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LIC का 10,000 करोड़ मुनाफा, प्रीमियम की कमाई और निवेश का पूरा हाल

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC यानी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) ने दूसरी तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं. सालाना आधार पर कंपनी के कंसॉलिडेटेड शुद्ध लाभ में करीब 30.7 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. पिछले साल समान अवधि में कंपनी का प्रॉफिट करीब 7,728 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 10,098 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.  साथ ही, कंपनी की नेट प्रीमियम आय भी बढ़ी है, Q2 में यह 1,26,930 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1,20,326 करोड़ रुपये थी, यानी आय में करीब 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में LIC का लाभ करीब 8 फीसदी कम रहा. अब आइए जानते हैं कि LIC का बिजनेस कैसे चलता है और उसे कमाई कैसे होती है.  LIC की स्थापना 1956 में हुई थी, जब सरकार ने 245 से ज्यादा प्राइवेट बीमा कंपनियों का विलय करके एक सरकारी बीमा संस्था बनाई. LIC का मुख्य काम लोगों से बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) लेकर बदले में इंश्योरेंस और निवेश पर रिटर्न देना है. LIC का बिजनेस तीन हिस्सों में बंटा है…  1. लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance): यह LIC का मुख्य बिजनेस है. लोग LIC से बीमा पॉलिसी खरीदते हैं. जैसे जीवन बीमा, एंडोमेंट प्लान, टर्म प्लान, पेंशन प्लान और चाइल्ड पॉलिसी. हर महीने या सालाना प्रीमियम देने पर LIC पॉलिसी मैच्योर होने पर या मृत्यु की स्थिति में बीमा राशि (Sum Assured) देती है. इसी प्रीमियम से LIC की सबसे बड़ी आय होती है.  2. निवेश (Investment Income): LIC अपने पास जमा करोड़ों ग्राहकों का पैसा सरकारी बॉन्ड, शेयर बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कंपनियों में निवेश करती है. इन निवेशों पर मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) LIC की दूसरी बड़ी कमाई है.  LIC का निवेश पोर्टफोलियो 45 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, ये रकम LIC ने देश की बड़ी कंपनियां जैसे Reliance, ITC, HDFC Bank, Infosys, TCS और SBI में निवेश किया है.  3. Loan और Service Income: LIC अपने पॉलिसीधारकों को पॉलिसी क अगेन्स लोन (Policy Loan) भी देती है. उस पर मिलने वाला ब्याज भी LIC की अतिरिक्त कमाई होती है. इसके अलावा LIC कुछ सेवाओं और फीस (जैसे एजेंट कमीशन या प्रोसेसिंग चार्ज) से भी आमदनी करती है.  LIC का प्रॉफिट कैसे बनता है? LIC हर साल अपनी आय में से खर्च (कर्मचारियों की सैलरी, क्लेम पेमेंट, एजेंट कमीशन) घटाकर जो बचता है, वही उसका मुनाफा (Profit) होता है. यह मुनाफा सरकार (जो LIC की सबसे बड़ी शेयरधारक है) और पॉलिसीधारकों में बांटा जाता है.  इस बीच अक्सर लोगों के मन में ये भ्रम होता है कि LIC शेयर बाजार में निवेश करता है, तो क्या वह हमारे बीमा के पैसे लगाता है या म्यूचुअल फंड के? आइए समझते हैं.  LIC के पास दो बड़े फंड्स होते हैं… पॉलिसीधारकों का फंड- यह वो पैसा होता है, जो ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के रूप में जमा करते हैं. LIC इस पैसे को सरकार द्वारा तय नियमों के तहत निवेश करता है. भारतीय बीमा नियामक (IRDAI) के अनुसार LIC को अपने निवेश का एक तय हिस्सा अलग-अलग जगहों पर लगाना होता है. नियम के मुताबिक सरकारी बॉन्ड में 50 फीसदी से अधिक, कॉरपोरेट बॉन्ड में 15–20 फीसदी, शेयर बाजार में करीब 20–25 फीसदी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल प्रोजेक्ट पर 5–10% निवेश किया जाता है. यानी LIC अपने निवेश का 20-25% हिस्सा ही शेयर बाजार में लगाता है, बाकी पैसों को सुरक्षित जगहों पर लगाया जाता है. LIC की एक अलग सहायक कंपनी  LIC Mutual Fund है, यह कंपनी म्यूचुअल फंड स्कीम चलाती है. (जैसे LIC MF Large Cap Fund, LIC MF Flexi Cap Fund वगैरह). लेकिन इसका पैसा निवेशकों (Mutual Fund investors) से आता है, न कि बीमा पॉलिसीधारकों से.  सवाल- क्या LIC बीमा का पैसा शेयर बाजार में लगाता है?     जवाब- हां, लगभग 20–25% पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है. सवाल- क्या म्यूचुअल फंड का पैसा LIC के पास जाता है? जवाब- नहीं, LIC Mutual Fund अलग संस्था है.    सवाल- क्या सरकार इस निवेश को रेगुलेट करती है?     जवाब- हां, IRDAI और वित्त मंत्रालय इसकी निगरानी करते हैं. 

यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, इंदौर स्टेशन पर QR कोड से ऑटो ड्राइवर की जानकारी उपलब्ध

इंदौर  रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) नई पहल शुरू करने जा रही है, जिसका नाम है 'हमारी सवारी, भरोसे वाली'। पुलिस ने ऐसे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का डिजिटल डेटा बनाया है जो रेलवे स्टेशन से चलते हैं। ऑटो पर क्यूआर कोड भी लगाया जा रहा है, जिसे स्कैन करते ही उसकी संपूर्ण पहचान मोबाइल पर आ जाएगी। पुलिस अधीक्षक (रेल) पद्मविलोचन शुक्ल के अनुसार सवारियों की सुरक्षा और सुविधा में ऑटो ड्राइवरों का अहम रोल है। बाहर से आने वाले यात्री कई बार ड्राइवरों की शिकायत करते हैं पर उनके संबंध में जानकारी नहीं रहती। यह सब देखते हुए पुलिस ने रेलवे स्टेशन परिसर से संचालित होने वाले ऑटो ड्राइवरों का डिजिटल डेटा तैयार करवाया है। पुलिस ने ड्राइवरों का सत्यापन एवं पंजीकरण कर उनके नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और परिवार व रिश्तेदारों की जानकारी आदि का डेटाबेस तैयार कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड में पंजीकृत ऑटो रिक्शा पर क्यूआर कोड स्टीकर लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही ड्राइवर की पहचान मोबाइल पर मिल जाएगी। एसपी के अनुसार यात्री यह जान सकेगा कि उसका ड्राइवर कौन है और वह किस ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा है। उसका सामान छूटने, विवाद होने, तय स्थान पर न छोड़ने पर पुलिस से मदद भी ले सकते हैं। एसपी ने बताया इस अभियान की शुरुआत 14 नवंबर से होगी। इससे चालकों को भी बेवजह के आरोपों से राहत मिलेगी। 'पटरी की पाठशाला' में पढ़ेंगे भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे जीआरपी पुलिस ने 'पटरी की पाठशाला' की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य रेल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, नैतिक शिक्षा एवं नशामुक्त जीवन के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय बच्चों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। 'पटरी की पाठशाला' अभियान में बच्चों के लिए रेल सुरक्षा कक्षाएं, कहानी, पोस्टर व खेल के माध्यम से शिक्षा देना, गुड टच-बैड टच की जानकारी देना शामिल किया है। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास भिक्षावृत्ति, व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व लावारिस घूमने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि वे देश के भविष्य निर्माण में सहभागी बन सकें। महिला एवं साइबर सुरक्षा सत्र में हेल्पलाइन नंबरों (139, 112, 1930) की जानकारी के साथ आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास पर भी चर्चा होगी।

विश्व प्रसिद्ध सांची में जुटेंगे विदेशी बौद्ध अनुयायी, दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आज से

