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लाडली बहनों के लिए खुशखबरी! सरकार ने जारी की किस्त की तारीख

भोपाल मध्य प्रदेश की बहुप्रतीक्षित लाड़ली बहना योजना को लेकर एक अहम अपडेट सामने आई है। इस बार जहां लाखों बहनों के लिए खुशखबरी है, वहीं कुछ महिलाओं के लिए निराशा भी हो सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में कई पात्र महिलाएं अक्टूबर माह की यानी 29वीं किस्त से वंचित रह सकती हैं। कब मिलेगी 29वीं किस्त की राशि लाड़ली बहना योजना की राशि आमतौर पर हर महीने की 15 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में जमा की जाती है। सितंबर में पिछली किस्त 12 तारीख को जारी हुई थी। इस बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि दीपावली के बाद भाई-दूज से योजना की राशि ₹1500 प्रतिमाह कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि अक्टूबर की किस्त अभी भी ₹1250 की ही होगी, जबकि नवंबर से महिलाओं को बढ़ी हुई ₹1500 की राशि मिलेगी।   किसे नहीं मिलेगी अक्टूबर की किस्त? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यभर में ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया के दौरान कई महिलाओं की समग्र आईडी (Samagra ID) डिलीट हो गई है। इससे उनके बैंक खातों में अक्टूबर की राशि नहीं पहुंचेगी। सतना और सिंगरौली जिलों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक बताई जा रही है, जहां महिलाओं का डेटा सत्यापन में असफल रहा है। इसके अलावा, योजना के पात्रता मानदंडों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं स्वतः ही योजना से अपात्र हो जाती हैं। जिन महिलाओं के आधार कार्ड या समग्र पोर्टल पर दर्ज आयु 60 वर्ष से अधिक है, उन्हें इस माह की राशि नहीं मिलेगी। जनवरी 2025 में भी इसी कारण कई महिलाएं योजना (Ladli Behna Yojana) से बाहर की गई थीं।   कैसे मिलेगी अगली किस्त सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन महिलाओं की समग्र आईडी या e-KYC अपडेट नहीं है, वे इसे जल्द सुधार लें। जानकारी अपडेट करने के बाद वे अगली किस्त से योजना का लाभ फिर से प्राप्त कर सकेंगी। दीपावली के बाद नवंबर माह में बढ़ी हुई ₹1500 की किस्त लाखों लाड़ली बहनों के लिए एक बड़ी राहत और खुशी लेकर आने वाली है।

