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जोधपुर हाईकोर्ट से आसाराम को जमानत मंजूर, बीमारी का हवाला देकर मिली राहत

जोधपुर जोधपुर हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है। आसाराम बापू को जोधपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके उपचार के लिए दायर की गई नियमित जमानत याचिका को मंजूर करते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी है। यह राहत स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आसाराम को इलाज के लिए जमानत देने का फैसला सुनाया। देवदत्त और यशपाल ने रखा था कोर्ट के सामने पक्ष यौन उत्पीड़न के आरोपी आसाराम का मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। राजस्थान हाईकोर्ट से मिली छह माह की अंतरिम जमानत के बाद  अब आसाराम को छह माह जेल में नहीं रहना पड़ेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, अधिवक्ता यशपा लसिंह राजपुरोहित ने आसाराम का पक्ष कोर्ट के समक्ष रखा था। उन्होंने अपनी दलील में  कहा था कि उपचार के लिए आसाराम को जेल से बाहर रहना जरूरी है। ऐसे में बिना कस्टडी के जमानत मिलने से आसाराम के उपचार में राहत मिलेगी। कोर्ट ने आसाराम की बीमारी अवस्था व पिछले 12 साल से जेल में होने पर ये राहत प्रदान की है। समर्थकों में खुशी की लहर सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट का विस्तृत आदेश शीघ्र जारी किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आसाराम लंबे समय से बीमार चल रहे हैं और उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते नियमित जमानत की मांग की थी। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद आसाराम को राहत मिलने से समर्थकों में खुशी की लहर है।

भारत ने तोड़ी परंपरा: इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय कमीशन व परिषद के अध्यक्ष

नई दिल्ली अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में भारत दुनिया की एक सबसे ताकतवर हस्ती को आमंत्रित करने वाला है. इसमें न तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम है और न ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का. इसमें फ्रांस, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे सुपरपावर के हेड का भी नाम नहीं है. ये भी स्वाभाविक है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति का भी नाम नहीं ही है. ऐसे में ये ताकतवर हस्तिंयां कौन हैं. तो उनके नाम हैं- उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा. भारत पहली बार परंपरा से हटकर इन्हें आमंत्रित कर रहा है. लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं जबकि कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं. रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके पूरा होने पर नई दिल्ली और ब्रुसेल्स द्वारा जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी. भारत के नजरिये में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि आमंत्रण अत्यंत प्रतीकात्मक महत्व रखता है. नई दिल्ली रणनीति और आतिथ्य का संतुलन बनाते हुए मुख्य अतिथि का चयन करती है, जिसमें सामरिक-कूटनीतिक कारण, व्यापारिक हित और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस बार ईयू नेतृत्व को आमंत्रित करना भारत-ईयू संबंधों में तेजी से आए उभार का स्पष्ट संकेत है, विशेषकर फरवरी 2025 से जब ईयू के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने भारत का दौरा किया था. 27 सदस्यीय ईयू के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली प्रशासन की अनिश्चित नीतियों के बीच ईयू ने 20 अक्टूबर को एक नया सामरिक एजेंडा अपनाया, जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाने का संकल्प है. व्यापार समझौते पर वार्ता इसमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की चल रही वार्ताओं को अंतिम रूप देना, प्रौद्योगिकी, रक्षा-सुरक्षा और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करना शामिल है. जनवरी में ईयू नेताओं के भारत आने पर दिल्ली में ही भारत-ईयू लीडर्स समिट आयोजित होगा, जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में निर्धारित था. इससे दोनों पक्षों के वार्ताकारों पर दिसंबर तक एफटीए को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है – यह प्रतिबद्धता फरवरी में हुई आर्थिक साझेदारी बैठकों में ली गई थी. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में ईयू नेतृत्व की उपस्थिति न केवल कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करेगी. यह आमंत्रण भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है. ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता के बीच ईयू के साथ गठजोड़ भारत को व्यापार, निवेश और रक्षा प्रौद्योगिकी में नई संभावनाएं देगा. एफटीए पूरा होने पर भारत को ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके निर्यात को बढ़ावा देगी. साथ ही, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग से भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बल मिलेगा. जनवरी समिट में दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी चर्चा करेंगे. यह ऐतिहासिक आमंत्रण भारत-ईयू साझेदारी के नए युग की शुरुआत है. जब 26 जनवरी 2026 को राजपथ पर ईयू झंडा लहराएगा, तो यह न केवल राजनयिक सफलता होगी, बल्कि वैश्विक सहयोग की नई मिसाल भी कायम करेगा. दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग की यह यात्रा अब निर्णायक मोड़ पर है.  

एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम

गन्ना किसानों को योगी सरकार का बड़ा उपहार, गन्ना मूल्य ₹30 प्रति कुन्तल बढ़ा पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ना ₹400, सामान्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों को होगा ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं : लक्ष्मी नारायण चौधरी योगी सरकार में अब तक ₹2.90 लाख करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान, पिछली सरकारों से ₹1.42 लाख करोड़ अधिक प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलें, पारदर्शी नीतियों से उद्योग में आया ₹12,000 करोड़ निवेश 8 वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित, 6 पुनः शुरू, 42 में क्षमता विस्तार ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली ने खत्म किया बिचौलियों का राज, भुगतान सीधे किसानों के खातों में एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम लखनऊ योगी सरकार ने एक बार फिर गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति कुन्तल की वृद्धि की गई है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के अनुसार अब अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा।  मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि किसानों के परिश्रम का सम्मान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं। गन्ना हमारे ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था का आधार है और हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य सही समय पर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों को अब तक ₹2,90,225 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2007 से 2017 के बीच सपा और बसपा सरकारों में किसानों को कुल मात्र ₹1,47,346 करोड़ का भुगतान हुआ था। इस प्रकार सरकार ने मात्र साढ़े आठ वर्षों में पिछली सरकारों के मुकाबले ₹1,42,879 करोड़ अधिक भुगतान कर नया इतिहास रचा है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जहां 21 मिलें औने-पौने दामों पर बेची गई थीं, वहीं सरकार के पारदर्शी प्रबंधन और निवेशोन्मुख नीतियों से इस उद्योग में ₹12,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। पिछले आठ वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित की गईं, 6 बंद मिलें पुनः शुरू की गईं और 42 मिलों की उत्पादन क्षमता में विस्तार हुआ। इससे प्रदेश में 8 नई बड़ी मिलों के बराबर उत्पादन क्षमता में वृद्धि दर्ज हुई है। साथ ही, 2 मिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे गन्ना क्षेत्र में वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को भी बल मिला है। प्रदेश सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। इस प्रणाली को भारत सरकार ने 'मॉडल सिस्टम' घोषित किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है और आसवनियों की संख्या 61 से बढ़कर 97 हो गई है। गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर आ गया है।

खुशियों के त्यौहार में मातम: बिहार में छठ महापर्व पर 83 लोगों की हताहत

पटना बिहार के कई जिलों में छठ महापर्व की खुशियां मातम में बदल गईं। महापर्व के दौरान सोमवार और मंगलवार को पटना में नौ समेत राज्य में डूबने से 83 लोगों की मौत हो गई। इनमें अधिकतर की जान छठ घाट बनाते समय पैर फिसलने, नहाने या फिर अर्घ्य देते समय गहरे पानी में चले जाने से हुई है। मृतकों में दक्षिण बिहार से 34, कोसी-सीमांचल, पूर्वी बिहार के 30 और उत्तर बिहार के 19 लोग शामिल हैं। पटना जिले में गंगा स्नान के दौरान अलग-अलग स्थानों पर 15 लोग डूब गए जिनमें नौ की मौत हो गई। मोकामा में तीन, बाढ़ -बिहटा और खगौल में दो-दो की जान गई है। वहीं, मनेर में डूबे दो और अथमलगोला में एक युवक की तलाश जारी है। बाढ़ में तीन, खगौल में एक और गोपालपुर स्थित तालाब में डूबे युवक को बाहर निकाल एक घंटे सीपीआर देकर बचा लिया गया। वैशाली जिले के राघोपुर और महुआ में छठ घाट बनाने के बाद नहाने के दौरान डूबने से दो किशोर, महनार में एक छठव्रती, गोपालगंज जिले के भोरे थाने दुबे जिगना गांव में दो, औरंगाबाद दो, भोजपुर एक, बेगूसराय एक, नावानगर एक, रोहतास एक की मौत हो गई। छपरा में भी डूबने से एक की मौत हो गई। मोकामा में भाई की डूबने से मौत, सदमे में बहन ने भी दम तोड़ा पटना से सटे मोकामा में मरांची के बादपुर स्थित गंगा घाट पर मंगलवार सुबह करीब 6:30 गंगा स्नान के दौरान डूबने से रॉकी पासवान (21) की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही रॉकी की बहन सपना ने भी सदमे में दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार से कोहराम मच गया। बादपुर निवासी चूहा पासवान के पुत्र रॉकी गंगा में स्नान कर रहा था। तभी वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। स्थानीय गोताखोर और एसडीआरएफ टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद रॉकी पासवान का शव बरामद कर लिया। इस घटना की जानकारी जैसे ही सपना कुमारी को हुई। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल उसे मरांची स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। रॉकी पासवान ने हाल ही में होमगार्ड का फिजिकल टेस्ट निकाला था और परिवार में खुशी का माहौल था। बाढ़ में दिल का दौरा पड़ने से व्रती की मौत बाढ़ के जमुनीचक निवासी व्रती मुन्नी देवी (60) छठ पूजा के बाद गंगा घाट से लौटने के दौरान हार्ट अटैक आने से अचेत हो गई। परिजनों ने अनुमंडल अस्पताल में इलाज के लिए लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। मौत की जानकारी मिलने के बाद पुत्र और अन्य परिजन फूट-फूट कर रोने लगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में भरी शानदार उड़ान, अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर गार्ड ऑफ ऑनर

अंबाला  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरी. राष्ट्रपति सुबह 9.15 बजे स्पेशल विमान से अंबाला पहुंची थीं. यहां एयरफोर्स स्टेशन पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया. कैप्टन अमित गेहानी राफेल के पायलट: कैप्टन अमित गेहानी राष्ट्रपति को ले जाने वाले विमान के पायलट हैं. वो भारतीय वायु सेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन, "गोल्डन एरो" के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) भी हैं. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ने भी भरी उड़ान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विमान के साथ भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी एक अन्य राफेल विमान से उड़ान भरी. राष्ट्रपति को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर: अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर सबसे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की और एयरफोर्स स्टेशन की विभिन्न यूनिट्स का निरीक्षण किया. इसके अलावा राष्ट्रपति अधिकारियों से राफेल विमान की तकनीक, परिचालन प्रणाली और सुरक्षा रणनीति से जुड़ी जानकारी ली. अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन के आसपास की सुरक्षा कड़ी: कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करेंगी. राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए अंबाला प्रशासन और एयरफोर्स ने सुरक्षा कड़ी कर दी है. वायुसेना और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के इलाके को नो ड्रोन जोन घोषित किया गया है. नो ड्रोन जोन घोषित: अंबाला SP अजीत सिंह शेखावत ने बताया "सुरक्षा के लिए हर एरिया में पुलिस, एसपीजी और एयरफोर्स की टीमें तैनात की गई है. अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन और आसपास के इलाकों को नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है." बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान भारत ने फ्रांस से खरीदे हैं. 5 राफेल की पहली खेप 27 जुलाई 2020 को मिली थी. ये विमान सबसे पहले अंबाला एयरबेस पहुंचे थे.

जशपुर के फरसाबहार को मिली विकास की सौगात: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 40.89 करोड़ के 13 कार्यों का किया शुभारंभ

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के फरसाबहार में 40.89 करोड़ के 13 कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन 4.16 करोड़ लागत के 4 कार्यों का लोकार्पण और 36.72 करोड़ लागत के 9 विकासकार्यों का हुआ भूमिपूजन रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के फरसाबहार क्षेत्र के व्यापक विकास को नए आयाम देते हुए  40 करोड़ 89 लाख 26 हजार रुपए की लागत के 13 विकासकार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 4 करोड़ 16 लाख 41 हजार रुपए लागत के 4 विकासकार्यों का लोकार्पण और 36 करोड़ 72 लाख 85 हजार रुपए लागत के 9 विकासकार्यों का भूमिपूजन शामिल हैं।   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जिन विकासकार्यों का लोकार्पण किया उनमें 01 करोड़ 81 लाख 32 हजार रुपए लागत के मस्कामारा से होते हुए लवाकेरा मेन रोड तक मार्ग लं. 1.70 कि.मी., 01 करोड़ 29 लाख 56 हजार रुपए लागत के जिला जशपुर के अम्बाकछार पहुंच मार्ग लं. 1.00 कि.मी., 10 लाख रुपए लागत के आर सी.सी. पुलिया निर्माण, सिंहटोला दीपक घर से मेन रोड़ पहुंच मार्ग पर, ग्राम लावाकेरा और 95 लाख 53 हजार रूपए लागत के  जशपुर के मुण्डाडीह पहुच मार्ग लं. 0.90 कि.मी. का  निर्माण कार्य शामिल है।  इसी तरह उन्होंने 36 करोड़ 72 लाख 85 हजार रुपए लागत के जिन 9 विकासकार्यों का भूमिपूजन किया उनमें 31 लाख 38 हजार रूपए लागत के फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, 23 करोड़ 96 लाख 94 हजार रूपए लागत के पमशाला में सरईटोला पहुंच मार्ग लं. 11.50 कि.मी. का निर्माण कार्य, 01 करोड़ 72 लाख 55 हजार रुपए लागत के फरसाबहार में विश्रामगृह भवन का निर्माण कार्य, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास कोल्हेनझरिया का भवन निर्माण, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास फरसाबहार का भवन निर्माण, 01 करोड़ 52  लाख 97 हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास लवाकेरा का भवन निर्माण, 01 करोड़ 52 लाख 97  हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास पण्डरीपानी का भवन निर्माण, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास पंडरीपानी का भवन निर्माण कार्य और 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास तपकरा का भवन निर्माण कार्य शामिल है। इस अवसर पर सांसद  राधेश्याम राठिया, विधायक मती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव,पूर्व संसदीय सचिव  भरत साय, कलेक्टर  रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह,  विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: गौरव, श्रद्धा और भव्य आयोजन का प्रतीक उत्सव

गरिमा और भव्यता के साथ मनाई जाएगी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती गरिमा के साथ धूमधाम से मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन को भव्य और गरिमापूर्ण बनाने के लिए जनजातीय परम्पराओं के अनुरूप संसदीय क्षेत्रों में सामुदायिक रैलियां आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयोजन की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति एवं जनजाति कल्याण के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों को रेखांकित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के 150वें जयंती वर्ष के आयोजनों पर जनजातीय प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती सम्पतिया उईके, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती निर्मला भूरिया, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष  हेमंत खण्डेलवाल सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री मती सावित्री ठाकुर और  जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उईके बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकासखण्डवार यात्राएं निकालने, महानायकों के जीवन और योगदान पर जिला स्तरीय संगोष्ठियां और सम्मेलन आयोजित करने, खेल प्रतियोगिताएं, ढोल- मादल एवं बांसुरी प्रतियोगिताएं आयोजित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले जनजातीय युवाओं को सम्मानित भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन, हस्तशिल्प की प्रदर्शनी तथा लोक कलाओं पर केन्द्रित गतिविधियों का आयोजन किया जाये। उन्होंने कहा कि जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में लगने वाले मेलों में भी स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित विषय-वस्तु का प्रदर्शन करने की योजना बनाई जाए। इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों की जानकारी जन-जन तक पहुंचायें। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव रखे। बैठक में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य  गुलशन बामरा, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार  राम तिवारी, आयुक्त आदिम जाति विकास  मन शुक्ला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

खेलों का उत्सव लौट आया: राजस्थान में 24 नवंबर से खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स

रायपुर : खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स राजस्थान में 24 नवंबर से 5 दिसम्बर तक केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि केआईयूजी ‘गौरव की दिशा में पहला कदम’ है पहली बार, बीच वॉलीबॉल, कैनोइंग और कयाकिंग, तथा साइक्लिंग (मेडल स्पोर्ट्स) और खो-खो (डेमोंस्ट्रेशन) पांचवीं खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का हिस्सा होंगे रायपुर पांचवें खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स राजस्थान के सात शहरों में 24 नवंबर से 5 दिसम्बर 2025 तक आयोजित होंगे। इसमें 23 मेडल स्पोर्ट्स और एक डेमोंस्ट्रेशन स्पोर्ट (खो-खो) में प्रतियोगिताएं होंगी। इसी साल कुछ समय पहले में बिहार में हुए खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तरह, यूनिवर्सिटी गेम्स भी राजस्थान के सात शहरों जयपुर, अजमेर, उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और भरतपुर में आयोजित होंगे। इस 12 दिनों के यूनिवर्सिटी आयोजन में 5,000 से अधिक एथलीटों के आने की उम्मीद है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का आयोजन भारतीय विश्वविद्यालय संघ के सहयोग से किया जाता है। केन्द्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ भारत के खेल मार्ग में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। दुनिया भर में विश्वविद्यालय, चैंपियनों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और केआईयूजी हमारे युवा एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का मंच प्रदान करता है। इन खेलों का राजस्थान संस्करण भारत के विस्तृत खेल परिदृश्य को उजागर करेगा और वैश्विक स्तर पर राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने की आकांक्षा रखने वालों के लिए पहला कदम साबित होगा। डॉ. मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न के तहत खेलो इंडिया पहल ने भागीदारी, प्रतिभा विकास और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाला एक ठोस पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है। राजस्थान में आयोजित होने वाले ये यूनिवर्सिटी गेम्स हजारों छात्रों को न केवल खेलों को पढ़ाई के समानांतर ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही प्रतियोगिता एवं सौहार्द्र के माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत भी करेंगे। केआईयूजी-2025 में 23 मेडल स्पोर्ट्स और एक डेमोंस्ट्रेशन श्रेणी के स्पोर्ट्स होंगे। मेडल स्पोर्ट्स में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, फेंसिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, मल्लखंब, रग्बी, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, टेनिस, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, योगासन, साइक्लिंग, बीच वॉलीबॉल, कैनोइंग और कयाकिंग शामिल हैं। खो-खो एक डेमोंस्ट्रेशन इवेंट होगा। पहली बार केआईयूजी कार्यक्रम में कैनोइंग, बीच वॉलीबॉल, और कयाकिंग तथा साइक्लिंग को शामिल किया जा रहा है। पूर्वाेत्तर भारत में आयोजित हुए पिछले खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी चैंपियन बनी। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया था। खेलो इंडिया के विषय में  खेलो इंडिया योजना युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। खेलो इंडिया गेम्स खेल कौशल प्रदर्शन का आधारभूत मंच हैं, जो प्रतिभा की पहचान करने और प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्टता हासिल करने हेतु एक विकास का मार्ग प्रदान करने का प्लेटफॉर्म बनते हैं। ये राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं ओलंपिक आंदोलन की सच्ची भावना में आयोजित की जा रही हैं, जिसमें संबंधित एनएसएफ, एसजीएफआई, एआईयू आदि जैसे विभिन्न हितधारकों को शामिल किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक देश भर में 20 संस्करणों का आयोजन हो चुका है, जिसमें 7 संस्करण खेलो इंडिया यूथ गेम्स (केआईव्हायजी), 4 संस्करण खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआईयूजी), 5 संस्करण खेलो इंडिया विंटर गेम्स (केआईव्हीजी), 2 संस्करण खेलो इंडिया पैरा गेम्स (केआईपीजी), 1 संस्करण खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी), और 1 संस्करण खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल (केआईडब्ल्यूएसएफ) शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने लिया संज्ञान; बी.पी.एल. मरीजों के लिए नि:शुल्क जांच, अन्य मरीजों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम दर पर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश

रायपुर डॉ.  भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में आने वाले मरीजों को सीटी स्कैन एवं एमआरआई जांच में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस विषय में स्वतः संज्ञान लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मरीज हित में फैसला लेते हुए आगामी सामान्य परिषद् की बैठक तक के लिए चिकित्सालयों में आने वाले बी.पी.एल. राशनकार्डधारी ओपीडी मरीजों को निःशुल्क सीटी स्कैन एवं एमआरआई जांच सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, ऐसे अन्य ओपीडी मरीज जो बी.पी.एल. श्रेणी में नहीं आते हैं, उन्हें शासन/विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम दरों पर यह जांच सुविधा प्राप्त होगी।   अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री का यह निर्णय ओपीडी स्तर पर जांच सुविधाओं को सुलभ एवं किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा है कि – इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हुए किसी भी मरीज को जांच सुविधा में असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाये। विदित हो कि प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में सीटी स्कैन – एमआरआई जांच की अत्याधुनिक मशीनें स्थापित हैं जिसके कारण प्रतिदिन यहां पर काफी संख्या में मरीज इन मशीनों से जांच सुविधा का लाभ उठाने आते हैं परंतु विगत कुछ दिनों से आयुष्मान योजना पोर्टल के जरिए ओपीडी में इन जांचों हेतु ब्लॉकिंग सुविधा में दिक्कत आ रही थी जिसे देखते हुए माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने लोकहित में निर्णय लेते हुए गरीब मरीजों की जांच निशुल्क करने हेतु दिशा- निर्देश जारी किए हैं।

डिजिटल बोर्ड से शिक्षिका ने उपमुख्यमंत्री को पढ़ाई हृदय की संरचना एवं बैटरी की कार्यप्रणाली

रायपुर : बच्चों के संग विद्यार्थी बने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा डिजिटल बोर्ड से शिक्षिका ने उपमुख्यमंत्री को पढ़ाई हृदय की संरचना एवं बैटरी की कार्यप्रणाली डिजिटल बोर्ड एवं इंटरएक्टिव लर्निंग से बच्चों को विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों को समझने में होगी आसानी- उपमुख्यमंत्री शर्मा रायपुर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के ग्राम बिरकोना स्थित उच्चतर माध्यमिक शाला से कवर्धा विकासखंड के अंतर्गत संचालित 17 शासकीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम सुविधा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्मार्ट कक्षाओं का स्कूली बच्चों के साथ रिबन काटकर शुभारम्भ किया। इस कार्यक्रम में कवर्धा विकासखण्ड के सभी स्कूल जहां स्मार्ट कक्षाओं की शुरुआत हो रही है वहां के बच्चे वर्चुअल माध्यम से सीधे जुड़े। इस अवसर पर सभी शिक्षा के डिजिटलीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के साक्षी बने। इस दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा स्मार्ट क्लास में जाकर बच्चों के साथ बैठकर खुद भी विद्यार्थी बन गए। उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर आदर्श विद्यार्थी की तरह डिजिटल बोर्ड के माध्यम से हृदय की संरचना, पौधों में पादप हार्मोन एवं इलेक्ट्रो केमिस्ट्री में बैटरी की कार्यप्रणाली के बारे में डिजिटल बोर्ड द्वारा जानकारी प्राप्त की। उन्होंने शिक्षकों के साथ डिजिटल कक्षा के संचालन, उपयोग एवं कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्वयं भी स्मार्ट बोर्ड संचालित कर इसकी उपयोगिता को परखा। उन्होंने इस पहल को जिले में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के सुव्यवस्थित विस्तार की दिशा में अभूतपूर्व कदम बताया। उन्होंने बच्चों से सीधा संवाद भी किया। बच्चों के संग विद्यार्थी बने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह परियोजना केवल उपकरण या तकनीक की उपलब्धता नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा संस्कृति में परिवर्तन की पहल है। जहाँ मल्टी-डायमेंशनल कंटेंट, थ्री-डी विसुअलाइजेशन और इंटरैक्टिव लर्निंग के माध्यम से विज्ञान एवं गणित जैसे कठिन से कठिन विषय भी विद्यार्थियों के लिए आकर्षक और सरल बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में कवर्धा विकासखंड के 17 स्कूलों में यह सुविधा शुरू की गई है, जबकि एचडीएफसी के सीएसआर मद से शेष 33 विद्यालयों को भी जोड़कर कुल 50 स्कूलों तक इसका विस्तार किया जाएगा तथा आगे कुल 74 विद्यालयों को भी स्मार्ट क्लास के रूप में सुसज्जित करने का लक्ष्य किया गया है। इससे विद्यार्थियों की विषय को लेकर आधातभूत समझ भी बढ़ेगी तथा परीक्षाओं में परिणाम भी बेहतर होंगे। इससे विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी तकनीकी शिक्षा से जुड़ सकेंगे। उपमुख्यमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय विषयवार साप्ताहिक शैक्षणिक शेड्यूल तैयार करें, डिजिटल वीडियो लाइब्रेरी विकसित की जाए और एक स्कूल को दूसरे स्कूल से जोड़कर ज्ञान एवं अनुभव विनिमय तंत्र तैयार किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को सतत, प्रतिस्पर्धात्मक एवं सहयोगात्मक समझ का वातावरण प्राप्त होगा। उन्होंने आगे कहा कि सफलता के लिए किसी प्रकार का शॉर्टकट नहीं होता। कठोर परिश्रम ही एकमात्र विश्वसनीय मार्ग है। सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस ही सच्चे शिक्षित होने का प्रमाण है। उन्होंने समाज में बढ़ते नशे के खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि कि जिले के 44 विद्यालयों में शेड निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा विद्यार्थियों के मानसिक एवं व्यवहारिक सुदृढ़ीकरण के लिए वरिष्ठ प्रबुद्धजनों की काउंसलिंग योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए एक समग्र शैक्षणिक अभियान के रूप में विकसित की जाएगी। इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण भी किया। इसके साथ ही सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को सम्मानित करते हुए उनके बच्चों की शिक्षा में किये गए अतुलनीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें आगामी जीवन के स्वस्थ एवं सुखी होने की शुभकामनाएं भी दी।