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मान्यता रद्द होने से 50 स्टूडेंट्स होंगे ट्रांसफर, जम्मू में मेडिकल कॉलेज विवाद का नया मोड़

जम्मू  नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने के लिए दिया गया परमिशन लेटर वापस ले लिया है, क्योंकि उसने न्यूनतम मानकों के साथ का 'अवज्ञा' किया. यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेज के खिलाफ कई ग्रुप्स के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि इसके पहले बैच में ज्यादातर एमबीबीएस स्टूडेंट मुस्लिम क्यों थे. मंगलवार को एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) की एक टीम ने औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने मिनिमम एकेडमिक, टीचिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैंडर्ड के पालन में कमियां पायी. साथ ही एकेडमिक साल के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की परमिशन वापस लेने का फैसला किया. एनएमसी के अनुसार स्टूडेंट के हितों की रक्षा के लिए केंद्र शासित प्रशासन को एकेडमिक ईयर 2025-26 के दौरान एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को जम्मू-कश्मीर के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में सामान्य से अधिक सीटों पर ट्रांसफर करने का अधिकार दिया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई पर असर न पड़े और उनका भविष्य सुरक्षित रहे. बोर्ड ने कहा कि पहले से एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा के लिए, उन्हें जम्मू-कश्मीर के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने का फैसला किया गया है. दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रुप श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने नेशनल मेडिकल कमीशन के फैसले को अपने संघर्ष की जीत बताया है. ईटीवी भारत से बात करते हुए, संघर्ष समिति के प्रेसिडेंट कर्नल (रिटायर्ड) सुखबीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि वह इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनके मुताबिक जनता की मांगें पूरी की. राष्ट्रीय बजरंग दल के सदस्यों ने मंगलवार को जम्मू- कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की MBBS एडमिशन लिस्ट को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन (PTI) उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति ने शुरू से ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना, मैनेजमेंट और एडमिशन प्रोसेस पर सवाल उठाए थे और अब नेशनल मेडिकल कमीशन के फैसले ने उनकी चिंताओं को सही साबित कर दिया है. यहां यह बताना जरूरी है कि एसएमवीडी इंस्टीट्यूट में चल रहे विवाद की जड़ें एडमिशन प्रोसेस से जुड़ी हैं. इंस्टीट्यूशन को अपने एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए 50 एमबीबीएस सीटें दी गई थी, जिन पर नीट के जरिए एडमिशन दिए गए थे. हालांकि, पहले बैच में इन 50 स्टूडेंट्स में से 42 मुस्लिम थे. इस वजह से जम्मू में कई हिंदू संगठनों और राजनीतिक हलकों में तीखा विरोध हुआ, जिन्होंने सिलेक्शन पर सवाल उठाए और इसे 'सांप्रदायिक' कहा, जबकि सरकार और प्रशासन ने बार-बार कहा था कि एडमिशन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर होते हैं. जम्मू में करीब 60 संगठनों ने मिलकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति बनाई, जिसने मेडिकल कॉलेज के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया. संघर्ष समिति ने न सिर्फ एडमिशन प्रोसेस पर सवाल उठाए, बल्कि मेडिकल कॉलेज को बंद करने की भी मांग की. हाल ही में समिति ने जम्मू के सिविल सेक्रेटेरिएट के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला और बिगड़ गय. इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को साफ कहा था कि एडमिशन प्रोसेस पूरी तरह से मेरिट पर आधारित था और पूरे मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया. नेशनल मेडिकल कमीशन के ऐलान से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था, 'भारत सरकार को यह मेडिकल कॉलेज बंद कर देना चाहिए और इन स्टूडेंट को जम्मू-कश्मीर के किसी दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडजस्ट कर देना चाहिए, क्योंकि वे डर के माहौल में पढ़ाई नहीं कर सकते. जम्मू- कश्मीर के एलजी 27 दिसंबर 2025 को श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के 11वें कॉन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान एक स्टूडेंट को डिग्री देते हुए (PTI) अगर मैं पेरेंट होता तो मुझे अपने बच्चों को वहां पढ़ने भेजने की चिंता होती. इन स्टूडेंट्स ने मेरिट के आधार पर सीटें हासिल की थी लेकिन वहां जिस तरह की पॉलिटिक्स चल रही है, वह उनके पढ़ने के लिए अच्छी नहीं है. इस बयान के कुछ ही घंटों के अंदर, नेशनल मेडिकल कमीशन ने इस इंस्टीट्यूशन को बंद करने और मान्यता रद्द करने का फैसला किया. सभी स्टूडेंट को दूसरे इंस्टिट्यूट में शिफ्ट किया जाएगा चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड ने मंगलवार को एक ऑर्डर जारी किया जिसमें कहा गया है कि एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट्स को केंद्र शासित प्रदेश एडमिनिस्ट्रेशन की सक्षम अथॉरिटी द्वारा जम्मू- कश्मीर के दूसरे मेडिकल इंस्टिट्यूट में एडजस्ट किया जाएगा. इसका मतलब है कि एडमिशन लेने वाले किसी भी स्टूडेंट को एडमिशन वापस लेने के फैसले की वजह से एमबीबीएस सीट नहीं गंवानी पड़ेगी. इसके बजाय, उन्हें जम्मू- कश्मीर के दूसरे मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में उनके रेगुलर मंज़ूर सीटों के अलावा एडजस्ट किया जाएगा.

