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पंजाब सरकार 25 नवंबर से करेगी रक्तदान अभियान की शुरुआत, गुरु साहिब की शहादत को समर्पित

चंडीगढ़  श्री आनंदपुर साहिब में 23 नवंबर से शुरू होने जा रहा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस का भव्य समागम पूरे पंजाब में श्रद्धा और भावनाओं का एक अद्भुत माहौल बना चुका है. 23 नवंबर से शुरू होने वाले समागम का 25 नवंबर को अंतिम दिन होने वाला है, जिसका कार्यक्रम अपने आप में बहुत गहरा संदेश ले कर आता है. पंजाब सरकार ने इस दिन को सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि मानव सेवा, प्रकृति संरक्षण और “सरबत दा भला” की असली भावना के रूप में तैयार किया है. 25 नवंबर की सुबह मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में अखंड पाठ साहिब का भोग होगा. यह भोग तीन दिन की उस निरंतर अरदास का प्रतीक है जो श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को सम्मान और श्रद्धा के साथ समर्पित है. यह पल लाखों लोगों के लिए बेहद भावनात्मक होने वाला है, क्योंकि अखंड पाठ का भोग सिख इतिहास में पूर्णता, सम्मान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसके तुरंत बाद शुरू होगा पंजाब सरकार का एक ऐतिहासिक प्रयास राज्यव्यापी रक्तदान अभियान. गुरु साहिबान की शिक्षाएँ सिखाती हैं कि मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं. रक्तदान, जीवनदान है, और 25 नवंबर को पूरे पंजाब में एक साथ होने वाला यह अभियान इस बात का जीवंत स्वरूप है कि सिख पंथ आज भी मानव सेवा की उसी परंपरा पर चल रहा है. फिर आएगी पर्यावरण संरक्षण की बारी 3.50 लाख पौधों के राज्यव्यापी पौधारोपण अभियान की. यह सिर्फ पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को गुरु साहिबान के संदेश “प्रकृति और सृष्टि का सम्मान” से जोड़ने का एक बड़ा कदम है. पंजाब सरकार ने इस समागम को सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज, पर्यावरण और इंसानियत के उत्थान से जोड़कर इसे और अधिक सार्थक बनाया है. गुरबानी कीर्तन से लेकर “सरबत दा भला एकता केंद्र” तक के कार्यक्रम इस दिन की आध्यात्मिक गहराई को और बढ़ा देंगे. “सरबत दा भला” सिख धर्म की वह मूल आत्मा है जिसमें पूरे मानव समाज की भलाई की कामना की जाती है. इसी भावना के तहत 25 नवंबर को एक बड़ा राज्यव्यापी अंगदान प्रतिज्ञा अभियान रखा गया है. यह समाज को वह संदेश देता है कि दूसरों को जीवन देना ही सबसे बड़ा धर्म है. शाम को विरासत-ए-खालसा में होने वाला भव्य ड्रोन शो इस तीन दिवसीय समागम का सुंदर समापन करेगा. रोशनी और तकनीक के माध्यम से गुरु साहिब की शहादत, खालसा पंथ की विरासत और पंजाब की परंपरा को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. जनभावना साफ है, पंजाब सरकार ने इस समागम को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, प्रकृति, इतिहास और आध्यात्मिकता का एक विशाल संगम बनाया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की नेतृत्व क्षमता की हर तरफ तारीफ हो रही है कि उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को दुनिया भर में सम्मान दिलाने के लिए इतने व्यापक और प्रभावशाली कार्यक्रमों की योजना बनाई. 25 नवंबर के कार्यक्रम यह दिखाते हैं कि सिख संस्कृति सिर्फ पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं यह इंसानियत, बलिदान, सेवा, दान, प्रकृति और संपूर्ण मानव समाज की भलाई का महा संदेश है. पंजाब सरकार ने इस संदेश को जिस भव्यता और गंभीरता के साथ पेश किया है, उसने पूरे समागम को ऐतिहासिक बना दिया है.  

