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स्वास्थ्य के प्रति सजगता ही निरोग जीवन की कुंजी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य के प्रति सजगता ही निरोग जीवन की कुंजी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है स्वास्थ्य जागरूकता — उप मुख्यमंत्री का संदेश सेवा पखवाड़ा के तहत आदर्श विज्ञान महाविद्यालय रीवा में सिकल सेल एनीमिया जांच एवं जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया तभी होगी जब हम स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। सेवा पखवाड़ा में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार के तहत स्वास्थ्य शिविर आयोजित किये जा रहे हैं जिसमें महिलाएँ, बच्चे, किशोरी बालिकाएँ एवं अन्य लोग भी अपने स्वास्थ्य की जांच करायें तथा स्वास्थ्य रीवा विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करें। शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय रीवा में किरण सेवा संस्थान के सहयोग से सिकल सेल एनीमिया जागरूकता एवं टेस्टिंग शिविर का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक रक्तविकार है जिससे बीमारी होती है इसकी जांच के उपरांत इलाज आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किरण सेवा संस्थान बधाई की पात्र है जो इस क्षेत्र में सिकल सेल की जांच व उपचार का कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक संचालित सेवा पखवाड़ा अन्तर्गत स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान में सभी अपने स्वास्थ्य की जांच करायें। किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य की जांचकर आभा कार्ड बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिये नियमित दिनचर्या में प्राणायम, योगासन, ध्यान करते हुए खानपान में सावधानी रखें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे राइट टू स्क्रीनिंग अभियान का लाभ लें व स्वास्थ्य की जांच करायें। उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्युदर को कम करने के प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में स्वस्थ व विकसित भारत एवं विकसित रीवा का संकल्प पूरा होगा। किरण सेवा संस्थान के डॉ. अभय मिश्रा ने शिविर की संक्षिप्त जानकारी दी। अध्यक्ष नगर निगम  व्यंकटेश पाण्डेय, प्राचार्य  आरएन तिवारी सहित प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

टैरिफ की धमक के बीच शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, इन 10 स्टॉक्स ने बनाई रॉकेट जैसी छलांग

मुंबई  शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मंगलमय हुई. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गिरावट से उबरते हुए तेज रफ्तार से भागते हुए नजर आए. खास बात ये है कि बाजार में ये तेजी अमेरिका की ओर से लगातार किए जा रहे टैरिफ ऐलान के बावजूद देखने को मिल रही है, जिनसे भारतीय कारोबार भी प्रभावित हो सकता है. इसमें ताजा फार्मा और बाहरी फिल्मों पर 100% टैरिफ का ऐलान शामिल है. लेकिन ये शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक टिकी नहीं रह सकी और घंटेभर बाद दोनों इंडेक्स ने ये तेजी गंवा दी. मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 80,364.94 की तुलना में उछलकर ओपन हुआ और झटके में करीब 300 अंक की छलांग लगा गया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने अपने पिछले बंद 24,634.90 के मुकाबले तेज बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में टाटा ग्रुप के टाइटन से लेकर टीसीएस तक के शेयर ग्रीन जोन में कारोबार करते हुए नजर आए. लेकिन सुबह 10.15 बजे पर दोनों इंडेक्स कभी मामूली गिरावट के साथ रेड जोन में, तो कभी मामूली बढ़त लेकर ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आने लगे.  सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स बढ़त के सात 80,541.77 पर ओपन हुआ और फिर इसकी रफ्तार तेज हो गई और ये करीब 300 अंक से ज्यादा चढ़कर 80,677.82 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया. वहीं दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी इंडेक्स 24,691.95 पर ओपनिंग करने के बाद अचानक उछलकर 24,720.40 के लेवल पर पहुंच गया  शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 430 कंपनियों के शेयर अपने पिछले बंद के मुकाबले बढ़त के साथ ग्रीन जोन में खुले, तो 256 शेयरों की ओपनिंग गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई, वहीं 76 शेयर फ्लैट खुले. सबसे तेज भागने वाले शेयरों में Titan Company, Asian Paints, Cipla, Tata Consumer आगे रहे, तो वहीं गिरावट वाले शेयरों की बात करें, तो SBI Life Insurance, Tata Motors, SBI, Tech Mahindra और Dr Reddy's Labs रेड जोन में ओपन हुए.  सबसे तेज भागने वाले ये 10 स्टॉक  मंगलवार को बाजार में तेजी के बीच सबसे तेज भागने वाले शेयरों की बात करें, तो इस लिस्ट में बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल पावरग्रिड शेयर (1.40%), एशियन पेंट्स शेयर (1.20%), बीईएल शेयर (1.15%) और टाइटन भी करीब 1 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा शुरुआती कारोबार में ओला इलेक्ट्रिक (3.40%), फर्स्ट क्राई शेयर (2.55%), कल्याण ज्वेलर्स (2.90%), बैंक ऑफ इंडिया (2.20%), डेल्हीवेरी शेयर (2.05%) और महाराष्ट्र बैंक भी 2 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार करते हुए नजर आए. 

शमी पूजा क्यों है दशहरे पर विशेष? जानें ऐतिहासिक और धार्मिक कारण

दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की रक्षा की थी. लेकिन यह दिन सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है. दशहरे पर एक और खास परंपरा निभाई जाती है शमी वृक्ष की पूजा. शमी पूजन को धर्म, पुराण और ज्योतिष—तीनों ही स्तर पर बेहद शक्तिशाली और फलदायी बताया गया है. महाभारत से जुड़ी कथा: पांडव और शमी वृक्ष शमी का महत्व महाभारत काल से जुड़ा है. जब पांडव अज्ञातवास पर निकले तो उन्होंने अपने सभी शस्त्र एक शमी के पेड़ में छिपा दिए थे. बारह साल बाद जब वे लौटे तो उनके शस्त्र वैसे ही सुरक्षित मिले. इसी वजह से शमी को शक्ति और विजय का प्रतीक माना गया. तभी से दशहरे के दिन शमी पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है. शमी के पत्ते क्यों कहलाते हैं ‘सोना’ दशहरे पर शमी वृक्ष के पत्ते आपस में बांटने की परंपरा कई राज्यों में प्रचलित है. खासकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे सोना बांटना कहा जाता है. मान्यता है कि शमी के पत्ते असली सोने के समान शुभ होते हैं. इन्हें घर में रखने से लक्ष्मी का वास होता है और धन-समृद्धि बढ़ती है. यही कारण है कि दशहरे पर लोग शमी के पत्ते घर ले जाकर पूजाघर या तिजोरी में रखते हैं. शमी और ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शमी वृक्ष शनि ग्रह का प्रिय है. दशहरे पर शमी की पूजा करने से शनि दोष शांत होता है, साथ ही करियर और व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं. कहा गया है कि जो व्यक्ति नियमित शमी वृक्ष की पूजा करता है, उसके जीवन में स्थिरता आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. शमी पूजन से मिलने वाले लाभ     शत्रु बाधा और संकटों से मुक्ति     शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव का नाश     घर में सुख-शांति और सौभाग्य की वृद्धि     धन और समृद्धि की प्राप्ति     कार्यक्षेत्र और व्यापार में सफलता     हर क्षेत्र में विजय और न्याय की प्राप्ति रावण और शमी का संबंध कहा जाता है कि लंका में रावण ने शमी वृक्ष की विशेष पूजा की थी. इसी कारण इसे युद्ध और विजय से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत में आज भी दशहरे के अवसर पर लोग शमी के वृक्ष के नीचे पूजा कर उसे प्रणाम करते हैं और युद्ध या कार्य की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगते हैं. दशहरा सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति और समृद्धि को आमंत्रित करने का अवसर भी है. इस दिन शमी पूजन करने से शत्रु पर विजय, शनि दोष का नाश और धन की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि दशहरे पर शमी की पूजा करना शुभ और आवश्यक माना गया है.

सेहत का खजाना: पपीते के बीज से दूर होंगे कई रोग

पपीता एक ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अक्सर लोग इसके बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि पपीते के बीज भी एक पावरफुल सुपरफूड की तरह काम करते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व जैसे फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंजाइम्स, विटामिन और मिनरल्स शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं पपीते के बीजों से मिलने वाले कुछ जबरदस्त फायदों के बारे में। लिवर डिटॉक्स करें मदद पपीते के बीज लिवर को टॉक्सिन्स से मुक्त करते हैं और लीवर की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। ये फैटी लिवर और सिरोसिस जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक हैं। किडनी को रखें हेल्दी बीजों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व किडनी को इंफेक्शन और सूजन से बचाते हैं। नियमित सेवन से किडनी हेल्दी बनी रहती है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं इनमें पाया जाने वाला पपेन एंजाइम डाइजेशन को बेहतर बनाता है और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। डिटॉक्सिफिकेशन में मददगार पपीते के बीज शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। आंतों के कीड़ों से सुरक्षा पपीते के बीज परजीवियों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं, खासतौर पर बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या को दूर करते हैं। सूजन और दर्द से राहत प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण ये गठिया, जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम पहुंचाते हैं। वजन घटाने में मददगार इन बीजों में फाइबर की भरपूर मात्रा मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है और वजन नियंत्रित रहता है। त्वचा को दें निखार जों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन से टॉक्सिन्स को हटाते हैं, जिससे स्किन ग्लोइंग और हेल्दी बनी रहती है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें इनमें हेल्दी फैट होता है जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाता है और हार्ट को हेल्दी बनाए रखता हैं। कैंसर से बचाव में सहायक पपीते के बीजों में मौजूद फेनोलिक और फ्लैवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स कुछ प्रकार के कैंसर से बचाने में सहायक साबित होते हैं। सावधानी भी है जरूरी पपीते के बीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें। ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इन्हें सुखाकर पाउडर बनाकर या हल्का चबाकर सेवन करना सुरक्षित होता है। अगली बार जब आप पपीता खाएं, तो इसके बीज न फेंके। इन्हें अपने डायट में शामिल कर आप कई बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

दिल्ली में पहली बार! छठ पूजा अब यमुना के दोनों किनारों पर, सीएम रेखा गुप्ता ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि आस्था का छठ पर्व इस बार यमुना नदी के दोनों किनारों पर आयोजित किया जाएगा। ऐसा दिल्ली में पहली बार होगा। यमुना के किनारों पर छठ पूजा को लेकर विशेष प्रबंध किए जाएंगे ताकि व्रत करने वालों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यमुना नदी के अलावा जहां कहीं भी छठ पूजा का आयोजन होगा, सरकार वहां पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी। मुख्मयंत्री के अनुसार आस्था, प्रकृति और भावनाओं से जुड़े इस पर्व को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित ढंग से मनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। यमुना में विसर्जन की मनाही है, पूजा की नहीं छठ पर्व की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, कपिल मिश्रा, मुख्य सचिव धमेंद्र के अलावा संबंधित विभागों के आला अधिकारी उपस्थित थे। छठ पर्व की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से बातचीत की, जानकारी ली और आवश्यक निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने बताया कि नियमों के अनुसार यमुना नदी में विसर्जन की मनाही है और छठ पर्व के अनुष्ठानों में विसर्जन का कोई प्रविधान नहीं है। उन्होंने कहा कि राजधानी में पूर्वांचलवासियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, इसलिए उनकी धार्मिक आस्था व सुविधा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में यमुना के प्रवेश स्थल पल्ला से लेकर अंतिम स्थल ओखला तक दोनों किनारों पर छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। इन दोनों किनारों पर जहां भी छठ पर्व के लिए समतल किनारे उपलब्ध होंगे, वहां सरकार की ओर से व्रतधरियों को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। पल्ला से ओखला तक होंगे विशेष इंतजाम मुख्यमंत्री ने कहा कि पल्ला से लेकर वजीराबाद तक के किनारों पर तो विशेष व्यवस्था की ही जाएगी, साथ ही आईटीओ, ओखला जैसे पुराने स्थलों पर भी व्यवस्थाएं और दुरुस्त की जाएंगी। मुख्यमंत्री के अनुसार अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि छठ पूजा के दौरान वहां सफाई व स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा, व्रतधारियों व उनके अपनों को धूल आदि की परेशानी से बचाने के लिए पानी का छिड़काव किया जाए। पुलिस व ट्रैफिक पुलिस को वहां सुरक्षा व यातायात व्यवस्था चौकस रखने के आदेश जारी किए गए हैं। आश्वयकता हुई तो पूजा स्थलों पर चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग को छठ पर्व से पूर्व यमुना से जलकुंभी निकालने के भी आदेश जारी किए गए हैं। इस बार इन स्थलों पर प्रकाश की विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। छठ के अन्य घाटों का भी ध्यान रखेगी सरकार मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में यमुना के किनारो के अलावा मुनक नहर, मुंगेशपुर ड्रेन के अलावा कृत्रिम तालाबों में भी छठ पूजा आयोजित की जाती है। राजधानी में कुल मिलाकर 929 स्थलों पर पूजा-अर्चना की जाती है। इन स्थलों पर सरकार की ओर से समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। अगर किसी संस्थान को एनओसी चाहिए तो उसे भी बिना किसी परेशानी से उसे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों बाद वह यमुना नदी व अन्य स्थानों का दौरा करेंगी, ताकि तैयारियों की किसी प्रकार की कमी न रहने पाए। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे विशेष स्थान भी चिह्नित किए जाएंगे, जहां छठ पूजा का विशेष आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अगर यमुना में अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी तो हरियाणा सरकार से निवेदन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व पूर्वांचलवासियों की आस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है और इसे पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाने के लिए दिल्ली सरकार पूरी तरह तैयार है। यह पर्व हमें प्रकृति और स्वच्छता के प्रति हमारी जिम्मेदारी का स्मरण कराता है। दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस बार श्रद्धालुओं को छठ पर्व पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हों और पर्व का आयोजन स्वच्छ, सुरक्षित और भव्य रूप में हो।  

नए सर्किल रेट से यूपी के इस जिले में जमीनें होंगी महंगी, जानें कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें

बदायूं जमीन खरीदने और बेचने वाले सावधान हो जाएं। अगले सप्ताह से नए सर्किल रेट लागू हो रहे हैं। उसके अनुसार जिले की जमीन 15 प्रतिशत महंगी हो जाएगी। कुछ इलाकों में 18 प्रतिशत तक जमीनों के रेट बढ़ाए गए हैं। इससे उन जमीन मालिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो नए सर्किल रेट के अनुसार अपनी जमीन बेचना चाह रहे हैं और जो लोग खरीदने के विचार में है, उन्हें 15 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जिला प्रशासन की ओर से पिछले छह माह से जिले की जमीनों का सर्वे चल रहा था। उसके अनुसार जून में नए सर्किल रेट लागू होने थे लेकिन इससे पहले जिन किसानों या जमीन मालिकों की जमीन अधिग्रहण हो चुकी थी। उनका भुगतान भी पूरा नहीं हो पाया था। उनकी जमीनें पुराने सर्किल रेट के अनुसार अधिग्रहण की गईं थीं और उसी के हिसाब से उनका भुगतान हो रहा था। भुगतान न होने की वजह से जिले में नए सर्किल रेट लागू नहीं हो सके थे लेकिन अब उप निबंधक कार्यालय और जिला प्रशासन ने नए सर्किल रेट लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह से जिले में नए सर्किल रेट लागू कर दिए जाएंगे। जिले भर की जमीनों के 15 से 18 प्रतिशत तक मूल्य बढ़ाए गए हैं। अधिकतर जमीनों के 15 प्रतिशत तक ही मूल्य बढ़े हैं जबकि जहां सबसे ज्यादा महंगी जमीन है, वहां पर 18 प्रतिशत तक मूल्य बढ़ा दिए गए हैं। इसका फायदा उन जमीन मालिकों को सबसे ज्यादा होगा, जो किसी कारण बस अपनी जमीन बेचना चाह रहे हैं। अब उन्हें नए सर्किल रेट के हिसाब से जमीन का पैसा मिलेगा लेकिन अब उन लोगों के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी जो लोग जमीन खरीदने का विचार बना रहे हैं। उन्हें अब नए सर्किल रेट के अनुसार जमीनों का भुगतान करना पड़ेगा। शहर के आसपास इलाके के लोगों को सबसे ज्यादा होगा लाभ इस समय शहर के आसपास इलाके में ही सबसे ज्यादा जमीन की खरीद फरोक्त हो रही है। शहर के तमाम व्यापारी बाईपास पर जाकर जमीनें तलाश रहे हैं, जिससे उनका कोई ठिकाना बन सके। इसके अलावा मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे, आंवला, बरेली, उझानी, उसहैत, अलापुर मार्गों पर जमीनें तलाशी जा रही हैं। नए सर्किल रेट के लागू होने से इन इलाकों में जमीनें महंगी हो जाएंगी। या फिर जिन इलाकों में सबसे ज्यादा प्लाटिंग चल रही है। वहां के लोगों को लाभ होगा। उन्हें नए सर्किट रेट के अनुसार ही भुगतान प्राप्त होगा।  

हेमा मालिनी के नेतृत्व में NDA की टीम करेगी करूर दौरा, जानें पूरा मिशन

नई दिल्ली तमिलनाडु के करूर में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने एक 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह टीम हादसे की वजहों की जांच करेगी और पीड़ित परिवारों से भी मिलेगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस समिति का गठन किया है। इस टीम में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, बृजलाल, अपराजिता सरंगी, रेखा शर्मा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और TDP के के. पुट्टा महेश कुमार शामिल हैं। इस समिति की संयोजक भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी होंगी।   कहां-कहां जाएगी NDA की टीम? भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। बयान के अनुसार, यह टीम घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के साथ पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी। सीतारमण ने करूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी दौरा किया और घायलों का हालचाल जाना। स्टालिन का संदेश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना को बहुत बड़ी त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन को सक्रिय कर सभी जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए। स्टालिन ने अपने वीडियो संदेश में कहा, करूर में जो हुआ वह एक क्रूर त्रासदी है। यह ऐसा हादसा है जो पहले कभी नहीं हुआ और भविष्य में भी कभी नहीं होना चाहिए। मैंने अस्पातल जाकर जो दृश्य देखे वे अब भी मेरी आंखों के समने ताजा हैं।  

फटाफट परिणाम! बुरी नजर हटाने के लिए 3 वास्तु शास्त्र के टिप्स

घर परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होता है। जब घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है, तभी जीवन में सफलता और संतोष मिलता है। लेकिन क्या होगा अगर बार-बार घर पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो, और बुरी नजर का साया आपके परिवार और संपत्ति पर पड़ता रहे ? ऐसे समय में वास्तु शास्त्र के सरल लेकिन प्रभावी उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र हमारे घर की ऊर्जा और वातावरण को संतुलित करने की एक प्राचीन विद्या है। जब घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो बुरी नजर का असर कम हो जाता है। वास्तु के अनुसार, घर के कुछ खास स्थान और चीजें ऐसी होती हैं जो बुरी नजर को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर भगाने में मदद करती हैं। मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा लगाएं तुलसी का पौधा हमारे घर के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है। तुलसी के पौधे में एक सकारात्मक ऊर्जा होती है जो बुरी नजर को रोकती है और घर में खुशहाली लाती है। मुख्य द्वार के समीप तुलसी का पौधा लगाएं। रोज सुबह तुलसी की पूजा करें और उसकी नियमित देखभाल करें। तुलसी की पत्तियां घर के मंदिर में भी रख सकते हैं। इससे घर में शांति, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। घर के कोनों में नींबू-मिर्च का टोटका यह एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन वास्तु उपाय है। नींबू और मिर्ची का टोटका नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने और बुरी नजर को टालने में कारगर होता है। यह टोटका घर में दरवाजे या खिड़कियों के पास लगाया जाता है ताकि किसी भी नकारात्मक नजर का प्रवेश रोका जा सके। नींबू के साथ हरी मिर्च को लटकाएं। इसे मुख्य द्वार के बाहर या घर के ऐसे स्थान पर लगाएं जहां से बाहर की नजर आती हो। कुछ लोगों का मानना है कि नींबू मिर्च का टोटका हर 15-20 दिन में बदलना चाहिए ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। घर में गणेश जी और नारियल का पूजन गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वास्तु में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर घर के मुख्य द्वार के पास स्थापित करने से बुरी नजर से बचाव होता है। साथ ही, घर में नियमित नारियल का पूजन भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। घर के पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति रखें। व्रत या शुभ कार्य के दिन नारियल का पूजन करें और गणेश मंत्र का जप करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।

कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण: IIT मद्रास ने लॉन्च किया जीनोम और टिशू बैंक

नई दिल्ली  कैंसर अभी भी दुनिया भर में एक जानलेवा बीमारी है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है. बढ़ते मामलों के चलते वैसा इलाज चाहिए जो हर व्यक्ति के जीन और टिशू के अनुकूल हो. इस ज़रूरत को देखते हुए आईआईटी मद्रास ने एक नई पहल की है, एक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक बनाकर, जो भारत में पर्सनलाइज्ड (व्यक्ति-विशेष) कैंसर उपचार को एक नई राह दे सकती है. सवाल आता हो कि कैसे करेगा काम ये बैंक? तो इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है देश भर के कैंसर रोगियों से लगभग 7,000 ट्यूमर सैंपल्स इकट्ठे करना और उन्हें लैब में बढ़ाना. इन नमूनों पर अलग-अलग थेरेपी ट्राय की जाएगी, ताकि यह देखा जाए कि किस थेरेपी का कौन से रोगी पर सबसे असर है. इस तरह, डॉक्टर अनुमान लगाने की बजाय पहले यह जान सकेंगे कि किस इलाज से बेहतर परिणाम मिलेंगे. आईआईटी मद्रास की खोज आईआईटी मद्रास की टीम ने पहले ही एक दिलचस्प खोज की है. आपको बता दें कि एक स्तन कैंसर में ऐसा म्यूटेशन पाया है जो भारत में ज्यादा आम है, जबकि पश्चिमी देशों में नहीं. इससे यह पता चलता है कि सिर्फ विदेशी जीनोमिक डेटा पर भरोसा करना सही नहीं है, बल्कि भारत-विशिष्ट अध्ययन ज़रूरी हैं. भारत में नयापन और असर यह कैंसर जीनोम-टिशू बैंक भारत के एटलस (Bharat Cancer Genome Atlas) से जुड़ा है. इस डेटाबेस में भारत के कई कैंसर मामलों का जीनोमिक डेटा शामिल किया जाएगा. यह इंफॉर्मेशन डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को मदद करेगी कि कौन सी दवाएं और इलाज कैसे काम करें. इस पहल का एक बड़ा मकसद है प्रिसिजन मेडिसिन लाना यानी ऐसा इलाज जो हर रोगी की जीन और बॉडी प्रोफ़ाइल को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए. इससे इलाज अधिक असरदार होगा, साइड इफेक्ट कम होंगे और मरीज को बेहतर जीवन मिलेगा. क्यों जरूरी होते हैं कैंसर जीनोम और टिशू बैंक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि हर इंसान के डीएनए अलग होते हैं. कैंसर भी अलग अलग लोगों में अलग तरीकों से बढ़ता है. अभी तक ज्यादातर इलाज विदेशी रिसर्च और डेटा पर होते हैं, जबकि भारतीयों के जीन और टिश्यूज में अंतर पाया जाता है. अगर भारतीयों के पास अपना डेटा और टिश्यू बैंक होगा तो डॉक्टर और वैज्ञानिकों को समझने में आसानी होगी कि किस तरह का कैंसर ज्यादा होता है और कौन सी दवा या थेरेपी बेहतर असर करेगी. दूसरा कारण है कि कैंसर के इलाज में समय और सटीकता बहुत मायने रखती है. अगर डॉक्टरों के पास पहले से जानकारी होती कि किस मरीज को कौन सी दवा कितनी असरदार होती, तो इलाज में देरी नहीं होगी और सही दवा और थेरेपी भी दी जा सकेगी.  

रावण दहन समारोह: HEC धुर्वा में होगी भव्य उत्सव, सीएम हेमंत समेत कई दिग्गज शामिल

रांची झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं विजयादशमी रावण दहन समिति के मुख्य संरक्षक आलोक कुमार दुबे ने बताया कि इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार 2 अक्टूबर को शालीमार बाजार, एचईसी धुर्वा में भव्य विजयादशमी रावण दहन समारोह आयोजित होगा। यह समारोह 1968 से निरंतर चल रहा है और झारखंड एवं रांची का सबसे पुराना रावण दहन मंच है, जिसमें हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन में रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर असत्य, अहंकार एवं अन्याय पर सत्य और धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है। दूबे ने बताया कि यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रावण दहन समारोह में आयोजित आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन की भव्यता को और बढ़ा देते हैं। समिति के अध्यक्ष संजीत यादव और पदाधिकारियों ने झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मुलाकात कर उन्हें रावण दहन समारोह में आमंत्रित किया। दोनों मंत्रियों ने कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव सहित कई विशिष्ट अतिथियों को भी समारोह में आमंत्रित किया जा रहा है। दूबे ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन सुविधाओं को पूर्ण रूप से सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने बताया कि हालांकि बारिश का मौसम आयोजकों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन प्रशासन और समिति के संयुक्त प्रयास से इस बार का रावण दहन समारोह और भी भव्य रूप से आयोजित होगा। सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से 28 सितंबर को डोरंडा छप्पन सेट में मां दुर्गा का पट खोलने का पावन कार्य और पूजा पंडाल का उद्घाटन भी किया जाएगा। यह आयोजन भी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है। दूबे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे परिवार सहित इस पवित्र अवसर पर शामिल होकर विजयादशमी के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है और इससे समाज में एकता और सछ्वावना बढ़ती है।