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4 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों पर एंटी रैगिंग सेल में शिकायत, पीजी स्टूडेंट का प्रताड़ना का दावा

 इंदौर इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामले में पीजी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टूडेंट ने एंटी रैगिंग सेल को की शिकायत में बताया कि इन डॉक्टर्स द्वारा प्रताड़ित करने से मेरा चार महीने में 22 किलो वजन कम हो गया। वे मुझे ऑपरेशन थिएटर (OT) की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी देते हैं। इन्होंने मेरी मेडिकल लीव को लेकर झूठी अफवाहें फैलाईं। मैं लगातार परेशानी झेल रही हूं। इनकी वजह से ही मेरी तबीयत खराब हुई और एमवाय अस्पताल में एडमिट रही। यह गंभीर आरोप इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पीजी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने लगाए हैं। प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics and Gynaecology) विभाग में पढ़ रही इस जूनियर डॉक्टर ने यूजीसी की राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने मुझे अत्यधिक और रात की ड्यूटी करने को मजबूर किया। मुझे ऑपरेशन थिएटर की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी दी और मेरे अवकाश को लेकर झूठी अफवाहें फैलाईं जिससे वह गहरी मानसिक परेशानी में चली गई। छात्रा ने बताया कि दबाव सहन न कर पाने के कारण उसे लंबी मेडिकल लीव लेनी पड़ी। खास बात यह कि जूनियर स्टूडेंट के परिवार ने भी माना कि मानसिक रूप से टूट चुकी थी और वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है। एंटी रैगिंग कमेटी को की गई शिकायत में यह भी बताया कि बात काम के बोझ की नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से किए गए अत्याचार की है। उसे बुरी तरह अपमानित किया गया। जिससे उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है। शिकायत में चार सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम एंटी रैगिंग सेल में दर्ज शिकायत में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम हैं। इन पर उसे डराने और उसके खिलाफ अपमानजनक माहौल बनाने का आरोप है। पीड़िता स्टूडेंट कहना है कि उसके सीनियरों ने एक वाट्सएप ग्रुप पर उसके बारे में गलत मैसेज चलाए गए और उसे “झूठी” बताया और लिखा कि उसकी मेडिकल लीव फर्जी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि वापसी के बाद उसे छह महीने तक ओटी ड्यूटी नहीं दी जाएगी और सजा के तौर पर अलग से नाइट शिफ्ट करनी होगी। स्टूडेंट का आरोप है कि लगातार प्रताड़ना के कारण मेरी तबीयत तेजी से बिगड़ी और चार महीनों में उसका वजन 22 किलो से अधिक घट गया। उसे चार दिनों तक एमवाय अस्पताल में एडमिट रहना पड़ा और हालत बिगड़ने पर वह घर लौट गई। एंटी रैगिंग कमेटी ने शुरू की जांच मेल के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। समिति की अध्यक्ष डॉ. पूनम देयसरकार ने पुष्टि की कि जूनियर स्टूडेंट ने शिकायत की है। कमेटी ने जांच प्रारंभ कर दी है। कमेटी पीड़िता और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की पहचान कर उनके बयान दर्ज करेगी। इसके साथ जल्द ही अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल और कॉलेज प्रशासन को सौंपेगी। उधर, डॉ. निलेश दलाल (HOD, प्रसूति व स्त्री रोग विभाग) का कहना है का मामला एंटी रैगिंग कमेटी के पास है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें     जुलाई 2022 में जूनियर छात्रों ने दिल्ली के एंटी रैगिंग कमेटी को मेल भेजकर सीनियर छात्रों द्वारा रैंगिग की शिकायत की थी। मामले में एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच करते हुए एक मेल एमजीएम मेडिकल कॉलेज को भेजा और पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए। कॉलेज ने दोषी छात्रों के खिलाफ संयोगितागंज थाने पर केस दर्ज किया। इसमें आरोप सीनियर छात्रों पर लगे थे। हैरानी की बात यह थी कि छात्रों ने अपने कॉलेज में शिकायत करने के बजाए रैगिंग कमेटी दिल्ली में शिकायत की और मेडिकल कॉलेज के डीन ने इस मामले में सख्त कदम उठाने की बात कही थी। मामले में रैगिंग कमेटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया।     जनवरी 2023 सीनियर्स द्वारा आधी रात जूनियरों को फोन कर अपने कमरे में बुलाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था। पहले कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। दरअसल छात्रों द्वारा पुलिस के एक सीनियर अधिकारी से इसकी शिकायत भी की गई है। इसमें बताया गया है कि रात को सीनियरों द्वारा उनको फोन किया जाता है। अपने रूम में बुलाकर प्रताड़ित किया जाता है। इस तरह की शिकायत मिलने के बाद इसकी जानकारी पुलिस द्वारा एमजीएम के तत्कालीन डीन डॉ. संजय दीक्षित को दी गई। इस पर डीन ने चीफ वार्डन डॉ. वीएस पाल और वार्डन मनीष पुरोहित को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच के दौरान इनके द्वारा अलग-अलग ब्लॉक में रह रहे तकरीबन 40 छात्रों से पूछताछ की गई किंतु छात्रों ने मामले में चुप्पी साध ली थी। इनके अलग-अलग बुलाकर पूछताछ करने के बाद भी छात्रों ने इस संबंध में कुछ कहने से इनकार कर दिया। कॉलेज प्रबंधन द्वारा मामले को लेकर बैठक भी हुई। जिसमें वास्तविकता का पता लगाने के लिए जोर दिया गया। डीन का कहना था कि जूनियर छात्रों से चर्चा की गई है किंतु उन्होंने चुप्पी साध ली। उनका कहना है कि जो भी सीनियर इसमें लिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की लिखित शिकायत भी थाने में दर्ज नहीं कराई गई थी।     साल 2024 में जूनियर छात्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से शिकायत की थी। छात्रों ने लिखा कि रात 10.30 बजे उन्हें बुलाया व सिर झुकाकर खड़ा कर दिया जाता है। सुबह 5-6 बजे नशा उतरने तक सीनियर उन्हें पीटते हैं। 6-6 घंटे तक रूफटॉप पर सिर झुकाकर खड़ा रखा जाता है। वे उन्हें आते-जाते पीटते हैं। असहज कपड़ों में छत पर बुलाते हैं। इन्हीं कारणों से इस 30 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ दिया था। मामले में तब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और वार्डन से भी किसी तरह की शिकायत नहीं करने की बात कही थी। फिर रैगिंग के शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। इसमें पीड़ित ने अपनी पहचान छुपाई थी। मौके पर कोई आइडेंटिफिकेशन नहीं दिया था। होस्टल में सब स्टूडेंट ठीक मिले। किसी … Read more

डीपफेक पर सख्त हुआ सरकार का रुख, भगवंत मान का फेक वीडियो हटाने का आदेश

मोहाली  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित एक AI डीपफेक वीडियो मामले में मोहाली की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए फेसबुक और गूगल को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित कंपनियां वीडियो से जुड़ा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि साक्ष्य नष्ट न हो सकें। यह आदेश 22 अक्टूबर को जारी किया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “पंजाब के मुख्यमंत्री का एक डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ ‘राइट-विंग ट्रोल्स’ द्वारा शेयर किया जा रहा था। यह पूरी तरह फर्जी वीडियो है। अदालत ने इस सामग्री को इंटरनेट से हटाने के आदेश दिए हैं।” इस मामले ने सोशल मीडिया पर भारी विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी। इसके बाद पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन ने कनाडा निवासी जगमन समरा के खिलाफ ‘अश्लील और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने’ का मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, जगमन समरा नाम के फेसबुक अकाउंट (URL: [facebook.com/jagman.samra.369309](https://www.facebook.com/jagman.samra.369309)) से कई आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट की गईं, जिनका उद्देश्य विभिन्न समूहों में वैमनस्य फैलाना था। पुलिस की शिकायत में कहा गया है “यह सामग्री अश्लील, अवैध है और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत, दुश्मनी या दुर्भावना फैलाने की क्षमता रखती है।” यह पोस्ट सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल की नजर में आने के बाद सामने आई। इंस्पेक्टर गगनप्रीत सिंह की शिकायत पर, 21 अक्टूबर को पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 340(2), 352(1), 353(2), 351(2), 336(4) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। फिलहाल, पुलिस ने मामले की डिजिटल जांच शुरू कर दी है और आरोपित की साइबर गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। AAP का कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसका मकसद पंजाब सरकार व मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करना है।

AICC बैठक आज: नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पहले कांग्रेस का बड़ा प्रयोग

जयपुर राजस्थान में नए जिलाध्यक्षों की तैनाती के साथ ही कांग्रेस इस बार नया प्रयोग भी करने जा रही है। इसमें नव नियुक्त जिलाध्यक्षों को तीन महीने की 'प्रोबेशन' अवधि पर तैनाती दी जाएगी। इस दौरान नए जिलाध्यक्षों की फरफारमेंस का रिव्यू ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा गठित एक विशेष समिति करेगी। यह पहल ‘संगठन सृजन अभियान’ का हिस्सा है। इसके तहत राजस्थान में पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने संभावित जिला अध्यक्षों पर फीडबैक एकत्र किया। इसके बाद बारां और झालवाड़ को छोड़कर 48 संगठनात्मक जिलों में से हर जिले के लिए 6-6 नामों का पैनल तैयार कर AICC को भेज दिया गया। पैनल में  तीन प्राथमिक और तीन आरक्षित वर्गों (SC, ST, अल्पसंख्यक या महिला) से होंगे, ताकि अगर किसी सीट पर सोशल इंजीनियरिंग के तहत निर्णय लेना हो तो उसका विकल्प भी मौजूद रहे।  बारां और झालावाड़ को उपचुनावों के कारण फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है। आज पैनल पर दिल्ली में चर्चा पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप दे चुके हैं और आज शुक्रवार को उनकी बैठक AICC महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, सांसद शशिकांत सेंथिल, और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ होगी। ये नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विपक्ष के नेता टीकाराम जूली, और वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत व सचिन पायलट से भी परामर्श करेंगे। खरा नहीं उतरे तो 3 महीने में छुट्टी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह प्रणाली सार्थक है; बस इसे समझने और धैर्य रखने की जरूरत है। नए फॉर्मेट के तहत जिला अध्यक्ष को तीन माह की प्रोबेशन पर रखा जाएगा और विशिष्ट जिम्मेदारियां दी जाएंगी। प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं हुआ तो उन्हें बदला जा सकता है।” पार्टी का यह कदम राजस्थान में संगठन को मज़बूत करने और आने वाली राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विवादों में रहा फीडबैक कार्यक्रम हालांकि, यह फीडबैक प्रक्रिया विवादों से अछूती नहीं रही। कई जिलों में गुटबाजी, नियम उल्लंघन, तीखी बहस और यहां तक कि मारपीट की घटनाएं सामने आईं। अजमेर में पोस्टर विवाद से लेकर जालोर, करौली, डूंगरपुर और कोटा में गहलोत-पायलट खेमों के बीच टकराव तक ने पार्टी में आंतरिक तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर अशोक गहलोत ने राहुल गांधी के नए फॉर्मूले के तहत पारदर्शिता की वकालत की, वहीं पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना जैसे नेताओं ने इस प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप लगाते हुए असहमति जताई। यह सब दर्शाता है कि संगठन सृजन अभियान कांग्रेस में नई ऊर्जा के साथ-साथ पुराने अंतर्विरोधों को भी उजागर कर रहा है।  

कार्बाइड गन पर रोक: भोपाल-इंदौर-ग्वालियर में आदेश जारी, 300 से ज्यादा लोगों की आंखें झुलसीं

भोपाल/ इंदौर /ग्वालियर  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्वालियर और इंदौर जिले में घातक कैल्शियम कार्बाइड गन के कारण बच्चों की आंखों को हुए नुकसान के बाद दोनों जिलों के कलेक्टरों ने कार्बाइड गन पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया है.  भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश में जारी किया है कि कोई भी प्रतिबंधनात्मक पटाखा, आतिशबाजी, लोहा स्टील या पीवीसी पाइपों में विस्फोटक पदार्थ भरकर तेज आवाज  करने वाले अवैध पटाखे (कार्बाइड गन) नहीं बनाएगा. इकट्ठा नहीं करेगा और खरीद बेच भी नहीं सकेगा.  कलेक्टर ने कहा है कि यह अवैध संशोधित पटाखा आम नागरिकों की सुरक्षा, शांति और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, इसलिए इसके वितरण या प्रदर्शन पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. एसडीएम, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी इस आदेश का सख्ती से पालन करवाएंगे.  दिवाली 2025 में नए पटाखे की खोज में सोशल मीडिया ने बंदर भगाने के देसी जुगाड़ को वायरल कर दिया। इसी जुगाड़ सिस्टम “कार्बाइड गन” को लेकर दो साल पहले यानी 2023 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) भोपाल ने चेतावनी दी थी। संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया था कि कैल्शियम कार्बाइड और पानी के केमिकल रिएक्शन से बनने वाली गैस 'एसिटिलीन' सिर्फ धमाका नहीं करती, बल्कि आंखों की रोशनी तक छीन लेती है। यह स्टडी इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थेलमोलॉजी में प्रकाशित भी हुई थी। इसके बाद भी समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए। यही वजह है कि अब तक भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 162 लोग इस कार्बाइड गन से घायल होकर आ चुके हैं। इन सभी मरीजों की आंखें जली हैं। उन्हें देखने में परेशानी हो रही है। देसी कार्बाइड गन से प्रदेशभर में अब तक 300 लोगों की आंखों में जलन के मामले सामने आ चुके हैं। ग्वालियर, इंदौर, विदिशा समेत कई जगहों पर ऐसी घटनाओं में 7 से 14 साल तक के बच्चे प्रभावित हुए हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कार्बाइड पाइप गन बेचने, खरीदने और स्टॉक पर रोक लगा दी गई है। भोपाल और ग्वालियर में गन बेचते मिले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सिर्फ वार्म व्हाइट लाइट का गोला दिख रहा करीब 50 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिन्हें आंखों के सामने सिर्फ वार्म व्हाइट लाइट का गोला ही नजर आ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इन मरीजों की आंखों की रोशनी फिलहाल जा चुकी है। अब एमनियोटिक मेम्ब्रेन इंप्लांट और टिशू ग्राफ्टिंग जैसी प्रक्रिया से आंखों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम उपाय कॉर्निया ट्रांसप्लांट ही होगा, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी कॉर्निया मिलना मुश्किल है। डिप्टी सीएम घायल बच्चों से मिलने पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे हमीदिया अस्पताल पहुंचकर कार्बाइन गन से घायल युवाओं और बच्चों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके उपचार की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। शुक्ला करीब एक घंटे तक अस्पताल में रहे। डॉक्टरों ने जानकारी दी कि दुर्घटना में घायल कुल 37 मरीजों में से 32 को जरूरी इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। 5 मरीजों का उपचार अभी जारी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध रूप से पटाखा निर्माण या विस्फोटक सामग्री रखने वालों की सघन जांच की जा रही है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के पास बच्चों के आंकड़े नहीं अलग-अलग अस्पतालों से आई जानकारी के अनुसार भोपाल में अब तक कार्बाइड गन से प्रभावित लोगों के 162 केस सामने आए हैं। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग अब तक अलर्ट नहीं हुआ है। हालत यह है कि विभाग ने आधिकारिक आंकड़ा तक जारी नहीं किया है। भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा को फोन किया गया तो उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में होने की बात कही। ग्वालियर में भी कलेक्टर ने लगाई रोक  ग्वालियर जिले में भी कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी कार्बाइड गन के निर्माण, खरीदने, बेचने और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. उन्होंने अपने आदेश में जिक्र किया कि कार्बाइड गन में उपयोग होने वाला कार्बाइड और पानी का मिश्रण एसिटिलीन गैस पैदा करता है, जो आंखों के साथ-साथ दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए घातक होता है. आदेश के बाद जिला प्रशासन की टीमों ने भितरवार, लोहिया बाजार, नया बाजार बाड़ा, हीरा वेल्डिंग सेंटर एरिया में कार्बाइड गन की जांच शुरू कर दी है.  आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और अन्य एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा. ग्वालियर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अवैध रूप से कार्बाइड गन के निर्माण, खरीदने, बेचने और इस्तेमाल की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नं 0751-7049101029, 0751-2363636 व 0751-2445333 पर दें.  

खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण दोहन – आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर : हरित विकास और आर्थिक समृद्धि का छत्तीसगढ़ मॉडल खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण दोहन – आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम वन संरक्षण और खनन का संतुलन: विकास के साथ हरियाली का विस्तार खनिजों से चमक रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था – खनिज राजस्व में 34 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि रायपुर, छत्तीसगढ़ यह नाम अब केवल हरियाली और संस्कृति का पर्याय नहीं रहा, बल्कि भारत की खनिज राजधानी के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। देश के कुल खनिज भंडार का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ की धरती में छिपा है। यही कारण है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिजों का योगदान लगातार बढ़ रहा है और प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद जीएसडीपी में खनिज क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। राज्य गठन के समय खनिज राजस्व 429 करोड़ रूपए था, जो अब बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ हो गया है। 25 साल में राज्य का खनिज राजस्व में 34 गुना बढ़ गया है। वन एवं पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य की यह उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 1980 से अब तक वनसंरक्षण अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में केवल 28 हजार 700 हेक्टेयर भूमि ही खनन के लिए दी गई है, जो कि राज्य के वन क्षेत्र 59.82 लाख हेक्टेयर का 0.47 प्रतिशत और राज्य के कुल भू-भाग 135 लाख हेक्टेयर का 0.21 प्रतिशत है। खनन क्षेत्र में कटाई के साथ 5 से 10 गुना वृक्षारोपण को अनिवार्य किए जाने से राज्य के वन क्षेत्र में 68 हजार 362 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जो इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार देश में सर्वाधिक है। खनिज राजस्व से न केवल प्रदेश को आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खनिज संपदा के दोहन को पर्यावरणीय संतुलन और जनहित से जोड़कर “खनिज से विकास” की नई परिभाषा गढ़ रही है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख खनिजों में से महत्वपूर्ण कोयला, ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। राज्य में कोयले का भंडारण 74,192 मिलियन टन है, जो देश के कोयल भण्डार का लगभग 20.53 प्रतिशत है। कोयला उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य की देश में 20.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है। देश के कोयला उत्पादक राज्यों में छत्तीसगढ़ का दूसरा स्थान है। प्रदेश के कोयले का उपयोग ताप विद्युत संयंत्रों, सीमेंट, इस्पात और कोयला आधारित मध्यम व लघु उद्योगों में किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता में छत्तीसगढ़ का योगदान पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। लौह अयस्क देश के इस्पात उद्योग की रीढ़ है, जो छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कबीरधाम से लेकर दल्लीराजहरा से होते हुए दंतेवाड़ा बैलाडीला तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं में 4,592 मिलियन टन लौह अयस्क भंडार मौजूद है, जो राष्ट्रीय भंडार का 19.09 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 16.64 प्रतिशत है। एनएमडीसी की बैलाडीला खदानें (दंतेवाड़ा) और दल्ली-राजहरा खदानें (बालोद) देश के इस्पात उद्योगों की जीवनरेखा हैं। यहां से भिलाई इस्पात संयंत्र और देशभर के उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क मिलता है। लौह अयस्क उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में द्वितीय स्थान है। छत्तीसगढ़ में 992 मिलियन टन बाक्साइट भंडार है, जो देश का 20 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 4.3 प्रतिशत है। सरगुजा, बलरामपुर और कबीरधाम जिलों में हिन्डाल्को, वेदांता और सीएमडीसी जैसी कंपनियाँ सक्रिय हैं। बाक्साइट से निर्मित एल्युमिनियम ऊर्जा, निर्माण और रक्षा उद्योग के लिए अहम है। चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का मेरुदंड है। राज्य में 13,211 मिलियन टन चूना पत्थर का भंडार है, जो देश के कुल भंडार का 5.8 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 11 प्रतिशत है। बलौदाबाजार, रायपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिलों में अल्ट्राटेक, एसीसी, अम्बुजा, सीमेंट, ग्रासिम जैसे संयंत्र कार्यरत हैं। बलौदाबाजार को अब ‘सीमेंट हब’ कहा जाता है। देश का 100 प्रतिशत टिन उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। सामरिक महत्व के टिन अयस्क का यहां 30 मिलियन टन का भंडार उपलब्ध है। दंतेवाड़ा और सुकमा में मिलने वाला यह खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसे अनुसूचित जनजाति की सहकारी समितियों के माध्यम से क्रय करने का प्रावधान राज्य सरकार ने लागू किया है। राज्य में 992 मिलियन टन डोलोमाइट भंडार मौजूद है, जो राष्ट्रीय भंडार का 20 प्रतिशत है। मुख्यतः रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिलों में पाया जाता है। यह खनिज इस्पात उद्योग में फ्लक्स मटेरियल के रूप में उपयोगी है। गरियाबंद जिले के बेहराडीह और पायलीखंड क्षेत्रों में हीरा का प्रमाणित भंडार है। बलौदाबाजार जिले के सोनाखान क्षेत्र में 2780 किलोग्राम स्वर्ण भंडार के अतिरिक्त जशपुर, महासमुंद और कांकेर जिलों में भी स्वर्ण और हीरा खनिज की संभावनाएं पाई गई हैं। छत्तीसगढ़ में गौण खनिजों की भी बड़ी भूमिका है। राज्य में 37 प्रकार के गौण खनिज जैसे-रेत, मुरम, ईमारती पत्थर, साधारण मिट्टी, निम्न श्रेणी चूना पत्थर, डोलोमाइट और ग्रेनाइट की खुदाई लगभग हर जिले में होती है। रेत और मिट्टी का उपयोग सड़क, भवन और पुल निर्माण में व्यापक रूप से किया जा रहा है। गौण खनिजों से राज्य को स्थानीय राजस्व, रोजगार और पंचायत निधि का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। जिला पंचायतों और नगर निकायों को इन खनिजों से प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिलती है। खनिज विकास के साथ-साथ राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और खनन प्रभावित इलाकों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया है। डीएमएफ के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़कों जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। खनिज विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का जो उदाहरण छत्तीसगढ़ ने प्रस्तुत किया है, वह आज पूरे देश के लिए एक सस्टेनेबल ग्रोथ मॉडल बन गया है। यहां विकास और हरियाली विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नीति में दूरदृष्टि और क्रियान्वयन में संवेदनशीलता हो, तो खनिज संपदा केवल भूमि की गहराई में नहीं, बल्कि जनजीवन की समृद्धि में भी झलक सकती है।

राजकोट और आसपास जिलों में भूकंप के झटके, गुजरात में लोगों में हलचल

राजकोट गुजरात के राजकोट में शुक्रवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी (NCS) ने बताया कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.4 दर्ज की गई. भूकंप का केंद्र बिंदु सौराष्ट्र के गोंडल क्षेत्र से 24 किमी पश्चिम-दक्षिण में था. राजकोट और आसपास के जिलों मे दोपहर 12:37:42 बजे के आसपास भूकंप का असर महसूस किया गया. लोगों ने घरों में झटके महसूस होने की बात कही, जिससे कुछ पल के लिए अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान या संपत्ति को क्षति की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं. गुजरात सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को देने को कहा है.

रीवा : पत्नी बोली- फ्लोर खून से सन गया, तो धो दिया; हेडकांस्टेबल की बर्बरता का सच सामने आया

रीवा  एक ऐसा मामला जिसने रीवा पुलिस विभाग और पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। हेड कॉन्स्टेबल राजीव वर्मा पर अपनी पत्नी सावित्री बर्मन के खिलाफ गंभीर घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। आरोप है कि दीपावली से ठीक पहले, राजीव ने सावित्री को जानवरों जैसी बर्बरता से पीटा और दो बार गर्भपात भी कराया। इसके साथ ही, उसने घर के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर सबूत मिटाने की कोशिश की। आखिर क्यों पीड़िता ने पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराई? सावित्री बर्मन ने बताया कि पति राजीव वर्मा ने आए दिन उसे डंडों और बेल्ट से पीटा। गंभीर चोट लगने के बावजूद उसे अस्पताल जाने नहीं दिया। पीड़िता ने कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। डर और चोट से जूझते हुए उसने आखिरकार 22 अक्टूबर को एसपी के पास जाकर पूरी कहानी बताई। क्या सच में पुलिसकर्मी ने पत्नी को बांधकर पीटा? सावित्री के अनुसार, दीपावली से एक दिन पहले ही राजीव ने उन्हें और उनके परिवार को धमकाया। घर में पूजन सामग्री नहीं थी और उसने पूजन के लिए सामान मांगने पर सावित्री को बेरहमी से पीटा। उसने गाल पर चांटे मारे, पीठ और कमर पर डंडों से हमला किया और पैरों में इतनी मार की कि चलना मुश्किल हो गया। सिर पर डंडा लगने से खून बहने लगा। दीपावली के एक दिन पहले डंडे से पीटा पीड़िता ने बताया- दीपावली के एक दिन पहले पति राजीव वर्मा, मेरी सास के साथ सतना शहर स्थित अपने घर जा रहे थे। घर में दीपावली के लिए न तो कोई पूजन सामग्री थी और न ही राशन। मैंने कहा कि मुझे भी अपने साथ सतना ले चलिए। भले फिर वहां से पन्ना अपने मायके चली जाऊंगी। यदि साथ नहीं ले जाना चाहते तो यहीं पर पूजन और खाने-पीने की सामग्री की व्यवस्था कर दो। इतना सुनते ही राजीव आगबबूला हो गया। उसने कहा कि इस घर में पूजा पाठ करना या मुझसे इस तरह की बात करना तेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। तूने इतनी बात करने की हिम्मत कैसे की। इतना कहकर मुझे पीटने लगा। पहले गाल पर चांटे मारे और फिर डंडे पीठ पर बरसाए। इसके बाद कमर पर ऐसे डंडे मारे, जैसे पुलिस किसी अपराधी को मारती है। पीड़िता बोली- धोखा देकर गर्भ को नष्ट कराया सावित्री बोली- राजीव आदमी के वेश में दरिंदा है। उसने मेरे पेट में पल