ब्रेस्ट कैंसर: डर नहीं, जागरूकता जरूरी! जानें किन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली कैंसर… जितना यह नाम डराता है, उतनी ही तेजी से यह दुनिया भर में अपने पैर भी पसार रहा है। तमाम तरह के कैंसर में से ब्रेस्ट कैंसर भारतीय महिलाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2019 में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 200,218 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर लगभग 221,579 हो गए। इस बीमारी से मौतों की संख्या भी 2023 में लगभग 82,429 तक पहुंच गई। ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। नब्बे के दशक से ही इस संदर्भ में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद भारत में लगभग 81 प्रतिशत महिलाएं इससे अनभिज्ञ हैं। स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं को सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है और आज प्रत्येक 28 में से 1 महिला इससे पीड़ित है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप इसके लक्षणों को समझें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। इस मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की ब्रेस्ट और एंडोक्राइन सर्जन डॉक्टर गीतिका नंदा सिंह कहती हैं कि पहले स्तन कैंसर का खतरा 40 से ज्यादा उम्र की महिलाओं को मुख्य रूप से होता था, लेकिन अब 24 साल की लड़कियां भी इस बीमारी की जद में आ रही हैं। सामान्य तौर पर अगर आपकी उम्र 29 साल की हो चुकी है, तो आपको अपने स्तन का परीक्षण खुद से ही करते रहना चाहिए। अगर किसी महिला के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा है, तो कुछ खास प्रकार के स्तन कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं को 30 की उम्र के बाद साल में एक बार मैमोग्राफी करवाते रहना चाहिए। ये हो सकती हैं वजहें अन्य कैंसर की तरह ही स्तन कैंसर का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। न ही यह स्पष्ट है कि यह इतनी तेजी से पैर क्यों पसार रहा है। हालांकि कुछ चीजें बताई जाती हैं, जो इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती हैं। वैज्ञानिक तौर पर यह पाया गया है कि खराब जीवनशैली, अस्वस्थ भोजन और तनाव कैंसर को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही हेयर ट्रीटमेंट में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल, सौंदर्य प्रसाधन और डिओडोरेंट में पाए जाने वाले कुछ घातक केमिकल भी इस तरह के कैंसर को बढ़ावा देते हैं। और कौन-सी चीजें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं, आइए जानें: बदली जीवनशैली: हम बदल रहे हैं और साथ ही हमारे जीने का तरीका भी बदल रहा है। हम सब कई-कई घंटे लगातार बैठकर काम करते हैं और बदले में अपनी शारीरिक गतिविधियों से समझौता करने लगे हैं। प्रदूषण, प्रोसेस्ड और जंक फूड का ज्यादा मात्रा में सेवन, फल-सब्जियों से बढ़ती दूरी, ज्यादा मीठा, ज्यादा वसा…ये सब साथ मिलकर शरीर में सूजन, मोटापा और हार्मोन असंतुलन को बढ़ावा देते हैं। ये सब कैंसर की वजह हो सकते हैं। शारीरिक बदलाव: दिनचर्या के साथ ही हमारे शरीर में भी बदलाव आ रहे हैं। बहुत कम उम्र में पीरियड शुरू हो रहा है, तो मेनोपॉज भी जल्दी दस्तक देने लगा है। स्तनपान न करवाना या कम समय तक करवाना भी स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। यों करें ब्रेस्ट कैंसर की पहचान स्तन में गांठ: स्तन या स्तन के आसपास या बगल में गांठ महसूस हो तो उसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर गीतिका कहती हैं कि हर गांठ कैंसर नहीं होती है, लेकिन अगर स्तन में गांठ है तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कैंसर की गांठ आमतौर पर बिना दर्द वाली होती हैं। लेकिन आकार में वृद्धि के साथ इसमें दर्द महसूस हो सकता है। निप्पल से रिसाव: अगर आप नई मां नहीं हैं, फिर भी आपके निप्पल से रिसाव आ रहा है, तो आपको सचेत हो जाना चाहिए। रिसाव अलग-अलग रंगों का हो सकता है। कभी-कभी निप्पल से खून का भी रिसाव होता है। इसे कैंसर का लक्षण माना जाता है, इसलिए रिसाव होने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। स्तन या निप्पल का आकार बदलना: दोनों स्तनों के आकार में हल्का फर्क होना सामान्य है। अगर आपको एक स्तन तुलनात्मक तौर पर ज्यादा असामान्य नजर आ रहा है, तो यह भी कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा स्तन की त्वचा का लाल होना, उसमें खुजली होना या स्तन में डिंपल या गड्ढे पड़ना स्तन कैंसर का लक्षण होता है। वहीं, आपको अपनी निप्पल पर भी गौर करना चाहिए। अगर निप्पल अंदर की ओर धंस रही है, तो आपको लापरवाही नहीं करनी चाहिए। संभव है स्तन कैंसर से उबरना समय रहते स्तन कैंसर को आसानी से मात दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में आपकी मनोदशा आपका साथ देती है। स्तन कैंसर का पता चलने पर आपको घबराने की नहीं, बल्कि हिम्मत से सही कदम उठाने की जरूरत है। पहले और दूसरे स्टेज पर स्तन कैंसर को सौ फीसदी तक ठीक किया जा सकता है। स्तन कैंसर की जांच में मेमोग्राफी, एमआरआई, एफएमसीजी और कुछ खून की जांच शामिल हैं। आप घर पर ही इसके शुरुआती लक्षणों को परख सकती हैं। पीरियड के सातवें दिन आइने में अपने स्तन को गौर से देखना चाहिए। एक हाथ ऊपर करके दूसरे हाथ को स्तन पर गोलाकार घुमाते हुए यह टटोलें कि कहीं कोई गांठ तो नहीं बन रही है। आपकी सजगता आपको एक बड़ी मुसीबत से बचा सकती है। खानपान से बनाएं सुरक्षा चक्र हमारा खानपान न सिर्फ हमें कैंसर से बचाए रख सकता है, बल्कि खानपान में किया गया सुधार कैंसर के खिलाफ जंग में सफलता दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। साबुत अनाज, बीन्स, हर्ब्स, मेवे जैसे खाद्य पदार्थ कैंसर होने या उससे बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं। इस बाबत आहार सलाहकार डॉ़ भारती दीक्षित कहती हैं कि हरी पत्ती वाली सब्जियों में कैंसररोधी खूबियां होती हैं। सरसों, पालक, धनिया आदि में बीटा कैरोटीन और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। बंदगोभी, ब्रोकली और फूल गोभी आदि में आइसोथियोसाइनेट पाया जाता है, जो कैंसर के खतरे को कम करने का काम करता है। अदरक, लहसुन भी इस मामले में लाभकारी साबित होता है। विटामिन-सी यानी खट्टे फलों को भी पर्याप्त मात्रा में अपनी खुराक में शामिल कीजिए। अध्ययन बताते हैं कि सेब, नाशपाती भी कैंसर से … Read more

CSK की रणनीति बदलने की तैयारी, ये 5 खिलाड़ी हो सकते हैं रिलीज़ — IPL 2026 तकटी अपडेट

चेन्नई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम सीएसके ने 14 में से केवल 4 मुकाबले जीते थे और वो अंकतालिका में आखिरी स्थान पर रही थी. टीम मैनेजमेंट अब आईपीएल 2026 से पहले बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई सुपर किंग्स की टीम आईपीएल 2026 के लिए मिनी ऑक्शन से पहले पांच खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है. जिन खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा सकता है- उनमें सैम करन (इंग्लैंड), डेवोन कॉन्वे (न्यूजीलैंड), दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी शामिल हैं. टीम के बेहद खराब प्रदर्शन के चलते इन खिलाड़ियों को रिलीज करने की नौबत आई है. आईपीएल 2025 में ऋतुराज गायकवाड़ की चोट ने भी चेन्नई सुपर किंग्स की मुश्किलों में इजाफा किया था. ऋतुराज के बाहर होने के बाद एमएस धोनी ने टीम की कमान संभाली, लेकिन वो भी टीम की किस्मत नहीं बदल सके. अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा करने की रणनीति इस बार उलटी पड़ गई. इस मामले में फिसड्डी रही CSK टॉप ऑर्डर के खराब प्रदर्शन ने चेन्नई सुपर किंग्स की मुश्किलें काफी बढ़ाईं. डेवोन कॉन्वे, दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी का फॉर्म लगातार गिरता गया. आईपीएल 2025 में सीएसके के बल्लेबाजों ने 138.29 के स्ट्राइक रेट से 2315 रन बनाए, जो पिछले सीजन में किसी टीम का सबसे कम स्ट्राइक रेट था. इसके अलावा सीएसके ने पावरप्ले में सबसे कम रन (693) बनाए, साथ ही 29 विकेट गंवाए. टीम मैनेजमेंट अब युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताना चाहती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रेंचाइजी का इरादा स्क्वॉड को नए सिरे से बनाने का है ताकि टीम नई ऊर्जा के साथ अगले सीजन में वापसी कर सके. रविचंद्रन अश्विन के आईपीएल से रिटायरमेंट के बाद सीएसके को एक तरह से फायदा हुआ है. आर. अश्विन के रिटायरमेंट के चलते टीम के पर्स में 9.75 करोड़ रुपये आ चुके हैं. अब यदि सीएसके ऊपर बताए गए पांच खिलाड़ियों को रिलीज कर देती है, तो उसके पर्स में 25 करोड़ से अधिक की रकम रहेगी. सैम करन पर सीएसके ने काफी भरोसा जताया था, लेकिन वो अपनी पुरानी लय नहीं पकड़ सके. जबकि इंजरी से उबरने के बाद डेवोन कॉन्वे की बल्लेबाजी में भारी गिरावट आई.  भारतीय बल्लेबाजों दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी भी बल्ले से कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाए. आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन के लिए सभी 10 टीमों को अपनी रिटेंशन लिस्ट 15 नवंबर तक फाइनल कर लेनी है. आईपीएल 2026 के लिए मिनी ऑक्शन 13 से 15 दिसंबर के बीच हो सकता है.

टाटा Nexon की जबरदस्त मांग, ग्राहक हाथ धोकर खरीदने को तैयार

नई दिल्ली भारतीय ग्राहकों के बीच टाटा नेक्सन (Tata Nexon) हमेशा से पॉपुलर एसयूवी रही है। एक बार फिर इसे सही साबित करते हुए टाटा नेक्सन बीते महीने यानी सितंबर, 2025 में कंपनी की बेस्ट-सेलिंग मॉडल बन गई। टाटा नेक्सन को बीते महीने कुल 22,573 नए ग्राहक मिले। बता दें कि इस दौरान टाटा नेक्सन की बिक्री में सालाना आधार पर 97 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखी गई। जबकि ठीक 1 साल पहले यानी सितंबर, 2024 में यह आंकड़ा 11,470 यूनिट था। आइए जानते हैं बीते महीने कंपनी के दूसरे मॉडलों की बिक्री के बारे में विस्तार से। 97% बढ़ गई टाटा टियागो की बिक्री बिक्री की इस लिस्ट में हमेशा की तरह दूसरे नंबर पर टाटा पंच रही। टाटा पांच ने इस दौरान 16 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 15,891 यूनिट कार की बिक्री की। जबकि तीसरे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा टियागो रही। टाटा टियागो ने इस दौरान 97 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 8,322 यूनिट कार की बिक्री की। जबकि चौथे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा अल्ट्रोज रही। टाटा अल्ट्रोज ने इस दौरान 51 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 4,168 यूनिट कार की बिक्री की। 67% घट गई टाटा कर्व की बिक्री दूसरी ओर पांचवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा टिगोर रही। टाटा टिगोर ने इस दौरान 8 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 9,66 यूनिट कार की बिक्री की। जबकि छठे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा कर्व रही। टाटा कर्व ने इस दौरान 67 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ कुल 1,566 यूनिट कार की बिक्री की। इसके अलावा, सातवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा हैरियर रही। टाटा हैरियर ने इस दौरान 161 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 4,181 यूनिट कार की बिक्री की। करीब 60000 बिकी टाटा कार बिक्री कि लिस्ट में लास्ट पोजीशन पर टाटा सफारी रही। टाटा सफारी को इस दौरान कुल 2,000 नए ग्राहक मिले। बता दें कि इस दौरान टाटा सफारी की बिक्री में 22 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। जबकि ठीक 1 साल पहले यह आंकड़ा कुल 1,644 यूनिट था। इस तरह अगर कुल मिलाकर बात करें तो बीते महीने टाटा की कारों को कल 59,667 नए खरीदार मिले। इस दौरान टाटा की ओवरऑल बिक्री में सालाना आधार पर 45 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखने को मिली।

उज्जैन की 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद हटाने पर इंदौर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

उज्जैन  उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर की तकिया मस्जिद को हटाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर की गई अपील को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तकिया मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी थी और इसकी जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे तोड़ने का कोई अधिकार नहीं था। याचिका में मस्जिद का पुनर्निर्माण कराने और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। सरकारी पक्ष का जवाब शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील आनंद सोनी ने कोर्ट को बताया कि जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के बदले में संबंधित पक्ष को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और अब यह भूमि पूर्ण रूप से सरकार के स्वामित्व में है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने इस मामले को लेकर भोपाल स्थित वक्फ ट्रिब्यूनल में पहले से ही एक केस दायर कर रखा है। न्यायालय की टिप्पणी और फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग करने का कोई कानूनी आधार (हक) नहीं है। न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा, "किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से नहीं जुड़ा है। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।" इसी आधार पर, कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

BJP की नई चाल शाहाबाद-मगध में, 2020 की 36 सीटों को फिर से जीतने की तैयारी

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार ‘जीती सीटों को बचाने’ के साथ-साथ ‘हारी सीटों को वापस पाने’ का बड़ा अभियान शुरू किया है. पार्टी के भीतर इसे “मिशन रिकवरी प्लान” का नाम दिया गया है. पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 74 पर जीत हासिल की थी. हालांकि, पार्टी ने बाद में हुए उपचुनावों में कुढ़नी, रामगढ़ और तरारी जैसी तीन सीटों पर अपनी वापसी दर्ज करायी थी. इन 36 सीटों के लिए बीजेपी तैयार कर रही रणनीति अब भाजपा की निगाह उन 36 सीटों पर है जहां 2020 में हार मिली थी. पार्टी ने इन सभी सीटों को दो चरणों में विभाजित कर उनकी अलग-अलग रणनीति तैयार की है. पहले चरण की 18 सीटों में बैकुंठपुर, दरौली, सीवान, राघोपुर, गरखा, सोनपुर, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, बखरी, उजियारपुर, बक्सर, तरारी, शाहपुर, बख्तियारपुर, फतुहा, दानापुर, मनेर और बिक्रम शामिल हैं. वहीं, दूसरे चरण की हार वाली सीटों में कल्याणपुर, भागलपुर, रजौली, हिसुआ, बोधगया, गुरुआ, औरंगाबाद, गोह, डिहरी, काराकाट, रामगढ़, मोहनिया, भभुआ, चैनपुर, जोकिहाट, बायसी, किशनगंज और अरवल हैं. बीजेपी 2020 में जहां हारी, उन क्षेत्रों में विशेष फोकस इन सभी सीटों के लिए भाजपा ने अपने बूथ और जातिगत समीकरणों की गहराई से समीक्षा की है. विशेष रूप से उन जिलों पर फोकस किया गया है, जहां 2020 में पार्टी का ‘संपूर्ण सफाया’ हुआ था. इनमें औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर और बक्सर जैसे जिले शामिल हैं. इन चारों जिलों में पिछली बार एक भी सीट नहीं मिल पाई थी. दिलचस्प बात यह है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कैमूर की चारों सीटें भाजपा के खाते में थीं, लेकिन 2020 में पार्टी को यहां करारी हार झेलनी पड़ी. यही वजह है कि इस बार भाजपा शाहाबाद और मगध क्षेत्र को लेकर बेहद सतर्क है. शाहाबाद-मगध में ‘पावर स्टार’ का दांव पार्टी ने इन क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए ‘लोकप्रिय चेहरों’ की रणनीति अपनाई है. भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह को एक बार फिर भाजपा के प्रचार अभियान में सक्रिय किया गया है. पवन सिंह की क्षेत्र में पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें ‘जनसंपर्क का चेहरा’ बना रही है. इसके अलावा RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का मगध और शाहाबाद क्षेत्र में गहरा प्रभाव है. इसी कड़ी में भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने हाल ही में दिल्ली में पवन सिंह और कुशवाहा की मुलाकात कराई थी. जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. हर जिले के लिए ‘माइक्रो प्लान’ भाजपा संगठन ने हर जिले की हारी हुई सीट के लिए अलग-अलग ‘माइक्रो प्लान’ तैयार किया है. इसमें पुराने उम्मीदवारों का आकलन, स्थानीय समीकरणों की पुनर्समीक्षा, और सहयोगी दलों के साथ सीट तालमेल पर जोर दिया गया है. हालांकि एनडीए में सीटों का बंटवारा अभी अंतिम रूप में नहीं है, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे सीटें बदली जाएं या नहीं, पार्टी का संगठन हर क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ उतरेगा. ‘हारी नहीं, छोड़ी सीटों पर भी वापसी’ का लक्ष्य पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2020 में कुछ सीटें हार की वजह से नहीं, बल्कि सीट-शेयरिंग के कारण छूटी थीं. इस बार भाजपा ऐसे क्षेत्रों पर भी फोकस कर रही है, जहां उसके संगठन की मजबूत जड़ें हैं लेकिन पिछले बार साथी दलों को मौका मिला था. शाहाबाद-मगध में BJP की परीक्षा कुल मिलाकर, भाजपा ने बिहार में इस बार चुनावी जंग को दो हिस्सों में बांट दिया है. ‘सेव द सीट्स’ (जीती सीटें बचाने का अभियान) और ‘रिक्लेम द लॉस्ट’ (हारी सीटें वापस पाने की रणनीति). शाहाबाद और मगध की सियासी जमीन पर भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है, जहां से पार्टी अपने खोए जनाधार को वापस पाने की जुगत में जुटी है. 

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने सरकार की पहल: MP में नस्ल सुधार को लेकर संपर्क अभियान शुरू