चुलकाना धाम में नई चमक लाने की तैयारी, पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने किया बड़ा अपडेट

पानीपत  श्री नवयुवक खाटूश्याम मित्र मंडल के सौजन्य एवं भजन सम्राट कन्हैया मित्तल के नेतृत्व में पानीपत से चुलकाना धाम तक रविवार को आयोजित श्री श्याम भव्य निशान यात्रा में पर्टयन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा शामिल हुए। पदयात्रा में खाटू नरेश की जय, हारे के सहारे की जय, तीन बाणधारी की जय, शीश के दानी की जय के जयकारों के बीच मंत्री ने श्याम भक्तों को संबोधित किया। शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार चुलकाना धाम को देव दर्शन योजना के तहत चमकाएगी। उन्होंने कहा कि भजन सम्राट कन्हैया मित्तल और श्याम भक्तों द्वारा पानीपत से चुलकाना श्री श्याम भव्य निशान यात्रा न केवल सनातन धर्म को मजबूत करेगी, अपितु राष्ट्रीय एकता की भावना को भी सशक्त बनाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आस्था के बड़े केंद्र चुलकाना धाम पर आने वाले भक्तों को बेहतर सड़कें और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शर्मा ने कहा कि बाबा श्याम के चरणों मे चुलकाना धाम निरन्तर आने का उन्हें भी सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र चुलकाना धाम को देव दर्शन योजना के तहत विकसित करते हुए बेहतरीन सड़कें व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बाबा श्याम का आदेश है, श्रद्धालुओं के लिए हम सब मिलकर चुलकाना धाम को चमकाएंगे।पदयात्रा में समालखा विधायक मनमोहन भड़ाना भी शामिल हुए।

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।  

क्यों छीना जा सकता है अल फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा? जानिए किसने थमाया नोटिस

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जांच में केंद्र में रही अल फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस पर भी अब खतरे के बादल उमड़ आए हैं। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के 'अल्पसंख्यक दर्जे' को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने भी मान्यता से जुड़े दावों को लेकर कॉलेज को नोटिस जारी किया था।   नोटिस का कारण NCMEI ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब जांचकर्ताओं ने 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके में शामिल दो व्यक्तियों का संबंध इस संस्थान से पाया है। आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया है। नोटिस में अल-फलाह से उनकी मैनेजिंग बॉडी, ट्रस्ट के ढांचे, फंडिंग (पैसे) के स्रोतों, नियुक्ति की प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम, 2004 के नियमों के पालन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। आयोग ने ट्रस्ट डीड, मैनेजमेंट की संरचना, एडमिशन के आंकड़े, शिक्षकों की नियुक्तियां, गवर्निंग बॉडी की बैठकों के विवरण और पिछले तीन सालों के वित्तीय विवरण के मूल रिकॉर्ड भी मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "पेश न होने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर संस्थान के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जा सकती है।" इस बीच हरियाणा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एक सत्यापन रिपोर्ट (verification report) दाखिल करे। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता मिलने के बाद से किए गए निरीक्षणों (inspections), निगरानी कार्यों और विभाग व यूनिवर्सिटी के बीच हुए पत्राचार (बातचीत) का पूरा विवरण होना चाहिए। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, NCMEI अब निम्नलिखित बातों की जांच करेगा। क्या यूनिवर्सिटी का संचालन अभी भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है जिसका ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व है? क्या यूनिवर्सिटी के स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव आया है? क्या अल्पसंख्यक दर्जे के लिए जरूरी शर्तें अभी भी बरकरार हैं? 10 नवंबर को हुए धमाके के बाद से इस संस्थान पर जांच और सख्त हो गई है। उस धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान गई थी। जांच में पाया गया है कि विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने वाले डॉ. उमर उन-नबी और इस मामले में आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, दोनों ही इस यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मामले से जुड़े चार डॉक्टरों का नाम अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया है। इन डॉक्टरों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों के नाम: मुजफ्फर अहमद राथर अदील अहमद राथर मुजम्मिल शकील गनी शाहीन शाहिद 18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) की जांच के तहत हुई है, जो मान्यता (accreditation) के फर्जी दावों और पैसों की गड़बड़ी से जुड़ी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है। इससे पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर किए गए मान्यता से जुड़े दावों पर सफाई मांगी थी। NAAC के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब भेज दिया है। उन्होंने परिषद को बताया है कि वेबसाइट से वे दावे हटा दिए गए हैं। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के प्रशासन और कुलपति (Vice-Chancellor) ने इस मामले पर हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। NCMEI की 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आयोग और दस्तावेज मांगेगा, नई जांच शुरू करेगा, या फिर संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे (minority status) की समीक्षा करके उसे वापस लेगा। फिलहाल कई एजेंसियां अल-फलाह ग्रुप के रोजगार रिकॉर्ड, वित्तीय डेटा और संस्थान द्वारा किए गए अन्य दावों की जांच कर रही हैं।

