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सोने के आभूषण मिलने के बाद कर्नाटक में मंदिर परिसर से खजाना खोजने की तैयारी

बेंगलुरु कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने गडग जिले में खजाना के लिए एक अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक जिले के लक्कुंडी गांव में एक मकान के निर्माण के दौरान सोने के आभूषण मिलने के बाद राज्य सरकार ने ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के लिए प्रसिद्ध लक्कुंडी स्थित कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर परिसर में व्यापक स्तर पर खुदाई शुरू करने का निर्णय लिया है।   पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर में खजाने की तलाश में जुटे प्रशासन ने खुदाई के लिए जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर लगाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, 10 वर्ग मीटर क्षेत्र को खुदाई के लिए चिह्नित किया गया है और इसे आधिकारिक रूप से खुदाई क्षेत्र घोषित किया गया है। इस काम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “इस कार्य के लिए 15 महिलाओं और पांच पुरुषों को लगाया गया है।” आपको बता दें, यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब एक लड़के को मकान निर्माण के समय तांबे का एक बर्तन मिला। खोलने पर उसमें सोने के आभूषण मिले। बताया जाता है कि ये आभूषण 300 से 400 वर्ष पुराने हैं। लड़के ने यह आभूषण जिला प्रशासन को सौंप दिये, जिसके लिए उसे सम्मानित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र सोने, चांदी, हीरे, मोती, माणिक, मूंगे और लहसुनिया सहित दबे हुए बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध माना जाता है। खुदाई से जुड़े सूत्रों ने कहा, “लक्कुंडी ऐतिहासिक रूप से एक समृद्ध केंद्र रहा है और उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि यहां अब भी भूमिगत अपार भौतिक संपदा छिपी हो सकती है।” नवंबर 2024 में की गई एक खोज के दौरान लक्कुंडी में हजारों प्राचीन कलाकृतियां मिली थीं। हाल ही में आभूषणों की खोज से इस स्थल के प्रति रुचि और बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, अब भी इलाके के विभिन्न हिस्सों में नीलम, मोती, रत्न, हीरे और लहसुनिया जैसे कीमती पत्थर मिलने की सूचना है। गौरलतब है कि लक्कुंडी पर कभी चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल, कलचुरी और विजयनगर शासकों का शासन रहा है और इसका संबंध प्रसिद्ध दानवीर दानचिंतामणि अत्तिमब्बे से भी रहा है। पुरातत्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्राचीन काल में यह स्थान सोने के सिक्के ढालने का प्रमुख केंद्र भी था। पुरातत्वविदों ने कहा कि यह नई खुदाई ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे कर्नाटक के मध्यकालीन इतिहास से जुड़े अभिलेख, स्मारक, मूर्तियां और आभूषण मिलने की उम्मीद है, जिससे लक्कुंडी की समृद्ध विरासत को समझने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।  

सड़कों का विकास परिवहन, कृषि, उद्योग और देश के समग्र विकास की आधारशिला : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

ग्राम आक्या बीका में 9.38 करोड़ की 3 सड़कों का किया भूमि-पूजन टीबी मरीजों को फूड बॉस्केट किए प्रदान भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सड़कों का विकास परिवहन, कृषि, उद्योग और देश के समग्र विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय सड़कों के विकास का स्वर्णिम युग है। सड़कों का चहुंमुखी विकास हुआ है, जिससे गांव-गांव तक आवागमन सुगम हुआ है। मल्हारगढ़ क्षेत्र में ही लगभग 250 सड़कों का निर्माण किया गया है। यह सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है कि विकास कार्य लगातार गति से हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा मंदसौर जिले के ग्राम आक्या बीका गोशाला परिसर में कुल 9 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली तीन सड़कें, जिनमें 3 करोड़ 2 लाख रुपये की लागत से खेड़ा से टकरावद सड़क, 3 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से आक्या बीका से मगराना सड़क तथा 2 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से ढाणी से भेरूजी सड़क शामिल हैं, के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा कहा कि गांधी सागर का पानी खेतों तक पहुंचाने का कार्य सरकार द्वारा किया जा रहा है और आगामी एक वर्ष के भीतर किसानों के खेतों तक पानी पहुंच जाएगा। सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों, महिलाओं, गरीबों एवं सभी हितग्राहियों को सीधे मिल रहा है। सड़क परिवहन देश के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़कों के माध्यम से न केवल लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जोड़ने का कार्य होता है, बल्कि कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्रों को भी नई गति मिलती है। सशक्त सड़क नेटवर्क के बिना संतुलित विकास संभव नहीं है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि अच्छी सड़कों से किसान अपनी उपज समय पर मंडियों तक पहुंचा पाते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिलता है। वहीं उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद के परिवहन में सुविधा होती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और निवेश के नए अवसर सृजित होते हैं। सड़क परिवहन से रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क अवसंरचना शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाती है तथा आम नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने टीबी मरीजों को फूड बॉस्केट का वितरण भी किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, श्री मदनलाल राठौर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

शैक्षिक ओलम्पियाड स्पर्धा में उत्साहपूर्वक शामिल हुए विद्यार्थी

विकासखंड मुख्यालय स्तर पर आयोजित हो रही स्पर्धा भोपाल शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 2 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जा रही जिला स्‍तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड स्‍पर्धा में पहले दिन लाखों विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। दो दि‍वसीय स्‍पर्धा का आयोजन स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है। यह प्रदेश के समस्‍त विकासखंड मुख्‍यालयों पर आयोजित की जा रही। शैक्षिक ओलम्पियाड प्रतियोगिता में पहले दि‍न कक्षा 2 और 3 के विद्यार्थियों ने हिन्‍दी, अंग्रेजी और गणित विषयों के प्रश्‍नों के उत्‍तर ओएमआर शीट पर अंकित किए। दूसरी तरफ कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों ने पहले दिन हिन्‍दी, अंग्रेजी और संस्‍कृत विषयों के प्रश्‍नों को हल किया। 17 जनवरी 2026 को कक्षा 4 एवं 5 के विद्यार्थियों के लिए हिन्‍दी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण अध्‍ययन एवं कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थी विज्ञान, गणित और सामाजिक अध्‍ययन विषयों के प्रश्‍नों को ओएमआर शीट पर हल करेंगे। उल्‍लेखनीय है कि, इस जिला स्‍तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड प्रतियोगिता में सहभागिता कर रहे विद्यार्थी अपने-अपने जन शिक्षा केन्‍द्र के विजेता बन इस प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए हैं। प्रत्‍येक जनशिक्षा केन्द्र से कक्षा 2 एवं 3 के तीनों विषयों (अंग्रेजी, हिन्दी, गणित) के 04-04 टॉपर विद्यार्थी तथा कक्षा 4 एवं 5 से चारों विषयों (अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, पर्यावरण) के टॉपर 04-04 विद्यार्थी अर्थात् प्रत्येक जनशिक्षा केन्द्र से कक्षा 2-5 के कुल 28 विद्यार्थियों का चयन जिला स्‍तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया है। वहीं कक्षा 6 से 8 के तहत जनशिक्षा केन्द्र स्तर से सर्वाधिक अंको के आधार पर प्रत्येक विषय से 06-06 विद्यार्थियों के रुप में एक जनशिक्षा केन्द्र से कुल 36 विद्यार्थियों का चयन जिला स्तरीय ओलंपियाड़ के लिए किया गया है। जन शिक्षा केन्‍द्र मुख्‍यालयों से प्रभारी शिक्षक विद्यार्थियों को बसों और अन्‍य परिवहन सुविधाओं से विकासखंड मुख्‍यालय के परीक्षा केन्‍द्रों तक पहुंचे। विकासखंड मुख्‍यालयों पर आयोजित हो रही इस ओलम्पियाड परीक्षा के लिए चयनित बच्‍चों के परिवहन, स्‍वल्‍पाहार एवं भोजन आदि की सभी व्‍यवस्‍थाएं स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई हैं।  

विंध्य लंबी उड़ान भरने के लिए है तैयार: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

विंध्य गौरव अवार्ड कार्यक्रम में हुए शामिल, विंध्य क्षेत्र की विभूतियों को किया सम्मानित भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विंध्य के लोगों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। राष्ट्र सेवा, कला, अभिनय, साहित्य, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, खेल सभी क्षेत्रों में विंध्य की प्रतिभाओं ने नए मानक स्थापित किए हैं। आज थल सेना और नौ-सेना का प्रतिनिधित्व विंध्य के सपूत कर रहे हैं। विंध्य क्षेत्र में अधोसंरचना, सिंचाई, पर्यटन सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। विंध्य लंबी उड़ान भरने के लिए तैयार है। रीवा-सीधी टनल, सोलर पार्क, रीवा एयरपोर्ट, हाईवे, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने विंध्य क्षेत्र में संभावनाओं का विस्तार किया है। विंध्य का उज्जवल भविष्य है विंध्य लंबी उड़ान भरने के लिए तैयार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ की प्रतिभाएँ विंध्य क्षेत्र को अग्रणी क्षेत्र बनाने में कोई कोर कसर बाक़ी नहीं छोड़ेंगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल कार्यालय आयुक्त, दिव्यांगजन, मध्यप्रदेश स्टेट रिसोर्स सेंटर भवन, भोपाल में स्नेहा इवेंट्स एंड मैनेजमेंट, मुंबई द्वारा आयोजित आयोजित विंध्य गौरव अवार्ड कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विंध्य क्षेत्र की विभूतियों को सम्मानित किया। विंध्य के लोग रिश्ता निभाना जानते हैं उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि रीवा की बेटी स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा कपूर की स्मृति में कृष्णा-राजकपूर ऑडिटोरियम बनाया गया। जब उनके पुत्र रणधीर कपूर रीवा आए तो वे भावुक हो गए उन्होंने कहा जो काम बेटे नहीं कर पाए वो आपने कर दिया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि विंध्य के लोग रिश्ता निभाना जानते हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा विधायक श्री कुंवर सिंह टेकाम, श्री शारदेंदु तिवारी, श्री घनश्याम चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

खेलों के प्रोत्साहन पर सीएम योगी का जोर, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संवारने का संदेश

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का आह्वान किया है कि वे किसी एक खेल को गोद लेकर उससे जुड़ी प्रतिभाओं को तराशें। खेल के जरिये स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराकर अनुशासन और खेल भावना को मजबूत करने में योगदान दें। सीएम योगी शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) प्रतियोगिता के औपचारिक उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल गतिविधियों को बढ़ाने से युवा नशे से दूर रहेंगे और तमाम विकृतियों से बचे रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने खेलों के माध्यम से भी विकसित भारत बनाने के अभियान में भरपूर प्रयास किए हैं। प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेरठ में बन चुकी है। मेरठ में हर प्रकार के स्पोर्ट्स आइटम बन रहे हैं और इसे सरकार ने ओडीओपी में शामिल किया है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विगत 11 वर्षों में देश में एक नई खेल संस्कृति ने जन्म लिया है। 2014 के पहले खेल की गतिविधियां और प्रतियोगिताएं सरकार के एजेंडे का हिस्सा नहीं होती थीं। खेल और खिलाड़ियों की उपेक्षा होती थी। अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से खिलाड़ी खेल से पलायन करने को विवश होते थे। कुंठित, हताश और निराश रहते थे। जबकि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खेल और खिलाड़ियों का प्रोत्साहन देखते ही बनता है। पीएम मोदी ने खेलो इंडिया, फिट इंडिया और सांसद खेल प्रतियोगिता जैसे अभियानों से स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की प्रेरणा दी है। गांव-गांव तक खेल प्रतिभाओं को मंच दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा ने खेलकूद को सदैव महत्व दिया है। भारत की ऋषि परंपरा के उद्घोष ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ का उद्धरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा जीवन के जितने भी साधन हैं, उन्हें स्वस्थ शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। शरीर स्वस्थ रखने के लिए खेलकूद की गतिविधियों से जुड़ना होगा। नियम, संयम और अनुशासन से शरीर पर ध्यान देना होगा। स्वस्थ शरीर से ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि खेलकूद को तमाम परिवारों ने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बेटे-बेटी में भेदभाव नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाया गया है। प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान व ओपन जिम, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर स्टेडियम बनाने के कार्य युद्धस्तर पर आगे बढ़े हैं। खेल गतिविधियां अनौपचारिक न रहें, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बनें, इसके लिए सरकार ने 96000 से अधिक युवक मंगल दलों और महिला मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट वितरित की हैं। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की तत्परता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ओलंपिक में प्रदेश के प्रतिभागी खिलाड़ी को सरकार 10 लाख रुपये देती है। ओलंपिक एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ रुपये का पुरस्कार और क्लास वन जॉब देने की व्यवस्था बनाई गई है। ओलंपिक की टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले यूपी के खिलाड़ी को 3 करोड़ और एकल स्पर्धा में रजत पदक विजेता को भी 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में होंगे। हर राज्य और खिलाड़ियों को इसके अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। भारत 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भी आवेदन कर रहा है। उन्होंने गोरखपुर को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध धरा बताने के साथ आजादी के आंदोलन में चौरीचौरा की घटना, वैदिक साहित्य के विश्व में सबसे बड़े प्रकाशन केंद्र 'गीता प्रेस' की महत्ता बताई। साथ ही अमर सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल तथा बंधु सिंह से इस जिले के किसी न किसी रूप में जुड़ाव का उल्लेख करते हुए गोरखपुर को महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर अनेक विभूतियों की पावन धरा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद की खेल विवरणिका का विमोचन भी किया।

महाभियोग मामले में झटका: जस्टिस यशवंत वर्मा की संसदीय कमेटी के खिलाफ अर्जी खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने अधजली नकदी मामले में महाभियोग प्रस्ताव पर उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी।   जस्टिस वर्मा ने समिति के गठन पर यह कहते हुए सवाल उठाया था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति ने खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिससे संसदीय समिति को आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई है। जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच समिति 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की दायर याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया था। इस याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस कदम को चुनौती दी गई थी जिसमें उन्होंने जजों (जांच) एक्ट के तहत "एकतरफा" तरीके से उनके खिलाफ जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में जस्टिस वर्मा का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि 1968 के एक्ट की धारा 3(2) के तहत कमेटी का गठन कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किए जाने और सुरक्षा पाने के उनके अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि संसद के दोनों सदनों में उसी दिन हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दिए गए थे, लेकिन स्पीकर ने एकतरफा तरीके से कमेटी का गठन किया। पिछली सुनवाई पर यानी 8 जनवरी को अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बनाई थी कमेटी बता दें कि अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाले पैनल की घोषणा की थी। इस तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल हैं। मामला क्या? यह पैनल जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में अधजली नोटों के मिलने के बाद उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद गठित की गई थी।पिछले साल मार्च में, दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर लगी भीषण आग के बाद, कैश के बंडल मिले थे, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से भी ज़्यादा ऊंचे थे। तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस घटना का संज्ञान लिया था और जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।  

‘साहस अक्सर अकेला होता है’, रानी मुखर्जी ने ‘मर्दानी 3’ के जरिए पुलिसकर्मियों को सलाम किया

मुंबई  बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने तीन दशकों से ज्यादा के अपने फिल्मी करियर में एक खास मुकाम हासिल किया है। इन दिनों वह 'मर्दानी 3' को लेकर चर्चा में हैं। 'मर्दानी' फ्रेंचाइजी को दर्शक अभी तक काफी पसंद करते आए हैं। इसमें रानी का पुलिस इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार लोगों के दिलों में बसा हुआ है, ऐसे में वे उन्हें एक बार फिर उसी किरदार में देखने को काफी उत्सुक हैं। पुलिस प्रशासन की चुनौतियों और समर्पण के बारे में रानी मुखर्जी ने कहा, ''मैंने शिवानी के किरदार के जरिए पुलिस प्रशासन के असली साहस को महसूस किया। मैंने देखा है कि साहस अक्सर अकेला होता है और जो लोग कठिन परिस्थितियों में सही काम करते हैं, उन्हें बहुत बार अकेले ही उसका सामना करना पड़ता है। शिवानी मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म का किरदार नहीं है, बल्कि यह मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है, जो हमेशा मेरे साथ होता है। मैं इसकी सोच और व्यवहार को महसूस करती हूं।'' उन्होंने कहा, ''मर्दानी फ्रेंचाइजी मेरे लिए पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान और सलाम का जरिया है। मैं भारतीय पुलिस बल की सराहना करती हूं कि वे हर दिन कठिन परिस्थितियों में डटे रहते हैं। किसी शिकायत या पुरस्कार की उम्मीद के बिना देश की सेवा करते हैं।'' 'मर्दानी 3' के ट्रेलर पर सामने आ रही दर्शकों की प्रतिक्रिया पर रानी ने कहा, ''देश के लोग सामाजिक अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमेशा तैयार हैं। लोगों का उत्साह और प्यार यह दिखाता है कि हम गलत के खिलाफ गुस्सा और सही काम के लिए गर्व महसूस करते हैं। हमारी फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है।'''मर्दानी 3' में इस बार कहानी ज्यादा डरावनी और झकझोर देने वाली है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया। ट्रेलर की शुरुआत एक मासूम बच्ची के किडनैप वाले सीन से होती है, जिसके बाद खुलासा होता है कि शहर में लगातार बच्चियों के अपहरण हो रहे हैं। प्रशासन बेबस नजर आता है और हालात बेकाबू होते दिखते हैं। ऐसे में इस गंभीर केस को सुलझाने की जिम्मेदारी एक बार फिर साहसी पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय को सौंपी जाती है। रानी मुखर्जी अपने इसी दमदार किरदार में लौट रही हैं। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और इसे यश राज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

उत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे का कहर! IMD ने जारी किया राहत नहीं मिलने का अलर्ट

लखनऊ  राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों समेत उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. आज के मौसम की बात करें तो देश के उत्तरी और कुछ दक्षिणी हिस्सों में घना कोहरा (Dense Fog) और निचले इलाकों में बादल छाए हुए हैं. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में अगले 2 दिनों तक कोल्ड डे (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी.  दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इस समय उत्तर भारत के कई इलाको में घना कोहरा है. दिल्ली में भी विजिबिलिटी बेहद कम है. पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई ऐसे इलाके भी हैं जहां विजिबिलिटी जीरो है. IMD का पूर्वानुमान है कि उत्तर भारत में अभी ऐसी ही ठंड और कोहरे का प्रकोप बना रह सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में अभी 2 दिन तक कोल्ड डे (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी. 16 और 17 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और ओडिशा के अलग-अलग इलाकों में शीतलहर का दौर जारी रहेगा. वहीं, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 16 जनवरी को भी यह स्थिति देखी जा सकती है. ठंड के कारण नोएडा के स्कूलों की बढ़ीं छुट्टियां घने कोहरे और भीषण सर्दी के कारण नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में 8वीं तक के स्कलों की छुट्टी बढ़ा दी गई है. कक्षा 1 से लेकर 8वीं कक्षा तक सभी स्कूल अब  17 जनवरी तक बंद रहेगै. कश्मीर घाटी में कड़ाके की सर्दी, माइनस में पारा! कश्मीर घाटी में इन दिनों बहुत ठंड पड़ रही है. तापमान लगातार गिर रहा है और शीत लहर (कोल्ड वेव) का असर पूरी तरह दिख रहा है. आज (शुक्रवार) सुबह श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे दर्ज किया गया. कई इलाकों में तापमान माइनस में चला गया है. वहीं, सुबह के समय घना कोहरा छाया रहने से दृश्यता कम हो गई.

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा – तातापानी महोत्सव हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

रायपुर : तातापानी महोत्सव हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: मंत्री रामविचार नेताम स्थानीय कलाकारों ने वनांचल की समृद्ध संस्कृति की छटा बिखेरी पद्मअनुज शर्मा की सुरीली आवाज पर झूमे दर्शक स्कूली छात्र-छात्राओं ने लोक नृत्यों के माध्यम से प्रस्तुत की परम्परा की झलक रायपुर बलरामपुर-रामानुजगंज जिला अपनी अनूठी संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए अपनी विशेष पहचान रखता है। इसी गौरवशाली विरासत को संजोने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को उत्साह से भर दिया। इस मौके पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।  मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि तातापानी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। प्रशासन और स्थानीय जनभागीदारी से यह आयोजन प्रतिवर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार और पद्मसे सम्मानित अनुज शर्मा रहे। उन्होंने अपनी टीम के साथ छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की ऐसी जादुई प्रस्तुति दी कि पंडाल में मौजूद हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर वनांचल की समृद्ध संस्कृति की छटा बिखेरी। कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने न केवल पारंपरिक लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया, बल्कि जिले में हो रहे विकास कार्यों को भी रचनात्मक ढंग से मंच पर उतारा। अतिथियों ने बच्चों के इस हुनर की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर रमनलाल, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक मौजूद रहे। 

सेना दिवस परेड में दिखा राजस्थान का रंग, विशाल कठपुतली ने बिखेरी लोक कलाओं की छटा

जयपुर सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में महल रोड पर आयोजित सेना परेड में राजस्थान पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से प्रस्तुत कलात्मक एवं भव्य झांकी को देखकर वहां उपस्थित दर्शकगण मन्त्रमुग्ध हो गए। राजस्थान की इस भव्य झांकी में ने हमारी गौरवशाली परंपराओं एवं आधुनिक पर्यटन का प्रतिनिधित्व किया। जिसमें राज्य की सदियों पुरानी वास्तुकला, पारंपरिक हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध लोक कलाओं की अनूठी झलक दिखी। भारत माँ की जयकार तथा वहां उपस्थित प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रभक्ति की हिलोरों के बीच राजस्थान की लोक कलाओं का खूब जयगान एवं यशगान हुआ। ऐसी रही राजस्थान की झांकी झांकी के आगे की साइड में राजस्थान की सबसे लोकप्रिय लोक कलाओं में से एक, कठपुतली कला को उत्कृष्ट रूप में दर्शया गया। जिसमें एक विशाल कठपुतली (पपेट) राजस्थान की लोक कला एवं संस्कृति की अगुवाई करते नज़र आई। राजस्थान की झांकी में कठपुतली कलाकार राजू भाट की अंगुलियों पर नाचती हुई कठपुतलियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। आर्मी डे परेड में राजस्थान की समस्त लोक कलाओं का नेतृत्व कर रही यह विशाल कठपुतली जैसे आगंतुकों का स्वागत करने की राजस्थान की विशिष्ट परम्परा का निर्वहन कर रही हो। झांकी के वाहन के मध्य भाग पार्ट पर राजस्थान के क्राफ्ट & स्किल्स को दिखाया गया। जिसमें राजस्थान के प्रसिद्ध मोलेला की टेराकोटा में उकेरी गई मूर्तियों का धार्मिक व सांस्कृतिक आकृतियों का कलाकारों द्वारा प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी के बर्तनों का प्रमुखता से प्रदर्शन किया गया है। झांकी में फड़चित्रण दिखाया गया। राज्य के कुटीर उद्योगों की जीवटता को दिखाते हुए झांकी में हस्तशित्य कलाकारों को पारंपरिक पेशभूषा में कार्य करते हुए दिखाया गया है। झांकी के ऊपरी भाग पर राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध फूलों की होली नृत्य की लोक कलाकारों द्वारा मनुहारी प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही बम रसिया नृत्य प्रस्तुत किया गया।