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नक्सलवाद के खात्मे की तैयारी तेज, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक, मार्च 2026 पर नजर

रायपुर देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आज रायपुर में निर्णायक दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इन बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे अहम रणनीतिक बैठक माना जा रहा है। पहली समीक्षा बैठक सुबह शुरू हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, इंटेलिजेंस नेटवर्क की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और बचे हुए संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई को तेज करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों को समाप्त करने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिनभर चलेगा मंथन पहली बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा, जबकि शाम 3 बजे से 4:15 बजे तक एक बार फिर उच्चस्तरीय चर्चा होगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य और विकास के नए दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा। दो प्रमुख एजेंडों पर होगा फैसला उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है। बैठक में दो मुख्य मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है। पहला, देश को तय समय सीमा तक पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति। दूसरा, बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति देने का रोडमैप।

PM मोदी की तारीफों के पुल: मलेशियाई प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा—आप जैसे दोस्त मिलना सौभाग्य

मलेशिया मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की  तारीफों के पुल बांधते हुए उनको “सच्चा दोस्त” बताया और कहा कि उनके बीच भरोसेमंद और समझदारी भरा आदान-प्रदान हुआ।  इब्राहिम ने कहा- मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं  मोदी जी का बहुत अच्छा पर्सनल दोस्त हूं। और आप सही मायने में सच्चे, भरोसेमंद और समझदार दोस्त हैं।अनवर इब्राहिम ने कहा,  "मैं पर्सनली बहुत एक्साइटेड, बहुत शुक्रगुजार और बहुत खुश हूं कि भारत से मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त मलेशिया में हमारे साथ जुड़ रहा है।"  कुआलालंपुर में दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनवर ने इस बैठक को “बहुत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और निर्णायक” बताया और कहा कि यह भारत-मलेशिया संबंधों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। अनवर ने कहा कि भारत और मलेशिया के संबंध 1957 से हैं और 2024 में इसे “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” में अपग्रेड किया गया। उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध, मजबूत जन-स्तरीय जुड़ाव और तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने 11 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें MoUs और पत्रों का आदान-प्रदान शामिल है, और यह सामान्य द्विपक्षीय समझौतों से आगे है। इनमें से कुछ समझौतों में सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। अनवर ने कहा कि दोनों देश व्यापार और निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय मुद्रा (रुपया और रिंगगिट) में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करेंगे।   उन्होंने 2025 में 8.59 अरब डॉलर के व्यापार आंकड़े से आगे बढ़कर 18.59 अरब डॉलर के लक्ष्य से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई। अनवर ने शैक्षिक संबंधों को “केंद्रिय” बताया और कहा कि कई मलेशियाई छात्रों की शिक्षा भारत में हुई है, जबकि भारत से भी छात्र मलेशिया में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा संस्थानों को वैश्विक मान्यता मिली है और भविष्य में छात्रों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा। उन्होंने पर्यटन और कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने भारत के शांति प्रयासों यूक्रेन-रूस और मध्य पूर्व (गाजा) के संदर्भ में को समर्थन देने के लिए मोदी की सराहना की।   अंत में, अनवर ने भारत की सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि कोटा किनाबालु (साबाह) में भारत का वाणिज्य दूतावास खोलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। इससे पहले दोनों नेताओं ने प्रतिनिधि-स्तरीय वार्ता की, जिसमें रक्षा और सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी को पुत्राजया में औपचारिक स्वागत भी किया गया। यह दौरा भारत-मलेशिया के लंबे समय से चल रहे मित्रता संबंध को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।    

विवादों में मंत्री की माफी: कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान के बाद स्क्रिप्ट लेकर आए, हँसी बनी सवाल

