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मंजूर नहीं हुआ ट्रंप का प्लान, हमास में बढ़ा मतभेद – जानें कौन सी दो शर्तें हैं विवादित

दोहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले दिनों गाजा में शांति स्थापना और युद्धविराम की शर्तों पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति योजना के तहत 20 सूत्री प्रस्ताव दिया है, जिस पर इजरायल ने सहमति दे दी है लेकिन हमास की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हमास को इसके लिए 72 घंटों का समय दिया गया है। इस बीच, फिलिस्तीनी सूत्रों ने बताया है कि हमास ने ट्रंप के 20 सूत्री प्लान की दो अहम शर्तों पर सवाल उठाए हैं और उसे मानने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के अधिकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना में निरस्त्रीकरण संबंधी प्रावधानों में संशोधन चाहते हैं। यह जानकारी समूह के नेतृत्व के एक करीबी फिलिस्तीनी सूत्र ने दी है। सूत्र ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि हमास के वार्ताकारों ने मंगलवार को दोहा में तुर्की, मिस्र और कतर के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस दौरान ट्रंप की दो शर्तों पर अपनी असहमति जताई है और उसमें बदलाव की चाहत जताई है।फिलिस्तीनी सूत्र ने बताया कि हमास अपने गुट के निरस्त्रीकरण और अपने लड़ाकों के गाजा से निष्कासन जैसे कुछ प्रावधानों में संशोधन करना चाहता है। इसके अलावा हमास नेता गाजा पट्टी से इजरायल की पूर्ण वापसी के लिए अंतर्राष्ट्रीय गारंटी चाहते हैं। हमास के लोग यह भी चाहते हैं कि गाजा के अंदर या बाहर कहीं भी उनके लोगों पर हमला न हो और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इसकी गारंटी दे कि भविष्य में हमास के लोगों की हत्या नहीं की जाएगी। अरब साझेदारों के संपर्क में हमास दरअसल, पिछले महीने दोहा में युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा के लिए हमास अधिकारियों की बैठक के दौरान ही इजराइल ने हमला बोल दिया था, जिसमें छह लोग मारे गए थे। फिलिस्तीनी सूत्र ने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा कि हमास अन्य क्षेत्रीय और अरब साझेदारों के साथ भी संपर्क में है। इस बीतचीत से परिचित एक अन्य सूत्र ने एएफपी को बताया कि ट्रम्प की योजना को लेकर फिलिस्तीनी समूह में मतभेद है। हमास के भीतर दो विचार चल रहे फिलिस्तीनी सूत्र ने कहा कि अभी तक हमास के भीतर दो विचार चल रहे हैं। पहला बिना शर्त ट्रंप के पीस प्लान का समर्थन करता है क्योंकि उन्हें इसके जरिए ट्रम्प गाजा में युद्धविराम की गारंटी दे रहे हैं लेकिन दूसरे समूह को निरस्त्रीकरण और गाजा छोड़ने की शर्त पर आपत्ति है। सूत्र ने कहा, "वे निरस्त्रीकरण और किसी भी फिलिस्तीनी नागरिक को गाजा से निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं।" बता दें कि हमास के पास ट्रंप के 20 सूत्री प्लान पर जवाब देने के लिए अब कम समय बचा है। हालांकि, सूत्र ने कहा कि समूह को जवाब देने के लिए अभी दो या तीन दिन और लग सकते हैं।  

सड़क पार कर रही महिला को वाहन ने कुचला, इलाके में गुस्सा

कोरबा कोरबा के पाली थाना क्षेत्र के चैतमा चौकी के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। एक अज्ञात वाहन ने महिला को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना कपोट गांव में हुई है। घटना के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया और उचित मुआवजे की मांग की। वहीं, तीन घंटे की मशक्कत के बाद चक्का जाम समाप्त किया गया। मृतक महिला की पहचान नवाडीह कपोट निवासी जमुना बाई पोर्ते के रूप में हुई है। परिजनों की माने तो रोज की तरह गुरुवार की सुबह घर से चाय नाश्ता कर गांव से लगे खेत को देखने के लिए जा रही थी इस दौरान तेज रफ्तार वाहन ने अपनी चपेट में ले लिया। गुस्साए लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। वहीं, चक्का जाम की सूचना पर कटघोरा थाना पाली थाना और चैतमा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी लेते हुए लोगों को समझाने का प्रयास किया। जहां तीन घंटे की मशक्कत के बाद चक्का जाम समाप्त किया गया। नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत करा पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद की बात कही।

मुख्य गवाह की जुबानी: रामपुर तिराहा कांड और केस लड़ते हुए हुई त्रासदी, तीन बार आर्थिक संकट में फंसा

चंपावत आज रामपुर तिराहा गोलीकांड की 31वीं बरसी है। 1994 में आज ही के दिन उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर यूपी पुलिस ने बर्बरता दिखाई थी। 31 साल पहले आंदोलनकारियों पर ऐसा कहर बरपा था, जिसने जलियावाला बाग हत्याकांड की याद ताजा कर दी थी। चंपावत के नवीन भट्ट अपने दम आज भी रामपुर तिराहा कांड की लड़ाई लड़ रहे हैं। सीबीआई ने उन्हें इस हत्याकांड का मुख्य गवाह बनाया है। रामपुर तिराहा कांड पर सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। स्थिति यह है कि वह गवाही देने निजी खर्च पर मुजफ्फरनगर जाते हैं। नवीन लंबे समय से मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। खेतीखान के कानाकोट निवासी नवीन भट्ट 30 साल से अपने खर्चें से मुजफ्फरनगर की अदालत में गवाही देने जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें सरकार से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती है। नवीन रामपुर तिराहा कांड के चश्मदीद गवाह रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलनकारियों को किया याद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहा कांड के आंदोलनकारियों को याद किया। उन्होंने X हैंडल पर लिखा, "रामपुर तिराहा गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर राज्य आंदोलनकारियों को कोटि-कोटि नमन। आपके अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य का गठन संभव हुआ। हमारी सरकार अमर शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।" महिलाओं से दुष्कर्म में दो जवान दोषी मार्च 2024 में मुजफ्फरनगर की अदालत ने 1994 की एक और दो अक्टूबर की रात हुए इस बर्बर कांड में पीएसी के दो जवानों को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। नवीन ने बताया कि मामले में कुल 12 गवाह थे। जिनमें से पांच की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। नवीन वर्तमान में मजदूरी कर रहे हैं। नवीन के तीन बेटे हैं। उनके दो बेटे स्नातक करने के बाद बेरोजगार हैं जबकि सबसे छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है। केस लड़ने के लिए तीन बार लोन लिया नवीन ने बताया कि वह 30 साल से लगातार अपनी जेब से पैसा खर्च कर हर तारीख पर मुजफ्फरनगर की अदालत में उपस्थित होते हैं। बताया कि एक तारीख में जाने में उनकी अच्छी खासी रकम खर्च हो जाती है। नवीन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने खेतीखान के एक बैंक से 60-60 हजार रुपये का तीन बार लोन भी लिया। सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। उन्हें अभी तक राज्य आंदोलनकारी भी घोषित नहीं किया गया है। घटनास्थल से मिले थे महिलाओं के कपड़े नवीन ने बताया कि आंदोलनकारी महिलाओं को गन्ने के खेत और पास के निर्माणाधीन मकानों में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। दो अक्तूबर की सुबह, रामपुर तिराहे से लगभग 200 मीटर दूर हुई फायरिंग में सात लोग मारे गए। इस घटना ने राज्य आंदोलन को और अधिक हिंसक और संवेदनशील बना दिया। पुलिस का लाठीचार्ज और गोलीबारी नवीन भट्ट को एक और दो अक्तूबर 1994 की रात आज भी याद है। नवीन बताते हैं कि वे मुजफ्फरनगर में एक होटल में काम करते थे। उन्होंने काम-धंधा छोड़कर राज्य आंदोलन में कूदने का फैसला किया। एक अक्तूबर को वे दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर पहुंचे। यूपी पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के रामपुर तिराहे पर बेरिकेडिंग की थी। रात करीब आठ बजे पुलिस ने दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। पूरी रात पुलिस की बर्बरता जारी रही।  

मरीजों का अधिकार: प्रिस्क्रिप्शन बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य, HC ने डॉक्टरों को निर्देशित किया

नई दिल्ली  डॉक्टरों की लिखावटें अक्सर सुर्खयों में रहती हैं। तकनीक के इस दौर में भी हाथ से वे ऐसी पर्चियां लिखते हैं कि मरीजों की समझ से बाहर होती है। कई बार तो दवा दुकानदार भी नहीं समझ पाते हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का मानना है कि ऐसी पर्चियां लिखना मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के समान है। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने पढ़ने योग्य प्रिस्क्रिप्शन को मरीजों का मौलिक अधिकार करार दिया है। न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने कहा कि अक्सर डॉक्टरों की लिखावट इतनी खराब होती है कि मरीज या उनके परिजन समझ ही नहीं पाते कि कौन सी दवा लिखी गई है। कभी-कभी दवा बेचने वाले के गलत पढ़ने से भी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी डॉक्टर अब बड़े अक्षरों (CAPITAL LETTERS) में स्पष्ट लिखकर ही दवाइयां लिखें। जब तक डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन की व्यवस्था लागू नहीं होती, यह नियम सख्ती से अपनाया जाए। मेडिकल कॉलेजों में दो साल के भीतर हैंडराइटिंग की ट्रेनिंग शुरू की जाए। आपको बता दें कि हाईकोर्ट यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट एक मामले में बलात्कार, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हालांकि मूल मामला अलग था, लेकिन अदालत ने इस दौरान पर्चियों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति पुरी ने कहा, “सरकार और संस्थानों के पास इतनी तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद अगर आज भी डॉक्टर अपठनीय लिखावट में दवाएं लिख रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। यह सीधे-सीधे जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन सकता है।”  

गोदाम में आग से अफरातफरी, प्रशासन की लापरवाही से नाराज़गी

गौरेला पेंड्रा मरवाही पेंड्रा के रिहायशी इलाके में स्थित गल्ला गोदाम में आग लगने से हड़कंप मच गया। जिसके बाद आसपास के लोगों ने अपने स्तर पर प्रयास कर आग पर चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद काबू पा लिया। पीड़ित गल्ला गोदाम मालिक का कहना है कि घटना के बाद वो दमकल विभाग के साथ पुलिस के पास भी मदद के लिए भी गए, पर कहीं से उन्हें मदद नही मिली। आग शॉर्ट सर्किट से लगने की आशंका जाहिर की जा रही है।। जानकारी के मुताबिक, पेंड्रा के लोहतरैया तालाब इलाके में आज सुबह करीब चार बजे के आसपास मोती चंद जैन के घर के पीछे बबलू गुप्ता के गोदाम में भीषण आग लग गई। घर वालों को आग लगने का अहसास हुआ तो बाहर निकलकर देखा तो गोदाम का हिस्सा जल रहा था। जिसके बाद आनन-फानन में पीड़ितों ने दमकल विभाग के साथ स्थानीय पुलिस थाने से भी मदद मांगी। पर वहां से भी पीड़ित लोगों को मदद नहीं मिली, जिसके बाद आसपास के लोगों की मदद से गोदाम में लगी आग पर चार घंटे बाद काबू पाया गया। आग से लाखों रुपयों का माल जलकर खाक हो गया। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। वहीं, पीड़ित परिवार के लोगों ने बताया कि दमकल विभाग ने गाड़ी की बैटरी न होने का कारण बताकर टाल दिया। हालांकि, सभी आसपास के लोग तत्काल आग बुझाने में जुट गए। जिसके चलते गोदाम के पास वाले रूम में रखी हुई दोना-पत्ता बनाने की मशीन आग की चपेट में नहीं आई और एक बड़ा नुकसान होने से बच गया।

दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर दशहरा उत्सव: मावली परघाव की रस्म और देवियों का भव्य मिलन

जगदलपुर विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की महत्वपूर्ण रस्म मावली परघाव देर रात जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुई। दो देवियों के मिलन का यह अद्वितीय आयोजन हर साल की तरह इस वर्ष भी धूमधाम से संपन्न हुआ। हालांकि बारिश ने इस वर्ष कुछ खलल डाला, लेकिन उसके बावजूद यह रस्म भव्यता के साथ निभाई गई। शक्तिपीठ दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली और छत्र को परंपरा अनुसार जगदलपुर लाया गया, जहां बस्तर राजपरिवार के सदस्य और हजारों श्रद्धालुओं ने भव्य आतिशबाजी और पुष्पवर्षा से देवी का स्वागत किया। नवरात्र की नवमी को होने वाली यह रस्म लगभग 600 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है। मान्यता है कि यह परंपरा बस्तर रियासत के महाराजा रूद्र प्रताप सिंह के समय से शुरू हुई थी। मावली देवी मूलतः कर्नाटक के मलवल्य गांव की देवी हैं, जिन्हें छिंदक नागवंशीय शासकों ने बस्तर लाकर प्रतिष्ठित किया। बाद में चालुक्य राजा अन्नम देव ने उन्हें कुलदेवी के रूप में मान्यता दी और तभी से मावली परघाव की रस्म प्रारंभ हुई। इस दिन राजा, राजगुरु और पुजारी नंगे पांव राजमहल से मंदिर प्रांगण तक जाकर देवी की डोली का स्वागत करते हैं और दशहरे के समापन पर ससम्मान विदाई देते हैं।

गाजा में सैनिक भेजने पर मंथन, भारत ने बुलाया UN Peacekeeping Meet, चीन-पाक को नहीं बुलाया

नई दिल्ली  दुनियाभर में मची उथल-पुथल के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों का सम्मेलन बुलाया है। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक देशों (UN TCCs) के आर्मी चीफ्स का सम्मेलन 14 से 16 अक्तूबर तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसमें करीब 30 देशों के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व शामिल होंगे, जो संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान देते हैं। दिलचस्प बात ये है कि भारत ने चीन और पाकिस्तान को इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया है। इसके अलावा, भारत ने गाजा और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अपने सैनिकों की तैनाती पर भी दो टूक जवाब दिया है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत तब तक विदेशी संघर्ष क्षेत्रों जैसे यूक्रेन या गाजा में सैनिकों की तैनाती नहीं करेगा, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) इसकी अनुमति नहीं देता है। भारत का कहना है कि दूसरे देशों में सैनिकों की तैनाती केवल यूएन के झंडे तले ही होगी। इससे पहले 1 अक्टूबर को आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, एवीएसएम, वीएसएम, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (IS&T) ने सेनाध्यक्ष की ओर से सभा को संबोधित किया और सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गौरव की बात है कि वह इस बहुपक्षीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य एक साझा मंच तैयार करना है, जहां विभिन्न देशों और सेनाओं का अनुभव, दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता एकत्रित होकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत शांति स्थापना की जिम्मेदारियों पर विमर्श करेंगे। भारत का योगदान बहुत बड़ा कार्यक्रम में कहा गया कि यह भारत की सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक विदेश नीति और वैश्विक शांति व सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछले 75 वर्षों में भारत ने 50 मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांति सैनिक भेजे हैं, जिनमें से 182 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत ने 2007 में लाइबेरिया में पहली बार ‘ऑल वुमन पुलिस कंटिंजेंट’ तैनात कर इतिहास रचा था। हाल ही में, फरवरी में भारत ने ग्लोबल साउथ के महिला शांति सैनिकों का सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें 35 देशों ने हिस्सा लिया। भारत की पहलकदमियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता के दौरान भारत ने 2021 में "UN शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही" और "शांति स्थापना के लिए तकनीक" जैसे अहम दस्तावेजों को अपनाने में भूमिका निभाई। वहीं जून 2023 में भारत ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शांति सैनिकों की स्मृति में ‘मेमोरियल वॉल’ स्थापित कराने के लिए प्रस्ताव को प्रायोजित किया। भारत लगातार बेहतर जनादेश, शांति सैनिकों की सुरक्षा और योगदान देने वाले देशों के उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है। सम्मेलन के मुख्य बिंदु इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख सत्र होंगे: 1. क्षमता निर्माण और सतत शांति स्थापना अभियानों के लिए संसाधन जुटाना 2. शांति स्थापना अभियानों में तकनीक का उपयोग प्रतिनिधि दल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा पहलों और तकनीकी समाधानों को भी देखेंगे और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। भारत ने इन देशों को किया आमंत्रित     एलजीरिया     आर्मीनिया     बांग्लादेश     भूटान     ब्राजील     बुरुंडी     कंबोडिया     कोटे डी आइवर     इथियोपिया     फिजी     फ्रांस     घाना     इंडोनेशिया     कजाखस्तान     केन्या     किर्गिस्तान     मेडागास्कर     मलेशिया     मंगोलिया     मोरक्को     नेपाल     नाइजीरिया     रवांडा     सेनेगल     श्रीलंका     तंजानिया     युगांडा     उरुग्वे     वियतनाम     इटली  5-S दृष्टिकोण और NORMS यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी के ‘5-S विजन’ — सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि — की भावना में आयोजित किया जाएगा। साथ ही यह भारत के "न्यू ओरिएंटेशन फॉर ए रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरल सिस्टम (NORMS)" के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत संवाद, समझ और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मिलकर हम ऐसा भविष्य बना सकते हैं, जहां हर व्यक्ति शांति, सौहार्द और गरिमा के साथ जीवन जी सके।” सम्मेलन से अपेक्षा है कि यह शांति स्थापना अभियानों की हकीकत पर साझा समझ बनाएगा, परामर्श प्रक्रिया को मजबूत करेगा, शांति सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएगा और मिशन की प्रभावशीलता सुधारने के लिए तकनीकी विकल्पों की खोज करेगा। गाजा-यूक्रेन में तैनाती का सवाल रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) विश्वेश नेगी ने संभावित तैनाती पर सवालों का जवाब देते हुए कहा, "यूएन शांति सैनिक बलों का यूक्रेन या गाजा में तैनात होना अत्यंत असंभव है।" उन्होंने यूएनएससी की संरचना का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी सहमति प्राप्त करना कठिन है। नेगी ने कहा, "भारत केवल यूएन के झंडे तले ही सैनिकों को विदेश भेजता है, और यह हमारी लंबे समय से चली आ रही नीति है।" भारत यूएन शांति सैनिक मिशनों का एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। 1950 के दशक से अब तक, भारत ने 50 से अधिक मिशनों में 3 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं, और 182 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है, जो किसी भी देश में सबसे अधिक है। वर्तमान में, भारत के लगभग 5,000 सैनिक 11 सक्रिय मिशनों में तैनात हैं, जिनमें सूडान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, गोलान हाइट्स, दक्षिण सूडान, माली, लेबनान, अबी जन हाइट्स, साइप्रस, केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य, पश्चिमी सहारा और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्र शामिल हैं। नेपाल और बांग्लादेश के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। पाक-चीन को न्योता नहीं पाकिस्तान और चीन को आमंत्रित न करने का फैसला भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों और भारत-चीन सीमा विवाद को ध्यान में रखते हुए लिया गया लगता है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की कथित संलिप्तता के कारण सभी सैन्य-से-सैन्य संपर्क निलंबित हैं। चीन के मामले में, सीमा तनाव और रणनीतिक चिंताओं ने इस निर्णय को प्रभावित किया है। हालांकि, दोनों देश यूएन शांति सैनिकों के प्रमुख योगदानकर्ता हैं, लेकिन भारत ने इस आयोजन को बहुपक्षीय सहयोग के लिए सीमित रखा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर शांति और सहिष्णुता की सामर्थ्य के प्रति किया सम्मान प्रकट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूज्य बापू 'राष्ट्रपिता' महात्मा गाँधी जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम उस युगपुरुष का स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने अपने सत्य, अहिंसा और करुणा के मंत्र से न केवल भारत वर्ष की चेतना जगाई, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को मानवता का नया मार्ग दिखाया। महात्मा गांधी के स्वदेशी, स्वराज, स्वावलंबन और स्वच्छता के विचार वर्तमान में भी प्रेरणा-पुंज हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' पर शांति और सहिष्णुता की सामर्थ्य के प्रति सम्मान प्रकट किया। उल्लेखनीय है कि शांति और अहिंसा के वैश्विक प्रतीत महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर शांति और सहिष्णुता की सामर्थ्य को सम्मान देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाई जाती है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री का किया स्मरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जय जवान-जय किसान' के उद्घोषक, महान राष्ट्रभक्त, शुचिता, सरलता व दृढ़ता के प्रतिमान, 'भारत रत्न' से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्री जी ने अपने कार्यों से जो मूल्य एवं आदर्श स्थापित किए हैं, वे हर पीढ़ी को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उनके कुशल और बुलंद नेतृत्व को देश सदा याद रखेगा।  

मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शनों पर कहा, नीतियां जनता की राय से तय नहीं होती

नई दिल्ली  विजयादशमी के कार्यक्रम में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को पड़ोसी देशों में हुईं अशांति की घटनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि जब सरकार लोगों और उनकी परेशानियों से दूर रहती है, तो उसके खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया है और कहा है कि इस तरीके से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ। हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन हुआ, जिसमें युवाओं ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। भागवत ने कहा, 'श्रीलंका में, बाद में बांग्लादेश में, बाद में नेपाल में। हमारे पड़ोसी देशों में हमने इसका अनुभव किया है। अब कभी कभी हो जाता है। प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता। उनकी जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनती, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष को इस प्रकार व्यक्त होना, किसी के लाभ की बात नहीं है।' उन्होंने कहा, '…अगर हम अभी तक का इतिहास देखेंगे तो जब से उथल पुथल वाली तथाकथित क्रांतियां आई हैं। किसी क्रांति ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया। राजा के खिलाफ फ्रांस की राज्य क्रांति हुई, उसकी परिणाम क्या हुआ? नेपोलियन बादशाह बन गया। वही राज्यतंत्र कायम है। इतनी सारी तथाकथित साम्यवादी क्रांतियां हुईं, सभी साम्यवादी देश आज पूंजीवादी तंत्र पर चल रहे हैं।' संघ प्रमुख ने कहा कि अगर देश में स्थिति खराब होती है, तो बाहर की ताकतें हावी होने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे हिंसक प्रदर्शनों से उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि अराजकता की स्थिति में देश की बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है। इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल पुथल हो रही है। ये हमारे ही जैसे हैं, ये हमसे दूर नहीं हैं। ये हमारे अपने है। उनमें इस प्रकार की अस्थिरता होना, वह आत्मीयता के संबंध के चलते चिंता का विषय है।' इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।