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महिला ने कहा- पति नहीं चाहिए, लेकिन उसके स्पर्म से बच्चा चाहती हूं, हाईकोर्ट का दिमाग हुआ चकराया

मुंबई  मुंबई की एक महिला का अनोखा कानूनी विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. 46 साल की यह महिला अपने अलग रह रहे पति के साथ बनाए गए 16 फ्रीज्ड भ्रूण (एम्ब्रियो) का इस्तेमाल कर मां बनना चाहती है. हालांकि पति इसके लिए रजामंदी नहीं दे रहा है. इसी को लेकर अब महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और कहा है कि उसकी ‘मातृत्व की आखिरी उम्मीद’ कानूनी अड़चनों के कारण खत्म हो रही है। यह मामला दक्षिण मुंबई के एक दंपती से जुड़ा है, जिन्होंने 2021 में शादी की थी. इसके बाद 2022 में दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया के तहत पति के स्पर्म और पत्नी के अंडाणु से 16 भ्रूण तैयार कर उन्हें एक फर्टिलिटी क्लिनिक में फ्रीज करवा दिया था. हालांकि 2023 में दोनों के रिश्ते खराब हो गए और वे अलग रहने लगे. इसके बाद इन भ्रूणों के इस्तेमाल को लेकर विवाद शुरू हो गया। महिला ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में इसे वापस लेकर राष्ट्रीय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी बोर्ड के पास पहुंची. बोर्ड ने फरवरी 2026 में उसकी मांग को खारिज कर दिया. इसके बाद महिला ने अब दिल्ली हाईकोर्ट में नई याचिका दायर कर दी है। पति की सहमति बनी कानूनी अड़चन रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का कहना है कि वह अपनी फ्रीज्ड एम्ब्रियो को एक क्लिनिक से दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर कराकर गर्भधारण करना चाहती है. लेकिन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत भ्रूण के इस्तेमाल या ट्रांसफर के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी होती है. महिला का आरोप है कि उसका पति जानबूझकर सहमति नहीं दे रहा और इस तरह वह उसके मातृत्व के अधिकार को रोक रहा है। ‘मातृत्व का आखिरी मौका छिन रहा’ अपनी याचिका में महिला ने कहा कि उसकी उम्र 46 साल हो चुकी है और अब उसके पास मां बनने का बहुत कम समय बचा है. उसने अदालत से कहा कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो वह अपने ही जेनेटिक मटेरियल से मां बनने का मौका हमेशा के लिए खो सकती है. महिला ने यह भी बताया कि गर्भधारण की उम्मीद में उसने फरवरी 2024 में एक बड़ी गर्भाशय सर्जरी भी करवाई थी, जिसका पूरा खर्च उसने खुद उठाया। पति पर गंभीर आरोप याचिका में महिला ने अपने पति पर दुर्व्यवहार और छोड़ देने का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि पति ने ‘दुर्भावना से’ अपनी सहमति रोक रखी है, जबकि उसके खिलाफ वैवाहिक और आपराधिक मामले पहले से चल रहे हैं. महिला के मुताबिक उसका पति पहले से ही अपनी पिछली शादी से एक बच्चे का पिता है, लेकिन फिर भी वह उसे मां बनने से रोक रहा है। महिला का कहना है कि एआरटी एक्ट के सेक्शन 22 के अनुसार शादी के दौरान बने भ्रूण के इस्तेमाल के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी है, लेकिन कानून में यह साफ नहीं है कि अगर शादी पूरी तरह टूट चुकी हो या पति पत्नी को छोड़ चुका हो तो क्या होगा. याचिका में कहा गया है कि यह ‘कानूनी खालीपन’ उन महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन जाता है, जिनकी शादी खत्म होने की कगार पर है लेकिन कानूनी तौर पर तलाक नहीं हुआ है। मुस्लिम पर्सनल लॉ भी बना बाधा महिला ने अदालत को बताया कि उसके सामने दोहरी कानूनी समस्या है. एक तरफ पति की सहमति न होने के कारण वह एम्ब्रियो का इस्तेमाल नहीं कर सकती, दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आईवीएफ जैसी प्रक्रिया सिर्फ वैध शादी के दौरान ही स्वीकार्य मानी जाती है. ऐसे में अगर वह तलाक ले लेती है तो भी आईवीएफ कराकर बच्चा पैदा करना संभव नहीं रहेगा। अदालत से क्या मांग की? महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि उसे पति की सहमति के बिना एम्ब्रियो को दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर करने और उन्हें अपने गर्भ में प्रत्यारोपित कराने की अनुमति दी जाए. इसके अलावा उसने अदालत से यह भी कहा है कि एआरटी एक्ट की कुछ धाराओं की व्याख्या बदली जाए या फिर राष्ट्रीय एआरटी बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसे मामलों के लिए कानून में संशोधन की सिफारिश करे। महिला ने अदालत से इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग की है, क्योंकि उसकी उम्र और घटती प्रजनन क्षमता को देखते हुए समय बेहद महत्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट आने वाले कुछ हफ्तों में इस याचिका पर सुनवाई कर सकता है।

सफलता की मिसाल: पारंपरिक हस्तशिल्प ने बदल दी लोगों की आजीविका

सफलता की कहानी : पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद बना आजीविका का साधन स्व सहायता समूह से जुड़कर कांसाबेल की महिलाओं ने स्वरोजगार की राह अपनाई रायपुर  पारंपरिक कौशल, जैसे मिट्टी के बर्तन, कढ़ाई और लकड़ी का काम, स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना के तहत जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं। कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की हरियाली स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है।          समूह की सदस्य मती बालमुनि भगत ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अच्छी कमाई कर रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दे रहा है। उन्होंने बताया कि यह न केवल एक व्यवसाय है, बल्कि यह परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।            महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, सहयोग और विपणन सुविधा मिलने से उनका उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार और मेलों में लोकप्रिय हो चुका है। महिलाएं कहती हैं कि अब वे सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी पहचान खुद बना रही हैं।        समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से हम सशक्त और आत्मनिर्भर हो रहे हैं। हम महिलाओं के लिए हस्तशिल्प उत्पाद आय का मुख्य जरिया है, जो लाखों लोगों को, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है।

Jalandhar में अकेली महिला ने दो बदमाशों का किया मुकाबला

जालंधर. जालंधर देहात के किशनगढ़–कर्टारपुर रोड पर गांव फरीदपुर स्टॉप के पास दिनदहाड़े लूट की वारदात सामने आई है। कपूरथला निवासी ज्योति रानी एक्टिवा पर दुगरी गांव जा रही थीं। रास्ते में मोटरसाइकिल सवार दो लुटेरों ने उनका पीछा किया। महिला को शक होने पर वह फरीदपुर स्टॉप पर रुककर दुकान की ओर गईं, तभी एक लुटेरे ने उनका पर्स छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर आरोपी ने तेजधार हथियार से हमला कर दिया। घायल होने के बावजूद महिला ने साहस दिखाया, लेकिन बदमाश हथियार दिखाकर पर्स लेकर फरार हो गए। पर्स में करीब 20 हजार रुपये की विदेशी मुद्रा, पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज थे। वारदात के दौरान आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे और किसी ने मदद नहीं की। पुलिस चौकी किशनगढ़ के प्रभारी एएसआई राजेंद्र शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी 3 साल में ढाई फीसदी बढ़ी, आधी दुनिया की ताकत में इजाफा

भोपाल  मप्र में पुरुषों के मुकाबले सरकारी नौकरी में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में ही बढ़ोतरी तकरीबन ढाई प्रतिशत देखी गई। जबकि पुरुषों का प्रतिशत घट गया। आर्थिक सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री श्रेणी में महिलाओं की संख्या बीते वर्षों की तुलना में बढ़ी है। ये सब श्रेणियां अफसर के स्तर की होती हैं। तीनों में प्रतिशत 30 से ऊपर है, जबकि चतुर्थ श्रेणी में प्रतिशत 20.54 है। क्लास-टू में तो आंकड़ा 33 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है। प्रदेश के कुल 22 विश्वविद्यालयों में जरूर महिलाओं की संख्या घटी है। दो विवि ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि और महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि उज्जैन में तो एक-एक ही महिला रह गई हैं। भोपाल के राष्ट्रीय विधि संस्थान विवि (एनएलआईयू) में सिर्फ तीन महिलाएं हैं। यह दस फीसदी से भी कम है। सर्वाधिक 37 से अधिक महिलाएं भोपाल के हिंदी विवि में हैं। नौकरियां घटीं… 2024 के मुकाबले 2025 में 16,396 नौकरी कम हुईं रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि सरकार के 54 विभागों में एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 के बीच सिर्फ 282 लोगों को नियमित (रेग्यूलर) नौकरी मिली है। यानी आंकड़ा 6 लाख 6 हजार 876 से बढ़कर 6 लाख 7 हजार 158 हुआ जो सिर्फ 0.05 प्रतिशत बढ़ोतरी बता रहा है। दूसरी तरफ सरकारी नौकरी से इतर राज्य के सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में संख्या 3447 घट गई। पांच सालों में 2021 से 2025 के बीच सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में 15 हजार लोगों की नौकरी घटी है। यही हाल नगरीय निकायों का भी है। यहां 450 नौकरी कम हुई। ग्रामीण निकायों में 38, विकास प्राधिकरण व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में 98 और विवि में 130 नौकरियां कम हुई हैं। तमाम वर्गों को देखें तो 2024 के मुकाबले मप्र में 2025 में 16 हजार 396 नौकरी कम हुई है। नियमित कर्मचारी… भोपाल-इंदौर में और स्कूल शिक्षा में सर्वाधिक सरकार के नियमित कर्मचारियों में 39.8% जिलों में काम करते हैं। इसमें भोपाल में सर्वाधिक नियमित कर्मियों की संख्या 6.65% है। दूसरे नंबर पर इंदौर 4.47, फिर ग्वालियर 3.50 और धार 3.36 प्रतिशत है। इसी तरह प्रदेश में कुल नियमित कर्मचारियों में सर्वाधिक 37.66% लोग स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं। दूसरा नंबर गृह विभाग का है, जहां 15.18% लोग हैं। इसके बाद तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश आदिम जाति व अनुसूचित जाति कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग आते हैं।

अलीराजपुर में खौफनाक वारदात मां ने तीन बेटियों को दिया जहर, महिला ने खुद भी पीया जहर|

अलीराजपुर  मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के एक आदिवासी इलाके में शुक्रवार रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां ने कथित तौर पर अपनी तीन मासूम बेटियों को कीटनाशक (जहर) पिलाने के बाद खुद भी जान देने की कोशिश की। इस घटना में सात, पांच और तीन साल की तीनों बहनों की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबुआ थाना प्रभारी मोहन डावर के अनुसार, यह घटना अडवाड़ा गांव के माफीदार फलिया में हुई। आरोपी महिला ने अपनी बेटियों सावित्री, कार्तिका और दिव्या को जबरन कीटनाशक पिलाया और फिर खुद भी उसे पी लिया। परिजनों को जैसे ही इसकी भनक लगी, वे चारों को तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां एक बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। अन्य दो बच्चियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें गुजरात के दाहोद रेफर किया गया, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना के समय महिला का पति मजदूरी के सिलसिले में पिछले एक महीने से गुजरात में था। शुरुआती जांच में पुलिस इसे घरेलू विवाद का मामला मान रही है, हालांकि सभी पहलुओं से तफ्तीश की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और मृत बच्चों के पिता और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस खौफनाक कदम के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके।

तीन बच्चों के साथ महिला अचानक गायब, मायके जाने की कही थी बात

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ रहस्यमयी तरीके से लापता  हो गई है. महिला कबीरधाम जिले के पांडा तराई क्षेत्र से करीब सात दिन पहले अपने मायके बिलासपुर के अशोकनगर जाने के लिए निकली थी. परिजनों के अनुसार, वह घर से यह कहकर निकली थी कि बच्चों के साथ अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिलासपुर जा रही है, लेकिन वहां पहुंचने ही नहीं। घटना के बाद से परिजन परेशान हैं, महिला और बच्चों की तलाश की जा रही है. पांडातराई थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 निवासी बिसेन कार्निक पिता राजेन्द्र कार्निक (34 वर्ष) ने पत्नी पुष्पनंदनी कार्निक (26 वर्ष) के तीन बच्चों सहित लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई है. बिसेन कार्तिक ने पुलिस को सिविल लाइन पुलिस को बताया कि, 2 फरवरी को दोपहर लगभग 12 बजे उसकी पत्नी तबीयत खराब होने की बात कहकर इलाज कराने मायके बिलासपुर जाने के लिए तीन बच्चों के साथ शारदा बस से रवाना हुई थी. शाम करीब 6 बजे संपर्क करने पर पत्नी के दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले. इसके बाद ससुराल पक्ष से संपर्क करने पर जानकारी मिली कि, पुष्पनन्दनी वहां भी नहीं पहुंची है. परिजनों द्वारा देर रात तक रिश्तेदारों, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन बस चालक से पूछताछ करने पर उसने महाराणा प्रताप चौक में महिला और बच्चों को उतारने की जानकारी दी. लापता पति का पुलिस पर आरोप लापता महिला के पति की शिकायत पर पुलिस थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. वहीं पति का आरोप है कि पुलिस  उसकी पत्नी और बच्चों को ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही. उसने पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई.

डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी : धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह 40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया धमतरी कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।  डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह ख़ास कर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।          कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।       इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।      इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।      उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।       आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

डराने वाले आंकड़े! संयुक्त राष्ट्र ने कहा—हर 10 मिनट में एक महिला की होती है हत्या

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) ने एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की है, जो बताती है कि वर्ष 2024 में, 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को, उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मार डाला गया. रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 मिनट में 1 लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है.हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है.  83 हज़ार इरादतन हत्या के मामले महिलाओं की हत्या – 2025 नामक यह रिपोर्ट, महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है.2024 में, 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई.  रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में – हर 1 लाख में से 3 लड़की या महिला, और योरोप में सबसे कम दर्ज की गई हैं.जबकि, इसके उलट अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है. संयुक्त राष्ट्र के 'इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वॉयलेंस अगेंस्ट विमेन' के मौके पर जारी 2025 फेमिसाइड रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों की हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनमें कोई वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 83,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या की गई, जिनमें से 60% यानी 50,000 महिलाएं और लड़कियां अपने करीबी साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मारी गईं. इसका मतलब है कि हर दस मिनट में एक महिला या लड़की घर के अंदर या परिवार के हाथों जान गंवा रही है. इसके उलट पुरुषों की हत्याओं में केवल 11% मामलों में साथी या परिवार जिम्मेदार थे. यह अंतर हिंसा की प्रकृति और खतरे की गंभीरता को उजागर करता है. यूएन विमेन की नीति विभाग की निदेशक सारा हेंड्रिक्स ने कहा कि फेमिसाइड अकेले नहीं होता. यह अक्सर नियंत्रण, डराने-धमकाने, ऑनलाइन उत्पीड़न या डिजिटल हिंसा की शुरुआत से लेकर बढ़ते-बढ़ते जानलेवा रूप ले लेता है. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल हिंसा अक्सर ऑफलाइन भी फैलती है और कई बार महिलाओं की हत्या तक पहुंच जाती है. यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में ‘घर’ महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बन चुका है. उन्होंने महिलाओं की हत्या को रोकने के लिए बेहतर रणनीतियों, मजबूत कानूनों और प्रभावी आपराधिक न्याय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.2025 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह हिंसा दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में मौजूद है. सबसे ज्यादा फेमिसाइड दर अफ्रीका (3 प्रति 1 लाख महिलाएं) में दर्ज की गई, जिसके बाद अमेरिका (1.5), ओशिआनिया (1.4), एशिया (0.7) और यूरोप (0.5) का स्थान आता है. रिपोर्ट बताती है कि घर के बाहर यानी सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली फेमिसाइड का डेटा अभी भी सीमित है, जिसकी वजह से वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन करना मुश्किल है. डेटा की कमी दूर करने के लिए यूएन विमेन और यूएनओडीसी 2022 के सांख्यिकीय फ्रेमवर्क के आधार पर देशों के साथ काम कर रहे हैं ताकि ऐसी हत्याओं की बेहतर पहचान, रिकॉर्डिंग और वर्गीकरण किया जा सके. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2024 में परिवार/साथी के हाथों मारी गई महिलाओं की संख्या (50,000) पिछली रिपोर्ट (51,100) से थोड़ी कम जरूर है, लेकिन यह गिरावट वास्तविक कमी का संकेत नहीं है, बल्कि कई देशों में डेटा उपलब्धता में बदलाव की वजह से ऐसा दिख रहा है. 16 Days Campaign क्या है?  हर साल 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाला 16 Days of Activism अभियान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए UN Women की पहल है. 2025 में यह अभियान डिजिटल हिंसा को खत्म करने पर केंद्रित है, जिसमें ऑनलाइन उत्पीड़न, स्टॉकिंग, जेंडर्ड डिसइन्फॉर्मेशन, डीपफेक्स और बिना अनुमति निजी तस्वीरें शेयर करने जैसी समस्याएं शामिल हैं. यह सभी तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ तेजी से बढ़ रही हैं. UN Women ने सरकारों, टेक कंपनियों और समुदायों से अपील की है कि कानूनों को मजबूत बनाया जाए, डिजिटल हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ितों के लिए सुरक्षित व सहायक वातावरण तैयार किया जाए. सुरक्षित रहने का अधिकार यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती. यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान, यह उजागर करता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है. यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है.निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है.  इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें.UNODC के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया भर में बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए घर, आज भी एक ख़तरनाक और कई बार जानलेवा जगह बने हुए हैं.  महिलाओं की हत्याएँ घर के बाहर भी होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं.  इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए, बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं. सटीक डेटा बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझी जा सके, प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके.

7 महीने में 5 बार प्रेमी संग फरार हुई मां, पति ने 4 बच्चों के साथ नदी में कूदकर किया आत्महत्या

शामली  यूपी में शामली जिले पति ने जिस पत्नी की बेवफाई से तंग आकर चार मासूम बच्चों के साथ यमुना नदी में कूदकर जान दे दी थी उसे प्रेमी के साथ गिरफ्तार कर दिया गया है.इन दोनों की वजह से ही 38 साल के सलमान ने यह भयावह कदम उठाया था. पुलिस ने पत्नी खुशनुमा और उसके कथित प्रेमी साबिर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.यह वही खुशनुमा है, जो पिछले सात महीनों में अपने प्रेमी के साथ पांच बार घर छोड़ चुकी थी. और हर बार पति सलमान उसे बच्चों की खातिर वापस घर लाता रहा.लेकिन इस बार उसकी सहनशक्ति टूट गई और उसने अपनी जिंदगी के साथ अपने बच्चों का भी अंत कर दिया. प्यार में अंधी पत्नी, टूटा हुआ पति सलमान मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले का निवासी था, लेकिन कई वर्षों से शामली जिले के कैराना में मजदूरी कर अपना परिवार पालता था.उसकी पत्नी खुशनुमा और चार छोटे-छोटे बच्चे महक, आयान, अल्ताफ और रेहान उसकी दुनिया थे.लेकिन खुशनुमा की जिंदगी में साबिर नाम का व्यक्ति आया, जिसने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं.साबिर पास के गांव का रहने वाला था और अकसर मोहल्ले में आता-जाता रहता था.इसी दौरान उसका खुशनुमा से संपर्क हुआ, जो धीरे-धीरे अवैध संबंधों में बदल गया.शुरुआत में सलमान ने पत्नी के व्यवहार में आए बदलाव को अनदेखा किया.लेकिन जब खुशनुमा पहली बार साबिर के साथ घर छोड़कर भागी, तो मानो उसकी दुनिया उजड़ गई.कई दिनों की मशक्कत के बाद जब वह वापस आई, तो सलमान ने बच्चों की खातिर सब कुछ भुलाकर उसे माफ कर दिया. नहीं थमा सिलसिला  लेकिन ये सिलसिला यहीं नहीं थमा.सात महीनों में वह पांच बार घर छोड़कर उसी प्रेमी के पास भागी.हर बार सलमान उसे खोजकर लाता, मिन्नतें करता, घर बसाने की कोशिश करता.मगर जब पांचवीं बार वह फिर चली गई, तो सलमान अंदर से पूरी तरह टूट गया. हमारी मौत के जिम्मेदार हैं तेरी अम्मी  घटना से एक दिन पहले सलमान ने अपनी बहन को एक वीडियो भेजा था.वीडियो में वह यमुना किनारे चारों बच्चों के साथ बैठा था.उसकी आंखों में आंसू थे और आवाज में कंपकंपी.उसने कहा, हम अब जीना नहीं चाहते.हमारी मौत के लिए जिम्मेदार कौन है बेटा? तेरी अम्मी है.  यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.सलमान ने अपने चारों बच्चों के साथ यमुना नदी में छलांग लगा दी. नदी में चला दो दिन का सर्च ऑपरेशन 3 अक्टूबर की रात यह घटना हुई.स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि किसी ने नदी में कूदने से पहले वीडियो बनाया है.सूचना मिलते ही कैराना पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीमों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया.दो दिन तक यमुना के किनारों और धारा में तलाशी चली.5 अक्टूबर को बागपत जिले के टांडा क्षेत्र के पास सलमान का शव मिला.उसके साथ बड़ी बेटी महक का शव भी बरामद हुआ.बाकी तीन बच्चों की तलाश अब भी जारी है.पुलिस और परिवार को आशंका है कि बच्चों के शव नदी की तेज धारा में बह चुके होंगे.इस घटना से पूरा इलाका शोक में डूब गया.सलमान के पड़ोसी और साथी मजदूरों के अनुसार, वह बेहद शांत स्वभाव का आदमी था, जो परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करता था.किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा. पुलिस जांच में सामने आई बेवफाई की कहानी वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की.सलमान के रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि खुशनुमा का प्रेमी साबिर पिछले कई महीनों से उसके संपर्क में था.दोनों के बीच लगातार बातचीत और मुलाकातें होती थीं.कई बार मोहल्ले वालों ने भी सलमान को चेताया, लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि बच्चों की मां है, इसे संभाल लूंगा.मगर खुशनुमा की हरकतें नहीं बदलीं.कैराना के एसएचओ रवि चौहान ने बताया कि सबूतों के आधार पर खुशनुमा और साबिर दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.दोनों ने शुरू में आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में मोबाइल चैट्स और गवाहों के बयानों के सामने सच उगलना पड़ा. गिरफ्तारी और अदालत में पेशी कैराना पुलिस ने देर रात दोनों को गिरफ्तार किया.जांच में यह भी सामने आया कि खुशनुमा ने सलमान के साथ झगड़े के बाद उसे अपमानित करते हुए घर से निकाल दिया था और प्रेमी साबिर के साथ फरार हो गई थी.इसी के बाद सलमान ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला किया.पुलिस ने दोनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाना और षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया है.दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि खुशनुमा पूछताछ के दौरान बच्चों की मौत पर तो रो पड़ी, लेकिन पति सलमान की मौत को लेकर उसने कोई पछतावा नहीं जताया.वहीं साबिर ने कहा कि उसका खुशनुमा से कोई रिश्ता नहीं था, लेकिन मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और फोटो ने उसकी बात झूठी साबित कर दी.

सड़क पार कर रही महिला को वाहन ने कुचला, इलाके में गुस्सा

कोरबा कोरबा के पाली थाना क्षेत्र के चैतमा चौकी के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। एक अज्ञात वाहन ने महिला को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना कपोट गांव में हुई है। घटना के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया और उचित मुआवजे की मांग की। वहीं, तीन घंटे की मशक्कत के बाद चक्का जाम समाप्त किया गया। मृतक महिला की पहचान नवाडीह कपोट निवासी जमुना बाई पोर्ते के रूप में हुई है। परिजनों की माने तो रोज की तरह गुरुवार की सुबह घर से चाय नाश्ता कर गांव से लगे खेत को देखने के लिए जा रही थी इस दौरान तेज रफ्तार वाहन ने अपनी चपेट में ले लिया। गुस्साए लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। वहीं, चक्का जाम की सूचना पर कटघोरा थाना पाली थाना और चैतमा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी लेते हुए लोगों को समझाने का प्रयास किया। जहां तीन घंटे की मशक्कत के बाद चक्का जाम समाप्त किया गया। नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत करा पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद की बात कही।