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गंगा में डॉल्फिन की मौत से साहिबगंज में मचा हड़कंप, टीम कर रही स्थिति की समीक्षा

साहिबगंज झारखंड के साहिबगंज जिले में गंगा के तट पर एक डॉल्फिन का शव मिला है। यह जानकारी वन अधिकारियों ने दी। साहिबगंज के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) प्रबल गर्ग ने बताया कि स्थानीय मछुआरों से सूचना मिलने के तुरंत बाद वन अधिकारी मौके पर गए और शव को कब्जे में ले लिया। डीएफओ ने कहा, "हमने डॉल्फिन (वैज्ञानिक रूप से प्लैटनिस्टा गैंगेटिका) के शव को पोस्टमार्टम के लिए तालझारी के निकटतम रेंज कार्यालय में भेज दिया है। यह स्तनपायी जीव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत सूचीबद्ध है, जो इसे एक लुप्तप्राय प्रजाति बनाता है।" वन अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया डॉल्फिन के शव पर किसी बाहरी चोट के निशान नहीं हैं। उन्होंने जल प्रदूषण के कारण उसकी मौत की संभावना से भी इनकार किया। गर्ग ने कहा, "डॉल्फिन के शव पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं हैं, जिसमें जहाजों या ट्रॉलरों की आवाजाही से हुई चोट की संभावना खारिज होती है। जल प्रदूषण की संभावना बहुत कम है, क्योंकि ऐसी स्थिति में डॉल्फिनों की कई मौतें हो सकती थीं।" साहिबगंज में प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा किए गए मानसून-पूर्व सर्वेक्षण में स्तनधारियों की संख्या 250 से अधिक पाई गई।  

पाक आर्मी का कहर: बलूचिस्तान में मिले शव, चार दिन पहले हुई थी अगवा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधन-समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का संकट गहराता जा रहा है। इस सप्ताह चार लापता बलूच पुरुषों की गोली से छलनी लाशें बरामद होने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों तथा सरकारी-प्रायोजित मिलिशिया पर इन हत्याओं का आरोप लगाते हुए इसे सिस्टमैटिक हिंसा का हिस्सा बताया है। ये घटनाएं बलूचिस्तान में जारी जबरन गुमशुदगी और अतिरिक्त-न्यायिक हत्याओं की एक कड़ी हैं, जो प्रांत की स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। स्थानीय समाचार पोर्टल द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, तीन व्यक्तियों की पहचान कुद्दूस बलूच (पुत्र उमैद), नेक साल बलूच (पुत्र दिलवाश) और नजर अर्ज मुहम्मद (पुत्र अर्ज मुहम्मद) के रूप में हुई है। इनकी लाशें केच जिले के बुलैदा इलाके में सोराप डैम के पास मिलीं। ये तीनों पेशे से चालक थे और सीमा पार व्यापार से जुड़े हुए थे। उनके परिजनों का कहना है कि 30 सितंबर को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और तथाकथित "डेथ स्क्वॉड" नामक एक सरकारी समर्थित मिलिशिया ने उन्हें हिरासत में लिया था। अगले ही दिन, 1 अक्टूबर को, उनकी गोलियों से छलनी लाशें बरामद हुईं। समाचार पोर्टल ने इससे पहले नजर अर्ज मुहम्मद के लापता होने की रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें भी इसी मिलिशिया ने अगवा किया था। लगातार ऐसे मामलों में इन समूहों का नाम सामने आने से लोगों में यह भय गहराता जा रहा है कि राज्य ऐसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को या तो प्रोत्साहित कर रहा है या नजरअंदाज। घर से उठाकर मार दिया एक अन्य घटना में लसबेला जिले के उथल इलाके में मकरान कोस्टल हाईवे के पास लेयरी हसन होटल के समीप एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान जंजैब बलूच (पुत्र रोशिन) के रूप में हुई है। वह ग्वादर जिले के पसनी क्षेत्र के बाब्बर शूर इलाके का निवासी और मजदूर था। जानकारी के अनुसार, जंजैब को 28 सितंबर को उसके घर से उठा लिया गया था। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और उसके बाद क्षत-विक्षत शव मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों की बार-बार की अपीलों के बावजूद सरकार अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई करने या जवाबदेही तय करने में विफल रही है। पीड़ित परिवार पारदर्शी जांच और न्याय की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। व्यापक संदर्भ: बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद सबसे गरीब है। यहां तेल, कोयला, सोना, तांबा और गैस जैसे अपार संसाधन हैं, लेकिन स्थानीय बलूच आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजना के तहत ग्वादर बंदरगाह का विकास हो रहा है, लेकिन इससे बलूच लोगों में असंतोष बढ़ा है। वे आरोप लगाते हैं कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियां उनके संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय लोगों को दबाया जा रहा है। मानवाधिकार काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में प्रांत में 500 से अधिक जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए। जनवरी में 117, मई में 138 और जून में 84 लोग लापता हुए। इनमें से कई की लाशें बाद में 'स्टेज्ड एनकाउंटर' (फर्जी मुठभेड़) में मारी गईं बताकर बरामद की जाती हैं। एचआरसीबी ने इसे 'डर्टी वॉर' करार दिया है, जिसमें छात्र, कवि, शिक्षक और कार्यकर्ता निशाना बनाए जा रहे हैं। पिछले साल नवंबर में भी मूसा खेल जिले में चार लापता पुरुषों को काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा 'स्टेज्ड एनकाउंटर' में मारा गया था, जिसके बाद बलूच याकज्हेती कमिटी ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। इस साल सितंबर में भी नौ लाशें चार दिनों में बरामद हुईं, जो सभी गुमशुदा व्यक्तियों की थीं।  

मिशन शक्ति-5.0 के तहत अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान

मिशन शक्ति- 5.0: खतरनाक स्थिति में चुप न रहें, उठाएँ सुरक्षा के ठोस कदम मिशन शक्ति-5.0 के तहत अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान मिशन शक्ति- 5.0: स्कूल से गांव तक पहुंचा सुरक्षा संदेश, आत्मरक्षा से मिली आत्मविश्वास की सीख  योगी सरकार ने बालिकाओं को बताया, कैसे करें सरकारी और सामाजिक सहायता का सही इस्तेमाल  योगी सरकार का संकल्प, नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से ही बनेगा सुरक्षित समाज – मिशन शक्ति से मजबूत हुई महिलाओं की आवाज, सुरक्षा और स्वाभिमान बना जनआंदोलन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन शक्ति 5.0 अभियान नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई दिशा दे रही है। 90 दिवसीय विशेष अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3-11 अक्टूबर 2025) के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में "सेल्फ डिफेंस वर्कशॉप" का भव्य आयोजन किया। इसमें बताया गया कि यदि कोई बालिका या महिला किसी प्रतिकूल स्थिति का सामना करे, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए और सरकारी व सामाजिक सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए। प्रदेश के सभी जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं और समूह सत्रों में बालिकाओं और महिलाओं को उनकी सुरक्षा से जुड़े अधिकारों और तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। स्कूलों में आयोजित विशेष सत्रों में विशेषज्ञों ने छात्राओं को सिखाया कि विभिन्न सामाजिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें। इसके माध्यम से योगी सरकार का उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा, अधिकारों और कानूनी प्रावधानों से जोड़ना है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सुरक्षित जीवन जी सकें। योगी सरकार की इस पहल ने नारी सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इन सत्रों में आत्मरक्षा के व्यावहारिक प्रशिक्षण, संकट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के तरीके, हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयोजित इन कार्यक्रमों में बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाएं साझा की। अपने अधिकारों और आत्मरक्षा की जानकारी पाकर उत्साहित छात्राओं ने कहा कि यह प्रशिक्षण उन्हें आत्मविश्वास दिया है और परिवार व समाज में सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित किया है।  योगी सरकार इन कार्यक्रमों का संचालन विषय विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षकों की मौजूदगी में कर रही है। इसमें बताया गया कि यदि कोई बालिका या महिला किसी प्रतिकूल स्थिति का सामना करे, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए और सरकारी व सामाजिक सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए। यह अभियान नारी सम्मान को मजबूत करते हुए महिलाओं को आत्मरक्षा और जागरूकता की ताकत दे रहा है, जो योगी सरकार के मिशन शक्ति 5.0 का मूल आधार है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि  अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह के तहत यह अभियान बालिकाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। सेल्फ डिफेंस वर्कशॉप से जुड़ी जानकारी हर लड़की के लिए उतनी ही जरूरी है, जितनी शिक्षा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल बालिकाओं की व्यक्तिगत सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि पूरे प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित और समावेशी माहौल के निर्माण को गति देगी।

गोविंदपुरा में पोषण माह का भव्य आयोजन, पुरुष बने पोषण चैंपियन

गोविंदपुरा में धूमधाम से मना पोषण माह, पुरुष बने पोषण चैंपियन अन्नप्राशन, जन्मदिन का जश्न और क्विज़ प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह भोपाल गोविंदपुरा परियोजना के इंद्रपुरी सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 549 में सोमवार को 8वें पोषण माह की गतिविधियों का रंगारंग आयोजन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम की थीम रही – “बच्चों की पोषण देखभाल करने वाले पुरुषों को पोषण चैंपियन से सम्मानित करना और उनकी कहानियां साझा करना।” कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना अधिकारी श्रीमती शुभा श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन और सरस्वती पूजन से किया। इसके बाद माहौल और भी जीवंत हुआ जब सामाजिक संस्थाओं से जुड़ीं श्रीमती किरण शर्मा (सकारात्मक सोच संस्था), श्रीमती रेणु (आरंभ संस्था) और श्रीमती रेखा श्रीधर (मीत संस्था) ने मंच से महिलाओं और पुरुषों को संबोधित किया। उन्होंने परिवार और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि “पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, पुरुष भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।” सेक्टर सुपरवाइजर श्रीमती अनामिका पटेल ने उपस्थित लोगों को पोषण माह की रूपरेखा और उद्देश्य समझाए। वहीं श्रीमती नीति सक्सेना ने पुरुष प्रतिभागियों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सवालों के जवाब देने में पुरुषों का उत्साह देखते ही बनता था। थीम के अनुरूप कार्यक्रम में अन्नप्राशन और जन्मदिन समारोह भी रखा गया। खास बात यह रही कि बच्चों के जन्मदिन का केक टीएचआर (टेक होम राशन) से तैयार किया गया था, जिसे काटकर पूरे उल्लास के साथ बच्चों का जन्मदिन मनाया गया। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पोषण व्यंजन प्रदर्शनी भी सजाई। प्रतिभागियों ने इन पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी महत्ता समझी। अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत स्वल्पाहार के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम में माहौल उत्साह और जागरूकता से सराबोर रहा।

अमेरिकी अदालत में चुनौती: संगठनों ने कहा, H-1B वीजा नीति से रिसर्चरों का भविष्य संकट में

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सैन फ्रांसिस्को की एक अदालत में यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के आदेश को चुनौती दी है। यह मुकदमा राष्ट्रपति के उस आदेश को रद्द करने की मांग करता है, जिसमें H-1B आवेदन पर एकमुश्त 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख) की फीस लगाने का प्रावधान किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह कदम गैरकानूनी है और H-1B कार्यक्रम में अभूतपूर्व बदलाव है। दलील दी गई है कि राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र रूप से राजस्व जुटाने या कर लगाने का अधिकार नहीं है और न ही वह यह तय कर सकते हैं कि इन निधियों का उपयोग कैसे होगा। मुकदमे में फीनिक्स डो नाम की एक भारतीय नागरिक का उदाहरण दिया गया है, जो उत्तरी कैलिफोर्निया में रहकर पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी संस्था ने ‘कैप-एक्ज़ेम्प्ट’ H-1B याचिका दायर की थी, लेकिन नई फीस नीति के कारण यह प्रक्रिया रोक दी गई है। याचिका के अनुसार, “फीनिक्स डो का शोध उम्र, डाइबिटीज और दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों से जुड़ी दृष्टि-हानि के कारणों को पहचानने और इलाज के नए तरीके विकसित करने पर केंद्रित है।” मुकदमे में कहा गया है कि डो विश्वविद्यालय की पहली पोस्टडॉक्टोरल स्कॉलर हैं, जिन पर संस्था का भविष्य का शोध और फंडिंग निर्भर करता है। लेकिन नई नीति के चलते उनका आवेदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। याचिका में आगे कहा गया, “वह अस्थिरता और तनाव से जूझ रही हैं, जिससे उनका PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) बढ़ गया है। यदि राहत नहीं मिली तो उन्हें चार महीने में अमेरिका छोड़ना पड़ेगा, जिससे उनके करियर और निजी जीवन दोनों को गंभीर नुकसान होगा।” मुकदमे में कहा गया है कि नई नीति से अमेरिका के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को झटका लगेगा। फीनिक्स डो की विदाई से उनका शोधकार्य बाधित होगा, लैब का चल रहा काम रुकेगा, भविष्य की फंडिंग प्रभावित होगी और संभवतः दृष्टि रोगों के उपचार की दिशा में हो रही प्रगति भी धीमी पड़ जाएगी। इस मामले को यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, जस्टिस एक्शन सेंटर, डेमोक्रेसी फॉरवर्ड फाउंडेशन, ग्लोबल नर्स फोर्स और कई धार्मिक संगठनों ने मिलकर दायर किया है। इन समूहों का कहना है कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग, यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) और स्टेट डिपार्टमेंट ने यह आदेश बिना उचित प्रक्रिया के लागू किया और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार नहीं किया। याचिका में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक शुल्क वसूलना नवाचार को रोक देगा और अमेरिका के वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाएगा।

विपक्षी सांसदों और नेताओं के बरेली दौरे को लेकर योगी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर का बड़ा बयान

बरेली में अब अमन-चैन, विपक्षी नेता सिर्फ माहौल बिगाड़ना चाहते हैंः जेपीएस राठौर  विपक्षी सांसदों और नेताओं के बरेली दौरे को लेकर योगी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर का बड़ा बयान मंत्री जेपीएस राठौर बोले – किसी को भी बरेली का माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी बरेली जाकर माहौल खराब कर राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं विपक्षी सांसद और नेताः राठौर   कहाः ‘सर तन से जुदा’ के नारे और हिंसा के बाद पुलिस ने लिया उचित एक्शन  पुलिस ने ससमय कार्रवाई कर उपद्रव फैलाने की साजिश नाकाम कीः मंत्री   लखनऊ योगी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने कहा है कि बरेली में अब पूरी तरह अमन और चैन है, पुलिस ने जिस तरह से ससमय कार्रवाई की, उसने उपद्रव फैलाने की हर साजिश को विफल कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जो भी विपक्षी सांसद या नेता बरेली जाने की बात कर रहे हैं, वे सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश के तहत ऐसा कर रहे हैं। सरकार किसी को भी बरेली का अमन चैन बिगाड़ने की इजाजत नहीं देगी। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के सांसद और नेता अब बरेली जाकर उन्हीं उपद्रवियों के लिए आंसू बहाने की तैयारी में हैं, जिन्होंने पुलिस और निर्दोष लोगों की जान लेने की कोशिश की। उन्होंने सवाल किया कि वे किसके लिए बरेली जा रहे हैं, उन लोगों के लिए जिन्होंने कानून तोड़ा, पत्थर फेंके और पुलिस पर हमला किया? उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी निर्दोष को नुकसान नहीं हुआ, केवल कानून तोड़ने वालों को जेल भेजा गया है।  कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा राठौर ने कहा कि विपक्षी दलों को लगा था कि बरेली आग में झुलसेगा और उन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा, लेकिन प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों की लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं, अब जनता उन्हें अच्छी तरह पहचान चुकी है। जो पहले संविधान की दुहाई देते थे, वही आज संविधान तोड़ने और हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति साफ है,“कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।” उन्होंने कहा कि बरेली के लोग शांति और सद्भाव के साथ अपने घरों में अमन चैन से हैं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बाहरी ताकत उस माहौल को खराब न कर सके। वर्तमान में बरेली में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बाजार खुले हैं, यातायात सामान्य है और पुलिस सतर्कता के साथ निगरानी कर रही है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में पूरा माहौल पूर्णतः शांत हो जाएगा। पुलिस ने ससमय और संयमित एक्शन लिया राज्य मंत्री राठौर ने बताया कि जिस तरह से कुछ लोगों ने रातों-रात माहौल को भड़काने की कोशिश की, उसमें मुख्य रूप से तौकीर रजा और उनके समर्थकों का नाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रशासन उनसे बातचीत करता रहा, लेकिन रात करीब 11 बजे एक लेटर वायरल किया गया, जिसमें कहा गया कि आंदोलन नहीं होगा, जुलूस नहीं निकलेगा। फिर देर रात डेढ़ बजे दावा किया गया कि पत्र फर्जी है। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए और ‘आई लव मुहम्मद’ के साथ ‘सर तन से जुदा’ जैसे भड़काऊ नारे लगाने लगे। राठौर ने कहा कि इसके बाद उपद्रवियों ने ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम चलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया। पुलिस ने ससमय और संयमित एक्शन लिया, जिससे किसी निर्दोष को नुकसान नहीं हुआ। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो हालात और बिगड़ सकते थे। पुलिस ने उपद्रवियों को रोका, निर्दोषों की जान बचाई उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में ऐसे ही अराजक तत्व शहरों को जलाने का काम करते थे। 2010 में बरेली में महीनों कर्फ्यू जलता रहा था, लेकिन आज हमारी सरकार में ऐसी अराजकता को सहन नहीं किया जाएगा। जो ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार में शांति और कानून सर्वोपरि है। जेपीएस राठौर ने बताया कि उपद्रवियों के पास से पेट्रोल बम, असलहा और विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने पहले से घरों में जमा कर रखा था, ताकि पुलिस और निर्दोष लोगों पर हमला किया जा सके, लेकिन पुलिस ने न केवल उपद्रवियों को रोका बल्कि आम नागरिकों की जान भी बचाई।

‘आई लव मोहम्मद’ अभियान के विरोध में बरेली में गिरफ्तारी, जालंधर में सांप्रदायिक तनाव

जालंधर पंजाब के जालंधर में शुक्रवार को दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़प हो जाने से तनाव पैदा हो गया। यह झड़प उस समय हुई जब एक समूह ‘आई लव मोहम्मद’ मुहिम को लेकर उत्तर प्रदेश के बरेली में की गई गिरफ्तारियों के संबंध में प्राधिकारियों को ज्ञापन सौंपने गया था। पुलिस ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब एक समुदाय के सदस्यों ने एक संगठन के बैनर तले एकत्र होकर ‘आई लव मोहम्मद’ मुहिम के सिलसिले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बरेली में की गई गिरफ्तारियों के विरोध में मार्च निकाला। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें एक स्थानीय मौलवी भी शामिल है।  धार्मिक नारे लगाने का आरोप मार्च निकालने के बाद जब समूह पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपने के लिए एकत्र हुआ तो दूसरे समुदाय के स्कूटर सवार एक युवक से उनकी बहस हो गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि युवक ने धार्मिक नारे लगाए जबकि युवक का आरोप है कि उसे रोका गया, उसके साथ मारपीट की गई और उसके स्कूटर की चाबी छीन ली गई तथा बाद में उसे स्थानीय लोगों ने बचाया। बाद में शाम को हिंदू समुदाय के कुछ स्थानीय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।  परगट सिंह ने शांति एवं भाईचारा की अपील की पुलिस ने गलत तरीके से रोके जाने, जानबूझकर चोट पहुंचाए जाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई कार्रवाई जैसे अपराधों के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ युवक के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। इस घटना के बाद जालंधर छावनी से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सभी समुदायों से शांति एवं भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब में लोग हमेशा सद्भाव से रहे हैं और किसी को भी इस एकता को भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने सभी से प्रशासन के साथ सहयोग करने और शांति सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा कि इस घटना के संबंध में कानून को अपना काम करने दें। क्या है "आई लव मुहम्मद" अभियान? "आई लव मुहम्मद" (I Love Muhammad) एक हालिया सामाजिक और धार्मिक अभियान है, जो भारत में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ। यह मुसलमानों द्वारा पैगंबर मुहम्मद  के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम व्यक्त करने का एक शांतिपूर्ण तरीका है, जो पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया पोस्ट और जुलूसों के माध्यम से फैलाया जा रहा है। यह अभियान सितंबर 2025 में कानपुर में एक बरावाफत (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) जुलूस के दौरान शुरू हुआ, जब कुछ लोगों ने "आई लव मुहम्मद" के बैनर लगाए। 4 सितंबर 2025 को कानपुर के लल्लापुरा इलाके में एक जुलूस के दौरान 15-20 लोगों ने "आई लव मुहम्मद" के पोस्टर लगाए और नारे लगाए। पुलिस ने इसे ट्रैफिक बाधित करने और शांति भंग करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की। इससे विवाद बढ़ा। खबर फैलने के बाद, देशभर के कई शहरों जैसे बरेली, लखनऊ, उनाव, बरबंकी, मऊ, नागपुर, हैदराबाद आदि में मुसलमानों ने इस अभियान को अपनाया।  बरेलवी धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा खान (इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख) ने इसे समर्थन दिया और विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया। 26 सितंबर 2025 को बरेली में जुमे की नमाज के बाद एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, घर-घर छापेमारी की, और 72 से अधिक गिरफ्तारियां कीं। तौकीर रजा सहित 8 लोगों को हिरासत में लिया गया। बरबंकी और मऊ में भी बैनर फाड़े जाने पर तनाव बढ़ा। कुल 21 एफआईआर दर्ज हुईं, जिसमें 1,300 से अधिक लोग नामजद।

राजस्थान में बिजली सस्ती हुई! दो दशकों बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

जयपुर राजस्थान में 25 वर्षों बाद पहली बार आमजन और उद्योगों के लिए बिजली सस्ती हुई है। जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम्स ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की टैरिफ याचिका पर नियामक आयोग से मिली स्वीकृति के बाद ऊर्जा शुल्क (एनर्जी चार्ज) में कमी लागू की है। घरेलू श्रेणी में 51 से 150 यूनिट तक बिजली उपभोग करने वाले 35 लाख उपभोक्ताओं के लिए दर 6 रुपये 50 पैसे से घटाकर 6 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। 150 से 300 यूनिट वाले उपभोक्ताओं को 35 पैसे प्रति यूनिट की राहत दी गई है। वहीं, 100 यूनिट तक उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं का पूरा बिल सरकार की सब्सिडी से शून्य ही रहेगा। राज्य में कुल 1.35 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 1.04 करोड़ उपभोक्ता मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क 5 रुपये 55 पैसे से घटाकर 5 रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट किया गया है। प्रदेश के 20 लाख से अधिक किसान उपभोक्ताओं पर प्रस्तावित रेगुलेटरी सरचार्ज का कोई असर नहीं होगा, क्योंकि इसे भी राज्य सरकार वहन करेगी। औद्योगिक श्रेणी में पहली बार दरों को एकीकृत कर राहत दी गई है। वृहद उद्योगों के लिए शुल्क 7 रुपये 30 पैसे से घटाकर 6 रुपये 50 पैसे और मध्यम उद्योगों के लिए 7 रुपये से घटाकर 6 रुपये 50 पैसे प्रति यूनिट कर दिया गया है। स्मॉल इंडस्ट्री के लिए भी दर 6 रुपये तय की गई है। इस कदम से औद्योगिक निवेश और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान डिस्कॉम्स पर वर्तमान में लगभग 49,800 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी असेट्स का भार है। इसके निस्तारण के लिए रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया गया है, लेकिन छोटे उपभोक्ताओं और किसानों पर इसका भार सरकार वहन करेगी। इससे लगभग 6,700 करोड़ रुपये की रिकवरी संभव होगी और निगमों का ऋण भार घटेगा। डिस्कॉम्स का फोकस पावर परचेज कॉस्ट कम करने और सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर है। कुसुम योजना के तहत पहले ही 1,800 मेगावाट विकेन्द्रित सौर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। आने वाले समय में लगभग 12,000 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

वांगचुक विवाद पर बीजेपी सांसद का हमला: दुबे ने कांग्रेस को दिलाई इमर्जेंसी की याद

लद्दाख लद्दाख में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का विरोध करने पर कांग्रेस को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने खूब सुनाया है। दुबे ने कहा कि कांग्रेस शायद आपातकाल के समय को भूल गई है जब इंदिरा गांधी की सरकार ने विजय राजे सिंधिया और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल भीम सेन सचर को गिरफ्तार करवा लिया था। उन्होंने कहा, कांग्रस जिस संविधान का हवाला दे रही है, वह 1975 में कहा चला गया था। उन्होंने कहा, बीजेपी की संस्थापक सदस्य राज माता सिंधिया को गिरफ्तार कर लिया गया। आयकर विभाग ने छापे डाले। गायत्री देवी और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया। उन्हें ऐसी कालकोठरी में डाला गया जिसमें बाथरूम तक नहीं था और आप महिलासशक्तीकरण की बात करते हैं। निशिकांत दुबे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछ विदेशी ताकतों का हाथ था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग पूरी कर दी है। उन्होंने कहा, आज आप लद्दाख की बात करते हैं। लद्दाख में लोग मारे गए। पहले वही वांगचुक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग करते थे और विदेशी ताकत के शामिल होने के बाद वह पूर्ण राज्य की मांग करने लगे। कांग्रेस ने पिछले 30 साल में कुछ नहीं किया लेकिन मोदी जी की सरकार ने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया। निशिकांत दुबे ने कहा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल 82 साल के सचर को घसीटकर जेल में बंद कर दिया गया था। आप लोकतंत्र की बात कैसे कर सकते हैं। कांग्रेस को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इससे पहले निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिा पर कहा था कि कांग्रेस लद्दाख के मामले में घड़ियाली आंसूबहा रही है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र से मांग की है कि वह लद्दाख के लोगों से बात करे और लद्दाख में लोगों को डराना धमकाना बंद करे। उन्होंने हाल में हुई हिंसा को लेकर न्यायिक जांच की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा था कि लद्दाख में मारा गया एक शख्स जवान के परिवार से था। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बहादुर और देशभक्त की जान ले ली क्योंकि वह लद्दाख के अधिकार की मांग कर रहा था। उसके पिता का सवाल है कि क्या देश की सेवा करने का यही इनाम है? बता दें कि सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है और जोधपुर जेल में रखा गया है।  

यूक्रेन पर रूस का हवाई हमला: रेलवे स्टेशन और पैसेंजर ट्रेन पर बमबारी, दर्जनों लोग घायल

कीव  यूक्रेन के उत्तरी क्षेत्र सुमी (Sumy) में रूस ने हवाई हमला किया है. रूसी हमलों में एक पैसेंजर ट्रेन को निशाना बनाया गया है. क्षेत्रीय गवर्नर ओलेह ह्रीहोरोव ने बताया कि रूसी हमले में रेलवे स्टेशन और कीव जा रही ट्रेन को टारगेट किया गया. ट्रेन को काफी नुकसान पहुंचा है.  समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गवर्नर ओलेह ने कहा कि इस हमले में 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं, ह्रिहोरोव ने एक जलती हुई ट्रेन के डिब्बे की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और कहा कि राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं.  लगातार बढ़ रहे हैं रूसी हमले यह हमला रूस की उस एयरस्ट्राइक मुहिम का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें बीते 2 महीनों से यूक्रेन के रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. रूस लगभग हर दिन यूक्रेनी परिवहन नेटवर्क पर हमले कर रहा है. सिर्फ एक दिन पहले ही रूस ने यूक्रेन की राज्य गैस और तेल कंपनी नाफ्टोगैज़ के ठिकानों पर 35 मिसाइलें और 60 ड्रोन दागे थे. ये हमले खारकीव और पोल्टावा क्षेत्रों में हुए थे. नाफ्टोगैज़ के सीईओ सर्जी कोरेत्स्की के अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी बमबारी थी जिससे गैस उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ. इस हमले में करीब 8000 उपभोक्ताओं की बिजली कट गई. उन्होंने कहा कि हमारे कई प्लांट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, कुछ जगहों पर नुकसान बहुत गंभीर है. इस हमले का कोई सैन्य औचित्य नहीं है.  एनर्जी स्ट्रक्चर पर बढ़े हमले रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसकी सेनाओं ने यूक्रेन के गैस और ऊर्जा ढांचे पर बड़े पैमाने पर रातभर हमले किए. रूस ने दावा किया कि उसने सैन्य-औद्योगिक स्थलों को भी निशाना बनाया है. सर्दियों के करीब आते ही रूस ने यूक्रेन के एनर्जी स्ट्रक्चर पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसके कारण कई क्षेत्रों में लंबे ब्लैकआउट हो रहे हैं. यूक्रेन का पलटवार यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई तेज की है. हाल के महीनों में कीव की सेना ने रूस के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों पर हमले बढ़ा दिए हैं. इससे रूस के कई इलाकों में ईंधन की कमी हो गई है. सिर्फ सितंबर में ही यूक्रेन ने रूस और उसके कब्जे वाले इलाकों में 19 तेल ठिकानों पर ड्रोन हमले किए.