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बिहार विधानसभा चुनाव में कूदे सीएम मोहन, आज करेंगे जनसंपर्क और रैलियां

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खास रणनीति बनाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को मंत्र दिया है कि पार्टी तब जीतती है, जब हर बूथ मजबूत होता है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि हर बूथ कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में मोदी है। इस तरह उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है। उनकी ही परिपाटी पर चलते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बिहार चुनाव के लिए कमर कस ली है। वे 16 अक्टूबर को बिहार दौरे पर रहेंगे। सीएम डॉ. यादव बिहार की कुम्हरार निर्वाचन क्षेत्र के कदमकुआं और विक्रम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पार्वती स्कूल स्पोर्ट्स ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। वे विधानसभा कुम्हरार में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजय गुप्ता और विक्रम नर्वाचन क्षेत्र में सिद्धार्थ सौरभ के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। इसके अलावा सीएम डॉ. यादव कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में भी हिस्सा लेंगे।  गौरतलब है कि, पार्टी संगठन के बीच सीएम डॉ. मोहन यादव की स्टार प्रचारक की छवि है। यही वजह है कि प्रदेश के मुखिया ने इसी साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में जबरदस्त प्रचार किया था। उन्होंने दिल्ली चुनाव में हरी नगर, मुस्तफाबाद, मालवीय नगर, विकासपुरी, नफजगढ़, त्रिनगर, उत्तम नगर, नांगलोई, बादली, रोहिणी और मादीपुर सीटों पर प्रचार किया था। इनमें से एक छोड़कर पार्टी बाकी सारी सीटें जीत गई थी।। पिछले साल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्रचार किया था। उन्होंने देवरिया लोकसभा से पार्टी प्रत्याशी  शशांक मणि त्रिपाठी और राबर्ट्सगंज लोकसभा की दुद्धी विधानसभा उप चुनाव के प्रत्याशी श्रवण सिंह गोंड के समर्थन में जनसंपर्क और रोड शो किया था।  हरियाणा-कश्मीर में चला था सीएम डॉ. मोहन का जादू इसी तरह सीएम यादव ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर लोकसभा चुनाव में भी जोरदार प्रचार किया। उनके दौरों की खास बात यह रही कि वे हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में जहां-जहां गए, वहां-वहां की सीटें बीजेपी जीत गई। उन्होंने हरियाणा की 5 विधानसभा सीटों भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा में जनसभाएं की थीं। इनमें चार सीटों पर पार्टी जीत गई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सांबा में प्रचार किया था। यह सीट भी पार्टी के खाते में गई थी।

तेल भुगतान में भारत का नया कदम, रूबल के साथ युआन का भी इस्तेमाल!

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर बड़ा दावा कर रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. वहीं दूसरी ओर रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि रूस लगातार भारत को कच्चे तेल के टॉप सप्लायर्स की लिस्ट में बना हुआ है. उन्होंने तो अब यहां तक दावा किया है कि भारत Russian Oil Import के पेमेंट के लिए अब सिर्फ रूबल ही नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में भी पेमेंट करने लगा है.  नोवाक बोले- 'चीनी करेंसी में पेमेंट का हिस्सा कम'  सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में रूसी डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत ने रूसी तेल के लिए कुछ पेमेंट चीनी युआन में करना शुरू कर दिया है, हालांकि ज्यादातर लेनदेन अभी भी रूसी करेंसी रूबल में ही किए जाते हैं. उन्होंने बड़ा दावा करते हुए बताया कि, 'मुझे पता है कि इस तरह के भुगतान शुरू हो गए हैं और मेरा मानना ​​है कि वर्तमान में यह प्रतिशत कम है.' बता दें कि पुरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूसी तेल के लिए मुख्यतः भारतीय करेंसी Rupee में भुगतान कर रहा था. चीन के बाद दूसरा बड़ा खरीदार रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) के अनुसार, सितंबर में चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों ने तेल व्यापार के निपटान के लिए युआन और यूएई करेंसी दिरहम समेत वैकल्पिक मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने का काम किया है, जिन पर लंबे समय से अमेरिकी डॉलर का ही वर्चस्व रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल की बढ़ी खरीद भारत, जो कि पारंपरिक रूप से मिडिल ईस्ट क्रूड ऑयल पर निर्भर है. इसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से ही रूसी तेल के अपने आयात में जोरदार बढ़ोतरी की है. इसके पीछे रूस की ओर से किफायती दरों पर क्रूड ऑयल मुहैया कराना बड़ा कारण है. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय डिमांड में कमी के कारण Russian Oil पर भारी छूट मिलती है, जिसके चलते भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात कम ही समय में कुल कच्चे तेल आयात तब के के 1 फीसदी से बढ़कर अब करीब 40 फीसदी हो चुका है.  Trump कर रहे हैं ये दावे एक ओर जहां रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक भारत की रूसी तेल खरीद बढ़ने और इसके पेमेंट के लिए चीनी करेंसी तक के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं. तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के निरंतर आयात पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने आगे दावा किया कि पीएम मोदी ने आज मुझे आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन को भी यही करने के लिए कहना होगा. हालांकि ट्रंप के दावे को लेकर भारत की तरफ से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है.

राजस्थान के जैसलमेर में दिल दहला देने वाला हादसा, कार में फंसे 4 दोस्त जिंदा जले

जैसलमेर  राजस्थान के जैसलमेर में बस में 21 लोगों के जिंदा जल जाने के बाद अब बालोतरा में भी दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां एक ट्रेलर से टक्कर के बाद कार में आग लग गई और इसमें सवार चार दोस्त जिंदा जल गए। दुर्घटना मेगा हाईवे पर सिंधरी पुलिस थानाक्षेत्र के सादा गांव के पास रात करीब 1.30 बजे हुई। कार का ड्राइवर भी दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी है। पुलिस के मुताबिक, डाबर गुड़ामालानी (बाड़मेर) के पांच युवक सिणधरी में काम करने गए थे। रात करीब 12 बजे के बाद वे घर लौट रहे थे। उनके घर से 30 किलोमीटर दूर कार सामने से आ रही ट्रेलर से टकरा गई। बलोतरा के डीएसपी नीरज शर्मा ने मोहन सिंह (35), शंभु सिंह (20), पंचाराम (22) और प्रकाश (28) की मौत की पुष्टि की। आग में जलने से मौके पर ही इनकी मौत हो गई। कार चालक दिलीप सिंह गंभीर रूप से जख्मी है। हादसे के बाद हाईवे पर भारी जाम लग गया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने जाम खुलवाया। पुलिस अधिकारियों ने कहा, 'चारों युवक पूरी तरह जल गए थे। शवों की पहचान डीएनए टेस्टिंग के जरिए करनी होगी। इसके बाद परिवारों को सौंपा जाएगा।' चारों शवों को अस्पताल में रखवाया गया है और मामले की जांच शुरू की गई है। इससे पहले जैसलमेर के पास मंगलवार को एक एसी बस में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई तो एक दर्जन से अधिक लोग झुलस गए।

पूरन केस में बढ़ी मुश्किलें, अब IAS पत्नी के खिलाफ केस दर्ज; जानिए तीन और नामजद कौन हैं

चंडीगढ़  हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित खुदकुशी मामले में अब एक नया ट्विस्ट आ गया है। उनकी IAS पत्नी पी अमनीत कुमार के खिलाफ ASI संदीप लाठर खुदकुशी मामले में FIR दर्ज की गई है। उनके अलावा तीन अन्य लोगों को भी इस मामले में नामजद किया गया है। ASI संदीप लाठर की आत्महत्या के मामले में उनकी पत्नी संतोष की शिकायत पर रोहतक सदर पुलिस स्टेशन में इन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। दूसरी तरफ, एफआईआर होने के बाद भी परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने की सहमति नहीं दी है। परिजन अभी संदीप को शहीद का दर्जा, पत्नी को नौकरी और आर्थिक मदद का लिखित आश्वासन चाहते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राथमिकी में चार लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार, IPS अफसर की पत्नी पी अमनीत कुमार, बठिंडा ग्रामीण के आप विधायक अमित रतन (जो पूरन के साले हैं) और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। संदीप के परिवार ने आरोप लगाया था कि संदीप पर दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थे। संदीप की खुदकुशी के बाद से ही परिवार न्याय की मांग कर रहा था। परिवार ने अंतिम संस्कार से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग रखी थी। सीएम के ओएसडी मना रहे परिवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी वीरेन्द्र सिंह बढ़खालसा गांव लाढ़ौत में मौजूद हैं। संदीप के परिजनों और पुलिस की बंद कमरे में बातचीत जारी है। लाढ़ौत गांव में एडिशनल एसपी वाईवीआर शशि शेखर और एसडीएम आशीष वशिष्ठ भी बाकी अधिकारियों के साथ पहुंचे हुए हैं। परिवार वालों को लाठर की बॉडी पीजीआई स्थित मोर्चरी रखवाने के प्रयास चल रहे हैं। अभी संदीप लाठर का शव उनके मामा बलवान सिंह के घर फ्रीजर में रखा हुआ है। संदीप लाठर का पैतृक जिला जींद जाट बहुल क्षेत्र है। उनके चाचा, जो पूर्व खाप प्रधान रहे हैं, का इलाके में काफी प्रभाव है और समुदाय बड़ी संख्या में जुट सकता है। ऐसे में सरकार किसी भी तरह से परिवार को पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी कराने के प्रयास में है ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े। मंगलवार को ASI ने की थी खुदकुशी मंगलवार को एएसआई संदीप लाठर ने अपने मामा के खेत में बने कोठड़े की छत पर सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपनी मौत से पहले एक वीडियो संदेश और चार पन्नों का 'सुसाइड' नोट छोड़ा है, जिसमें आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये गये हैं। उनके अलावा उनकी IAS पत्नी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। संदीप के क्या आरोप संदीप ने वीडियो संदेश में आरोप लगाया था कि पुरन कुमार, उनकी IAS पत्नी और MLA साला, एक आयोग के सदस्य के साथ कई लोग भ्रष्टाचार में शामिल रहे हैं। ASI ने इन लोगों पर वसूली रैकेट चलाने के भी आरोप लगाए थे। संदीप लाठर मूल रूप से जींद जिले के जुलाना के रहने वाले थे और रोहतक में साइबर सेल में तैनात थे। वह कई बड़ी आपराधिक वारदातों के खुलासे में अहम भूमिका निभा चुके थे। गौरतलब है कि सात अक्टूबर को पूरन कुमार ने चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने हाल ही में रोहतक में संदीप लाठर सहित कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की थी।

मुख्यमंत्री ने शिव शांति आश्रम पहुंचकर किया नमन, अनुयायियों के प्रति जताई संवेदना

सीएम योगी ने किए संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन, अर्पित की श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री ने शिव शांति आश्रम पहुंचकर किया नमन, अनुयायियों के प्रति जताई संवेदना सीएम योगी बोले— सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु का निधन आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लखनऊ स्थित शिव शांति आश्रम पहुंचे और आश्रम के पीठाधीश्वर संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने संत शिरोमणि के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उपस्थित शोकाकुल श्रद्धालुओं के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री योगी ने इस अवसर पर संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के पार्थिव शरीर पर केसरिया अंग वस्त्र ओढ़ाया और उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। गौरतलब है कि संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी बुधवार को ब्रह्मलीन हो गए थे।  मुख्यमंत्री योगी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए बुधवार को ही अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा था,“सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु, पूज्य श्री शांति आश्रम के पीठाधीश्वर, संत शिरोमणि श्री सांईं चांडूराम साहिब जी का निधन अत्यंत दु:खद और आध्यात्मिक समाज की अपूरणीय क्षति है। मेरी संवेदनाएं उनके शोक संतप्त अनुयायियों के साथ हैं। भगवान झूलेलाल से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और अनुयायियों को यह दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!” मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। श्रद्धालुजन और अनुयायी संत शिरोमणि के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की बात करते दिखे।

ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक भागीदारी, दिखा विकास के प्रति उत्साह

विकसित यूपी @2047: 75 जिलों में जारी है जनसंवाद, अब तक मिले 41 लाख सुझाव  ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक भागीदारी, दिखा विकास के प्रति उत्साह  शिक्षा, कृषि और समाज कल्याण पर सबसे अधिक सुझाव प्राप्त – बलरामपुर के डॉ. अमित गौतम ने एआई व मशीन लर्निंग सेंटर की स्थापना का दिया सुझाव – फतेहपुर की अंकिता सिंह ने शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर दिया व्यावहारिक सुझाव – बांदा के धीरज कुमार ने पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया – प्रदेश की 40 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में हुई बैठकों और गोष्ठियों से बढ़ा जनसंपर्क – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प के अनुरूप विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की प्रक्रिया जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 : समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान’ निरंतर गति पकड़ रहा है। इस जनसहभागिता आधारित अभियान के तहत अब तक लगभग 41 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक सुझाव आए हैं। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों द्वारा व्यापक जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें छात्र, शिक्षक, उद्यमी, कृषक, स्वयंसेवी संगठन, श्रमिक संघ और मीडिया प्रतिनिधि ने बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। सभी वर्गों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य की दिशा पर अमूल्य सुझाव मिल रहे हैं। इन सुझावों में सर्वाधिक विषय कृषि, शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, उद्योग, आईटी एवं टेक्नोलॉजी, पर्यटन और सुरक्षा से संबंधित रहे। शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक भागीदारी दर्ज की गई। फतेहपुर की अंकिता सिंह ने आकांक्षी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया। उन्होंने अभ्युदय कोचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत अधिकारियों की अनिवार्य कक्षाओं की व्यवस्था और राजकीय विद्यालयों में महिला अधिकारियों के नियमित संवाद का सुझाव दिया। बलरामपुर के डॉ. अमित कुमार गौतम ने सुझाव दिया कि प्रदेश के हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तकनीक का अधिकतम उपयोग हो सके। बांदा के धीरज कुमार ने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण पशु चिकित्सा केंद्रों की स्थापना, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही। महाभियान के तहत अब तक प्रदेश की 40 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों, 200 से अधिक नगर पालिकाओं, 15 नगर निगमों, 500 से अधिक नगर पंचायतों, 600 से अधिक क्षेत्र पंचायतों और 50 से अधिक जिला पंचायतों में बैठकों, सम्मेलनों और गोष्ठियों का सफल आयोजन किया गया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप, प्राप्त फीडबैक के आधार पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।    

अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार

दीपोत्सव 2025 दीपोत्सव से रोशन हुए कुम्हारों के घर, अयोध्या में युवाओं को मिल रहा रोजगार अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार 2017 के बाद बदला हाल : कभी हजारों में कमाने वाले अब दीपोत्सव में कमा रहे लाखों दीपोत्सव से अयोध्या के सैकड़ों कुम्हार परिवारों को मिला रोजगार इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ा उत्पादन, आधुनिकता और परंपरा का संगम योगी सरकार की पहल से मिट्टी के दीयों को मिली नई पहचान 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाकर अयोध्या रचेगी नया कीर्तिमान अयोध्या दीपोत्सव शुरू होने के बाद से अयोध्या के कुम्हार परिवारों के घरों में खुशहाली का उजाला फैल गया है। जो युवा कभी काम की तलाश में बाहर जाते थे, वे अब अपनी ही धरती पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योगी सरकार के प्रयासों से शुरू हुए दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या की अर्थव्यवस्था को बल दिया है बल्कि पारंपरिक मिट्टी कला को भी नई पहचान दी है। नौवें दीपोत्सव में इस बार 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी इस महाउत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं। जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि जबसे दीपोत्सव मनाया जा रहा है, तब से वे और उनका परिवार लगातार दीए बना रहे हैं। इस बार उन्हें दो लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की परंपरा शुरू कर हमारे जैसे परिवारों को रोजगार से जोड़ा है। अब हम आत्मनिर्भर हैं। आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादन क्षमता पुराने ढर्रे को छोड़कर अब कुम्हार आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन में तेजी आई है बल्कि दीयों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। जयसिंहपुर गांव के करीब 40 से अधिक कुम्हार परिवार दीपोत्सव के लिए दिन-रात मिट्टी के दीए बनाने में जुटे हैं। कभी हजारों में कमाते थे, अब बन रहे लखपति 2017 से पहले ये कुम्हार रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते थे। दीपोत्सव शुरू होने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां ये परिवार महीने में 20 से 25 हजार रुपये कमाते थे, वहीं अब दीपोत्सव के दौरान ही लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है। सोहावल की पिंकी प्रजापति बताती हैं कि इस बार उन्हें एक लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा, पहले दीपावली के समय दीए सस्ते बिकते थे, अब सरकार के आह्वान से बाजार में अच्छा रेट मिल रहा है। दीपोत्सव ने दी नई पहचान और बाजार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव में मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे स्थानीय कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिल रहे हैं। जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड, सोहावल और आसपास के गांवों में इस समय उत्सव जैसा माहौल है।  अयोध्या के स्थानीय निवासी रामभवन प्रजापति, गुड्डू प्रजापति, राजू प्रजापति, जगन्नाथ प्रजापति, राम भवन प्रजापति, सुनील प्रजापति और संतोष प्रजापति समेत यहां सैकड़ों की संख्या में पूरा परिवार मिट्टी गूंथने, आकार देने और दीयों को सुखाने-बेचने में जुटा है। जानिए, कब कितने दीप जले  वर्ष                जले दीप 2017             1.71 लाख 2018             3.01 लाख 2019             4.04 लाख 2020             6.06 लाख 2021             9.41 लाख 2022           15.76 लाख 2023           22.23 लाख 2024                25.12 लाख

8 करोड़ की ज़मीन खरीदी, जुर्माना घटाया ₹51 करोड़ से ₹4 हजार: नागार्जुन गौड़ा बोले – सरकार से ली अनुमति

खंडवा मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पदस्थ IAS अफसर नागार्जुन बी गौड़ा एक बार फिर चर्चा में हैं. हरदा के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद जाट ने एक बार फिर अफसर पर आरोपों लगाए हैं. इस बार आरोप लगाए हैं कि आईएएस अधिकारी ने रिश्वत के रुपयों से राजधानी भोपाल में 8 करोड़ की बेशकीमती 4 एकड़ जमीन खरीदी है. उधर आईएएस अधिकारी नागार्जुन बी गौड़ा ने कहा कि शासकीय सेवा में रहते हुए कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो सरकार की अनुमति से ली है. आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद जाट ने आईएएस अधिकारी नागार्जुन गौड़ा पर रिश्वत के रुपयों से जमीन खरीदने का आरोप लगाया है. पत्रकारों से बात करते हुए आनंद जाट ने बताया जिस जमीन को खरीदा है, उसका बाजार मूल्य 2 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है. मतलब 4 एकड़ जमीन की कीमत 8 करोड़ रुपए हुई.  आनंद जाट ने इसके साथ ही एक बार फिर से 51 करोड़ के जुर्माने को 4 हजार करने पर सवाल उठाए और कुछ खामियां भी बताईं. आनंद का कहना है कि इस मामले में अब ईओडब्ल्यू में जाकर शिकायत की जाएगी. भोपाल की जिस जमीन को आईएएस अफसर ने खरीदा है, उस जमीन के दस्तावेजों की पड़ताल aajtak ने भी की. जिसमें पाया कि उक्त जमीन भोपाल के फंदा ब्लॉक के फतेहपुर डोबरा गांव में है. इस 4 एकड़ जमीन की सरकारी गाइडलाइन से कीमत 94 लाख 76 हजार रुपए है.  यह जमीन IAS अफसर नागार्जुन गौड़ा और भोपाल निवासी रोहित शर्मा ने मिलकर 90 लाख रुपए में खरीदी है. नागार्जुन गौड़ा के हिस्से में 2 एकड़ जमीन रहेगी. रजिस्ट्री में लिखे अमाउंट के अनुसार उन्होंने 45 लाख में 2 एकड़ जमीन खरीदी है. हालांकि, यह सब जानते हैं कि जमीन की शासकीय दर और बाजार की दर में अंतर रहता है. IAS अफसर ने आरोपों को नकारा उधर, खंडवा जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन गौड़ा ने aajtak से फोन कॉल पर कहा कि जब शासकीय सेवक प्रॉपर्टी की खरीदी करते हैं, तो शासन से अनुमति लेकर ही खरीदते हैं. उन्होंने भी अनुमति लेकर ही खरीदी की है. ₹51 करोड़ जुर्माने को ₹4 हजार करने का विवाद यह जमीन खरीदी (मार्च 2024 में) हरदा जिले में सड़क बनाने वाली कंपनी पाथ इंडिया को अवैध खनन मामले में क्लीन चिट देने के आदेश के चार माह बाद हुई है. बता दें कि कंपनी को पहले ₹51.67 करोड़ का जुर्माना नोटिस जारी हुआ था, जिसे IAS गौड़ा ने घटाकर मात्र ₹4032 कर दिया था.  आनंद जाट के आरोप RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने इस मामले को उठाते हुए गौड़ा पर ₹10 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. उनका आरोप है कि आदेश देते समय कंपनी के वकील का पक्ष माना गया, लेकिन अमले के प्रतिवेदन को नजरअंदाज किया गया. आरोप है कि खनन की सही माप के लिए दोबारा जांच नहीं करवाई गई और सामान्य नाप वाला मीटर तहसीलदार के पास उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे शासन को ₹51 करोड़ का नुकसान हुआ.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि

रायपुर : बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियां जोरों पर, अब तक 3.09 लाख खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं समय के पहले सुनिश्चित करने के निर्देश बस्तर ओलंपिक की ख्याति पूरे देश में, यह मात्र क्षेत्रीय आयोजन नहीं –  अरुण साव रायपुर बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारियों की बैठक लेकर इसकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विकासखंड स्तरीय आयोजनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल मैदानों की उपलब्धता, उनकी मैपिंग, भोजन, यातायात, आवास, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायकों एवं रेफरियों की व्यवस्था के साथ ही सभी मूलभूत जरूरतों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार और संचालक मती तनूजा सलाम भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थीं। बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में भागीदारी के लिए अब तक तीन लाख नौ हजार से अधिक खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें कांकेर जिले के 42 हजार 228, कोंडागांव के 43 हजार 333, दंतेवाड़ा के 44 हजार 395, नारायणपुर के 46 हजार 074, बस्तर के 52 हजार 312, बीजापुर के 40 हजार 437 तथा सुकमा जिले के 40 हजार 830 प्रतिभागी शामिल हैं। विगत 22 सितम्बर से बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन की शुरूआत की गई थी। खिलाड़ियों के पंजीयन का काम आगामी 20 अक्टूबूर तक जारी रहेगा। बस्तर ओलंपिक का विकासखंड स्तर पर आयोजन 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक, जिला स्तरीय आयोजन 5 नवम्बर से 15 नवम्बर तक तथा संभाग स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 30 नवम्बर तक किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बैठक में बस्तर ओलंपिक की पंजीयन प्रक्रिया एवं व्यापक प्रचार-प्रसार की समीक्षा की। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार-प्रसार की योजनाओं—जैसे दीवार लेखन, मशाल यात्रा, पोस्टर, बैनर, पैंपलेट वितरण, हाट-बाज़ारों में प्रचार इत्यादि की जानकारी ली। उन्होंने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।  साव ने प्रत्येक विकासखण्ड में पंजीयन की स्थिति की समीक्षा कर जिन क्षेत्रों में पंजीयन कम हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिलाओं की तुलना में पुरुष प्रतिभागियों के कम पंजीयन को देखते हुए जिला खेल अधिकारियों को पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।  साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैल चुकी है। अतः इसे राष्ट्रीय महत्व का आयोजन मानते हुए विकासखंड से लेकर संभाग स्तर तक उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ आयोजित किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के निर्णायकों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत के रूप में आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक होने वाले विकासखंड स्तरीय आयोजनों के लिए सभी जिलों को समय पूर्व संपूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  साव ने फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल जैसे खेलों में पंजीयन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने तथा खेल विभाग से प्राप्त बजट के अतिरिक्त जिला कलेक्टरों के सहयोग से सीएसआर निधि से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक मती रश्मि ठाकुर तथा खेल अधिकारी  गिरीश शुक्ला भी बैठक में मौजूद थे। 11 खेलों की स्पर्धाएं होंगी, नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे अपना दमखम विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर एक महीने से भी अधिक समय तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

रमा एकादशी 2025: 17 अक्टूबर को है व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा का सही तरीका

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि में एकादशी का व्रत रखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. बता दें कि रमा एकादशी को कार्तिक शुक्ल एकादशी भी कहा जाता है. इस बार यह व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा. जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त, कथा, और उपाय के बारे में. रमा एकादशी व्रत तिथि और मुहूर्त  पंचांग के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. एकादशी तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 12 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. 17 अक्टूबर को उदयातिथि मान्य रहेगी, इसलिए 17 अक्टूबर को रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त  अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. अमृत काल मुहूर्त सुबह 11 बजकर 26 मिनट से दोपहर 1 बजकर 07 मिनट तक रहेगा. पारण का समय 18 अक्टूबर 2025, सुबह  6 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.  रमा एकादशी पूजन विधि  7 अक्टूबर की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्नान के बाद स्वच्छ, पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, क्योंकि ये दोनों रंग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय हैं. पूजा स्थल को शुद्ध कर गंगाजल का छिड़काव करें. अब दीप प्रज्वलित करें और भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर व्रत का संकल्प लें. पूजा प्रारंभ करते समय भगवान विष्णु का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल) से अभिषेक करें. इसके बाद उन्हें पीला चंदन, अक्षत (चावल), मौली (रक्षा सूत्र), पुष्प, तुलसीदल, मेवा अर्पित करें.  भगवान विष्णु की पूजा के पश्चात माता लक्ष्मी की भी विधिवत पूजा करें. उन्हें कमल पुष्प, गुलाब या पीले फूल अर्पित करें. पूजन के बाद रमा एकादशी व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें. अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आरती करें. आरती के पश्चात परिवार के सभी सदस्य “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें.  व्रतधारी दिनभर उपवास रख सकते हैं. अगले दिन द्वादशी तिथि को प्रातः पूजा कर ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दें, उसके बाद व्रत का पारण करें.  रमा एकादशी पूजा मंत्र  ॐ नमोः नारायणाय॥ ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। रमा एकादशी उपाय  रमा एकादशी के दिन काली चींटियों को आटा या चीनी खिलाने की परंपरा अत्यंत शुभ मानी जाती है. यह उपाय रुके हुए कार्यों को पूर्ण करने वाला माना जाता है. रमा एकादशी पर देवी लक्ष्मी की पूजा में कुछ विशेष वस्तुएं चढ़ाने का विधान है. इस दिन माता को मखाना, खीर, कमल का पुष्प, बताशा, कौड़ी और सुगंधित धूप-दीप अर्पित करें. मखाना और खीर समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक हैं. कमल का पुष्प माता लक्ष्मी का प्रिय फूल है, जो वैभव और शांति लाता है. बताशा मिठास और सौहार्द का प्रतीक है. कौड़ी को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है; इसे अर्पित करने से आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है.  रमा एकादशी व्रत कथा  पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मुचुकुन्द, जो अत्यंत पराक्रमी और धर्मपरायण थे, उन्होंने अपने जीवन में कई बार युद्ध और पाप कर्मों से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु का शरण लिया. एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में आए और उन्हें रमा एकादशी का व्रत करने की महिमा सुनाई. उन्होंने बताया कि यह व्रत भगवान विष्णु और देवी रमा (लक्ष्मी) को प्रसन्न करने वाला है, जो जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति देता है. राजा मुचुकुन्द ने श्रद्धा पूर्वक यह व्रत किया. इसके प्रभाव से वे न केवल पापों से मुक्त हुए, बल्कि उन्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति भी हुई. कहा जाता है कि इसी दिन देवी लक्ष्मी स्वयं विष्णु के साथ पृथ्वी पर आती हैं और भक्तों को धन, वैभव और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं.