samacharsecretary.com

अक्टूबर में कम आएगा बिजली का बिल, 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

 लखनऊ बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर में भी बिजली के बिल से राहत मिलती दिख रही है। जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिजली का बिल देने वाले उपभोक्ताओं का जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत, सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत के बाद अब अक्टूबर में भी पांच प्रतिशत से अधिक बिल कम हो सकता है। एफपीपीसीए (ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन) के तहत जुलाई माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) में कमी को देखते हुए सितंबर के बिजली बिल पर अक्टूबर में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इस संबंध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही आदेश जारी करने की कवायद की जा रही है। जून में भारी-भरकम 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने पर विद्युत नियामक आयोग के कड़े रुख के बाद से लगातार चौथे माह उपभोक्ताओं को बिजली के बिल से कुछ राहत मिलना तय है। गौरतलब है कि कारपोरेशन द्वारा पुराने भुगतान को भी अधिभार में शामिल करते हुए 1610 करोड़ रुपये के लिए जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूला गया था। जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत वसूलने के बाद कॉर्पोरेशन प्रबंधन जुलाई में भी 10 प्रतिशत वसूलता उससे पहले ही आयोग ने पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल करने पर नाराजगी जताते हुए उसे गलत ठहराते हुए आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा था कि वास्तविक बिजली खरीद की लागत एवं ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही अधिभार तय होगा। इसमें किसी अन्य माह की देनदारी के भुगतान या समायोजन को शामिल नहीं किया जा सकता। यही कारण रहा कि जुलाई से लगातार उपभोक्ताओं को बिजली का कम ही बिल देना पड़ रहा है। उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि एफपीपीसीए गणना में अब पारदर्शिता के चलते उपभोक्ताओं को कानूनन इसका लाभ समय पर मिल रहा है।  

विराट कोहली को लेकर रोहित शर्मा का बड़ा बयान, ‘वह वही विराट रहेंगे’

नई दिल्ली भारत के दिग्गज क्रिकेटर्स रोहित शर्मा और विराट कोहली की दोस्ती सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही है. करीब दो दशक से दोनों ने एक साथ क्रिकेट खेला है, मुश्किल दौर देखे हैं, बड़ी जीत का हिस्सा रहे हैं और कई यादगार मुकाबलों में भारत की उम्मीदों को संभाला है. अब रोहित शर्मा ने विराट कोहली के साथ अपनी दोस्ती, उनकी सोच और भारतीय क्रिकेट के लिए उनके योगदान पर खुलकर बात की है. रोहित शर्मा और विराट कोहली के इंटरनेशनल करियर की शुरुआत करीब एक साल के अंतर के साथ हुई थी. रोहित ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा, जबकि विराट ने 2008 में इंटरनेशनल डेब्यू किया. इसके बाद दोनों लंबे समय तक भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे. अलग-अलग कप्तानों के साथ खेले, खुद कप्तानी की और फिर एक-दूसरे की कप्तानी में भी टीम के लिए योगदान दिया. रोहित शर्मा के मुताबिक इतने लंबे समय तक साथ खेलने के कारण दोनों के बीच एक ऐसी समझ विकसित हो गई है, जिसके लिए ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती. रोहित ने जियोहॉटस्टार से कहा, 'हम दोनों के बीच मजबूत दोस्ती है. हम समझते हैं कि इस स्तर पर खेलने के लिए क्या चाहिए. हमारे तरीके अलग हैं, लेकिन ऐसा ही होना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है.' रोहित शर्मा ने बताया कि दोनों की दोस्ती की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया दौरे के आसपास हुई थी. उस दौर की कुछ पुरानी यादें आज भी दोनों के लिए खास हैं. उन्होंने कहा कि जब कभी टीवी पर उस समय से जुड़ा कोई वीडियो या पल सामने आता है, तो दोनों एक-दूसरे को देखकर हंसने लगते हैं. यानी सालों पुराने इस रिश्ते में क्रिकेट की गंभीरता के साथ दोस्ती और हल्के-फुल्के पलों की भी अपनी जगह रही है. कोहली बदलने वाले नहीं: रोहित शर्मा विराट कोहली के भारतीय क्रिकेट में योगदान को लेकर रोहित शर्मा ने किसी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि कोहली ने टीम के लिए जो हासिल किया है, वह सभी के सामने है और आगे भी उनके रवैये में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. रोहित ने कहा, 'उन्होंने टीम के लिए जो किया है, उसके बारे में सवाल करने की जरूरत नहीं है. यह सबके सामने है. आगे भी मुझे नहीं लगता कि कुछ बदलेगा. वह वही विराट कोहली रहेंगे, जिन्हें हम जानते हैं. वह आएंगे, अच्छी तैयारी करेंगे, रन बनाएंगे और टीम इंडिया को मैच जिताने की कोशिश करेंगे.' विराट कोहली ने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम की कप्तानी की, जबकि रोहित शर्मा के नेतृत्व में भी वह लंबे समय तक टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे. रोहित का कहना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी बदलने के बावजूद कोहली के काम करने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया. उन्होंने कहा, 'जब वह कप्तान थे, तब भी उनका रवैया लगभग ऐसा ही था. जब मैं कप्तान था, तब भी वह वैसे ही रहे. मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ बदलने की जरूरत है.' कोहली-रोहित की नजरें 2027 वर्ल्ड कप पर विराट कोहली पहले ही इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि वो 2027 का वर्ल्ड कप उनके लिए आखिरी मेगा टूर्नामेंट होगा. कोहली के अनुभव को देखते हुए रोहित शर्मा का मानना है कि उन्हें विश्व कप को लेकर कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. रोहित ने कहा, 'वह इतने सालों से खेल रहे हैं. चाहे 2027 का विश्व कप हो या 2023 का, उन्हें कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. विश्व कप, विश्व कप होता है.' रोहित शर्मा और विराट कोहली की बल्लेबाजी शैली अलग है. मैदान पर उनका व्यवहार भी एक जैसा नहीं है. लेकिन जब बात भारतीय टीम के लक्ष्य की आती है, तो दोनों की सोच एक ही दिशा में जाती है. रोहित शर्मा ने कहा, 'हम दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं और मैदान पर खुद को अलग तरीके से पेश करते हैं. लेकिन टीम के लिए हमारा लक्ष्य और सोच लगभग एक जैसी है. हमें मैच जीतना है, विश्व कप जीतना है, टूर्नामेंट जीतना है, सीरीज जीतनी है और टीम के लिए अच्छा करना है.' रोहित शर्मा ने बदलते क्रिकेट कैलेंडर का एक दूसरा पहलू भी बताया. पहले भारतीय क्रिकेटरों को लगातार दौरे करने पड़ते थे. कई बार पांच-सात दिन के अंतराल में ही अगली सीरीज के लिए रवाना होना पड़ता था. इसका असर निजी जिंदगी और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय पर भी पड़ता था. अब दोनों को पहले की तुलना में घर पर ज्यादा समय मिल रहा है. रोहित ने बताया, 'करीब एक साल पहले तक हर पांच-सात दिन में हम दौरे पर होते थे. इसलिए घर पर ज्यादा समय नहीं मिल पाता था. अब हम दोनों घर पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, जो हमेशा अच्छा लगता है." करीब दो दशक के इस सफर में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट के कई दौर देखे हैं. टीम बदली, कप्तान बदले, भूमिकाएं बदलीं, लेकिन दोनों के बीच आपसी समझ और भारत के लिए जीत हासिल करने की इच्छा कायम रही. 2027 विश्व कप की तैयारी के बीच रोहित की बातें इस लंबे रिश्ते की उस तस्वीर को सामने लाती हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सम्मान, अनुभव से ज्यादा समझ और व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर टीम की जीत दिखाई देती है.

योगी बोले- यूपी की अर्थव्यवस्था अब शीर्ष तीन में, 9.5 लाख युवाओं को नौकरी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले राज्य के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, वे अब नए रूप और नारे के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। उनके शासनकाल में माफिया हर जिले में समानांतर सरकार चला रहे थे। पहले भर्तियों के विज्ञापन से पहले ही आशंकाएं सामने आ जाती थीं। जकड़न, बेईमानी और माफिया का राज था। वर्ष 2017 में सरकार बनते ही हमनें इस स्थिति को समाप्त करने का संकल्प लिया। आज प्रदेश सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है। नवचयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हाल में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि नौजवानों के सपनों को उड़ान चाहिए, जो अब मिल रही है। 10 वर्ष पहले ऐसा नहीं था। आज हम युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभाओं का उपयोग राज्य की समृद्धि में कर रहे हैं। हमारी सरकार में 9.5 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियां दी गई हैं। पहले हमारी अर्थव्यवस्था नीचे के पांच राज्यों में थी, अब हम शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और राज्य का बजट तीन गुणा बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। हमने सपा अध्यक्ष से कहा था कि हर सप्ताह नियुक्ति पत्र बांटेंगे, छह महीने में एक लाख नौकरियां देंगे। आज चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले तीन कार्यक्रमों में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सपनों को केंद्र और प्रदेश की एनडीए सरकार ने साकार किया है। गांवों में अब ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं, जहां ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। जितनी कमाई ग्राम पंचायतें करेंगी, उतनी ही धनराशि सरकार भी देगी। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस सरकार में विभाग में 6581 नियुक्तियां की गईं हैं। सपा के शासनकाल में नौकरी का विज्ञापन आते ही शिवपाल यादव के गुर्गे पूरे प्रदेश में नौकरी बेचने में जुट जाते थे। सपा और कांग्रेस नफरत की राजनीति करती हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अब नौकरियों के लिए कोई पैसा नहीं ले सकता है। गांधी जी के नाम पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने कभी गांवों का विकास नहीं किया। इस कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डा. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिले नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री ने 11 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए, जिनमें आशुतोष त्रिपाठी, ओम बघेल, प्रवीण, सुधा, आदित्य सिंह, नेहा, रूपाली, श्रुति श्रीवास्तव, ब्यूटी शाही, शुभम और अमित कुमार सिंह शामिल हैं। कुशीनगर के आदित्य सिंह, लखनऊ की श्रुति सिंह और गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए।

झारखंड के मांदर को मिली आधिकारिक पहचान, GI टैग से कारीगरों को भी फायदा

 रांची  झारखंड की लोकसंस्कृति, आदिवासी जीवन और पारंपरिक नृत्य की पहचान बन चुका मांदर अब आधिकारिक रूप से झारखंड के नाम से दर्ज हो गया है। भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक (जीआई) रजिस्ट्री, चेन्नई ने ‘मांदर ऑफ झारखंड’ को जीआई का दर्जा प्रदान किया है। इसके साथ ही मांदर को बनाने वाले पारंपरिक कारीगरों और सदियों पुरानी इसकी निर्माण परंपरा को भी नई पहचान मिली है। जीआई रजिस्ट्री के अभिलेख में इसका आवेदन नंबर 777 है। आवेदन 24 सितंबर 2021 को दाखिल किया गया था और इसका भौगोलिक क्षेत्र झारखंड दर्ज है। देवघर के पेड़ा को भी जल्द जीआइ टैग मिल सकता है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। लाल मिट्टी, पारंपरिक निर्माण और विशिष्ट आवाज बनी आधार मांदर को जीआई पहचान दिलाने के लिए दाखिल आवेदन में इसकी विशिष्ट बनावट, स्थानीय कच्चे माल, पारंपरिक निर्माण पद्धति और खास ध्वनि को प्रमुख आधार बनाया गया। आवेदन में झारखंड के विभिन्न जनजातीय समुदायों के संगीत, नृत्य और सामाजिक जीवन से मांदर के लंबे जुड़ाव का भी प्रमाण प्रस्तुत किया गया था। विशेष रूप से स्थानीय लाल मिट्टी के इस्तेमाल और पीढ़ियों से चली आ रही निर्माण परंपरा को दर्ज किया गया। 1915 से 1956 तक के दस्तावेज बने मजबूत साक्ष्य मांदर के झारखंड से पुराने और विशिष्ट सांस्कृतिक संबंध को साबित करने के लिए आवेदन के साथ कई ऐतिहासिक दस्तावेज लगाए गए। इनमें मानवशास्त्री सरत चंद्र राय की 1915 की कृति, तारकचंद्र दास की 1931 की कृति और डब्ल्यू. जी. आर्चर की 1940 में प्रकाशित पुस्तक ‘द ब्लू ग्रोव’ में मांदर के उल्लेख को प्रमुख साक्ष्य बनाया गया। इसके अलावा 1920 की पटना संग्रहालय की वार्षिक रिपोर्ट, भारत सरकार के प्रकाशन विभाग की 1956 की फोक डांसेज इन इंडिया तथा बिहार जिला गजेटियर, रांची समेत अन्य अभिलेख भी प्रस्तुत किए गए। इन दस्तावेजों में मांदर को तत्कालीन झारखंड क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के संगीत, नृत्य और सामाजिक जीवन से जुड़ा वाद्य बताया गया है। गुमला के रैदिह के कारीगरों की भी दर्ज हुई पहचान जीआई आवेदन में रैदिह मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, ग्राम जरजट्टा, प्रखंड रैदिह, जिला गुमला को आवेदक बताया गया है। आवेदन में मांदर को हस्तशिल्प की श्रेणी में रखा गया है। दस्तावेज में मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों की सूची भी शामिल है। यानी जीआई टैग केवल मांदर को ही नहीं, बल्कि इसकी पारंपरिक कारीगरी से जुड़े लोगों की पहचान को भी मजबूत करता है। दिल्ली में हुई अंतिम सुनवाई, दस्तावेजों के साथ रखी गई झारखंड की दावेदारी मांदर को जीआई दर्जा दिलाने की प्रक्रिया में बौद्धिक संपदा और भौगोलिक संकेतक के विशेषज्ञ तथा एनयूएसआरएल, रांची के विजिटिंग फैकल्टी डॉ. सत्यदीप सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने आवेदन दाखिल करने से लेकर जीआई रजिस्ट्री के समक्ष मामले की पैरवी, दस्तावेज व अनुपालन प्रस्तुत करने और विभिन्न चरणों में पक्ष रखने का काम किया। जनवरी 2025 में दिल्ली में हुई अंतिम सुनवाई में भी उन्होंने मामले की पैरवी की। इस प्रक्रिया में एनयूएसआरएल, रांची ने कानूनी और प्रक्रियात्मक सहयोग दिया। गुमला के तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और जिला प्रशासन ने भी आवश्यक स्थानीय व प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया। पहले सोहराय-खोवर, अब मांदर डॉ. सत्यदीप सिंह इससे पहले झारखंड की सोहराय-खोवर चित्रकला को जीआइ पहचान दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। दस्तावेज के अनुसार सोहराय-खोवर झारखंड का पहला जीआइ बना था। इसी वर्ष कोडरमा के केसरिया कलाकंद को जीआइ दर्जा दिलाने की प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका रही। मांदर को मिली मान्यता इसी क्रम की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब कारीगरों को बाजार और पहचान मिलने की उम्मीद जीआई दर्जा किसी खास क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की विशिष्ट पहचान को औपचारिक मान्यता देता है। मांदर को यह दर्जा मिलने से झारखंड की पारंपरिक कारीगरी, लोकज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में रास्ता मजबूत हुआ है। साथ ही रैदिह और दूसरे क्षेत्रों में मांदर बनाने वाले कारीगरों के उत्पाद को झारखंड के नाम से अलग पहचान मिलने का आधार तैयार हुआ है। दस्तावेज में भी इसे पारंपरिक कारीगरों को पहचान दिलाने और झारखंड की लोकपरंपरा को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। फैक्ट फाइल उत्पाद : मांदर ऑफ झारखंड जीआई आवेदन संख्या : 777 आवेदन की तिथि : 24 सितंबर 2021 स्थिति : पंजीकृत श्रेणी : हस्तशिल्प भौगोलिक क्षेत्र : झारखंड आवेदक :रैदिह मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गुमला

अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

गोरखपुर  सोमवार को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प 'जनता दर्शन' में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। गंभीरता से उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करते हुए संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। सबको आश्वस्त किया, घबराइए मत, समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।  सबके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकार भरपूर मदद उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने गोशाला में की गोसेवा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा भी की। उन्होंने गायों, गोवंश व नंदी को खूब दुलारा, गुड़ खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए।

मुजफ्फरपुर में नदियां उफान पर, गंडक खतरे के निशान तक पहुंची

पटना बिहार के कई जिले बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। खासकर गंडक नदी ने बड़ी तबाही ला दी है। अब मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली तीनों प्रमुख नदियों का जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा आज मंगलवार सुबह 6 बजे जारी दैनिक जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़े के अनुसार, गंडक नदी रेवाघाट में खतरे के निशान पर पहुंच गई है, जबकि बागमती नदी दो स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। रेवाघाट (गंडक) – खतरे के निशान पर, बढ़ोतरी जारी गंडक नदी का उच्चतम जलस्तर 55.46 मीटर (वर्ष 2020) है। इसका खतरे का निशान 54.41 मीटर है। आज सुबह 6 बजे यह ठीक 54.41 मीटर पर पहुंच गई है और बढ़ने की प्रवृत्ति में है। यानी अगले कुछ घंटों में यह लाल निशान को पार कर जाएगी। इससे साहेबगंज और पारू प्रखंड में चिंता की स्थिति बन रही है। कटौझा (बागमती) – 1.30 मीटर ऊपर, पर अब घट रही बागमती नदी का कटौझा में खतरे का निशान 55.00 मीटर है, जबकि आज का जलस्तर 56.30 मीटर है। यह खतरे से 1.30 मीटर ऊपर है। हालांकि राहत की बात है कि इसकी प्रवृत्ति घटने की है। उच्चतम स्तर 58.34 मीटर (2024) से अभी नीचे है। बेनीबाद (बागमती) – 1.24 मीटर ऊपर, स्थिर बेनीबाद में बागमती का खतरे का निशान 48.68 मीटर है। आज का स्तर 49.92 मीटर है, जो खतरे से 1.24 मीटर ऊपर है। प्रवृत्ति स्थिर है। इससे कटरा और गायघाट प्रखंड के तटबंध पर दबाव बना हुआ है। इसका सर्वकालिक उच्च स्तर 50.12 मीटर (2025) है। सिकंदरपुर (बूढ़ी गंडक) – खतरे से नीचे, पर बढ़ रही शहर के बीच से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 मीटर से नीचे है। आज का स्तर 48.90 मीटर है, लेकिन यह बढ़ने की प्रवृत्ति में है। लगातार हो रहीl बारिश के अब थमने से थोड़ी राहत मिली है। इसका उच्चतम स्तर 54.29 मीटर (1987) रहा है। गंडक बराज की क्या है स्थिति बता दें कि वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज पर नदी का जलस्त्राव 13 घंटे तक 5 लाख क्युसेक से अधिक तथा 32 घंटे तक 4 लाख क्युसेक से अधिक बना रहा। दिनांक 26 एवं 27, सितम्बर के बीच बिहार स्थित गंडक नदी के सीमावर्ती जिलों यथा पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण एवं गोपालगंज में भी काफी अधिक वर्षापात हुई है, जिसके कारण गंडक बराज के निम्नप्रवाह में नदी का जलस्तर पूर्व से ही बढ़ा हुआ है। इस बार बराज से प्रवाहित जलस्त्राव कुछ कम रहने के बावजूद नदी द्वारा बगहा गेजस्थल पर 91.25 मीटर का अब तक का नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है, जो पूर्व के उच्चतम जलस्तर 90.90 मीटर (वर्ष 2024) से 0.35 मीटर अधिक है। गंडक नदी से प्रवाहित अत्यधिक जलस्त्राव के फलस्वरुप नदी पर निर्मित तटबंधों पर भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है तथा कई स्थलों पर सीपेज, पाईपिंग एवं ओवर-टाॅपिंग की समस्या भी उत्पन्न होती रही। अभी तक 169 बिन्दुओं पर हुए सीपेज/पाईपिंग को तत्काल कार्य कराते हुए सुरक्षित किया गया है। गंडक नदी के बढ़े हुए जलस्तर के कारण 28-29, सितम्बर के मध्यरात्रि में, पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत, गंडक नदी के बांयें तट पर निर्मित चम्पारण तटबंध 02 स्थलों पर (1. ग्राम-खैरतवा, प्रखंड-बगहा-1 एवं 2. ग्राम-फुलियाखाड़, प्रखंड-बैरिया) क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश प्रभाग में कुशीनगर जनपद अंतर्गत गंडक नदी के दायें तट पर निर्मित तटबंध एक स्थल पर क्षतिग्रस्त हुआ है।

मानसून की विदाई तय, 15 साल में दूसरी बार औसत से कम बारिश

भोपाल मानसून सीजन की विदाई अब लगभग तय हो चुकी है, आईएमडी एक सप्ताह में इसकी घोषणा कर सकता है। इस साल बारिश का औसत कोटा भी अब तक पूरा नहीं हुआ है। अब भी जिले की औसत बारिश के लिए चार इंच वर्षा की दरकार है। पिछले 15 साल में ये दूसरी बार है जब औसत से कम बारिश हुई है। कम बारिश से आगामी रबी सीजन में किसानों को गेहूं-चना की फसल में सिंचाई के लिए पानी की परेशानी हो सकती है। इस साल 15 वर्ष में पहली बार इंदिरा सागर बांध के गेट तक नहीं खुले। सितंबर में 86 मिमी ही बारिश हई जिले की औसत बारिश 808.8 मिमी है। इस साल मानसून सीजन में अब तक 708 मिमी बारिश ही दर्ज हो पाई है। इसके पूर्व वर्ष 2017 में सितंबर के अंत तक 758 मिमी बारिश हुई थी। सितंबर माह की देखी जाए तो इस साल सितंबर माह में कुल 86 मिमी बारिश ही हुई है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में सितंबर माह में कुल 85 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। पिछलेे कुछ वर्षों में बारिश का ट्रैक रिकार्ड देखा जाए तो सितंबर में हुई बारिश से औसत बारिश का कोटा पूरा होता आया है। इस बार स्थिति नहीं बन रही है। कृषि विभाग कम पानी वाली फसल फसलों की दे रहा सलाह इस साल समय अंतराल में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को तो फायदा पहुंचा है, लेकिन आगामी रबी सीजन में किसानों के सामने परेशानी आ सकती है। जिले के छोटे-बड़े कुल 49 तालाब 94.14 प्रतिशत भरे हैं। वहीं, दो प्रमुख बांधों में इंदिरा सागर बांध भी अपनी पूर्ण जल भराव क्षमता के करीब सवा मीटर नीचे है। हालांकि बरगी से छोड़े गए पानी से इसका एफआरएल पूरा होता दिख रहा है। ओंकारेश्वर बांध भी दो मीटर खाली है। आगामी रबी सीजन की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग अभी से किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई की समझाइश दे रहा है। पांच साल में बारिश की स्थिति वर्ष मानसून सीजन सितंबर में बारिश 2022 1049 मिमी 273 मिमी 2023 918 मिमी 480 मिमी 2024 964 मिमी 212 मिमी 2025 866 मिमी 205 मिमी 2026 708 मिमी 86 मिमी -28 सितंबर तक दोनों प्रमुख बांधों की स्थिति ओंकारेश्वर बांध जल भराव क्षमता 196.60 मी., वर्तमान में 294.57 मी., दो मीटर खाली इंदिरा सागर बांध जल भराव क्षमता 262.13 मी., वर्तमान में 261.07 मी., सवा मीटर खाली यह है जिले के तालाबों की स्थिति भगवंत सागर बांध कुल जल भराव क्षमता 78.06 एमसीएम, वर्तमान में 75.07 एमसीएम भाम मध्यम योजना कुल जल भराव क्षमता 29.73 एमसीएम, वर्तमान में 27.71 एमसीएम आवलियां तालाब कुल जल भराव क्षमता 22.199 एमसीएम, वर्तमान में 17.72 एमसीएम 46 छोटी परियोजनाएं कुल जल भराव क्षमता 40.82, वर्तमान में 39.729 एमसीएम अब बारिश की संभावना एक प्रतिशत जिले में बारिश का कोई नया सिस्टम अब नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय सिस्टम से एक प्रतिशत बारिश की संभावना है। इस साल औसत से कम बारिश हुई है। गर्मियों की फसल को सिंचाई के लिए पानी की परेशानी आ सकती है। डॉ. सौरव गुप्ता, कृषि एवं मौसम विशेषज्ञ बिजली उत्पादन में कोई परेशानी नहीं इस बार डैम के गेट नहीं खुल है। बरगी बांध से छोड़े गए पानी से इंदिरा सागर बांध का जल स्तर 262 तक पहुंच जाएगा। सीजन में बिजली उत्पादन को लेकर कोई परेशानी नहीं आएगी। अरमेंद्र सिंह, डीजीएम, इंदिरा सागर परियोजना

मिलान प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, 20 अक्टूबर तक मिली जमानत

कोलकता पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी मिलान प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है. कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने मिलान प्रधान को 10,000-10,000 रुपये के दो बॉन्ड पर अंतरिम जमानत दी है. अदालत ने जमानत के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी तय की हैं. इसके तहत मिलान प्रधान को अपना मौजूदा मोबाइल नंबर स्थानीय पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा. मिलान प्रधान की ये अंतरिम जमानत 20 अक्टूबर तक ही वैध रहेगी. अदालत के निर्देशा के मुताबिक उन्हें 21 अक्टूबर को हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करना होगा. क्या है पूरा मामला? बता दें कि मिलान प्रधान पर साल 2007 से लेकर अब तक कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से दो मामले कोंटाई अदालत में और चार मामले हल्दिया अदालत में विचाराधीन हैं. इन पुराने मामलों से जुड़े हत्या के आरोपों के सिलसिले में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था. अपने फैसले में जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि मिलान प्रधान को अपना नॉमिनेशन दाखिल करने के ठीक बाद गिरफ्तार किया गया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने ये भी पाया कि राज्य सरकार ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे ये साबित हो सके कि साल 2007 के बाद से कभी भी उन्हें इनमें से किसी मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था. मिलान प्रधान की पत्नी ने किए थे 'झूठे आरोपों' के दावे मिलान प्रधान की गिरफ्तारी पर उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने दावा किया था कि उनके पति को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा था, 'उन्हें झूठे आरोपों के आधार पर हिरासत में लिया गया है. जिन्होंने उन्हें झूठे आरोपों में हिरासत में लिया, उन्हें क्या सजा मिलनी चाहिए? उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए. नियम है कि गलत काम करने पर सजा मिलती है, लेकिन मेरे पति ने कुछ भी गलत नहीं किया है.'