महिला जजों की मौजूदगी में CJI गवई का खुला बयान— बताई वह कमी जो पूरी न हो सकी

नई दिल्ली  निवर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने मन की बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का मलाल रहेगा कि वह सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नियुक्त नहीं कर सके। आपको बता दें कि गवई के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया और वे सभी पुरुष थे।   सीजेआई गवई ने कहा, "मुझे इस बात का खेद है कि मैं सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नहीं ला पाया, लेकिन हमने महिला जजों की सिफारिश की जिसमें सुप्रीम कोर्ट की वकील भी शामिल थीं।" उन्होंने जब इस बात का उल्लेख किया तो समारोह में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना भी मौजूद थीं। वह भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। आपको बता दें कि यह विदाई समारोह 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के लेडीज बार रूम में आयोजित किया गया था। समारोह में 17 न्यायाधीशों ने भाग लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने समारोह का आयोजन किया। उन्होंने सीजेआई गवई के नेतृत्व की विनम्रता, सुलभता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए सराहना की। अपने विदाई भाषण में सीजेआई गवई ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह दिल्ली में उनका पहला विदाई समारोह था। उन्होंने अदालत में अनजाने में किसी को ठेस पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी। इस अवसर पर उनकी विरासत संभालने वाले देश के अगले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई ने संस्था का नेतृत्व एक गतिशील तरीके से किया। सीजेआई बीआर गवई के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए पांच पुरुष न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल मनभाई पंचोली शामिल हैं।  

भारतीय न्यायपालिका को विदेशी उदाहरणों की ज़रूरत क्यों? CJI-डिज़िग्नेट सूर्यकांत ने उठाया अहम सवाल

नई दिल्ली  भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वदेशी न्यायशास्त्र को अपनाने की दिशा में बल दिए जाने को एक स्वाभाविक कदम बताया। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों में न्यायालय ने जो मजबूत और आधिकारिक न्याय-निर्णय का संग्रह बनाया है, उसके बाद अब समय आ गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी स्वयं की न्यायिक विचारधारा को गहरा करे।   न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका के लिए अपने स्वयं के दर्शन पर निर्भर रहना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के हजारों ऐतिहासिक निर्णय देने के 75 वर्षों के बाद जब हमारे निर्णयों को अन्य विभिन्न क्षेत्राधिकारों द्वारा उद्धृत किया जा रहा है और जब हमने अपने दम पर न्यायिक ज्ञान का भंडार अर्जित कर लिया है। हमें अपने देश से संबंधित किसी भी मुद्दे पर राय बनाते समय दूसरे देशों के निर्णयों को क्यों देखना चाहिए?" उन्होंने जोर दिया कि भौगोलिक, स्थानीय, सामाजिक, और राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण कारक अन्य देशों में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं का न्यायशास्त्र विकसित करने की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि CJI के रूप में उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में लंबी अवधि से लंबित मामलों को निपटाना और संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाना शामिल है। उनकी प्राथमिकता विशेष रूप से सात और नौ न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठों का गठन करना है, ताकि महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके। उन्होंने लंबित मामलों की संख्या (90,000 तक) को स्वीकार किया लेकिन वह इसे लेकर आशावादी हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता के साथ दिए गए उनके एक निर्णय में ऐसे निर्देश थे, जिससे अंततः 1,000 मामले निपटाए जा सकेंगे। उनका लक्ष्य लंबित मामलों को शून्य तक लाना नहीं है, लेकिन स्थिति को प्रबंधनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में सभी रिक्तियों को भरेंगे, हालांकि उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व पर अभी विचार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का कर मामलों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण है और 5 करोड़ के लिए मुकदमेबाजी नहीं लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने अंतिम राय बनाने के लिए एक ऐसे तंत्र के विकास की आवश्यकता पर बल दिया जिससे समय बर्बाद न हो। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने CJI कार्यालय से जुड़े दबावों और सोशल मीडिया की आलोचना पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि CJI के पद के लिए व्यक्ति को सोशल मीडिया की टिप्पणियों से अलग रहने की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "न्यायाधीश या CJI दबाव में नहीं आ सकते और नहीं आना चाहिए। मैं कभी दबाव में नहीं रहा। एकमात्र तरीका है कि सोशल मीडिया की टिप्पणियों को अनदेखा करें।"  

लक्ष्य सेन ने रचा कमाल, इस सीज़न का पहला टाइटल अपने नाम किया

सिडनी  भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस सत्र का अपना पहला खिताब जीत लिया। लक्ष्य ने पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में जापान के युशी तनाका को हराकर ऑस्ट्रेलियाई ओपन सुपर 500 टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। 24 साल के लक्ष्य से शानदार लय बरकरार रखते हुए 26 वर्षीय तनाका को 38 मिनट तक चले मैच में 21-15, 21-11 से हराया। लक्ष्य के लिए पिछले समय से चीजें सही नहीं चल रही थीं और वह पेरिस ओलंपिक 2024 में चौथे स्थान पर रहे थे। 2021 विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता लक्ष्य ने इससे पहले अपना आखिरी सुपर 300 खिताब पिछले साल लखनऊ में सैयद मोदी इंटरनेशनल में जीता था। वह सितंबर में हांगकांग सुपर 500 टूर्नामेंट में जीत के करीब थे, लेकिन उपविजेता रहे थे। लक्ष्य ने नहीं गंवाया एक भी गेम इस वर्ष ऑर्लियंस मास्टर्स सुपर 300 खिताब जीतने वाले विश्व के 26वें नंबर के खिलाड़ी तनाका का सामना करते हुए लक्ष्य ने शानदार नियंत्रण और तेज तर्रार खेल का नमूना पेश किया तथा एक भी गेम गंवाए बिना मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ मौजूदा राष्ट्रमंडल खेल चैंपियन लक्ष्य इस सत्र में बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीतने वाले केवल दूसरे भारतीय बन गए। इससे पहले आयुष शेट्टी ने अमेरिकी ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट जीता था। भारत के अन्य खिलाड़ियों में सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी हांगकांग और चीन मास्टर्स के फाइनल में पहुंचे थे, जबकि किदांबी श्रीकांत भी साल की शुरुआत में मलयेशिया मास्टर्स में उपविजेता रहे थे। 

लाइफलाइन कंज्यूमर्स, रूरल शेडयूल्ड मीटर्ड घरेलू कंज्यूमर्स और प्राइवेट ट्यूबवेल्स को पिछले साल की तरह ही सब्सिडी

लखनऊ यूपीईआरसी ने नए यूपीईआरसी (वितरण के लिए बहुवर्षीय टैरिफ) विनियम, 2025 के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य डिस्कॉम के लिए बिजली की दरें घोषित की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखा और लगातार छठे साल टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया।  लगातार छठे साल भी टैरिफ में कोई बदलाव नहीं  सभी कंज्यूमर कैटेगरी के लिए टैरिफ लगातार छठे साल भी वैसे ही रखे गए हैं। इसका मतलब ये है कि इस बार भी टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2029-30 तक के कंट्रोल पीरियड के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लॉस का ट्रैजेक्टरी तय किया गया। यू०पी०पी०सी०एल० को कुल डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को वित्त वर्ष 24-25 के 13.78% से घटाकर वित्त वर्ष 29-30 में 10.74% करने का निर्देश दिया गया। सभी कंज्यूमर को ग्रीन एनर्जी टैरिफ का फायदा मिलेगा HV कैटेगरी के कंज्यूमर्स के लिए ग्रीन एनर्जी टैरिफ रु. 0.36 प्रति यूनिट से घटाकर रु. 0.34 प्रति यूनिट कर दिया गया है और LV कैटेगरी के कंज्यूमर्स के लिए रु. 0.17 प्रति यूनिट तय किया गया है। लाइसेंसी को उन कंज्यूमर्स के बिल में पावर फैक्टर बताना होगा जहां के वी.ए.एच. बिलिंग की जा रही है। यूपीपीसीएल को सिक्योरिटी डिपॉजिट पर दिए गए ब्याज से काटे गए इनकम टैक्स के लिए योग्य कैटेगरी के कंज्यूमर्स को टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया। यूपीइआरसी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स और टाउनशिप के लिए अलग कंसल्टेशन पेपर यूपीइआरसी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स और टाउनशिप से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक अलग कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा। 5 राज्य डिस्कॉम के टैरिफ ऑर्डर को, जिसमें वित्त वर्ष 2023-24 का टू-अप, वित्त वर्ष 2024-25 का एनुअल परफॉर्मेंस रिव्यू (एपीआर) और वित्त वर्ष  2025-26 का वार्षिक रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) शामिल है, UPERC ने स्टेकहोल्डर्स, पब्लिक और स्टेट एडवाइजरी कमेटी के ऑब्जेक्शन, कमेट्स और सुझावों को ध्यान में रखते हुए फाइनल कर दिया है। टैरिफ ऑर्डर की जरूरी बातें नीचे दी गई हैं। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 5 राज्य डिस्कॉम का टू-अप आयोग द्वारा अनुमोदित 140,580.13 (मिलियन यूनिट) की खरीद के लिए 5 राज्य डिस्कॉम के वित्त वर्ष 21023-24 के लिए समेकित वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) 85,082.83 करोड़ रुपये है, जबकि वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) 90,328 62 करोड़ रुपये के लिए 141,931.68 एमयू की खरीद का दावा किया गया है। लाइसेंसधारियों ने 15.48% की वास्तविक वितरण घाटे का दावा किया है. जबकि आयोग ने 10 अक्टूबर 2024 के टैरिफ आदेश में अनुमोदित घाटे के मुकाबले वास्तविक वितरण घाटे के निचले स्तर के रूप में 14.69% की वितरण घाटे को मंजूरी दी है। आयोग ने राज्य सरकार की सब्सिडी को राज्य सरकार से राज्य डिस्कॉम द्वारा प्राप्त 17,093.73 करोड़ रुपये माना है। कमीशन ने 60,235.65 करोड़ रुपये (डीम्ड रेवेन्यू सहित) तय किया है। इस वजह से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए रेगुलेटरी अकाउंट में 1,246.55 करोड रुपये का सरप्लस है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 5 राज्य डिस्कॉम का एआरआर आयोग ने हाल ही में अधिसूचित यूपीईआरसी (वितरण के लिए एमवाईटी) विनियम, 2025 के अनुरूप वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 5 राज्य डिस्कॉम के एआरआर को मंजूरी दे दी है, आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 163,778.24 एमयू की खरीद के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये की समेकित वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को मंजूरी दी है। जबकि राज्य डिस्कॉम द्वारा 164,592.49 एमयू की खरीद के लिए 1.12.865.33 करोड़ रुपये का अनुमानित वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) दायर किया गया था। आयोग ने राज्य डिस्कॉम द्वारा दावा किए गए 13.77% के मुकाबले 13.35% के वितरण घाटे को मंजूरी दी है। राज्य सरकार द्वारा 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। आयोग ने कंज्यूमर्स द्वारा दिए जाने वाले 86.183.29 करोड़ रुपये के राजस्व को मंजूरी दे दी है। इससे UPPCL/DISCOMS को कुल 1,03.283.29 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलेगा। इसके चलते लाइसेंसी के लिए FY 2025-26 में 7,710.04 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी गैप होगा। हालांकि, यह देखते हुए कि 1.4.2025 तक यूपीपीसीएल / डिस्कॉम के पास 18592.38 करोड़ रुपये का अनमानित जमा रेगलेटरी सरप्लस है इसलिए आयोग को FY 25-26 के लिए टैरिफ रेट बढ़ाने का कोई कारण नहीं मिला है।  वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैरिफ ऑर्डर की अन्य मुख्य विशेषताएं 1. UPPCL/DISCOMS के लिए UPERC द्वारा FY 24-25 के लिए तय टारगेट और कंट्रोल पीरियड FY 25-26 से FY 29-30 के लिए तय DL ट्रैजेक्टरी टारगेट के मुकाबले डिस्ट्रीब्यूशन लॉस की स्थिति का सारांश आगे है। ये टारगेट अगले पांच सालों अर्थात 2029-30 के लिए रखा गया है जो प्रतिशत में है । DVVNL के लिए 3.70%, MVVNL के लिए 2.61%, PVVNL के लिए 1.92%, PuVVNL के लिए 4.28%, KESCO के लिए 1.18%, UPPCL के लिए 3.04% है।  2. सिर्फ मध्यांचल और पश्चिमांचल डिस्काम्स ही FY 24-25 के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लॉस के लिए तय टारगेट हासिल कर पाए। सबसे खराब परफॉर्निंग PuVVNL की रही, उसके बाद DVVNL की रही। 3. यूपी सरकार लाइफलाइन कंज्यूमर्स (रूरल और अर्बन), रूरल शेडयूल्ड मीटर्ड घरेलू कंज्यूमर्स और प्राइवेट ट्यूबवेल्स को पिछले साल की तरह ही सब्सिडी देती रहेगी। 4. लाइसेंस होल्डर्स को निर्देश दिया गया है कि वे उन सभी कंज्यूमर्स की PAN डिटेल्स इकट्ठा करें और अपडेट करें, जहाँ भी सिक्योरिटी डिपॉजिट पर दिए जाने वाले इंटरेस्ट पर इनकम टैक्स एक्ट के प्रोविजन के अनुसार TDS काटा जाना है। लाइसेंस होल्डर्स काटे गए टैक्स को जमा करें और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर इंटरेस्ट के पेमेंट के समय ऐसे कंज्यूमर्स को TDS सर्टिफिकेट जारी करें। कज्यूमर्स अपने ऑनलाइन अकाउंट में लॉग इन करके सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकें। 5. TOD टैरिफ कैटेगरी और टाइम पीरियड पिछले साल जैसे ही रहेंगे। 6. ओपन एक्सेस कंज्यूमर्स हेतु क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज को और रैशनलाइज किया गया है और कुछ कैटेगरी के लिए कम किया गया है। 7. FY 25-26 के लिए सप्लाई की औसत लागत 8.18 (Rs/KWh) होने का अनुमान है, जबकि औसत बिलिंग दर 7.61 (Rs/KWh) होने का अनुमान है। 8- पब्लिक हियरिंग के दौरान, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग और टाउनशिप में सिंगल पॉइंट कनेक्शन पर कंज्यूमर्स ने बिलिग में गड़बड़ियों, ट्रांसपेरेसी की कमी और दूसरी दिक्कतों के बारे में कई मुद्दे उठाए है। कमीशन जल्द ही स्टेकहोल्डर्स के कमेंट्स के लिए इन दिक्कतों और उन्हें हल करने के संभावित तरीकों पर … Read more

चंडीगढ़ पर बड़ा कदम: अनुच्छेद 240 के तहत खत्म हो सकता है पंजाब-हरियाणा का हस्तक्षेप

चंडीगढ़  केंद्र सरकार चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पेश किया जाना है। इस कदम का उद्देश्य चंडीगढ़ के प्रशासन को अन्य केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के साथ लाना है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल करना है।   इस कदम से चंडीगढ़, अन्य गैर-विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश जैसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव और पुडुचेरी के समान हो जाएगा। वर्तमान में पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के राज्यपाल द्वारा संभाला जाता है। अनुच्छेद 240 के तहत आने वाले सभी केंद्र शासित प्रदेशों में स्वतंत्र प्रशासक होते हैं। यह बदलाव चंडीगढ़ को एक स्वतंत्र प्रशासक देने की संभावना को जन्म देगा। संविधान का अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीधे नियम बनाने का अधिकार देता है। यह राष्ट्रपति को उन केंद्र शासित प्रदेश के लिए शांति, प्रगति और सुशासन हेतु नियम बनाने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए किसी भी विनियमन में संसद द्वारा बनाए गए किसी भी अधिनियम को निरस्त करने या संशोधित करने की शक्ति होती है और इसे संसद के अधिनियम के समान कानूनी बल और प्रभाव प्राप्त होता है। पंजाब कर रहा विरोध यह कदम पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के लिए एक अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है, क्योंकि दोनों चंडीगढ़ पर अपना पूर्ण दावा करते हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित अन्य नेताओं ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। मान ने जोर देकर कहा कि चंडीगढ़ हमेशा पंजाब का अभिन्न अंग रहेगा। साहनी ने कहा कि चंडीगढ़ के विभाजन के बाद पंजाब की राजधानी बनने का ऐतिहासिक महत्व है और केंद्र ने कई समझौतों के तहत चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी बनाने का वादा किया था। विरोध करने वाले नेताओं का मानना है कि यह संशोधन पंजाब के ऐतिहासिक और प्रशासनिक नियंत्रण को खत्म करने, राज्य के संघीय अधिकारों पर हमला करने और पंजाब को उसकी राजधानी से दूर करने की साजिश है। अगस्त 2016 में भी केंद्र ने सेवानिवृत्त नौकरशाह केजे अल्फोंस को चंडीगढ़ का स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त करने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के कड़े विरोध के बाद इसे टाल दिया गया था।  

देशभर में बम धमाकों की साजिश! फडणवीस बोले—पाकिस्तान था मास्टरमाइंड

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लाल किले के पास हुए विस्फोट के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश सीधी जंग में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए वह आतंकी हमले करवा रहा है। फडणवीस ने कहा, 'पाकिस्तान को पता है कि वह खुले युद्ध में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए पहलगाम में आतंकी हमला और दिल्ली में हालिया विस्फोट करवाया गया।' उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 3000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ था। इसका इस्तेमाल मुंबई और देश के अन्य शहरों में आतंकी हमलों के लिए किया जाना था।   मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'मुझे खुशी है कि आज हमारे पास एक बदला हुआ भारत है। भारत ने इन चीजों को पहले ही भांप लिया और ऑपरेशन किए। उनकी मंशा देश के हर कोने में बम धमाके करने की थी। हमारे देश के कई शहरों सहित मुंबई भी उनके निशाने पर था। जब हमारी भारतीय एजेंसियों ने इसकी भनक लगी और उन पर सीधा हमला किया, तो उन्होंने दिल्ली में विस्फोट करके अपनी मौजूदगी दिखाई।' उन्होंने कहा कि इस विस्फोट में कम से कम 10 लोगों की जान गई है। ऑपरेशन सिंदूर की बताई जरूरत देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि अगर भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई की होती, तो देश को निशाना बनाने का कोई भी दोबारा दुस्साहस नहीं कर पाता। मुंबई हमले की 17वीं बरसी पर गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित कार्यक्रम में वह बोल रहे थे। फडणवीस ने कहा कि यह सिर्फ ताज और ट्राइडेंट होटलों पर हमला नहीं था। उन्होंने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और इस शहर पर हमला देश की संप्रभुता पर हमला है। पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को बनाया निशाना सीएम फडणवीस ने कहा, ‘अगर हमने यह बात समझ ली होती और उस समय ऑपरेशन सिंदूर चलाने का साहस किया होता, तो कोई भी हम पर दोबारा हमला करने का दुस्साहस नहीं करता।’ भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी। मुंबई आतंकी हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए थे। फडणवीस ने कहा, '17 साल बीत चुके हैं, लेकिन हमारे दिलों में अभी भी दर्द है। हम यहां शहीदों और वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं। याद रखें कि आतंक का खतरा अभी भी बना हुआ है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें अपने देश की आंख और कान बनना होगा। अगर हम एकजुट हैं तो हम सुरक्षित हैं।’