बिपाशा बसु की फिटनेस जर्नी: 47 साल की उम्र में भी अनुशासन और ताकत पर करती हैं फोकस

मुंबई  बिपाशा बसु 07 जनवरी को 47 साल की हो गई हैं और उनका फिटनेस को लेकर नजरिया आज भी उतना ही जरूरी है जितना पहले था. मॉडल से एक्टर बनीं बिपाशा हमेशा से ताकत, अनुशासन और फंक्शनल मूवमेंट के लिए जानी जाती रही हैं, वो भी तब जब इंडिया में जिम कल्चर इतना आम नहीं था. अपने मॉडलिंग के शुरुआती दिनों से ही बिपाशा अपनी एथलेटिक बॉडी के लिए अलग दिखती थीं और उन्होंने हमेशा ये बताया कि फिटनेस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि काबिलियत और हिम्मत के लिए है. 2018 के एक पुराने जिम सेशन में बिपाशा ने खासकर महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग को जरूरी बताया था. उनका मैसेज बहुत सीधा था: मजबूत होना ही असली खूबसूरती है. उन्होंने बताया कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बॉडी फैट कम होता है, मसल्स मजबूत होते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा घटता है और पीठ दर्द, आर्थराइटिस और चोटों से बचाव होता है. बिपाशा के लिए फिटनेस का मतलब पतला होना नहीं, बल्कि खुद को मजबूत बनाना था. उनका सलाह साफ थी: जितना जल्दी शुरू करोगे, उतना अच्छा है. इतने सालों की कोशिशों के बाद भी कई महिलाएं वेट उठाने से डरती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बॉडी भारी हो जाएगी. इस गलतफहमी को दूर करते हुए फिटनेस एक्सपर्ट मैत्री बोदा ने बताया कि महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन नाम का हार्मोन कम बनता है, जो मसल्स को बहुत बड़ा करने के लिए जरूरी होता है. इसलिए वेट ट्रेनिंग से महिलाएं भारी नहीं होतीं, बल्कि उनकी बॉडी स्लिम और टोन हो जाती है. फिटनेस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक हेल्दी रहने के लिए भी जरूरी है. मॉडलिंग से एक्टिंग में आई थी बिपाशा बसु बिपाशा बसु ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। उन्होंने 2001 में आई फिल्म अजनबी से एक्टिंग करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने राज, जिस्म, नो एंट्री, फिर हेरा फेरी, ओमकारा, प्लेयर्स, अपहरण, मदहोशी, जमीन सहित कई फिल्मों में काम किया। वे आखिरी बार 2015 में आई फिल्म अलोन में नजर आईं थी। मसल्स बढ़ने से बॉडी का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और उम्र के साथ मसल्स कम होने की दिक्कत भी कम होती है. महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन वेट ट्रेनिंग से हड्डियां मजबूत होती हैं और फ्रैक्चर का रिस्क कम होता है. एक और गलतफहमी है कि वेट उठाना खतरनाक है, जबकि सही तरीके से और गाइडेंस में करने पर ये जोड़ों को मजबूत करता है, बैलेंस बेहतर करता है और रोजमर्रा के काम आसान बनाता है. बिपाशा बसु ने अपने उदाहरण और लगातार मैसेज से इंडिया में महिलाओं की फिटनेस को लेकर सोच बदलने में मदद की है. मैत्री बोदा जैसी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर वो ये बात बार-बार दोहराती हैं कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कोई ऑप्शन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सेहत और लंबी उम्र के लिए जरूरी है.

