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कर्नाटक में 22 सितंबर से जाति जनगणना प्रारंभ, सरकार ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

बेंगलुरु  कर्नाटक सरकार ने 22 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी नागरिकों का जाति जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने अपने आदेश में कहा, ‘प्रस्ताव में दिए गए विवरणों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है। इसके तहत कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को 22 सितंबर से सात अक्टूबर 2025 तक राज्य के सभी नागरिकों की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति पर सर्वेक्षण करने की मंजूरी दी जाती है।’ आदेश में कहा गया कि कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ने पहले सरकार को पत्र लिखकर उक्त अवधि के दौरान सर्वे कराने की मंशा जताई थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसने सर्वे की तिथियां तय करने और औपचारिक आदेश जारी करने से पहले प्रस्ताव की सावधानीपूर्वक जांच की थी। इस बीच, शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर से शुरू होने वाले आगामी सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण की वैधता पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति अनु शिवरमण और न्यायमूर्ति राजेश राय की खंडपीठ ने आदेश दिया कि याचिकाओं को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ-साथ भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त को भी नोटिस जारी हुआ। भाजपा ने क्यों जताई आपत्ति इस बीच, भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार जातिगत जनगणना के माध्यम से हिंदू धर्म को बांटने का प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जातिगत जनगणना के दौरान धर्म कॉलम में खुद को हिंदू के रूप में दर्ज करें। हाल ही में वीरशैव-लिंगायत महासभा ने अपने समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे धर्म कॉलम में खुद के लिए वीरशैव-लिंगायत लिखें। यह सर्वे 22 सितंबर से सात अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 420 करोड़ रुपये है। शिकारीपुरा से विधायक विजयेंद्र ने कहा, 'भाजपा के राजनीतिक चिंतन शिविर में हमने संकल्प लिया है कि जातिगत जनगणना के दौरान किसी भी जाति या समुदाय के लोग धर्म कॉलम में केवल हिंदू ही लिखें।'

आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने कृषि अवशेष और जंगली घास से विकसित किया पर्यावरण-अनुकूल हरितअरोही कुटीर

कानपुर  आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण के अनुकूल निर्माण के लिए एक नया कदम उठाया है। डॉ. दीपक कुमार मौर्य के नेतृत्व में, कुलदीप दीक्षित और श्याम बाबू की टीम ने प्रो. सी.एस. उपाध्याय के मार्गदर्शन में ‘हरितअरोही कुटीर’ नामक एक  ईको-फ्रेंडली हट बनाया है। इसका उद्घाटन प्रो. एस.एन. त्रिपाठी (डीन, कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी), प्रो. ए. गर्ग (हेड, सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग) और आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों ने किया। यह परियोजना कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के सहयोग से बनी है। खास बात यह है कि यह हट पूरी तरह से स्थानीय रूप से उपलब्ध जंगली केन घास और कृषि कचरे से बनाया गया है। इसके पैनल और ईको-ब्रिक की मजबूती, अग्निरोधक क्षमता (1100 डिग्री सेल्सियस तक परीक्षण), नमी प्रतिरोध होने के साथ ही पारंपरिक सामग्रियों की तुलना में अधिक भार सहन करने में सक्षम है।   इस हट की हर दीवार अलग-अलग प्रकार की टिकाऊ सामग्री जैसे कंस-स्ट्रक्ट ईंट, कंस-क्रीट ईंट, और कंस-बोर्ड। ये सब फसल अवशेष, पौधे से बने रेजिन, चूना, गुड़ और दाल के हैं। पैनल 6-32 टन तक का भार सहन कर सकते हैं, जिससे ये दो-तीन मंजिला भवनों के लिए उपयुक्त हैं। प्रो. सी.एस. उपाध्याय ने कहा, “हरितअरोही कुटीर केवल पर्यावरण अनुकूल हट नहीं है, बल्कि टिकाऊ निर्माण के लिए एक नया आयाम है। स्थानीय केन घास और कृषि कचरे का उपयोग करके हमने दिखाया है कि प्राकृतिक फाइबर आधारित सामग्री न केवल गर्मी से बचाव करती हैं, बल्कि मजबूत और अग्निरोधी भी हैं। ग्रामीण आवास, आपदा राहत केंद्र, और इको-रिसॉर्ट्स में ये एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।” यह सामग्री आग, बारिश, प्रभाव और पर्यावरणीय क्षरण के लिए परीक्षण की गई है और टर्माइट्स ही नहीं बल्कि मौसम से भी सुरक्षित है। यह पहल ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा देने के साथ ही कृषि अपशिष्ट का भी सदुपयोग करती है। IIT कानपुर के बारे में: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर की स्थापना 1959 में हुई थी और इसे भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह संस्थान विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है और दशकों से अनुसंधान एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है। IIT कानपुर का 1,050 एकड़ में फैला हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से भरपूर है। इसमें 19 विभाग, 26 केंद्र, 3 अंतरविषयी कार्यक्रम, और 2 विशेषीकृत स्कूल शामिल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत हैं। संस्थान में 590 से अधिक पूर्णकालिक शिक्षक और 9,500 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। अधिक जानकारी के लिए देखें: www.iitk.ac.in

स्मार्ट टीवी खरीदना हुआ सस्ता, Kodak ने पेश की किफायती टीवी लाइन

मुंबई  Kodak ने अपनी लेटेस्ट स्मार्ट टीवी सीरीज को लॉन्च कर दिया है. कंपनी की लेटेस्ट Matrix सीरीज स्मार्ट टीवी में चार स्क्रीन साइज का ऑप्शन मिलता है. ये कंपनी की लेटेस्ट QLED Google TV सीरीज है. इसमें 43-inch, 50-inch, 55-inch और 65-inch स्क्रीन साइज का विकल्प मिलेगा.  ब्रांड के लेटेस्ट टीवी को कंपनी ने कम बजट वाले यूजर्स को टार्गेट करते हुए लॉन्च किया है. इस टीवी सीरीज की कीमत 20 हजार रुपये से कम बजट में शुरू होती है. इनमें कंपनी ने बेजल-लेस डिजाइन और प्रीमियम QLED डिस्प्ले का इस्तेमाल किया है. आइए जानते हैं इन टीवी की कीमत और दूसरी डिटेल्स.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  Kodak के लेटेस्ट स्मार्ट टीवी में स्लीक बेजल-लेस डिजाइन मिलेगा. इसमें प्रीमियम QLED 4K डिस्प्ले दिया गया है जो HDR 10+ के साथ आते हैं. टीवी में Dolby Atmos और Dolby Digital+ का सपोर्ट मिलता है. इस सीरीज के टीवी में चार स्पीकर का इस्तेमाल किया गया है, जो 60W का साउंड आउटपुट ऑफर करता है. ये सभी टीवी Google TV पर काम करते हैं और इसमें गूगल असिस्टेंट का सपोर्ट मिलता है. इसमें क्रोमकास्ट और एयरप्ले बिल्ट-इन का सपोर्ट दिया गया है. इस पर Netflix, Prime Video, Disney+ Hotstar, Zee5 और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस मिलेगा.  कितनी है कीमत?  Kodak QLED Smart TV चार स्क्रीन साइज में आते हैं. स्मार्ट टीवी का 43-inch स्क्रीन साइज वाला वेरिएंट 18,799 रुपये में आता है. वहीं 50-inch स्क्रीन साइज वाले वेरिएंट की कीमत 23,999 रुपये, 55-inch स्क्रीन साइज वाले वेरिएंट की कीमत 27,649 रुपये और 65-inch स्क्रीन साइज वाले वेरिएंट की कीमत 37,999 रुपये है.  कंज्यूमर्स इन सभी को 10 परसेंट के डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं. ये डिस्काउंट Axis और ICICI बैंक क्रेडिट व डेबिट कार्ड पर मिल रहा है. इन्हें आप Flipkart से खरीद सकते हैं. डिस्काउंट के बाद इस सीरीज की कीमत 16,999 रुपये से शुरू होती है.

पंजाब सरकार ने बताया: सोमवार से वेरका डेयरी उत्पादों की कीमतों में कटौती

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती का लाभ आम आदमी तक पहुंचाने के लिए 22 सितंबर से वेरका के विभिन्न उत्पादों की कीमतों में भारी कटौती की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य समर्थित किसान सहकारी संस्था वेरका ने केंद्र के जीएसटी 2.0 सुधारों के अनुरूप अपनी कीमतों में उल्लेखनीय कमी करने का फैसला किया है, जिसके तहत आवश्यक डेयरी उत्पादों पर शुल्क कम किया गया है। नयी कीमतों के तहत, घी 30-35 रुपये प्रति लीटर/किग्रा सस्ता हो जाएगा, जबकि टेबल बटर की कीमत 30 रुपये प्रति किग्रा और अनसाल्टेड बटर की कीमत 35 रुपये प्रति किग्रा कम हो जाएगी। इसी तरह, प्रोसेस्ड चीज़ 20 रुपये प्रति किग्रा और दूध (स्टैंडर्ड, टोन्ड और डबल टोन्ड) 2 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा। अन्य उत्पादों जैसे आइसक्रीम (गैलन, ब्रिक और टब) की कीमतों में भी 10 रुपये प्रति लीटर और पनीर की कीमतों में 15 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आएगी।

दुबई पिच रिपोर्ट: श्रीलंका-बांग्लादेश मैच में बल्लेबाज़ों की दावत या गेंदबाज़ों की चुनौती?

नई दिल्ली  श्रीलंका वर्सेस बांग्लादेश एशिया कप 2025 सुपर-4 का पहला मैच आज यानी शनिवार, 20 सितंबर को खेला जाना है। SL vs BAN मैच दुबई के दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच भारतीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे। श्रीलंका की टीम अभी तक टूर्नामेंट में अजेय रही है। उन्होंने ग्रुप स्टेज के अपनी तीनों मुकाबले जीतकर हैट्रिक लगाई है। इस दौरान वह बांग्लादेश को एक बार शिकस्त दे चुकी है। ऐसे में श्रीलंका की नजरें जीत के साथ सुपर-4 का भी खाता खोलने पर होगी। वहीं बांग्लादेश ग्रुप स्टेज में मिली हार का बदला लेना चाहेगा। आईए एक नजर श्रीलंका वर्सेस बांग्लादेश पिच रिपोर्ट पर डालते हैं- श्रीलंका वर्सेस बांग्लादेश पिच रिपोर्ट दुबई की पिचें एशिया कप 2025 में उम्मीद के मुताबिक धीमी और स्पिनरों के लिए मददगार रही हैं। इसका टीमों ने जमकर फायदा उठाया है, इसका सबूत यह है कि इस टूर्नामेंट में 53.6% ओवर स्पिनरों ने डाले हैं, जो यूएई में किसी भी मल्टी-टीम टी20 टूर्नामेंट में डाले गए दूसरे सबसे ज्यादा ओवर हैं। आज के मुकाबले में भी श्रीलंका और बांग्लादेश की नजरें धीमी पिच का फायदा उठाने पर रहेगी। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम T20I रिकॉर्ड और आंकड़े मैच- 98 पहले बल्लेबाजी करते हुए जीते गए मैच- 48 (48.98%) टारगेट का पीछा करते हुए जीते गए मैच- 50 (51.02%) टॉस जीतकर जीते गए मैच- 56 (57.14%) टॉस हारकर जीते गए मैच- 42 (42.86%) हाईएस्ट स्कोर- 212/2 लोएस्ट स्कोर- 55 हाईएस्ट स्कोर इन चेज- 184/8 प्रति विकेट औसत रन- 20.92 प्रति ओवर औसत रन- 7.29 पहले बल्लेबाजी करते हुए औसत स्कोर- 144 BAN vs SL हेड टू हेड श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच अभी तक कुल 21 टी20 मैच खेले गए हैं, जिसमें से 13 मैच जीतकर श्रीलंका ने अपना दबदबा बनाया हुआ है। वहीं बांग्लादेश को इस दौरान 8 जीत मिली है। हालांकि पिछले 5 मुकाबलों में बांग्लादेश ने श्रीलंका को 3 बार धूल चटाई है।  

स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल के सिर में लगी चोट, PAK मैच से पहले भारतीय टीम में चिंता

दुबई  . भारतीय टीम ने एशिया कप 2025 के अपने अंतिम ग्रुप-स्टेज मुकाबले में ओमान को 21 रनों से हराकर जीत की हैट्रिक लगाई. ओमान ने भारत को कड़ी टक्कर दी. लेकिन जीत हासिल नहीं कर सका. भारत का अगला मैच रविवार को पाकिस्तान से है. यह टीम इंडिया की सुपर-4 की पहली भिड़ंत होगी. लेकिन इससे पहले टीम इंडिया को एक बड़ा झटका लगा है. दरअसल, ओमान के खिलाफ हुए मैच में भारत के स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल को दूसरी पारी में चोट लग गई. लक्ष्य का पीछा कर रहे ओमान के खिलाफ 15वें ओवर में अक्षर पटेल ने एक कैच पकड़ने की कोशिश की और गेंद उनके हाथों से फिसल गई और कैच छूट गया. इसी कोशिश में वह संतुलन खो बैठे और सिर ज़मीन से टकरा गया. इसके बाद वह ओमान की पारी में मैदान पर वापस नहीं लौटे. यह भी माना जा रहा है कि अक्षर पाकिस्तान के खिलाफ अगले बड़े मुकाबले से बाहर हो सकते हैं. टी दिलीप ने अक्षर पटेल की चोट पर क्या कहा ओमान के खिलाफ मैच के बाद भारत के फील्डिंग कोच टी. दिलीप ने बताया कि अक्षर ठीक हैं. हालांकि, अगले मैच से पहले टीम इंडिया के पास बहुत कम समय है, इसलिए अक्षर का पाकिस्तान के खिलाफ खेल पाना मुश्किल चुनौती हो सकता है. बता दें कि ओमान के खिलाफ खेले गए मैच में टीम इंडिया ने अपनी प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए थे. जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती को बाहर किया गया था. उनकी जगह अर्शदीप और हर्षित राणा टीम में आए थे. देखना दिलचस्प होगा कि आखिर पाकिस्तान के खिलाफ भारत किस कॉम्बिनेशन के साथ उतरता है.

H-1B वीजा के नए नियमों के तहत भारी बढ़ोतरी, US में आवेदन पर 88 लाख रुपये तक शुल्क

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के नियम बदल दिए हैं. अब कुछ H-1B वीजा धारक अमेरिका में गैर-इमिग्रेंट वर्कर के रूप में सीधे एंट्री नहीं ले पाएंगे. नए आवेदन के साथ 100,000 डॉलर यानी 88 लाख रुपये से ज्यादा की फीस देना जरूरी होगा. 100,000 डॉलर की नई फीस कंपनियों के लिए खर्च काफी बढ़ा सकती है. हालांकि बड़ी टेक कंपनियों के लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी क्योंकि वे टॉप प्रोफेशनल्स के लिए भारी खर्च करती रहती हैं, लेकिन इससे छोटे टेक फर्म और स्टार्टअप दबाव में आ सकते हैं. व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने कहा, "H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम उन वीजा सिस्टम्स में से एक है जिसका सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है. इस वीजा का मकसद यही है कि ऐसे हाईली स्किल्ड लोग अमेरिका में काम कर सकें, जिनके काम अमेरिकी कर्मचारी नहीं करते. यह प्रोक्लेमेशन कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को स्पॉन्सर करने की फीस को 100,000 डॉलर कर देगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि जो लोग अमेरिका आ रहे हैं, वे वास्तव में बहुत ही उच्च योग्य हैं और उन्हें अमेरिकी कर्मचारियों से बदला नहीं जा सकता." अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक ने कहा, "अब बड़ी टेक कंपनियां या अन्य बड़ी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को ट्रेन नहीं करेंगी. उन्हें सरकार को 100,000 डॉलर देना होगा और उसके बाद कर्मचारी को भी भुगतान करना होगा. यह आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है. अगर आप किसी को ट्रेन करने जा रहे हैं, तो इसे हमारे देश की महान यूनिवर्सिटी से हाल ही में ग्रैजुएट हुए अमेरिकी छात्रों में से किसी एक को ट्रेन करें, अमेरिकियों को काम के लिए तैयार करें, और हमारे जॉब्स लेने के लिए लोगों को लाना बंद करें. यही नीति है और सभी बड़ी कंपनियां इसके साथ हैं." टेक्नोलॉजी और स्टाफिंग कंपनियां H-1B वीजा पर बहुत निर्भर हैं. अमेजन ने 2025 की पहली छमाही में 10,000 से ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए हैं. वहीं माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों को 5,000 से ज्यादा वीजा अप्रूवल मिला है. H-1B वीजा हासिल करने वालों में 71% भारत H-1B वीजा के लगभग दो-तिहाई पद कंप्यूटिंग या आईटी क्षेत्र में हैं. लेकिन इंजीनियर, शिक्षक और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स भी इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल H-1B वीजा पाने वालों में भारत सबसे बड़ा लाभार्थी था भारतीय प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी 71 फीसदी रही थी, जबकि चीन दूसरे नंबर पर था और उसे केवल 11.7% वीजा मिला. H-1B वीजा के नियम बदलना ट्रंप का हाई-प्रोफाइल कदम जनवरी से सत्ता में आने के बाद, ट्रंप ने वाइड-रेंज इमिग्रेशन क्रैकडाउन शुरू किया है, जिसमें कुछ कानूनी इमिग्रेशन को सीमित करने के कदम शामिल हैं. H-1B वीजा प्रोग्राम को बदलना उनके प्रशासन का अब तक का सबसे हाई-प्रोफाइल कदम है. H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा दिए जाते हैं, जो विशेष क्षेत्रों में अस्थायी विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए होते हैं. इनके अलावा, एडवांस डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 और वीजा जारी किए जाते हैं. मौजूदा सिस्टम के मुताबिक, H-1B वीजा के लिए अप्लाई करने के लिए पहले एक छोटे शुल्क का भुगतान करके लॉटरी में शामिल होते हैं और अगर चुने जाते हैं, तो बाद में कुछ हजार डॉलर तक के शुल्क देने पड़ते हैं. इन शुल्कों का लगभग पूरा भुगतान कंपनियों को करना होता है. H-1B वीजा तीन से छह साल की अवधि के लिए स्वीकृत होते हैं. H-1B वीजा के मौजूदा नियम क्या हैं? पहले H-1B वीजा दाखिल करने की फीस 215 डॉलर से शुरू होती थी और परिस्थितियों के हिसाब से कई हजार डॉलर तक जा सकती थी. अब 100,000 डॉलर की फीस से यह कई कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए बहुत महंगा और मुश्किल हो जाएगा. H-1B सिस्टम के कुछ विरोधी, खासकर अमेरिका की टेक कंपनी में काम करने वाले लोग, कहते हैं कि कंपनियां वीजा लेने वाले लोगों को इसलिए काम पर रखती हैं ताकि कर्मचारियों की सैलरी कम रहे. इसके कारण अमेरिका के योग्य नौकरी चाहने वाले लोग काम नहीं पा पाते. इस बात पर टेक सेक्टर और मजदूरी बाजार में लोग दो हिस्सों में बंटे हुए हैं.

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: सीएम योगी ने तैयारियों का जायजा लिया, उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  ग्रेटर नोएडा में इंडिया एक्सपो मार्ट के आगामी यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2025) की तैयारियों का जायजा लिया. यह कार्यक्रम 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे. सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यक्रम में आने वाले प्रतिभागियों और मेहमानों के लिए सुरक्षा, सुविधाएं और सुगम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं. उन्होंने कहा कि यह ट्रेड शो केवल एक एग्ज़ीबिशन नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक वैश्विक मंच बने जहां उत्तर प्रदेश की संस्कृति, परंपराएं, स्किल्स और प्रोडक्ट्स दुनिया के सामने प्रस्तुत हों. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले को इसमें सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए और ODOP (One District, One Product) के स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और निवेशकों तक पहुंचाना चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि इस आयोजन से युवाओं के लिए नए बिजनेस, निवेश और रोजगार के अवसर खुलेंगे. ब्रांडिंग और प्रमोशन पर फोकस करने का निर्देश सीएम ने निर्देश दिया कि UPITS-2025 का व्यापक ब्रांडिंग और प्रमोशन किया जाए. स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी कैंपसों में पोस्टर, डिजिटल स्क्रीन और इवेंट की जानकारी प्रदर्शित की जाए. विशेष तौर पर गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्रों को सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया, ताकि उन्हें हैंड्स-ऑन अनुभव और रोजगार के अवसर मिलें. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती सीएम योगी ने बताया कि शो के दौरान एक विशेष फैशन शो भी होगा जिसमें देशभर के प्रमुख फिल्म सिटी के एक्सपर्ट्स शामिल होंगे. इस फैशन शो में खादी, हैंडीक्राफ्ट और ग्रामोद्योग उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर फोकस होगा. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि युवा डिज़ाइनर्स और स्थानीय कारीगरों को भी वैश्विक मार्केट से जुड़ने का मौका मिलेगा. विजिटर्स के लिए खास सुविधाएं देने का निर्देश मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग विजिटर्स के लिए विशेष सुविधाओं, शटल सर्विस, और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया. साथ ही विदेशी ख़रीदारों और मेहमानों की आतिथ्य, सुरक्षा और आवास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि उत्तर प्रदेश की वैश्विक छवि और मज़बूत हो. निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने ई-कार्ट से पूरे स्थल का दौरा किया. इस मौके पर एमएसएमई मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, जिलाधिकारी मेधा रुपम, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.

बिहार NDA में सीट बंटवारे पर सहमति, जल्द होगा औपचारिक ऐलान

नई दिल्ली  बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय नई हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। शाह उसी दिन पटना में आयोजित अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की तैयारियों का हिस्सा है। आपको बता दें कि इस मुलाकात के दौरान बिहार भाजपा के नेताओं के अलावा नीतीश कुमार के दो खास सिपहसालार संजय झा और विजय चौधरी भी इस बैठक में शामिल हुए। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU)के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती खाका तैयार हो चुका है। अब इसे लेकर लोजपा (LJP), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) जैसे सहयोगी दलों से भी बातचीत चल रही है। गठबंधन के भीतर सभी दलों को संतुलित हिस्सेदारी देने का प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला नवरात्र के पावन पर्व के दौरान घोषित किया जा सकता है, जिसकी शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। पटना के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि NDA इस अवसर को शुभ मानते हुए एकजुटता का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहता है। यह वही समय होगा जब से आम लोगों को जीएसटी की नई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। दुर्गा पूजा के बाद कभी भी इसका ऐलन हो सकता है। इस साल छठ के बाद वोटिंग की संभावना है। 2020 के चुनावों में जेडीयू की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही थी, जबकि बीजेपी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन हाल के दिनों में नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने के बाद समीकरण फिर बदल गए हैं। बीजेपी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गठबंधन की एकता बनी रहे और विपक्षी गठबंधन INDIA को चुनौती दी जा सके। वहीं, नीतीश कुमार भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सतर्क हैं और चाहते हैं कि उन्हें गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले।  

मुस्लिम देशों के बीच पाक के साथ रक्षा समझौते की संभावना, भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” को लेकर भारत ने शुक्रवार को एक बार फिर प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच गहरी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और भारत अपेक्षा करता है कि इस रिश्ते में दोनों देशों के आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा, पाक मंत्री ने दावा किया है कि अन्य मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता कर सकते हैं। इस पर भी भारत की प्रतिक्रिया सामने आई है। यह रक्षा समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को साइन किया। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि “किसी भी देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर हमला मानी जाएगी”। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल ने हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर सैन्य हमले किए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “भारत और सऊदी अरब की साझेदारी हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुई है। हम उम्मीद करते हैं कि यह साझेदारी आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत को इस बात की जानकारी थी कि पाकिस्तान और सऊदी अरब लंबे समय से इस तरह के समझौते पर विचार कर रहे थे, और अब इसे औपचारिक रूप दिया गया है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, समझौते में और क्या-क्या लिखा है इसको लेकर अभी तक कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है और सामूहिक रक्षा का उल्लेख केवल एक संयुक्त बयान में किया गया है। इसलिए, सामूहिक रक्षा से संबंधित कानूनी बाध्यताओं का आकलन करना आवश्यक होगा। पाकिस्तान-सऊदी संबंध और भारत की स्थिति सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, भारत और सऊदी अरब के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक सहयोग गहरा हुआ है, जिसमें संयुक्त सेना और नौसेना अभ्यास शामिल हैं। हालांकि, यह समझौता पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच हुआ है। अरब देशों ने हाल के महीनों में इजरायल की आक्रामक कार्रवाइयों, विशेष रूप से ईरान और कतर पर सैन्य हमलों के बाद, अमेरिका की सुरक्षा साझेदार के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को और जटिल बना सकता है। भारत की सुरक्षा चिंताएं भारत पश्चिम एशिया को अपने “विस्तारित पड़ोस” का हिस्सा मानता है और उसने साफ कहा है कि राष्ट्रीय हितों और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान-सऊदी समझौते के प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है, खासकर इस संभावना के मद्देनजर कि अगर पाकिस्तान-भारत के बीच तनाव बढ़ा तो इस समझौते का हवाला दिया जा सकता है। अन्य अरब देशों के जुड़ने की संभावना पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि इस समझौते में अन्य अरब देशों, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर, के शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "इस समझौते में कोई ऐसी धारा नहीं है जो किसी अन्य देश के प्रवेश को रोके।" आसिफ ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं इस समझौते के तहत उपलब्ध होंगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, जायसवाल ने कहा कि भारत के यूएई और कतर के साथ व्यापक संबंध हैं। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच हुई बातचीत और यूएई की विदेश मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी की नई दिल्ली यात्रा का उल्लेख किया। जायसवाल ने इन संबंधों को "विस्तृत" बताते हुए कहा कि ये वार्ताएं निरंतर जारी हैं। इस बीच, भारत ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाने की योजना बनाई है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके। यह समझौता भारत के लिए एक चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और क्षेत्र में उसकी सक्रिय भूमिका इसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाती है।