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देश पर बड़ा हमला रचने की साजिश फेल, रांची से दानिश नामक आतंकी गिरफ्तार

रांची  पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आंतकियों की भारत देश में बड़ा हमला करने की योजना थी. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक उक्त मॉड्यूल का मास्टरमाइंड रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र के न्यू तबारक लॉज से गिरफ्तार अशरफ दानिश उर्फ अशहर दानिश है. इस मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध दानिश को एक कंपनी का सीइओ, गजबा और प्रोफेसर जैसे अलग-अलग नामों से जानते थे. दिल्ली पुलिस और झारखंड एटीएस सहित देश के अन्य एजेंसियों की कार्रवाई में दानिश सहित 5 संदिग्धों को पकड़ने के बाद इसका खुलासा हुआ है. 6 महीने से सभी संदिग्धों पर नजर रख रही थी पुलिस छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने मुंबई के सूफियान अबुबकर खान और आफताब अंसारी को मंगलवार को दिल्ली से पकड़ा. वहीं तेलंगाना के निजामाबाद से हुजैफा यमन और मध्य प्रदेश के राजगढ़ से कामरान कुरैशी को भी गिरफ्तार किया है. उक्त लोगों की संदिग्ध गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और राज्यों की एजेंसियां बीते 6 महीने से उनलोगों पर नजर रख रही थी. पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आयी है कि मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स से संपर्क में रहते हुए देश में बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहे थे. देश में होने वाला था बड़ा आतंकी हमला आंतरिक समूह में दानिश का कोड गजवा नेता था. लेकिन समय रहते संदिग्धों की गिरफ्तारी से देश में बड़ा आतंकी घटना को रोकने में सुरक्षा एजेंसियों को सफलता मिली है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अलकायदा संब कॉन्टिनेंट मॉड्यूल के कनेक्शन का पर्दाफाश किया था. इसका मास्टरमाइंड रेडियोलॉजिस्ट डॉ इश्तियाक को एटीएस के सहयोग से रांची से गिरफ्तार किया गया था. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि संदिग्ध पाकिस्तानी मॉड्यूल के तहत आंतरिक संगठन बनाकर काम कर रहे थे. सभी कट्टरपंथी लड़के हैं. मामले में कुल 11 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से पांच को गिरफ्तार किया जा चुका है. बाकी से पूछताछ जारी है.  

भोपाल में लव जिहाद और दुष्कर्म के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, मकान जमींदोज

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल में टीआईटी कॉलेज में हुए लव जिहाद मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले में मुख्य आरोपी फरहान खान, साद और साहिल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है. प्रशासन ने इन तीनों के घरों को अवैध अतिक्रमण मानते हुए बुलडोजर चलाने का फैसला किया है. ये मकान रायसेन रोड के अर्जुन नगर में स्थित है और शासकीय जमीन पर बने होने का दावा किया गया है. प्रशासन ने तीनों आरोपियों को उनके मकानों से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में 4 सितंबर तक का समय दिया गया था, लेकिन आरोपियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया. अब तहसीलदार ने 13 सितंबर को बुलडोजर कार्रवाई का अंतिम नोटिस भेजा है. अगर अब भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन मकानों को तोड़ने की कार्रवाई करेगा. कब्जा खाली नहीं किया गया वर्ष 1984 में इनके परिजनों को पट्टे पर जमीन दी गई थी, लेकिन लीज की अवधि पूरी होने के बाद इसे रिन्यू नहीं कराया गया। इसके बावजूद 600 वर्गफीट से अधिक पर कब्जा जमाकर मकान खड़ा कर लिया गया। तहसीलदार न्यायालय ने 19 अगस्त को ही आदेश दे दिया था कि आरोपियों के मकान अतिक्रमण हैं और इन्हें हटाया जाए। चार सितंबर तक का समय दिए जाने के बाद भी कब्जा खाली नहीं किया गया। जमीन की लीज खत्म अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तय कर दी है। एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने कहा कि जब जमीन की लीज खत्म हो चुकी है तो यह कब्जा अवैध है। सरकार और जिला प्रशासन किसी भी कीमत पर इस तरह की गैरकानूनी हरकतें बर्दाश्त नहीं करेगा। शुक्रवार या शनिवार को बुलडोजर चलाकर मकान जमींदोज कर दिए जाएंगे। यह मामला तब सामने आया जब टीआईटी कॉलेज की एक छात्रा ने फरहान खान, साद और साहिल के खिलाफ दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया. छात्रा ने बताया कि फरहान ने पहले हिंदू नाम का इस्तेमाल कर उसका विश्वास जीता और फिर उसका यौन शोषण किया. उसने आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाने की कोशिश की. इस मामले में भोपाल पुलिस ने बागसेवनिया, अशोका गार्डन और जहांगीराबाद थानों में कई FIR दर्ज की हैं. पुलिस ने फरहान और साहिल के खिलाफ 250 पन्नों का चालान विशेष जज नीलम मिश्रा की अदालत में पेश किया है, जिसमें 57 गवाहों की सूची और मेडिकल रिपोर्ट शामिल हैं. मामले की सुनवाई जिला कोर्ट में चल रही है. आरोपियों पर POCSO एक्ट, भारतीय दंड संहिता और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत कार्रवाई हो रही है.  

झारखंड में SIR लागू करने की तैयारी, बिहार के मॉडल पर काम तेज

रांची  झारखंड में जल्द ही मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) होने वाला है. राज्य में एसआइआर की तैयारियां शुरू कर दी गयी है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी(सीइओ) के रविकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग पूरे देश में मतदाता सूची का एसआइआर कर रहा है. इसी क्रम में झारखंड में भी एसआइआर होगा. 17 सितंबर तक जमा करें रेशनलाइजेशन रिपोर्ट के रविकुमार ने कहा कि सभी जिले 17 सितंबर तक सभी विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का रेशनलाइजेशन पूरा करते हुए रिपोर्ट जमा करें. 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाता सूची के मिलान का कार्य भी जल्द पूरा करें. कंप्यूटर ऑपरेटर व बीएलओ का प्रशिक्षण भी संपन्न करें. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिलों के चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों को पीपीटी के माध्यम से मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान ध्यान में रखे जानेवाले बिंदुओं की जानकारी दी. स्वीप के माध्यम से लोगों को करें जागरूक सभी जिलों के इआरओ, एइआरओ व उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक में के रविकुमार ने कहा कि पदाधिकारी एसआइआर के दौरान लोगों को पूरी जानकारी मिलना सुनिश्चित करते हुए स्वीप के माध्यम से उनको जागरूक भी करें. इस मौके पर उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित थे.

नेपाल की सियासत में नया मोड़: सुशीला को मिल सकती है पीएम की कुर्सी, सेना ने पलटी चाल

काठमांडू  नेपाल में सियासी संकट बरकरार है. Gen-Z प्रदर्शन के बाद नेपाल की कमान किसके हाथों में होगी, अब तक सस्पेंस से पर्दा नहीं हट पाया है. Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के बाद ओली की सरकार गिर गई. केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम पीएम की तलाश जारी है. अंतरिम नेता चुनने को लेकर संवैधानिक संकट का समाधान ढूंढा जा रहा है. इस बीच नेपाल में एक और यूटर्न देखने को मिला है. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की एक बार फिर नेपाली अंतरिम पीएम की रेस में आगे हो गई हैं. नेपाल में आधी रात को हुई एक बैठक में बाजी पलट गई. जी हां, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन को लेकर कवायद जारी है. सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर गुरुवार देर रात एक सीक्रेट बैठक हुई. यह बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई, जिसे शीतल निवास के नाम से जाना जाता है. इस अहम बैठक में नेपाली आर्मी चीफ अशोक राज सिग्देल और सुशीला कार्की मौजूद थीं. उनके अलावा, स्पीकर, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश सिंह राउत भी थे. इस मीटिंग में कई मसलों पर अलग-अलग संविधान विशेषज्ञों से बात हुई. बताया गया कि इस बैठक में भी यह सहमति बनी है कि सुशीला कार्की को ही नेपाल की कमान दी जाए. आधी रात वाली मीटिंग में बदली बाजी! सूत्रों का कहना है कि सुशीला कार्की पर ही अब तक सहमति बनती दिख रही है. नेपाल में ओली की सरकार को उखाड़ने वाले Gen-Z की भी पहली पसंद सुशीला कार्की ही हैं. शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना है और गुरुवार रात ही इस पर सहमति बनी है. आज यानी शुक्रवार को इसका ऐलान हो सकता है. काठमांडू के मेयर बालेन उर्फ बालेंद्र शाह का भी सुशीला कार्की को समर्थन है. सूत्रों का दावा है कि बालेन शाह चुनाव जीत कर पीएम बनना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्होंने खुद अंतरिम पीएम बनने के प्रस्ताव को ठुकराया है और सुशीला कार्की का समर्थन किया है. कैसे पीएम बनेंगी सुशीला कार्की? सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरकार चलाने के लिए अंतरिम प्रमुख के चयन को लेकर गतिरोध को दूर करने के लिए आधी रात को संकट प्रबंधन दल की बैठक हुई. इस अशांति के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार को शांति की अपील की और कहा कि उनका लक्ष्य संवैधानिक ढांचे के भीतर राजनीतिक संकट का समाधान खोजना है. सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और पहले उन्हें संसद के उच्च सदन में पेश किया जाएगा. आज होगा आधिकारिक ऐलान! सूत्रों ने बताया कि पौडेल 2015 के संविधान के आधार पर समाधान पर जोर दे रही हैं. उन्होंने बताया कि हालांकि राजनीतिक अंतरिम प्रधानमंत्री का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कार्की को उच्च सदन में नामित करके एक जगह बनाई जाएगी और फिर उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति आवश्यक प्रावधान करने के लिए एक अध्यादेश जारी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि यह घोषणा आज होने की संभावना है. सुशीला का हां ना और फिर  हां दरअसल, गुरुवार को दिन में खबर आई थी कि सुशीला कार्की ने पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. इसके बाद जेन जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया था. मगर कुलमन घिसिंग के नाम पर भी सहमति नहीं बनी. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ ने सुशीला कार्की को करीब 15 घंटे तक मनाया. फिलहाल, नेपाल में अब भी उथल-पुथल जारी है. आज का दिन नेपाल की सियासत में अहम है. आज आधिकारिक तौर पर ऐलान हो सकता है कि नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा? यहां एक बात और सामने आई है कि नेपाल में अगले 6 महीने में चुनाव कराने की जिम्मेवारी अंतरिम सरकार पर ही होगी. नेपाल में आपस में ही भिड़े Gen-Z के गुट, सेना ने कर दिया 'खेला' नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के बाद भड़की Gen-Z ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता की कुर्सी से उतरने पर मजबूर कर दिया. देश में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरिम सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. केपी ओली ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को अपने पद से इस्तीफा दिया और तब से अंतरिम पीएम को लेकर कई नामों पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर भिड़े युवा काठमांडू में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद अब नेपाल के युवा अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर उम्मीदवारों के नाम पर युवाओं के बीच हाथापाई हुई. 9 सितंबर को काठमांडू के मेयर और रैपर बैलेन शाह, 10 सितंबर को पूर्व चीफ जस्टिस सुशील कार्की और 11 सितंबर को कुलमान घीसिंग का नाम अंतरिम पीएम रेस में सबसे आगे रहा. अब इस लिस्ट में धरान के वर्तमान मेयर हरका राज संपांग राय उर्फ हरका संपांग का नाम भी शामिल हो गया है. पत्रकार से राजनेता बने रबी लामिछाने भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान जेल से छुड़ाया गया था. अंतरिम पीएम के नामों को लेकर मचा घमासान नेपाली मीडिया के मुताबिक कई युवा चाहते हैं कि बालेन, सुशीला कार्की या संपांग को अंतरिम पीएम बनाया जाए, जिसे लेकर गुरुवार (11 सितंबर 2025) को युवाओं में झड़प भी हुई. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. फिलहाल Gen-Z, प्रतिनिधियों, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख के बीच बातचीत चल रही है. पौडेल ने कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस बात पर विश्वास रखें कि आंदोलनकारी नागरिकों की मांगों को पूरा करने के लिए समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा रहा है. संयम के साथ देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।" कई लोगों को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर इंतजार कर रहे युवा न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबकि सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम अलग-अलग लोगों के साथ कई … Read more

उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली सीपी राधाकृष्णन ने, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के 53 दिन बाद दिखे सार्वजनिक रूप से

नई दिल्ली   सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को उप राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इस दौरान पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। राधाकृष्णन के शपथ के बाद धनखड़ लगातार ताली बजाकर स्वागत करते दिखे। पूर्व उपराष्ट्रपति कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ बैठे हुए थे। धनखड़ के बाई तरफ उनकी पत्नी बैठी थीं। लंबे समय बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में हुए शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वह लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इसके साथ ही उनका किसी भी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया था। विपक्ष ने धनखड़ के नजरबंद होने के भी आरोप लगाए थे। धनखड़ की चुप्पी पर उठाए थे सवाल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जगदीप धनखड़ की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा था कि देश पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर उनके बयान का इंतजार कर रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था कि पिछले 50 दिनों से जगदीप धनखड़ ने अपनी असामान्य चुप्पी साध रखी है। वेणुगोपाल का कहना था कि जब उनके उत्तराधिकारी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तब भी देश उनके ऐतिहासिक और अप्रत्याशित इस्तीफे पर बयान का इंतजार कर रहा है। जब उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से किसानों की घोर उपेक्षा, सत्ता में बैठे लोगों के 'अहंकार' से पैदा होने वाले खतरों और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। NDA उम्मीदवार को कितने वोट मिले? एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति के प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले। 9 सितंबर को ही वोटिंग के बाद परिणामों में घोषणा की गई। उपराष्ट्रपति परिणामों की घोषणा के बाद पीएम मोदी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी। पीएम मोदी में विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे तथा संसदीय संवाद में सकारात्मक योगदान देंगे। महाराष्ट्र के राज्यपाल थे सीपी राधाकृष्णन बता दें कि सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। अब चूंकि वह देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। इस स्थिति में महाराष्ट्र में गवर्नर का पद खाली हो गया। नए राज्यपाल की नियुक्ति तक गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त, महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यों का भी कार्यभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है। राधाकृष्णन ने एक दिन पहले राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया अपनी नई जिम्मेदारी की तैयारी में राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 14 वोट ज्यादा मिले राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के मुताबिक 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, वोटिंग 98.2% हुई। इनमें से 752 मत वैलिड और 15 इनवैलिड थे। एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन YSRCP के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया। 13 सांसदों ने चुनाव में मतदान से परहेज किया। इनमें बीजू जनता दल (BJD) के सात सांसद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चार, शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें हैं।  

80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को खाली करना पड़ा सरकारी महल, श्रीलंका में बदला नियम

 कोलंबो  श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पॉश इलाके सिनामैन गार्डेन में मौजूद भव्य और महल जैसे दिखने वाले एक घर में सामान समेटे जा रहे हैं. यहां हलचल है. 10 सालों से ये घर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का निवास था. महिंदा राजपक्षे आने वाले नवंबर में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ रहा है. ये श्रीलंका में हाल ही में पास हुए एक कानून का असर है.  श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों की सारी सुविधाएं छीन लेने वाला नया कानून Presidents' Entitlement (Repeal) Act पास हो गया है. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी विधवाओं को आधिकारिक आवास, मासिक भत्ता, सुरक्षा स्टाफ, वाहन, सचिवालय सुविधाएं और अन्य लाभ मिलने बंद हो गए हैं. अब देश के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी आवास खाली करना पड़ रहा है.  ऐसा ही माहौल पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा के घर भी है. हालांकि उन्होंने मौजूदा सरकार से कुछ मोहलत मांग ली है. वे अपना घर 2 महीने में खाली करेंगी. दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में जब पिछले साल चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश के लोगों से वादा किया था कि वे पूर्व राष्ट्रपतियों की शाहखर्ची पर लगाम लगाएंगे. महंगाई और नेताओं के मनमानी खर्चे से त्रस्त श्रीलंका की जनता ने अनुरा दिसानायके के इस चुनावी वादे को सपोर्ट किया.  राष्ट्रपति बनने के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बिल पर काम शुरू किया. श्रीलंका सरकार का एक आंकड़ा कहता है कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपतियों के ताम-झाम में सरकारी खजाने से 11 अरब श्रीलंकाई रुपये खर्च हुए.  यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट ने मंजूर किया और 31 जुलाई को गजट में प्रकाशित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे परिवार की चुनौती को खारिज करते हुए 9 सितंबर को इसे साधारण बहुमत से पारित करने की मंजूरी दी. संसद ने 10 सितंबर को 151-1 के मतों से इसे पारित किया.  अब श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों को सिर्फ पेंशन मिला करेगी. उनके सभी लाभ समाप्त हो गए हैं.   इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 11 सितंबर को कोलंबो का आधिकारिक निवास खाली कर दिया है. महिंदा राजपक्षे अब कोलंबो से 190 किलोमीटर दूर तंगाल्ले में रहेंगे. तंगाल्ले स्थित कार्लटन हाउस ही वह जगह है जहां राजपक्षे ने 1970 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा ने नया कानून लागू होने के बाद कहा है कि उन्हें कोलंबो में एक घर मिल गया है. इस घर का अभी नवीनीकरण चल रहा है. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सरकारी घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को घर खाली करने से पहले तीन महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है.  हालाकि उन्होंने कहा कि उन्हें घर खाली करने में दो महीने से ज़्यादा समय नहीं लगेगा.  चंद्रिका कुमार तुंगा ने कहा है कि तीन हफ्ते पहले वे गिर गई थीं और इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. उन्होंने श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार डेली मिरर से बात करते हुए कहा, "मेरे कूल्हे की सर्जरी हुई. यह एक गंभीर सर्जरी है. मुझे दिन में दो-तीन बार फ़िज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है. इसलिए मैं इस समय उस नए घर में न तो जा सकती हूँ और न ही कोई काम कर सकती हू." चंद्रिका कुमार तुंगा ने नए कानून के लागू होने तक राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर सरकार द्वारा निर्धारित किराया देकर जीवन भर इसी जगह रहने की अनुमति मांगी थी. लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया.  तब तुंगा ने कहा था कि वह नई व्यवस्था के तहत उसी जगह पर और रहने की इच्छा रखती है क्योंकि बुढ़ापे में और 15 सालों में दो बार कैंसर से जूझने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था.  श्रीलंका में वर्तमान में पांच जीवित पूर्व राष्ट्रपति हैं. हालांकि जब सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था तब उनमें से केवल तीन ही इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. 

लिटन दास चमके, बांग्लादेश ने हॉन्ग कॉन्ग को 7 विकेट से रौंदा

दुबई  एशिया कप 2025 के मैच नंबर-3 में गुरुवार (11 सितंबर) को बांग्लादेश का सामना हॉन्ग कॉन्ग से हुआ. दोनों टीमों के बीच ग्रुप-बी का यह मुकाबला अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला गया. इस मुकाबले में बांग्लादेश ने हॉन्ग कॉन्ग को सात विकेट से हराया. मुकाबले में हॉन्ग कॉन्ग ने निर्धारित 20 ओवर्स में 7 विकेट पर 143 रन बनाए थे. जवाब में बांग्लादेश ने 14 गेंद बाकी रहते टारगेट हासिल कर लिया. एशिया कप 2025 में हॉन्ग कॉन्ग की ये लगातार दूसरी हार है. हॉन्ग कॉन्ग को अपने पहले मुकाबले में अफगानिस्तान के हाथों 94 रनों से हार का सामना करना पड़ा था. दूसरी ओर बांग्लादेशी टीम ने मौजूदा टूर्नामेंट में दमदार आगाज किया है. टारगेट का पीछा करते हुए बांग्लादेश की शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही. परवेज हुसैन इमोन 19 रनों के निजी स्कोर पर आयुष शुक्ला का शिकार बने. वहीं दूसरे सलामी बल्लेबाज तंजीद हसन तमीम (14 रन) को अतीक इकबाल ने पवेलियन भेजा. यहां से कप्तान लिटन दास और तौहीद हृदोय ने 95 रनों की पार्टनरशिप करके बांग्लादेश का काम आसान कर दिया. लिटन दास ने 6 चौके और एक छक्के की मदद से 39 बॉल पर 59 रन बनाए. वहीं हृदोय ने 36 गेंदों का सामना करते हुए 1 चौके की मदद से नाबाद 35 रनों का योगदान दिया. विकेट पतन: 24-1 (परवेज हुसैन इमोन, 2.6 ओवर), 47-2 (तंजीद हसन तमीम, 5.4 ओवर), 142-3 (लिटन दास, 17.1 ओवर) ऐसी रही हॉन्ग कॉन्ग की बल्लेबाजी टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी हॉन्ग कॉन्ग की टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने दूसरे ही ओवर में अंशुमान रथ (4 रन) का विकेट गंवा दिया, जो तस्कीन अहमद का शिकार बने. फिर अनुभवी बल्लेबाज बाबर हयात (14 रन) को तंजीम हसन साकिब ने बोल्ड कर दिया. यहां से जीशान अली और निजाकत खान के बीच तीसरे विकेट के लिए 41 रनों की पार्टनरशिप हुई. जीशान ने 3 चौके और एक छक्के की मदद से 34 गेंदों पर 30 रन बनाए. जीशान को तंजीम हसन साकिब ने आउट किया. फिर कप्तान यासिम मुर्तजा और निजाकत खान ने चौथे विकेट के लिए 46 रनों की पार्टनरशिप की, जिसने हॉन्ग कॉन्ग को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. निजाकत ने 40 गेंदों का सामना करते हुए 42 रन बनाए, जिसमें दो चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. वहीं यासिम मुर्तजा ने 2 छक्के और 2 चौके की मदद से 19 बॉल पर 28 रनों का योगदान दिया. बांग्लादेश की ओर से तस्कीन अहमद, तंजीम हसन साकिब और रिशाद हुसैन ने दो-दो विकेट झटके.

जानिए क्या है भगवान कृष्ण शब्द का अर्थ

श्रीकृष्ण संसार में अवतीर्ण होकर धर्म का परिपालन के साथ सरल और सहज जीवन बिताने का मार्ग दिखाते हैं। उनके नामस्मरण से ही मोक्ष सुनिश्चित है। कृष्ण शब्द की व्युत्पत्ति ब्रह्मवैवर्तपुराण में कई प्रकार से दर्शाई गई है। कृष्ण शब्द में तीन अक्षर विद्यमान हैं। जैसे कृष़ण़्अ। इनमें कृष् का अर्थ है उत्कृष्ट, ण् का अर्थ है, उत्तम भक्ति और अ का अर्थ है देने वाला। अर्थात् उत्कृष्ट भक्ति को जो देता है अर्थात् जगाता है वही कृष्ण है। कृष्ण शब्द में ही दो अक्षर कृष़्ण मानकर पुराणों में जो अर्थ बताया गया है उसके अनुसार कृष् का अर्थ है परम आनन्द और ण का अर्थ है दास्य कर्म अर्थात् सेवा। कृष्ण शब्द का अर्थ होगा परम आनन्द और सेवा का अवसर, इन दोनों को देने वाला ही कृष्ण है। कृष्ण शब्द की तीसरी व्युत्पत्ति बताते हैं कि कृष् का अर्थ है कोटि जन्म से अर्जित पापों का क्लेश और ण का अर्थ है उन सब पापों को दूर करने वाला। कोटि जन्मों से किए हुए पापों को दूर करने वाला ही कृष्ण है। शास्त्रों में कृष्ण नाम के उच्चारण का फल भगवान् विष्णु के हजार नामों को तीन बार दोहराने के बराबर मिलता है। वैदिक विद्वान् कहते हैं कि सभी नामों से कृष्ण का नाम बड़ा है। जिसके मुख से कृष्ण नाम का उच्चारण किया जाता है उस के सारे पाप स्वतः ही भस्मसात् हो जाते हैं। भागवत का उद्देश्य है कि श्रीकृष्ण तत्व को दर्शाना। श्रीकृष्ण परब्रह्म भगवान् विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इस अवतार के लिए योग्य तिथि का चयन भगवान कृष्ण ने अष्टमी के रूप में किया। रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण धरती पर अवतीर्ण हुए। कृष्ण जन्म और उससे जुड़ी हुई संख्या आठ का महत्व स्फुरित होगा। कृष्ण के अवतार से पहले मत्स्य और कूर्म आदि सात अवतार भगवान् विष्णु के माने जाते हैं। यह कृष्णावतार विष्णु के दस अवतारों में से आठवां है। इतना ही नहीं, देवकी और वसुदेव की आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कृष्ण को परतत्व समझकर उनसे प्रेम करने वाली राधा का भी जन्म भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि को ही हुआ। क्या चमत्कार है यह आठ की संख्या जो कि अचेतन है, फिर भी कृष्णानुग्रह से मुख्यत्व प्राप्तकर धन्य हो गई। कृष्ण का संकल्प है कि वे साधुजनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए तथा धर्म के प्रतिष्ठापन के लिए हर युग में जन्म लेते हैं। इस संकल्प को वेदव्यास ने भी भागवत में आठवें श्लोक के रूप में दर्शाकर इस संख्या के महत्व को और बढ़ाया। आमतौर पर सात समुद्र, सात वर्ण, सात लोक, सात पर्वत तथा संगीत शास्त्र में सप्तस्वर आदि ही प्रसिद्ध हैं। जब कोई भी पदार्थ सात तक पहुंचता है तो उसे उस पदार्थ की चरम सीमा मानी जाती है। ऐसी दशा में जब आठवां कोई होगा तो वह परब्रह्म ही माना जाता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण ने अपने जन्मतिथि के रूप में अष्टमी को ही चुना। इसीलिए अपने गुरूजनों से उपदेश पाकर लोग भी अष्टांग् योग और अष्टांग् नमस्कार आदि को अपनाते हैं। सर्वलोकहितकारी कृष्ण ने जन्म के समय पिता वसुदेव को अपना वास्तविक रूप दिखाकर मोहित किया। तमद्भुतं बालकमम्बुजेक्षणं चतुर्भुजं शङख्गदार्युदायुधम्। श्रीवत्सलक्ष्मं गलशोभिकौस्तुभं पीताम्बरं सान्द्रपयोदसौभगम्।। कृष्ण के गुणों का जो वर्णन किया गया है, उससे पता चलता है आदर्श उत्तम पुरूष के लक्षण। यहां पर महर्षि वेदव्यास 64 गुणों का वर्णन करते हैं, जो संख्या भी आठ से आठ का गुणनफल ही है। श्रीकृष्ण के सखाओं की संख्या देखेंगें तो भी आश्चर्य होगा कि वह भी आठ ही है। उज्वलनीलमणि नामक ग्रन्थ में इनकी प्रियाओं में भी राधा, चन्द्रावली आदि आठ सखियां ही मुख्य रूप से दर्शायी गई हैं। श्रीकृष्ण की पत्नियों की संख्या तो असंख्य हैं तथापि उन में से भी रूक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रविन्दा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा नाम की आठ पत्नियां ही प्रमुख हैं। कृष्ण भक्ति और शरणागति से प्राप्त होते हैं। सामान्य जन भी उन्हें अपनी आंतरिक पुकार से प्राप्त कर सकता है। श्रीकृष्ण ने संसार को भक्ति और मैत्री के महत्व को अपने आचरण से सिखाया है, जिसका अनुपालन हमें करना है। हमें परबह्म श्रीकृष्ण से न वै प्रार्थ्यं राज्यं न च कनकमाणिक्य-विभवम् जैसे भौतिक पदार्थो को त्यागकर सदा हर त्वं संसारं हर त्वं पापानि इत्यादि प्रार्थना करनी चाहिए। वेदांतदेशिक प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि नाथायैव नमःपदं भवतु नः अर्थात् भगवान श्रीकृष्ण के लिए हमारे पास समर्पित करने के लिए मात्र प्रणाम है।  

अब नहीं होगी झंझट! एक ही प्लेटफॉर्म से बुक करें नोएडा और दिल्ली मेट्रो टिकट

नई दिल्ली दिल्ली-नोएडा में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है. अब वे एक ही एप से दोनों मेट्रो के टिकट खरीद सकेंगे. पहले अलग-अलग एप डाउनलोड करनी पड़ती थीं, लेकिन अब नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने नोएडा और दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में सिगल क्यूआर टिकटिंग सुविधा की शुरुआत की है, इससे यात्रियों को एक ही एप के जरिए टिकट बुक करने की सुविधा मिलेगी. सारथी एप से खरीद सकेंगे टिकट एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक लोकेश एम ने इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा- यात्रियों को इस कदम से बड़ी सुविधा मिलेगी. अब नोएडा मेट्रो-दिल्ली मेट्रो के QR कोड एक ही App पर मौजूद होंगे. दिल्ली मेट्रो के टिकट NMRC के एप और नोएडा मेट्रो के QR टिकट DMRC के सारथी एप से भी खरीदे जा सकेंगे. दोनों मेट्रो के टिकट अब एक ही एप से खरीद सकते हैं. यात्री नोएडा-दिल्ली मेट्रो में एक ही क्यूआर कोड से यात्रा कर सकेंगे. टिकट नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या यूपीआई के जरिए खरीदे जा सकेंगे.” क्या है ये बदलाव दरअसल, पहले पेटीएम या अन्य एप पर नोएडा से नोएडा के किसी स्टेशन के लिए मेट्रो टिकट उपलब्ध नहीं होते थे, यात्रियों को डीएमआरसी और एनएमआरसी की एप्स पर जाकर ही टिकट खरीदने पड़ते थे. अब दोनों टिकट एक ही एप के जरिए ले सकेंगे. लोकेश ने कहा कि बोडाकी से मेट्रो डिपो मेट्रो रूट (2.6 किमी) जल्द ही शुरू होगा. इसे 416 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. इसी के साथ 2,200 करोड़ रुपये की लागत से सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन रूट को मंजूरी मिल चुकी है. इसे 11.56 किमी का बनाया जाएगा. फिलहाल सरकारी मंजूरी का इंतजार है. एक क्लिक से मिलेगी टिकट खरीदने की सुविधा इसी के साथ दिल्ली मेट्रो ने एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (एनबीएसएल) के साथ साझेदारी में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिल्ली मेट्रो सारथी एप के अंदर ‘डीएमआरसी पे पावर्ड बाई भीम’ लॉन्च किया है. इससे यात्रियों को एक क्लिक से तेज और सुरक्षित टिकट खरीदने की सुविधा मिलेगी. इससे बाहरी पेमेंट गेटवे की जरूरत नहीं होगी. भीम वेगा के साथ डीएमआरसी के एकीकरण से यात्रियों को पेमेंट के लिए बड़ी सुविधा मिलेगी. 

असफलता में तलाशें सफलता

क्सर देखने में आता है कि छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते। बिना मंजिल के सफलता नहीं मिलती। मंजिल या लक्ष्य का निर्धारण करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मुझ में कितनी योग्यता है और क्या-क्या कमियां हैं? मंजिल को प्राप्त 1करने के लिए हमें अपनी योग्यताओं का भरपूर उपयोग करके अपनी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। लक्ष्य यह सोचकर बनाना चाहिए कि इस काम को मैं पूरा कर सकता हूं। जब मंजिल के निर्धारण में कठिनाई का अनुभव हो तो हमें अपनी अंतर्रात्मा की सहायता लेनी चाहिए क्योंकि आत्मबल सबसे बड़ा बल है। दूसरों के विचार पूछने पर हमें भिन्न-भिन्न विचार सुनने को मिलेंगे जिससे हमें अपनी मंजिल के निर्धारण में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है कि कौन-सा मार्ग अपनाएं। हमें परमेश्वर ने सोचने समझने की शक्ति दी है। यह सबसे अच्छा हो यदि अपनी मंजिल का निर्धारण हम स्वयं करें। हमें जो आज्ञा अपनी आत्मा या अंतरूकरण से प्राप्त होती है वह हर मौके पर सही रहती है। हमें अपने मार्ग में मिलने वाली असफलताओं की उपेक्षा करनी चाहिए और अपनी सफलताओं पर खुश नहीं होना चाहिए। मंजिल के मार्ग में आने वाली बाधाओं की चिंता नहीं करनी चाहिए और गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए। एक कहावत है कि जो जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। कभी गलत ढंग से नहीं सोचना चाहिए और अपने को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। जीवन में मिलने वाली असफलताओं से अनुभव प्राप्त होता है जिससे सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रत्येक के विचार और सिद्घांत अलग-अलग होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने विचारों और सिद्घांतों को जीवन में उतारें। अपने लक्ष्य की प्राप्ति में वही व्यक्ति सफल हो सकता है जो कठिन परिश्रम कर सके। कल्पना मात्र करने से कोई व्यक्ति सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। कभी-कभी ऐसा लगता है कि कुछ युवा छोटी-सी बात पर निरुत्साहित होकर अपना धीरज छोड़ बैठते हैं और अपनी मंजिल को प्राप्त नहीं कर पाते। केवल योजनाओं के निर्माण से कोई व्यक्ति सफल नहीं हो सकता बल्कि उन्हें पूर्ण करने के लिए सदैव परिश्रम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जीवन की सफलता के शिखर पर परिश्रम करने वाले व्यक्ति ही पहुंचते हैं। तो आइए, सबसे पहले हम अपनी मंजिल का निर्धारण करके अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए उचित परिश्रम करें।