कवर्धा की बेटी रिया तिवारी को स्वर्ण पदक जीतने पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया सम्मानित

रायपुर : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने साउथ एशियन बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली कवर्धा की बेटी रिया तिवारी का किया सम्मान रिया की उपलब्धि प्रदेश की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए बनेंगी प्रेरणा- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा रायपुर बिहार की राजधानी पटना में 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित साउथ एशियन बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हाँसिल किया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत, नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित चार देशों की टीमों ने भाग लिया था।        इस चैंपियनशिप में भारत की विजेता टीम का हिस्सा बनकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली कवर्धा की होनहार खिलाड़ी सुरिया तिवारी का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सम्मान किया। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने रिया को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उपलब्धि की सराहना की तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि रिया तिवारी की यह उपलब्धि न केवल कवर्धा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा, अनुशासन और कठिन परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिया भविष्य में भी देश के लिए अनेक पदक जीतेंगी और प्रदेश की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।         उपमुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकें।         रिया ने कहा कि इस सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और मेरे कोच अविनाश चौहान एवं जय किशन को जाता है। उनके निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। हर कठिन समय में उन्होंने मेरा आत्मविश्वास बनाए रखा और मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी। यह जीत मेरे लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि मेरे खेल जीवन की एक नई शुरुआत है। मैं आगे भी पूरे समर्पण और मेहनत के साथ देश और प्रदेश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का प्रयास करूंगी

बांग्लादेश की मांग खारिज, ICC ने कहा– भारत की गैरमौजूदगी पर होगी अंक कटौती

 नई दिल्ली      टी20 वर्ल्ड कप में वेन्यू बदलने की बांग्लादेश की मांग को आईसीसी ने ठुकरा दिया है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने साफतौर पर कहा कि बांग्लादेश को वर्ल्ड कप खेलने के लिए भारत आना ही होगा. अगर उसने ऐसा नहीं किया तो फिर उसके अंक कटेंगे. सूत्रों के अनुसार, आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) को एक वर्चुअल बैठक के दौरान बताया कि सुरक्षा कारणों से भारत से बाहर मैच खेलने का अनुरोध अस्वीकार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि आईसीसी ने बीसीबी को कहा है कि बांग्लादेश को टी20 विश्व कप खेलने के लिए भारत आना होगा, अन्यथा उसे अंक गंवाने पड़ सकते हैं. दूसरी ओर, बीसीबी के सूत्रों का कहना है कि आईसीसी द्वारा अनुरोध अस्वीकार किए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है. 8 अंक का झटका और वर्ल्ड कप का खेल खत्म अगर बांग्लादेश ने भारत का दौरा नहीं किया तो बांग्लादेश को अंक गंवाने पड़ सकते हैं और भारत में होने वाले अपने सभी मैचों में उन्हें वॉकओवर देना पड़ सकता है, जिसके चलते बाकी टीमों को पूरे दो अंक मिल जाएंगे. ग्रुप स्टेज में बांग्लादेश के 4 मैच निर्धारित हैं. हालांकि श्रीलंका टूर्नामेंट का सह-मेज़बान है, लेकिन बांग्लादेश को अपने सभी ग्रुप स्टेज मुकाबले भारत में खेलने हैं. उनके चार में से तीन मैच कोलकाता में खेले जाएंगे, जबकि एक मुकाबला मुंबई में निर्धारित है. यानी उसे 8 अंक का नुकसान झेलना पड़ेगा. पहले भी हो चुका है ऐसा ऐसा पहले भी हो चुका है, जब 1996 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ ने मेज़बान श्रीलंका के खिलाफ खेलने के लिए वहां यात्रा नहीं की थी. इसी तरह 2003 वर्ल्ड कप में न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड ने क्रमशः केन्या और ज़िम्बाब्वे का दौरा नहीं किया था, जिसके चलते दोनों टीमों को वॉकओवर देना पड़ा था. अब ऐसी ही संभावना टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भी बनती दिख रही है. वहीं, अगर बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करती है तो उसकी जगह किसी अन्य टीम को शामिल किया जा सकता है. ऐसा पहले भी हो चुका है, जब 2016 अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश जाने से इनकार कर दिया था और उनकी जगह आयरलैंड को शामिल किया गया था. हालांकि, अगर इस तरह की स्थिति बनती है तो बांग्लादेश की जगह कौन सी टीम खेलेगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है. बांग्लादेश के ग्रुप स्टेज मुकाबले (ग्रुप C) 7 फरवरी 2026: वेस्टइंडीज़ के खिलाफ, ईडन गार्डन्स, कोलकाता (3:00 बजे IST) 9 फरवरी 2026: इटली के खिलाफ, ईडन गार्डन्स, कोलकाता (11:00 बजे IST) 14 फरवरी 2026: इंग्लैंड के खिलाफ, ईडन गार्डन्स, कोलकाता (3:00 बजे IST) 17 फरवरी 2026: नेपाल के खिलाफ, वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई (7:00 बजे IST) अब जानिए विवाद की पूरी कहानी दरअसल, आईपीएल की टीम केकेआर ने हाल ही में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को बीसीसीआई के कहने पर रिलीज कर दिया था. जब बीसीसीआई ने रहमान को रिलीज किया तो इस विवाद में बांग्लादेशी सरकार भी कूद पड़ी. उसने भारत में 7 फरवरी से शुरू हो रहे टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार की ही धमकी दे डाली. आईसीसी को लिखे अपने पत्र में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि वह भारत में अपने मैच नहीं खेलेगा और उन मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट कराने की मांग की. बांग्लादेश की ओर से तर्क दिया गया कि उनके खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. वहीं, बांग्लादेश ने खुन्नस में आकर आईपीएल के बांग्लादेश में प्रसारण पर भी रोक लगा दी थी. लेकिन अब आईसीसी ने साफ कह दिया है कि बांग्लादेश को वर्ल्ड कप मैच खेलने के लिए भारत आना ही होगा. जानिए क्या है पूरा मामला दरअसल, आईपीएल की टीम केकेआर ने हाल ही में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को बीसीसीआई के कहने पर रिलीज कर दिया था. बीसीसीआई ने ये फैसला घरेलू विरोध के चलते लिया. क्योंकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत के लोगों में गुस्सा है. ऐसे में कई लोगों ने रहमान को आईपीएल में 9 करोड़ से ज्यादा की रकम में खरीदने का विरोध किया था.  जब बीसीसीआई ने रहमान को रिलीज किया तो इस विवाद में बांग्लादेशी सरकार भी कूद पड़ी. उसने भारत में 7 फरवरी से शुरू हो रहे टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार की ही धमकी दे डाली. आईसीसी को लिखे अपने पत्र में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि वह भारत में अपने मैच नहीं खेलेगा और उन मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट कराने की मांग की. बांग्लादेश की ओर से तर्क दिया गया कि उनके खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. वहीं, बांग्लादेश ने खुन्नस में आकर आईपीएल के बांग्लादेश में प्रसारण पर भी रोक लगा दी थी. लेकिन अब आईसीसी ने साफ कह दिया है कि बांग्लादेश को वर्ल्ड कप मैच खेलने के लिए भारत आना ही होगा.  

DRDO को शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल BM-04 के लिए मंजूरी, 1500 KM रेंज से बढ़ेगी सुरक्षा

 नई दिल्ली रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन- DRDO को एक नई मिसाइल विकसित करने की मंजूरी मिल गई है. इस मिसाइल का नाम है BM-04. यह एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है. इसे बनाने के लिए Acceptance of Necessity (AoN) मिल चुका है. इसका मतलब है कि अब इस मिसाइल का विकास तेजी से शुरू होगा. जल्द ही इसके परीक्षण भी हो सकते हैं.  BM-04 मिसाइल क्यों खास है? यह मिसाइल भारत की मौजूदा रक्षा व्यवस्था में एक बड़ा गैप भरने वाली है. पिनाका रॉकेट की रेंज छोटी होती है (करीब 40-90 किमी). अग्नि मिसाइलें बहुत लंबी दूरी की हैं (2000 किमी से ज्यादा). BM-04 इन दोनों के बीच की दूरी कवर करेगी. इसकी रेंज 400 से 1500 km तक होगी. यह मिसाइल दुश्मन के इलाके में गहरे तक महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमला कर सकेगी. जैसे कमांड सेंटर, हवाई अड्डे या लॉजिस्टिक्स हब. यह न्यूक्लियर हमले की जरूरत के बिना मजबूत जवाब देगी. मिसाइल की मुख्य विशेषताएं     वजन: करीब 11,500 किलोग्राम.     लंबाई: लगभग 10.2 मीटर.     चौड़ाई (डायमीटर): 1.2 मीटर.     वारहेड: 500 किलोग्राम का कन्वेंशनल (साधारण) विस्फोटक.     प्रोपल्शन: दो स्टेज का सॉलिड फ्यूल. इससे लॉन्च जल्दी और आसान होता है.     गाइडेंस: इनर्शियल नेविगेशन + जीपीएस + भारत का अपना IRNSS (नाविक).     सटीकता: 30 मीटर से कम (CEP).     डिजाइन: फिक्स्ड विंग्स और कंट्रोल फिन्स. इससे उड़ान में मन्यूवर करने की क्षमता मिलती है. दुश्मन की डिफेंस से बचना आसान.     लॉन्चर: कनिस्टर में बंद, रोड-मोबाइल ट्रक से. इससे जल्दी जगह बदल सकते हैं. सुरक्षित रहते हैं. भारत की रक्षा के लिए क्यों जरूरी? यह मिसाइल कन्वेंशनल डिटरेंस (साधारण हथियारों से रोक) को मजबूत करेगी. भारत की नई इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स को सपोर्ट करेगी. दुश्मन को पता चलेगा कि भारत बिना न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल किए भी मजबूत जवाब दे सकता है. डीआरडीओ ने पहले इस मिसाइल का मॉडल दिखाया था. अब AoN मिलने से असली विकास और टेस्टिंग शुरू हो गई है. यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा की दिशा में एक और बड़ा कदम है. भविष्य में यह मिसाइल भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगी.

बांग्लादेश ने T20 वर्ल्ड कप से नाम वापस लिया, ICC के पास हैं ये संभावित कदम

ढाका  टी20 वर्ल्ड कप से पहले भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट के रिश्तों में तनाव साफ नजर आने लगा है. हालिया घटनाओं ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है, जिसका असर अब सीधे आईसीसी टूर्नामेंट पर देखने को मिल रहा है. बांग्लादेश ने संकेत दिए हैं कि वह भारत में अपने मैच खेलने को लेकर असहज है और उसने अपने मुकाबले श्रीलंका में शिफ्ट कराने की मांग आईसीसी के सामने रखी है. इस पूरे घटनाक्रम ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को एक बार फिर कड़े फैसलों की दहलीज पर ला खड़ा किया है. कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को लेकर भारत में काफी नाराजगी देखी जा रही है. इसी माहौल के बीच आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदे जाने पर भी भारी विरोध हुआ. सोशल मीडिया पर दबाव बढ़ने के बाद बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी को सख्त निर्देश दिए और केकेआर को आखिरकार मुस्तफिजुर को रिलीज करना पड़ा. इस फैसले के बाद हालात और बिगड़ गए. ICC के पास क्या विकल्प हैं? आईसीसी के पास इस स्थिति से निपटने के लिए कई रास्ते हैं. पहला विकल्प यह है कि वह बांग्लादेश की मांग स्वीकार कर ले और उसके सभी मुकाबले श्रीलंका में आयोजित कराए. इससे टूर्नामेंट का शेड्यूल बदलेगा और लॉजिस्टिक चुनौतियां भी बढ़ेंगी. दूसरा विकल्प यह है कि आईसीसी शेड्यूल में कोई बदलाव न करे. ऐसे में अगर बांग्लादेश भारत आने से इनकार करता है, तो उसके मुकाबले रद्द माने जा सकते हैं और विरोधी टीमों को वॉकओवर के जरिए अंक मिल सकते हैं. क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है. 1996 वर्ल्ड कप में सुरक्षा कारणों से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में खेलने से मना किया था, जिसके बाद श्रीलंका को सीधे अंक दिए गए थे. 2003 वर्ल्ड कप में भी इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने कुछ मैच नहीं खेले थे और विरोधी टीमों को फायदा मिला था. अगर बांग्लादेश टूर्नामेंट से हटता है तो? सबसे सख्त स्थिति तब बनेगी जब बांग्लादेश पूरे टी20 वर्ल्ड कप से हटने का फैसला करे. ऐसी हालत में आईसीसी किसी दूसरी क्वालिफाइड टीम को उसकी जगह शामिल कर सकता है. इससे पहले 2016 अंडर-19 वर्ल्ड कप में ऐसा देखने को मिला था, जब ऑस्ट्रेलिया के हटने पर आयरलैंड को मौका दिया गया था. फिलहाल बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप से हटने का आधिकारिक फैसला नहीं किया है, लेकिन उनके रुख ने टूर्नामेंट से पहले माहौल जरूर गर्म कर दिया है. अब सबकी नजरें आईसीसी पर हैं कि वह इस संवेदनशील और जटिल मुद्दे पर क्या फैसला लेता है.   

योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला— ‘वीबी-जी राम जी’ का विरोध करेंगे तो पोल खुलेगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025 को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस ऐतिहासिक सुधार का स्वागत होना चाहिए था, उसी का विरोध कर विपक्ष अपने पुराने भ्रष्टाचार मॉडल का खुला समर्थन कर रहा है। यह विरोध विकास का नहीं, बल्कि पोल खुलने के डर का परिणाम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस प्रेस वार्ता की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि जिन लोगों ने वर्षों तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूखा रहने और नौजवानों को पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज सुधारों और विकसित भारत की संकल्पना पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ऐसे लोग कानून का समर्थन करेंगे तो उनकी असलियत सामने आ जाएगी, इसलिए वे विरोध कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन इस अधिनियम पर लगातार प्रश्न खड़े कर रहे हैं, जबकि यह ग्रामीण भारत, किसानों और श्रमिकों के हित में उठाया गया बड़ा कदम है। एनडीए सरकार का आभार जताने के बजाय विपक्ष भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने वाली अपनी पुरानी परंपराओं का ही समर्थन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे, जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देना इस अधिनियम का मूल उद्देश्य है। इसी लक्ष्य के साथ यह कानून लाया गया है और वह इसका पूर्ण समर्थन करते हैं। योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की विफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में अधूरी और अस्थायी परिसंपत्तियां, फर्जी हाजिरी, भुगतान में कटौती जैसी भ्रष्टाचार की शिकायतें हर जनपद और हर ग्राम पंचायत से सामने आती थीं। शिकायत निवारण की कमजोर व्यवस्था, कमजोर सोशल ऑडिट, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में लगातार देरी आम बात थी। उन्होंने कहा कि खोदने और भरने वाली योजनाओं पर विराम लगने से स्वाभाविक है कि जिनके हित प्रभावित हुए हैं, वे चिल्ला रहे हैं। यही वे लोग हैं जो गड्ढा खोदते थे और फिर उसे पाटते थे। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सपा शासनकाल में सोनभद्र में मनरेगा का बड़ा घोटाला हुआ, जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत हर छह महीने में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली तथा कैग मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि विकसित भारत–जी राम जी कानून ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलेगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रमिक-किसान के अधिकार सुनिश्चित होंगे। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे विकास के नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के पक्षधर हैं।

मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

पारदर्शिता और समय की बचत के लिए सभी मंत्री नई व्यवस्था का लें लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में हुआ महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन ई-प्रशासन में नवाचार से प्रसन्न हुए मंत्रि-परिषद सदस्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।  

खनन क्षेत्र में मध्यप्रदेश बना अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं, गत पखवाड़े की प्रमुख उपलब्धियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही सरकार के आने वाले तीन वर्ष के प्रमुख लक्ष्यों से भी अवगत करवाया। वर्ष-2026 की मंत्रिपरिषद की प्रथम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कैलेंडर वर्ष 2026 की बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों को कैलेंडर वर्ष 2026 प्रारंभ होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन अनुसार जनकल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनेगा और नागरिकों के हित में योजनाओं और परियोजनाओं के व्यवस्थित क्रियान्वयन में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार के 2 वर्ष के सफल कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। खनन क्षेत्र में अग्रणी बना मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। खनिज नीलामी वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मली है। चूना, पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने गत 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट का शुभारंभ किया।इसमें 2 लाख करोड़ रूपए से अधिक लागत से विभिन्न औद्योगिक और निर्माण इकाइयों के भूमि-पूजन हुआ है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने 5,810 करोड़ रूपए की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यही नहीं, 860 वृहद औद्योगिक इकाईयों के लिए 725 करोड़ की निवेश प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। इसी अवसर पर विशेष प्रदर्शनी में 'निवेश से रोजगार-अटल संकल्प' विषय पर चित्रों का संयोजन किया गया। मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास की झलक प्रदर्शनी में देखने को मिली। पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि को भी प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के संबोधनों और उनकी जीवन यात्रा और विचारधारा को भी प्रदर्शित किया गया। वर्ष-2026 कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष-2026 – कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। प्रदेश में किसान कल्याण, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, नवकरणीय ऊर्जा से जुड़े आयामों पर विशेष कैलेंडर आगामी 11 जनवरी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जारी किया जाएगा। इसी दिन 1100 ट्रैक्टरों की रैली भी निकलेगी। जनवरी से दिसम्ब्र तक सभी विभागों की गतिविधियों का निर्धारण कर जिला एवं संभाग स्तर पर कार्यक्रम होंगे। आगामी तीन वर्ष का लक्ष्य निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाएंगी। जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन रहा ऐतिहासिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में गत 2 जनवरी को जहां गीता भवन का लोकार्पण हुआ, वहीं अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में देश-दुनिया से आए करीब 125 विद्वानों के व्याख्यान भी हुए। पद्मभूषण स्वामी रामभद्राचार्य सहित अनेक संत और विद्वतजन सम्मेलन में शामिल हुए। सुंदरकांड से सम्मानित पाठ में व्यापक भागीदारी रही। प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गत 23 दिसम्बर को पीपीपी मॉडल पर प्रदेश के धार और बैतूल में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया। देश में ये मेडिकल कॉलेज इस मॉडल पर निर्मित होने वाले प्रथम मेडिकल कॉलेज होंगे। नवाचार का सिलसिला निरंतर चलेगा। आगामी 23 जनवरी को कटनी और पन्ना में मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में चिकित्सा जगत में यह नई उपलब्धि है। गत 2 वर्ष में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुए। इसके पहले वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में इनकी संख्या 33 हो गई है। राष्ट्रीय पेसा सम्मेलन और मध्यप्रदेश के व्यंजनों का प्रचार-प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विशाखापटनम में हाल ही में राष्ट्रीय पेसा दिवस पर पेसा सम्मेलन का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश के चयनित 9 जिलों की 20 महिला सरपंच प्रतिनिधियों ने पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया। प्रदेश के 20 जनजातीय बहुल क्षेत्रों से चयनित 9 जिलों अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी से कुल 152 सदस्य पेसा महोत्सव में शामिल हुए। इस सम्मेलन में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में उपयोग में लिए जाने वाले पारम्परिक व्यंजनों का प्रचार-प्रसार भी हुआ। खासतौर पर मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी के ताजा शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान सम्मेलन में पसंद किए गए। विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने मध्यप्रदेश के तिल, गुड और महुए के लड्डू भी प्रसंद किए।  

