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छठ पर पूजा के लिए गोविंदपुरा में 51 स्थानों पर बनेंगे कुंड: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर

लोक आस्था का महापर्व बना छठ: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर छठ पर पूजा के लिए गोविंदपुरा में 51 स्थानों पर बनेंगे कुंड: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने की छठ की तैयारियों की समीक्षा भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों को लेकर बैठक ली। उन्होंने बताया कि गोविंदपुरा क्षेत्र में लगभग 51 स्थानों पर कुंडों का निर्माण कर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। त्यौहार हमारे देश को एकता के सूत्र में बांधते हैं। छठ पर्व में भगवान सूर्य की चार दिवसीय आराधना अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। यह पूरे देश का लोक आस्था का महापर्व बन गया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि इस पर्व को मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि हथाईखेड़ा डेम, सरियो सरोवर डेम और शिवनगर स्थित दुर्गा मंदिर कुंड जैसे प्रमुख स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। ऐसे में कुंडों की मरम्मत, बिजली व्यवस्था, साज-सज्जा, रंग-रोगन, जलभराव, चेंजिंग रूम, लाइटिंग, चलित शौचालय, पेयजल टैंकर, महिला पुलिस बल, बैरिकेडिंग, एम्बुलेंस, पेड़ों की छटाई और घास की कटाई जैसी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कर लिए जाएं। बैठक में श्री तीर्थराज मिश्रा, श्री वारेलाल अहिरवार, श्री गणेश राम नागर, श्रीमती मोनिका ठाकुर, श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्रीमती छाया ठाकुर, श्री भीकम सिंह बघेल, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री सुरेंद्र घोटे, श्री वी. शक्ति राव, श्री संजय शिवनानी, श्री मनोज विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

दिव्यांगजन विशेष क्षमताओं के धनी हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रेरणादायक संदेश

दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके, परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 146 दिव्यांगजनों को किए सहायक उपकरण वितरण तराना, माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद और बड़नगर को शव वाहन वितरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कालिदास अकादमी परिसर में दिव्यांगजनों के लिए आयोजित उपकरण वितरण शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की हैं। महर्षि अष्टावक्र भी दिव्यांग थे लेकिन शास्त्रार्थ में उन्हें कोई भी पराजित नहीं कर सकता था वे अत्यंत विद्वान थे। ईश्वर यदि हमें कोई कमजोरी देता है तो साथ ही विशिष्ट शक्ति भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सेवा सप्ताह के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किए जा रहे हैं। यह मानव सेवा भी है और एक प्रकार का आत्मिक सुख भी। सभी उपकरणों का अपने आप में बहुत महत्व होता है। श्रवण यंत्र का उपयोग करने के बाद श्रवण शक्ति का आभास होता है। इससे अत्यंत सुखद अनुभव होता है। हमारा शरीर ब्रह्मांड का स्वरुप है। नर सेवा भी वास्तविक अर्थों में ईश्वर की सेवा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन विशिष्ट शक्तियों को पहचानें, कठोर परिश्रम करें और जीवन में सफलता प्राप्त करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी दिव्यांगजनों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने दिव्यांगजनों को स्कूटी, स्पेशलाईज्ड ट्राइसिकल, वाकिंग स्टीक्स वितरित की। उन्होंने कहा कि मोटराइज्ड व्हीलचेयर और स्कूटी मिलने से दिव्यांग भाइयों और बहनों को रोजगार में सहायता होगी और उनके दैनिक जीवन में कार्य करने में सरलता आयेगी। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि किसानों के हित के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर फसल क्षति पर राहत राशि दी जा रही हैं और कृषकों को फसल का उचित भाव दिलाने के लिए भावांतर योजना की भी शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व.  भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति और सामाजिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित सेवा कार्यक्रम में 146 दिव्यांग हितग्राहियों को 1 करोड़ 25 लाख रुपए की राशि से इलेक्ट्रिक स्कूटर, कान की मशीन, वॉकिंग स्टीक, व्हीलचेयर आदि उपकरण वितरण किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मानव सेवा के लिए जिले की 6 नगर परिषदों माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद, तराना और बड़नगर को शव वाहन भी वितरण किये। इलेक्ट्रिक स्कूटर चालकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। कार्यक्रम का आभार  सुदर्शन ने माना। इस अवसर पर विधायक  सतीश मालवीय, नगर निगम सभापति मती कलावती यादव,  संजय अग्रवाल,  राजेंद्र भारती और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 

