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भारतीय श्रद्धालु हादसा: नेपाल में बस पर टूटती भीड़, दर्शन के बाद लौट रहे यात्रियों की हालत गंभीर

काठमांडू  नेपाल में जारी हिंसा की चपेट में भारतीय पर्यटक भी आ गए हैं। काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ धाम के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं पर सरकारी विरोधी आंदोलनकारियों ने हमला बोल दिया। इस हमले में बस में बैठे कई लोग चपेट में आ गए। 9 सितंबर को यह घटना हुई थी, जिसके बारे में अब बस ड्राइवर ने जानकारी दी है। बस के ड्राइवर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को घेरा और उस पर पत्थरबाजी की, जिससे बस की खिड़कियां टूट गईं और कई यात्री घायल हो गए। यह घटना नेपाल के मौजूदा हालात को दर्शाती है, जहां जेन-जी कही जाने वाली युवा पीढ़ी का प्रदर्शन जारी है। बस ड्राइवर रामू निषाद ने सोनौली में मीडिया से बताया कि वे पशुपतिनाथ मंदिर से दर्शन करके लौट रहे थे, जब अचानक से भीड़ ने उनकी बस को घेर लिया। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी वजह के बस पर हमला कर दिया। बस में महिलाएं और बुजुर्ग यात्री भी थे, लेकिन हमलावरों ने किसी की परवाह नहीं की।' इस पथराव में बस की खिड़कियां टूट गईं और कई यात्रियों को चोटें आईं। घटना के बाद स्थानीय अधिकारियों ने घायल यात्रियों को तुरंत काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भारतीय दूतावास ने नेपाल सरकार से मदद मांगी। दोनों देशों के बीच समन्वय से बाकी यात्रियों को विशेष विमान से भारत वापस लाने का इंतजाम किया गया। बता दें कि नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें ज्यादातर कम आयु वर्ग के युवा ही शामिल हैं। इसी के चलते इन्हें जेनरेशन Z कहा जा रहा है। इन प्रदर्शनों में अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है। बीते गुरुवार को जेन-जी समूह ने कहा था कि संसद को भंग किया जाना चाहिए और संविधान में बदलाव होने चाहिए ताकि वह लोगों की इच्छाओं के हिसाब से हो। इस राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए जेन-जी के कुछ प्रतिनिधियों ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और आर्मी चीफ अशोक राज सिगडेल के साथ आर्मी हेडक्वार्टर में बातचीत भी की है। बता दें कि नेपाल में अब भी यह तय नहीं हो पाया है कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है और उनके कैबिनेट के 5 सदस्य पद छोड़ चुके हैं। इसके बाद भी हालात सुधरे नहीं हैं। इसके अलावा 'जेन Z' के कई गुटों के बीच भी आपसी मतभेद पैदा होने की खबरें हैं।  

महिला ने उठाया शिवलिंग का मामला, HC में जज ने किया चौंकाने वाला सवाल

पंजाब  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू धार्मिक प्रतीक शिवलिंग के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। याचिका में एक निजी कंपनी द्वारा शिवलिंग को ट्रेडमार्क के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजिव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अत्यधिक संवेदनशील हो रही हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप इन चीजों को लेकर इतने संवेदनशील क्यों हो रही हैं? मैंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। यह सालों से चल रहा है। अचानक यह धार्मिक भावनाओं का उफान क्यों? आप जरूरत से जायादा संवेदनशील हो रही हैं।” याचिकाकर्ता मेघना खुल्लर ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि शिवलिंग जैसे पवित्र प्रतीक का व्यावसायिक उपयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और इसे रोकने के लिए हस्तक्षेप होना चाहिए। इसपर कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से ही अपील मंच और कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। कोर्ट ने कहा, “इन ब्रांड्स के लोगो होते हैं, जिन्हें अलग-अलग कानूनों के तहत सुरक्षा मिली होती है। आपको वहीं जाना चाहिए। कोर्ट नहीं आना चाहिए।” एएसजी सत्य पाल जैन ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही याचिकाकर्ता से कथित व्यावसायिक उपयोग की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कोर्ट ने पाया कि शिकायत पहले से ही संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है और उस पर कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में यह कोर्ट उस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेगा। इस आधार पर याचिका खारिज की जाती है।” हालांकि, हाईकोर्ट ने शिकायत का हल नहीं निकलने की स्थिति में याचिकाकर्ता को पुनः कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।  

हाईकोर्ट में हड़कंप: बम की चेतावनी के बाद सभी लोग इवैक्यूएट, जांच टीम मौके पर सक्रिय

नई दिल्ली/मुंबई देश के दो उच्च न्यायालयों में शुक्रवार को बम की धमकी मिली। इसके चलते दिल्ली से मुंबई तक हड़कंप मच गया और उच्च न्यायालयों को खाली करा लिया गया है। दोनों जगहों पर एक ही दिन में हाई कोर्ट को बम की धमकी मिली। इस धमकी से कानून के जानकारों और आम लोगों में डर फैल गया। दिल्ली में मिली धमकी के कुछ ही घंटों बाद मुंबई हाई कोर्ट को भी ऐसी ही धमकी मिली, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। दोनों कोर्ट में कार्यवाही तुरंत रोक दी गई और सभी को बाहर निकाल लिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट और बॉम्बे HC में अफरा-तफरी का माहौल दिल्ली हाई कोर्ट में सुबह एक ईमेल के जरिए बम की धमकी दी गई थी। इस ईमेल में दावा किया गया था कि कोर्ट परिसर में बम रखे गए हैं। यह खबर फैलते ही कोर्ट की सभी बेंचों में काम तुरंत बंद हो गया और वहां मौजूद वकीलों, स्टाफ और बाकी लोगों को परिसर से बाहर निकाला जाने लगा। अचानक हुए इस काम से कोर्ट में अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग डर के मारे कोर्ट कॉम्प्लेक्स से बाहर भागते दिखाई दिए। सुरक्षा टीमों ने संभाला मोर्चा धमकी मिलते ही दिल्ली पुलिस और बम डिस्पोजल स्क्वाड सहित सुरक्षा बल तुरंत हरकत में आ गए। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को घेर लिया गया और वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस भी बुला ली गईं। इसके बाद खोजी कुत्तों के साथ टीमों ने पूरे कोर्ट परिसर की अच्छी तरह जांच की। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट, सच्चिन पुरी ने बताया, ‘हम सुरक्षाकर्मियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर हमने सभी वकीलों को कोर्ट परिसर खाली करने के लिए कहा है। सभी बेंचों ने भी काम बंद कर दिया है।’ धमकी देने वाले का दावा और ईमेल की जानकारी इस मामले पर सीनियर एडवोकेट प्रमोद कुमार दुबे ने बताया, 'धमकी भरा एक ईमेल फैलाया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह शख्स आईएसआईएस से है। ईमेल में क्या लिखा है, यह साफ नहीं है। पुलिस और बम स्क्वाड मौके पर पहुंच गए हैं।’ दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि ईमेल में पाकिस्तान और तमिलनाडु के मिलकर ‘होली फ्राइडे' को धमाके करने की बात कही गई है। ईमेल में लिखा है कि जज के कमरे और कोर्ट परिसर में तीन बम लगाए गए हैं और दोपहर 2 बजे तक कोर्ट खाली करने के लिए कहा गया है। ईमेल भेजने वाले की आईडी ‘kanimozhi.thevidiya@outlook.com' बताई गई है। ईमेल में यह भी लिखा है कि साल 2017 से पुलिस में हमारे लोग हैं, जो 'इस होली फ्राइडे' के लिए तैयार हैं। मुंबई हाई कोर्ट भी हुआ खाली दिल्ली हाई कोर्ट की तरह ही, मुंबई हाई कोर्ट में भी बम की धमकी मिली। इसके बाद यहां भी वकीलों और स्टाफ को तुरंत परिसर खाली करने के लिए कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। एडवोकेट मंगला वाघे ने बताया, 'आज मुंबई हाई कोर्ट में बम की धमकी मिली। इसलिए कोर्ट को खाली करा लिया गया है और पुलिस इसकी जांच कर रही है।' एक और वकील ने बताया कि पुलिस ने उन्हें बाहर जाने को कहा और बताया कि यह बम की धमकी की अफवाह है। उन्होंने यह भी बताया, 'पुलिस ने कहा कि यह चीफ जस्टिस का आदेश है।' अब तक किसी भी जगह पर कोई भी संदिग्ध चीज नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि जांच चल रही है और ईमेल भेजने वाले का पता लगाया जा रहा है।  

PM मोदी मणिपुर पहुंचने वाले हैं, हिंसा की यादों के बीच तैयारियाँ तेज़, जानिए क्या है प्लान

मणिपुर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर में घातक जातीय हिंसा के दो साल बाद शनिवार को पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करेंगे। इस दौरान वह मणिपुर भी जाएंगे। राज्य के मुख्य सचिव ने इसकी पुष्टि की है। मुख्य सचिव ने कहा कि मिजोरम से लौटने के बाद प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12:30 बजे चुराचांदपुर पहुंचेंगे। बता दें कि यह जिला बुरी तरह हिंसा से प्रभावित था। चुराचांदपुर से प्रधानमंत्री इंफाल जाएंगे और 1200 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि चुराचांदपुर कुकी बहुल है तो वहीं इंफाल में मैतेई समुदाय की संख्या ज्यादा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी कुकी बहुल चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड से 7,300 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और मेइती बहुल इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। विपक्षी दल कुकी और मेइती समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के बाद राज्य का दौरा न करने को लेकर बार-बार प्रधानमंत्री की आलोचना करते रहे हैं। इस संघर्ष में मई 2023 से अब तक 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मणिपुर सरकार ने गुरुवार शाम एक बड़ा होर्डिंग लगाया, जिसमें शनिवार को चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड और इंफाल के कांगला किले में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की घोषणा की गई।मोदी के दौरे से पहले राज्य की राजधानी इंफाल में ऐसे और भी होर्डिंग लगाए गए। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। राज्य सरकार ने गुरुवार को एक परामर्श भी जारी किया, जिसमें पीस ग्राउंड में आयोजित ‘‘वीवीआईपी कार्यक्रम’’ में शामिल होने वाले लोगों से कहा गया कि वे ‘‘चाबी, कलम, पानी की बोतल, बैग, रूमाल, छाता, लाइटर, माचिस, कपड़े का टुकड़ा, कोई भी नुकीली वस्तु या हथियार और गोला-बारूद’’ न लाएं। वहीं, एक अन्य अधिसूचना में लोगों से 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और बीमार व्यक्तियों को कार्यक्रम स्थल पर लाने से बचने को कहा गया। मणिपुर सरकार ने इससे पहले मोदी के दौरे के मद्देनजर चुराचांदपुर जिले में एयर गन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि इंफाल और चुराचांदपुर जिला मुख्यालय शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इंफाल में लगभग 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड में तथा उसके आसपास बड़ी संख्या में राज्य और केंद्रीय बलों के जवान तैनात किए गए हैं, जहां इस कार्यक्रम के लिए एक भव्य मंच तैयार किया जा रहा है। मणिपुर के एकमात्र राज्यसभा सदस्य लीशेम्बा संजाओबा ने प्रधानमंत्री के दौरे को लोगों और राज्य के लिए ‘‘सौभाग्य का क्षण’’ बताया। भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘यह सौभाग्य की बात है कि मोदी लोगों की कठिनाइयों को सुनेंगे…मणिपुर में पहले भी हिंसक झड़पों का इतिहास रहा है। हालाँकि, किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में राज्य का दौरा नहीं किया और लोगों की बात नहीं सुनी।’’ प्रमुख कुकी-जो समूहों ने भी प्रधानमंत्री के मणिपुर दौरे का स्वागत किया है और इसे ‘‘ऐतिहासिक तथा दुर्लभ अवसर’’ बताया है। समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों में से एक कुकी-ज़ो काउंसिल ने दावा किया कि मोदी का यह दौरा किसी प्रधानमंत्री के इस क्षेत्र में आने के लगभग चार दशक बाद हो रहा है। काउंसिल ने मोदी के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमारे घावों को भरने, हमारी गरिमा को बहाल करने तथा कुकी-जो लोगों के भविष्य की सुरक्षा के लिए हम आपके नेतृत्व पर भरोसा करते हैं।’’ कुकी-ज़ो समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कई अन्य संगठनों ने भी प्रधानमंत्री के दौरे की सराहना की, लेकिन उनके स्वागत में नृत्य कार्यक्रम की योजना का विरोध किया। महिला संगठन ‘इमागी मीरा’ ने कहा कि मोदी को अधिकारियों को निर्देश देना चाहिए कि वे मेइती लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही की अनुमति दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।  

देश में लगाए जाएंगे 1.25 करोड़ पौधे, यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य

सेवा पर्व: यूपी में 15 लाख पौधरोपण कराएगी योगी सरकार  17 सितंबर से दो अक्टूबर तक मनाया जाएगा सेवा पर्व  देश में लगाए जाएंगे 1.25 करोड़ पौधे, यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य  17 सितंबर को प्रदेश के 34 नगर वन में कम से कम होंगे 100-100 पौधरोपण  पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान, वर्षा जल संचयन समेत अनेक अभियान भी चलाए जाएंगे हर जनपद में प्रभागीय वनाधिकारी बनाए गए नोडल अधिकारी लखनऊ 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान देश में 1.25 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसमें से योगी सरकार प्रदेश में 15 लाख पौधरोपण कराएगी। 17 सितंबर को पर्व के शुभारंभ पर प्रदेश के 34 नगर वन में कम से कम 100-100 पौधरोपण कराया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान, वर्षा जल संचयन समेत अनेक अभियान भी चलाए जाएंगे। हर जनपद में प्रभागीय वनाधिकारी इसके नोडल अफसर होंगे।   जनसहभागिता से सभी 75 जनपदों में होगा आयोजन   प्रमुख सचिव (वन-पर्यावरण) अनिल कुमार ने बताया कि यूपी के लिए 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने मुख्यालय के अधिकारियों समेत सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को निर्देशित किया कि यूपी के सभी 75 जनपदों में जनसहभागिता के माध्यम से पौधरोपण कराया जाए। इसके लिए प्रजातियों का चयन कर लिया जाए। सभी पौधरोपण स्थलों के फोटोग्राफ व एमआईएस डेटा के साथ Meri Life पोर्टल पर अपलोड किया जाए। जिला वृक्षारोपण समिति अन्य विभागों से सामंजस्य स्थापित करते हुए पौधों की सुरक्षा व रखरखाव भी सुनिश्चित करेगी।  34 नगर वन-वाटिका में कम से कम 100-100 पौधे लगाना अनिवार्य  पौधरोपण महाभियान-2025 के मिशन निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि सेवा पर्व के शुभारंभ पर 17 सितंबर को यूपी के 34 नगर वन-वाटिका में कम से कम 100-100 पौधे लगाना अनिवार्य है।  इसके अतिरिक्त विभाग के सभी कार्यालयों, वन निगम के समस्त डिपो में स्वच्छता तथा प्राणि उद्यान व सफारी में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन करने को लेकर भी अभियान चलेगा। विभिन्न पक्षी अभयारण्यों में सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण जागरूकता, वर्षा जल संचयन व जल स्रोत के संरक्षण पर जागरूकता अभियान भी चलेगा। प्रत्येक प्रभाग में नर्सरी एक्शन प्लान पर कार्यशाला होगी। जिला स्तर पर विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत को लेकर प्रबुद्ध वर्ग संवाद में वन-वन्यजीव संरक्षण, हरीतिमा संवर्धन, जैव विविधता आदि विषयों पर डीएफओ प्रतिभाग भी करेंगे। जनपदीय मेले व प्रदर्शनियों में वन विभाग का भी सहयोग रहेगा। आयोजन को लेकर तैयारी की जा रही है।  यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य  सेवा पर्व के अंतर्गत 1.25 करोड़ पौधरोपण किया जाना है। इसमें उत्तर प्रदेश को 15 लाख पौधरोपण के लक्ष्य मिला है।  सर्वाधिक लक्ष्य वाले 10 राज्य  ओडिशा- 20 लाख  उत्तर प्रदेश- 15 लाख  असम- 11.50 लाख  गुजरात-11 लाख  छत्तीसगढ़-11 लाख  मध्य प्रदेश- 8 लाख  महाराष्ट्र- 7 लाख  आंध्र प्रदेश- 7 लाख  राजस्थान- 7 लाख  बिहार- 5 लाख

अब नहीं बख्शेंगे कोई! यूपी में CM योगी ने किया बड़ा एक्शन, SDM और दो अफसर सस्पेंड

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति' के तहत एक के बाद एक बड़ी कार्रवाइयां की जा रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर के SDM और दो राज्य कर अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, गन्ना विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद गोपनीय जांच के आदेश दिए गए हैं। SDM जयेंद्र सिंह सस्पेंड, सरकारी जमीन के मामले में फंसे मुजफ्फरनगर के उप जिलाधिकारी (SDM) जयेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी जमीन को गलत तरीके से संक्रमणीय (ट्रांसफरेबल) घोषित कर दिया और इससे कुछ प्रभावशाली लोगों को नाजायज फायदा पहुंचाया। शिकायतों की जांच के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। राज्य कर विभाग के दो अधिकारी भी सस्पेंड राज्य कर विभाग (वाणिज्य कर विभाग) में भी भ्रष्टाचार को लेकर दो बड़े अफसरों पर गाज गिरी है, जिनमें अरुण शंकर रॉय (अपर आयुक्त) – इन पर आरोप है कि इन्होंने बिल्डरों को गलत तरीके से टैक्स में छूट देकर बड़ा लाभ पहुंचाया। दूसरे सतीश कुमार – इन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि एक स्टिंग ऑपरेशन में इनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद सस्पेंशन और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की गई। दोनों अफसरों के खिलाफ जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटा दिया गया है। गन्ना विभाग में रिश्वतखोरी, जांच के आदेश अब गन्ना विभाग में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिन दो अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हुई है, वे हैं रामकिशन (जिला गन्ना अधिकारी) संयुक्त गन्ना निदेशक। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत ली, किसानों की योजनाओं में गड़बड़ी की। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक दोनों को पद से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम योगी का सख्त संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता है। जो भी अधिकारी जनता के साथ धोखा करेगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी। भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

किसानों पर विवादित बयान: कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से झटका

मंडी  बॉलीवुड एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना राणावत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कंगना रनौत के खिलाफ चल रहा मानहानि केस जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कंगना रनौत की मानहानि केस को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. बता दें कि किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने किसानों के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिसके चलते उनके खिलाफ मानहानि का केस दायर किया गया था.   कंगना के वकील ने पेश की यह दलील बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में कगंना रनौत का पक्ष रखते हुए उनके वकील ने दलील दी थी कि उन्होंने महज एक ट्वीट को रि-ट्वीट किया था. कई और लोगों ने भी उस ट्वीट को रि-ट्वीट किया था. इस दलील के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह महज रि-ट्वीट नहीं था, बल्कि इसमे कंगना रनौत की टिप्पणी भी शामिल थी. यह ट्रायल का विषय है तो आप निचली अदालत में अपनी बात रखिए. वहां से फैसला आने के बाद ही आगे मामले को देखा जाएगा, अगर बेंच के पास आया तो.   कंगना के खिलाफ क्या है मामला? बता दें कि कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि की शिकायत साल 2021 में पंजाब की बठिंडा कोर्ट में 73 साल की महिंदर कौर ने दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया कि कंगना ने एक पोस्ट को रि-ट्वीट करके उनके खिलाफ टिप्पणी की, जिससे उनकी मानहानि हुई है. कंगना ने अपने रि-ट्वीट में महिंदर कौर की फोटो वाले ट्वीट को रि-ट्वीट करके कहा था कि यह वही बिलिकिस बानो दादी हैं, जो शाहीन बाग प्रदर्शन का हिस्सा थीं. यह 100 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं. हाई कोर्ट खारिज कर चुकी याचिका बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट भी कंगना रनौत की याचिका खारिज कर चुकी है. हाई कोर्ट ने कंगना की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कंगना रनौत एक्ट्रेस हैं. उनके खिलाफ शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे हैं. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कंगना के रि-ट्वीट और टिप्पणी से उसकी इमेज खराब हुई है. रि-ट्वीट और टिप्पणी करके कंगना की इमेज पर भी असर पड़ रहा है, शिकायतकर्ता ने किसी दुर्भावना से केस दर्ज नहीं कराया है। इसलिए मामले की जांच होनी चाहिए.  

शिवसेना की चुनावी रणनीति: BMC चुनाव के लिए एकनाथ शिंदे ने बनाई कमेटी, जानें क्या है प्लान

मुंबई  महाराष्ट्र में अगले कुछ महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव हो सकते हैं. सभी दलों ने अब अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. महायुति के प्रमुख नेताओं की ओर से कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि हम राज्य में महायुति के रूप में चुनाव लड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर, इन चुनावों को लेकर महाविकास अघाड़ी की तस्वीर साफ नहीं है, खासकर तब जब आज मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसने उत्सुकता और बढ़ा दी है. इस पूरी पृष्ठभूमि में शिवसेना शिंदे गुट ने महानगरपालिका चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. मुंबई महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना की मुख्य कार्यकारी समिति की घोषणा कर दी गई है. इस टीम में 21 प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है. आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में, शिवसेना ने पार्टी की मुख्य कार्यकारी समिति का गठन किया है. इसमें पार्टी के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे समेत 21 शिलाधारक शामिल हैं. जानें मुख्य कार्यकारी समिति में कौन-कौन नेता हैं शामिल महानगरपालिका चुनावों में पार्टी स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय इसी समिति के माध्यम से लिए जाएंगे. इस समिति में शिवसेना के शीर्ष नेताओं, सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों और पूर्व विधायकों को शामिल किया गया है. 1) एकनाथ शिंदे, प्रमुख नेता 2) रामदास कदम, नेता 3) गजानन कीर्तिकर, नेता 4) आनंदराव अडसुल, नेता 5) मीनाताई कांबले, नेता 6) डॉ. श्रीकांत शिंदे, सांसद 7) रवींद्र वायकर, सांसद 8) मिलिंद देवड़ा, राज्यसभा – सांसद 9) राहुल शेवाले, पूर्व सांसद 10) संजय निरुपम, पूर्व सांसद 11) प्रकाश सुर्वे, विधायक 12) अशोक पाटिल, विधायक 13) मुरजी पटेल, विधायक 14) दिलीप लांडे, विधायक 15) तुकाराम काटे, विधायक 16) मंगेश कुडालकर, विधायक 17) श्रीमती। मनीषा कायंदे, विधान परिषद, विधायक 18) सदा सरवणकर, पूर्व विधायक 19) यामिनी जाधव, पूर्व विधायक 20) दीपक सावंत, पूर्व विधायक 21) शिशिर शिंदे, पूर्व विधायक. महाराष्ट्र में जल्द निकाय चुनाव का होगा ऐलान पूर्व सांसद राहुल शेवाले, पूर्व विधायक सदा सर्वणकर, यामिनी जाधव और शिशिर शिंदे को भी समिति में जगह मिली है. भारत के सबसे धनी नगर निकाय, बीएमसी, जिसका 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, के चुनाव मार्च 2022 से होने हैं. बीएमसी के अलावा, महाराष्ट्र में कई ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं.  

राम मंदिर में मॉरीशस पीएम ने किए दर्शन-पूजन, CM योगी ने दिखाई गर्मजोशी

अयोध्या  मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम अपने 30 सदस्यीय मंत्रियों-परिजनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ शुक्रवार को रामनगरी अयोध्या पहुंचे। अयोध्या एयरपोर्ट पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। प्रदेश सरकार की ओर से जिला प्रशासन ने डॉ. नवीन चंद्र का रेड कारपेट वेलकम किया। अयोधा एयरपोर्ट से राम मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। वाराणसी से चलकर प्रधानमंत्री डॉ. नवीन राम गुलाम, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या दोपहर सवा बारह बजे पहुंचे। एयरपोर्ट पर ही उनको अयोध्या की संस्कृति से रूबरू कराया गया। भव्य स्वागत के बाद डॉ. नवीन चंद्र राम गुलाम पत्नी वीणा रामगुलाम एवं मंत्रियों- परिजनों के साथ राम मंदिर के लिए रवाना हुए। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका काफिला 20 मिनट में राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश कर गया। राम मंदिर में रामलला की पूजा-अर्चना के बाद मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन चंद्र एवं उनके प्रतिनिधि मंडल ने राम दरबार में भी पूजा अर्चना की। अयोध्या राम मंदिर निर्माण की अद्यतन जानकारी लेने के बाद डॉ. नवीन चंद्र कुबेरेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में ही कुबेर टीला पर बने भगवान शिव के मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद डॉ. नवीन चंद्र वापस एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में ही उनके अल्पाहार की भी व्यवस्था की थी । अयोध्या एयरपोर्ट पर उनको विदा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वापस अयोध्या धाम पहुंच गए। सीएम योगी हरि गोपाल धाम में स्वामी हर्याचार्य की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंच गए।  

भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम योगी सख्त, यूपी में SDM और दो अधिकारी निलंबित

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति' के तहत एक के बाद एक बड़ी कार्रवाइयां की जा रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर के SDM और दो राज्य कर अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, गन्ना विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद गोपनीय जांच के आदेश दिए गए हैं। SDM जयेंद्र सिंह सस्पेंड, सरकारी जमीन के मामले में फंसे मुजफ्फरनगर के उप जिलाधिकारी (SDM) जयेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी जमीन को गलत तरीके से संक्रमणीय (ट्रांसफरेबल) घोषित कर दिया और इससे कुछ प्रभावशाली लोगों को नाजायज फायदा पहुंचाया। शिकायतों की जांच के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। राज्य कर विभाग के दो अधिकारी भी सस्पेंड राज्य कर विभाग (वाणिज्य कर विभाग) में भी भ्रष्टाचार को लेकर दो बड़े अफसरों पर गाज गिरी है, जिनमें अरुण शंकर रॉय (अपर आयुक्त) – इन पर आरोप है कि इन्होंने बिल्डरों को गलत तरीके से टैक्स में छूट देकर बड़ा लाभ पहुंचाया। दूसरे सतीश कुमार – इन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि एक स्टिंग ऑपरेशन में इनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद सस्पेंशन और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की गई। दोनों अफसरों के खिलाफ जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटा दिया गया है। गन्ना विभाग में रिश्वतखोरी, जांच के आदेश अब गन्ना विभाग में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिन दो अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हुई है, वे हैं रामकिशन (जिला गन्ना अधिकारी) संयुक्त गन्ना निदेशक। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत ली, किसानों की योजनाओं में गड़बड़ी की। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक दोनों को पद से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम योगी का सख्त संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता है। जो भी अधिकारी जनता के साथ धोखा करेगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी। भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।