CM सैनी के बड़े निर्देश, किसानों-महिलाओं और युवाओं तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे और उनकी जमीनी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बेस्ट प्रैक्टिस का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और आमजन को वास्तविक लाभ देना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने गोशालाओं को दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के तहत 10 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी देने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, विकास एवं पंचायत, सिंचाई एवं जल संसाधन तथा सहकारिता विभाग की योजनाओं और तकनीकी सुधारों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि उर्वरक वितरण प्रणाली को ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ से जोड़ने के बाद सत्यापित किसानों को पीओएस मशीन से खाद मिल रही है। आठ अक्टूबर 2025 से 14 सितंबर 2026 तक इससे 820 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचत दर्ज की गई। कृषि वैज्ञानिकों को खेतों में जाकर किसानों से संवाद करने और कीट-रोगों की समस्या पर शोध करने के निर्देश दिए गए। फसलों में कीटों की समय पर पहचान के लिए ई-पेस्ट सर्विलांस सिस्टम विकसित करने के निर्देश सीएम ने दिए हैं। नई फसल किस्मों और कृषि तकनीक पर शोध के लिए विशेष रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। भावांतर भरपाई योजना में फसल उत्पादन और मंडी बिक्री का प्रभावी सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि पात्र किसानों को पूरा भुगतान मिले। किसान जीवन सुरक्षा योजना में बीमा कंपनियों को पात्र किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप पूरा लाभ देने के निर्देश दिए गए। गांवों में शिक्षा, रोजगार, पानी और स्वास्थ्य पर फोकस प्रदेश में 996 अटल लाइब्रेरियां स्थापित हो चुकी हैं और 86.6 करोड़ रुपये से 1,000 नई लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। इनमें से 500 का उद्घाटन 25 दिसंबर 2026 को सुशासन दिवस पर करने के निर्देश सीएम ने दिए। बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।     स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को शामलात भूमि पर डेयरी से जोड़ने पर जोर। योजना के तहत अब तक 1,005 आवेदन मिले हैं।     468 ग्रामीण इंडोर जिम स्थापित हो चुके हैं और 234 अन्य के आदेश जारी किए गए हैं।     नहरों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाने तथा माइक्रो-इरिगेशन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश।     दूध की गुणवत्ता व मिलावट की नियमित जांच और कैटल फीड की निगरानी के निर्देश दिए गए।     सहकारी समितियों का आनलाइन पंजीकरण तीन कार्य दिवस में किया जाना है। 2019 से अब तक 9,165 समितियां आनलाइन पंजीकृत हुई हैं।     चीनी मिलों में एडवांस टोकन सिस्टम से किसानों का इंतजार 11-15 घंटे से घटकर करीब 1-2 घंटे रह गया है।  

रायपुर को मिलेंगी 100 ई-बसें, दिसंबर तक तैयार होगा चार्जिंग-डिपो

रायपुर छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में ई-बस सेवा शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने ई-बसों के संचालन के लिए मार्च तक की डेडलाइन तय की है। इससे पहले दिसंबर तक जरूरी अधोसंरचना, चार्जिंग स्टेशन, डिपो निर्माण और बसों के रूट निर्धारण का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत रायपुर को भारत सरकार से 100 ई-बसें मिलेंगी। इनके संचालन से शहरवासियों को किफायती, आरामदायक और पर्यावरण हितैषी सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। Raipur E-Bus: स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों को जोड़कर बन रहे रूट नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शहरवासियों के साथ रोजाना रायपुर आने वाली फ्लोटिंग पॉपुलेशन की जरूरतों को ध्यान में रखकर ई-बसों के रूट तैयार कर रहा है। रूट निर्धारण में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार, महत्वपूर्ण संस्थानों और अन्य जनोपयोगी स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि ई-बस सेवा शहर के प्रमुख हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ सके। दिसंबर तक पूरा करना है इंफ्रास्ट्रक्चर का काम अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में ई-बस संचालन का यह पहला बड़ा प्रयास है। इसलिए बसों के संचालन से पहले डिपो, चार्जिंग स्टेशन, बस स्टॉप और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। डिपो और सिविल वर्क समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए एनएचएआई, रेलवे और संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। रियल टाइम होगी ई-बसों की मॉनिटरिंग ई-बस सेवा शुरू होने के बाद संचालन की रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इसके तहत रूट प्लानिंग, बस संचालन, डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस स्टॉप और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को एकीकृत किया जाएगा। शहर की परिवहन जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ई-बस संचालन की प्राथमिकता तय की जा रही है। एचटी लाइन को लेकर लंबित प्रक्रिया का हुआ निराकरण रायपुर में ई-बसों के संचालन के लिए सीएसपीडीसीएल की ओर से एचटी लाइन बिछाने का काम भी जरूरी है। इसके लिए एनएचएआई के पोर्टल पर अनापत्ति से संबंधित आवेदन लंबित था, जिसका अब निराकरण किया जा चुका है। इसके बाद ई-बस संचालन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। चार शहरों में तय हो रहे परिवहन जरूरत के अनुसार रूट ई-बस सेवा के लिए रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में भी रूट निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन शहरों में रूट तय करते समय स्थानीय परिवहन जरूरतों और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखा गया है। सरकार का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा में सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ई-बस सेवा शुरू करना है।