रायसेन   अपने अनोखे बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध सांची में 29 और 30 नवंबर को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मेहमान और कलाकार शिरकत करेंगे. साल में एक बार होने वाले इस धार्मिक उत्सव में श्रीलंका, जापान, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई देशों के बौद्ध अनुयायी शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए हैं. इस वर्ष, श्रीलंका के हाई कमिश्नर के साथ ही वहां की विशेष नृत्य मंडली भी सांची में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेगी. विदेश भक्त अपने साथ पूजा के लिए विशेष सामग्रियां लेकर यहां पहुंचेंगे, जिससे महोत्सव की दिव्यता और बढ़ेगी. भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थि कलश के दर्शन इस महोत्सव की मुख्य वजह सांची स्तूप के पास स्थित चैत्यगिरि में सुरक्षित रखे भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र और महामोदग्लायन के पवित्र अस्थि कलश हैं. बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है, क्योंकि वर्ष में एक बार, दो दिन के लिए, सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन कलशों को रखा जाता है. महोत्सव के आखिरी दिन (रविवार) को इन अस्थि कलशों को मुख्य स्तूप की परिक्रमा के लिए शोभा यात्रा के साथ निकाला जाता है. इन देशों के अनुयायियों को किया गया आमंत्रित महाबोधि सोसाइटी के स्वामी विमल तिस्से थेरो ने बताया, '' जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम सहित कई देशों के मेहमानों को आमंत्रित किया जा चुका है. इस तरह से जब विश्व के कोने-कोने से बौद्ध अनुयाई यहां पर उपस्थित होंगे तो इस कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ेगी सब लोग मिलकर इस महोत्सव को मनाएंगे.'' सांची स्तूप का गौरवशाली इतिहास सांची की इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण सम्राट अशोक महान ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था. यह भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध स्मारकों में से एक है. बाद में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया और पहली शताब्दी ईसा पूर्व में यहां के चार भव्य तोरण द्वार (प्रवेश द्वार) बनाए गए, जिन पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से जुड़ी विस्तृत नक्काशी है. सांची का यह महान स्तूप प्रेम, शांति, विश्वास और साहस का प्रतीक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है. सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम बौद्ध धर्म के इस विशेष महत्व वाले आयोजन के लिए प्रशासन भी कमर कस रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे ने जानकारी देते हुए बताया की पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पुलिस इंतजाम किए गए हैं, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी शामिल है और आसामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखना शामिल है।जिससे की पर्यटको को आसुविधा न हो

11 नवम्बर 2025 का दैनिक राशिफल: मकर राशि पर पड़ेगा विशेष प्रभाव, अन्य राशियों के लिए जानें संकेत

मेष राशि- 11 नवंबर का दिन थोड़ा मिलाजुला रहेगा। सुबह से ही कामों में भागदौड़ रहेगी। ऑफिस में किसी बात को लेकर टेंशन हो सकती है, लेकिन दोपहर के बाद हालात बेहतर होंगे। गुस्से से बचें और किसी से बहस न करें। परिवार में माहौल सामान्य रहेगा। पैसों को लेकर सोच-समझकर कदम उठाएं। सेहत में थकान या सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। शाम को आराम करें और खुद को रिलैक्स रखें। वृषभ राशि- 11 नवंबर का दिन आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। कामकाज में सफलता मिलेगी और रुके हुए काम पूरे होंगे। कोई पुराना बकाया पैसा भी मिल सकता है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। प्रेम जीवन में मिठास बनी रहेगी। खर्चे थोड़े बढ़ सकते हैं, लेकिन उससे मन नहीं बिगड़ेगा। शाम को कोई शुभ समाचार मिल सकता है या किसी दोस्त से मुलाकात हो सकती है। मिथुन राशि- 11 नवंबर को आपको थोड़ा शांत रहना होगा। कुछ मामलों में उलझन या कन्फ्यूजन बन सकता है। किसी पर ज्यादा भरोसा करने से पहले सोचें। ऑफिस में देरी या काम का दबाव रहेगा। घर में माहौल थोड़ा तनाव भरा हो सकता है, इसलिए बोलचाल में सावधानी रखें। पैसे के मामले में सोच-समझकर निर्णय लें। शाम को परिवार या किसी करीबी के साथ वक्त बिताने से मन हल्का होगा। कर्क राशि- 11 नवंबर का दिन आपके लिए काफी शानदार रहेगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और कामों में तेजी आएगी। किसी नए काम की शुरुआत के लिए दिन शुभ है। घर-परिवार में शांति और प्यार बना रहेगा। किसी शुभ समाचार की संभावना भी है। सेहत में सुधार होगा और मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और दूसरों पर आपकी बातों का अच्छा असर पड़ेगा। सिंह राशि- 11 नवंबर को व्यस्तता ज्यादा रहेगी, लेकिन परिणाम अच्छे मिलेंगे। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और सोच की सराहना होगी। परिवार के किसी सदस्य को लेकर चिंता हो सकती है। पैसे का कोई अटका हुआ काम पूरा हो सकता है। सेहत ठीक रहेगी, बस ओवरवर्क से बचें। शाम को खुद के लिए थोड़ा वक्त निकालें, कोई पुराना शौक पूरा करने का मन बनेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वालों को 11 नवंबर को भाग्य का साथ मिलेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे और आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी करने वालों को सीनियर्स से तारीफ मिलेगी। व्यापारियों के लिए भी दिन फायदेमंद रहेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति रहेगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और लोग आपकी सलाह मानेंगे। तुला राशि- 11 नवंबर का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा और पुराने कामों में प्रगति होगी। कोई रुका हुआ प्रोजेक्ट दोबारा शुरू हो सकता है। घर में कोई छोटी खुशी मिल सकती है। नौकरी या बिजनेस में लाभ के संकेत हैं। बच्चों से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। सेहत बढ़िया रहेगी, बस नींद पूरी लें। वृश्चिक राशि- 11 नवंबर को मेहनत का पूरा फल मिलेगा। जो काम लंबे समय से अटके थे, उनमें सफलता मिलेगी। धन लाभ के योग हैं। परिवार में किसी खुशी का माहौल बनेगा। सेहत का थोड़ा ध्यान रखें। खानपान में परहेज करें। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है। शाम का समय काफी अच्छा रहेगा। धनु राशि- 11 नवंबर को आपका आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा। नए काम की शुरुआत करने का सही वक्त है। ऑफिस में आपकी बातों की अहमियत बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लव लाइफ में खुशी रहेगी, किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी। शाम का समय खुद को शांत रखने और परिवार के साथ बिताने के लिए अच्छा रहेगा। मकर राशि- 11 नवंबर का दिन थोड़ा भावनात्मक रहेगा। किसी पुरानी याद में मन अटका रह सकता है। कामकाज में सुधार के मौके हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई फैसला न लें। पैसों के मामले में ध्यान रखें। परिवार में प्यार और सहयोग मिलेगा। शाम को मन को शांति देने के लिए ध्यान या संगीत का सहारा लें। स्वास्थ्य में हल्की थकान या नींद की कमी रह सकती है। कुंभ राशि- 11 नवंबर को शुरुआत थोड़ी धीमी होगी लेकिन दोपहर तक सब ठीक हो जाएगा। कामकाज में सुधार दिखेगा और किसी पुराने संपर्क से फायदा मिल सकता है। पैसे के मामले में स्थिति मजबूत रहेगी। रिश्तों में मिठास बनी रहेगी। यात्रा का योग बन रहा है, लेकिन जल्दबाज़ी न करें। सेहत सामान्य रहेगी। शाम को किसी करीबी के साथ समय बिताना अच्छा लगेगा। मीन राशि- 11 नवंबर का दिन आपके लिए बहुत बढ़िया रहेगा। किस्मत आपके साथ है, इसलिए जो काम सोचेंगे वो पूरे होंगे। नौकरी या बिजनेस में तरक्की के संकेत हैं। परिवार में माहौल खुशियों से भरा रहेगा। प्रेम जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। सेहत भी साथ देगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा और दिन के अंत में सुकून महसूस करेंगे।

इंटरव्यू में बिजली कटौती के बीच जेलेंस्की ने दिखाया यथार्थ: पत्रकार को कहा – यही सच

कीव  रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल बीत गए हैं. इतने सालों से युद्ध कर रहे रूस और यूक्रेन में बहुत कुछ बदल गया है. रूस के कुछ हिस्सों में युद्ध का बुरा प्रभाव दिखता है तो यूक्रेन की राजधानी कीव तक में हाल ये है कि ऊर्जा सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं. इसकी एक बानगी तब देखने को मिली, जब वे मरीनस्की पैलेस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की के साथ ब्रिटिश अखबार द गार्जियन का इंटरव्यू चल रहा था. दरअसल ये इंटरव्यू उस वक्त चर्चा में आ गया जब बातचीत के दौरान दो बार बिजली चली गई. इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर जारी की गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बातचीत के बीच अचानक पूरा हॉल अंधेरे में डूब जाता है. पहली बार बिजली इंटरव्यू की शुरुआत में ही चली गई. इसके बाद कुछ सेकंड तक कमरे में हलचल रही, फिर बैकअप जनरेटर चालू होने के बाद रोशनी लौटी और बातचीत दोबारा शुरू हुई. बोलते-बोलते छा गया अंधेरा इंटरव्यू को जब फिर शुरू किया गया, तो कुछ देर बाद दूसरी बार भी लाइट गुल हो गई. इस बार बातचीत रुकने के बजाय बिना ट्रांसलेटर के ही जारी रही, जब तक कि बैकअप पावर दोबारा चालू नहीं हुआ. इस इंटरव्यू को पत्रकार ल्यूक हार्डिंग रिकॉर्ड कर रहे थे. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जेलेंस्की ने इस पूरे वाक्ये को बेहद सहजता से लिया और बिजली आने के बाद मुस्कुराते हुए कहा – ‘ये कोई आतंकी हमला नहीं है… ये हमारी जिंदगी की हकीकत है. कीव में और बाकी जगहों पर भी, बिजली का जाना अब आम बात है.’ ऊर्जा ढांचे को पहुंचा है नुकसान जेलेंस्की का यह बयान यूक्रेन की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां रूसी हमलों के कारण ऊर्जा ढांचे को बार-बार नुकसान पहुंचा है. राजधानी कीव समेत कई शहरों में बिजली आपूर्ति अक्सर बाधित रहती है और लोग जनरेटर या बैकअप सिस्टम पर निर्भर रहते हैं. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि ये पश्चिम को दिखाने की कोशिश है कि यूक्रेन किन हालात से जूझ रहा है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ यूक्रेन में स्थिति ऐसी है, यूक्रेन ने भी रूस के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जिसकी वजह से रूस के कई इलाके पूरी-पूरी रात अंधेरे में डूबे रहे. रूस वार्ता के लिए है तैयार  हालांकि इस बीच रूस की ओर से शांति को लेकर एक ऐसी पहल की गई है, जो एक बार फिर से रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी समझौते की ओर इशारा करती है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के जवाब में कहा है कि रूस युद्ध का अंत करेगा लेकिन जब वो अपने लक्ष्यों को पा लेगा. वो चाहता है कि ये राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से हो.