भोपाल अपने ही गैर-जिम्मेदाराना और विवादित बयानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह अब तक चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। 13 मई 2025, 14 मई 2025, फिर 23 मई 2025 और अब 07 फरवरी 2026, एक ही बयान और एक ही विषय पर इतनी बार माफी मांगने का रिकॉर्ड शायद ही किसी मंत्री के नाम दर्ज हो। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो या नहीं, लेकिन सियासी शर्मनाक घटनाओं की सूची में जरूर दर्ज किया जाना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि शनिवार को इंदौर के रेसिडेंसी क्षेत्र में जब मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया को लेकर माफीनामा पढ़ रहे थे, तो वह भी बिना तैयारी के नहीं, बल्कि पूरी लिखित स्क्रिप्ट के साथ।   मीडिया के सवालों के दौरान शाह का रवैया भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता नजर आया। माफी मांगने आए मंत्री जी के हाव भाव ऐसे थे मानों वह किसी गंभीर गलती पर पछतावा जताने नहीं, बल्कि सिर्फ औपचारिकता निभाने आए हों। “बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है।” अगर वास्तव में उन्हें अपने बयान पर जरा भी मलाल या आत्मग्लानि होती, तो वह मीडिया से चर्चा से पहले कैमरों के सामने इस तरह बेशर्मी भरी मुस्कान के साथ खड़े नजर नहीं आते। उनके चेहरे पर न पश्चाताप था, न संकोच और न ही शब्दों की जिम्मेदारी का कोई भार। औपचारिकता निभाने आए थे? पूरा घटनाक्रम यही संकेत देता है कि शाह इंदौर केवल औपचारिकता निभाने आए थे, न कि अपने बयान की गंभीरता को समझने। कैमरों के सामने मुस्कुराते रहना और माफी को एक मजबूरी की तरह पेश करना, यह साफ दर्शाता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में लिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह वही गंभीरता है, जिसकी उम्मीद जनता एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से करती है, या फिर अब माफी भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह गई है? सवाल यह है कि क्या अब मंत्री को माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ने लगी है? क्या शब्द इतने अविश्वसनीय हो चुके हैं कि बिना कागज के बोलना भी जोखिम भरा हो गया है? 11 मई को दिया था विवादित बयान बीते वर्ष 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा दिया गया विवादित और आपत्तिजनक बयान अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है। कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन आतंकियों ने लोगों को मारा, उन्होंने कपड़े उतरवाए और हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा था कि “प्रधानमंत्री ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई।” मंत्री द्वारा सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया। 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश मंत्री विजय शाह को यह बयान देना अब भारी पड़ रहा है। हाईकोर्ट जबलपुर के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हुई और इंदौर जिले के मानपुर थाने में शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। चूंकि आपत्तिजनक बयान मानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया था, इसलिए मूल प्रकरण यहीं दर्ज किया गया था । मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे।

सिर्फ ‘नीच’ बोलना SC/ST ऐक्ट के तहत अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने दी बड़ी व्याख्या

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) ऐक्ट अपने-आप लागू नहीं होता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह ऐक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह साबित हो कि अपमान खास तौर पर जाति के आधार पर किया गया था और आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।   क्या है मामला यह मामला वर्ष 2011 में आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक विवाद से संबंधित है। उस समय सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान मानते हुए एफआईआर दर्ज करवाई और एससी/एसटी ऐक्ट की धारा के साथ आईपीसी की धाराएं भी जोड़ी गईं। आरोपियों की क्या दलील आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका देते हुए कहा कि उन्हें अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी और बोले गए शब्द जाति का संकेत नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस्तेमाल किए गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते और ना ही ऐसा कोई प्रमाण है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट लगाने के लिए जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट और ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। इस आधार पर कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने और उनसे धक्का-मुक्की से संबंधित आईपीसी की धाराएं बनी रहेंगी और इन्हीं धाराओं पर मामला आगे चलेगा।  

‘मैं नाथूराम’ नाटक पर बवाल: राजकोट में हॉल में तोड़फोड़, 45 कांग्रेसी हिरासत में

राजकोट राजकोट में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यहां गुजराती नाटक 'मैं नाथूराम' के मंचन से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और हॉल में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद पुलिस ने करीब 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। घटना शहर के हेमू गढ़वी हॉल में हुई, जहां रात 9:15 बजे नाटक का मंचन होना था।   कांग्रेस ने क्यों किया विरोध मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता नाटक के मंचन का विरोध कर रहे थे। उनका आरोप था कि यह नाटक महात्मा गांधी के सिद्धांतों को कमतर दिखाने की कोशिश करता है। कांग्रेस के राजकोट अध्यक्ष राजदीपसिंह जडेजा ने बताया कि उन्होंने पहले हॉल ट्रस्ट से नाटक रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि गांधीजी का राजकोट से गहरा जुड़ाव रहा है, क्योंकि उन्होंने यहां पढ़ाई की थी। जडेजा के मुताबिक, जब आयोजकों ने कार्यक्रम रद्द करने से इनकार कर दिया और पुलिस सुरक्षा में मंचन कराने की बात कही, तब कांग्रेस ने विरोध करने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और कुछ युवाओं ने मंच पर पड़े पाइप फेंक दिए। उनका कहना था कि यदि वे शांतिपूर्वक बैठते, तो नाटक जारी रहता। क्या बोले आयोजक इस मामले पर नाटक के निर्माता और प्रस्तुतकर्ता परितोष पेंटर ने कहा कि उनके पास सेंसर सर्टिफिकेट और पुलिस की अनुमति थी। उन्होंने बताया कि अचानक 200-300 लोगों का समूह वहां पहुंचा और नाटक को रोकने की कोशिश करने लगा। पेंटर ने कहा कि नाटक एक प्रकाशित किताब पर आधारित है और इसमें नाथूराम गोडसे के अदालत में दिए गए बयान को दिखाया गया है। उनका कहना है कि इसमें किसी को सही या गलत साबित करने की कोशिश नहीं की गई है। घटना के बाद पुलिस ने 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। देर शाम तक पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि नाटक के आगामी दिनों में अन्य शहरों में भी मंचन की योजना है और आयोजक इसे जारी रखने पर अड़े हैं।  

