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मनोज जरांगे ने BMC चुनाव से पहले दी नई चुनौती, फडणवीस के मंत्री पहुंचे समझाने

मुंबई महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने एक बार फिर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर मनोज जरांगे से बातचीत करने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। जरांगे बुधवार की सुबह जैसे ही मुंबई के लिए रवाना हुए। राज्य की फडणवीस सरकार ने शिवनेरी में उनसे मिलने के लिए एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। दरअसल, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे 29 अगस्त से मुंबई में अपना आंदोलन शुरू करने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख और राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल का फोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया था कि सरकार की एक टीम चर्चा के लिए पुणे जिले के शिवनेरी पहुंचेगी। जरांगे ने पत्रकारों को बताया, ‘‘विखे पाटिल द्वारा भेजा गया प्रतिनिधिमंडल शिवनेरी आएगा। सरकार ने बातचीत करने की इच्छा जताई है, लेकिन मुंबई आंदोलन पर हमारा रुख अपरिवर्तित है।’’ इस बीच, विखे पाटिल ने कहा कि सोमवार को हुई कैबिनेट उप-समिति की पहली बैठक में मराठा समुदाय के करीबी रिश्तेदारों को आरक्षण का लाभ देने से संबंधित जरांगे की मांगों पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि मराठा आरक्षण पर शिंदे समिति को छह महीने का विस्तार दिया गया है, जिसकी मांग जरांगे ने पहले भी की थी। विखे पाटिल ने कहा, ‘‘उप-समिति ने अपनी पहली ही बैठक में इस मांग को स्वीकार कर लिया।’’ जरांगे मराठा समुदाय को कुनबी जाति (अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल एक जाति) के रूप में मान्यता दिलाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, ताकि उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिल सके। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जरांगे से मंगलवार को अनुरोध किया था कि वह 27 अगस्त से शुरू हो रहे गणेश उत्सव के दौरान मुंबई में प्रदर्शन करने की अपनी योजना पर फिर से विचार करें। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें रोकने के प्रयासों के बावजूद जरांगे ने घोषणा की है कि वह 29 अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण के लिए फिर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।  

गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन

योगी सरकार में देश के दिग्गज निवेशकों को भाया गोरखपुर गोरखपुर में अडानी समूह और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर ने भी उद्योग लगाने को ली जमीन पेप्सिको का बॉटलिंग प्लांट पहले से उत्पादनरत, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी मांगी औद्योगिक जमीन वर्तमान वित्तीय वर्ष में 54 नई यूनिट्स के लिए गीडा ने किया 182 एकड़ भूमि का रिकार्ड आवंटन गोरखपुर  दशकों तक जिस गोरखपुर में स्थानीय पूंजीपति भी औद्योगिक निवेश करने से घबराते थे, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार की प्रोत्साहनपरक नीतियों, कारोबारी सुगमता और शानदार कनेक्टिविटी से अब वहां नामी कंपनियों के आने की होड़ सी दिखती है। निवेशकों की डिमांड के अनुरूप गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने न केवल लैंड बैंक समृद्ध किया है बल्कि साल दर साल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी तेज हुआ है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में तो गीडा ने अब तक 54 नई यूनिट्स के लिए रिकार्ड 182 एकड़ भूमि का आवंटन किया है। इससे 5800 करोड़ रुपये के नए पूंजी निवेश के साथ 8500 लोगों के लिए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।  लंबे दौर तक पहचान को जूझता रहा गोरखपुर अब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के मामले में मजबूत होकर औद्योगिक नक्शे पर भी चमक गया है। जिस जिले से उद्यमियों ने मुंह फेर लिया था, वहां 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से औद्योगिक प्रगति का ऐसा माहौल बनना शुरू हुआ कि देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां, यहां तक कि मल्टीनेशनल भी इंडस्ट्री लगा रही हैं।  औद्योगिक प्रगति के नए कालखंड में सिर्फ गत पांच साल की बात करें तो इस दौरान गीडा को 9445 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले और इसके जरिये 22922 रोजगार सृजन संभव हुआ। इसमें मल्टीनेशनल ब्रांड पेप्सिको, केयान डिस्टिलरी, ज्ञान डेयरी, टेक्नोप्लास्ट और केंद्रीय भंडारण निगम, कपिला कृषि उद्योग, एपीएल अपोलो ट्यूब्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं।  गोरखपुर में अडानी समूह ने अंबुजा ब्रांड सीमेंट फैक्ट्री की नई यूनिट और कोका कोला के प्रमुख बॉटलर अमृत बॉटलर्स ने भी यूनिट लगाने को जमीन ले ली है। यही नहीं, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और श्री सीमेंट्स ने भी निवेश की उत्सुकता दिखाते हुए गीडा से औद्योगिक जमीन मांगी है। श्री सीमेंट्स की टीम पहले ही जमीन देखने के लिए दौरा कर चुकी है जबकि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रतिनिधि मंगलवार को विजिट पर आए थे। अपने पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्र के साथ गीडा ने गोरखपुर के दक्षिणांचल में धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप को भी औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है। गत दिनों यहां दो बड़े औद्योगिक निवेश के लिए भूमि का आवंटन किया जा चुका है। गीडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक का कहना है कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर में निवेश और औद्योगिक विकास का शानदार इको सिस्टम तैयार हुआ है। गीडा द्वारा निवेशकों की मांग और पसंद के अनुरूप जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। इसका नतीजा है कि यहां औद्योगिक निवेश लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को आवंटित जमीन से प्रस्तावित निवेश श्रेयश डिस्टिलरीज               2667 करोड़ रु. अंबुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप)    1400 करोड़ रु. अमृत बॉटलर्स (कोका कोला)  800 करोड़ रु. केयान डिस्टिलरीज               600 करोड़ रु. विजन परेन्टल (फार्मास्युटिकल)100 करोड़ रु.   आगामी प्रस्तावित निवेश प्रस्ताव रिलायंस सीपीएल      1000 करोड़ रु. श्री सीमेंट्स                500 करोड़ रु. लाइफकेयर्स हॉस्पिटल   500 करोड़ रु. ईएसआईसी                150 करोड़ रु. डीपीएस                       50 करोड़ रु.

जनगणना की तैयारी शुरू, एमपी सरकार ने बनाई हाईपावर स्टेट लेवल कमेटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकार ने जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है. प्रदेश भर में जनगणना को लेकर सरकार ने हाईपावर स्टेट लेवल कमेटी बनाई है. स्टेट लेवल कमेटी के लिए मुख्य सचिव को अध्यक्ष बनाया गया है. 6 एसीएस, 3 पीएस और 15 अधिकारियों की कमेटी बनी है. प्रदेश में 2027 में होनी वाली जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में साल 2026 में मकानों की संख्या की जानकारी होगी इकट्ठा की जाएगी. 30 दिनों में कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. दूसरे चरण में 20 दिनों के भीतर जनगणना की रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इसके साथ ही जनगणना के लिए विभाग मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स का भी प्रशिक्षण होगा. 31 दिसंबर 2025 तक सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी.31 दिसंबर 2025 तक सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी कर ली जाएगी। मध्य प्रदेश सरकार इस जनगणना को समयबद्ध और व्यवस्थित रूप से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य अप्रैल से सितंबर 2026 के मध्य, राज्य शासन द्वारा निर्धारित 30 दिवस की अवधि में संपन्न किया जाएगा। द्वितीय चरण अंतर्गत जनसंख्या की गणना का कार्य नौ से 28 फरवरी 2027 की अवधि में किया जाएगा। जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 की रात्रि 12 बजे होगी। मध्य प्रदेश शासन ने मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के लिए राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेश में जनगणना के राष्ट्रीय महत्व के कार्य के सुचारू एवं सफल संचालन करेगी एवं जनगणना कार्य निदेशालय एवं राज्य शासन के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय एवं योजनाबद्ध रूप से कार्य करेगी। इन्हें दी गई जिम्मेदारी समिति में अपर मुख्य सचिव गृह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नगरीय विकास एवं आवास, सामान्य प्रशासन, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी, वित्त, प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, राजस्व, सचिव, स्कूल शिक्षा, जनसंपर्क, अपर सचिव गृह विभाग एवं नोडल अधिकारी निदेशक एनआईसी सदस्य होंगे। निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मप्र भोपाल को संयोजक/सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति दोनों चरणों में शासन के संबंधित विभागों के मध्य अपेक्षित सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने का कार्य करेगी। समिति की बैठक में जनगणना कार्य के लिए लगाए जाने वाले कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना, जनगणना के मास्टर ट्रेनर फील्ड ट्रेनर्स और फील्ड स्टाफ का प्रशिक्षण निर्धारित कार्यक्रम अनुसार आयोजित करना। 31 दिसंबर 2025 तक प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं के परिवर्तन संबंधी समस्त प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाना इत्यादि बिंदुओं पर निर्णय लिया जाएगा। समिति का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। डिजिटल प्रक्रिया होगी जनगणना की पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया होगी, जिसमें प्रगणक मोबाइल पर डाटा एकत्र करेंगे और जनता को स्व-गणना करने का विकल्प भी दिया जाएगा। जनगणना के समस्त फील्ड कार्य की सतत निगरानी के लिए भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा एक वेब पोर्टल सीएमएमएस विकसित किया गया है।

मोहन भागवत का बड़ा बयान: हिंदू राष्ट्र सत्ता की राजनीति से अलग

नई दिल्ली ऐसे समय में जब देश में हिंदू राजनीति अपने चरमोत्कर्ष की ओर जा रही हो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का मंगलवार को दिया गया भाषण महत्वपूर्ण हो जाता है. भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र शब्द का सत्ता से कोई मतलब नहीं है. भाजपा सरकार पर विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि वह इस विचारधारा को सत्ता पाने और उसमें बने रहने के औजार के रूप में इस्तेमाल करती है. आम तौर पर यह माना जाता रहा है कि संघ बीजेपी को समय समय पर बौद्धिक खुराक देता रहा है. अपने तमाम मतभेदों के बावजूद संघ और बीजेपी एक बिंदु पर जाकर एक हो जाते हैं. जाहिर है कि भागवत का कथन सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि संघ की मूल वैचारिक धारा को तो व्यक्त करता ही है देश में सत्तासीन बीजेपी सरकार के लिए एक दिशा का निर्धारण भी करता है. पर सवाल यह है कि संघ प्रमुख के इस बयान के मायने क्या हैं?  क्या यह सीधे -सीधे बीजेपी नेताओं को संदेश देता है? राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भागवत का यह ताज़ा बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष भाजपा पर लगातार यह आरोप लगा रहा है कि वह बहुसंख्यकवाद और ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है. भाजपा लगातार दूसरी बार केंद्र में सत्तासीन है और कई राज्यों में भी उसके हाथ में ताकत है. ऐसे में संघ प्रमुख का यह कहना कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ सत्ता से नहीं है, एक राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है. इसके साथ ही इस तरह भी देखा जा सकता है कि संघ अब बीजेपी को हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को थोड़ा नरम करके चलने का संकेत देना चाहता हो. आरएसएस अपनी स्थापना के शुरुआती दिनों से ही हिंदू राष्ट्र की बात पर मुखर रहा है. गोलवलकर, जिन्हें गुरुजी कहा जाता है ने इसे परिभाषित करते हुए कहा था कि भारत की आत्मा हिंदू है और यहां की संस्कृति की जड़ें हिंदुत्व से निकली हैं. संघ का शुरू से ही मानना रहा है कि हिंदू शब्द सिर्फ धार्मिक नहीं है. इसमें सभ्यता, परंपरा, जीवनशैली और सामाजिक मूल्य सभी शामिल हैं. यही कारण है कि संघ हमेशा कहता रहा कि मुसलमान, ईसाई, पारसी या अन्य धार्मिक समूह भी इस राष्ट्र के उतने ही हिस्से हैं, जितने हिंदू.  संघ अपनी पुरानी लाइन पर] बीजेपी के लिए इस बयान की टाइमिंग महत्वपूर्ण इसलिए यह बिल्कुल सीधा और साफ है कि भागवत का बयान संघ की पुरानी लाइन को ही दोहराता हैृ.चूंकि आरएसएस सीधे सत्ता की राजनीति में शामिल नहीं होता.  संघ की असली ताकत समाज-निर्माण, शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक कार्य में है. इसलिए संघ प्रमुख के इस बात में कुछ भी नया नहीं है कि हिंदू राष्ट्र का लक्ष्य संसद में बहुमत पाना नहीं है, बल्कि समाज को ऐसा बनाना है जिसमें नैतिकता, समरसता और सांस्कृतिक एकता हो. हां लेकिन उनकी इस बात की टाइमिंग महत्वपूर्ण है. यह हो सकता है कि संघ प्रमुख बीजेपी के लिए कोई सीमा रेखा खींच रहे हैं या अल्पसंख्यकों को कोई संदेश दे रहे हों. अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर बीजेपी से नरम रुख चाहता है संघ दरअसल भारत में हिंदू राष्ट्र का सीधा संबंध अक्सर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना से लिया जाता है. विपक्ष इसे बहुसंख्यकवादी एजेंडा मानता है. यही कारण रहा है कि कांग्रेस नेताओं के मुंह से बीजेपी के बजाय आरएसएस के लिए ज्यादा अपशब्द निकलता रहा है. शायद यही कारण है कि भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र का सत्ता से कोई संबंध नहीं है तो यह संदेश जाता है कि संघ का उद्देश्य किसी पर वर्चस्व थोपना नहीं है. बल्कि यह अवधारणा सबको साथ लेकर चलने वाली सांस्कृतिक पहचान की है. जरूरी बात यह है कि संघ यह बात बार-बार क्यों दुहरा रहा है. कहीं यह बीजेपी को अगले विधानसभा चुनावों के लिए इशारा तो नहीं है  . क्योंकि भारतीय जनता पार्टी बिहार और बंगाल विधानसभा चुनावों में डेमोग्रेफी चेंज और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अल्पसंख्यकों पर लगातार जुबानी हमले कर रही है. हो सकता है कि संघ यह चाहता हो कि बीजेपी को अपने रुख में थोड़ी नरमी लानी चाहिए. बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी फोकस जरूरी भागवत का बयान भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से यह याद दिलाता है कि संघ की दृष्टि सत्ता से आगे है. भाजपा हिंदू राष्ट्र को राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल सत्ता हासिल करने के लिए कर सकती है. भागवत का यह बयान केवल वैचारिक नहीं बल्कि जमीनी राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है .क्योंकि बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि देश में बेरोजगारी, किसान संकट जैसे मुद्दे हिंदू-मुसलमान की राजनीति के चलते गौण हो गए हैं. संघ शायद यह संदेश देना चाहता है कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ इन समस्याओं से मुंह मोड़ना नहीं बल्कि इन्हें समाज-आधारित समाधान देना है. भागवत के इस उपदेश का भविष्य में ये असर हो सकता है. -भाजपा-विरोधी दलों का आरोप कमजोर हो सकता है कि हिंदू राष्ट्र सिर्फ सत्ता हथियाने का औजार है. -भाजपा को अपनी भाषा और नीतियों में “समावेशिता” दिखानी पड़ सकती है. -अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश भी जाएगा कि भारत का राष्ट्रवाद अधिनायकवादी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और समावेशी है. -भागवत का कहना है कि स्वाभाविक धर्म समन्वय है संघर्ष नहीं है. इससे कम से कम हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म में तो समन्वय दिखाई ही देगा. राष्ट्रवादी मुसलमानों में भी हिंदू धर्म के साथ समन्वयव की उम्मीद जगेगी.

स्टालिन की मौजूदगी से सियासी पारा चढ़ा, भाजपा ने तेज किया हमला

नई दिल्ली नई दिल्ली बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान अभी भले ही ना हुआ हो लेकिन सियासी पारा चरम पर है। एनडीए और महागठबंधन के नेता एक दूसरे पर जमकर सियासी तीर छोड़ रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और राजद पर करारा हमला बोला है। महागठबंधन की मतदाता अधिकार यात्रा में शामिल होने के लिए बिहार पहुंचे एमके स्टालिन को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल बिहार के 'गौरव और स्वाभिमान' का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन बार-बार ऐसे नेताओं को बिहार बुला रहा है जिन्होंने पहले बिहारी समाज का मजाक उड़ाया था। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार के लोगों को गाली देने वालों को राज्य में प्रचार करने के लिए बुला रहे हैं। वे बिहार के गौरव और स्वाभिमान का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों ने बिहारियों का मजाक उड़ाने वाले नेताओं को राज्य में 'मतदाता अधिकार यात्रा' अभियान में भाग लेने के लिए बार-बार आमंत्रित किया है। इस दौरान उन्होंने बिहारियों को लेकर कांग्रेस नेताओं के पूर्व में दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी, प्रियंका वाड्रा के बाद अब उन्हें स्टालिन मिल गए हैं। रेवंत रेड्डी, जिन्होंने पहले बिहारी डीएनए का मजाक उड़ाया था। वहीं, प्रियंका वाड्रा, जिन्होंने चरणजीत चन्नी द्वारा बिहारियों को गाली दिए जाने पर बेशर्मी से ताली बजाई थी। आगे उन्होंने कहा कि डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर भी निशाना साधा। जिनकी पार्टी ने बिहारियों पर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। स्टालिन की पार्टी के नेता ने कहा था कि बिहार के लोग सिर्फ शौचालय साफ करने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है। यह आरजेडी-कांग्रेस की मानसिकता है। मेहनतकश बिहारी गाली खाने के लिए निशाना बनते हैं, जबकि अवैध बांग्लादेशियों को वोट बैंक माना जाता है। विपक्ष ने भी किया पलटवार इस बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने एनडीए पर तीखा हमला बोला है। उन्होने कहा कि एनडीए का मतलब है कि नहीं देंगे अधिकार। जनता जानती है कि वोट चोरी हो रही है, लेकिन इस बार जनता अपने वोट की रक्षा करेगी। बीजेपी-एनडीए को करारी हार मिलेगी। वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार जनता के असली मुद्दों- महंगाई, बेरोजगारी, पलायन और आर्थिक संकट को सुलझाने में विफल रही है और अब वोट चोरी की साजिश रच रही है।

यात्रियों के लिए खुशखबरी: झांसी-पुरी स्पेशल ट्रेन 19 सितंबर से 29 नवंबर तक

झांसी त्योहारी सीजन को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए 19 सितंबर से लेकर 29 नवंबर के बीच 11 फेरों के लिए वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-पुरी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाएगा। यात्रियों को जानकारी के लिए बता दें कि ये ट्रेन झांसी से ग्वालियर, भिंड, इटावा होकर संचालित की जाएगी। इस ट्रेन में दो एसएलआर, दो सेकंड एसी, पांच थर्ड एसी, छह इकॉनमी और चार स्लीपर कोच रहेंगे। इन स्टेशनों से गुजरेगी ट्रेन 01929 झांसी-पुरी साप्ताहिक स्पेशल हर शुक्रवार को सुबह 11.55 बजे झांसी से रवाना होकर दतिया, डबरा होते हुए दोपहर 1.25 बजे ग्वालियर आएगी। ये ट्रेन मालनपुर, सोनी, इटावा, गोविंदपुरी, फतेहपुर, सूबेदारगंज, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, गया, कोडरमा, पारसनाथ, गोमोह, आद्रा, बांकुर, विष्णुपुर, मिदनापुर, हिजली, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, कटक, भुवनेश्वर, खुर्दा रोड होते हुए शनिवार रात 8.15 बजे पुरी पहुंचेगी। वहां से ये ट्रेन रात में 11.45 बजे रवाना होकर विभिन्न स्टेशनों से होते हुए सोमवार की सुबह 8.25 बजे ग्वालियर आएगी। यहां से रवाना होकर ट्रेन सुबह 11.15 बजे झांसी स्टेशन पहुंचेगी। ये ट्रेन भी चलेगी यात्रियों के लिए 08630 गोरखपुर-रांची 19 अक्तूबर से दो नवंबर तक हर रविवार, 04214 लखनऊ-टाटानगर स्पेशल 24 सितंबर से 28 नवंबर तक सप्ताह के हर बुधवार और शुक्रवार, 04213 टाटानगर-लखनऊ स्पेशल 25 सितंबर से 29 नवंबर तक, 06063 कोयंबत्तूर-धनबाद स्पेशल पांच सितंबर से 28 नवंबर तक हर शुक्रवार, 06064 धनबाद-कोयंबत्तूर स्पेशल आठ सितंबर से एक दिसंबर तक हर सोमवार को चलेगी।

CJI का गुस्सा उफन पड़ा, जमानत रोके जाने पर बोले—व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने सीबीआई से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा एक आरोपी की जमानत याचिका पर 43 बार रोक लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा का वक्त हिरासत में बिता चुका है, इसलिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में इस तरह बार-बार जमानत स्थगन स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने अभियुक्त रामनाथ मिश्रा को जमानत देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में अदालतों को अत्यंत शीघ्रता से विचार करना चाहिए। सीजेआई ने मामले में कहा, “हमने बार-बार यह टिप्पणी की है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों पर अदालतों द्वारा अत्यंत शीघ्रता से विचार किया जाना चाहिए… व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में, हाई कोर्ट्स से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वे मामले को इतने लंबे समय तक लंबित रखें और समय-समय पर सुनवाई स्थगित करने के अलावा कुछ न करें।” ऐसी प्रवृति हम पसंद नहीं करते: SC पीठ ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “मौजूदा मामले में 43 बार जमानत स्थगित किया जा चुका है। हम उच्च न्यायालय द्वारा किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामले को इतनी बड़ी संख्या में जमानत स्थगित करने की प्रवृत्ति को पसंद नहीं करते। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर तुरंत शीघ्रता से गौर किया जाना चाहिए।” CBI ने फिर किया जमानत का विरोध, SC ने नहीं मानी दलील सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि हाई कोर्ट में जमानत याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान शीर्ष अदालत द्वारा अगर जमानत दी गई तो इससे एक गलत मिसाल कायम होगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने CBI की इस दलील पर ध्यान नहीं दिया और कहा कि अभियुक्त पहले ही साढ़े तीन साल से ज़्यादा समय हिरासत में बिता चुके हैं और उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 43 बार स्थगित हो चुकी है। ऐसे में जमानत नहीं देना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा। इसी मामले में पहले भी HC को फटकार लगा चुका है SC दिलचस्प बात यह है कि शीर्ष अदालत ने इसी मामले में एक सह-अभियुक्त को 22 मई, 2025 को ज़मानत दे दी थी, जब उसे पता चला था कि उच्च न्यायालय ने उसकी ज़मानत याचिका पर 27 बार सुनवाई स्थगित कर चुका है। शीर्ष अदालत ने कहा, "याचिकाकर्ता को निचली अदालत की संतुष्टि के लिए ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।"  

मांगें पूरी करने पर अड़े जूनियर डॉक्टर, दूसरे दिन भी बंद रहा अस्पताल

पटना बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आज भी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। जूनियर डॉक्टर स्टायपेंड बढ़ोतरी की मांग लेकर आज भी प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका कहना है कि हमलोगों का हर तीन साल में इंटर्नशिप स्टायपेंड का पुनरीक्षण होना चाहिए, लेकिन लंबे समय से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमको महज 18 से 20 हजार रुपये मासिक स्टायपेंड मिल रहा है। इतने कम स्टायपेंड में हमारा गुजारा नहीं हो रहा है। पिछले कई माह से स्टायपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसे बढ़ाया नहीं गया है। पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि उनका प्रतिमाह स्टाइपेंड बढ़ाया जाय। उनके अनुसार वेलोग प्रति दिन 12 से 18 घंटे तक काम करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें मात्र 20,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है। इस महंगाई में यह राशि काफी काफी कम है, इसलिए उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। जूनियर डॉक्टरों ने सरकार से मांग पूरी करने की अपील की है। बढ़ी मरीजों और परिजनों की परेशानी जूनियर डॉक्टरों के अचानक हड़ताल से दूसरे दिन भी ओपीडी सेवा पर काफी असर पड़ा। इलाज कराने आये मरीज और उनके परिजनों ने काफी नाराजगी दिखी। उनका कहना है कि प्रदर्शन कोई करे और खामियाजा हमलोगों को भुगतना पड़े, यह गलत है। हमलोगों काफी दूर से आए हैं लेकिन ओपीडी में डॉक्टर्स ही नहीं हैं।  

कांग्रेस छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची जांच के लिए चलाएगी बड़ा अभियान

रायपुर  कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा शुरू किया गया ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ अभियान अब छत्तीसगढ़ में भी विस्तार लेगा। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने जिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पत्र जारी कर 2023 के विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट की जांच करने के निर्देश दिए हैं। राज्य के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट की गहन जांच के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं को सक्रिय करने को कहा गया है, ताकि मतदाता सूची में किसी भी तरह की अनियमितता को उजागर किया जा सके। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वोटर लिस्ट की जांच के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें डुप्लीकेट मतदाता, फर्जी या अमान्य पते, एक ही पते पर असामान्य रूप से अधिक मतदाता, अमान्य तस्वीरें और फॉर्म 6 के दुरुपयोग की जांच शामिल है। इन बिंदुओं के आधार पर कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची का विश्लेषण करने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को देने के लिए कहा गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ अभियान छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने बताया कि यह अभियान पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया है, जिन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र में वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ में भी मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे जांच में पाई गई अनियमितताओं को उजागर करें और इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपें। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर साधा निशाना छत्तीसगढ़ कांग्रेस के इस अभियान पर राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह कदम उनकी हताशा और मति भ्रम को दर्शाता है। साव ने वोट चोरी के आरोप को लोकतंत्र, संविधान और जनता के निर्णय का अपमान बताया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में बूथ कैप्चरिंग और वोट चोरी जैसी घटनाएं आम थीं, और अब अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए कांग्रेस इस तरह के निराधार आरोप लगा रही है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह बोले- मप्र में 30 तालाबों का निर्माण, मछली पालन होगा प्रोत्साहित

  दतिया  दतिया में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि अत्याधुनिक पशु अस्पताल में यूपी और एमपी के किसानों के पशुओं का इलाज मिलेगा। उन्होंने कहा कि जलवायु के परिवर्तन से निपटने के लिए 14 और 15 सितंबर को पूसा में रबी कॉफ्रेंस आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान, अनियमित बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। ऐसी किस्मे विकसित की जा रही हैं, जो बदलते जलवायु में अनुकूल हों और ऊंचे तापमान में भी बेहतर पैदावार दे। साथ ही भविष्य में संभावित बीमारियों से बचाव के लिए नई किस्मों पर काम चल रहा है। 30 तालाबों का निर्माण फिसरीज अस्पताल द्वारा परिसर में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 30 तालाबों का निर्माण किया जाएगा। उधर तालाबों के निर्माण के साथ-साथ एक हेचरी की स्थापना भी की जा रही है। आगामी दिनों में मछली के बीज भी तैयार किए जाएंगे। जिससे किसान आर्थिक तौर पर सशक्त होंगे। वहीं कालेज में पढ़ने वाले छात्रों को भी मछली के प्रजनन की वैज्ञानिक प्रक्त्रिस्या को सीखने के लिए प्रायोगिक ज्ञान भी मिलेंगे। वन्य जीवों का भी होगा इलाज उधर पशुओं के एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, और ऑपरेशन की सुविधा के साथ-साथ वन्य जीवों का भी यहां इलाज हो सकेगा। वहीं शिवपुरी, श्योपुर, और पन्ना तक के वाइल्ड लाइफ और सेंचुरी में पाए जाने वाले शेर सहित अन्य वन्य जीवों का इलाज भी इस अस्पताल में किया जाएगा।