कैंसर से जंग में असरदार साथी: गाजर का जूस

कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए इसका इलाज पहले चरण में ही कराना बेहतर होता है। लेकिन कैंसर के ज्यादातर मामलों में इसका खुलासा तब होता है, जब यह अपनी प्रारंभिक अवस्था से आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में कीमोथैरेपी के अलावा कैंसर को और कोई इलाज नहीं होता और यह अत्यधिक तकलीफदेह होता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी, कि चैथी स्टेज पर आने के बाद भी कैंसर का इलाज संभव है, सिर्फ गाजर के सेवन से। ब्रिटेन की न्यू कैसल यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार, गाजर में पॉलीएसिटिलीन पाया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को समाप्त कर ट्यूमर का विकास रोकने में सहायता करता है। इसके अलावा गाजर में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स के अलावा बीटा कैरोटीन, अल्फा कैरोटीन, कैल्शियम एवं अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आंतरिक अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। शोध के मुताबिक गाजर में मौजूद फैलकारिनॉल, फैलकैरिन्डियॉल और एंटी कैंसर तत्व लंग कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर व कोलोन कैंसर के खतरे को कम करते हैं। इसमें पाया जाने वाला रेटिनॉइड एसिड महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर की कारक कोशिकाओं के शुरूआती बदलाव को रोकने में कारगर होता है। गाजर के सेवन से कैंसर की चैथी स्टेज पर जीत हासिल करने का भी एक उदाहरण सामने आया है। इंडिया टाइम्स डॉट कॉम में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, कैमरून नामक एक महिला ने गाजर के जूस का सेवन कर कैंसर को चैथे चरण में आने के बावजूद मात देने में कामयाबी हासिल की है। कैमरून बताती हैं, कि उन्हें सन 2013 में कोलोन कैंसर के बारे में पता चला, जो कि चैथे चरण पर पहुंच चुका था। कीमोथैरेपी के अलावा इसके लिए कोई और विकल्प भी नहीं था। कैमरून ने इंटरनेट पर रिसर्च कर, राल्प कोले नामक व्यक्ति का अनुभव पढ़ा, जिसे प्रतिदिन 2.25 किलो गाजर का जूस पीने से कैंसर में काफी लाभ हुआ था। इसके बाद कैमरून ने भी गाजर के जूस का सेवन शुरू किया। कैमरून ने लगतार आठ सप्ताह तक प्रतिदिन 2.25 किलो गाजर का जूस पीना शुरू किया। इस दौरान कैमरून ने पाया कि कैंसर ट्यूमर में होने वाली वृद्धि रूक गई है। लगभग 13 महीनों के बाद उनका कैंसर पूरी तरह से ठीक हो चुका था।  

धनतेरस पर ये खरीदारी बनाए आपकी किस्मत चमकदार, सोना-चांदी से भी ज्यादा लाभदायक

धनतेरस एक ऐसा पर्व है जो हमें धन, स्वास्थ्य और खुशियों का संदेश देता है। इस दिन की गई खरीदारी केवल भौतिक समृद्धि नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि का भी प्रतीक है। इस दिन को मनाने और खरीदारी करने से न केवल आर्थिक लाभ होता है बल्कि परिवार में भी प्रेम और एकता बनी रहती है। धनतेरस पर की गई पूजा और खरीदारी से जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है, जो हमें और हमारे परिवार को एक नई दिशा में आगे बढ़ाता है। धनतेरस पर खरीदारी करने की परंपरा और मान्यता दोनों हैं। सदियों से ये रीत चली आ रही है की दिवाली का आरंभ धनतेरस की शॉपिंग से होता है। देवी लक्ष्मी की तरह ही भगवान धन्वंतरि भी सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। धनवंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। धनतेरस के दिन सोने और चांदी के बर्तन, सिक्के और आभूषण खरीदने की परम्परा रही है। सोना सौंदर्य में वृद्धि तो करता ही है, मुश्किल घड़ी में संचित धन के रूप में भी काम आता है। कुछ लोग शगुन के रूप में सोने या चांदी के सिक्के भी खरीदते हैं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। लोग इस दिन ही दीवाली की रात पूजा करने के लिए लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति भी खरीदते हैं। इसे अभिजीत मुहूर्त अथवा सूर्यास्त के बाद खरीद कर घर ले आएं। फाइनेंशियल कंडीशन को स्थिर करने हेतु नए झाड़ू पर सफ़ेद रंग का धागा बांधकर उपयोग में लाएं। पुरानी झाड़ू को आधी रात के बाद घर से बाहर निकालें। लोक मान्यता के अनुसार इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। ऐसी जनश्रुति है कि इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृद्धि करता है। दीवाली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों या खेतों में बोते हैं। ये बीज उन्नति व धन वृद्धि के प्रतीक होते हैं। बदलते दौर के साथ लोगों की पसंद और जरूरत भी बदली है। कुछ लोग धनतेरस के दिन विलासिता से भरपूर वस्तुएं खरीदते हैं तो कुछ जरूरत की वस्तुएं खरीद कर धनतेरस का पर्व मनाते हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में भी लोग अपनी परम्परा को नहीं भूले हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार यह पर्व मनाते हैं। धनतेरस के दिन वाहन खरीदने का फैशन सा बन गया है। लोग इस दिन गाड़ी खरीदना शुभ मानते हैं। कुछ लोग मोबाइल, कम्प्यूटर और बिजली के उपकरण इत्यादि भी धनतेरस पर ही खरीदते हैं। धनतेरस पर हीरा और चांदी खरीदना शुभ होगा। सोना लेने की इच्छा है तो बिस्कुट अथवा बॉड खरीदें।

हैकाथॉन में दिखा परंपरा और प्रौद्योगिकी का अभिनव संगम

भोपाल  भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 के दो दिन के सत्र में प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस अनूठे आयोजन में देशभर के युवाओं को एक मंच पर सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला। यह सिंहस्थ-2028 के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। देश के 26 राज्यों से पंजीकरण और 11 राज्यों की 36 चयनित टीमों की भागीदारी ने इस हैकाथॉन को भारत की नवाचार विविधता का प्रतीक बनाया। प्रतिभागियों ने सिंहस्थ-2028 के लिये ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के माध्यम से भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, गतिशीलता, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। 36 उत्कृष्ट टीम को मिला दो माह का परिशोधन समय हैकाथॉन के अंतिम दिन निर्णायक मंडल ने सभी टीम के उन्नत समाधानों का मूल्यांकन किया। पहले दिन दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए प्रतिभागियों ने अपने प्रस्तावों को और बेहतर रूप में प्रस्तुत किया। नवाचार की गहराई और समाधानों की मापनीयता को देखते हुए निर्णायकों ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए सभी 36 टीम को दो माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया, जिससे वे अपने विचारों को और परिष्कृत कर सकें। यह कदम राज्य सरकार की दीर्घकालिक नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन श्री संकेत एस. भोंडवे, प्रबंध निदेशक एमपीएसईडीसी श्री आशीष वशिष्ठ और मुख्य महाप्रबंधक एमपीएसईडीसी शिवांगी जोशी सहित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभागियों के रचनात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक समाधानों की सराहना की। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के लिये डिजाइन किये गये नवाचारों में जंगोह (इंदौर) ने “सिंहथा यूनिफाइड” प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया जो स्थानीय भाषाओं में एआई-संचालित सहायता, रीयल-टाइम अपडेट्स प्रस्तुत करता है। सेल्फ सर्व बूथ ने एक 6डी वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रस्तुत किया जो कुंभ के वातावरण को वैश्विक दर्शकों के लिए सजीव बनाता है। संचार वॉरियर ने एक रीयल-टाइम भीड़ निगरानी और चेतावनी प्रणाली विकसित की जो आपात स्थिति में मूक रिपोर्टिंग को भी सक्षम बनाती है। सेफ्टी और सिक्योरिटी ट्रेकिंग यूनिट ने लोरा-आधारित सुरक्षित संचार नेटवर्क का प्रस्ताव रखा जो फील्ड टीमों और कमांड सेंटर्स के बीच समन्वय को सुनिश्चित करता है। क्राफ्टआई ने एआई -आधारित तीर्थयात्री निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जबकि सेफ क्लॉक ने भारतीय भाषाओं में डेटा भंडारण मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया।मेडीवेंड ने रियल-टाइम वॉइस इंटरफेस से युक्त एक चिकित्सा वेंडिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया। दर्शिनी एआई टीम WAPPGO ने भीड़भाड़ को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा को बढाने के लिए एआई आधारित ट्रैकिंग और निगरानी उपकरणों को एकीकृत करने वाले एक स्मार्ट गतिशीलता और भीड़ प्रबंधन प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा। अमृतशरणम ने एक एकीकृत गतिशीलता और सुरक्षा निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जो भीड़भाड़ को रोकने और एक एकीकृत कमांड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से पुलिस, स्वास्थ्य और नगरपालिका विभागों के बीच वास्तविक समय समन्वय को सक्षम करने के लिए पूर्वानुमानित विश्लेषण का लाभ उठाती है। इस बीच, केरल की एल्विक्टो टेक्नोलॉजीज ने एक स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत की, जिसे सुगम यातायात प्रवाह के लिए कई पार्किंग क्षेत्रों को एक जुड़े हुए नेटवर्क में एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और रोबस्ट रोबोटिक्स ने अग्नि का पता लगाने, जोखिम प्रबंधन और वास्तविक समय प्रतिक्रिया के लिए इसरो नाविक उपग्रह डेटा और ड्रोन इमेजरी को मिलाकर एआई-संचालित सटीक मानचित्रण समाधान से निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। इन सभी नवाचारों ने यह स्पष्ट किया कि भारत की युवा तकनीकी शक्ति, सामाजिक चेतना के साथ मिलकर परंपरागत आयोजनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में सक्षम है। उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 ने न केवल भविष्य की तकनीकी शासन प्रणाली की झलक दी, बल्कि मध्यप्रदेश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन विजन को भी मजबूती प्रदान की। चयनित टीमें अगले दो महीनों के परिशोधन अवधि में अपने समाधानों को और विकसित करेंगी, जिससे सिंहस्थ-2028 के लिए एक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ तकनीकी आधार तैयार हो सके। 

न्यूजीलैंड वनडे से पहले विराट-रोहित करेंगे घरेलू मैच में धमाका, अजीत अगरकर के नियम मानने पर सहमति

नई दिल्ली  भारतीय टीम के वरिष्ठ बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा ने मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के निर्देशों का पालन करते हुए आगामी विजय हज़ारे ट्रॉफी में खेलने पर सहमति जताई है। यह फैसला जनवरी में होने वाली न्यूज़ीलैंड वनडे सीरीज़ से पहले लिया गया है। अगरकर ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि हर केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ी, जो फिट और उपलब्ध है, उसे घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेना होगा ताकि 2027 वनडे विश्व कप सहित भविष्य की टीम चयन प्रक्रिया में अपनी दावेदारी बनाए रखी जा सके।  अगरकर का सख्त निर्देश- “घरेलू क्रिकेट से दूरी अब बर्दाश्त नहीं” चयनकर्ता अजीत अगरकर ने वरिष्ठ खिलाड़ियों के लगातार घरेलू टूर्नामेंटों से दूरी बनाए रखने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मैचों के बीच लंबा ब्रेक लेने वाले खिलाड़ियों को विजय हज़ारे ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों में खेलना अनिवार्य होगा। ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज की घोषणा के दौरान अगरकर ने दो टूक कहा था, “घरेलू क्रिकेट राष्ट्रीय टीम का आधार है। जो खिलाड़ी चयन की दौड़ में रहना चाहते हैं, उन्हें उसमें भाग लेना ही होगा।” कोहली और रोहित की उपलब्धता की पुष्टि रिपोर्ट के मुताबिक, कोहली और रोहित दोनों ने 24 दिसंबर से शुरू हो रही विजय हज़ारे ट्रॉफी के लिए अपनी उपलब्धता की पुष्टि कर दी है। दोनों खिलाड़ी कम से कम तीन से चार मैच खेलने के लिए तैयार हैं। बीसीसीआई सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया, '6 दिसंबर को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अंतिम वनडे और 11 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे के बीच पाँच हफ़्तों का अंतर है। इस दौरान खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए खेल सकते हैं।' रोहित मुंबई और कोहली दिल्ली का प्रतिनिधित्व करेंगे। विजय हजारे ट्रॉफी का कार्यक्रम टूर्नामेंट शुरू: 24 दिसंबर रोहित की टीम मुंबई के मैच : 24, 26, 29, 31 दिसंबर; 3, 6, 8 जनवरी कोहली की टीम दिल्ली के मैच : समान अंतराल में निर्धारित न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला वनडे : 11 जनवरी, वडोदरा BCCI चाहता है कि दोनों खिलाड़ी टीम इंडिया से जुड़ने से पहले कम से कम तीन राउंड खेलें। क्यों अहम है यह फैसला इस कदम को भारतीय क्रिकेट में अनुशासन और जवाबदेही की नई नीति के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से वरिष्ठ खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट से दूरी बनाए हुए थे, जिससे युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा नहीं मिल रही थी। अब जब टीम इंडिया 2027 विश्व कप की दिशा में आगे बढ़ रही है, तो यह पहल चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाएगी।  

6G का भविष्य भारत में: IMC मंच पर दुनियाभर ने जताई रुचि

नई दिल्ली भारत अब तेजी से 6G तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का 6G खोज और विकास आने वाले वर्षों में दुनिया की नेटवर्क टेकनोलोजी को आकार देगा। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के मुख्य 5G रणनीतिकार आशुतोष दत्ता ने कहा कि भविष्य में सर्वव्यापी कनेक्टिविटी एक प्रमुख आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि हर किसी के पास टावर या वाई-फ़ाई की सुविधा नहीं होती, इसलिए सैटेलाइट नेटवर्क भविष्य में एक बड़ी भूमिका निभाएंगे। सैटेलाइट और ग्राउंड नेटवर्क का विलय आशुतोष दत्ता ने बताया कि आगामी नेटवर्क में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए स्थलीय और गैर-स्थलीय नेटवर्क को एकीकृत करना होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेटरों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों को 6G के नए उपयोगों की खोज के लिए टेस्टबैड और सिमुलेशन मॉडल विकसित करने हेतु सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के प्रति भी चेतावनी दी और कहा कि वाई-फाई, सैटेलाइट या अन्य नेटवर्क के बीच स्विच करते समय डेटा सुरक्षा प्रमुख हो जाती है। भारत के पास तकनीकी क्षमता और मजबूत इरादे हैं दत्ता ने कहा कि भारत के पास तकनीकी विशेषज्ञता और सरकारी समर्थन दोनों हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब हमें आगामी 6G युग के लिए नए कौशल विकसित करने हेतु उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। लाई-फ़ाई तकनीक क्रांतिकारी साबित हो सकती है " फादर ऑफ लाई-फ़ाई " के रूप में विख्यात प्रोफेसर हेराल्ड हास ने कहा कि लाई-फाई तकनीक भारत की कनेक्टिविटी क्रांति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि जहां फाइबर बिछाना मुश्किल है, वहां लाई-फ़ाई बिना केबल के तेज इंटरनेट प्रदान कर सकता है।

दिवाली-छठ पर घर जाने के लिए इन रूट पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

रांची त्योहारों के सीजन में झारखंड की राजधानी रांची से यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिवाली और छठ पर्व के दौरान विशेष ट्रेनों का विस्तृत संचालन किया है। ये ट्रेनें रांची से देश के विभिन्न महत्वपूर्ण और धार्मिक स्थलों के लिए चलाई जा रही हैं, ताकि पर्वों के दौरान लोगों को यात्रा में किसी भी तरह की असुविधा न हो। इस बार कुल सात विशेष स्पेशल ट्रेनों का प्रबंध किया गया है, जो अलग-अलग तिथियों और स्थलों पर नियमित रूप से चलेंगी। सबसे पहले अजमेर-रांची पूजा, दिवाली एवं छठ स्पेशल (09619/09620) ट्रेन 28 सितंबर से 30 नवंबर 2025 तक हर रविवार को चलेगी। इसके अलावा रांची से आनंद विहार टर्मिनल के लिए साप्ताहिक दिवाली/छठ स्पेशल (02877/02878) 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक शुक्रवार को और आनंद विहार से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। रांची से आरा के लिए भी साप्ताहिक विशेष ट्रेन (08640/08639) 28 सितंबर से 2 नवंबर तक रविवार को, जबकि आरा से 29 सितंबर से 3 नवंबर तक सोमवार को चलेगी। जयनगर के लिए साप्ताहिक दिवाली-छठ स्पेशल (08105/08106) ट्रेन 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और जयनगर से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। पूर्णिया कोर्ट साप्ताहिक विशेष ट्रेन (08626/08625) रांची से 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक शुक्रवार को, तथा पूर्णिया कोर्ट से 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को चलेगी। कामाख्या के लिए भी पूजा, दिवाली और छठ विशेष ट्रेन (08621/08622) 27 सितंबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और वहां से 29 सितंबर से 3 नवंबर तक सोमवार को चलाई जाएगी। गोरखपुर के लिए साप्ताहिक दिवाली-छठ स्पेशल (08629/08630) ट्रेन रांची से 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और गोरखपुर से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। रेल प्रशासन ने बताया कि इन ट्रेनों में सामान्य, स्लीपर और एसी कोच उपलब्ध होंगे, जिससे हर तरह के यात्री आराम से यात्रा कर सकेंगे। त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार यह कदम उठाया गया है ताकि वे सुगमता से और सुरक्षित यात्रा कर सकें। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी यात्रा पहले से ही बुक कर लें ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस पहल से त्योहारों के दौरान रांची और जुड़े इलाकों में यात्रा व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।  

बिहार की सियासत में हलचल: RJD के दो विधायक थामेंगे कमल का दामन

पटना  बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हलचल तेज हो गई है। कैमूर जिले से दो विधायकों, भभुआ से भरत बिंद और मोहनियां से संगीता कुमारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। दोनों नेता फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हैं, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने दोनों विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी दोनों ही BJP के टिकट पर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।   RJD से BJP की ओर सफर भरत बिंद और संगीता कुमारी ने 2020 के चुनाव में RJD के टिकट पर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। दोनों ने बाद में पार्टी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस कदम से नाराज़ RJD नेता तेजस्वी यादव ने उस समय विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब दोनों के औपचारिक इस्तीफे ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। BJP में टिकट की जंग तेज राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी के इस्तीफे BJP के लिए संगठन विस्तार का अवसर हैं। दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं और भाजपा के टिकट पर आगामी चुनाव लड़ने के लिए प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। कैमूर और आस-पास के इलाकों में भाजपा की रणनीति के तहत इन नेताओं का इस्तीफा एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक का भी इस्तीफा वहीं, चेनारी विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुरारी गौतम ने भी इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वे भी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। यह कदम न केवल कांग्रेस के लिए झटका है, बल्कि यह भाजपा की रणनीति में एक और अहम जोड़ मानी जा रही है। महागठबंधन को लगा बड़ा झटका महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के लिए ये इस्तीफे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। तीनों विधायक जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे RJD और कांग्रेस दोनों के परंपरागत वोटबैंक वाले क्षेत्र रहे हैं। अब इन सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। तेज होते समीकरण बिहार में चुनावी माहौल अब पूरी तरह से गरमा गया है। टिकट वितरण को लेकर सभी दलों में जोरदार खींचतान चल रही है। RJD, कांग्रेस और JDU जहां अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं, वहीं भाजपा लगातार विपक्षी दलों से प्रभावशाली चेहरों को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन इस्तीफों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल, टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या और गठबंधन के अंदर की खींचतान बिहार की राजनीति को और दिलचस्प बना रही है।

शोधकर्ताओं की चौंकाने वाली खोज: नवजातों में सामने आया डायबिटीज का नया प्रकार

अब तक माना जाता था कि डायबिटीज वयस्कों या बड़े बच्चों की बीमारी है, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। छह महीने से कम उम्र के कुछ शिशुओं में डायबिटीज का एक बिल्कुल नया प्रकार पाया गया है। यह सामान्य कारणों से नहीं, बल्कि उनके डीएनए में हुए खास बदलावों की वजह से होता है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि नवजात शिशुओं में होने वाले डायबिटीज के करीब 85 प्रतिशत मामलों के पीछे उनके जीन में गड़बड़ी होती है। इस नई खोज में टीएमईएम167ए नामक जीन को इस बीमारी से जोड़ा गया है। यह वही जीन है जिसमें म्यूटेशन होने पर शिशु के शरीर में इंसुलिन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। डॉ. एलिसाडेफ्रैंको और उनकी टीम ने बताया कि इस अध्ययन ने हमें इंसुलिन के निर्माण और उसके स्राव से जुड़े जीनों को समझने का एक नया रास्ता दिखाया है। उन्होंने पाया कि टीएमईएम167ए जीन में हुए बदलाव केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे मिर्गी और माइक्रोसेफली (सिर का सामान्य से छोटा होना) से भी जुड़े हैं। कैसे हुई यह खोज? वैज्ञानिकों ने छह बच्चों पर विस्तृत अध्ययन किया। इन सभी बच्चों में डायबिटीज के लक्षण जन्म के कुछ ही महीनों के भीतर दिखाई देने लगे थे। स्टेम सेल तकनीक और जीनएडिटिंग के जरिए जब उनके डीएनए की जांच की गई, तो टीएमईएम167ए जीन में असामान्य परिवर्तन पाए गए। इसके बाद टीम ने लैब में इन कोशिकाओं पर प्रयोग किए। उन्होंने सामान्य और परिवर्तित जीन वाले दोनों प्रकार के स्टेम सेल्स को अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं में बदला- वही कोशिकाएं जो इंसुलिन बनाती हैं। परिणाम चौंकाने वाले थे: जिन कोशिकाओं में टीएमईएम167ए जीन बदला हुआ था, वे इंसुलिन बनाने में असमर्थ थीं। क्यों खास है यह खोज? यह अध्ययन सिर्फ नवजात डायबिटीज को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण इंसुलिन उत्पादन प्रक्रिया को जानने के लिए भी अहम है। डायबिटीज की अधिकतर दवाएं इंसुलिन के उत्पादन या उसकी क्रिया पर असर डालती हैं। अगर इस नए जीन की भूमिका पूरी तरह समझ ली गई, तो भविष्य में ऐसी दवाएं बनाई जा सकेंगी जो मूल कारण, यानी जीन स्तर पर बीमारी को नियंत्रित कर सकें। डॉ. फ्रैंको के अनुसार, “यह खोज हमें न केवल दुर्लभ नवजात डायबिटीज को समझने में मदद करेगी, बल्कि सामान्य टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की गुत्थियों को सुलझाने में भी उपयोगी साबित हो सकती है।” वैज्ञानिक अब टीएमईएम167ए जीन के कार्य और इसके अन्य स्वास्थ्य प्रभावों पर और गहराई से शोध करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि इस जीन की बेहतर समझ से नवजात शिशुओं के लिए समय पर निदान और प्रभावी इलाज संभव होगा। डायबिटीज का यह नया रूप यह साबित करता है कि हमारे जीन हमारे स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर डालते हैं। शिशुओं में इतने शुरुआती चरण में इस बीमारी की पहचान न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आने वाले समय में अनगिनत बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।