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रोहित शर्मा बस की सीढ़ियों से गिरे, सपोर्ट स्टाफ ने तुरंत संभाला; चोट की पुष्टि नहीं

नई दिल्ली वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में भारतीय टीम की शानदार जीत के बाद तिरुवनंतपुरम से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। 27 सितंबर 2026 की रात ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में मैच खत्म होने के बाद जब भारतीय टीम होटल लौट रही थी, तब पूर्व कप्तान रोहित शर्मा टीम बस की सीढ़ियों से उतरते वक्त संतुलन खो बैठे और जोर से नीचे गिर गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोहित का पैर सीढ़ी से फिसल गया, जिसके बाद वहां मौजूद सपोर्ट स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दौड़कर उन्हें उठाया और संभाला। राहत की बात यह है कि BCCI या रोहित शर्मा की ओर से किसी भी तरह की चोट की पुष्टि नहीं की गई है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विराट कोहली रोहित शर्मा को लेकर काफी चिंता में आ गए और बाकि अन्य खिलाड़ी जीत का जश्म मना रहे थे। दो महीने बाद वनडे फॉर्मेट में रोहित की हुई है वापसी 39 साल के दिग्गज सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने दो महीने के लंबे ब्रेक के बाद वनडे प्रारूप में वापसी की है। इससे पहले उन्होंने 19 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी वनडे खेला था। इस सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों की वनडे टीम में वापसी हुई है। भारत ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से रौंदा तिरुवनंतपुरम में खेले गए सीरीज के पहले वनडे में भारत ने वेस्टइंडीज पर 8 विकेट से धमाकेदार जीत दर्ज कर 3 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। कैरेबियाई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए जस्टिन ग्रीव्स के शतक, जॉन कैंपबेल और अमिर जांगू के अर्धशतकों की मदद से 50 ओवर में 295/7 का स्कोर बनाया। भारत के लिए कुलदीप यादव ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट चटकाए। 296 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल (110) और विराट कोहली (139)* के शानदार शतकों की बदौलत बेहद आसानी से 8 विकेट से मुकाबला जीत लिया। सीरीज का आगे का शेड्यूल शुभमन गिल की कप्तानी और केएल राहुल की उप-कप्तानी में खेल रही भारतीय टीम अब सीरीज के अगले दो मुकाबलों के लिए तैयार है। 30 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में दूसरा मुकाबला और 3 अक्टूबर 2026 में न्यू चंडीगढ़ में तीसरा वनडे खेला जाएगा। 3 वनडे मैचों की सीरीज खत्म होने के बाद 17 अक्टूबर तक दोनों टीमों के बीच 5 मैचों की T20I सीरीज भी खेली जाएगी।  

नागौर-जोधपुर फोरलेन डेढ़ साल से अटका, बीकानेर हिस्से का टेंडर अब जारी

नागौर  बीकानेर से जोधपुर के बीच एनएच-62 के फोरलेन में तब्दील होने पर 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहनों को दौड़ने वाली सड़क मिलने में अभी लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने जोधपुर से नागौर के हिस्से के लिए डेढ़ साल पहले स्वीकृति जारी की, लेकिन वर्क ऑर्डर अभी तक नहीं हुआ है। वहीं तीन महीने पहले मंत्रालय ने नागौर से बीकानेर तक के हिस्से की भी वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन कुछ विशेष होता दिख नहीं रहा। जबकि अधिकारी इस मार्ग से अतिक्रमण हटाने सहित अन्य कार्य शुरू होने की बात कह रहे हैं। कुल 212 किलोमीटर फोरलेन पर 2752 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च होंगे। फोरलेन के इस हिस्से में 20 से अधिक ओवरब्रिज होने से इस पर आने वाले कस्बों और गांवों को पार करने की राह सुगम होगी और वाहन नागौर शहर में आने की बजाय बाईपास से ही निकल सकेंगे। पत्रिका ने उठाया मुद्दा नागौर-जोधपुर फोरलेन के साथ नागौर शहर के चारों तरफ रिंग रोड की जरूरत को लेकर पत्रिका ने लगातार मुद्दा उठाया। समाचारों के जरिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि शहर से होकर गुजरने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिन-रात भारी वाहनों का दबाव रहता है। इसके चलते दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इसके बाद मामला केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री तक पहुंचा और दोनों परियोजनाओं व नागौर में रिंग रोड को मंजूरी मिली। नागौर टू जोधपुर डेढ़ साल से काम अटका नागौर-जोधपुर रोड पर नेतड़ा तक 87 किमी और बीकानेर रोड से लाडनूं रोड को मिलाने वाले 16 किमी के बाईपास की स्वीकृति सड़क परिवहन मंत्रालय ने मार्च 2025 में जारी की। इस पर कुल 1393.34 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। डेढ़ साल से प्रोजेक्ट अटका है। बीकानेर टू नागौर टेंडर प्रक्रिया शुरू वर्तमान में दो लेन एनएच-62 का 109.24 किमी नागौर से बीकानेर तक फोरलेन बनेगा। केन्द्रीय मंत्रालय ने जून 2026 में 1359.31 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की। यहां प्रतिदिन 14 हजार पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) वाहनों का आवागमन है। विभाग ने 24 सितंबर को 1100.69 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। कार्य शीघ्र शुरू होगा नागौर-जोधपुर फोरलेन निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और स्वीकृति पत्र (एलओए) की प्रक्रिया चल रही है। प्रयास है कि इस कार्य को यथाशीघ्र शुरू करवाया जाए। -अनिल धौलिया, एक्सईएन, एनएच, नागौर खंड

बिहार में पर्यटन को नई उड़ान, AI और हेली-टूरिज्म से आधुनिक बनेगा टूरिज्म

पटना  मंदिरों की घंटियां, बुद्ध की धरती, गंगा के घाट, जंगलों की हरियाली और इतिहास की विरासत। बिहार अब इन पहचान से आगे पर्यटन का नया अध्याय लिखने की तैयारी में है। बिहार की हजारों साल पुरानी विरासत अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करती नजर आएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक, हेली-टूरिज्म और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के सहारे बिहार को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में आयोजित सेमिनार के दौरान कही। मंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में एआई और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बिना पर्यटन क्षेत्र में आगे बढ़ना संभव नहीं है। राज्य सरकार पर्यटन को विकास, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर काम कर रही है। 2025 में बिहार में छह करोड़ 62 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,301 करोड़ रुपये तथा ‘प्रगति यात्रा 2025’ के तहत 2,710 करोड़ रुपये की 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। बदल रहा पर्यटन का परिदृश्य सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मां सीता के भव्य एवं दिव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। गयाजी में 2500 करोड़ रुपये की लागत से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और सोनपुर में 680 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बाबा गरीबनाथ मंदिर, अशोक धाम और अहिल्या स्थान जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है। पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव बिहार में पर्यटन अनुभव को आधुनिक बनाने के लिए भी कई योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र, सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और वाल्मीकि नगर में लव-कुश पार्क विकसित किया जा रहा है। पटना, राजगीर और वैशाली में फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर है। पर्यटकों के लिए हेली-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। पटना दर्शन, नालंदा और वाल्मीकि नगर जैसे स्थलों की हवाई यात्रा की सुविधा के साथ एयर एम्बुलेंस सेवा की योजना भी तैयार की गई है। पटना के अटल पथ से हरिहरनाथ मंदिर तक रोपवे की योजना भी पर्यटन के अनुभव को नया आयाम देने वाली है। गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ पर्यटन को स्थानीय लोगों की आय और रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री होमस्टे योजना के तहत 34 पर्यटन स्थलों के आसपास करीब 1,000 कमरे विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए लाभार्थियों को प्रति इकाई 11 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। पर्यटन नीति के तहत एक लाख लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण देने और अगले पांच वर्ष में 20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए 25 से 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। पर्यटन का नया डिजिटल साथी बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने कहा कि एआइ पर्यटन की पूरी तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। पर्यटकों की पसंद, उनकी खोज और यात्रा संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुरूप पर्यटन स्थल, होटल, भोजन और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी जा जाएगी। रोबोटिक्स और भाषा तकनीक के माध्यम से चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों से आने वाले पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में सहायता उपलब्ध कराना भी संभव होगा। मौके पर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक चंदन चौहान, सुनील कुमार सिंह, रचना प्रियदर्शी, प्रो. ज्योति प्रकाश सिंह, प्रो. सम्राट मंडल, प्रभात कुमार, गिरीश सिन्हा समेत अन्य मौजूद रहे।

दिल्ली की कॉलोनियों में सुधरेंगी सड़क-नाली और ड्रेनेज सुविधाएं, 214 करोड़ से होंगे 53 विकास कार्य

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत किराड़ी, बवाना, मुंडका, नरेला और नांगलोई जाट विधानसभा क्षेत्रों की अनधिकृत कॉलोनियों में 214.12 करोड़ रुपये की लागत से 53 विकास कार्यों का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से 27 अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क, नाली, सीवेज और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इससे करीब डेढ़ से पौने 2 लाख लोगों को फायदा मिलने का दावा किया गया है। सीएम ने कहा कि सड़क, नाली, सीवेज और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं हर शख्स का अधिकार है। सरकार का मकसद विकास का फायदा दिल्ली के हर इलाके और गली तक पहुंचाना है। 53 प्रोजेक्ट के तहत 1,062 सड़कों और गलियों को डेवलप किया जाएगा। साथ ही 89.82 किलोमीटर सड़क नेटवर्क और 147.69 किमी ड्रेनेज नेटवर्क बनाया जाएगा। किराड़ी में सबसे ज्यादा 105 करोड़ के काम मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन परियोजनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा किराड़ी विधानसभा क्षेत्र का है। यहां 14 अनधिकृत कॉलोनियों में 105.51 करोड़ रुपये की लागत से 27 विकास कार्य किए जाएंगे। इसके तहत 640 सड़क और गलियों, 50.71 किलोमीटर सड़क तथा 101.42 किलोमीटर ड्रेनेज नेटवर्क बनाने की योजना है। इसी तरह बवाना में 38.83 करोड़ रुपये की लागत से 9 काम, मुंडका में 22.05 करोड़ रुपये से 5 काम, नरेला में 14.48 करोड़ रुपये से 4 काम और नांगलोई जाट में 33.25 करोड़ रुपये से 8 काम किए जाएंगे। 5 विधानसभा क्षेत्रों के 1.75 लाख लोगों को मिलेगी इससे राहत इस मौके पर दिल्ली के पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि 214.12 करोड़ रुपये के 53 विकास कार्य वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम हैं। रोड, सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत होने से इन इलाकों में नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा। कार्यक्रम में उत्तर पश्चिमी दिल्ली से सांसद योगेन्द्र चांदोलिया, कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, रविन्द्र इन्द्राज सिंह और विधायक राज करण, मनोज शौकीन, गजेंद्र दलाल समेत कई लोग मौजूद रहे।

इस गुफा में आज भी मौजूद है गणेश जी का कटा हुआ सिर? जानें पाताल भुवनेश्वर का रहस्य

इस रहस्यमयी गुफा में लाखों साल से महादेव द्वारा काटा गया गणेश जी का सिर आज भी मौजूद होने की मान्यता है. यह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. क्या आप जानते हैं कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध में आकर अपने ही पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था? हालांकि, इसके बाद उन्होंने हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर उन्हें पुनः जीवित कर दिया था. लेकिन सवाल यह है कि भगवान शिव द्वारा काटा गया गणेश जी का वह सिर आखिर गया कहां और आज कहां मौजूद है? इस रहस्य को जानने से पहले आपको बताते हैं कि इस पूरी घटना की शुरुआत कैसे हुई. प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान गणेश का सृजन माता पार्वती ने अपने हाथों से किया था. कथा के मुताबिक, एक दिन माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं. उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें अपनी शक्तियों से प्राण प्रतिष्ठित किए. इस तरह एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम माता पार्वती ने गणेश रखा था. माता पार्वती ने गणेश को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक वह द्वार पर पहरा दें और किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दें. बालक गणेश ने अपनी माता की आज्ञा मानी और द्वार पर पहरा देने लगे. इसी दौरान वहां भगवान शिव पहुंचे और उन्होंने अंदर जाने का प्रयास किया. बालक गणेश भगवान शिव को पहचानते नहीं थे. इसलिए उन्होंने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोक दिया. भगवान शिव ने कई बार गणेश को समझाने की कोशिश की, लेकिन गणेश अपने स्थान से नहीं हटे. यह देखकर भगवान शिव को क्रोध आ गया. उन्होंने गणेश को चेतावनी दी, लेकिन इसके बावजूद जब गणेश नहीं माने तो भगवान शिव ने त्रिशूल से प्रहार कर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया. मान्यता है कि भगवान शिव के त्रिशूल का प्रहार इतना तेज था कि बालक गणेश का मानव सिर धड़ से अलग होकर कैलाश पर्वत से दूर पाताल लोक में जा गिरा. जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आईं और उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो वह बेहद दुखी और क्रोधित हो गईं. अपने पुत्र की ऐसी स्थिति देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से गणेश को पुनर्जीवित करने की मांग की. पार्वती का दुख देखकर भगवान शिव ने अपने गणों को गणेश का सिर खोजकर लाने का आदेश दिया. हालांकि, जब सभी गण खाली हाथ लौटे तो भगवान शिव ने उन्हें आदेश दिया कि रास्ते में जो भी प्राणी सबसे पहले दिखाई दे, उसका सिर लेकर आएं. इसके बाद गण एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आए. भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को गणेश के धड़ पर स्थापित किया और उन्हें पुनः जीवित कर दिया. तभी से गणेश जी को गजानन के नाम से भी जाना जाता है. पाताल भुवनेश्वर में मौजूद है गणेश जी का सिर? आपको जानकर हैरानी होगी कि एक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का असली मानव सिर आज भी एक गुफा में मौजूद है. कहा जाता है कि भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश जी का जो मस्तक काटकर उनके शरीर से अलग किया था, उसे इसी गुफा में स्थापित कर दिया था. इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है. यहां भगवान गणेश की एक शिला रूपी आकृति को आदि गणेश के नाम से जाना जाता है. यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मान्यता है कि कलयुग में इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य ने की थी. 108 पंखुड़ियों वाला ब्रह्म कमल मान्यता है कि पाताल भुवनेश्वर गुफा में भगवान गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं. यहां गणेश जी की शिला रूपी आकृति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाले ब्रह्म कमल के आकार की एक चट्टान है. कहा जाता है कि इस ब्रह्म कमल से दिव्य बूंदें लगातार भगवान गणेश की शिला रूपी आकृति पर टपकती रहती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस ब्रह्म कमल को भगवान शिव ने स्वयं यहां स्थापित किया था. चारों युगों से जुड़ा है रहस्य इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थर स्थापित होने की भी मान्यता है. इनमें से एक पत्थर को कलयुग का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि यह पत्थर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है. मान्यता है कि जिस दिन यह पत्थर गुफा की छत से टकरा जाएगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा. हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. गुफा में होते हैं कई धार्मिक प्रतीक पाताल भुवनेश्वर गुफा के अंदर कई धार्मिक प्रतीक और आकृतियां मौजूद हैं. मान्यता है कि यहां भगवान केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं. बाबा अमरनाथ की गुफा से जुड़ी आकृति के पास पत्थर की बड़ी-बड़ी संरचनाएं दिखाई देती हैं, जिन्हें भगवान शिव की जटाओं का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा गुफा के भीतर भगवान शिव की तपस्या से जुड़े कमंडल और खड़ाऊं जैसी आकृतियां भी मौजूद होने की मान्यता है. इसी गुफा में काल भैरव की जीभ की आकृति के भी दर्शन होने की बात कही जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति काल भैरव के मुख से प्रवेश कर उनकी पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. कैलाश पर्वत तक जाता है गुप्त रास्ता? पाताल भुवनेश्वर गुफा से जुड़ी एक और मान्यता काफी रहस्यमयी है. कहा जाता है कि इस गुफा के अंदर से एक गुप्त रास्ता कैलाश पर्वत तक जाता है. हालांकि, इस दावे का भी कोई प्रमाणित वैज्ञानिक या ऐतिहासिक आधार नहीं है. महाभारत से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि स्वर्ग जाने के मार्ग पर पांडव इस गुफा के पास रुके थे. कहा जाता है कि उन्होंने यहां भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया और भगवान शिव के साथ चौपड़ भी खेला था. आज पाताल भुवनेश्वर अपनी रहस्यमयी गुफा, धार्मिक मान्यताओं और अनोखी प्राकृतिक संरचनाओं के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां मौजूद हर आकृति के साथ कोई … Read more

JPSC 14वीं PT में सेंधमारी का आरोप, ‘सागर पैलेस’ से रकम बंटवारे का दावा; CID को मिले अहम सुराग

रांची  जेपीएससी की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी को गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। सीआइडी ने इसका उल्लेख अदालत के सामने भी किया है। सीआइडी के अनुसार, परीक्षा में सेंधमारी के लिए बनाए गए कथित नेटवर्क में मुख्य आरोपित अभय तिवारी का करीबी उमेश कुमार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उमेश नामकुम के तेतरी टोली का रहने वाला है, जबकि अभय ने भी नामकुम के जोरार में मकान बना रखा था। उमेश उसके भरोसेमंद बिजनेस पार्टनर के रूप में काम करने लगा। पूछताछ में उमेश ने बताया है कि उसका और अभय का संबंध महज सामान्य परिचय तक सीमित नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम, एजेंटों के कमीशन और हिस्सेदारी के बंटवारे का वित्तीय तालमेल रांची के एक ठिकाने ‘सागर पैलेस’ से किया जाता था। 1.10 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप सीआइडी के अनुसार, उमेश और रमेश ने बिचौलियों की भूमिका निभाते हुए अभ्यर्थियों से करीब 1.10 करोड़ रुपये की कथित तौर पर अवैध वसूली की थी। दोनों ने पूछताछ में रकम वसूलने और उसे अभय तिवारी तक पहुंचाने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसी को अभय तिवारी और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ आरोपितों के सीडीआर लिंकेज भी मिले हैं। बरामद डिजिटल साक्ष्यों को साइबर सेल के मुख्य तकनीकी अधिकारी से प्रमाणित कराने की बात भी सीआइडी ने अदालत को बताई है। अभय के आईकार्ड पर था उमेश का नंबर सीआइडी ने जेपीएससी की परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग लिमिटेड) के रांची स्थित गैर-मान्यता प्राप्त कार्यालय में छापेमारी के दौरान उमेश कुमार और अभय तिवारी के विजिटिंग कार्ड व आइ कार्ड बरामद किए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, अभय तिवारी के टीडीपीएल आइकार्ड पर उमेश कुमार का मोबाइल नंबर दर्ज था। सीआइडी ने काल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की तो उमेश, अभय और टीडीपीएल से जुड़े कर्मियों के बीच लगातार संपर्क की बात सामने आई। उमेश को उसके दो सहयोगियों बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार के साथ चार अगस्त को रांची से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में बुद्धेश्वर और रमेश ने कथित तौर पर बताया कि अभ्यर्थियों से संपर्क के बाद उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, चेक, हस्ताक्षरित खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षरयुक्त ए-4 शीट लिए जाते थे।

ईशा सिंह का शानदार कमबैक, 25 मीटर पिस्टल में भारत को सिल्वर मेडल

नागोया एशियन गेम्स 2026 में ईशा सिंह ने सिल्वर मेडल जीत लिया है। महिलाओं के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में उन्होंने 38 का स्कोर हासिल किया। गोल्ड मेडल जीतने वाली चीनी खिलाड़ी का भी स्कोर 38 ही था, लेकिन शूटऑफ में बेहतर प्रदर्शन करने पर उन्हें गोल्ड मेडल दिया गया। इस इवेंट में ईशा के अलावा मनु भाकर और राही भी थीं, लेकिन दोनों क्वालिफाइंग राउंड में ही बाहर हो गईं। ऐसे में भारत की पूरी उम्मीदें ईशा पर ही थीं और उन्होंने साबित किया कि वह अकेले ही देश की उम्मीदों का बोझ उठा सकती हैं। वह एशियन गेम्स में पहले भी सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। चौथे नंबर पर खिसकने के बाद की वापसी फाइनल राउंड में ईशा ने शानदार शुरुआत की, लेकिन तीसरे सेट में चीनी शूटर से पीछे हो गईं। इसके बाद उनकी लय बिगड़ी और वह चौथे स्थान पर खिसक गईं। यहां से उन्होंने दमदार वापसी की और 9 सीरीज के बाद उनका स्कोर कोरिया की खिलाड़ी के बराबर था। दोनों ने 34 अंक हासिल किए थे। ऐसे में शूटऑफ के जरिए ब्रान्ज मेडल के विजेता का फैसला हुआ। यहां ईशा ने जीत हासिल की और कोरियाई खिलाड़ी को कांस्य पदक दिया गया। गोल्ड के लिए कांटे की टक्कर ईशा ने अपनी आखिरी सीरीज में 5 में से 4 निशाने सही लगाए। वहीं, चीनी खिलाड़ी 3 शॉट ही लगा सकी। दोनों का स्कोर 38-38 पर बराबर हो गया। इसके बाद शूटऑफ में ईशा को हार का सामना करना पड़ा और चीनी खिलाड़ी ने गोल्ड मेडल जीता। हालांकि, ईशा ने जिस तरह का प्रदर्शन किया। उसके बाद इस सिल्वर मेडल से उन्हें गोल्ड जीतने से कम खुशी नहीं हो रही होगी। मुश्किल से फाइनल राउंड में पहुंची थीं इस इवेंट के क्वालिफाइंग राउंड में ही मनु भाकर और राही बाहर हो गई थीं। इस इवेंट में कुल 44 शूटर्स ने हिस्सा लिया था। केवल टॉप आठ शूटर्स को ही फाइनल के लिए क्वालिफाई करना था। ईशा ने आठवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई। यहां भी उनका स्कोर चीनी ताइपे की येन-चिंग चेंग के साथ 580 प्वाइंट्स पर बराबर था, लेकिन ज्यादा 'बुल्सआई' हिट करने के कारण वह फाइनल में जगह बनाने में सफल रहीं। ईशा ने 22x हिट किए थे, जबकि चेंग ने 20x स्कोर किया था।