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी का हमला, BJP IT सेल ऐप का लगाया आरोप

गंगासागर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (06 जनवरी) को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य में चल रहे गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के IT सेल द्वारा विकसित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले में सागर द्वीप की अपनी दो दिवसीय यात्रा समाप्त करने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जी ने EC पर चुनावी सूची संशोधन करते समय "सभी तरह की गलत चालें चलने" का आरोप लगाया। ममता वहां आगामी गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने गई थीं।   मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया, "EC, SIR कराने के लिए सभी तरह की गलत चालें चल रहा है। यह योग्य मतदाताओं को 'मृतक' के रूप में चिह्नित कर रहा है और बुजुर्गों, बीमारों और अस्वस्थ लोगों को सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है। आयोग SIR प्रक्रिया में BJP के IT सेल द्वारा विकसित मोबाइल ऐप्स का उपयोग कर रहा है। यह अवैध, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। यह जारी नहीं रह सकता।" चुनाव आयोग के खिलाफ TMC सुप्रीमो के आरोपों की यह नई खेप ऐसे दिन आई है, जब उनकी पार्टी के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने EC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR को करने के लिए चुनाव आयोग ने मनमानी की है और प्रक्रियात्मक रूप से गलत कदम उठाए हैं। TMC ने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास ने राज्य में "योग्य और वास्तविक मतदाताओं द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों को काफी बढ़ा दिया है"। बनर्जी ने कहा, "मैं लोगों से आग्रह करती हूं कि वे SIR में भाग लेते समय सावधान रहें। उन्हें उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जिन्हें मदद की ज़रूरत है। उन्हें मेरा समर्थन करने की ज़रूरत नहीं है; केवल उन लोगों का समर्थन करें जो इस अभ्यास के कारण परेशानी में हैं।" विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग के साथ अपने टकराव को तेज करते हुए, मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा था कि वह राज्य में चुनावी सूचियों के EC के SIR के खिलाफ अदालत जाएंगी, जिसमें उन्होंने डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी का आरोप लगाया था, जिसके कारण उनकी दावा है कि मौतें और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं हुई हैं।