दरभंगा शर्मसार: मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या, सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा

दरभंगा बिहार के दरभंगा में एक छह साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की गई। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के बेला में शनिवार की रात छह साल की बच्ची से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके कपड़े पर खून के धब्बे मिले हैं। उसकी पहचान विकास महतो (22) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया है। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया है। आरोपी को सौंपने की मांग पर अड़े लोग उसे तालिबानी सजा देने की जिद पर अड़े हैं। पुलिस और पब्लिक आमने सामने है। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद हैं।   घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और परिजनों ने मुख्य मार्ग को सुंदरपुर बेला मंदिर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपित को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी भी घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के लिए एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है। मौके पर पांच थानों की पुलिस तैनात है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। रेप-मर्डर के बाद सड़क पर आगजनी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि बच्ची का शव बरामद कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बच्ची कादिराबाद की रहने वाली थी। वह बेला में अपने ननिहाल आयी थी। वह शनिवार की शाम से ही घर से लापता थी। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। देर रात गांव के बाहर तालाब के पास कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। इसके बाद परिवार के लोगों को शक हुआ। परिजन मौके पर पहुंचे तो तालाब के किनारे दीवार के पास बच्ची खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि घटना के समय तीन बच्चियां तालाब किनारे खेल रही थीं। इसी दौरान आरोपित ने तीनों को पकड़ने की कोशिश की। एक बच्ची उसके हाथ लग गई, जबकि दो अन्य बच्चियां वहां से भाग निकलीं। आरोपित बच्ची को अंधेरे की ओर ले गया और जहां उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।  

मध्य प्रदेश में बकरी पालन पर 50% सब्सिडी, सरकार की स्कीम से किसानों के लिए बन रहा है सुपरहिट बिजनेस

छिंदवाड़ा  किसानों के लिए एक ऐसी योजना आई है जो 50% सब्सिडी के साथ मालामाल कर सकती है. इसके लिए आधी रकम किसानों को लगाना होता है तो आधा सरकार खर्च उठाती है. कुछ ऐसा ही किया है बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने. जिन्होंने एक करोड़ रुपए का बकरी फॉर्म खोलकर खेती को फायदा का सौदा बनाया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन से हो जाएंगे मालामाल छिंदवाड़ा के बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने बताया कि, ''पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन एनएलएम योजना का लाभ लेकर बकरी पालन शुरू किया है और फायदे का व्यापार साबित किया है. सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है.'' उन्होंने बताया कि, ''एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं. फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है. इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे एक्स्ट्रा इन्कम हो रही है.'' 1 करोड़ की लागत में आधी सब्सिडी उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि, ''बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. योजना के अंतर्गत पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि नवीन रघुवंशी को प्रदान की जा चुकी है. इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है. पोषण, ब्रीडिंग और तकनीक पर विशेष ध्यान बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है. दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं. ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत करीब 2 लाख रुपये है. बेहतर पोषण और मैनेजमेंट के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन अच्छा हो रहा है. खेती में डिजिटल टेक्निक का उपयोग देश-विदेश तक पहचान नवीन रघुवंशी के बेटे मंथन रघुवंशी बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दे रहे हैं. वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों जानकारी के वीडियो भी शेयर कर रहे हैं. कुछ दिन पहले उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस. पक्षवार, एपीसी ग्रुप एवं एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा के साथ एनएलएम योजना के अंतर्गत संचालित इस बकरी फार्म के संचालन की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे. निरीक्षण दल में उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जितेन्द्र कुमार सिंह, उप संचालक उद्यानिकी विभाग एम.एल. उइके, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. झाड़े, डॉ. अलवा तथा कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के प्रमुख डॉ. आर.एल. राउत पहुंचे थे.

झारखंड में गठबंधन की योजना नाकाम, निकाय चुनाव में बागियों का असर

रांची   झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही औपचारिक रूप से पार्टी आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. भाजपा, झामुमो और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पार्टियां नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए खुलकर मैदान में हैं. समर्थित उम्मीदवारों के नाम पर पार्टियों के भीतर ही सियासी गोटी बिछाई जा रही है. इस बार के निकाय चुनाव में पार्टियों के भीतर बगावत ने गठबंधन और रणनीति दोनों को कमजोर कर दिया है. बागियों ने बिगाड़ा सियासी गणित चुनावी फसल काटने की होड़ में कई जगहों पर पार्टी के ही नेता या उनके परिवार के सदस्य अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. इससे पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल खड़े हो गए हैं. कहीं पति पार्टी लाइन पर खड़ा है, तो पत्नी बागी बनकर उसी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रही है. इस स्थिति ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. राज्यभर में गहमा-गहमी, नामांकन तक चला मान-मनौव्वल रांची, धनबाद, देवघर, मेदिनीनगर समेत कई नगर निकायों में नामांकन के आखिरी दिन तक गहमा-गहमी बनी रही. 4 फरवरी को नामांकन की अंतिम तारीख और 6 फरवरी को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तक रूठने-मनाने का दौर चलता रहा. हालांकि कई जगहों पर पार्टी नेतृत्व बागियों को मनाने में नाकाम रहा. 48 निकायों में सजी चुनावी बिसात झारखंड में इस बार नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में चुनावी मुकाबला है. इतने बड़े स्तर पर हो रहे चुनाव में सत्तारूढ़ झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच कोई स्पष्ट गठबंधन फॉर्मूला तय नहीं हो सका है. इसका सीधा फायदा बागी उम्मीदवारों को मिलता दिख रहा है. धनबाद में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती धनबाद नगर निगम चुनाव भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गया है. पार्टी ने मेयर पद के लिए संजीव कुमार को समर्थन दिया है, लेकिन भाजपा के कई नेता बागी होकर मैदान में हैं. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा मुकेश पांडेय और भृगुनाथ भगत ने भी नामांकन वापस नहीं लिया. भाजपा किसी भी बागी को मनाने में सफल नहीं हो सकी. वहीं झामुमो की प्रत्याशी डॉ नीलम मिश्रा ने नामांकन वापस ले लिया है. अब पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल झामुमो समर्थित उम्मीदवार होंगे. देवघर में भाजपा और झामुमो दोनों में अंदरूनी कलह देवघर नगर निगम में भाजपा ने रीता चौरसिया को समर्थित प्रत्याशी बनाया है. पार्टी ने यहां काफी मंथन किया, लेकिन बाबा बनलासे और उमाशंकर सिंह बागी बनकर मैदान में डटे हुए हैं. इससे भाजपा का वोट बैंक बंटने की आशंका है. उधर झामुमो में भी फूट नजर आ रही है. रवि राउत पार्टी समर्थित उम्मीदवार हैं, जबकि झामुमो नेता सूरज झा भी चुनावी मैदान में उतर गए हैं. कांग्रेस ने यहां किसी भी उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया है. कांग्रेस नगर अध्यक्ष रवि केसरी भी मेयर पद के लिए किस्मत आजमा रहे हैं. मेदिनीनगर में बहुकोणीय मुकाबला मेदिनीनगर में चुनावी घमासान अपने चरम पर है. यहां झामुमो ने पूर्वम सिंह, भाजपा ने अरुणा शंकर, कांग्रेस ने नम्रता त्रिपाठी, जेएलकेएम ने आइसा सिंह और लोजपा ने ज्योति गुप्ता को समर्थन दिया है. भाजपा के भीतर भी असंतोष साफ दिख रहा है और पार्टी को कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. रांची में त्रिकोणीय मुकाबला राजधानी रांची में नगर निगम चुनाव सबसे ज्यादा रोचक हो गया है. कांग्रेस और झामुमो के बीच सहमति नहीं बन पाई. कांग्रेस ने पूर्व मेयर रमा खलखो को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने सुजित विजय आनंद कजूर को समर्थन दिया है. भाजपा ने रोशनी खलखो को पार्टी समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है. भाजपा ने रोशनी खलखो के खिलाफ नामांकन करने वाले संजय टोपो, राजेंद्र मुंडा और सुनील कच्छप को मना लिया, लेकिन सुजाता कच्छप नहीं मानीं. झामुमो ने भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में करीना तिर्की, बिरू तिर्की और रामशरण तिर्की जैसे नेताओं को मनाने में सफलता पाई है. बागी बदल सकते हैं चुनावी समीकरण निकाय चुनाव में बागियों की मजबूत मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में गठबंधन और पार्टी अनुशासन दोनों कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं. वोटों के बंटवारे से कहीं न कहीं अप्रत्याशित नतीजे सामने आ सकते हैं. यही वजह है कि इस बार के निकाय चुनाव को सभी दल बेहद अहम मान रहे हैं और अंतिम समय तक रणनीति बदलने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं.

जहां 90% बिकती हैं इलेक्ट्रिक कारें, वहीं TESLA की सेल्स 88% गिरी, जानें वजह

 नई दिल्ली     यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात हो और टेस्ला का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उलटी है. जिस नॉर्वे को टेस्ला अपना सबसे मजबूत किला मानती रही, वहीं अब उसके दरवाजे चरमराते दिख रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि नॉर्वे की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की बाढ़ है, लेकिन EV की इस भीड़ में टेस्ला की नाव लड़खड़ा गई है. सवाल सिर्फ बिक्री घटने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या यूरोप में टेस्ला का जादू सच में कमजोर पड़ने लगा है. बिक्री के मोर्चे पर आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है.  वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. फॉक्सवैगन ID.3 ने 299 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, जो टेस्ला से लगभग पांच गुना ज्यादा है. नॉर्वे में टेस्ला के लिए जनवरी भले ही मुश्किल रहा, लेकिन इस देश में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बनी हुई है. पिछले महीने नॉर्वे में बिकने वाली नई गाड़ियों में से करीब 94 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें थीं. डीजल गाड़ियों की सिर्फ 98 यूनिट्स बिकीं, जबकि पेट्रोल कारों का आंकड़ा केवल 7 पर सिमट गया. यह अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है. कुछ यूरोपीय देशों में टेस्ला की वापसी नॉर्वे में गिरावट के बावजूद टेस्ला को यूरोप के कुछ अन्य देशों में राहत मिली है. स्पेन में कंपनी की बिक्री 70 प्रतिशत बढ़कर 456 यूनिट्स तक पहुंच गई. इटली में 75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 713 कारें बिकीं. स्वीडन में बिक्री 26 प्रतिशत बढ़कर 512 यूनिट्स रही, जबकि डेनमार्क में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ आंकड़ा 458 यूनिट्स तक पहुंचा. इन देशों में आई तेजी का कारण टेस्ला की नई और किफायती स्टैंडर्ड मॉडल्स मानी जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में Model 3 और Model Y के किफायती वेरिएंट को लॉन्च किया है. जो काफी बजट फ्रेंडली है. जानकारों का मानना है कि, कम कीमत और बेहतर रेंज के चलते इन कारों को लोग प्राथमिकता दे रहे हैं. भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए खास ऑफर भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी टेस्ला की हालत खराब ही है. बीते साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े जोर-शोर के साथ इंडिया एंट्री का ऐलान किया था. कंपनी ने मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC) में अपना पहला शोरूम शुरू किया. जिसे बाद में दिल्ली और गुरुग्राम तक बढ़ा दिया गया है. टेस्ला ने भारत में अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 73.89 लाख रुपये तक जाती है. दरअसल, हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते टेस्ला की कार यहां काफी महंगी पड़ रही है. शुरुआत में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि, कुछ ग्राहकों ने टेस्ला मॉडल वाई की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कैंसिल करा दी. खैर, टेस्ला भारत में भी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी टेस्ला मॉडल Y पर खास स्कीम्स दे रही है. इसके तहत पेट्रोल या डीजल गाड़ी के बदले एक्सचेंज कराने पर ग्राहकों को 3 लाख रुपये तक का एक्सचेंज बोनस ऑफर किया जा रहा है.   

FASTag से आगे की तकनीक: बिना टोल प्लाजा के कटेगा अब टोल टैक्स

नई दिल्ली देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.  देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर. बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.  हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा? अगर आपकी गाड़ी में  फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.  जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा.