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अमीर बनने का क्या है चाणक्य का फॉर्मूला? जानिए धन और सफलता की 5 शक्तिशाली नीतियां

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद भी खूब पैसा बना लेते हैं. जबकि कुछ लोग पूरी जिंदगी मेहनत करने के बाद भी आर्थिक परेशानियों से बाहर नहीं निकल पाते हैं? क्या इसका कारण सिर्फ किस्मत है? क्या अमीर लोग हमसे ज्यादा भाग्यशाली होते हैं? या फिर उनके पास कोई ऐसा रहस्य होता है जो आम लोगों को पता ही नहीं चल पाता है? आचार्य चाणक्य का मानना था कि धन और सफलता कभी संयोग से नहीं मिलती है. इसके पीछे कुछ निश्चित सिद्धांत, आदतें और निर्णय होते हैं, जो एक साधारण व्यक्ति को भी असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं. तो चलिए आज हम जानेंगे चाणक्य की 5 शक्तिशाली नीतियों के बारे में, जो आपकी सोच बदल सकती हैं, आपके निर्णयों को बेहतर बना सकती हैं और आपको धन, सफलता तथा समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती हैं. सही अवसर पहचानें चाणक्य नीति के मुताबिक, बुद्धिमान व्यक्ति अवसर का इंतजार नहीं करता है, वह उसे पहचानकर उसका लाभ उठाता है. जीवन में सफलता और असफलता का अंतर मेहनत से ज्यादा सही समय पर लिया गया सही निर्णय होता है. अवसर हर किसी के जीवन में आते हैं, फर्क सिर्फ इतना होता है कि कुछ लोग उन्हें पहचान लेते हैं, जबकि कुछ लोग डर, संदेह या आलस्य के कारण उन्हें खो देते हैं. अपने धन को सही दिशा दें चाणक्य के अनुसार, जिस व्यक्ति को धन का सही उपयोग करना नहीं आता है, उसका धन टिक नहीं पाता है. धन कमाना एक कला है, लेकिन उसे संभालना और बढ़ाना उससे भी बड़ी कला है. अधिकतर लोग कमाते तो हैं, लेकिन बचत और निवेश की कमी के कारण कभी धनवान नहीं बन पाते हैं. ज्ञान और कौशल में निवेश करें चाणक्य कहते हैं कि, ज्ञान वह संपत्ति है जिसे कोई चुरा नहीं सकता है. आज की दुनिया में सबसे बड़ी ताकत पैसा नहीं, बल्कि ज्ञान और कौशल है. जितना अधिक आप सीखते हैं, उतनी ही आपकी कीमत बढ़ती है और उतने ही बेहतर निर्णय आप ले पाते हैं. समय की कीमत समझें चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति समय को नष्ट करता है, समय उसे नष्ट कर देता है. हर व्यक्ति के पास 24 घंटे होते हैं, लेकिन सफलता इस पर निर्भर करती है कि आप इन घंटों का उपयोग कैसे करते हैं. सही लोगों की संगति चुनें चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति की पहचान उसकी संगति से होती है. आप जिन लोगों के साथ रहते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे आप पर प्रभाव डालती हैं. इसलिए, एक अच्छी संगति आपको ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती है, जबकि गलत संगति आपको पीछे खींच सकती है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देंगे नियुक्ति पत्र, 151 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती पूरीस्वास्थ्य विभाग में 262 पदों पर नई भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया जारी

 रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार 151 विशेषज्ञ चिकित्सक सहित कुल 262 पदों पर अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसे लेकर प्रोजेक्ट भवन सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे नियुक्त पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी एवं अन्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। जिन पदों के लिए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलेगा, उनमें खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के 56, वरीय अस्पताल प्रबंधक के 29 तथा वित्त प्रबंधक के 26 पद भी सम्मिलित हैं। इनमें खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई है। राज्य में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त था। इस पद पर नियमित नियुक्ति हुई है। अब इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर शिकंजा कसेगा। वहीं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत अनुबंध पर टेंडर के माध्यम से हुई है। चयनित चिकित्सकों को उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए विकल्प के अनुसार पदस्थापन भी कर दिया है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थी वहां योगदान देंगे। इन सभी चिकित्सकों को उनके द्वारा कोट की गई मानदेय राशि मिलेगी, जो अधिकतम तीन लाख रुपये मासिक होगी। इनके अलावा वरीय अस्पताल प्रबंधक तथा वित्त प्रबंधक के पदों पर भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के अंतर्गत अनुबंध पर हुई है। इन्हें निर्धारित मानदेय देय होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत ही अस्पताल प्रबंधक तथा आइटी एग्जीक्यूटिव के पदों पर भी नियुक्ति होनी है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल प्रबंधक के पदों पर नियुक्ति के लिए 25 जून को साक्षात्कार आयोजित किया जाना है। पहले इस पद के लिए 24 जून को ही साक्षात्कार होना था, लेकिन नियुक्त पत्र वितरण समारोह को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया है

पूर्व मध्य रेल की नई साप्ताहिक ट्रेन, पुणे रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत

 पटना बिहार से महाराष्ट्र के पुणे जाने वाले रेल यात्रियों के लिए पूर्व मध्य रेल की ओर से एक बहुत ही शानदार और बड़ी सुविधा सामने आई है। यात्रियों की भारी भीड़ और सहूलियत को देखते हुए रेलवे ने दानापुर और पुणे के बीच एक नई 'अमृत भारत एक्सप्रेस' स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सरस्वती चंद्र ने सोमवार को बताया कि इस नई अमृत भारत एक्सप्रेस साप्ताहिक ट्रेन का नियमित परिचालन आगामी 27 जून से शुरू होने जा रहा है। इस आधुनिक ट्रेन के शुरू होने से नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों को सीटों के लिए होने वाली मारामारी से बड़ी राहत मिलेगी और सफर काफी आरामदायक हो जाएगा। ट्रेन का ये रहेगा रूट और पूरा टाइम टेबल यह नई स्पेशल ट्रेन पूरी तरह से साप्ताहिक आधार पर चलाई जाएगी, जिससे यात्रियों को दोनों तरफ से आने-जाने का बेहतर विकल्प मिलेगा। यह गाड़ी दानापुर से खुलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU), प्रयागराज छिवकी, जबलपुर, इटारसी और भुसावल के रास्ते होते हुए पुणे तक का सफर तय करेगी। गाड़ी संख्या 11431 पुणे-दानापुर अमृत भारत एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को पुणे से दोपहर 3 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी और सोमवार की रात 1 बजकर 30 मिनट पर दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में, गाड़ी संख्या 11432 दानापुर-पुणे अमृत भारत एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार की सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर दानापुर स्टेशन से खुलकर अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह 11 बजकर 5 मिनट पर पुणे पहुंचेगी। ट्रेन में यात्रियों को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं इस नई अमृत भारत ट्रेन को यात्रियों के सफर को पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेन में कुल 18 आधुनिक कोच लगाए गए हैं। इनमें स्लीपर क्लास के 8 कोच, जनरल के 7 कोच, पैंट्रीकार का 1 कोच और एसएलआरडी (SLRD) के 2 कोच शामिल हैं। रेलवे प्रशासन ने बताया कि पुश-पुल तकनीक वाली इस ट्रेन के चलने से कम किराए में लोगों को बेहतरीन वेंटिलेशन, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और बायो-टॉयलेट जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ सफर करने का मौका मिलेगा। इस रूट पर नई ट्रेन के आने से यात्रियों को यात्रा करने के लिए अब एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प मिल गया है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बड़ा बदलाव: विश्वविद्यालयों में अपार आईडी से होगा एडमिशन

रांची  राज्य के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में चांसलर पोर्टल से नामांकन में अनिवार्य रूप से अपार आइडी देनी होगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसे अनिवार्य किया है। विभाग ने इसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दिया है। यह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही लागू होगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में राज्य में एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट, नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी, क्रेडिट ट्रांसफर तथा मल्टीपल एंट्री-एग्जीट जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इन सभी सुविधाओं के लिए शैक्षणिक प्रमापपत्रों का डिजिटल प्रबंधन तथा सत्यापित अपार आइडी अनिवार्य है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने नामांकन के समय सत्यापित अपार आइडी अपलोड करने को कहा है। विभाग ने यह भी कहा है कि चांसलर पोर्टल पर इसके सफल प्रमाणीकरण के बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी गई है कि प्रवेश, नामांकन, पंजीकरण सहित अन्य प्रक्रियाएं भी चांसलर पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी, जिनमें अपार आइडी अनिवार्य होगा। विभाग ने सभी अभ्यर्थियों से सत्यापित अपार आइडी तैयार रखने तथा नामांकन प्रक्रिया में उसके इस्तेमाल का सुझाव दिया है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को भी इसे सख्ती से अनुपालन कराने को कहा गया है। कैसे बनाएं अपार आइडी? अपार आइडी अर्थात एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स कार्ड डिजी लाकर या एबीसी पोर्टल के माध्यम से घर बैठे बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले डिजीलाकर की वेबसाइट पर लागिन कर अपना अकाउंट बनाएं। डिजीलाकर मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप नए यूजर हैं, तो 'साइन अप' पर क्लिक कर अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के माध्यम से उसे सत्यापित करें। इसके बाद छह अंकों का सेक्युरिटी पिन सेट करें। इसके बाद अपने अकाउंट में लागिन कर सर्च डाक्यूमेंट में जाएं और एबीसी आइडी और अपार सर्च करें। इसमें मांगी गई सभी जानकारी भरने के बाद कंसेंट बाक्स को चेक करें ओर गेट डाक्यूमेंट या सबमिट पर क्लिक करें। इसी के साथ आपकी अपार आइडी जेनरेट हो जाएगी।  

1975 का आपातकाल याद करते हुए संजय सरावगी बोले बिहार बना था लोकतंत्र बचाने की ताकत

पटना  आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi ने उस दौर को याद करते हुए दावा किया है कि देश में लोकतंत्र की रक्षा की सबसे मजबूत लड़ाई बिहार की धरती से लड़ी गई थी। उनके अनुसार, आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि आज भी बिहार की गलियों और परिवारों में उस संघर्ष की यादें जीवित हैं, जिसने तानाशाही के खिलाफ जनआंदोलन का रूप लिया था। 25 जून 1975: जब एक रात में बदल गया देश का राजनीतिक माहौल 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने देश में आपातकाल लागू किया था। इसके बाद नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हुईं और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई। बिहार में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया और विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई। जेपी आंदोलन को बताया लोकतंत्र की सबसे बड़ी लड़ाई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार में शुरू हुआ छात्र आंदोलन आगे चलकर लोकतंत्र बचाने के राष्ट्रीय अभियान में बदल गया। इस आंदोलन का नेतृत्व Jayaprakash Narayan ने किया था। उनके अनुसार, जेपी के आह्वान पर हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतरे और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष किया। कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नांडिस के संघर्ष का किया जिक्र लेख में Karpoori Thakur और George Fernandes की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। दावा किया गया कि आपातकाल के दौरान कई नेता भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाते रहे। उस समय सरकारी कार्रवाई के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जारी रखा। संघ और जनसंघ की भूमिका को बताया आंदोलन की रीढ़ संजय सरावगी ने कहा कि आपातकाल के दौरान Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Jana Sangh के कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना है कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद कार्यकर्ता भूमिगत रहकर संदेशों और आंदोलन की गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहे। 1977 का चुनाव बना लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक लेख में 1977 के आम चुनाव को लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया है। भाजपा नेता के अनुसार, जनता ने चुनाव के माध्यम से आपातकाल की नीतियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि बिहार ने उस दौर में सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया। 51वीं वर्षगांठ पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान आपातकाल की वर्षगांठ पर भाजपा ने इसे लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से जोड़ते हुए याद किया है। संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल का इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सतर्क रहने का संदेश भी देता है।

दिल्ली में नया फ्लाईओवर पूरा, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली की दूरी घटेगी

नई दिल्ली  अगले महीने से एम्स, साउथ एक्स या आईएनए से मयूर विहार फेज-2 और आसपास के इलाकों में आने-जाने वालों का सफर सुहाना होने वाला है। साउथ दिल्ली को पूर्वी दिल्ली से कनेक्ट करने के लिए 3.5 किमी लंबा बनाए जा रहे बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर का अंतिम स्लैब पियर सोमवार को रखा गया। फ्लाईओवर के कुल 79 पियर हैं, जिस पर 80 स्लैब रखे गए हैं। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सोमवार को इसका निरीक्षण किया। पहले 30 जून तक फ्लाईओवर से ट्रैफिक संचालन का प्लान था, लेकिन मौके पर जैसे हालात हैं, उसे देखने के बाद उद्घाटन अगले महीने तक ही संभव है। होगी समय की बचत मंत्री के अनुसार, इस फ्लाईओवर से ट्रैफिक संचालन शुरू होने के बाद एम्स और आईएनए से मयूर विहार फेज-2 और आसपास के इलाकों में आने जाने में महज 10 मिनट का वक्त लगेगा। वर्तमान में नई दिल्ली एरिया के आईएनए, एम्स या सफदरजंग से पूर्वी दिल्ली जाने में कम से कम 50 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। फेज-3 फ्लाईओवर का काम साल 2015 में शुरू हुआ था और साल 2017 में इसे पूरा करना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवाद, अलग अलग विभागों से मंजूरी में देरी और तकनीकी जटिलताओं और प्रशासनिक कारणों से यह प्रोजेक्ट बरसों तक लंबित रहा। देरी की वजह से ही प्रोजेक्ट कॉस्ट में काफी बढ़ोतरी हुई। यमुना के दोनों छोर पर स्थित फ्लड प्लेन एरिया में स्लैब का काम कंप्लीट हो चुका है। यमुना के बीचो-बीच एक स्लैब पियर्स पर रखना था, यह काम भी आज पूरा हो गया है।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT की रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई

अयोध्या अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में क्या है इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। बस इतना बताया गया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। राममंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। अयोध्या में सात दिन की जांच के बाद मंगलवार को एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है। बताया जा रहा है कि करीब सवा सौ पन्नों की इस रिपोर्ट में कुछ सिफारिशें भी की गई हैं। एसआईटी की जांच अभी जारी रहेगी। माना जा रहा है कि एसआईटी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद वापस अयोध्या लौट जाएगी। लखनऊ के मंडलायुक्त और तीन सदस्यीय एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने दोनों सदस्यों के साथ एसीएस होम को यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके आधार पर यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। एसआईटी के सदस्यों ने रिपोर्ट के बारे में कुछ बताया नहीं है। बस इतना कहा गया है कि जांच की कार्यवाही अभी प्रचलित है। माना जा रहा है कि इस प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ अहम जानकारियां हो सकती है। एसआईटी इस मामले की जांच में लगातार जुटी हुई थी।     जारी है जांच, नए चेहरे रडार पर, चर्चा में कई नाम चढ़ावा प्रकरण की प्रथम स्तर की जांच पूरी होने के बाद अब कुछ नए नामों की चर्चा तेज हो गई है, जो रामजन्मभूमि में कर्मचारी नहीं हैं फिर भी कहीं न कहीं उनका जुड़ाव ट्रस्ट के प्रभावशाली लोगों से रहा, जिसका फायदा भी उन्हें मिला। सूत्र बताते हैं कि अब उन लोगों ने भी एसआईटी पूछताछ कर सकती है। फिलहाल सोमवार को परिसर में एसआईटी के सभी अधिकारी उपस्थित नहीं थे, इसलिए ज्यादा लोगों से पूछताछ नहीं की गई है। कागजों की जांच-पड़ताल करने की जानकारी मिली है। माना जा रहा है किद मुख्यमंत्री को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद ही अधिकारी द्वितीय स्तर की जांच करने के लिए रामधाम पहुंचेंगे। एसआईटी सोमवार को पूरे मंदिर परिसर में नजर नहीं आई। उसका स्टाफ जरूर तथ्यों को जुटाने में लगा रहा। धातुओं के मंदिर में इस्तेमाल, भंडारण जांच भी जद में चढ़ावे की रकम के बाद दान में दी गई धातुओं के सही इस्तेमाल होने या न होने का शक, फिर मंदिर निर्माण में कमीशन लेने का आरोप, यह विषय इस तरह के हैं, जिससे कहा जा सकता है कि जांच की निर्धारित अवधि पर्याप्त नहीं है। एसआईटी के गठन के समय आरोप केवल मंदिर पर चढ़ावे की रकम में हेरफेर का था, इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू होने के साथ आरोपों की संख्या बढ़ती चली गई और मामला बड़ा हो गया। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार है और माना जा रहा है, जिसमें चढ़ावे की रकम को प्रमुखता दी गई है। सूत्र बताते हैं कि प्रमुख आरोपियों से पूछताछ और मानक के विपरीत कार्य करने को आधार बनाया गया है। जांच में नोटों की गिनती और धातुओं को रखने के दौरान जिस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं की गई। मामले में हर स्तर पर गलतियां उजागर हुई हैं।