पहाड़ों के बीच खूबसूरत डैम, 500 मीटर ट्रैक और सोलर लाइट से बदली बुंगा की सूरत

बरवाला (पंचकूला) चंडीगढ़ की बेटी कविता चौधरी ने हरियाणा के सरपंचों के लिए विकास की बड़ी मिसाल पेश की है। कविता की शादी पंचकूला के बरवाला ब्लाॅक के गांव बुंगा गांव में हुई। वे अब गांव की सरपंच हैं और अपने गांव में विकास की ऐसी तस्वीर पेश करने की पहल की है, जिसे देखकर सुखना लेक की याद आती है। गांव में पहले से मौजूद डैम को विकसित कर उसके आसपास खूबसूरत ट्रैक, सोलर लाइट और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पहाड़ों के बीच स्थित यह डैम अब ग्रामीणों के लिए सैर-सपाटे के साथ जल संरक्षण का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहां सुखना लेकर जैसा नजारा देखने को मिलता है। कविता चौधरी ने कहा कि वह चंडीगढ़ के गांव की रहने वाली हैं और शादी के बाद बुंगा गांव की बहू बनीं। चंडीगढ़ में रहते हुए उन्होंने सुखना लेक का खूबसूरत नजारा देखा है। उनके मन में अक्सर यह विचार आता था कि जब हमारे गांव में भी पहाड़ों के बीच प्राकृतिक रूप से इतना सुंदर क्षेत्र मौजूद है तो इसे विकसित क्यों न किया जाए। इसी सोच के साथ डैम को नया रूप देने की दिशा में काम शुरू किया गया। कई करोड़ रुपये की लागत से डैम के विकास का काम लगभग पूरा हो चुका है। डैम के किनारे करीब 500 मीटर लंबा और चौड़ा ट्रैक तैयार किया गया है। यहां सोलर लाइटें लगाई गई हैं, जिससे शाम के समय भी लोग सुरक्षित रूप से सैर कर सकें। ट्रैक से सामने दिखाई देने वाले पहाड़ और सूर्यास्त का दृश्य लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है। ओवरफ्लो पानी भी हो रहा संरक्षित डैम से निकलने वाले ओवरफ्लो पानी को आगे तालाब में रिजर्व किया जा रहा है। इससे पानी की बर्बादी रोकने के साथ अतिरिक्त पानी का उपयोग भी सुनिश्चित किया गया है। यह पानी आसपास के पशुओं के लिए भी बड़ा सहारा बन गया है और गांव में पशुओं के पीने के पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। नाव और काटेज की भी योजना पंचायत की ओर से डैम को पर्यटन की दृष्टि से और विकसित करने की तैयारी है। यहां नाव चलाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा एक काटेज बनाने की योजना है, जहां लोगों के लिए खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध हो सके। डैम के दोनों तरफ पैदल ट्रैक को और विकसित करने पर भी विचार चल रहा है। गांव में ही मिले घूमने की जगह सरपंच कविता चौधरी का कहना है कि अक्सर गांव की महिलाएं और परिवार घूमने के लिए चंडीगढ़ जैसी जगहों पर जाते हैं। उनकी सोच है कि बुंगा में ही ऐसा स्थान विकसित किया जाए, जहां लोग परिवार के साथ प्राकृतिक वातावरण में समय बिता सकें। उनका प्रयास है कि डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ-साथ जल संरक्षण और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जाए।  

नेपाल की भारी बारिश से बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, गंडक उफान पर; बगहा-वाल्मीकिनगर पथ डूबा

पटना बिहार में बाढ़ से एक बार फिर हाहाकार की स्थिति है। हालत यह है कि नेपाल के ग्लेशियर वाली बाढ़ से तिगुना पानी बिहार आ रहा है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 5 लाख 43 हजार क्यूसेक से ज्यादा डिस्चार्ज दर्ज किया गया है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद गंडक नदी उफान पर है। वाल्मीकिनगर बैराज से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इसके चलते अरेराज अनुमंडल के गंडक तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का गंभीर संकट मंडराने लगा है। नेपाल के ग्लेशियर वाली बाढ़ से तिगुना पानी आने से त्रासदी की स्थिति बन सकती है। बगहा शहर के कैलाश नगर की वार्ड 1,2,4,6,7 में तेजी से गंडक का पानी फैल रहा है । अब तक 200 से अधिक घरों में गंडक का पानी फैल चुका है। ऐसे में लोग रेलवे ट्रैक के पास शरण लिए हुए हैं। लोग मवेशियों के साथ अहले सुबह से ही रेलवे ट्रैक पर जमे हुए हैं अभी तक राहत के नाम पर कैलाश नगर के लोगों को कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। अब दो दिनों से लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से सोमवार सुबह तक पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और तटीय क्षेत्रों में व्यापक बाढ़ आने की पूरी संभावना बन गई है, जिससे ग्रामीणों में चिंता और दहशत का माहौल है। बगहा शहर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। उधर, गंडक के अलावा बागमती और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। जल संसाधन विभाग ने सभी क्षेत्रीय पदाधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने और चंपारण से वैशाली जिले तक तटबंधों की निगरानी का निर्देश दिया है। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से अरेराज अनुमंडल के गंडक तटवर्ती गांवों में स्थिति संवेदनशील हो गई है। मुख्य रूप से सरेया, मिश्रौलिया, पुछरिया, बिंद टोली, नवादा सहित निचले इलाकों के दर्जनों गांवों पर बाढ़ और कटाव का खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है और बस्तियों के जलमग्न होने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों की रात की नींद उड़ गई है। लोग अपने मवेशियों, जरूरी अनाज और जान-माल की सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने की तैयारी में जुट गए हैं। बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए अनुमंडल प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट मोड में है। अरेराज एसडीएम सुजीत कुमार लगातार प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम सुजीत कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों और संवेदनशील तटबंधों का स्थलीय निरीक्षण किया है। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि नदी के कटाव और रिसाव की हर गतिविधि पर चौबीस घंटे पैनी नजर रखी जाए।वहीं, ज़मीनी स्तर पर राहत और सुरक्षा व्यवस्था की कमान अरेराज सीओ ने संभाल रखी है। सीओ विनोद कुमार पाण्डेय राजस्व कर्मियों के साथ मिलकर तटीय गांवों के ग्रामीणों से लगातार संपर्क साध रहे हैं और स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। सीओ ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करें और निचले इलाकों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। संभावित खतरे से निपटने के लिए राहत और बचाव की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। नदी तटीय इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सरकारी और निजी नावों को रिजर्व मोड पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन के नियमों के तहत प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई, शुद्ध पेयजल और मेडिकल टीमों की व्यवस्था की जा रही है। एसडीएम सुजीत कुमार ने जनता को भरोसा दिलाया है कि प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकहरा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया व नौतन के दियारा क्षेत्र के सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है। बगहा-वाल्मीकिनगर पथ भी डूब गया है। वीटीआर में पानी फैलने से जगली जानवर जंगल क्षेत्र से बाहर निकल कर शरण तलाश रहे हैं। बगहा-वाल्मीकिनगर पथ भी डूबा गंडक नदी डुमरियाघाट, कोसी बलतारा, बागमती ढेंग, सोनाखान, कटौंझा व बेनीबाद, लालबकिया गोवाबारी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। उधर, पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकहरा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया व नौतन के दियारा क्षेत्र के सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है। बगहा-वाल्मीकिनगर पथ भी डूब गया है। वीटीआर में पानी फैलने से जगली जानवर जंगल क्षेत्र से बाहर निकल कर शरण तलाश रहे हैं। मधुबनी प्रखंड के चिऊरही के रवहिया में लोग ऊंचे स्थान पर चले गए हैं। पूर्वी चंपारण के अरेराज ब्लॉक के तटवर्ती क्षेत्र के खेतों में पानी का फैलाव शुरू हो गया है। पश्चिम चंपारण की कई सड़कें गंडक की बाढ़ में डूबीं हैं।

मनु भाकर का मेडल सपना टूटा, ईशा सिंह ने फाइनल में पहुंचकर जगाई उम्मीद

नई दिल्ली  एशियाई खेल 2026 के 10वें दिन भारत के लिए निशानेबाजी के मैदान से मिली-जुली खबरें आई हैं। महिलाओं की 25 मीटर एयर पिस्तौल स्पर्धा में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर क्वालिफिकेशन राउंड से ही बाहर हो गई हैं। वहीं, भारत की होनहार निशानेबाज ईशा सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप 8 के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर पदक की उम्मीदों को जीवित रखा है। मनु भाकर का निराशाजनक अभियान टूर्नामेंट में बड़ी उम्मीद के रूप में उतरीं मनु भाकर क्वालिफिकेशन में केवल 579 अंक ही जुटा सकीं, जो उन्हें फाइनल में पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं था। वे 11वें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गईं। यह एशियन गेम्स मनु के लिए बेहद निराशाजनक रहा, इससे पहले वे महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्तौल इवेंट में भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं और 5वें स्थान पर रही थीं। इस तरह मनु इस बार बिना किसी पदक के स्वदेश लौटेंगी। ईशा सिंह फाइनल में, राही सरनोबत की चूक से टूटा टीम मेडल का सपना ईशा सिंह ने दबाव के क्षणों में बेहतरीन संयम दिखाते हुए कुल 580 अंक हासिल किए और आठ खिलाड़ियों के फाइनल मुकाबले में अपनी जगह पक्की की। भारत महिलाओं की टीम स्पर्धा में पदक जीतने की मजबूत स्थिति में था, लेकिन राही सरनोबत का निशाना अहम मौके पर चूक गया। सरनोबत ने चौथी सीरीज में महज 39 अंक का बेहद खराब स्कोर किया, जिसके बाद भारत की पोडियम पर जगह बनाने की उम्मीदें समाप्त हो गईं। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं।