिमी ताल थी। आशा की आवाज उससे बहुत अच्छे से मिली। 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा', 'पिया तू अब तो आजा', 'चुरा लिया है तुमने' और 'दम मारो दम' जैसे गाने हिट हो गए। 1981 में फिल्म 'उमराव जान' आई। आशा ने इसमें शाहरयार के गीतों पर खय्याम का संगीत गाया। 'दिल चीज क्या है' गाने के लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इस फिल्म ने दुनिया को आशा की नई छवि दिखाई।  ठीक उसी तरह, 1982 में 'डिस्को 82' में लता जी ने भी डिस्को स्टाइल गाना गाया। दोनों बहनें हमेशा यह याद दिलाती हैं कि संगीत उनके जीवन का सबसे बड़ा प्यार है। बाकी सब सिर्फ कहानियां हैं।

ओपन जेलों की स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को रिपोर्ट देने का निर्देश

 रांची झारखंड हाईकोर्ट ने सूबे की ओपन जेलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को कोर्ट ने जनहित याचिका में तब्दील स्वत: संज्ञान पर सुनवाई की. इस मामले को न्यायपालिका ने जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए व्यापक निगरानी का निर्देश दिया है. इसके लिए अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन किया जाए. पीठ ने दिए सख्त निर्देश चीफ जस्टिस एमएस सौनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि ओपन जेलों की स्थिति सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए. इस समिति की अध्यक्षता गृह सचिव करेंगे और इसमें कारा महानिदेशक तथा संबंधित जेल अधीक्षक को भी शामिल किया जा सकता है. स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक गठित समिति की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून 2026 को होगी. कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ओपन जेलों में सुधार के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी शामिल हैं. सर्वोच्च अदालत ने देशभर की ओपन जेलों की मॉनिटरिंग के लिए गृह विभाग को कमेटी बनाने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने का निर्देश दिया है. इसमें चिकित्सा सुविधा, जिम, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है. कैदियों के पुनर्वास पर फोकस ओपन जेलों का उद्देश्य कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है. ऐसे में वहां की सुविधाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है. हाईकोर्ट ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है. पहले स्वत: संज्ञान, अब जनहित याचिका गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. अब इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया है, जिससे इस मुद्दे पर नियमित सुनवाई और निगरानी सुनिश्चित हो सके. सुधार की दिशा में अहम कदम हाईकोर्ट का यह कदम राज्य की जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो ओपन जेलों में रहने वाले कैदियों को बेहतर जीवन स्तर और पुनर्वास के अवसर मिल सकेंगे.

नवागत एसपी प्राची सिंह के सामने अपराध नियंत्रण बड़ी चुनौती

अंबेडकरनगर आईपीएस प्राची सिंह ने 28वें पुलिस अधीक्षक के रूप में रविवार की सुबह कमान संभाल ली। इसके बाद कपड़ा व्यवसायियों से हुई लूट की घटना के बारे में मातहतों से जानकारी ली। यहां से सीधे घटनास्थल पहुंच गईं। वहां सभी बिंदुओं पर संबंधित पुलिस कर्मियों से पूछताछ की। साथ ही शीघ्र राजफाश के निर्देश दिए। वहीं, निवर्तमान पुलिस अधीक्षक अभिजित आर. शंकर के देवरिया स्थानांतरित होने पर विदाई दी गई। लखनऊ में 32वीं वाहिनी पीएसी में सेनानायक पद पर तैनात रहीं प्राची सिंह की शनिवार को यहां पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती मिली। यहां तैनात रहे अभिजित आर. शंकर को देवरिया के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। रविवार की सुबह प्राची सिंह ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। वह जिले की तीसरी महिला पुलिस अधीक्षक हैं। इसके पहले 2011 में वीना भूकेश व 2018 में शालिनी की तैनाती की गई थी। कार्यभार संभालने के बाद नवागत एसपी जहांगीरगंज के बिड़हर घाट पहुंचीं। पुलिस चौकी के निकट हुई लूट की घटना के बारे में क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह व निरीक्षक संतोष सिंह से जानकारी ली। एसपी ने कहा कि लूट में शामिल बदमाश किसी भी सूरत में बचने नहीं चाहिए। उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करें। वहीं, पुलिस लाइंस में आयोजित समारोह में निवर्तमान पुलिस अधीक्षक को विदाई दी गई। मातहतों ने उनके कार्यों की प्रशंसा व सुखद भविष्य की कामना की। एएसपी हरेंद्र कुमार, श्यामदेव, क्षेत्राधिकारी अकबरपुर नितीश तिवारी, टांडा के शुभम कुमार, भीटी के लक्ष्मीकांत आदि ने प्रतीक चिह्न व पुष्पगुच्छ भेंट किया। नई एसपी के सामने ये चुनौतियां नवागत एसपी के सामने दो कपड़ा व्यवसायियों से 18.40 लाख की लूट का राजफाश, लगातार हो रहीं चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण बड़ी चुनौती है। आलापुर और राजेसुल्तानपुर में दो दिनों में सात घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा अकबरपुर कोतवाली में पखवारे भर पूर्व अलग-अलग गांवों में चोरी की घटना को अंजाम चोर दे चुके हैं। इसी के साथ जिला मुख्यालय समेत टांडा, जलालपुर समेत अन्य प्रमुख कस्बों में जाम की समस्या से निपटना, साइबर थाना समेत जिले के अन्य थानों में दर्ज साइबर ठगी और महिला अपराधों से संबंधित घटनाओं का राजफाश चुनौती होगी।