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योगी का शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा पर तंज: ‘नाम भी ओसामा, काम भी वैसा!’ — RJD को सुनाई खरी-खोटी

सीवान  बिहार में चुनावी हलचल तेज है। छठ महापर्व खत्म होने के बाद राज्य में रैलियों का रेला है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को सीवान पहुंचे। यहां रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ ने चुनाावी रैली को संबोधित किया। रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने यहां पूर्व सांसद शाहबुद्दीन के बेटे और इस सीट से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी ओसामा साहेब पर निशाना साधा। योगी आदित्यनाथ ने ओसामा का नाम लिए बगैर कहा कि जैसा नाम वैसा काम। योगी आदित्यनाथ ने यहां राजद को जमकर सुनाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'मैं जैसे ही इस घरती पर आया हूं तो इंद्रदेव की बड़ी कृपा होने लगी है। इंद्रदेव सीवान जनपद की सभी सीटों को एनडीए को जीताने के लिए अपनी कृपा बरसा रहे हैं। जब मैं बिहार में आता हूं तो मुझे बिहार के गौरवशाली परंपरा का स्मरण होता है। बिहार की धरती शांति और ज्ञान की धरती है। जिस धरती ने भारत के गौरवशाली इतिहास में नालंदा विश्वविद्यालय हो, जिस धरती ने भगवन महावीर जैन को जन्म दिया। यहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर, जगजीवन राम जैसी हस्तियों को जन्म दिया। यह सभी महान विभूतियां बिहार से हैं फिर भी वो कौन लोग हैं जिन्होंने बिहार के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया? यह चुनाव उन्हीं लोगों के खिलाफ है। वर्तमान पीढी को बताने की एक लड़ाई है कि पिछले 20 साल में एनडीए की नीतीश कुमार की नेतृत्व की सरकार ने पीएम मोदी के मार्गदर्शन में जो उपलब्धियां हासिल की है वो नय बिहार है। डबल इंजन की सरकार बिहार की उसी पहचान को वापस लाने के लिए काम कर रही है।' योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'मैं जब रघुनाथपुर में आया तो मुझे आश्चर्य हुआ। यहां आकर मै्ंने देखा कि आरजेडी ने यहां से जो प्रत्याशी दिया है वो अपनी खानदानी आपराधिक पृष्ठभूमि के लिए इस भूमि पर ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया में कुख्यात रहा। नाम तो देखो ना। जैसा नाम वैसा काम। इसीलिए तो हमने यूपी में कहा कि अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस। योगी आदित्यनाथ ने राजद को घेरा राष्ट्रीय जनता दल पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जोरी टॉलरेंस के तहत आप देख रहे होंगे कि राजद और उनके लोग आज भी अयोध्या में रामजन्म भूमि पर भगवान श्रीराम का विरोध करते हैं। सीतामढ़ी और उसके आासपास के क्षेत्र मां जानकी के मंदिर का निर्माण, कॉरिडोर और उसके लिए किए जाने वाले विकास कार्यों का विरोध करते हैं। आरजेडी ने राम मंदिर के रथ को रोकने का पाप किया था। कांग्रेस कहती थी कि राम है ही नहीं। इनके पार्टनर समाजवादी पार्टी यूपी में रामभक्तों पर गोली चलाती है। जब भी इन्हें अवसर मिला तो एक ने बिहार में और एक ने यूपी में वहां के नौजवानों के सामने उनके पहचान का संकट खड़ा किया। योगी आदित्यनाथ ने एसिड कांड की दिलाई याद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एनडीए के जितने भी सहयोगी दल हैं इन सभी ने मिलकर तय किया है कि बिहार को अब जंगलराज की ओर नहीं जाने देना है। बिहार के अंदर कर्पूरी ठाकुर, बाबू जगजीवन राम और राजेंद्र प्रसाद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए ले जाना है। एनडीए विरासत और विकास के मुद्दे के साथ आपके सामने है। योगी आदित्यनाथ ने चर्चित तेजाब कांड का जिक्र करते हुए कहा कि यहां चांद बाबू के बेटे पर एसिड डालने का काम किया गया था। यह अपराधी फिर से जीवित ना होने पाए। यह कांग्रेस, आरजेडी और समाजवादी पार्टी को शोभा दे सकता है कि वो किसी पेशेवर माफिया को गले लगाकर किसी बाबर और किसी औरंगजेब की मजार में जाकर सजदा पढ़ें।  

योगी आदित्यनाथ की बड़ी सौगात: एक और शहर का नाम बदला, विपक्ष पर बोला हमला

लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी के मुस्तफाबाद में विश्व कल्याण आश्रम में आयोजित स्मृति प्राकट्योत्सव मेला-2025 में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने मुस्तफाबाद का नाम बदलकर कबीरधाम करने की घोषणा की और पूज्य संतों को नमन करते हुए डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण पर काम कर रही है, जबकि पहले यह पैसा "कब्रिस्तान की बाउंड्री" बनाने में खर्च होता था। कबीरधाम और धार्मिक स्थलों की पहचान बहाल मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने अयोध्या को फैजाबाद, प्रयागराज को इलाहाबाद और कबीरधाम को मुस्तफाबाद बनाया था, जिसे उनकी सरकार ने ठीक किया। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, "यह सब सेक्युलरिज्म के नाम पर किया जाता था, जो पाखंड है।" योगी ने संत कबीरदास की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा, "‘जाति पाति पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई,’ यह वाणी समाज की एकता और अखंडता की आधारशिला है। कबीर ने निर्गुण भक्ति की धारा प्रवाहित कर समाज की विसंगतियों को तोड़ा और आत्मा-परमात्मा का संबंध सरल शब्दों में समझाया।" उन्होंने गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए कबीर का दोहा उद्धृत किया, "‘गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पांव…’ यह आज भी हमें गुरु की महत्ता याद दिलाता है।" देश की एकता को तोड़ने वाली शक्तियों से सावधान रहें सीएम योगी ने चेतावनी दी कि समाज विरोधी ताकतें आस्था और जाति के नाम पर देश को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, "समय रहते कमजोरियों को न पहचाना गया, तो यह बीमारियां कैंसर बनकर समाज को खोखला कर देंगी। राष्ट्रभक्ति ही सभी समस्याओं का समाधान है।" उन्होंने जोर देकर कहा, "माता भूमि पुत्रोहम्… यह भूमि केवल मिट्टी नहीं, हमारी मातृभूमि और पितृभूमि है। इसकी सेवा ही सच्ची उपासना है।" भारत बनेगा तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 2014 से पहले देश भ्रष्टाचार, आतंकवाद और विभाजनकारी राजनीति के संकट से जूझ रहा था। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। लखीमपुर में विकास की नई धारा सीएम ने बताया कि सीमावर्ती जिला लखीमपुर खीरी में भी विकास की नई लहर चल रही है। गांव-गांव सड़कें बन रही हैं, मेडिकल कॉलेज स्थापित हो रहे हैं, एयरपोर्ट का विस्तार हो रहा है और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है। गोला गोकर्णनाथ धाम और कबीरधाम जैसे धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार से आस्था और पर्यटन दोनों को बल मिल रहा है। गो-सेवा और नेचुरल फार्मिंग पर बल मुख्यमंत्री ने संत असंगदेव जी महाराज की धर्म, नशा मुक्ति और राष्ट्र चेतना के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "नशा नाश का कारण है। विदेशी ताकतें हमारे युवाओं को बर्बाद करने की साजिश रच रही हैं। फोन का इस्तेमाल सीमित करें और आत्मविकास पर ध्यान दें।" उन्होंने गो-सेवा और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने की बात कही। योगी ने बताया कि सरकार हर गाय के लिए 1500 रुपये प्रतिमाह दे रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गोशालाओं की देखरेख करने और रासायनिक खेती को छोड़कर नेचुरल फार्मिंग अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "एक गाय 30 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त जैविक खाद दे सकती है।" कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने देशवासियों को छठ महापर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सद्गुरु कबीर पूज्य श्री असंगदेव जी धर्मशाला का भूमि पूजन भी किया। इस अवसर पर संत असंगदेव जी महाराज, मंत्री राकेश सचान, नितिन अग्रवाल, मन्नूलाल कोरी, विधायक अमन गिरी, रोमी साहनी, लोकेंद्र प्रताप सिंह, शशांक वर्मा, योगेश वर्मा, विनोद शंकर अवस्थी, मंजू त्यागी, सौरभ सिंह सोनू, महामंडलेश्वर प्रवक्तानंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संतजन मौजूद रहे।  

लखनऊ इकाई में उत्पादित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों के प्रथम बैच का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं सीएम योगी ने किया फ्लैग ऑफ

– एयरफ्रेम और एवियोनिक्स, वारहेड भवन में पीडीआई तथा ब्रह्मोस सिम्युलेटर उपकरणों का प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिसर में ही रुद्राक्ष के पौधे का वृक्षारोपण भी किया – स्टोरेज ट्रॉली प्रदर्शन और मोबाइल ऑटोनमस लॉन्चर का भी हुआ प्रदर्शन – डीजी (ब्रह्मोस) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जीएसटी का 40 करोड़ रुपये का बिल का सौंपा लखनऊ, राजधानी लखनऊ में शनिवार को आत्मनिर्भर भारत का एक नया अध्याय लिखा गया, जब ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड की लखनऊ इकाई में उत्पादित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच का फ्लैग ऑफ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। भारत माता की जय’ के जयघोष के बीच जब मिसाइलों का पहला जत्था रवाना हुआ तो समारोह गर्व, गौरव और देशभक्ति से गूंज उठा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यना ने कहा कि ब्रह्मोस केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' संकल्प को साकार करने का यह क्षण प्रफुल्लित करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल न केवल भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि दुनिया में अपने मित्र देशों की रक्षा करने का सबसे सक्षम हथियार भी है। ब्रह्मोस के माध्यम से भारत अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ मित्र राष्ट्रों की सुरक्षा जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम हो गया है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। सीएम योगी ने 2018 के पहले इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ में ही प्रधानमंत्री ने दो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की घोषणा की थी, जिसमें से एक उत्तर प्रदेश को मिला। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट के 6 नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। लखनऊ में ब्रह्मोस, झांसी में भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और अमेठी में एके-203 जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अब तक 2,500 एकड़ से अधिक लैंड इन 6 नोड्स में उपलब्ध कराई गई है, जिससे 15,000 से अधिक नौजवानों को नौकरियां मिली हैं। देश की सुरक्षा और रोजगार दोनों की पूर्ति कर रहा है उत्तर प्रदेश- सीएम उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस केंद्र में आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग डिग्रीधारक युवा काम कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा और रोजगार दोनों की पूर्ति कर रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। सीएम योगी ने बताया कि राज्य सरकार आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के साथ मिलकर दो ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित कर रही है, जिससे डिफेंस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह लखनऊ की भूमि अब राष्ट्र रक्षा, उद्योग, रोजगार और विकास के चारों आयामों को एक साथ साध रही है। यही उत्तर प्रदेश के बदलते चेहरे और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है।” लखनऊ की लैंड अब सोना उगल रही है- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि आज डीजी ब्रह्मोस ने 40 करोड़ का जीएसटी चेक सौंपा है। हर वर्ष 100 ब्रह्मोस मिसाइल बनेंगी, जो बढ़कर 150 तक पहुंचेंगी, तो 150-200 करोड़ जीएसटी मिलेगा। यह 'आम के आम और गुठली के दाम' जैसा है। लखनऊ की लैंड अब सोना उगल रही है। यह देश की सुरक्षा की पूर्ति कर रही है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर डीआरडीओ को और लैंड उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। आईआईटी कानपुर और बीएचयू के साथ दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम प्रगति पर है- सीएम सीएम योगी ने झांसी में 56,000 एकड़ के नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का जिक्र किया और कहा कि चित्रकूट में एक्सप्रेस-वे पर नोड विकसित हो रहा है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू के साथ दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम चल रहा है। उन्होंने मेक इन इंडिया को मेक फॉर द वर्ल्ड बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास से ब्रह्मोस लखनऊ में विकसित हुआ है, जो देश की खुशहाली को वितरित करने का माध्यम बना है। जब व्यक्ति सुरक्षित रहता है, तभी चैन की नींद सोता है। लखनऊ में बनी मिसाइल पूरे देशवासियों की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी है। फ्लैग ऑफ सेरेमनी के साथ विभिन्न कार्यक्रमों का हुआ आयोजन कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने बूस्टर भवन का उद्घाटन भी किया, जो ब्रह्मोस प्रोजेक्ट की क्षमता विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही दोनों ने बूस्टर डॉकिंग प्रक्रिया का प्रदर्शन भी देखा। इसी क्रम में एयरफ्रेम और एवियोनिक्स, वारहेड भवन में पीडीआई (प्री डिस्पैच इंस्पेक्शन) तथा ब्रह्मोस सिम्युलेटर उपकरणों का प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिसर में ही रुद्राक्ष के पौधे का वृक्षारोपण भी किया। इस दौरान स्टोरेज ट्रॉली प्रदर्शन और मोबाइल ऑटोनमस लॉन्चर का प्रदर्शन भी हुआ। कार्यक्रम के दौरान डीजी (ब्रह्मोस) डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चेक और जीएसटी बिल सौंपा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद बृजलाल, डॉ. दिनेश शर्मा, संजय सेठ, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक राजेश्वर सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि व रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अधिकारीगण मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर में प्रबुद्धजन संवाद संगम कार्यक्रम में की शिरकत

उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का दोहराया संकल्प, कहा- हर हाथ को काम, हर सर को छत, हर खेत में पानी हमारा संकल्प हर चेहरे पर खुशहाली और हर बेटी व व्यापारी को सुरक्षा सुनिश्चित करने का सरकार का है लक्ष्य : योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को भारत की अर्थव्यवस्था में अग्रणी फोर्स बनाने का उद्देश्य : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने भारत की सनातन परंपरा और धार्मिक सहिष्णुता को बताया वैश्विक दृष्टिकोण छात्रों और शिक्षकों को अनुशासन और गुरु के प्रति श्रद्धा बनाए रखने का किया आग्रह सीएम योगी ने विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए सुझाव भेजने का दिया आमंत्रण गाजीपुर में भुड़कुड़ा सिद्ध पीठ में रामाश्रय दास जी महाराज की प्रतिमा का सीएम योगी ने किया अनावरण गाजीपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को भुड़कुड़ा सिद्ध पीठ में आयोजित ‘प्रबुद्धजन संवाद संगम’ कार्यक्रम में कहा कि भारत की सनातन धर्म की परंपरा ने कभी भी उपासना विधि में कट्टरता नहीं दिखाई, और दुनिया आज तक धर्म और पंथ के अंतर को नहीं समझ पाई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बाबा साहेब के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द चोरी-छिपे डाला गया। मुख्यमंत्री ने अपने संकल्प को स्पष्ट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाया जाएगा, जहां हर हाथ को काम, हर सर को छत, हर खेत में पानी, हर चेहरे पर खुशहाली और हर बेटी व व्यापारी को सुरक्षा मिले। इस विकास के माध्यम से उत्तर प्रदेश भारत की अर्थव्यवस्था का अग्रणी फोर्स बनकर नेतृत्व करेगा। पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं रामाश्रय दास जी महाराज जनपद में आयोजित ‘प्रबुद्धजन संवाद संगम’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भुड़कुड़ा सिद्ध पीठ में पूज्य संत रामाश्रय दास जी महाराज की भव्य और दिव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने पीठाधीश्वर पूज्य संत श्री शत्रुघ्न दास जी महाराज, महाविद्यालय परिवार और क्षेत्रवासियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भुड़कुड़ा सिद्ध पीठ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, विशेषकर सतनामी संप्रदाय, से जुड़ा हुआ है। उन्होंने संत रामाश्रय दास जी महाराज की शिक्षाओं और उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि महाविद्यालय परिसर में उनकी मूर्ति स्थापित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा। जाति पाति पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई उन्होंने भारत की सनातन परंपरा, धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक ज्ञान को वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि जो मंदिर जाएगा वही हिंदू है और जो नहीं जाएगा वह नहीं। हमारी परंपरा सबको गले लगाती है। उन्होंने संत रामानंद के विचारों को भी उद्धृत किया- ''जाति पाति पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।" मुख्यमंत्री ने गाजीपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए महर्षि विश्वामित्र और भगवान राम के संबंध को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इसी परंपरा और ज्ञान के आधार पर गाजीपुर में महर्षि विश्वामित्र राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। ज्ञान के साथ पारंपरिक आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़ना आवश्यक योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों और छात्रों से आग्रह किया कि वे अनुशासन, गुरु और संतों के प्रति श्रद्धा बनाए रखते हुए शिक्षा और विकास की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान के साथ पारंपरिक आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़ना आवश्यक है, ताकि समाज और राष्ट्र का कल्याण हो। मुख्यमंत्री ने विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लक्ष्य को भी दोहराया और सभी संस्थाओं से सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्किल डेवलपमेंट, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में प्रदेश का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने महाविद्यालय और पीठ के सभी विद्यार्थियों, आचार्यों, भक्तों और अनुयायियों को दीपावली की मंगलमय शुभकामनाएं दीं और पूज्य संत रामाश्रय दास जी महाराज की प्रतिमा स्थापना का महत्व समझाया। इस अवसर पर पूज्य संत श्री शत्रुघ्न दास जी महाराज, प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, राज्यसभा सांसद संगीता बिंद बलवंत, सपना सिंह, विशाल सिंह चंचल, विधायक जखनिया बेदी राम, बीजेपी के पदाधिकारीगण सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, माधवाचार्य और रामानुजाचार्य के नाम पर होंगे श्रीराममंदिर के चारों महत्वपूर्ण द्वार

महान संतों के नाम पर जाने जाएंगे श्रीराममंदिर के चारो द्वार : योगी आदित्यनाथ  शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, माधवाचार्य और रामानुजाचार्य के नाम पर होंगे श्रीराममंदिर के चारों महत्वपूर्ण द्वार श्रीराममंदिर परिसर स्थित बृहस्पति कुंड पर तीन दक्षिण भारतीय संतों की प्रतिमाओं का मुख्यमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री ने किया अनावरण दक्षिण के महाकवि त्यागराज, पुरंदरदास और अरुणाचल कवि ने श्रीराम भक्ति का दक्षिण में किया विस्तार, स्थापित हुईं मूर्तियां   कार्यक्रम में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का संदेश हुआ प्रतिध्वनित, हजारों श्रद्धालुओं ने मूर्तियों के अनावरण का किया साक्षी भाव से स्वागत – हमारे संतों ने उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने का कार्य किया : सीएम योगी  – प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सपना : मुख्यमंत्री – राममंदिर आंदोलन में अग्रणी रहे दक्षिण भारत के श्रद्धालु, काशी तमिल संगमम उत्तर-दक्षिण की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक : सीएम योगी – जीएसटी रिफॉर्म से अर्थव्यवस्था को मिली ऊर्जा, वित्त मंत्री को यूपी की जनता की ओर से बधाई : योगी आदित्यनाथ – रामेश्वरम से लेकर अयोध्या तक श्रीराम की भक्ति ने देश को जोड़ा, हर भारतवासी को अपने पूज्य संतों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए : सीएम योगी अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अयोध्या के पवित्र बृहस्पति कुंड पर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदरदास और श्री अरुणाचल कवि की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संतों की भक्ति परंपरा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान का सशक्त संदेश गूंजता रहा।  चार प्रमुख द्वार अब भारत के चार महान संतों के नाम पर मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राममंदिर के चार प्रमुख द्वार अब भारत के चार महान संतों के नाम पर समर्पित होंगे, दक्षिण दिशा का द्वार जगद्गुरु शंकराचार्य जी, दक्षिण-पूर्व द्वार (गेट नंबर तीन) जगद्गुरु माधवाचार्य जी, उत्तर दिशा का द्वार जगद्गुरु रामानुजाचार्य जी और सुग्रीव किला मार्ग से प्रवेश द्वार जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के नाम पर जाना जाएगा। भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं तीनों संत मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह अवसर न केवल उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय एकता और समरसता की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम भी है। उन्होंने कहा कि इन तीन पूज्य संतों ने 15वीं से 18वीं सदी के बीच श्रीराम भक्ति में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया और आज उनकी प्रतिमाएं उनके आराध्य श्रीरामचरणों में स्थापित होना पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। त्यागराज महास्वामी को कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि यह स्थल देवगुरु बृहस्पति जी का पवित्र कुंड है और यहां आने वाले कोटि-कोटि श्रद्धालु अब हर वर्ष इन संतों के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि त्यागराज महास्वामी को कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने तेलुगु भाषा में हजारों भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान श्रीराम की आराधना को जन-जन तक पहुंचाया। श्री पुरंदरदास महास्वामी हरिदास सम्प्रदाय के प्रमुख संत मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्री पुरंदरदास महास्वामी को 1434 से 1564 तक कर्नाटक संगीत का जनक कहा जाता है। उन्होंने व्यापारी जीवन त्यागकर हरिदास सम्प्रदाय के प्रमुख संत के रूप में कन्नड़ भाषा में लगभग साढ़े चार लाख से अधिक भक्ति गीतों की रचना की। वहीं, श्री अरुणाचल कवि महास्वामी ने ‘रामनाटकम्’ जैसे तमिल काव्य के माध्यम से श्रीराम के आदर्शों का प्रसार किया। दक्षिण के रामभक्त भी कहते थे, 'राम लला हम आएंगे…' सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में पहले ही जगद्गुरु रामानुजाचार्य की प्रतिमा और लता मंगेशकर चौक की स्थापना की जा चुकी है। अब यह कार्यक्रम उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली नई कड़ी बन गया है। उन्होंने स्मरण कराया कि रामजन्मभूमि आंदोलन के समय दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे और नारा लगाते थे “राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” काशी तमिल संगमम एक सांस्कृतिक पुल सीएम योगी ने अपने भाषण में कहा कि काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक पुल का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी ने “काशी तमिल संगमम” के माध्यम से किया। संस्कृत और तमिल दोनों भाषाओं की समृद्ध धरोहर को जोड़ना भारत की आत्मा को एक सूत्र में पिरोने जैसा कार्य है। नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म ने नागरिकों को दी राहत  कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की भी सराहना करते हुए योगी ने कहा कि उन्होंने शारदीय नवरात्रि की प्रथम तिथि से देशभर में “नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म” लागू कर 140 करोड़ नागरिकों को राहत दी है, जिससे बाजार में नया उत्साह और मजबूती आई है। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह, रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र, श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, डॉ अमित सिंह चौहान, चंद्र भानु पासवान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश राज्यों से बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

वाराणसी में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस कॉन्क्लेव में बोले मुख्यमंत्री

यूपी को वैश्विक फूड बास्केट बनाना हमारा संकल्प : योगी आदित्यनाथ  वाराणसी में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस कॉन्क्लेव में बोले मुख्यमंत्री  योगी बोले- यूपी आज से तीन गुना अधिक उत्पादन करने में सक्षम  2029-30 तक वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का लक्ष्य, कृषि सेक्टर की अहम भूमिका  – ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर उपकरण का सीएम ने किया लोकार्पण – यूपी अकेले करता है भारत का 21% खाद्यान उत्पादन : सीएम योगी – 8 हजार साल पुराना है यूपी में धान की खेती का इतिहास : मुख्यमंत्री  – यूपी के पास 80% भूमि सिंचित : सीएम योगी – लखनऊ में बनेगा 250 एकड़ में सीड पार्क : मुख्यमंत्री – काला नमक चावल को भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में विश्व स्तर पर बढ़ावा : योगी आदित्यनाथ  वाराणसी अंतराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश को भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक फूड बास्केट के रूप में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर तकनीक और बीज उपलब्ध कराए जाएं तो प्रदेश आज से तीन गुना अधिक उत्पादन करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी ने लक्ष्य तय किया है कि 2029-30 तक प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाया जाएगा, जिसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरी (IRRI) और सीआईपी (CIP) जैसे संस्थानों के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। शिव और नंदी करते हैं उन्नत खेती के लिए प्रेरित योगी आदित्यनाथ ने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विश्वनाथ की नगरी और उनके सहयोगी वृषभ हमें उन्नत खेती की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि "अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्" की परंपरा को आगे बढ़ाना ही हमारा संकल्प है। उर्वरता, सिंचाई और धूप हैं भारतीय कृषि की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी कृषि के लिए उर्वरता, सिंचाई और पर्याप्त धूप सबसे आवश्यक हैं और इन तीनों दृष्टियों से भारत अत्यंत संपन्न है। देश के पास 17 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें से 60 फीसदी भूमि सिंचित है। यूपी तो अकेले देश का 21 फीसदी खाद्यान उत्पादन करता है। कृषि में हुए हैं क्रांतिकारी बदलाव योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते 11 सालों में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, कृषि बीमा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, लागत से डेढ़ गुना एमएसपी और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से जोड़ा गया है। धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन की खेती में यूपी अग्रणी मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पास 11 फीसदी भूभाग और 17 फीसदी जनसंख्या है, लेकिन यह अकेला राज्य 21 फीसदी खाद्यान उत्पादन करता है। धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन की खेती में यूपी अग्रणी है। कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान यूपी के पास राज्य सरकार के चार, केंद्र सरकार के दो और एक निजी कृषि विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहायता दे रहे हैं। 2018 में वाराणसी में ईरी का दक्षिण एशिया केंद्र खुलने के बाद धान की विभिन्न वैरायटी पर रिसर्च जारी है। काला नमक चावल और ऐतिहासिक खेती मुख्यमंत्री ने कहा कि काला नमक चावल भगवान बुद्ध द्वारा तीन हजार साल पहले दिया गया था। इसे हम भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में पूरी दुनिया में बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूपी में धान की खेती का 8 हजार साल पुराना इतिहास है। तंजावुर और रामनाथपुरम के शिलालेखों में प्राचीन भारत की उन्नत खेती के प्रमाण मिलते हैं। खाद्यान उत्पादन में हुई है पांच गुना वृद्धि आजादी के बाद यूपी में 11.77 मिलियन टन खाद्यान का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 60 ट्रिलियन टन हो गया है। रकबा भी 170 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 240 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यह पांच गुना की वृद्धि को दर्शाता है।  सीड पार्क और नई पहल की दी जानकारी मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर 250 एकड़ में सीड पार्क स्थापित किया जाएगा। यहां से जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए बेहतर बीज किसानों को  उपलब्ध कराए जाएंगे। डीजी ईरी यवोन पिंटो और डीजी सीआईपी डॉ साइमन हेक की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि आगरा में जल्द ही इंटरनेशनल पोटेटो सेंटर स्थापित होगा। ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का सीएम ने किया लोकार्पण कॉनक्लेव में आईआरआरआई और जेएनवीवी द्वारा विकसित बैट्री संचालित ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही धान की सीधी बुवाई, जीरो टिलेज गेहूं और समृद्धि धान नेटवर्क पर आधारित प्रकाशन सामग्री का विमोचन भी किया गया। लैब टू लैंड मॉडल मुख्यमंत्री ने उम्मीद जाहिर की कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर वैज्ञानिक अब केवल लैब तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर उतरकर रिसर्च का डेमॉन्स्ट्रेशन करेंगे ताकि किसानों तक नई तकनीक सीधे पहुंचे। उन्होंने कहा कि यूपी में 70 लाख हेक्टेयर में धान, 100 लाख हेक्टेयर में गेहूं और 29 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है। दलहन और तिलहन के लिए भी यहां व्यापक भूमि है। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र दयालु, बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र कुमार, डीजी ईरी यवोन पिंटो और डीजी सीआईपी डॉ साइमन हेक, श्रीलंका के कृषि सचिव डीबी विक्रमसिंघे, डायरेक्टर आईएसएआरसी डॉ सुधांशु सिंह सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  

वाराणसी में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस कॉन्क्लेव में बोले मुख्यमंत्री

 8 हजार साल पुराना है यूपी में धान की खेती का इतिहास : मुख्यमंत्री यूपी के पास 80% भूमि सिंचित : सीएम योगी लखनऊ में बनेगा 250 एकड़ में सीड पार्क : मुख्यमंत्री काला नमक चावल को भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में विश्व स्तर पर बढ़ावा : योगी आदित्यनाथ वाराणसी, अंतराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश को भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक फूड बास्केट के रूप में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर तकनीक और बीज उपलब्ध कराए जाएं तो प्रदेश आज से तीन गुना अधिक उत्पादन करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी ने लक्ष्य तय किया है कि 2029-30 तक प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाया जाएगा, जिसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरी (IRRI) और सीआईपी (CIP) जैसे संस्थानों के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। शिव और नंदी करते हैं उन्नत खेती के लिए प्रेरित योगी आदित्यनाथ ने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विश्वनाथ की नगरी और उनके सहयोगी वृषभ हमें उन्नत खेती की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि "अन्नं बहु कुर्वीत तद् व्रतम्" की परंपरा को आगे बढ़ाना ही हमारा संकल्प है। उर्वरता, सिंचाई और धूप हैं भारतीय कृषि की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी कृषि के लिए उर्वरता, सिंचाई और पर्याप्त धूप सबसे आवश्यक हैं और इन तीनों दृष्टियों से भारत अत्यंत संपन्न है। देश के पास 17 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें से 60 फीसदी भूमि सिंचित है। यूपी तो अकेले देश का 21 फीसदी खाद्यान उत्पादन करता है। कृषि में हुए हैं क्रांतिकारी बदलाव योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते 11 सालों में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, कृषि बीमा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, लागत से डेढ़ गुना एमएसपी और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से जोड़ा गया है। धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन की खेती में यूपी अग्रणी मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पास 11 फीसदी भूभाग और 17 फीसदी जनसंख्या है, लेकिन यह अकेला राज्य 21 फीसदी खाद्यान उत्पादन करता है। धान, गेहूं, गन्ना, आलू, दलहन और तिलहन की खेती में यूपी अग्रणी है। कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान यूपी के पास राज्य सरकार के चार, केंद्र सरकार के दो और एक निजी कृषि विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहायता दे रहे हैं। 2018 में वाराणसी में ईरी का दक्षिण एशिया केंद्र खुलने के बाद धान की विभिन्न वैरायटी पर रिसर्च जारी है। काला नमक चावल और ऐतिहासिक खेती मुख्यमंत्री ने कहा कि काला नमक चावल भगवान बुद्ध द्वारा तीन हजार साल पहले दिया गया था। इसे हम भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में पूरी दुनिया में बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूपी में धान की खेती का 8 हजार साल पुराना इतिहास है। तंजावुर और रामनाथपुरम के शिलालेखों में प्राचीन भारत की उन्नत खेती के प्रमाण मिलते हैं। खाद्यान उत्पादन में हुई है पांच गुना वृद्धि आजादी के बाद यूपी में 11.77 मिलियन टन खाद्यान का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 60 ट्रिलियन टन हो गया है। रकबा भी 170 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 240 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यह पांच गुना की वृद्धि को दर्शाता है। सीड पार्क और नई पहल की दी जानकारी मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर 250 एकड़ में सीड पार्क स्थापित किया जाएगा। यहां से जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए बेहतर बीज किसानों को  उपलब्ध कराए जाएंगे। डीजी ईरी यवोन पिंटो और डीजी सीआईपी डॉ साइमन हेक की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि आगरा में जल्द ही इंटरनेशनल पोटेटो सेंटर स्थापित होगा। ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का सीएम ने किया लोकार्पण कॉनक्लेव में आईआरआरआई और जेएनवीवी द्वारा विकसित बैट्री संचालित ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही धान की सीधी बुवाई, जीरो टिलेज गेहूं और समृद्धि धान नेटवर्क पर आधारित प्रकाशन सामग्री का विमोचन भी किया गया। लैब टू लैंड मॉडल मुख्यमंत्री ने उम्मीद जाहिर की कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर वैज्ञानिक अब केवल लैब तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर उतरकर रिसर्च का डेमॉन्स्ट्रेशन करेंगे ताकि किसानों तक नई तकनीक सीधे पहुंचे। उन्होंने कहा कि यूपी में 70 लाख हेक्टेयर में धान, 100 लाख हेक्टेयर में गेहूं और 29 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है। दलहन और तिलहन के लिए भी यहां व्यापक भूमि है। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र दयालु, बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र कुमार, डीजी ईरी यवोन पिंटो और डीजी सीआईपी डॉ साइमन हेक, श्रीलंका के कृषि सचिव डीबी विक्रमसिंघे, डायरेक्टर आईएसएआरसी डॉ सुधांशु सिंह सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

यूपीआईटीएस-2025: ट्रेड शो के हाल नंबर चार के स्टॉल 9 पर साचीज द्वारा प्रदेश की स्वास्थ्य उपलब्धियों और सशक्त स्वास्थ्य संरचना का किया गया प्रदर्शित

उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य के लोग प्रदेश की उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं को अपने प्रदेश में लागू करने के लिए जानकारी लेते नजर आए ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं भी चर्चा का केंद्र रहीं, जो उत्तर प्रदेश आठ साल पहले बीमारू राज्य के नाम से जाना जाता था, वर्तमान में उसी उत्तर प्रदेश की उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लोग लेते दिखे। इनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य के लोग जानकारी लेते हुए दिखाई दिये ताकि वह प्रदेश के उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं को अपना यहां भी लागू कर सकें। इस दौरान पूरे देश में सबसे अधिक आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थ कार्ड बनाने की प्रक्रिया की भी जानकारी ले रहे थे। अब तक 5.38 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए, देश में उत्तर प्रदेश कार्ड बनाने में अव्वल ट्रेड शो के हाल नंबर चार के स्टॉल नंबर 9 पर में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएआई) के तहत उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धियों और सशक्त स्वास्थ्य संरचना का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान साचीज़ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किए गए स्वास्थ्य सुधारों और उनके नेतृत्व में राज्य में किए जा रहे क्रांतिकारी प्रयासों को साझा किया।आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक उत्तर प्रदेश में लगभग 9 करोड़ लक्षित लाभार्थियों में से 5.38 करोड़ लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसके चलते उत्तर प्रदेश पूरे देश में इस मामले में प्रथम स्थान पर है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को मुफ्त इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदान करना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर किसी भी तरह का दबाव न पड़े। उत्तर प्रदेश में अब तक 87 प्रतिशत पात्र परिवारों में से कम से कम एक सदस्य का आयुष्मान कार्ड बन चुका है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। अस्पतालों, चिकित्सा उपकरण निर्माताओं और औषधि उद्योग से जुड़े निवेशकों को निवेश के लिए किया आमंत्रित प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना को प्राथमिकता दी और राज्य के सभी नागरिकों को इससे जोड़ने के लिए कठोर प्रयास किए। योगी सरकार की नीतियों और योजनाओं के चलते उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से सुधार हुआ है। उनके नेतृत्व में राज्य ने स्वास्थ्य अवसंरचना में वृद्धि की है और जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाई है। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना को राज्य के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम और अभियान चलाए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को हर संभव सहायता और प्रशिक्षण प्रदान किया ताकि योजना का पूरा लाभ सुनिश्चित किया जा सके। प्रदर्शनी में साचीज़ के सीईओ अर्चना वर्मा ने उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और वंचित परिवारों को न केवल मुफ्त इलाज दिया है, बल्कि उनकी ज़िंदगी में भी सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं। योजना के तहत बनाए गए आयुष्मान कार्डों ने लाभार्थियों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की हैं। साचीज़ के सीईओ ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने अस्पतालों, चिकित्सा उपकरण निर्माताओं और औषधि उद्योग से जुड़े निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य विभाग एवं साचीज़ द्वारा निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। योगी सरकार के नेतृत्व में पिछले आठ वर्षों में प्रदेश में निवेशकों के लिए पैदा हुए नए अवसर प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश की चिकित्सा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण दोहरी सफलता का प्रतीक है। एक ओर जहां गरीबों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य क्षेत्र के हितधारकों के लिए विकास और निवेश के नए रास्ते खुल रहे हैं। इस पहल से न केवल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बढ़ा है, बल्कि निवेशकों के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं। साचीज़ के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य बाज़ार के रूप में देखा जा सकता है, जो निवेशकों के लिए एक सशक्त और भरोसेमंद पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराता है। प्रदेश की बढ़ती स्वास्थ्य अवसंरचना ने ना केवल लाभार्थियों को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की हैं, बल्कि इसने चिकित्सा क्षेत्र में नए आयामों का भी निर्माण किया है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर, डायरेक्टर डीजीएमआईएस, नोडल अधिकारी साचीज़ डॉ. सचिन वैश्य, अमरेन्द्र सिंह महाप्रबंधक पॉलिसी एवं पब्लिक हेल्थ साचीज़, डॉ. रविकांत सिंह महाप्रबंधक संचालन साचीज़ और डॉ. नितिन गुप्ता टीम लीड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट सहित साचीज़ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। निवेशकों की पहली पसंद बन रहा उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी में आयुष्मान भारत योजना और योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में हुए बदलाव को प्रदर्शित किया गया। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे प्रदेश के गरीब और वंचित वर्ग को फायदा हुआ है। अब उत्तर प्रदेश न केवल एक सशक्त स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, बल्कि यह निवेशकों के लिए भी एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है।  

टेक्नोलॉजी के सहारे आकार लेगा नया यूपी, एआई व डीप टेक सेक्टर बनेगा भविष्य की रीढ़

विकसित यूपी@2047 : यूपी का नया अवतार – AI से जुड़े कारोबार टेक्नोलॉजी के सहारे आकार लेगा नया यूपी, एआई व डीप टेक सेक्टर बनेगा भविष्य की रीढ़  यूपी बनेगा AI और डीप टेक का ग्लोबल हब : सीएम योगी का विजन – लखनऊ और कानपुर में बनेंगी अत्याधुनिक AI सिटी – सेमीकंडक्टर और ईवी मैन्युफैक्चरिंग में यूपी अग्रणी बनने की तैयारी – टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर – साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन हब बनेगा यूपी – ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एनसीआर, लखनऊ और नोएडा शीर्ष गंतव्य – 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य लखनऊ  उत्तर प्रदेश अगले 22 वर्षों में देश और दुनिया के लिए एक टेक्नोलॉजी पॉवरहाउस के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन “विकसित यूपी @2047” प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने का है। उनका मानना है कि तकनीक के सहारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाकर न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि यूपी भारत के डिजिटल भविष्य की धुरी बनेगा। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि यूपी का नया अवतार तकनीक और नवाचार से ही बनेगा। साथ ही प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का भी माध्यम बनेगा। बीते 8 सालों में डिजिटल बदलाव 2017 से पहले की तस्वीर बेहद निराशाजनक थी। साल 2015-16 में प्रदेश के विद्यालयों में कम्प्यूटर की उपलब्धता मात्र 13.3 प्रतिशत थी। लेकिन बीते साढ़े आठ सालों में इस स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ। 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 40.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। आज प्रदेश के 25,790 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़, 880 ब्लॉक रिसोर्स सेंटरों में आईसीटी लैब्स और शिक्षकों के लिए 2.61 लाख से अधिक टैबलेट उपलब्ध हैं। वहीं स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत करीब 50 लाख युवाओं को टैबलेट-स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जबकि 2 करोड़ युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह पहल डिजिटल शिक्षा और स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। 2030 तक डिजिटल प्रदेश का खाका मुख्यमंत्री योगी ने 2030 तक यूपी को टेक्नोलॉजी हब बनाने का रोडमैप तैयार किया है। इसमें कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य शामिल हैं। लखनऊ और कानपुर में बनने वाली एआई सिटी प्रदेश को वैश्विक रिसर्च और इनोवेशन का हब बनाएगी। एनसीआर, लखनऊ और नोएडा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए देश के शीर्ष गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, हर मंडल में इनोवेशन इनक्यूबेटर स्थापित होंगे, जिससे जमीनी स्तर के युवाओं को अपने इनोवेशन को आगे ले जाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, यूपी सेमीकंडक्टर  के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। 2047 तक डीप टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी का विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाए। इसमें एआई, क्वांटम कम्प्यूटिंग, ब्लॉकचेन, एडवांस्ड रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और जीन एडिटिंग, नैनोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और ग्रीन टेक जैसी तकनीकें शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन सेक्टरों में महारथ हासिल करने से न केवल प्रदेश को रोजगार और निवेश मिलेगा, बल्कि यूपी भारत की डिजिटल क्रांति की धुरी बनेगा। रणनीतिक स्तंभ और फोकस एरिया योगी सरकार ने अपने विजन को तीन रणनीतिक स्तंभों पर आधारित किया है। इनमें एआई सिटी, ग्रीन आईटी और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी तथा स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल है। इन स्तंभों को मजबूती देने के लिए प्रदेश का फोकस एआई और डीप टेक इनोवेशन, टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी एवं डेटा प्रोटेक्शन हब बनाने पर होगा। साथ ही, योगी सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में पांच गुना वृद्धि हासिल की जाए। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि एआई, डीप टेक्नोलॉजी और उभरते सेक्टर ही 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। ‘विकसित यूपी @2047’ के तहत लखनऊ और कानपुर में बनने वाली एआई सिटी, सेमीकंडक्टर और ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब, ग्लोबल डेटा सेंटर, इनोवेशन इनक्यूबेटर और साइबर सिक्योरिटी हब जैसे कदम प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे, जिससे न सिर्फ युवाओं को ग्लोबल स्किल्स और रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश की जीडीपी को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर पर बनाए रखने की मजबूती भी मिलेगी। यही विजन 2047 तक यूपी को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की आधारशिला है।  

स्किल्ड युवा और गांव बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश के ध्वजवाहक

‘विकसित यूपी @2047’ : युवा को ज्ञान, सबको घरबार स्किल्ड युवा और गांव बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश के ध्वजवाहक 2047 तक यूपी को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में जुटे योगी आदित्यनाथ – हर परिवार को पक्का घर, हर गांव को बुनियादी सुविधाएं देने का संकल्प  – यूपी बनेगा स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड युवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता – कृषि अनुसंधान और फूड प्रोसेसिंग से बढ़ेगी किसानों की आय – पश्चिमांचल की तरह पूर्वांचल और बुंदेलखंड भी बनेगा विकास का मॉडल  – 2017 से पहले शिक्षा और गांवों में थी अव्यवस्था, अब बन रहा विकास का सेंटर – ग्रामीण आवास में आई क्रांति- 36.57 लाख घर स्वीकृत, 36.34 लाख हुए पूरे – 3310 आईटीआई और 2138 पॉलीटेक्निक से युवाओं को मिल रहे नए अवसर लखनऊ  उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक ‘विकसित यूपी’ के रूप में स्थापित करने का विजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तय किया है। इस विजन के मुख्य आधार में से एक है ग्रामीण युवा को उच्च शिक्षा के साथ ही ग्राम स्वच्छता एवं ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना। सरकार का मानना है कि यदि अगले 22 वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन किए जाएं तो प्रदेश 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनकर भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान देगा। 2017 से पहले की स्थिति साल 2017 से पहले प्रदेश उच्च शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई चुनौतियों से जूझ रहा था। शिक्षा व्यवस्था रोजगार उन्मुख नहीं थी और तकनीकी शिक्षा के संस्थान सीमित थे। प्रदेश में केवल 526 पॉलीटेक्निक और 2642 आईटीआई संचालित हो रहे थे। अनुसंधान और नवाचार का बुनियादी ढांचा भी कमजोर था। ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर भी उतनी ही चिंताजनक थी। लाखों परिवार पक्के मकानों से वंचित थे। गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल जैसी सुविधाओं का व्यापक अभाव था। ग्राम पंचायतें संसाधनों और क्षमता की कमी से जूझ रही थीं, जिससे योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख पाता था। 2017 से 2025 : विकास की नई दिशा योगी सरकार ने बीते साढ़े आठ वर्षों में उच्च शिक्षा और ग्रामीण विकास दोनों क्षेत्रों में ठोस कदम उठाए। "एक मंडल, एक विश्वविद्यालय" की दिशा में आगे बढ़ते हुए अब प्रदेश में 24 राज्य और 49 निजी विश्वविद्यालय हैं। इस दौरान 6 नए राज्य विश्वविद्यालय और 23 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। तकनीकी शिक्षा में भी बड़ा विस्तार हुआ। आईटीआई की संख्या बढ़कर 3310 और पॉलीटेक्निक संस्थानों की संख्या 2138 हो गई। टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ करार कर 150 से अधिक सरकारी आईटीआई को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया। गुणवत्ता सुधार के लिए 95 से अधिक संस्थानों को एनएएसी की मान्यता मिली और 67 संस्थान राष्ट्रीय रैंकिंग में शामिल हुए। युवाओं को डिजिटल युग से जोड़ने के लिए 49.86 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन भी वितरित किए गए। ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक बदलाव ग्रामीण अवसंरचना के क्षेत्र में सरकार ने करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने वाला काम किया। अब तक 56.90 लाख परिवारों को पक्के घर मिले हैं। पीएम आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 36.57 लाख घर स्वीकृत हुए और इनमें से 36.34 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है। गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। 165 ब्लॉक मुख्यालय दो लेन सड़कों से जुड़े, 1385 किलोमीटर नई सड़कें बनीं और 25 हजार किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण व मजबूतीकरण किया गया। जल सुरक्षा के लिए अमृत सरोवर बनाए गए और 550 ग्राम पंचायतों को अटल भूजल योजना से जोड़ा गया। पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 24,489 पंचायत भवन बनाए गए। हर ग्राम पंचायत को सचिवालय मिला और पंचायत सहायकों की नियुक्ति हुई। अब हर गांव में शासन की योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की मजबूत व्यवस्था है। मुख्यमंत्री का मिशन 'विकसित यूपी 2047' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन 'विकसित भारत @2047' को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश को ग्रोथ इंजन बनकर इसमें पूरा सहयोग देना होगा। पीएम मोदी के विजन को मिशन मोड में पूरा करने का संकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है। उन्होंने आगामी 22 वर्षों में यूपी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का रोडमैप स्पष्ट किया है। 2030 तक लक्ष्य है कि प्रदेश के गांव केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि उत्पादकता और निर्यात में भी अग्रणी बनें। इसके लिए सीड पार्क, उन्नत बीज, फसल विविधिकरण और फूड प्रोसेसिंग जैसी व्यवस्थाओं का विस्तार होगा। दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत 2047 तक अनाज, फल और सब्जियों की उत्पादकता को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाया जाएगा। आधुनिक कृषि अनुसंधान और नवाचार केंद्र स्थापित होंगे। दुग्ध और अंडा उत्पादन में यूपी को विश्व में शीर्ष पर पहुंचाया जाएगा और पशुधन विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही हर परिवार को पक्का मकान, अपशिष्ट प्रबंधन की आधुनिक प्रणाली, गरीबी का उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पूर्वांचल और बुंदेलखंड को पश्चिमांचल के बराबर लाकर क्षेत्रीय असमानता समाप्त करने का लक्ष्य है। 6 ट्रिलियन डॉलर की ओर प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। यह भारत की अनुमानित जीडीपी का 20 प्रतिशत होगा। इसके लिए 2025 से 2047 तक लगातार 16 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना जरूरी है। उच्च शिक्षा और कौशल विकास से तैयार कार्यबल घरेलू व वैश्विक उद्योगों को गति देगा। ग्रामीण अवसंरचना और कृषि उत्पादकता बढ़ने से आय और खपत में वृद्धि होगी। इन दोनों क्षेत्रों का संयुक्त योगदान ही यूपी को 26 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय के स्तर तक ले जाएगा।