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पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही जिंदगी

मदनपुर की मंजू थोरिया हर महीने कर रही हजारों की बचत छह महीने से बिजली बिल आ रहा ऋणात्मक, आत्मनिर्भरता की ओर कदम रायपुर, खरसिया विकासखंड के मदनपुर गांव की मंजू थोरिया कभी हर महीने 2,500 से 3,000 रुपये तक का भारी-भरकम बिजली बिल चुकाने को मजबूर थीं। यह खर्च उनके परिवार के घरेलू बजट पर गहरा असर डालता था। लेकिन प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुडऩे के बाद उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ ली है। अब मंजू थोरिया को न केवल बिजली बिल भरने से मुक्ति मिली है, बल्कि पिछले छह महीनों से उनका बिजली बिल ऋणात्मक आ रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि उनके घर की छत पर लगाए गए सोलर पैनलों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली सीधे ग्रिड में जुड़ रही है। इस योजना के तहत मंजू को रूफटॉप सोलर लगाने के लिए मिलने वाली सब्सिडी भी मात्र सात दिनों के भीतर ही मिल गई। इससे शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो गया और परिवार को आर्थिक राहत मिली। मंजू के पति श्री रश्मिरंजन बताते हैं कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने हमें असली राहत दी है। अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती बल्कि बचत भी हो रही है और घर की आमदनी पर सकारात्मक असर पड़ रहा है। यह योजना केवल उपभोक्ताओं को बिजली बिल से राहत ही नहीं दे रही, बल्कि देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित हो रही है। योजना की विशेषताएं सरकार सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं को भारी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। 1 किलोवॉट क्षमता पर 45 हजार रुपए, 2 किलोवॉट क्षमता पर 90 हजार रुपए और 3 किलोवॉट क्षमता पर 01 लाख 8 हजार की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को बैंक ऋण की सुविधा भी दी जा रही है। इस योजना के तहत आवेदन के लिए भारत की नागरिकता, छत पर सौर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह और वैध बिजली कनेक्शन होना चाहिए। आवेदन https://pmsuryaghar.gov.in पोर्टल पर, पीएम सूर्य घर मोबाइल ऐप से, या सीएसपीडीसीएल की वेबसाइट और मोर बिजली ऐप के माध्यम से किया जा सकता है। सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर भी कॉल किया जा सकता है।

संकटों को पछाड़कर रची सफलता की कहानी, हरियाणा की बहादुर बेटी बनीं DSP

नारनौल  हरियाणा के नारनौल की रहने वाली अंजू यादव ने राजस्थान पुलिस में DSP भर्ती होकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित 55वें बैच के दीक्षांत परेड समारोह में 37 वर्षीय अंजू यादव ने राजस्थान पुलिस सेवा  में हुआ चयन।  अंजू ने ये मुकाम यूं ही हासिल नहीं किया। मुश्किल परिस्थितियों का लगातार सामना कर वह यहां तक पहुंचीं। करीब चार साल पहले पति को खोने के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं टूटने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं।वे मूल रूप से नारनौल के गांव धौलेड़ा की रहने वाली हैं। उनकी शादी अलवर जिले की बहरोड़ तहसील के गंडाला गांव में हुई थी। उन्होंने अपने समर्पण और संघर्ष से न केवल अपने परिवार, बल्कि हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों का नाम रोशन किया है।     स्कूली शिक्षा से कॉलेज तक का सफर : अंजू चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने अपने गांव धोलेड़ा के राजकीय स्कूल से बाहरवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद डिस्टेंस लर्निंग से स्नातक की पढ़ाई की तथा नारनौल के गवर्नमेंट कॉलेज आफ एजुकेशन से बीएड की पढ़ाई की।     छोटी उम्र में हो गई थी शादी : अंजू यादव की कहानी बड़ी संघर्ष भरी है। अंजू की शादी छोटी उम्र में ही 2009 में हो गई थी। जिसके बाद 2012 में उसके बेटा हुआ। वहीं 2021 में उनके पति का बीमारी के चलते देहांत हो गया।     सरकारी जॉब लगने वाली पहली महिला : अंजू ने बताया कि वे मायका व ससुराल में सरकारी नौकरी लगने वाली पहली महिला हैं। वे शुरू में मध्यप्रदेश के भिंड में 2016 से 18 तक जवाहर नवोदय विद्यालय में टीचर लगी। इसके बाद वे 2019 तक राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयपुर में टीचर लगी।     5 साल दिल्ली में सरकारी टीचर रहीं : अंजू के मुताबिक 2019 से 2024 तक वह दिल्ली में सरकारी टीचर रहीं। 27 मई 2024 में उन्होंने DSP जयपुर ज्वाइन किया। उन्होंने बताया कि आरपीएस बनने के लिए 2021 में वैकेंसी निकली थी।     2022 में हुई परीक्षा, एक साल बाद इंटरव्यू :  इसके बाद 2022 में मुख्य परीक्षा हुई। 2023 में इंटरव्यू हुआ। रिजल्ट भी 2023 में ही आ गया था। इसे बाद उसने मई 2024 DSP पद पर ज्वाइन किया था। 47 माह की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद बीते कल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।     47 माह लिया प्रशिक्षण :  राजस्थान पुलिस अकादमी में आरपीएस अधिकारियों को लगभग 47 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान कानून व्यवस्था, पुलिसिंग के कानूनी पहलुओं, साइबर क्राइम, फोरेंसिक साइंस, क्रिमिनोलॉजी और सॉफ्ट स्किल्स पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साथ ही देश की प्रमुख पुलिस अकादमी भोपाल, गांधीनगर और अहमदाबाद के शैक्षिक दौरे भी कराए गए।     दीक्षांत परेड समारोह में ली शपथ :  दीक्षांत परेड समारोह में अंजू यादव ने मंच पर शपथ ग्रहण करते हुए देश और समाज की सेवा के प्रति निष्ठा व समर्पण का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा उनके लिए केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और न्याय दिलाने का दायित्व है। ​​​पिता की वो बात, जिससे अंजू को हमेशा मिली प्रेरणा… अंजू यादव ने बताया कि मेरे प्रेरणा स्त्रोत मेरे पिता लालाराम है। अशिक्षित होते हुए भी उन्होंने मुझे पढ़ाया, समाज के ताने सहे और मेरे बेटे को उन्होंने ही पाला। मुझे अपने पास रखा। पिता की एक लाइन 'काला सिर का आदमी कुछ भी कर सकता है', ने हमेशा बहुत प्रेरित किया। इसका मतलब है अगर इंसान सोच ले तो कुछ भी असंभव नहीं है। हमेशा उनको मेहनत करते हुए देखा और प्रेरणा मिली। वो इस उम्र में हार नहीं मान सकते तो मैं कैसे मान सकती हूं। मेरी बहनों ने बेटे का और मेरा ध्यान रखा। मां ने बेटे को अपने बेटे की तरह पाला। मेरे बेटे मुकुल दीप ने भी मुझे बहुत प्रेरित किया। वह मेरे बिना रहा। जब भी उसको देखती, तो लगता कुछ करना है। इनके बिना जीवन की कल्पना असंभव है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना: उजाला फैलाने के साथ आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहे हैं भात्रा

बिजली उपभोक्ता से उत्पादक बने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़   रायपुर, भारत के विकास की राह अब सूरज की रोशनी से रोशन हो रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ी है। यह योजना केवल बिजली बचत का उपाय नहीं, बल्कि हर घर को भविष्य की ऊर्जा क्रांति से जोड़ने वाला सेतु है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल नागरिकों को उपभोक्ता से उत्पादक बना रही है। अब हर छत सिर्फ छत नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत है। यही कारण है कि सूर्यघर योजना आज स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का सबसे मजबूत आधार स्तंभ बन चुकी है। कोरबा जिले के खरमोरा निवासी श्री दीपक किशोर भात्रा, जो पेशे से व्यापारी हैं, ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया है। उन्हें इस योजना की जानकारी अपने परिचितों से मिली, योजना का लाभ सुनते ही उन्होंने बिना देर किए आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन किया। आवेदन के तुरंत बाद ही विशेषज्ञ टीम ने उनके घर पर सोलर पैनल स्थापित कर दिया। आवेदन के कुछ ही दिनों में उनके खाते में केंद्र सरकार की ओर से रूपये 78 हजार की सब्सिडी सीधे जमा हो गई। इससे उन्हें आर्थिक बोझ महसूस नहीं हुआ। अब उनके घर के सभी उपकरण बिना किसी रुकावट के आसानी से चलते हैं। श्री भात्रा बताते हैं कि सोलर पैनल की कुल लागत लगभग रूपये 2 लाख 10 हजार आई, लेकिन सरकार की सब्सिडी मिलने से उनका वास्तविक निवेश बेहद कम रह गया। उनका कहना है कि आज जहाँ अधिकांश लोग कोयले और अन्य पारंपरिक साधनों पर निर्भर हैं, वहीं सूर्यघर योजना एक क्रांतिकारी पहल है। यह योजना हर घर में बिजली की  आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है और साथ ही बचत का अवसर भी प्रदान कर रही है। केवल एक बार का निवेश जीवनभर के उजाले और आत्मनिर्भरता का आशीर्वाद लेकर आता है। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिचितों और आसपास के लोगों को भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। श्री भात्रा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह पहल वास्तव में आम लोगों के जीवन में रोशनी और समृद्धि लेकर आई है। छत्तीसगढ़ जैसे ऊर्जा-समृद्ध राज्य में इस योजना का क्रियान्वयन विशेष महत्व रखता है। अब तक राज्य मुख्य रूप से कोयला और पारंपरिक स्रोतों से बिजली उत्पादन पर निर्भर रहा है, लेकिन सूर्यघर योजना के माध्यम से यहाँ के लोग स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मज़बूत कर रही है।

फारूक हत्याकांड में आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, उम्रकैद से हुई कम

बिलासपुर रायपुर के बहुचर्चित फारूक खान हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों की उम्रकैद की सजा घटाकर 10-10 साल कर दी है। कोर्ट ने माना कि यह हत्या अचानक हुए झगड़े में गुस्से का नतीजा था, इसमें पहले से कोई साजिश या योजना नहीं थी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की खंडपीठ में हुई। दरअसल, 14 फरवरी 2022 की रात रायपुर के बैजनाथपारा में एक शादी समारोह में डीजे पर डांस को लेकर बहस शुरू हुई। आपसी विवाद बढ़ा तो गुस्से में राजा उर्फ अहमद रजा ने जेब से चाकू निकाला और फारूक खान के सीने पर वार कर दिया। फारूक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने राजा के साथ उसके साथियों मोहम्मद इश्तेखार और मोहम्मद शाहिद को गिरफ्तार किया। ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2024 में राजा को हत्या (धारा 302) और दोनों साथियों को हत्या में सहभागिता (302/34) में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि यह घटना अचानक हुई, कोई पूर्व नियोजित साजिश नहीं थी। मेडिकल रिपोर्ट से भी साफ है कि एक ही चाकू का वार हुआ। राज्य पक्ष ने सजा बरकरार रखने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 के तहत आता है, यानी अचानक हुए झगड़े में हत्या हुई है। इस मामले में आरोपी राजा को 302 में उम्रकैद, इश्तेखार और शाहिद को 302/34 में उम्रकैद की सजा दी गई थी। वहीं हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियो को धारा 304 (भाग-1) यानी गैरइरादतन हत्या में 10-10 साल कठोर कैद और 500-500 रुपये का जुर्माना लगाया है। आर्म्स एक्ट में एक साल की सजा पहले जैसी रहेगी और सारी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने कहा कि शादी में अचानक शुरू हुए विवाद में कोई पूर्व योजना या हथियारबंद साजिश नहीं दिखती। यह हत्या नहीं बल्कि कुलपेबल होमिसाइड है, इसलिए सजा में राहत दी जाती है।

डेनमार्क PM का ऐतिहासिक कदम, जबरन नसबंदी केस पर महिलाओं से सार्वजनिक माफी

 कोपेनहेगेन डेनमार्क की प्रधानमंत्री मैटे फ्रेडरिकसन ने  ग्रीनलैंड की राजधानी नुक का दौरा किया. उन्होंने इस दौरान डेनमार्क के उस काले अध्याय और उससे उपजी अथाह पीड़ा को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक तौर पर महिलाओं से माफी मांगी.  डेनमार्क में 1960 से लेकर 1991 तक देश के एक बड़े क्षेत्र की महिलाओं की जबरन नसबंदी की गई. इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के सबसे बड़े मामलों में से एक माना गया. पीएम फ्रेडरिकसन ने इस दौरान भावुक होते हुए कहा कि जो हुआ हम उसे बदल नहीं सकते, लेकिन जिम्मेदारी ले सकते हैं. मैं डेनमार्क की ओर से माफी मांगती हूं. इस घटना पर प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने 24 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी.  60 के दशक में बड़े पैमाने पर महिलाओं विशेष रूप से स्कूली बच्चियों के गर्भाशय में IUD डिवाइस लगा दी गई थी. इनमें से कई लड़कियां 12 साल या इससे कम उम्र की थीं. इन किशोरियों में कॉपर टी लगाए गए या हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए. इसके लिए ना तो इन बच्चियों की सहमति ली गई और ना ही उनके परिवारजनों की. रूटीन चेकअप के नाम पर यह धांधली की गई.  रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक से 1992 तक डेनमार्क में लगभग 4,500 इनुइट महिलाओं में गर्भनिरोधक कॉयल (कॉपर टी) लगाया गया, वो भी उनकी सहमति के बिना. इसका उद्देश्य इनुइट समुदाय में जन्म दर को कम करना था. इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना था, जो डेनिश औपनिवेशिक नीतियों का हिस्सा था. इस रिपोर्ट के बाद लगभग 150 महिलाओं ने डेनमार्क की सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन का मुकदमा दायर किया है, जिसकी सुनवाई अभी जारी है. 

हाईकोर्ट का फैसला: रिश्तों में पूरी तरह टूट चुका विश्वास, विवाह विच्छेद के आदेश जारी

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि पक्षों(पति और पत्नी) के बीच वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करना असंभव हो जाता है, तो न्यायालय इस तथ्य से अपनी आँखें बंद नहीं कर सकता है. हम तलाक नहीं देकर दोनों पक्षों की पीड़ा को बढ़ा नहीं सकते है. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने इस आदेश के साथ 9 साल से अलग रहने वाले पति-पत्नी के विवाह विच्छेद पर मोहर लगा दी. ग्वालियर निवासी विकास आर्य की तरफ से दायर की गई थी याचिका, कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को दी गई थी चुनौती ग्वालियर निवासी विकास आर्य की तरफ से दायर की गई याचिका में कुटुम्ब न्यायालय द्वारा तलाक के आवेदन को खारिज किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी. अपील पर मार्च 2025 में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने तलाक के लिए सहमति व्यक्त की थी. इसके बाद कूलिंग पीरियड माफ करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. इसके बाद परिवादी पत्नी की तरफ से स्थगन की मांग करने पर प्रकरण को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था. हाई कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी पिछले 9 साल से अलग-अलग रह रहे हैं और तलाक चाहते हैं हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश कर बताया गया था कि प्रतिवादी पत्नी मध्यस्थता के लिए उपस्थित नहीं हुई, इसलिए मामले को न्यायालय में वापस भेज दिया गया है. युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी पिछले 9 साल से अलग-अलग रह रहे हैं और तलाक चाहते हैं. जैसा की पूर्व में पारित आदेश पत्र से स्पष्ट है. ऐसी स्थिति में तलाक का आदेश नहीं देने का अर्थ होगा कि विवाह पूरी तरह से टूटने के बावजूद विशेष चरण में रोक दिया गया है. पक्षों के बीच वैवाहिक संबंधों के समाधान की कोई संभावना नहीं है. युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ विवाह विच्छेद के आदेश जारी किए.

साइबर अपराध पर शिकंजा: जामताड़ा पुलिस ने दबोचे 2 बड़े आरोपी, बरामद 10 लाख

जामताड़ा झारखंड के जामताड़ा में करमाटांड़ थाना क्षेत्र के सामुकपोखर और राजाबांध गांव में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 बड़े साइबर अपराधियों को 9 लाख 91 हजार रुपए नकद के साथ गिरफ्तार किया है। अपराधियों के पास से 2 लैपटॉप, 5 मोबाइल, 6 सिम कार्ड और 6 एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। जामताड़ा एसपी राजकुमार मेहता ने प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार रितेश कुमार मंडल और पवन मंडल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और असम के लोगों को टारगेट कर साइबर अपराध को अंजाम देते थे। ये दोनों युवक करमाटांड़ थाना क्षेत्र के मट्टांड और सुखलतांड गांव के रहने वाले हैं और उनका साइबर अपराध में लंबा आपराधिक इतिहास है। कई मामलों में वे वांछित भी थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह गिरफ्तारी करमाटांड़ थाना क्षेत्र में अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता है। इन दोनों अपराधियों के डिजिटल उपकरण और नकदी बरामद होने से साइबर अपराध में हो रही घटकों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साइबर अपराधियों के खिलाफ सतकर्ता बनाए रखने का आश्वासन दिया है ताकि आम जनता ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी से बच सकें।  

प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हमने हर काल में आई चुनौतियों का सामना स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का बनेगा वटवृक्ष मुख्यमंत्री ने त्यौहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए किया प्रेरित स्वदेशी अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी जागरण सप्ताह का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जनजागरण रैली में हुए शामिल पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से महात्मा गांधी की जयंती तक चलेगा स्वदेशी जागरण सप्ताह रवीन्द्र भवन में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी की ताकत से ही हमारी संस्कृति, हजारों हजार साल से अपने गौरव-गरिमा और समृद्धता के साथ विद्यमान है। हर युग और हर काल में आई चुनौतियों का हमने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से ही सामना किया है। महात्मा गांधी ने स्वदेशी के बल पर ही देश को आजादी दिलाई थी। उन्होंने ने जन-जन को विदेशी वस्तुओं को त्यागने और विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के लिए प्रेरित किया। अपनी माटी, अपने देश और स्वदेशी व्यवस्था के प्रति हम सबके मन में सम्मान होना चाहिए। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में बहुत समानता थी। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति की लंबी विचार प्रक्रिया के संवाहक हैं। दोनों का ही विचार था कि स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का वटवृक्ष बनेगा और भारत, विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जंयती के अवसर पर मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राज्य स्तरीय स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में पैदल मार्च कर स्वदेशी अपनाने के लिए जन-जन को किया प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ भारती, महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार, ब्रह्म कुमारी संगठन, पंतजलि समूह और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने स्वदेशी के प्रति अपनी प्रतिबद्धिता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्वदेशी संकल्प समर्थन-पत्र सौंपे। कार्यक्रम में स्वदेशी पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई रैली में मानस भवन से पैदल मार्च करते हुए शामिल हुए। रैली के माध्यम से उद्योग जगत, व्यापारी बन्धुओं, दुकानदारों, विक्रेताओं, छात्र-छात्राओं और समस्त समाज के सदस्यों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। रैली स्वदेशी पर केंद्रित नारों के माध्यम से जन-जागरण करती हुई रवीन्द्र भवन पहुंची। भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में लगेंगे स्वदेशी मेले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी जागरण सप्ताह में स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार-प्रसार करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में स्वदेशी जागरण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। यह महाअभियान प्रदेश के 313 विकासखंडों में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक चलेगा। प्रसन्नता का विषय है कि आगामी माहों में भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में स्वदेशी मेले आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी स्वदेशी के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेसडर हैं। उनके मार्गदर्शन में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। आत्मनिर्भर बनते भारत की विकास यात्रा का मार्ग स्वदेशी से ही खुलता है। किसानों और कारीगरों के परिश्रम का सम्मान जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी मिट्टी, अपनी भूमि के प्रति विश्वास के भाव से ही हम अपने जीवन को सफल और धन्य कर सकते हैं। किसान मिट्टी में श्रम से ही अपने अन्न के भंडार भरते हैं। लघु उद्योग चलाने और उसमें काम करने वाले कारीगर के भी स्वावलंबन के मार्ग पर चलते हैं, उनके परिश्रम का सम्मान आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवरात्रि, दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता समाज के सहयोग के बिना मंजिल तक नहीं पहुंच सकती है। दीपक और उसकी बाती के लिए जिस प्रकार ऑक्सीजन जरूरी है, उसी प्रकार स्वदेशी जैसे अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष  मोहन नागर, स्वर्णिम भारत वर्ष फाउण्डेशन, अखिल भारतीय सह प्रमुख स्वदेशी मेला, स्वाबलंबी भारत अभियान और सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।  

रेल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम का पहला परीक्षण सफल, भारत की मारक क्षमता को नई उड़ान

नईदिल्ली  भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह नई पीढ़ी की मिसाइल रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी गई. परीक्षण पूरी तरह सफल रहा. यह पहली बार है जब खास डिजाइन वाली रेल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई. इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास 'कैनिस्टराइज्ड' लॉन्च सिस्टम है, जो रेल नेटवर्क पर चलते हुए मिसाइल छोड़ सकता है.      मिसाइल के सफल टेस्ट की डिटेल्स पर नजर डालें तो यह लॉन्च विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया गया. इस सिस्टम की खासियत है कि यह बिना किसी पूर्व शर्त के देश के रेल नेटवर्क पर कहीं भी मूवमेंट कर सकता है. इससे लॉन्च में कम समय लगता है और दुश्मन की नजर से बचाव आसान होता है. डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) और सशस्त्र बलों की टीम ने इस परीक्षण को अंजाम दिया है. हालांकि, परीक्षण का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह रेल नेटवर्क की मोबिलिटी पर फोकस करता है, जो युद्धकाल में मिसाइल की सरवाइवेबिलिटी बढ़ाता है. क्या है अग्नि प्राइम मिसाइल की खासियत अग्नि प्राइम मिसाइल की विशेषताएं इसे और भी खास बनाती हैं. यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 2000 किलोमीटर तक के टारगेट को हिट कर सकती है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल हैं. मसलन बेहतर एक्यूरेसी, कैनिस्टराइज्ड कॉन्फिगरेशन और फास्ट ऑपरेशनल रेडीनेस. यह अग्नि सीरीज की नई पीढ़ी की मिसाइल है, जो पुरानी अग्नि-1 और अग्नि-2 को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन की गई है. कैनिस्टराइज्ड सिस्टम से मिसाइल को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है, जो इसे रोड-मोबाइल, सबमरीन-लॉन्च और साइलो-बेस्ड सिस्टम्स के साथ कंप्लीमेंट करता है. इसकी हाई मोबिलिटी और लो विजिबिलिटी दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी. अब सवाल है कि आखिर यह टेस्ट क्यों खास है? सबसे बड़ा कमाल यह है कि भारत ने पहली बार रेल से मिसाइल लॉन्च की क्षमता हासिल की है. यह दुनियाभर में अपने आप में दुर्लभ कारनामा है. रेल नेटवर्क की विशालता का फायदा उठाते हुए यह सिस्टम मिसाइल को तेजी से डिप्लॉय करने की अनुमति देता है. इससे स्ट्रैटेजिक सरप्राइज एलिमेंट बढ़ता है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से जुड़ा है, क्योंकि पूरा सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए सिग्नल है, जहां बॉर्डर टेंशन के बीच भारत अपनी मिसाइल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है. रेल-बेस्ड लॉन्च से न्यूक्लियर डिटरेंस गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि यह दुश्मन की सैटेलाइट मॉनिटरिंग से बचाव प्रदान करता है. यह टेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि ट्रेन से मिसाइल दागी जाएगी और फिर आगे बढ़ जाएगी. इससे दुश्मन ट्रैक नहीं कर पाएगा. राजनाथ सिंह ने क्या कहा? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘भारत ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल लॉन्च रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया है. यह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल 2000 किमी तक की रेंज कवर करती है और विभिन्न एडवांस्ड फीचर्स से लैस है. उन्होंने डीआरडीओ, एसएफसी और सशस्त्र बलों को बधाई दी, साथ ही कहा कि यह भारत को रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करता है. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इस तरह से देखा जाए तो यह परीक्षण भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर है. अग्नि-प्राइम क्या है? नई पीढ़ी की सुपर मिसाइल अग्नि-प्राइम अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल है. यह इंटरमीडिएट रेंज (मध्यम दूरी) वाली है, जो 2000 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है. इसमें कई एडवांस्ड फीचर्स हैं…     सटीक निशाना: उन्नत नेविगेशन सिस्टम से दुश्मन के ठिकाने को सटीक मार सकती है.     तेज रिएक्शन: छोटे समय में लॉन्च हो सकती है, भले ही कम दिखाई दे.     मजबूत डिजाइन: कैनिस्टर (बंद बॉक्स) में रखी जाती है, जो इसे बारिश, धूल या गर्मी से बचाता है. यह मिसाइल भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) के लिए बनी है. परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया. रेल लॉन्चर की खासियत: कहीं भी, कभी भी हमला इस परीक्षण की सबसे बड़ी बात रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर है. यह खास डिजाइन वाला सिस्टम है, जो…     रेल नेटवर्क पर बिना किसी तैयारी के चल सकता है.     क्रॉस कंट्री मोबिलिटी देता है, यानी जंगल, पहाड़ या मैदान में आसानी से ले जाया जा सकता है.     कम समय में लॉन्च: रुकते ही मिसाइल दाग सकता है.     कम विजिबिलिटी में काम: धुंध या रात में भी सुरक्षित. पहले मिसाइलें फिक्स्ड साइट्स से दागी जाती थीं, लेकिन यह लॉन्चर दुश्मन को चकमा दे सकता है. रेल पर चलते हुए लॉन्च करने की क्षमता से भारत की मिसाइल ताकत कई गुना बढ़ गई. परीक्षण की सफलता: भारत का गौरव डीआरडीओ, एसएफसी और भारतीय सेनाओं ने मिलकर यह परीक्षण किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी. उन्होंने कहा कि अग्नि-प्राइम के सफल टेस्ट से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास रेल नेटवर्क पर चलते हुए कैनिस्टर लॉन्च सिस्टम है. यह परीक्षण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना का हिस्सा है. अग्नि सीरीज की यह छठी मिसाइल है, जो पहले से ही सेना में तैनात हैं. क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?     रणनीतिक ताकत: दुश्मन को कहीं भी, कभी भी जवाब देने की क्षमता.     सुरक्षा बढ़ेगी: सीमाओं पर तेज रिएक्शन, घुसपैठ रोकेगी.     वैश्विक स्तर: अमेरिका, रूस जैसे देशों के साथ भारत की बराबरी.     भविष्य: अग्नि-प्राइम को जल्द सेना में शामिल किया जाएगा.  

बेटियों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम, लाडो लक्ष्मी ऐप से सीधे खाते में आएंगे ₹2100

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने आज पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना (DDLLYP) का मोबाइल एप लॉन्च किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक पहल बताया। हरियाणा की लाखों महिलाओं के लिए आज 25 सितंबर का दिन काफी खास है। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना (DDLLY) का मोबाइल एप लॉन्‍च हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचकूला से इस योजना के मोबाइल एप को लॉन्‍च कर द‍िया है। इसके साथ ही पात्र महिलाओं के खाते में 2100 रुपये आने का रास्ता साफ हो गया है। 1 नवंबर से खाते में पैसा आना शुरू हो जाएगा। इस योजना के लिए फॉर्म कैसे भरा जाएगा? मोबाइल से कैसे रजिस्ट्रेशन होगा? सीएम ने बताया कि एप लॉन्च होते ही 50 हजार महिलाओं ने इसे डाउनलोड कर लिया और 8 हजार महिलाओं ने पंजीकरण करवा लिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सहज बनाने के लिए दो टोल-फ्री नंबर भी जारी किए, ताकि हरियाणा की कोई भी महिला योजना का लाभ लेने में अड़चन न महसूस करे। इस योजना के लिए राज्य सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है और पहले फेज में 21 लाख महिलाओं को लाभ दिया जाएगा। हर पात्र महिला को सीधे उनके बैंक खाते में हर महीने 2,100 रुपए दिए जाएंगे। CM ने अपने संबोधन में कहीं 5 बड़ी बातें….     सीएम ने एप को बताया ऐतिहासिक: सीएम नायब सिंह ने लाडो लक्ष्मी एप को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह एप योजना को पारदर्शी ढंग से लागू करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने इसे महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया।     लॉन्च होते ही 50 हजार डाउनलोड, 8 हजार रजिस्ट्रेशन: सैनी ने कहा कि जैसे ही एप लॉन्च हुआ, प्रदेश में 50 हजार महिलाओं ने इसे डाउनलोड कर लिया और 8 हजार महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया। उन्होंने इस तेजी को प्रदेश की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का संकेत बताया।     टोल-फ्री नंबर महिलाओं के लिए मददगार: सीएम ने पंजीकरण में किसी भी दिक्कत को दूर करने के लिए दो टोल-फ्री नंबर 01724880500 और 18001802231 जारी किए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हरियाणा की किसी भी महिला को फॉर्म अप्लाई करने में कोई बाधा न आए।     पहले फेज में 21 लाख महिलाएं, कुल बजट 5,000 करोड़: सैनी ने कहा कि इस योजना के पहले फेज में 21 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में जितनी भी महिलाएं हों, सभी इसका लाभ ले सकेंगी।     851 करोड़ की नई योजनाओं और अस्पतालों का उद्घाटन: मुख्यमंत्री ने बताया कि आज 851 करोड़ रुपए की योजनाओं का उद्घाटन किया गया। उन्होंने 10 नए अस्पतालों का उद्घाटन भी किया और बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत गंभीर बीमारियों का इलाज 5 लाख रुपए तक फ्री है। सरकार ने 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए भी फ्री चिकित्सा सेवा लागू की है। लाडो लक्ष्मी योजना का विस्तार कब होगा लाडो लक्ष्मी योजना के पहले चरण में वो महिलाएं फॉर्म भर सकती हैं, जिनके परिवार की सालाना आय 1 लाख रुपये या उससे कम है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 21 लाख महिलाओं को पहले चरण में 2100 रुपये मिलेंगे। माना जा रहा है कि दूसरे चरण में 1.80 लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों को शामिल किया जा सकेगा। तीसरे चरण में 3 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों की महिलाओं को शामिल किया जा सकेगा। हालांकि तीसरे चरण के लिए 2028-29 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। लाडो लक्ष्मी योजना क्या है दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना का मोबाइल एप लॉन्च कर दिया है। यह योजना क्या है, इसके लिए क्या पात्रता है, इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप 'दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना' पर क्लिक कर सकते हैं। लाडो लक्ष्मी योजना: अविवाहित महिलाओं को चाहिए ये कागज लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा की पात्रता की बात करें तो इस योजना के तहत अविवाहित और विवाहित दोनों महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा आवेदन के लिए मोबाइल में एप डाउनलोड करना होगा। अगर आप अविवाहित महिला हैं तो आपको कुछ कागजों की जरूरत होगी, इन्हें नोट कर लें.. आधार कार्ड और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर परिवार के सभी सदस्यों के आधार नंबर बिजली कनेक्शन/मीटर नंबर हरियाणा कौशल विकास पंजीकरण नंबर (अगर है तो)अगर घर में किसी के पास वाहन है तो उसका पंजीकरण नंबर महिला के नाम से सक्रिय बैंक खाता नंबर और IFSC Code लाडो लक्ष्मी योजना: मोबाइल से ऐसे करें रजिस्ट्रेशन सबसे पहले अपने मोबाइल में लाडो लक्ष्मी योजना का एप डाउनलोड करें अपना मोबाइल नंबर भरें और OTP से वेरिफिकेशन करें अब जिस महिला के नाम से फॉर्म भरना है, उसका पूरा विवरण दर्ज करें इसके बाद लाभार्थी महिला के घर का पूरा पता भरें फिर लाभार्थी महिला के परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी भरें अगले चरण में परिवार की सालाना आय का पूरा विवरण दें अब अपने बैंक खाते की पूरी जानकारी भरें, जिसमें IFSC Code हो आखिरी में मोबाइल कैमरे से लाइव फोटो क्लिक करें। लाडो लक्ष्मी योजना: मोबाइल से ऐसे करें रजिस्ट्रेशन लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन सिर्फ मोबाइल एप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ कर दिया है कि 2100 रुपये वाली लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन सिर्फ मोबाइल एप से ही होगा। इसके लिए सरल सेंटर या सीएससी जाने की कोई जरूरत नहीं है। न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करें। लाडो लक्ष्मी योजना का हेल्पलाइन नंबर लाडो लक्ष्मी योजना का मोबाइल एप लॉन्च कर दिया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2100 रुपये वाली योजना के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यह टोल फ्री नंबर हैं: 0172-880500 1800-180-2231 मोबाइल एप लॉन्च होते ही 50000 से ज्यादा डाउनलोड मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में मंच से बताया कि लाडो लक्ष्मी योजना का मोबाइल एप लॉन्च होते ही 50 हजार से … Read more