रहे ढाई माह के गर्भ को भी नहीं छोड़ा। झूठ बोलकर गलत दवाइयां खिलाईं। मेरा गर्भ नष्ट करवा दिया। यह बात अभी अक्टूबर माह की ही है। इसके पहले भी जब शादी के कुछ महीनों बाद मैं गर्भवती हुई तो उसने इसी तरह धोखा देकर मेरे गर्भ को नष्ट करवा दिया था। एक औरत के लिए मां बनना बहुत बड़ी बात होती है, पर इसने मुझसे वह सम्मान भी दो बार छीन लिया। उसे लात भी मारनी होती थी तो पेट पर मारता था। इसे पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भले माफ कर दें, लेकिन भगवान कभी माफ नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, बाल खींचे और फिर पैरों में भी इतनी बुरी तरह मारा कि मैं चल तक न पाऊं। अचानक सिर पर डंडा मारा, जिससे सिर फट गया और खून की धार निकलने लगी। कुछ ही देर में मैं बेहोश हो गई। पति ने मुझे जिस तरीके से पीटा, वैसा सलूक तो कोई जानवर के साथ भी नहीं करता है। क्यों हुआ दो बार गर्भपात? सावित्री ने बताया कि राजीव ने दो बार धोखे से उसका गर्भपात करवाया। पहली बार जब शादी के कुछ महीने बाद वह गर्भवती हुई और दूसरी बार अभी अक्टूबर में। राजीव ने उसे गलत दवाइयां देकर गर्भ नष्ट करवा दिया। पीड़िता ने कहा, "एक औरत के लिए मां बनना बहुत बड़ी बात होती है, पर इसने मुझसे वह सम्मान भी दो बार छीन लिया।" CCTV फुटेज और खून से सने फ्लोर की कहानी राजीव ने घर में हॉल से लेकर कमरे तक सीसीटीवी कैमरे लगवाए, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सावित्री ने बताया कि मारपीट के समय फर्श खून से सना था। राजीव ने सीसीटीवी मेमोरी कार्ड निकालकर फुटेज डिलीट कर दिए और फर्श को साफ कर दिया। क्या पुलिस विभाग अब कार्रवाई करेगा? सावित्री ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद भी विभाग ने राजीव वर्मा के निलंबन या सेवा से पृथक करने का कोई आदेश नहीं दिया। पीड़िता का कहना है कि यदि वह पुलिसकर्मी नहीं होता, तो क्या यह सब होता? सावित्री ने डर के साथ कहा, "शायद कल मेरी हत्या के बाद ही पुलिस जागेगी,"  क्या डर से महिला ने शहर छोड़ दिया? सावित्री ने पुलिस में FIR दर्ज कराने के बाद डर के मारे रातों-रात पन्ना अपने मायके चली गई। उसने बताया कि राजीव धमकाते थे कि अगर शिकायत की तो परिवार को भी नुकसान होगा। कई दिनों तक उसे बंधक बनाकर भूखा रखा गया। क्या सावित्री को न्याय मिलेगा? सावित्री का कहना है कि राजीव ने शादी से पहले एक टीचर से शादी की थी और तलाक के बाद यह बात छिपाई। उसने धमकाया कि अगर वह शिकायत करेगी, तो परिवार को नुकसान होगा। पीड़िता अब पन्ना अपने मायके में सुरक्षित है। न्यायालय ने पहले भी उसके पक्ष में फैसला दिया था और उसे 7 हजार रुपए महीना खर्चा देने का आदेश दिया गया था। राजीव का पक्ष: क्या पत्नी ने भी कुछ गलत किया? राजीव वर्मा का दावा है कि सावित्री का पहले अफेयर था। उन्होंने कहा कि शादी के समय इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी गई। उनका आरोप है कि पत्नी उनके माता-पिता के साथ गलत व्यवहार करती थी। पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया एडिशनल SP आरती सिंह ने कहा कि मामले की विभागीय जांच जारी है, FIR दर्ज हो चुकी है। अभी तक राजीव वर्मा का निलंबन नहीं हुआ। सावित्री का कहना है कि विभाग शायद महिला को न्याय देने में गंभीर

मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो बंदी लापता, प्रशासन में मचा हड़कंप

अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो कैदियों के फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड में कैदी दिवाली की रात तीन बजे सुरक्षाकर्मियो को चकमा देकर फरार हो गए थे। इस मामले में जिले के एसपी ने नाराजगी जाहिर करते हुए बंदी की देखरेख में शामिल दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।   दरअसल, अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के जेल वार्ड से दो कैदी दीवाली के दिन फरार हो गए थे। यह घटना देर रात करीब तीन बजे की समीप की बताई जा रही थी, उस वक्त दोनों ने ही सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर भागने में कामयाब हो गए थे।  इस वारदात से जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

डॉ. रोहिणी का बड़ा बयान: समाज को दिखाएंगी सच्चाई, चंद्रशेखर ‘रावण’ को उजागर करने की तैयारी

इंदौर  उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण पर गंभीर आरोप लगाने वाली इंदौर की डॉ. रोहिणी घावरी ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए उन पर निशाना साधा है। गुरुवार को की गई दो अलग-अलग पोस्ट में रोहिणी ने दावा किया कि वह जल्द ही कुछ "सच्चाई" सबके सामने लाएंगी। उन्होंने अपनी पोस्ट में एक करोड़ रुपये के ईनाम की घोषणा करते हुए चैलेंज दिया है कि उनके द्वारा पेश किए जाने वाले सबूतों को कोई AI या फेक (फर्जी) साबित करके दिखाए। सोशल मीडिया पर दी खुली चुनौती डॉ. रोहिणी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कल जो सच्चाई मैं समाज को दिखाऊंगी, उसे AI या फेक साबित करने वाले को 1 करोड़ का इनाम। पूरी कोशिश कर लेना, लेकिन सच छुपा नहीं पाओगे। कल से उल्टी गिनती शुरू फर्जी नेता की।" अपनी एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि एक "गंदे आदमी" ने बहन मायावती और कांशीराम के पवित्र रिश्ते पर सवाल उठाए थे। रोहिणी पहले भी कई बार इन आरोपों को लेकर चंद्रशेखर आजाद को घेर चुकी हैं। "बसपा सुप्रीमो बनना चाहता था चंद्रशेखर" डॉ. रोहिणी ने स्पष्ट किया कि उनकी दोनों पोस्ट चंद्रशेखर आजाद रावण को लेकर ही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर, बहन मायावती के प्रति "गंदी सोच" रखता है और उसने मायावती व स्वर्गीय कांशीराम के रिश्ते पर कई बार अनर्गल टिप्पणियां की हैं। रोहिणी ने दावा किया, "वह (चंद्रशेखर) आजाद पार्टी का विलय बसपा में कर खुद बसपा सुप्रीमो बनना चाहता था। मेरे पास इसके वीडियो प्रूफ हैं। मैं जल्द ही लोगों के सामने रखूंगी।" तैयार कर रहीं 1000 महिलाओं की गैंग जनपावर मिशन की प्रमुख डॉ. रोहिणी घावरी ने यह भी बताया कि वह "धोखेबाजों से लड़ने और स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए" एक हजार महिलाओं की एक गैंग (समूह) तैयार कर रही हैं। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। पहले दे चुकी हैं सुसाइड की धमकी यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी ने सोशल मीडिया पर इस तरह की चेतावनी दी है। इससे पहले वह X (पूर्व में ट्विटर) पर सुसाइड की धमकी दे चुकी हैं। तब उन्होंने 4 घंटे के भीतर तीन पोस्ट किए थे, जिसमें एक पोस्ट में चंद्रशेखर, उनकी पत्नी और बच्चे की तस्वीर लगाकर उन्हें अपना जीवन बर्बाद करने का आरोपी बताया था और "जहर खाने" की बात कही थी। उस पोस्ट में उन्होंने पीएम मोदी और पीएमओ को टैग करते हुए लिखा था कि उनकी लाश भी भारत वापस न लाई जाए। क्या है पूरा विवाद? इंदौर के बीमा अस्पताल में काम करने वाली एक सफाईकर्मी की बेटी डॉ. रोहिणी घावरी 2019 में उच्च शिक्षा के लिए स्विट्जरलैंड गई थीं। पढ़ाई के दौरान वह चंद्रशेखर के संपर्क में आईं और दोनों कथित तौर पर तीन साल तक रिलेशनशिप में रहे। लगभग तीन महीने पहले रोहिणी ने सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में भी शिकायत दर्ज कराई थी। डॉ. रोहिणी घावरी वर्तमान में स्विट्जरलैंड में जॉब कर रही हैं और अपना एनजीओ भी चला रही हैं। 

पुलिस का झांसा देकर 1 लाख रुपये की डिमांड, पीड़िता ने बताया गांजा और देह व्यापार के झूठे आरोप

बेंगलुरु नेलमंगला के पास मंगलवार रात एक 27 वर्षीय महिला से गैंगरेप के मामले ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस ने इस घटना में शामिल तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी मिथुन सहित अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार पीड़िता पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और बेंगलुरु में पिछले छह महीनों से अपने पति और दो बेटों के साथ किराए के मकान में रह रही थी। वह शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों में ब्यूटीशियन का काम करती है। पीड़िता के साथ बंगाल की ही एक अन्य महिला और उसके पति का एक मित्र भी पास के मकान में रहते थे। मित्र असम का रहने वाला है। घटना के समय पीड़िता का पति काम पर गया हुआ था। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 21 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे पांच लोग खुद को स्थानीय पुलिस बताकर उसके घर में घुस आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वह और उसके परिचित लोग गांजा रखने और देह व्यापार में शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने 1 लाख रुपये की मांग की। पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने विरोध करने पर उसे और उसकी सहेली को क्रिकेट बैट और मछेटी (चाकू जैसी हथियार) से पीटा। उसकी सहेली बेहोश हो गई। आरोपियों ने उसके छोटे बेटे और पति के दोस्त को बांधकर बाथरूम में बंद कर दिया। इसके बाद तीन आरोपियों ने उसे पास के मकान में खींचकर गैंगरेप किया। उन्होंने घर से 25,000 रुपये कैश और दो मोबाइल फोन भी लूट लिए। उसी दौरान पीड़िता का बड़ा बेटा, जो बाहर था, उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर मदद मांगी। कुछ ही देर में एक होयसला पेट्रोलिंग वैन मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। पुलिस ने घायल पीड़िता को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं से उसने अपनी शिकायत दर्ज कराई। मदनायकनहल्ली पुलिस थाने ने मामला दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 (सामूहिक दुष्कर्म) सहित अन्य धाराओं में जांच शुरू की। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर जांच आगे बढ़ाते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। बुधवार रात को नवीन, कार्तिक और ग्लानी को गिरफ्तार किया गया, जबकि गुरुवार दोपहर तक सुयोग, जंगली पृथ्वी और सीना को भी हिरासत में ले लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्य आरोपी मिथुन घटना का मास्टरमाइंड है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मिथुन का पीड़िता से पुराना विवाद था और वह उसे “सबक सिखाने” की धमकी देता रहता था। उसी ने अपने साथियों को साथ लेकर पुलिस बनकर हमला करने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपियों ने दुष्कर्म किया जबकि दो अन्य ने पीड़िता से मारपीट कर लूटपाट की। सभी आरोपियों और पीड़िता के मेडिकल परीक्षण कराए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद घटना के और भी पहलू साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल, पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मुख्य आरोपी मिथुन की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।