IPL में बड़ा धमाका: धोनी के संन्यास की चर्चा, संजू-जडेजा टीम बदल सकते हैं

 मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए मिनी ऑक्शन 15 दिसंबर को आयोजित किया जा सकता है. इस ऑक्शन से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच होने वाली संभावित ट्रेड डील की चर्चा जोरों पर है. रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन ट्रेड होकर सीएसके में शामिल हो सकते हैं. इसके बदले सीएसके से रवींद्र जडेजा और सैम करन रॉयल्स में जा सकते हैं. पांच बार की चैम्पियन चेन्नई सुपर किंग्स संजू सैमसन को अपना अगला कप्तान देख रही है, जो इस ट्रेड डील के पीछे की मुख्य वजह है. यह भी माना जा रहा है कि महेंद्र सिंह धोनी का ये आखिरी आईपीएल सीजन होगा. उसके बाद संजू सीएसके के विकेटकीपर की भी भूमिका संभालेंगे. पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ का मानना है कि चेन्नई सुपर किंग्स सिर्फ विकेटकीपर के तौर पर संजू सैमसन को नहीं ला रही, बल्कि टीम उन्हें भविष्य के कप्तान के रूप में देख रही है. उन्होंने कहा कि जिस तरह रवींद्र जडेजा को ट्रेड के जरिए राजस्थान रॉयल्स में भेजा जा सकता है, वह संकेत दे रहा है कि सीएसके संजू को कप्तानी सौंपने की तैयारी कर रही है. कैफ ने यहां तक कहा कि धोनी आईपीएल 2026 के बीच में ही संन्यास ले ले सकते हैं और संजू को तुरंत बागडोर सौंपी जा सकती है. यानी ऋतुराज गायकवाड़ से कप्तानी ली जा सकती है इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए मिनी ऑक्शन से पहले रवींद्र जडेजा और संजू सैमसन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. कहा जा रहा है कि राजस्थान रॉयल्स (RR) अपने कप्तान संजू को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के स्टार ऑलराउंडर्स जडेजा और सैम करन के बदले ट्रेड कर सकती है. हालांकि ये सिर्फ अभी अफवाह है और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है. खिलाड़ियों के ट्रेड के लिए विंडो आईपीएल 2025 की समाप्ति के एक महीने बाद ही खुल गई थी. आईपीएल के मिनी ऑक्शन से एक हफ्ते पहले तक यह विंडो ओपन रहेगी. फिर मिनी ऑक्शन के बाद यह विंडो दोबारा खोली जाएगी और आईपीएल 2026 की शुरुआत से एक महीने पहले बंद होगी. आईपीएल में ट्रेडिंग विंडो साल 2009 में शुरू हुई थी. हर ट्रेड के लिए आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी जरूरी होती है. आईपीएल में ट्रेड दो प्रकार के होते हैं. पहला है वन-वे ट्रेड, जिसमें एक खिलाड़ी टीम A से टीम B में सिर्फ पैसों के बदले जाता है. इस ट्रेड में टीम B जहां खिलाड़ी को खरीदती है, वहीं टीम A को पूरी रकम मिलती है. टीम A को कोई खिलाड़ी वापस नहीं मिलता. उदाहरण के लिए मुंबई इंडियंस (MI) ने हार्दिक पंड्या को 15 करोड़ रुपये में गुजरात टाइटन्स (GT) से अपनी टीम में लिया था. लेकिन गुजरात को मुंबई की ओर से कोई खिलाड़ी वापस नहीं मिला. धोनी बीच में ही टीम छोड़ देंगे: कैफ मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'दोनों (धोनी और जडेजा) 2008 से आईपीएल खेल रहे हैं. जब से जडेजा सीएसके में गए हैं, वो इस टीम से बने हुए हैं. अगर यह ट्रेड सफल रहा, तो यह धोनी का आखिरी सीजन होगा. यह भी संभावना है कि धोनी बीच में ही टीम छोड़ दें. अगर संजू टीम में शामिल हो जाते हैं, तो वह मैनेजमेंट और धोनी के साथ सहज हो जाएंगे. ऐसे में धोनी संजू को टीम की कमान संभालने के लिए कह सकते हैं. वो जडेजा को छोड़ रहे हैं, जो सालों से उनके लिए मैच विनर रहे हैं. लेकिन उन्हें एक भविष्य के कप्तान की जरूरत है.' मोहम्मद कैफ आगे कहते हैं, 'उन्होंने जडेजा को भी कप्तान बनाया था, लेकिन वह चीजों को मैनेज नहीं कर पाए. उन्हें नेतृत्व करना पसंद नहीं था.  बीच सीजन में उन्होंने कहा कि वह कप्तानी छोड़ रहे हैं. सभी खिलाड़ी आईपीएल में कप्तानी नहीं कर सकते. दीर्घकालिक योजना को ध्यान में रखते हुए धोनी जडेजा की जगह एक ऐसे खिलाड़ी को लाना चाहते हैं, जो कप्तानी संभाल सके.' महेंद्र सिंह धोनी की इच्छा चेन्नई में अपना आखिरी आईपीएल मैच खेलने की है. धोनी ने आईपीएल 2021 में ये बात कही थी. फिर धोनी ने 2022, 2023, 2024, 2025 सीजन में भी भाग लिया. अब वो अगले सीजन की तैयारी में जुटने वाले हैं. सामान्य स्थितियों में सीएसके कभी जडेजा को नहीं छोड़ती. लेकिन जडेजा भी अब करियर के आखिरी चरण में पहुंच रहे हैं. सीएसके को अब अगले 5-6 सालों के लिए टीम तैयार करनी है. दूसरा है टू-वे ट्रेड, जिसमें फ्रेंचाइजी टीम्स आपस में खिलाड़ी बदलती हैं. अगर दोनों खिलाड़ियों की कीमत अलग-अलग है, तो रकम में जितना अंतर होता है, उतनी रकम एक टीम दूसरी टीम को देती है. यानी खिलाड़ियों की अदला-बदली तो होती ही है, साथ ही कैश एडजस्टमेंट भी होता है. क्या खिलाड़ी की सहमति जरूरी है? किसी भी खिलाड़ी को उसकी मर्जी के बिना ट्रेड नहीं किया जा सकता. इसके लिए खिलाड़ी की लिखित सहमति लेना अनिवार्य है. उदाहरण के लिए हार्दिक पंड्या ने खुद मुंबई इंडियंस में लौटने की इच्छा जताई थी, उसके बाद ही ट्रेड की प्रक्रिया शुरू हुई थी. अगर फ्रेंचाइजी टीम खिलाड़ी को छोड़ना नहीं चाहती, तो भी ट्रेड नहीं हो सकता. जडेजा को क्यों बैन किया गया था? साल 2010 में रवींद्र जडेजा ने राजस्थान रॉयल्स के साथ नया कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया और मुंबई इंडियंस से सीधे बातचीत शुरू कर दी थी. यह आईपीएल में ट्रेड नियमों का उल्लंघन था, इसलिए उन्हें 1 सीजन के लिए सस्पेंड किया गया था. यानी खिलाड़ी तभी ट्रेड के लिए दूसरी टीम से बातचीत कर सकता है, जब उसकी टीम तैयार हो. ट्रांसफर फीस क्या होती है? ट्रांसफर फीस वह अतिरिक्त रकम है, जो एक फ्रेंचाइजी टीम किसी खिलाड़ी को खरीदने के दौरान दूसरी फ्रेंचाइजी टीम को देती है. यह प्लेयर प्राइस से अलग होती है. यह राशि ऑक्शन पर्स पर असर नहीं डालती. यह दोनों टीमों की आपसी सहमति से तय होती है. इसकी जानकारी सिर्फ आईपीएल और संबंधित फ्रेंचाइजी टीम्स को रहती है. खिलाड़ी को ट्रांसफर फीस में हिस्सा मिलता है? खिलाड़ी को ट्रांसफर फीस का 50 प्रतिशत तक मिल सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती है. यह खिलाड़ी और टीम के … Read more

गोरखपुर AIIMS में अद्भुत सफलता, बिना एनेस्थेसिया मरीज की हड्डी हुई ठीक

 गोरखपुर      क्या आप यकीन करेंगे कि किसी टूटी हड्डी की सर्जरी बिना बेहोश किए हो सकती है? एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने यही करिश्मा कर दिखाया है.  जूनियर रेजिडेंट डॉ. नीरज ने नर्व ब्लॉक तकनीक का इस्तेमाल कर एक मोटे मरीज की सर्जरी की, जबकि मरीज पूरी प्रक्रिया अपनी आंखों से देखता रहा. यह सफलता चिकित्सा जगत में नई उम्मीद लाई है.  सर्जरी के दौरान मरीज सब कुछ देखता रहा आमतौर पर टूटी हड्डी की सर्जरी के लिए मरीज को पूरी तरह बेहोश (General Anesthesia) किया जाता है. लेकिन डॉ. नीरज के शोध का विषय था कि सिर्फ नर्व ब्लॉक तकनीक का उपयोग करके हंसली के फ्रैक्चर की सर्जरी कैसे की जा सकती है. इस नई तकनीक में, डॉक्टरों ने केवल उस हिस्से की नसों को अस्थायी रूप से सुन्न किया जहां सर्जरी होनी थी. मरीज पूरी सर्जरी के दौरान जागा रहा, लेकिन उसे किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं हुआ.  सुरक्षित, सस्ता और तेज रिकवरी एम्स गोरखपुर की यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य एनेस्थीसिया देने पर अक्सर मोटे या गंभीर रूप से बीमार मरीजों में सांस या हृदय संबंधी जटिलताएं आ जाती हैं. यह नई नर्व ब्लॉक तकनीक इन समस्याओं से बचाती है. एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि यह तरीका सुरक्षित, सस्ता और तेज रिकवरी देने वाला है, और गंभीर मरीजों के लिए भी लक्षित एनेस्थीसिया संभव है.  राष्ट्रीय मंच पर मिला पुरस्कार डॉ. नीरज को उनकी इस उपलब्धि के लिए बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन एसटीएसीसी में पोस्टर प्रस्तुति श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिला है.  एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) ने इसे संस्थान के लिए गौरव बताया. यह सफलता न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि आम मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण है क्योंकि अब सर्जरी में "सुरक्षित जागरूक उपचार" संभव है.

नक्सली लीडर हिड़मा के गांव में डिप्टी सीएम का दौरा, ग्रामीणों से संवाद कर जताई विकास की प्रतिबद्धता

बीजापुर प्रदेश के गृहमंत्री व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इन दिनों बस्तर संभाग के दौरे पर हैं। वे संभाग के सभी जिलों का दौरे कर नक्सल उन्मूलन विषयों पर पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठकें कर फीडबैक ले रहे हैं। उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा रविवार को दो दिवसीय दौरे पर बीजापुर पहुंचे। सोमवार को बीजापुर कलेक्टर सभाकक्ष में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। साथ ही डिप्टी सीएम चॉपर से बीजापुर व सुकमा जिले के बॉर्डर व कुख्यात नक्सली लीडर हिड़मा के गांव पूर्ववर्ती पहुंचे और ग्रामीणों से सीधी बात की। इस दौरान डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। डिप्टी सीएम ने कहा, बस्तर संभाग को नक्सल मुक्त बनाना है और देश में सर्वोच्च स्थान की ओर ले जाना है। इसके लिए हम सबको, समाज को आगे आकर कार्य करना है। इस दौरान बस्तर कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर, एसपी उपस्थित रहे।

निकाय चुनाव नियमों में राहत: दो से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशियों को भी मौका

 जयपुर  राजस्थान सरकार अब पंचायत, नगरपालिका और नगर निकाय चुनावों में दो बच्चों की शर्त खत्म करने जा रही है. 1994 में लागू किए गए इस कानून के तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं थी. अब सरकार इस नियम को हटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. सूत्रों के अनुसार, आरएसएस के दबाव के बाद सरकार ने इस कानून पर पुनर्विचार शुरू किया है. विभाग ने अध्यादेश का मसौदा तैयार कर लिया है और उसे कैबिनेट के पास भेजने की तैयारी चल रही है. संभावना है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार इसे मंजूरी के लिए पेश करेगी. नियम हटाने की दिशा में सरकार ने बढ़ाया कदम  शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने संकेत दिए हैं कि सरकार को इस नियम को लेकर कई ज्ञापन मिले हैं. उन्होंने कहा कि जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है, तो सिर्फ स्थानीय चुनावों में यह भेदभाव क्यों हो. अगर यह शर्त हटा दी जाती है, तो ग्रामीण इलाकों की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. हजारों लोग जो अब तक दो से अधिक बच्चों के कारण चुनाव नहीं लड़ पाते थे, वे अब उम्मीदवार बन सकेंगे. सरकार ने कानून पर पुनर्विचार शुरू किया इस नियम को 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया था. अब तीन दशक बाद सरकार इसे खत्म करने की तैयारी में है.

बनते-बनते बदली ओवरब्रिज की दिशा, SDM ने ब्रिज कॉरपोरेशन से मांगी रिपोर्ट

सीहोर सीहोर शहर में पुराने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास रेलवे गेट क्रमांक-104 पर बन रहा ओवरब्रिज अब विवादों में है। जब इस अधूरे ब्रिज की तस्वीर ड्रोन कैमरे से ली गई, तो यह भोपाल की तरह 90 डिग्री के तीखे मोड़ में नजर आया। दृश्य देखकर स्थानीय नागरिकों में रोष फैल गया। उनका कहना है कि ब्रिज की डिजाइन में बदलाव कर मनमानी की गई है, जिससे अब दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है। 28 करोड़ की लागत, पर अधूरी योजना जानकारी के अनुसार यह ओवरब्रिज 28 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। इसकी लंबाई 700 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। इसके लिए 24 पिलर तैयार हो रहे हैं। दस मीटर ट्रैक के ऊपर 7.30 मीटर ऊंचाई तय की गई है। निर्माण शुरू होने के साथ ही तकनीकी खामियां उजागर होने लगीं। रहवासियों का कहना है कि अधिकारियों ने सर्वेक्षण किए बिना ही कार्य शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप अब ब्रिज की दिशा बदलनी पड़ी, जिससे यह 90 डिग्री एंगल का हो गया। दोनों तरफ एप्रोच रोड न बनने से गुस्सा यह ब्रिज शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर बन रहा है, जहां रोज हजारों वाहन और स्कूली बच्चे गुजरते हैं। इसके बावजूद दोनों तरफ एप्रोच रोड नहीं बनाई जा रही। इस कारण लोग असुरक्षित रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों घनश्याम गुप्ता, मनोज गुजराती का कहना है कि हम विकास के खिलाफ नहीं, गलत डिजाइन के खिलाफ हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे लोकायुक्त, मानव अधिकार आयोग और आखिरकार हाई कोर्ट तक जाएंगे। डिजाइन में गंभीर खामियां, जिम्मेदारी तय नहीं ब्रिज के डिजाइन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कई इंजीनियरिंग गलतियां हैं। जहां ब्रिज उतरता है, वह भूमि निजी स्वामित्व की है। इस गलती के कारण मजबूरन निर्माण एजेंसी को ब्रिज को मोड़ना पड़ा और सिर्फ एक ओर सर्विस रोड दी गई। यही कारण है कि अब यह ब्रिज प्रदेश का शायद पहला ऐसा लहराता ओवरब्रिज बन गया है, जो सुरक्षा की बजाय जोखिम का प्रतीक बन गया है। स्थानीय विरोध तेज, प्रशासन हरकत में जैसे-जैसे विरोध बढ़ा, वैसे-वैसे प्रशासन भी हरकत में आया। सीहोर एसडीएम तन्मय वर्मा ने बताया कि ब्रिज कारपोरेशन के ईई ए.आर. मोरे को जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनहित सर्वोपरि है, जो भी त्रुटि मिलेगी, उसे सुधारा जाएगा। वहीं नागरिकों का कहना है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। लोगों में रोष स्थानीय कांग्रेस नेताओं और रहवासियों ने कहा कि यह ब्रिज विकास की बजाय प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया है। जिस शहर से होकर सीएम का गृह जिला मार्ग निकलता है, वहां ऐसा अधूरा और खतरनाक ब्रिज बनना शर्मनाक है। लोगों का कहना है कि सीहोर में विकास की रफ्तार नहीं, दुर्घटनाओं की तैयारी चल रही है। अब हर आंख इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद क्या यह 90 डिग्री का ब्रिज सीधा होगा या जनता का विरोध और बढ़ेगा।