ग्वालियर  पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम की धीमी रफ्तार से मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसका उदाहरण है- दो साल पहले सेक्स शार्टेड सीमन जैसी उन्नत तकनीक शुरू की जा चुकी है लेकिन प्रदेश का पशु पालन विभाग इस तकनीकी को पशु पालकों तक नहीं पहुंचा पा रहा है। नतीजतन, वे परंपरागत तकनीकी से ही पशुओं का गर्भाधान करा रहे हैं। चूंकि नई तकनीकी न सिर्फ पशुओं के नस्ल सुधार के लिए कारगर है, जो मादा पशुओं के जन्म हो ही सुनिश्चित करती है और इस नस्ल के पशु अधिकाधिक दुग्ध भी देते हैं। ऐसे में, राज्य सरकार ने इस तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान संचालित करने का निर्देश दिया है। गत दो अक्टूबर से शुरू हो चुके इस अभियान के तहत ऐसे पशुपालकों का सर्वे किया जा रहा है, जो 10 या 10 से अधिक दुधारू पशु पालते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि यदि पशु पालकों ने यह तकनीकी अपनाई तो बहुत जल्द दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। नई तकनीकी भी, इंफ्रास्ट्रक्चर भी फिर भी नस्ल सुधार में पीछे कम दुग्ध उत्पादन वाले पशुओं में नस्ल सुधार का काम कृत्रिम गर्भाधान से हो सकता है। इसके बाद उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। इसके साथ ही नई तकनीकी से गर्भाधान के दौरान दुधारू पशुओं के 90 प्रतिशत मादा पशु होने की संभावना रहती है। ऐसे में निराश्रित पशुओं की समस्या भी हल हो सकती है। गौरतलब है कि पशुओं की नस्ल सुधार के लिए संसाधन कम नहीं हैं। पशु अस्पताल और डिस्पेंसरी भी हैं। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र भी संचालित हैं। इन सभी केंद्रों पर सेक्स शार्टेड सीमन की नई तकनीकी भी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में अधिकतर पशु पालक परंपरागत तरीके से ही पशुओं का गर्भाधान कराते हैं। इससे नस्ल सुधार नहीं हो पाता। गोवंशीय पशु औसतन एक बार में सामान्यत: दो से चार लीटर दूध देते हैं। इसके साथ ही सड़कों भी निराश्रित गोवंश रहता है। उसके लिए तकनीकी अधिक कारगर होगी। क्या होगा अभियान में     अभियान के तहत पशु पालकों का सर्वे किया जाएगा।     पहले चरण में 10 पशुओं से अधिक का पालन करने वाले, दूसरे चरण में 10 से कम पशु पालने वालों का डाटा एकत्रित किया जाएगा।     हर घर से संपर्क के दौरान हर पशु पालक की समस्याएं सुनी जाएंगी और निराकरण भी किया जाएगा। नस्ल सुधारने के फायदे बताए जा रहे     पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान तो बहुत पहले से किया जाता रहा है। सेक्स शार्टेड सीमन तकनीकी दो साल पहले ही आई है। अधिकतर पशु पालक जानकारी न होने से परंपरागत तरीके से ही पशुओं का गर्भाधान कराते हैं, लेकिन अब अभियान में सभी पशु पालकों से संपर्क करके उन्हें नस्ल सुधार के फायदे बताए जा रहे हैं। – डॉ. अनिल अग्रवाल, उप संचालक, पशु पालन व डेयरी विभाग  

श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जुड़ेगा उज्जैन का सांस्कृतिक पुनरुत्थान, पांच मंदिरों का होगा संरक्षण और विकास

उज्जैन  आस्था की नगरी उज्जैन में देवस्थानों के विकास का क्रम जारी है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूसीटीएसएल) ने शहर के पांच ऐतिहासिक मंदिरों को श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जोड़ते हुए उनके विकास और सुंदरीकरण का खाका तैयार किया है। उद्देश्य, आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ-2028 से पहले उज्जैन को एक समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इस योजना में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली महर्षि सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर, हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, श्रीकाल भैरव मंदिर, भूखी माता मंदिर और नारायणा धाम शामिल हैं। ‘श्रीमहाकाल महालोक’ परियोजना की सफलता और श्रद्धालुओं की बेमिसाल आमद को देखते हुए अब शहर के अन्य मंदिरों का भी विकास उसी माडल पर किए जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद विस्तृत योजना बन रही है। यूसीटीएसएल का कहना है कि इससे न केवल आस्था के केंद्रों का वैभव बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा अवधि में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और टूरिज्म सेक्टर को गति मिलेगी। यह योजना केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उज्जैन की विरासत, आस्था और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे शहर विश्व पटल पर और उज्जवल चमक बिखेरेगा। आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की नई रेखा सांदीपनि आश्रम और नारायण धाम इस योजना के केंद्र में रहेंगे। धार्मिक मान्यता है कि सांदीपनि आश्रम वही पवित्र स्थल है जहां योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने 16 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित कर संपूर्ण जगत को धर्म, कर्म, नीति और प्रेम का संदेश दिया था। नारायण धाम में श्रीकृष्ण और सुदामा के वन विहार का प्रसंग जुड़ा है। इस धार्मिक पृष्ठभूमि को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर इन स्थलों को आकर्षक धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में बदला जाएगा। सिंहस्थ 2028 से पहले दिखेगा असर सरकार और प्रशासन ने इस योजना को मिशन मोड में लागू करने का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री द्वारा 30 दिसंबर 2027 तक सभी प्रमुख प्रोजेक्ट पूरे करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे ताकि सिंहस्थ से पहले पांचों मंदिरों का कायाकल्प पूर्ण हो जाए। परियोजना में मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पहुंच मार्गों का विस्तार, सूचना एवं व्याख्या केंद्र, गाइड मैप और सांस्कृतिक प्रस्तुति स्थल शामिल किए जाएंगे। इनसे श्रद्धालुओं को सहजता के साथ धार्मिक अनुभूति और उज्जैन की विरासत का गहन परिचय मिल सकेगा।

दिग्गी की रणनीति: पार्टी फंडिंग में साथ दें सभी नेता, बूथ स्तर पर निकालें जनजागरूकता यात्रा

भोपाल  भारत जोड़ों यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में पदयात्रा होगी. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिला प्रभारियों की बैठक में प्रस्ताव दिया. मध्य प्रदेश में पदयात्रा निकालने का प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव के बाद बैठक में दिग्विजय पदयात्रा को लेकर प्लानिंग करेंगे. जनता से जुड़े मुद्दे पदयात्रा में उठाए जाएंगे. भारत जोड़ो यात्रा का ब्लूप्रिंट भी दिग्विजय सिंह ने तैयार किया था. कांग्रेस को उम्मीद पदयात्रा के जरिए एमपी कांग्रेस मजबूत होगी. मध्य प्रदेश कांग्रेस की नई रणनीति: बूथों के बीच यात्रा और हस्ताक्षर अभियान हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और सह प्रभारी संजय दत्त मौजूद थे। इस बैठक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में बूथों के बीच यात्रा निकालने का प्रस्ताव रखा गया। यह यात्रा कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस, जो कि 28 दिसंबर को है, से शुरू होकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तक चलेगी। यह कदम पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति मानी जा रही है। बैठक में दिग्विजय सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय से पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठनात्मक काम नहीं किया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब बिहार की तरह मध्य प्रदेश में एसआईआर (सर्वे इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) कराने की योजना बनाई जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि कांग्रेस का समर्थक मतदाता वोटर लिस्ट से न हटाया जाए और कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। इसके लिए वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ी पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है। बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान के तहत हस्ताक्षर किए। बूथ से बूथ तक यात्रा का प्रस्ताव दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया कि पार्टी को भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर एक बूथ से दूसरे बूथ तक पदयात्रा निकालनी चाहिए। इस यात्रा के दौरान बूथ की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) के काम की समीक्षा की जाएगी और वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान को गति दी जाएगी। यह यात्रा न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को एकजुट करेगी, बल्कि मतदाताओं के बीच पार्टी की उपस्थिति भी बढ़ाएगी। इसके अलावा, उन्होंने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को यह भी कहा कि उन्हें संगठन का काम करने के लिए किसी नेता की तरफ पैसे के लिए नहीं देखना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह सुझाव दिया कि सक्षम कार्यकर्ताओं को खुद पार्टी की मदद करनी चाहिए। इसमें ऐसे कार्यकर्ताओं को बीएलए बनाया जाना चाहिए जो बूथ पर मजबूती और सक्रियता से काम कर सकें। हस्ताक्षर अभियान का लक्ष्य बैठक में जीतू पटवारी ने भी अपनी बात रखी और कहा कि हमें पूरे मध्य प्रदेश से 5 करोड़ मतदाताओं के हस्ताक्षर कराने हैं। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र से 20 हजार मतदाताओं के हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान वोट चोर गद्दी छोड़ मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पार्टी की रणनीतिक दिशा को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा। कांग्रेस पार्टी का यह नया कदम मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और मतदाता जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए यह यात्रा और हस्ताक्षर अभियान, पार्टी की संगठनात्मक मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार के प्रयासों से कांग्रेस पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि आगामी चुनावों में सफलता हासिल की जा सके। कुल मिलाकर, यह बैठक और उसके परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई दिशा दिखाने वाले हैं। पार्टी के नेता अब बूथ स्तर पर अधिक सक्रियता और जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो कि आने वाले चुनावों में उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आपको बता दें कि इस रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के साथ-साथ मतदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यह अभियान न केवल कांग्रेस के नेताओं के लिए, बल्कि पार्टी के समर्थकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

महाकाल मंदिर में दीपावली की शुरुआत: 20 अक्टूबर को भस्म आरती में होगी विशेष पूजा

उज्जैन  शीत ऋतु शुरू होने को है, जिसका असर 8 अक्तूबर से विश्व प्रसिद्ध श्री महाकाल मंदिर में भी देखने को मिलेगा। 8 अक्तूबर से बाबा महाकाल की दिनचर्या में भी बदलाव होगा। इसके चलते बाबा का अब गर्म जल से स्नान (अभिषेक) करवाया जाएगा और तीन आरती का भी समय बदल जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि साल में दो बार बाबा महाकाल की दिनचर्या बदलती है। अभी बाबा महाकाल की दिनचर्या गर्मी के अनुसार होने से प्रतिदान ठंडे जल से स्नान करवाया जा रहा है, लेकिन परंपरानुसार सर्दी का मौसम शुरू होने से अब चार माह तक भगवान का गर्म जल से अभिषेक करवाया जाएगा। वहीं, इस मौसम में सूर्यास्त जल्द होने के कारण 8 अक्तूबर से तीन आरतियां तय समय से आधे घंटे पहले होंगी। इन आरतियों का बदलेगा समय पुजारी महेश शर्मा के अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकाल भगवान की होने वाली आरती का समय परम्परानुसार परिवर्तित होगा। 8 अक्तूबर 2025 बुधवार कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक श्री महाकालेश्वर भगवान की तीन आरतियों में परिवर्तन होगा। जिसमें प्रातः होने वाली द्दयोदक आरती 7:30 से 8:15 तक, भोग आरती प्रातः 10:30 से 11:15 तक व संध्या आरती सायं 6:30 से 07:15 बजे तक होगी। इसी प्रकार भस्मार्ती प्रातः 4 से 6 बजे तक सायंकालीन पूजन सायं 5 से 5:45 तक एवं शयन आरती रात्रि 10:30 से 11 बजे तक अपने निर्धारित समय पर ही होगी। गर्म जल से स्‍नान कराने के पीछे यह है मान्‍यता चूंकि सर्दियां शुरू हो गई हैं, मान्यता है कि ठंड के इस मौसम में बाबा महाकाल को सर्दी न लगे इसलिए चार माह भगवान को भस्म आरती में गर्म जल से स्नान कराया जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन लगाकर स्नान करने की शास्त्रीय मान्यता है। लौकिक जगत में भगवान महाकाल उज्जैन के राजा माने जाते हैं इसलिए लोकाचार की समस्त परंपराओं का मंदिर में निर्वहन होता है। इस दिन को कहते हैं रूप चतुर्दशी मालूम हो कि दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को ही रूप चौदस, छोटी दिवाली, काली चतुर्दशी या कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। 18 से होगी दीपोत्सव की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर में 18 अक्टूबर 2025 शनिवार के दिन धनतेरस पर्व मनाया जावेगा।जिसमें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित चिकित्सालय में भगवान श्री धनवंतरी का पूजन किया जावेगा। इसके अतिरिक्त मंदिर के पुरोहित समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का अभिषेक पूजन किया जावेगा। 20 अक्टूबर 2025 सोमवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को श्री महाकालेश्वर भगवान को अभ्यंग स्नान करवाया जाएगा तथा इसी दिन से श्री महाकालेश्वर भगवान का गर्म जल से स्नान प्रारंभ होगा, जो फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगा। 20 अक्तूबर 2025 सोमवार को श्री महाकालेश्वर भगवान की प्रातः 7:30 बजे होने वाली आरती में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। सायं में दीपोत्सव पर्व मनाया जाएगा। राजा को सबसे पहले लगता है अन्नकूट कार्तिक मास में देवालयों में अन्नकूट लगाने की परंपरा है। विशेषकर श्रीकृष्ण मंदिरों में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा के साथ अन्नकूट लगाए जाते हैं, लेकिन महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को अन्नकूट भी सबसे पहले लगाने की परंपरा है। भस्म आरती करने वाले पुजारी परिवार की ओर से रूप चतुर्दशी के दिन ही अन्नकूट लगा दिया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से भगवान महाकाल की सवारी निकाले जाने का क्रम शुरू होगा, जो अगहन मास की अमावस्या तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक सोमवार पर भगवान महाकाल रजत पालकी में सवार होकर तीर्थ पूजन के लिए शिप्रा तट जाएंगे। कार्तिक-अगहन मास में सवारी कब-कब     27 अक्टूबर : कार्तिक मास की प्रथम सवारी     03 नवंबर : कार्तिक मास की द्वितीय सवारी     03 नवंबर : रात 11 बजे हरि हर मिलन की सवारी     10 नवंबर : अगहन मास की पहली सवारी     17 नवंबर : कार्तिक अगहन मास की राजसी सवारी