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राज्य सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 64 अधिकारियों को किया पोस्टिंग

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। भोपाल नगर निगम (बीएमसी) में 5 दर्जन से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों के कार्यभार में बड़ा बदलाव किया गया है। निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने एक ही आदेश में 64 असिस्टेंट और सब इंजीनियरों को हटाकर नई जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। इसे नगर निगम के इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। यह फैसला नगर परिषद की बैठक में पार्षदों की लिखित शिकायतों के बाद लिया गया है। पार्षदों का आरोप था कि पिछले चार महीनों से इंजीनियर न तो वार्ड में काम कर रहे थे और न ही जनसमस्याओं पर ध्यान दे रहे थे। अतिक्रमण हटाने पर फोकस, विशेष टीमों का गठन नए सेटअप में कार्यपालन यंत्रियों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में तैनात किया गया है। उन्हें सिविल कार्यों के साथ-साथ अतिक्रमण हटाने की सीधी जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो तेजी से कार्रवाई करेंगी। जोनल अधिकारियों के भी तबादले फेरबदल के तहत कई जोनल अधिकारियों को भी इधर-उधर किया गया है। विजय शाक्य को जोन-14 का सहायक स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया अंकित गौतम, संदीप मंडलेकर और भावना पटेरिया को अलग-अलग जोन में एसएचओ की जिम्मेदारी सौंपी गई मेट्रोपॉलिटन रीजन से पहले निगम का नया सेटअप भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के ड्राफ्ट से पहले नगर निगम का यह नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए— बृजेश कौशल – गोविंदपुरा अनिल टटवाड़े – मध्य एवं उत्तर विधानसभा एसके राजेश – दक्षिण-पश्चिम एवं हुजूर अनिल कुमार साहनी – नरेला विधानसभा को सिविल शाखा और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। झील संरक्षण और उद्यान विभाग को भी नई कमान कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय को नरेला से हटाकर झील संरक्षण प्रकोष्ठ, उद्यान विभाग और प्रवेश द्वार प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चार महीने से चल रहा था विवाद गौरतलब है कि पूर्व नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण द्वारा इंजीनियरों के विभाग बदले जाने के बाद से लगातार विवाद बना हुआ था। पार्षदों का कहना था कि इंजीनियर न तो उनके वार्ड में पहुंच रहे थे और न ही विकास कार्यों में रुचि ले रहे थे।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप जलाकर दी अटल जी को श्रद्धांजलि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अर्पित किए श्रद्धासुमन   लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति के समक्ष दीप जलाकर पुण्य स्मृतियों को किया नमन  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी की पूर्व संध्या पर बुधवार को लोकभवन में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने लोकभवन परिसर में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के माध्यम से न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और सार्वजनिक जीवन में उनकी मर्यादित राजनीतिक शैली को स्मरण किया जा रहा है। लोकभवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भी अटल जी के जीवन और कृतित्व को केंद्र में रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पूरा देश करेगा अटल जी की स्मृतियों को याद गुरुवार को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में विभिन्न स्मरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से अटल जी के विचारों, नीतियों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। संगोष्ठियों, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उनकी विरासत को सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में संवाद, सहमति और राष्ट्रहित के संतुलन का प्रतीक माना जाता रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान देश ने राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए। उनकी कवि संवेदना और राजनेता के रूप में दूरदर्शिता आज भी सार्वजनिक जीवन में आदर्श के रूप में देखी जाती है।

2029 तक सोने की कीमतों में विस्फोट? 10 ग्राम ₹3 लाख पहुंचने की भविष्यवाणी, अमेरिकी एक्सपर्ट का दावा

नई दिल्ली  सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और अब इस तेजी के संभावित भविष्य का अनुमान सुनकर निवेशक हैरान हैं। जहां आज सोना लगभग ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, वहीं एक प्रतिष्ठित अमेरिकी अर्थशास्त्री का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में यह रेट दोगुना से भी ऊपर बढ़ सकता है। अगर यह अनुमान हकीकत बनता है तो 2029 तक सोने का भाव भारत में लगभग ₹3,08,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है—जो माता-पिता के लिए बेटी की शादी जैसे खास खर्चों को और चुनौतीपूर्ण बना देगा। क्या है 2029 लक्ष्य? अमेरिका के रणनीतिक वित्तीय विशेषज्ञ एड यार्डेनी ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत 2029 तक $10,000 प्रति औंस के करीब पहुंच सकती है। अगर आज की कीमत (लगभग $4,410 प्रति औंस) से तुलना करें, तो यह लगभग 127% से भी ज्यादा उछाल को दर्शाता है—एक बेहद तेज वृद्धि जो निवेशकों के लिए आकर्षक भी है और चुनौतीपूर्ण भी।   ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को कम किए जाने की अटकलों ने निवेशकों को सोने की ओर खींचा है। जैसे ही बैंक ब्याज दरें घटती हैं, शेयर और मुद्रा बाजार का आकर्षण कम हो सकता है, जिससे पैसा सुरक्षित परिसंपत्तियों- जैसे कि सोना- की ओर बढ़ता है। वैश्विक अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल विश्वभर में अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने को ‘सुरक्षित आश्रय’ यानी सेफ हेवन एसेट के रूप में और मजबूत बनाया है। क्या परंपरागत धारणा बदल रही है? आम धारणा यह रही है कि जब शेयर बाजार मजबूत होता है, सोने की कीमतें गिरती हैं। लेकिन एड यार्डेनी ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि मौजूदा समय में सोने की मांग सिर्फ संकट में ही नहीं बल्कि सामान्य निवेश पोर्टफोलियो में भी बढ़ रही है। इसका मतलब यह हुआ कि सोना अब केवल “बुरे वक्त का आश्रय” नहीं रह गया, बल्कि लंबी अवधि में एक मुनाफे वाला निवेश भी बन चुका है।  

फास्ट फूड से स्वास्थ्य का खतरा, 16 साल की लड़की की मौत ने उठाए गंभीर सवाल, AIIMS पूर्व डायरेक्टर ने आगाह किया

नई दिल्ली हाल के दिनों में फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से एक छात्रा की मौत की खबर ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में फास्ट फूड बच्चों और युवाओं की डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा बनता जा रहा है, लेकिन इसके गंभीर स्वास्थ्य नतीजों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. AIIMS के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एम मिश्रा ने सेहत को लेकर बड़ा और गंभीर बयान दिया है. फास्ट फूड खाने से 12 साल तक उम्र कम हो सकती है उन्होंने कहा कि फास्ट फूड सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसका असर एकदम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है. लंबे समय तक फास्ट फूड खाने से इंसान की उम्र करीब 12 साल तक कम हो सकती है. अगर इसे ज्यादा मात्रा में और लगातार खाया जाए, तो यह धीरे-धीरे मौत की वजह भी बन सकता है. डॉ. मिश्रा ने साफ कहा कि फास्ट फूड का नुकसान समय के साथ सामने आता है, लेकिन प्रदूषित खाना या गंदा पानी शरीर पर तुरंत असर डालता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. अमरोहा के मामले अमरोहा के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस केस में आशंका है कि बच्ची ने प्रदूषित खाना या पानी लिया था, जिससे उसे टायफायड हो गया. शुरुआत में इलाज सही तरीके से नहीं हो पाया. बाद में पेट में अल्सर बना, तेज दर्द हुआ और हालात इतने बिगड़े कि आंत फट गई. इसके बाद शरीर में ज़हर फैल गया, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई. डॉ. मिश्रा ने बताया कि AIIMS में बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि जब बच्ची को AIIMS लाया गया, तब उसकी हालत पहले से ही बहुत खराब थी. शुरुआती स्तर पर टायफायड का सही इलाज न हो पाने की वजह से बीमारी जानलेवा बन गई. लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज कराएं फिलहाल डॉक्टरों का अनुमान यही है कि प्रदूषित खाना खाने से बच्ची को टायफायड हुआ, जिसने आगे चलकर गंभीर रूप ले लिया. डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि साफ-सफाई का ध्यान रखें, बाहर का गंदा खाना-पानी न लें और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत सही इलाज कराएं.

हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय बांग्लादेश में हिंसा का शिकार, दुनिया ने जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि ईसाई और सिख समुदाय भी हिंसा और अमानवीय व्यवहार का शिकार बन रहे हैं. हाल ही में एक हिंदू युवक को भीड़ द्वारा बेरहमी से मार डाले जाने और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर जला दिए जाने की घटना ने पूरी दुनिया को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हिंदुओं के लिए आखिर सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश कौन सा है? क्या सबसे अत्याचारी देश की कोई आधिकारिक रैंकिंग है? सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी मान्य अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा हिंदुओं के लिए सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश की आधिकारिक रैंकिंग जारी नहीं की जाती है. धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्थाएं- जैसे USCIRF, Amnesty International और Pew Research देशों की स्थिति को घटनाओं, कानूनों और सामाजिक माहौल के आधार पर आकलित करती हैं, न कि किसी एक समुदाय के लिए सीधी रैंकिंग बनाती हैं.  धार्मिक उत्पीड़न को कैसे मापा जाता है अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स आमतौर पर तीन आधार देखती हैं- कानूनी ढांचा, सरकारी संरक्षण या निष्क्रियता, और सामाजिक हिंसा. जब किसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है. यह आकलन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होता है. कौन सा देश हिंदुओ के लिए सबसे अत्याचारी किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने यह घोषित नहीं किया है कि किस मुस्लिम देश में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है, लेकिन मान्य वैश्विक रिपोर्टों और तथ्यों के आधार पर कुछ देशों का नाम बार-बार गंभीर स्थिति के रूप में सामने आता है. वर्तमान अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार हिंदुओं के लिए सबसे ज्यादा कठिन और असुरक्षित हालात जिन मुस्लिम देशों में माने जाते हैं, उनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान टॉप पर आते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ जबरन धर्मांतरण, विशेषकर नाबालिग लड़कियों के मामले, मंदिरों पर हमले, ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग और सामाजिक भेदभाव जैसी घटनाएं लगातार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दर्ज होती रही हैं. यही कारण है कि USCIRF और अन्य मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए उच्च जोखिम वाला देश माना जाता है. अफगानिस्तान के हालात अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद हालात और भी खराब हुए हैं. वहां हिंदू समुदाय लगभग समाप्ति की कगार पर है. धार्मिक स्वतंत्रता लगभग नहीं के बराबर है और खुले तौर पर हिंदू पहचान के साथ रहना बेहद मुश्किल माना जाता है. बांग्लादेश की स्थिति क्या कहती है बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में बांग्लादेश को अक्सर वॉच लिस्ट या चिंताजनक घटनाओं वाला देश माना गया है. दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा, मंदिरों पर हमले और जबरन पलायन की घटनाएं समय-समय पर रिपोर्ट हुई हैं. हालांकि बांग्लादेश का संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है और सरकार आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करती है. लेकिन इस वक्त वहां के हालात हिंदुओं के बद से बदत्तर हो चुके हैं. 

पूर्व डीएफओ का खुलासा: अरावली में 50 हजार करोड़ का अवैध खनन, माफिया राज 15 सालों से जारी

अलवर  राजस्थान के अलवर जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद भिवाड़ी, टपूकड़ा, तिजारा और किशनगढ़बास क्षेत्र में अवैध खनन जारी है. लगातार हो रहे अवैध खनन से कई पहाड़ियों का नामो-निशान मिट चुका है. खनन माफिया इतने हावी हो गए हैं कि डीएफओ, पुलिस और प्रशासन की टीम पर पथराव और फायरिंग तक कर देते हैं. पूर्व में अलवर में डीएफओ रहे पी. काथिरवेल ने अपने द्वारा किए गए अवैध खनन के आकलन में बताया कि भिवाड़ी क्षेत्र में खनन माफियाओं ने पिछले 15 वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अवैध खनन कर लिया है. उनके खिलाफ आज तक कोई सख्त कार्य योजना नहीं बनी है. तत्कालीन डीएफओ ने अलवर में पदस्थ रहते हुए राज्य सरकार और वन विभाग को पत्र लिखा था, जिसमें बताया गया कि जिले के टपूकड़ा क्षेत्र के चूहड़पुर, उधनवास, उलावट, ग्वालदा, इंदौर, सारे कलां, सारे खुर्द, खोहरी कलां, मायापुर, छापुर, नाखनौल, कहरानी, बनबन, झिवाणा और निंबाड़ी में हरियाणा के माफिया भी व्यापक स्तर पर फैले हुए हैं. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार इस इलाके के करीब एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पहाड़ समाप्त हो चुके हैं. यहां पहाड़ खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद माफियाओं ने तिजारा और किशनगढ़बास में अपना कारोबार फैलाया और नीमली, बाघोर, देवता, मांछा सहित अन्य क्षेत्रों की पहाड़ियों में दिन-रात खनन शुरू कर दिया. डीएफओ अलवर वानिकी पद पर रहते हुए पी. काथिरवेल ने दिसंबर 2013 और जनवरी 2014 में राजस्थान सरकार के वन विभाग के पीसीसीएफ और सीसीएफ को पत्र लिखकर मांग की थी कि अवैध खनन से हुए नुकसान की जांच के लिए एक हाई एम्पावर्ड कमेटी का गठन किया जाए. उन्होंने कहा था कि अवैध खनन से जिले की पहाड़ियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उनके व्यक्तिगत आकलन के अनुसार, भिवाड़ी क्षेत्र में ही पिछले 15 वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपदा लूटी जा चुकी है. यदि यही हाल रहा तो अगले तीन वर्षों में इस क्षेत्र की पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी और इसके बाद अलवर शहर के आसपास की पहाड़ियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी. डीएफओ ने कार्य योजना भी तैयार की थी तत्कालीन डीएफओ के अनुसार वर्ष 1998 से 2003 के बीच प्रतिदिन करीब एक हजार वाहनों की आवाजाही के आधार पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपये का अवैध खनन हुआ. इसी तरह 2003 से 2008 के बीच दो हजार वाहनों से करीब 12 हजार करोड़ और 2008 से 2013 के बीच पांच हजार वाहन प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान किया गया. अरावली की पहाड़ियों को बचाने के लिए डीएफओ ने एक कार्य योजना भी बनाई थी, जिसके तहत उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिखे पत्र में खनन माफियाओं से निपटने के लिए 11 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की मांग की थी. नकेल कसने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत इस राशि से वन विभाग की स्वतंत्र पुलिस फोर्स, वाहन, नई चेक पोस्ट, तथा पहाड़ी और खनन क्षेत्रों में पक्की दीवारें बनाने का प्रस्ताव था. तत्कालीन डीएफओ के अनुसार, अवैध खनन से जुड़े लोगों के पास भारी मात्रा में विस्फोटक, अवैध हथियार और बड़ी संख्या में मैनपावर है, जिनसे निपटना वर्तमान संसाधनों से लगभग नामुमकिन है. उन्होंने इस पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े फैसले और ठोस रणनीति अपनाने की मांग करते हुए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे थे.

MP Startup Summit 2026: स्टार्टअप यात्रा के 10 साल पूरे, इकोसिस्टम अवार्ड्स दिए जाएंगे

12 जनवरी को मध्यप्रदेश की स्टार्टअप यात्रा के 10 वर्ष होंगे पूरे मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट और इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 दिए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि भोपाल मध्यप्रदेश अपनी स्टार्टअप यात्रा के 10 वर्ष पूर्ण होने पर 12 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में स्टार्टअप में नवाचार एवं उत्कृष्टता का उत्सव मनाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट होगी जिसमें इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में भी अन्य पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। एमएसएमई के आयुक्त दिलीप कुमार ने युवा दिवस पर होने वाले इस आयोजन की तैयारियों की अधिकारियों के साथ बैठक में समीक्षा की। मध्य प्रदेश स्टार्टअप सेंटर, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम एवं एमएसएमई विभाग के अंतर्गत 12 जनवरी 2026 को भोपाल के रवीन्द्र भवन में मध्य प्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 का आयोजन होगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स एवं इकोसिस्टम एनेबलर्स विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित होंगे। सर्वश्रेष्ठ महिला उद्यमी, सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी, सर्वाधिक नवोन्मेषी स्टार्टअप, सर्वश्रेष्ठ प्रारंभिक-चरण स्टार्टअप, सर्वश्रेष्ठ विकास-चरण स्टार्टअप, प्राथमिक क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप तथा इकोसिस्टम श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप एनेबलर (इनक्यूबेटर/एक्सेलेरेटर), सर्वश्रेष्ठ एंजेल निवेशक/वेंचर कैपिटलिस्ट, सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट सहयोग जो एमपी स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन योजना 2025 के अनुरूप होंगी उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा। यह स्टार्टअप समिट राज्य के स्टार्टअप्स को एक मंच पर देशभर के निवेशकों से जोड़ने का भी अवसर होगा, जहाँ स्टार्टअप्स को अपने विचार प्रस्तुत करने (पिच करने) और निवेश जुटाने का मंच मिलेगा। साथ ही विभिन्न दूतावासों से प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अवसर प्रदान किए जाएंगे। कृषि क्षेत्र एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) भी ज्ञानवर्धक सत्रों एवं व्यावसायिक सुझावों से लाभान्वित होंगे। समिट में स्टार्टअप प्रदर्शनी के माध्यम से स्टार्टअप्स को अपने नवोन्मेषी उत्पादों एवं सेवाओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा जो युवा प्रतिभाओं को रोजगार प्रदाता बनने के लिए प्रेरित करेगा। यह समिट स्टार्टअप्स के लिए एक ऐसा एकीकृत मंच सिद्ध होगा जहाँ वे न केवल अपने नवाचार का प्रदर्शन कर सकेंगे बल्कि सरकार, निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स एवं समस्त इकोसिस्टम साझेदारों से भी जुड़ सकेंगे। संबंधित अधिकारियों को आयोजन के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए है।  

कानूनी शिकंजा: हाजिर न होने पर मंत्री नितेश राणे पर कोर्ट सख्त, जारी हुआ NBW

सिंधुदुर्ग महाराष्ट्र में कुडाल कोर्ट ने राज्य के कैबिनेट मंत्री और सिंधुदुर्ग जिले के गार्डियन मिनिस्टर नितेश राणे को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई लंबे समय से कोर्ट में पेश न होने और बार-बार गैरहाजिर रहने के चलते की गई है। संविधान बचाने के लिए हुए प्रोटेस्ट से जुड़े प्रकरण में विधायक प्रवीण दरेकर और विधायक प्रसाद लाड के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। यह मामला 26 जून 2021 का है, जब सिंधुदुर्ग जिले में ओबीसी आंदोलन के दौरान कुडाल पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। प्रोटेस्ट के सिलसिले में राजन तेली, विधायक नीलेश राणे, मंत्री नितेश राणे और 42 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान विधायक नीलेश राणे, राजन तेली और अन्य आरोपी कोर्ट में उपस्थित थे, जबकि नितेश राणे सहित कुल छह आरोपी गैरहाजिर रहे। कोर्ट ने नितेश राणे के वकीलों द्वारा दी गई गैरहाजिरी की याचिका को खारिज कर दिया। लगातार तारीखों पर पेश न होने को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने उनके खिलाफ नॉन बेलेबल अरेस्ट वारंट जारी किया। इससे पहले नासिक हाउसिंग घोटाले से जुड़े मामले में कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) नेता माणिकराव कोकाटे को दो साल की सजा सुनाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए दो साल की जेल की सजा को अंतिम सुनवाई तक निलंबित कर दिया। हाईकोर्ट का यह आदेश नासिक सेशन कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर आया है, जिसमें कोकाटे को सरकारी फ्लैटों के अवैध अधिग्रहण से जुड़े हाउसिंग फ्रॉड मामले में दो साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। सेशन कोर्ट के फैसले के बाद कोकाटे ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

गांवों में टिकाऊ विकास की बुनियाद रखने का संकल्प: ‘जी राम जी’ पर शिवराज चौहान की सोच को पीएमओ की सराहना

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 'विकसित भारत-जी राम जी' पर लिखे लेख को शेयर किया है। पीएमओ ने कहा है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 को आय सहायता और बड़े ग्रामीण विकास के बीच एक रिश्ते के तौर पर देखा जा रहा है। इस आर्टिकल में 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 को केवल योजनाओं या घटनाओं की एक शृंखला के रूप में नहीं, बल्कि इनकम सपोर्ट, संपत्ति निर्माण, कृषि स्थिरता और समग्र ग्रामीण विकास को जोड़ने वाले एक व्यापक आर्थिक फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "इस विधेयक को तैयार करने से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बड़े पैमाने पर परामर्श किया था। इसके अलावा, तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया और विभिन्न हितधारकों-किसानों, ग्रामीण समुदायों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ विस्तृत बातचीत की गई, ताकि जमीनी जरूरतों और व्यावहारिक चुनौतियों को समझा जा सके।" केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस पोस्ट पर पीएमओ ने लिखा कि यह जानकारीपूर्ण आर्टिकल 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 की मूल भावना को उजागर करता है। यह कानून इनकम सपोर्ट, परिसंपत्ति निर्माण, कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और समुदाय के नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास को अलग-अलग पहलुओं के रूप में नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए तत्वों के रूप में देखता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। आर्टिकल में यह भी जिक्र किया गया है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 का उद्देश्य केवल अल्पकालिक सहायता देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास की नींव रखना है। इसके तहत रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास, कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'विकसित भारत-जी राम जी' पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि बदलाव मौके पैदा करता है। मनरेगा की आड़ में यूपीए सरकार ने लोगों को बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल पेश करके हमने कांग्रेस द्वारा छोड़ी गई गंभीर कमियों को दूर करने की कोशिश की है। इस बिल के बारे में कांग्रेस द्वारा अब जो भ्रम और गलत जानकारी फैलाई जा रही है, उसका सिर्फ एक ही मकसद है अपनी नाकामियों और पिछले गलत कामों को छिपाना।

आष्टा में बवाल के बाद सख्ती: करणी सेना हमले के केस में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी

आष्टा थाना पार्वती क्षेत्र में करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर हुए हमले और वाहनों में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। घटना के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तेजी से कार्रवाई करते हुए बुधवार देर रात दबिश देकर 6 और आरोपितो को गिरफ्तार किया। इस प्रकार अब तक कुल 10 आरोपितो की गिरफ्तारी हो चुकी है। गौरतलब है कि 21 दिसंबर को कुछ असामाजिक तत्वों ने करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर मारपीट की थी और उनके वाहनों में तोड़फोड़ की थी। घटना के संबंध में थाना पार्वती में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।   घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज एकत्रित किए, जिनकी मदद से आरोपियों की पहचान की गई। मंगलवार को पुलिस ने पहले 4 आरोपितो को गिरफ्तार किया था, वहीं बुधवार रात को 6 अन्य आरोपियों को भी दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में अकील अहमद, अलीम उद्दीन, फिरोज उद्दीन, मुजफ्फर उद्दीन, नायब अहमद, मुस्ताक उद्दीन, साहूद आलम, इस्माइल शाह, शहीद खा और सलमान खा शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और घटना में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। फरार आरोपियतो की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। एसडीओपी आकाश अमलकर का कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।