रामनगर मंदिर में सेंधमारी: चोरों ने दानपात्र का ताला तोड़कर नकदी उड़ाई, पुलिस जांच में जुटी

अम्बेडकरनगर अम्बेडकरनगर थाना क्षेत्र के रामनगर कस्बे में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर से चोरों ने पुलिस की सक्रियता को धता बताते हुए मंदिर की जाली को तोड़ कर दानपत्र में रखा लगभग दस हजार रुपयों पर हाथ साफ कर दिया। चोरों ने दानपत्र के ताले को तोड़ नगद रूपये को पार किया है। सूचना पर पहुंची पुलिस मामले में छानबीन करने में जुटी है। आलापुर थाना क्षेत्र के रामनगर कस्बे में चौक से लगभग सौ मीटर पश्चिम स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में मंगलवार को सुबह जब एक माली पहुंचा तो उसने मंदिर के बाहरी हिस्से में लगी जाली को टूटा हुआ पाया। जिसकी जानकारी उसने आसपास के नागरिकों को देते हुए मंदिर के पुजारी वरुण तिवारी को दी। मौके पर पहुंचे पुजारी वरुण तिवारी ने देखा तो परिसर में रखे दानपत्र का ताला टूटा हुआ था और उसमें रखे चढ़ावे के लगभग दस हजार रुपए गायब थे। पंचमुखी हनुमान मंदिर के दानपत्र से रुपए चोरी होने की सूचना मिलते ही कस्बेवासियों की भीड़ जुट गई। सूचना पर पहुंची आलापुर पुलिस ने घटना की जानकारी ली और छानबीन शुरू किया। थानाध्यक्ष वीरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मामले आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से चोरों का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही खुलासा कर दिया जायेगा।

रात में हनुमान जी की पूजा क्यों मानी जाती है सबसे फलदायी? जानिए धार्मिक मान्यता

हनुमान जी को कलयुग का जागृत देवता माना जाता है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और साहस, शक्ति व आत्मविश्वास का वरदान मिलता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यदि पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जाए तो उसका प्रभाव और भी अधिक होता है. ज्येष्ठ माह के आखिरी बड़े मंगल के अवसर पर जानते हैं कि आखिर संध्या या रात्रि के समय हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी क्यों मानी जाती है. रात में क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा? आमतौर पर मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है. लेकिन शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यदि संभव हो तो संध्या या रात्रि के समय उनकी उपासना करना अधिक फलदायी माना गया है. मान्यता है कि संध्या काल में भगवान शिव समस्त सृष्टि का भ्रमण करते हैं. चूंकि हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, इसलिए इस समय उनकी पूजा का महत्व और बढ़ जाता है. ऐसी भी मान्यता है कि दिनभर हनुमान जी प्रभु श्रीराम की सेवा में लगे रहते हैं. इसलिए संध्या और रात्रि का समय उनकी आराधना के लिए विशेष माना गया है. इस समय हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अधिक प्रभावशाली बताया गया है. हनुमान जी की पूजा कैसे करें? हनुमान जी की पूजा करने से पहले तन और मन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा के समय लाल रंग का आसन बिछाकर बैठना शुभ माना गया है. साधक को अपने विचार, वाणी और व्यवहार में संयम रखना चाहिए और यथासंभव सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए. पूजा स्थल पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. सबसे पहले भगवान श्रीराम का पूजन करें, क्योंकि हनुमान जी स्वयं प्रभु श्रीराम के परम भक्त हैं. इसके बाद घी का दीपक जलाकर फल, पुष्प और मिष्ठान अर्पित करें. हनुमान चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती के बाद अपनी मनोकामना व्यक्त करें.

अंधेरे से उजाले की ओर सुकमा: माड़वी मुये की दोनों आंखों का सफल ऑपरेशन, मुख्यमंत्री को कहा धन्यवाद

अंधेरे से उजाले की ओर सुकमा माड़वी मुये की दोनों आँखों का हुआ ऑपरेशन, मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद  'मिशन दृष्टि' से 42 ग्रामीणों का मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन, मिला नई जिंदगी का उपहार  रायपुर कभी विकास की मुख्यधारा से कटे और नक्सल प्रभावित रहे सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में शासन के सुशासन और संवेदनशीलता की एक नई सुबह हुई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गम जगरगुंडा तहसील के दूरस्थ अंदरूनी गाँवों के 42 मोतियाबिंद मरीजों का सफल और निःशुल्क ऑपरेशन कर उनके जीवन से अंधेरे को हमेशा के लिए मिटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने खुद कड़े रास्तों को पार कर घर-घर सर्वे किया, मरीजों की पहचान की और उन्हें पूरे सम्मान के साथ विशेष वाहनों से जिला चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ सिविल सर्जन डॉ. एम.आर. कश्यप और नेत्र सर्जन डॉ. खुशबू देवांगन की देखरेख में मिशन 'दृष्टि योजना' के तहत यह जीवन बदलने वाली सर्जरी पूरी हुई।     ​इस मुहिम की सबसे खूबसूरत और भावुक कर देने वाली तस्वीर दूरस्थ पहुँचविहीन गाँव गेड़ापार के निवासी माड़वी मुये के रूप में सामने आई। पिछले तीन महीनों से आँखों की धुंधली होती रोशनी के कारण लाचारी का जीवन जी रहे माड़वी के दोनों आँखों का जिला अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ, जिससे उनकी दुनिया एक बार फिर से रोशन हो उठी है। अपनी आँखों में नई चमक और चेहरे पर मुस्कान लिए माड़वी मुये ने भावुक होकर कहा, "मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन की वजह से मुझे नया जीवन मिला है, मैं सदा उनका आभारी रहूँगा।" अस्पताल से छुट्टी के वक्त मरीजों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें फल बांटे गए, जिससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और रविवार को उन्हें पूरे सम्मान के साथ सकुशल उनके घरों तक वापस छोड़ा गया।     ​नक्सल गतिविधियों में आई भारी कमी के बाद, सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का यह विस्तार सुकमा की बदलती और मुस्कुराती हुई तस्वीर को बयां करता है। अब गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े और महंगे शहरों की तरफ भटकना नहीं पड़ रहा है, बल्कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सीधे उनके दरवाजे तक पहुँच रही हैं। जिला प्रशासन के द्वारा मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद मरीजों को फल और अन्य सामग्री का निःशुल्क वितरण किया गया। डिस्चार्ज हुए मरीजों और उनके परिजनों से प्रशासन ने अपील की है कि वे अपने आस-पड़ोस के अन्य जरूरतमंदों को भी इलाज के लिए प्रेरित करें, जिसके बाद प्रशासन की यह संवेदनशील पहल अब एक जन-जागरूकता आंदोलन का रूप ले चुकी है।