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बच्चों के खेल के मैदान में होगा पानी की सुविधा, चिल्ड्रन पार्क में ट्यूबवेल का नींव पत्थर रखा गया

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगंवत मान की सरकार गांवों व शहरी इलाके में साफ पीने के पानी की सप्लाई को यकीनी बना रही है। इसी के चलते विधायक नीना मित्तल ने चिल्ड्रन पार्क में 36.70 लाख रूपये की लागत से नये टयूबवेल लगाने के कार्य का नींव पत्थर आजरखा है। इस मौके पर विधायक ने कहा कि पीने वाले पानी की बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखते हुये यह योजना शुरू की गई है, इलाके के कई वार्डों में पानी की समस्या को ध्यान में रखते हुये मुख्य मंत्री के निर्देशों पर लोगों को जरूरी सुविधायें दी जा रही हैं। पानी के सही इस्तेमाल की जरूरत है। वहीं वहीं हमें धरती के नीचे के पानी को बचाने के लिये लोगों को जागरूक करने की भी जरूरत है। इस मौके पर रितेश बंसल संगठन इंचार्ज राजपुरा, रमेश पहुजा प्रधान व्यापार मंडल, शाम सुदर वधवा, सचिन मित्तल, जेई गगनदीप सिंह, पार्षद कृष्ण अग्रवाल, बिक्रम सिंह कंडेवाला, गुरध्यान सिंह जोगा, दीपक शर्मा, सुमित बख्शी, रतनेश जिंदल, सरबजोत सिंह, सरपंच अमन सैनी, नितिन पहुजा सहित अन्य पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे

H-1B वीजा विवाद: अमेरिका में 40,000 से ज्यादा नौकरीछूटने वाले कर्मचारियों की चिंता

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एच-1बी वीजा के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क नए आवेदकों के लिए है और उन्हें इस शुल्क का एकमुश्त भुगतान करना होगा। वाइट हाउस ने अपने इस फैसले की वजह बताते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों ने ही बड़े पैमाने पर अमेरिका के लोगों की छंटनी कर दी और उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को दे दी। वाइट हाउस ने कहा कि एक कंपनी को 5189 एच-1बी वीजा मिल गए तो उसने 16000 अमेरिकियों की छंटनी कर दी। एक अन्य कंपनी को 1698 एच-1बी वीजा मिले तो 2400 लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया। वाइट हाउस ने कहा कि एक अन्य कंपनी 2022 से 27000 अमेरिकियों की नौकरी छीन चुकी है। चौथी कंपनी ने 1000 लोगों को नौकरी से निकाला और उनकी जगह विदेशियों को भर्ती कर लिया। वाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंपनियां एच-1बी वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग कर रही थीं ऐसे में इसपर लगाम लगाना जरूरी है जिससे देश की सुरक्षा को खतरा ना पैदा हो। वहीं पुराने वीजा धारकों पर शुल्क लागू ना होना अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की बात है जो इस नए नियम से प्रभावित होने को लेकर चिंतित हैं, इनमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं । अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का नया एच-1बी वीज़ा शुल्क केवल नये आवेदकों पर लागू होगा। ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर की प्रभावी घोषणातिथि से पहले जमा किया गया एच1 बी वीजा आवेदन इससे प्रभावित नहीं होगा। इसके अलावा वर्तमान में अमेरिका से बाहर रहने वाले वीज़ा धारकों को भी देश में दोबारा प्रवेश के लिए शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। वाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बताया, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने का वादा किया था और यह समझदारी भरा कदम उसी का परिणाम है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उन अमेरिकी व्यवसायों को भी निश्चितता प्रदान करता है जो वास्तव में हमारे महान देश में बेहद कुशल कामगारों को लाना चाहते हैं, लेकिन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण उन्हें आगे नहीं आने दिया जा रहा है।’’ यूएससीआईएस निदेशक जोसेफ एडलो ने एक ज्ञापन में कहा कि ट्रंप की ओर से शुक्रवार को जारी की गई घोषणा केवल उन पर लागू होगी जो अब आवेदन करेंगे। यह घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो "उद्घोषणा की प्रभावी तिथि से पहले दायर किए गए आवेदनों के लाभार्थी हैं, वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों के लाभार्थी हैं, या जिनके पास वैध रूप से जारी एच-1बी गैर-आप्रवासी वीज़ा हैं।’’  

हाईवे पर तनाव: पीआरटीसी कर्मियों और पुलिस में झड़प, दो पुलिसकर्मी निलंबित

चंडीगढ़  जब पीआरटीसी कर्मियों ने बिना परमिट वाली एक निजी बस के मालिकों को सवारियां उठाने से रोकने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। मामला तब और बढ़ गया जब निजी बस चालकों के इशारे पर दो पुलिसकर्मियों ने पीआरटीसी चालक को जबरन गाड़ी में बिठाकर थाने ले जाने की कोशिश की। आक्रोशित पीआरटीसी चालकों ने शहर के चौराहों पर अपनी बसें खड़ी करके यातायात अवरुद्ध कर दिया। मामले की जांच के बाद, डीएसपी पातड़ां इंद्रपाल सिंह चौहान ने पीआरटीसी चालक की पिटाई करने वाले दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच की सिफारिश की है। पीआरटीसी इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह ने बताया कि पीआरटीसी जीएम ने उन्हें फोन पर बताया कि पातड़ां में विभागीय आरोपियों और निजी बस चालक के बीच विवाद हो गया है, जिसके कारण सभी पीआरटीसी बसों का संचालन रोक दिया गया है। इंस्पेक्टर ने बताया कि खरकां रूट पर चलने वाली एक निजी बस का परमिट रद्द होने के बाद वे पातड़ां स्थित पुराने बस अड्डे से सवारियां उठा रहे थे। पीआरटीसी बस चालक यादविंदर सिंह ने बस रोकी तो दोनों पक्षों में बहस हो गई। निजी बस मालिक के बुलाने पर आए दो पुलिसकर्मियों ने पीआरटीसी बस चालक की गर्दन पकड़ ली और उसकी पिटाई शुरू कर दी। विरोध में पीआरटीसी चालकों ने पातड़ां चौराहों पर अपनी बसें खड़ी करके सड़क जाम कर दी।  जब डीएसपी पातड़ां के कार्यालय में मामले का निपटारा हो रहा था, तभी चालक से बदसलूकी करने वाला पुलिस अधिकारी फिर से चालक को गालियां देने लगा, जिससे समझौता वार्ता टूट गई। पीआरटीसी कर्मचारी यूनियनों के नेताओं ने बताया कि विरोध स्वरूप पटियाला में बसें रोक दी गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर मामला नहीं सुलझा तो संगरूर और अन्य डिपो की बसें भी रोक दी जाएंगी। दूसरी ओर, निजी बस के मालिक नरिंदर सिंह ने स्वीकार किया कि बस बिना परमिट के चलाई जा रही थी। पठान के डीएसपी इंद्रपाल सिंह चौहान ने बताया कि पीआरटीसी चालक के साथ मारपीट करने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों, गुरदीप सिंह और करणदीप सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

शादी में नुकसान पहुंचाने पर पत्नी ने पति की प्रेमिका से मांगा हर्जाना

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि अगर किसी तीसरे व्यक्ति ने जानबूझकर हस्तक्षेप करके शादी को नुकसान पहुंचाया है, तो जीवनसाथी उस प्रेमी/प्रेमिका पर हर्जाने के लिए मुकदमा कर सकता है। यह फैसला तब आया जब कोर्ट ने एक मामले में समन जारी किया, जिसमें एक पत्नी ने अपने पति की कथित प्रेमिका से 'एलियनएशन ऑफ अफेक्शन' (Alienation of Affection) के लिए 4 करोड़ का हर्जाना मांगा है। 'एलियनएशन ऑफ अफेक्शन' (AoA) एक 'टॉर्ट' (Tort) है, जिसका अर्थ है 'सिविल गलती' या 'दीवानी दोष'। यह कानून पुरानी एंग्लो-अमेरिकन कॉमन लॉ व्यवस्था से आया है। यह किसी जीवनसाथी को उस तीसरे पक्ष से पैसों का मुआवज़ा मांगने की अनुमति देता है, जिस पर शादी तोड़ने या प्यार और स्नेह को खत्म करने का आरोप है। इन 'हार्ट बाम' टॉर्ट्स (विवाहित जीवन को भावनात्मक नुकसान पहुंचाने वाले कानूनी दावे) को भारत के किसी भी कानून में संहिताबद्ध (Codified) नहीं किया गया है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम समेत भारत के वैवाहिक कानून, परिवार अदालत (Family Court) में किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ कोई कानूनी उपचार (Remedy) नहीं देते हैं। इसलिए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, गलत हस्तक्षेप से हुए नुकसान के लिए सिविल कोर्ट में मुआवजे का दावा सुना जा सकता है। यह दंपति 2012 में शादी के बंधन में बंधे थे और 2018 में उनके जुड़वां बच्चे हुए। आरोपी प्रेमिका पति की कंपनी में विश्लेषक (Analyst) के रूप में शामिल हुई और यह जानने के बावजूद कि वह शादीशुदा था, उसके साथ घनिष्ठ संबंध बना लिया। 2023 में पति ने क्रूरता (Cruelty) के आधार पर तलाक के लिए अर्जी दी, जिसके बाद पत्नी ने इसी साल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रेमिका से हर्जाना (Damages) मांगा। पत्नी का पक्ष रखते हुए वकील मालविका राजकोटिया ने कहा कि पत्नी ने तर्क दिया कि उसे अपने पति के प्यार और साथ (Affection and Companionship) का अधिकार था, जिसे जानबूझकर उससे छीन लिया गया। पति के वकील प्रभजीत जौहर ने कहा कि इस मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि व्यभिचार (Adultery) का मामला पहले से ही फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है और सिविल कोर्ट का यह केस तलाक की कार्यवाही के खिलाफ केवल एक 'जवाबी हमला' है। प्रेमिका पक्ष के वकील केसी जैन ने मुकदमे की वैधता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि यह केस एक ही मुद्दे पर समांतर कार्यवाही शुरू करने जैसा है। उन्होंने आगे यह भी तर्क दिया कि वह महिला (पत्नी) उनसे हर्जाना नहीं मांग सकती, क्योंकि पुरुष के साथ बातचीत न करने या संबंध न बनाने की उन पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी। कोर्ट ने इस बात से असहमति जताई और कहा कि तलाक की कार्यवाही चल रही होने के बावजूद भी हर्जाने (Damages) के लिए सिविल दावा करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस कौरव ने कहा, "न तो हिंदू विवाह अधिनियम और न ही कोई अन्य वैवाहिक कानून किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ कोई कानूनी उपचार (Remedy) प्रदान करता है।" उन्होंने आगे कहा, "कानूनी रोक (Statutory Bar) न होने की स्थिति में, एक जीवनसाथी तीसरे पक्ष के कथित हस्तक्षेप के लिए सिविल कोर्ट में हर्जाना मांग सकता है।" कोर्ट ने कहा, "यहां, याचिका में एक तीसरे पक्ष की सिविल गलती (Third-Party Tort) का दावा किया गया है और उस गलती के लिए आर्थिक मुआवजा मांगा गया है। ऐसा दावा पूरी तरह से सामान्य सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि केवल फैमिली कोर्ट के। समांतर वैवाहिक कार्यवाही (तलाक का केस) चल रही हो, तब भी यह अलग से दायर किया गया हर्जाने का सिविल मुकदमा रुकावट नहीं बनेगा।" फैसले में यह भी कहा गया कि निजी स्वतंत्रता, जिसमें रिश्ते को समाप्त करना या बदलना शामिल है, अपराध नहीं है, लेकिन इसके नागरिक परिणाम (Civil Consequences) हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा, "जब एक जीवनसाथी शादी टूटने से कानूनी नुकसान का दावा करता है, तो कानून यह मानता है कि उस नुकसान को पहुँचाने वालों से मुआवज़ा मांगा जा सकता है।" अमेरिकी न्यायविद वेस्ली न्यूकॉम्ब होहफेल्ड का हवाला देते हुए कोर्ट ने आगे कहा,"अगर किसी जीवनसाथी का वैवाहिक साथ, अंतरंगता और साहचर्य (Marital Consortium, Intimacy, and Companionship) में एक संरक्षित हित है, तो तीसरे पक्ष का यह कर्तव्य है कि वह जानबूझकर और गलत तरीके से हस्तक्षेप न करे। हालांकि, इसी समय, जीवनसाथी को व्यक्तिगत चुनाव करने की स्वतंत्रता भी बरकरार रहती है। जहां जीवनसाथी का आचरण पूरी तरह से स्वैच्छिक और गैर-मजबूर होता है (यानी, वह अपनी मर्जी से संबंध बनाता है), वहां उसकी यह स्वतंत्रता तीसरे पक्ष की देनदारी (Liability) को खत्म कर देगी।"  

सरकार ने बढ़ाई चावल डिलीवरी की अवधि और बोनस राशि, लाभ उठा पाएंगे सभी पात्र लोग

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राइस मिलर्स के हित में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने चावल की डिलीवरी अवधि और बोनस राशि की अवधि को 15 मार्च 2025 से बढ़ाकर 30 जून 2025 करने का फैसला किया है। इस निर्णय से प्रदेश की लगभग 1000 मिलों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, मिलर्स को बोनस राशि के अतिरिक्त लगभग 50 करोड़ रुपये के होल्डिंग चार्ज में भी छूट का लाभ प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को यहां आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन द्वारा राज्य सरकार को यह अवगत करवाया गया कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा चावल की डिलीवरी लगभग 45 दिन देर से शुरू की गई, जिसके कारण मिलर्स अपना कार्य निर्धारित अवधि में पूरा नहीं कर पाए। एसोसिएशन की मांग को उचित समझते हुए सरकार ने राइस मिलर्स को दिए जाने वाली बोनस की राशि की अवधि को 30 जून करने का निर्णय किया है। इस अवसर पर सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय उपस्थित रहे। कल से शुरू होगी खरीफ फसलों की खरीद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि एक अक्तूबर के बजाय अब 22 सितंबर से राज्य में खरीफ फसलों की सरकारी खरीद शुरू की जाएगी। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को एमएसपी के बारे में गुमराह करने का काम किया, जबकि हमारी सरकार ने लगातार फसलों पर एमएसपी को बढ़ाया है। उन्होंने कहा, वर्ष 2014 में धान कॉमन का एमएसपी 1360 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि आज 2369 रुपये प्रति क्विंटल है। वर्ष 2014 में धान ग्रेड-ए का एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि आज 2389 रुपये है।

ड्रामे के बीच महामुक़ाबला: भारत-पाकिस्तान के बीच रोमांचक भिड़ंत आज

दुबई  भारत और पाकिस्तान की टीमें एशिया कप 2025 में एक सप्ताह के अंदर लगातार दूसरी बार भिड़ने के लिए तैयार हैं। भारत ने लीग स्टेज में अपने सभी मुकाबले जीते थे, जबकि पाकिस्तान ने एक मुकाबला भारत के खिलाफ गंवाया था। पिछले रविवार को खेला गया मुकाबला काफी चर्चा में रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने मैच खत्म होने के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया, जिसके बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा नहीं ले रहा है। वहीं उसके खिलाड़ी काफी दबाव में है, उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए बोर्ड ने मोटिवेशनल स्पीकर बुलाया था। एंडी पाइक्रॉफ्ट एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के मुकाबले के लिए मैच रैफरी होंगे। हेड टू हेड मामले में भारत काफी आगे इंडिया और पाकिस्तान के बीच अभी तक 14 टी20 खेले गए हैं जिसमें से 11 मैच भारत ने जीतकर अपना दबदबा बनाया हुआ है। वहीं पाकिस्तान ने 3 मैच जीते हैं। पाकिस्तान स्क्वॉड सईम अयूब, साहिबजादा फरहान, मोहम्मद हारिस (विकेटकीपर), फखर जमान, सलमान आगा (कप्तान), खुशदिल शाह, हसन नवाज, मोहम्मद नवाज, शाहीन अफरीदी, हारिस रऊफ, अबरार अहमद, हुसैन तलत, फहीम अशरफ, हसन अली, मोहम्मद वसीम जूनियर, सलमान मिर्जा, सुफियान मुकीम टीम इंडिया में दो बदलाव होंगे पाकिस्तान के मैच में भारतीय प्लेइंग XI में दो बदलाव तय है। ओमान के खिलाफ जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती को आराम दिया गया था। उनकी जगह अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा आए थे। भारतीय स्क्वॉड अभिषेक शर्मा, शुबमन गिल, संजू सैमसन (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, जसप्रित बुमरा, जितेश शर्मा, रिंकू सिंह, वरुण चक्रवर्ती

चुनावी साख पर सवाल: मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े का नया खुलासा

नागौद लोकतंत्र के मंदिर को शर्मसार करने वाला मामला मापला जिला के नागौद विकासखंड से सामने आया है। वार्ड क्रमांक 6, गढ़ी टोला में पूर्व पार्षद और विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश पांडे उर्फ फूलन महाराज के मकान क्रमांक 122 में कुल 89 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। इनमें अलग-अलग जातियों और परिवारों के लोग शामिल हैं। इस मामले ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। कुछ ऐसे रची साजिश स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला महज लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है। ओमप्रकाश पांडे ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर बीएलओ से मिलीभगत कर यह फर्जीवाड़ा कराया। रजिस्टर में मकान संख्या का क्रम भी अव्यवस्थित रखा गया, ताकि यह खेल आसानी से पकड़ में न आए।   एक ही मकान में दर्ज 89 मतदाता विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही मकान में इतनी बड़ी संख्या में मतदाता दर्ज करने से किसी भी उम्मीदवार को कृत्रिम बढ़त दिलाई जा सकती है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की उदासीनता और संभावित मिलीभगत पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है। सूची में दर्ज नामों में शंकर प्रसाद, चुरेमा कुमार, प्रिया पत्नी सुरेगा कुमार, संदीप पिला, विमला पति मयूरा प्रसाद, आजाद बुनकर, अमर चौरसिया, ज्योति कुमार, दीपक शर्मा, रश्मि, रोशनी और अन्य शामिल हैं।   चुनावी साख पर सवाल लोगों का सवाल है कि क्या इतने विविध लोग व एक साथ इतने कमरों वाले मकान में रह सकते हैं? राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के मन में यह धारणा मजबूत होगी कि लोकतंत्र अब केवल सत्ता का खेल बन गया है। क्षेत्रीय लोग और सामाजिक संगठन प्रशासन और निर्वाचन आयोग से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।  

देर या नीयत? मंदसौर में दो लाख रुपये सिंचाई पर खर्च, ट्रैक्टर विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

मंदसौर गरोठ वन परिक्षेत्र में अफसरों-कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार का नया उदाहरण पेश किया है। हनुमंतिया बीट में पौधे लगाने के बाद उनकी सिंचाई पर दो लाख चार हजार 48 रुपये खर्च किए गए। लगाए गए बिलों के मुताबिक, इनमें 1 लाख 53 हजार 600 रुपये का भुगतान टैंकर के लिए किया गया, वहीं सिंचाई की मजदूरी का भुगतान 50,448 रुपये रहा। खास बात यह है कि बिल में जो नंबर ट्रैक्टर के बताए गए, वह परिवहन विभाग में बाइक, मोपेड व स्कूटर के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि एक नंबर का तो परिवहन विभाग की वेबसाइट पर भी कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा। बता दें मंदसौर वन मंडल के अंतर्गत गरोठ वन परिक्षेत्र की हनुमंतिया बीट में 95.382 हेक्टेयर वन भूमि है। आरोप है कि यहां पदस्थ रहे वनरक्षक, परिक्षेत्र सहायक और वन परिक्षेत्र अधिकारी की मिलीभगत के चलते अभी तक वन क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है, जबकि कागजों में बिल भी लग रहे हैं। शिकायतकर्ता बालू सिंह निवासी किलगारी ने सूचना के अधिकार के तहत 15 फरवरी 2019 से 22 अप्रैल 2019 के बीच लगाए गए बिलों की पड़ताल की, तो धांधली सामने आई। 8 अप्रैल 2023 को शिकायत के दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत का निराकरण नहीं किया गया।

सपनों की नौकरी का मौका: MP पुलिस भर्ती सात साल बाद, जल्द देखें कैसे करें आवेदन

भोपाल पुलिस में उप निरीक्षक या सब इंस्पेक्टर (एसआई) और सूबेदार के पद पर चयन की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) इन पदों के लिए अगले सप्ताह विज्ञापन जारी करने जा रहा है। सात वर्ष बाद इन पदों पर भर्ती होने जा रही है। इसके पहले वर्ष 2018 में इन पदों पर भर्ती हुई थी। सात साल तक भर्ती नहीं होने पर एसआई बनने का सपना देख रहे कई युवा अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं। परीक्षा में पहली बार बड़ा बदलाव किया गया है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंकों को जोड़कर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।   इसके भर्ती नियम इसी वर्ष जनवरी में शासन ने जारी कर दिए थे। सरकार ने भर्ती नियम तैयार करने में लगभग एक वर्ष लगा दिए, नहीं तो इन पदों पर वर्ष 2024 में ही भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती थी। नियमों में शासन ने प्रारंभिक और लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम भी जारी किया है। चुनौतियों से जुड़े विषयों को दी गई प्राथमिकता पुलिस के सामने नई चुनौतियों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरण के तौर पर प्रारंभिक और लिखित परीक्षा में साइबर अपराध, संचार तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियां, इंटरनेट मीडिया, रोबोटिक्स, एआई, जीआइएस, जीपीएस आदि के बारे में भी प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अतिरिक्त लोकतंत्र और पुलिस, गरीबी और भूख, संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। ऐसी होगी परीक्षा योजना सबसे पहले 100 अंकों की प्रारंभिक परीक्षा होगी जो क्वालिफाइंग होगी। इसमें कुल पदों के 10 प्रतिशत अभ्यर्थियों को चयनित किया जाएगा। इसके बाद 600 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रावीण्य सूची में आने वालों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा जो 100 अंकों की होगी। आखिर में 50 अंकों का साक्षात्कार होगा। इस तरह कुल 750 अंकों के प्राप्तांक के आधार पर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।

कम खेती, ज्यादा रासायनिक खाद: मध्यप्रदेश में 4.29 लाख टन बढ़ा उपयोग

भोपाल मध्य प्रदेश में खेती का रकबा हर साल घटने के बावजूद रासायनिक खाद की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जैविक खेती के मामले में देश में पहले स्थान पर होने के बाद भी किसानों की रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि जिस तरह से अधिक उत्पादन के लिए मृदा की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह खतरनाक है। रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से हर फसल सीजन में खाद की किल्लत की सूचनाएं आम हो चली हैं। वर्ष 2022-23 में 149.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई थीं जो 2025-26 में 146 लाख हेक्टेयर रह गईं। इससे उलट इस अवधि में खाद का उपयोग 29 लाख टन से बढ़कर 33.29 लाख टन (सितंबर प्रथम सप्ताह) पहुंच चुका है। जैविक फसल उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत देश में जैविक खेती के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। कुल जैविक उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश से आता है। देश में 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है जिसमें 16 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश का है फिर भी विरोधाभास यह है कि किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच खरीफ फसल का क्षेत्र साढ़े तीन लाख हेक्टेयर घट गया लेकिन खाद की खपत 4.29 लाख टन बढ़ गई। रासायनिक खाद-कीटनाशकों के नुकसान को देखते हुए वर्ष 2011 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने विशेष नीति बनाई थी। इसका लाभ यह हुआ कि मध्य प्रदेश जैविक उत्पादन के मामले में नंबर एक पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय : दूरगामी परिणाम ठीक नहीं     उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अधिक खाद का उपयोग करता है। तात्कालिक रूप से भले ही इससे लाभ मिलता है लेकिन दूरगामी परिणाम ठीक नहीं होते। मृदा की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित होती ही है, भूजल पर भी असर पड़ता है। जो उपज होती है, उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व कृषि संचालक, मध्य प्रदेश शरीर का हर अंग होता है प्रभावित     रासायनिक खाद के माध्यम से एक सीमा से अधिक रसायन मानव शरीर में पहुंचने पर हर सिस्टम पर असर होता है। सबसे अधिक दुष्प्रभाव पेट पर पड़ता है। पेट संबंधी कई बीमारियों के बाद इसका प्रभाव अन्य अंगों पर भी होने लगता है। पोषक तत्व घटने से शरीर में विटामिन व मिनरल्स की कमी होती है। किडनी पर भी असर होता है। कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। – डॉ. आर.आर. वर्डे, सह प्राध्यापक, मेडिसिन